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The majestic Mahatma Mandir taking form at the state capital here is set to become a source of inspiration for word peace and global welfare, Gujarat's Chief Minister Shri Narmadabhai Modi said here today.

Addressing the sarpanchs who had assembled here from about 2,000 villages far and near, he said that Mahatma Gandhi belonged to the world, and for all time to come. The project taken up during the state's golden jubilee year is to make the Mahatma's messages and his quest for truth immemorial.

He said the 'abhishek' of the Mandir with the water and soil in 'kalash' brought from all the villages and towns of Gujarat symbolized the willpower and capacity of the people to build a new Gujarat. Today was the sixth day of the 'abhishek'.

Shri Modi exuded confidence that every village and town of the state are in for a facelift, and they would make long strides and break new records in various fields of development.

Speaking on the occasion, Social Justice and Empowerment Minister Shri Fakirbhai Vaghela said Gujaratis living in other states and abroad would also come forward with 'kalash' full of soil and water of respective places, to give it a truly global touch. He gave details of various state government schemes under implementation such as Mahakumbh, Garib Kalyan Mela, Swarnm Gujarat and Krishi Mahotsav, to cover all sections of the society.

Panchayat and Rural Development Minister Shri Narottam Patel said the Mahatma Mandir is not just a state government project, but also represent people's participation. He regretted that some vested interests continue to criticize the state's development despite the state making big leaps.

Prominent among those present at today's 'abhishek' included Ministers of State Shri Saurabhbhai Patel, Shri Parbatbhai Patel, Shri Kiritsinh Rana, Golden Jubilee Celebration Committee Chairman Shri I.K. Jadeja, besides senior officers.

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Text of PM’s Address at the 95th Meeting of AIU and National Seminar of Vice Chancellors
April 14, 2021
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Baba Saheb Ambedkar had a universal vision: PM Modi
Baba Saheb Ambedkar gave a strong foundation to independent India so the nation could move forward while strengthening its democratic heritage: PM
We have to give opportunities to the youth according to their potential. Our efforts towards this is the only tribute to Baba Saheb Ambedkar: PM

नमस्‍कार,

कार्यक्रम में मेरे साथ उपस्थित गुजरात के राज्यपाल आचार्य श्रीदेवव्रत जी, देश के शिक्षामंत्री श्री रमेश पोखरियाल निशंक जी, गुजरात के मुख्यमंत्री श्री विजय रूपाणी जी, गुजरात के शिक्षामंत्री श्री भूपेन्द्र सिंह जी,UGC के चेयरमैन प्रोफेसर डीपी सिंह जी, बाबा साहेब अंबेडकर openuniversity की वाइस चान्सलर प्रोफेसर अमी उपाध्याय जी,Association of Indian Universities-AIU के प्रेसिडेंट प्रोफेसर तेजप्रताप जी, सभी उपस्थित महानुभाव और साथियों!

आज जब देश आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है, तो उसी कालखंड में बाबा साहेब आंबेडकर जी की जन्मजयंती का अवसर, हमें उस महान यज्ञ से भी जोड़ता है और भविष्य की प्रेरणा से भी जोड़ता है।मैं कृतज्ञ राष्ट्र की तरफ से, सभी देशवासियों की तरफ से, बाबा साहेब को आदरपूर्वक श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।

साथियों,

आज़ादी की लड़ाई में हमारे लाखों-करोड़ों स्वाधीनता सेनानियों ने समरस-समावेशी भारत का सपना देखा था। उन सपनों को पूरा करने की शुरुआत बाबा साहेब ने देश को संविधान देकर की थी।आज उसी संविधान पर चलकर भारत एक नया भविष्य गढ़ रहा है, सफलता के नए आयाम हासिल कर रहा है।

साथियों,

आज इस पवित्र दिन, Association of Indian Universities केवाइस चांसलर्स की 95thमीटिंग भी हो रही है।बाबा साहेब आंबेडकर openuniversity में ‘बाबा साहेब समरसता चेयर’ की स्थापना की घोषणा भी हुई है।अभी, बाबा साहेब के जीवन पर, उनके विचारों और आदर्शों पर भाई श्री किशोर मकवाना जी की 4 पुस्तकोंका लोकार्पण भी हुआ है।मैं इन प्रयासों से जुड़े सभी महानुभावों को बधाई देता हूँ।

साथियों,

भारत दुनिया में Mother of democracy रहा है। Democracy हमारी सभ्यता, हमारे तौर तरीकों का, एक प्रकार से हमारी जीवन पद्धति का एक सहज हिस्सा रही है।आज़ादी के बाद का भारत अपनी उसी लोकतान्त्रिक विरासत को मजबूत करके आगे बढ़े, बाबा साहेब ने इसका मजबूत आधार देश को दिया।बाबा साहेब को जब हम पढ़ते हैं, समझते हैं, तो हमें अहसास होता है कि वो एक universal vision के व्यक्ति थे।

श्री किशोर मकवाना जी की किताबों में बाबा साहेब के इस vision के स्पष्ट दर्शन होते हैं।उनकी एक पुस्तक बाबा साहेब के ‘जीवन दर्शन’ से परिचित कराती है, दूसरी किताब उनके व्यक्ति दर्शन पर केन्द्रित है।इसी तरह, तीसरी किताब में बाबा साहेब का ‘राष्ट्र दर्शन’ हमारे सामने आता है, और चौथी किताब उनके ‘आयाम दर्शन’ को देशवासियों तक ले जाएगी।ये चारों दर्शन अपने आप में किसी आधुनिक शास्त्र से कम नहीं।

मैं चाहूंगा कि देश के विश्वविद्यालयों में, कॉलेजों में हमारी नई पीढ़ी, ज्यादा से ज्यादा इन पुस्तकों को और इन जैसी कई पुस्‍तकों को भी पढ़ें।समरस समाज की बात हो, दलित-वंचित समाज के अधिकारों की चिंता हो, महिलाओं के उत्थान और योगदान का प्रश्न हो, शिक्षा पर और विशेषकर उच्च शिक्षा पर बाबा साहेब का vision हो, इन सभी आयामों से देश के युवाओं को बाबा साहेब को जानने समझने का अवसर मिलेगा।

साथियों,

डॉक्टरअम्बेडकर कहते थे-

“मेरे तीन उपास्य देवता हैं। ज्ञान, स्वाभिमान और शील”। यानी,Knowledge,Self-respect, और politeness. जब Knowledge आती है, तब ही Self-respect भी बढ़ती है। Self-respect से व्यक्ति अपने अधिकार, अपने rights के लिए aware होता है। और Equal rights से ही समाज में समरसता आती है, और देश प्रगति करता है।

हम सभी बाबा साहेब के जीवन संघर्ष से परिचित हैं। इतने संघर्षों के बाद भी बाबा साहेब जिस ऊंचाई पर पहुंचे, वो हम सभी के लिए बहुत बड़ी प्रेरणा है। बाबा साहेब अम्‍बेडकर हमें जो मार्ग दिखाकर गए हैं, उस पर देश निरंतर चले, इसकी ज़िम्मेदारी हमारी शिक्षा व्यवस्था पर, हमारे विश्वविद्यालयों पर हमेशा रही है। और जब प्रश्न एक राष्ट्र के रूप में साझा लक्ष्यों का हो, साझा प्रयासों का हो, तो सामूहिक प्रयास ही सिद्धि का माध्यम बनते हैं।

इसीलिए, मैं समझता हूं, इसमें Association of Indian Universities की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। AIU के पास तो डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी, डॉक्टर श्यामाप्रसाद मुखर्जी, श्रीमती हंसा मेहता, डॉक्टर जाकिर हुसैन जैसे विद्वानों की भी विरासत है।

डॉक्टर राधाकृष्णन जी कहते थे- “The end-product of education should be a free creativeman, who can battle against historical circumstancesand adversitiesof nature”.

तात्पर्य ये कि शिक्षा वो हो, जो व्यक्ति को मुक्त करे, वो खुलकर सोचे, नई सोच के साथ नया निर्माण करे। उनका मानना था कि हमें अपना Education Management, पूरे World को एक unit मानकर विकसित करना चाहिए। लेकिन साथ ही वो Education के Indiancharacter पर, भारतीय चरित्र पर भी उतना ही बल देते थे।आज के Global Scenarioमें ये बात और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।

अभी यहाँ पर नई ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति’ और उसके Implementation Plan पर Special Issues Release किए गए।ये Issues इस बात के detailed documents हैं कि कैसे National Education Policy एक FuturisticPolicy है,global parameters की policy है।आप सभी विद्वतजन, National Education Policy की बारीकियों से परिचित हैं।डॉ राधाकृष्णन जी ने Education के जिस Purpose की बात कही थी, वही इस पॉलिसी के core में दिखता है।

मुझे बताया गया है कि इस बार आपने सेमिनार की थीम भी यही रखी है- 'Implementing National Educational Policy-2020 to Transform Higher Education in India'.इसके लिए आप सब बधाई के पात्र हैं।

मैं NEP को लेकर लगातार विशेषज्ञों से चर्चा करता रहा हूँ। National Education Policy जितनी practical है, उतना ही Practical इसका Implementation भी है।

साथियों,

आपने अपना पूरा जीवन शिक्षा को ही समर्पित किया है।आप सब भलीभाँति जानते हैं कि हर स्टूडेंट का अपना एक सामर्थ्य होता है, क्षमता होती है।इन्हीं क्षमताओं के आधार पर स्टूडेंट्स और टीचर्स के सामने तीन सवाल भी होते हैं।

पहला- वो क्या कर सकते हैं?

दूसरा- अगर उन्हें सिखाया जाए, तो वो क्या कर सकते हैं?

और तीसरा- वो क्या करना चाहते हैं?

एक स्टूडेंट क्या कर सकता है, ये उसकी Inner Strength है।लेकिन अगर हम उनकी Inner Strength के साथ-साथ उन्हें Institutional Strength दे दें, तो इससे उनका विकास व्यापक हो जाता है।इस Combination से हमारे युवा वो कर सकते हैं, जो वो करना चाहते हैं।इसीलिए, आज देश का खास ज़ोर Skill Development को लेकर है।आज जैसे जैसे देश ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को लेकर आगे बढ़ रहा है,Skilled युवाओं की भूमिका और उनकी demand भी बढ़ती जा रही है।

साथियों,

डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने Skills की इसी ताकत को देखते हुए, दशकों पहले शिक्षण संस्थानों और उद्योगों के Collaboration पर बहुत ज़ोर दिया था।आज तो देश के पास और भी असीम अवसर हैं, और भी आधुनिक दौर के नए-नए उद्योग हैं। Artificial Intelligence, Internet of Things और Big Data से लेकर3D Printing, Virtual Reality, Robotics, Mobile technology, Geo-informatics और Smart Healthcare से defence sector तक, आज दुनिया में भारत future centreके रूप में देखा जा रहा है। इन जरूरतों को पूरा करने के लिए देश लगातार बड़े कदम भी उठा रहा है।

देश के तीन बड़े शहरों में Indian Institutes of Skills की स्थापना की जा रही है। कुछ महीने पहले दिसम्बर में ही Indian Institutes of Skillsका मुंबई में पहला बैच भी शुरू हो गया है। नैस्कॉम के साथ भी 2018 में FutureSkillsinitiative शुरू किया है। ये Initiative 10 Emerging Technologies में डेढ़ सौ से ज्यादा skill sets की training देता है।

साथियों,

नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में, NETF का भी प्रावधान है। जो शिक्षा में टेक्नोलॉजी के ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल पर जोर देता है।हम ये चाहते हैं कि सारी यूनिवर्सिटीज मल्टी-डिसिप्लीनरी बनें।हम स्टूडेंट्स को flexibility देना चाहते हैं।जैसे Easy entry-exit और Academic Bank Of Credit बनाकर आसानी से कहीं भी कोर्स पूरा करना।इन सभी लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए देश की हर यूनिवर्सिटी को साथ मिलकर, एक दूसरे से तालमेल बिठाकर काम करना ही होगा। इस पर आप सभी वाइस चांसलर्स को विशेष ध्यान देना होगा।

देश में जो नई नई संभावनाएं हैं, जिन क्षेत्रों में हम संभावनाएं पैदा कर सकते हैं, उनके लिए एक बड़ा skill pool हमारी universities में ही तैयार होगा। आप सभी से आग्रह है कि इस दिशा में और तेजी से काम हो, एक तय समय के भीतर उस काम को समाप्त किया जाए।

साथियों,

बाबा साहेब अंबेडकर के कदमों पर चलते हुए देश तेजी से गरीब, दलित, पीड़ित, शोषित, वंचित, सभी के जीवन में बदलाव ला रहा है। बाबा साहेब ने समान अवसरों की बात की थी, समान अधिकारों की बात की थी। आज देश जनधन खातों के जरिए हर व्यक्ति का आर्थिक समावेश कर रहा है। DBT के जरिए गरीब का पैसा सीधा उसके खाते में पहुँच रहा है। Digital Economy के लिए जिस BHIM UPI को शुरू किया गया था, आज वो गरीब की बहुत बड़ी ताकत बना है। DBT के जरिए गरीब का पैसा सीधा उसके खाते में पहुँच रहा है। आज हर गरीब को, घर मिल रहा है, मुफ्त बिजली कनेक्शन मिल रहा है। उसी प्रकार से जल-जीवन मिशन के तहत गाँव में भी साफ पानी पहुंचाने के लिए एक भरपूर मिशन मोड में काम हो रहा है।

कोरोना का संकट आया तो भी देश गरीब, मजदूर के लिए सबसे पहले खड़ा हुआ। दुनिया के सबसे बड़े वैक्सीनेशन प्रोग्राम में भी गरीब अमीर के आधार पर कोई भेदभाव नहीं है, कोई अंतर नहीं है! यही तो बाबा साहेब का रास्ता है, यही तो उनके आदर्श हैं।

साथियों,

बाबा साहेब‍ हमेशा महिला सशक्तिकरण पर बल देते थे और इस‍ दिशा में उन्‍होंने अनेक प्रयास किए। उनके इसी विजन पर चलते हुए देश आज अपनी बेटियों को नए-नए अवसर दे रहा है।घर और स्कूल में शौचालय से लेकर सेना में युद्धक भूमिकाओं तक, देश की हर policy के केंद्रमें आज महिलाएं हैं।

इसी तरह बाबा साहेब के जीवन संदेश को जन जन तक पहुंचाने के लिए भी आज देश काम कर रहा है।बाबा साहेब से जुड़े स्थानों को पंच तीर्थ के रूप में विकसित किया जा रहा है।

कुछ साल पहले मुझे डॉक्टर अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर के लोकार्पण का अवसर मिला था।आज ये सेंटर सामाजिक और आर्थिक विषयों पर, बाबा साहेब के जीवन पर रिसर्च के एक केंद्र के रूप में उभर रहा है।

साथियों,

आज हम आज़ादी के 75 साल के करीब हैं, और अगले 25 सालों के लक्ष्य हमारे सामने हैं।देश का ये भविष्य, भविष्य के लक्ष्य और सफलताएं हमारे युवाओं से जुड़े हुये हैं। हमारे युवा ही इन संकल्पों को पूरा करेंगे।हमें देश के युवाओं को वो उनकी सामर्थ्य के हिसाब से अवसर देने हैं।

मुझे पूरा भरोसा है कि हम सबके ये सामूहिक संकल्प, हमारे शिक्षा जगत के ये जाग्रत प्रयास नए भारत के इस सपने को जरूर पूरा करेंगे।

हमारे ये प्रयास, ये परिश्रम ही बाबा साहेब के चरणों में हमारी श्रद्धांजलि होगी।

इन्हीं शुभकामनाओं के साथ,मैं फिर एक बार आप सबको बहुत बहुत धन्यवाद देता हूं, नवरात्रि की शुभकामनाएं देता हूं। आज बाबा साहेब अम्‍बेडकर की जन्‍म-जयंती पर विशेष रूप से शुभकामनाएं देता हूं।

बहुत-बहुत धन्‍यवाद