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Government is working for a healthy India: PM Modi
Initiatives like Pradhan Mantri Surakshit Matritva Abhiyaan and Mission Indradhanush are playing a vital role in the decline in the mortality rate: PM
Ayushman Bharat Scheme will create an entirely new ecosystem which helps to create healthier India: PM Modi

गुजरात के लोकप्रिय मुख्यमंत्री श्री विजयभाई, मंत्रिमंडल के साथी भाई किशोरभाई, संसद के हमारे साथी सी.आर. पाटिल, जरदोश बहन, मंच पर उपस्थित सभी महानुभाव, सेवंतीभाई के परिवारजन, और मेरे लिए यह सौभाग्य की बात है की बहुत कम समय में मुझे गुजरात में दो आधुनिक हॉस्पिटल का उद्घाटन करने का सौभाग्य मिला।

अहमदाबाद में वी.एस. हॉस्पिटल के साथ में सरदार वल्लभभाई पटेल के नाम से एक अत्यंत आधुनिक अस्पताल का निर्माण हुआ है और जब से हमारे सेवंतीभाई ने यह कारोबार संभाला है और सेवंतीभाई का ऐसा है की वो चल रहे हैं… कुछ पता ही नहीं चलता। जितने साल से मैं उनको देख रहा हूँ उनमे एक ग्राम के वजन का भी फर्क नही पड़ा और उनके जीवन में मूल्यों की विशेषता है। जब मैं मुख्यमंत्री था और विदेश में डेलिगेशन जाते हो तो उसमे मेरा आग्रह रहता था की सेवंतीभाई अगर साथ में रहे तो अच्छा और आते भी थे कई बार, लेकिन एक भी नियम में कभी भी समझौता नहीं करते, मूल्यों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता है।

कुछ दिन पहले सेवंतीभाई, उनके परिवारजन सभी दिल्ली आए थे और बहुत विस्तार से उन्होंने पूरे प्रोजेक्ट के बारे में बात की और उनका परिवार अब किस तरह से इसमें डूब चूका है और भविष्य की उनकी क्या योजनाएं है। उनका आग्रह था की मैं इस हॉस्पिटल में अवश्य आऊं। सेवंतीभाई के साथ का संबंध इतना पुराना है, इसलिए हम मना नही कर सकते। तो एक परिवार भाव की वजह से, आत्मीयता की वजह से, और मन में हमेशा आदर रहा है उनके लिए, उनके परिवारजनों के लिए।

व्यापार जगत, व्यावसायिक जगत में किसी भी प्रकार के मूल्यों में समझौता किए बिना व्यापार रोजगार भी अच्छे से हो सकता है, सेवा भी अच्छे से की जा सकती है, और समग्र परिवार को साथ में रखा भी जा सकता है– ये सारी चीजें सेवंतीभाई के पास से देखने को मिलती हैं।

अस्पताल मैंने देखा, मुझे यह कहना पड़ेगा की सिर्फ सूरत को ही नही, पूरे गुजरात को आरोग्य क्षेत्र में एक नया नज़ारा मिला है। अभी तक उन्होंने पत्‍थर चमकाए, डायमन्ड बनाए और अब उनका मन नर सेवा, नारायण सेवा और हमारे यहाँ मंत्र है “सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद्दुःखभाग्भवेत्” इस भाव के साथ उन्होंने यह एक नई शुरुआत की है, मेरी तरफ से उनको अनेक अनेक शुभकामनाएँ हैं।

यह बात निश्चित है की किसी भी राष्ट्र की प्रगति में उनके नागरिकों का जीवन, चाहे वो शिक्षित हों, या स्वस्‍थ हों या उनकी क्षमता हो, उनका स्किल हो, उसके उपर निर्भर करता है। हमारा देश भी स्वस्थ बने, हमारा आने वाला कल स्वस्थ बने उसके लिए व्यापक योजनाएं लेकर के वर्तमान समय में भारत सरकार काम कर रही है। जन्म से लेकर बुढ़ापे तक हर कदम पर स्वास्थ्य के क्षेत्र में भारत सरकार का, राज्य सरकार का दखल है। कहीं न कहीं उसे सहायता देने की कोशिश है। व्यवस्था, सुविधा पहुँचाने का प्रयास है। प्रसूता माता.. श्रेष्ठ बच्चे के जन्म के लिए भी यह जरुरी है की माता स्वस्थ हो और पोषक आहार के लिए छ हजार रूपये इस गरीब गर्भवती माता को देने की व्यवस्था, ये जो बहुत बड़ा शिशु मृत्युदर और माता मृत्युदर को कम करने में सहायक बना है।

इतना ही नही, स्वस्थ मातृत्व योजना, उसके माध्यम से भी इंस्टिट्यूशनल डिलीवरी, क्योंकि हमारे यहाँ दाई और गाँव में जिस तरह चलता था उसमें कभी बच्चा मर जाता था, कभी माता मर जाती थी, और कभी माता और बच्चा दोनों ही की मृत्यु हो जाती थी। लेकिन अब इंस्टिट्यूशनल डिलीवरी की वजह से, हॉस्पिटल डिलीवरी की वजह से, अब इसकी संख्या भी घटती जा रही है और तुलना में मृत बालकों की संख्या भी कम होती जा रही है, स्वस्थ बच्चों के जन्म हो रहे हैं।

बच्चे के जन्म के बाद का सबसे बड़ा कार्य है टीकाकरण। टीकाकरण पहले भी होते थे और हमारी सरकार में भी हो रहे हैं। ऐसा नही है की टीकाकरण हमने ही शुरू किआ है। ये तो श्रेयांसभाई को देखा इसलिए मुझे याद आया। लेकिन पहले टीकाकरण का जो दर हुआ करता था वो अत्यंत चिंताजनक हुआ करता था, बजट खर्च होता था, लोगों के टीए-डीए होते थे लेकिन टिकाकरण होता ही नहीं था। हमने एक इंद्रधनुष योजना बनाई और एक बहुत बड़ा कम्‍पेन चलाया और ज्यादा से ज्यादा मातओं बहनों को इंद्रधनुष का लाभ मिले और पहले की तुलना में कई गुना टीकाकरण का काम व्यापक बना दिया है और जिसकी वजह से संतान और माता उनके भविष्य में कोई नई तकलीफें न हो उसके लिए एक रक्षात्‍मक व्यवस्था तैयार होती है।

जिस प्रकार हेल्थकेयर की व्यवस्था की आवश्यकता है उसी तरह प्रिवेन्टिव हेल्‍थकेयर भी उतना ही जरुरी है और प्रिवेन्टिव हेल्थकेयर में स्वच्छ भारत अभियान जो चलाया है, सैनिटेशन. मुझे याद है जिस दिन मैंने लाल किला पर से प्रधानमंत्री बनने के बाद सबसे पहले स्वच्छता की बात की थी तो कई लोगों ने मजाक उड़ाई थी की ये कैसा प्रधानमंत्री है। लाल किले पर से शौचालय बनाने की बात करता है। लेकिन आज, जब हम सरकार में आए तब देश में 38% कवरेज था और आज 98% तक पहुँच चुका है।

आप कल्पना कर सकते हैं। ये माताए बहनें कितना आशीर्वाद देती होंगी जिनको शौचालय के लिए सूरज उगने से पहले या फिर सूरज ढलने के बाद जाने के लिए राह देखनी पडती थी। उनको कितनी तकलीफ होती होगी। लेकिन यह सारी चीजें एक के बाद एक.. हेल्थकेर के क्षेत्र में..। कई लोगों को योग का मजाक उड़ाने में बड़ा मज़ा आया, कई टिकाएं भी की, कई प्रकार की चीज़ें बोलीं, लेकिन आज वेलनेस के लिए योग के महात्म्य को न सिर्फ भारत लेकिन दुनिया ने भी स्वीकार किया है। समग्र विश्व, यानि केवल हॉस्पिटल और दवा के डोज़, ऑपरेशन उतनी ही व्यवस्थाएं नही अपितु प्रिवेन्टिव की दृष्टि से भी क्या किया जा सकता है, उस दिशा में हम आगे बढे हैं । अभी भारत ने आयुष्मान भारत योजना बनाई है, और जिस दिन आयुष्मान भारत की योजना हुई थी, अगर आप उस दिन का गुजरात समाचार निकाल कर देखेंगे, दूसरे अख़बार भी देख सकते हो, टीवी भी देख सकते हो... आहाहा... ऐसे ऐसे मेरे बाल नोच लिए थे, पैसे कहाँ है और होगा कैसे और क्या होगा और ढिमका होगा फलाना होगा, कुछ छोड़ा ही नही था।

आज इतने कम समय में , सौ दिन तो अभी हाल ही में पूरे हुए हैं, ऐसे लोग जो जीवन में कल्पना भी नही कर सकते थे की अब इस बीमारी में कोई ओपरेशन हो सकता है या हॉस जा पाएंगे। सरकारी बड़े अस्पताल में भी जाने का जिसका सपना नही था। आज लगभग 70–75% प्राइवेट हॉस्पिटल और 25-30% सरकारी हॉस्पिटल, इतने कम समय में 10 लाख लोगों ने उसका लाभ लिया है और वो भी एक भी फूटी कौड़ी खर्च किए बिना और योजना का कवरेज 50 करोड़ लोगों के लिए है। ये दुनिया की सबसे बड़ी योजना है।

मध्यमवर्ग परिवार में भी एक भी इन्सान को बीमारी आती है तो पूरा परिवार बीमार हो जाता है और उसे मध्यमवर्ग से गरीबी में फिसल जाने में देर नही होती, और गरीब मानवी के घर में बीमारी आए तो पूरा परिवार तबाह हो जाए, जीना हराम हो जाए इतनी गंभीर परिस्थिति पैदा होती है। उसकी चिंता करने का काम आयुष्मान भारत योजना के द्वारा किया गया। पचास करोड़ लोगों को और पचास करोड़ यानी दुनिया की सबसे बड़ी योजना का मतलब क्या, अमेरिका, केनेडा, मैक्सिको – इन तीनो की कुल जनसंख्या जितनी है उतने लोगों को भारत में आयुष्मान भारत योजना का लाभ मिला है।

आज हर रोज देश में ऐसे गंभीर मुसीबतों में फँसे हुए परिवार जो की तीन तीन चार चार साल से मौत की राह देख कर बैठे हुए थे। औसतन दिन के 10 हजार लोग इस योजना का लाभ ले रहे है। और मैं देख रहा हूँ आने वाले दिनों में उसका लाभ बढ़ने वाला है और इसका एक बहुत बड़ा परिणाम ये आनेवाला है की देश में बड़े पैमाने पर टियर 2, टियर 3 शहर, चाहे बारडोली जैसे शहर हों या नवसारी जैसे हों पारडी जैसे हों – ऐसे शहरो में नए अस्पतालों की संभावनाए पैदा होने वाली हैं।

भारत के अंदर हेल्थ सेक्टर में प्राइवेट इन्वेस्टमेंट और प्राइवेट बिजनेस के लिए बड़ी संभावनाए पैदा होनेवाली है और उसकी वजह से बड़े स्केल पर मेडिकल कोलेज, बड़े स्केल पर हमारे अपने यूथ को मेडिकल एज्युकेशन के लिए व्यवस्थाए – एक पूरा नया इको सिस्टम खड़ा होनेवाला है और जिसका लाभ भारत को स्वस्थ बनाने की दिशा में बहुत अहम भाव रहेगा ऐसा मेरा विश्वास है और मुझे ख़ुशी है की ये अस्पताल भी आयुष्मान भारत योजना के साथ जुड़ा हुआ है। गरीब से गरीब मानवी भी इस अस्पताल का लाभ ले सके और उसे जो कोई भी खर्चा होगा वो खर्चा भारत सरकार चुकाएगी उसके लिए भी व्यवस्थाए की गई हैं।

आने वाले दिनों में हेल्थ सेक्टर को मजबूत बनाने के लिए हम जेनरिक मेडिसिन की तरफ गए, जो दवाई, जिन लोगों को डायबिटीज होती है, हर घर में एक बुज़ुर्ग होता है, हर रोज़ उनको कोई न कोई दवाई लानी पडती है। संयुक्त परिवार हो, माता पिता बड़ी उम्र के हों, कोई न कोई हर रोज एक दवाई लानी पडती हो, जेनरिक दवाई का एक बड़ा अभियान चलाया, पांच हजार जेनरिक सेंटर्स खड़े किए, अभी और भी बढ़ाने की योजना है और जो दवाई 300 में मिलती हो वो 30 में मिले उसकी व्यवस्था कर दी गई है।

बहुत बड़े स्तर पर दवाई के पीछे के बोझ में कमी आए ऐसी अनेक दवाइयों की कीमत में कमी होती है। किसी में 70 प्रतिशत कमी, किसी में 50 प्रतिशत कमी, किसी में 40 प्रतिशत कमी, लेकिन सामान्य मानवी को सहायता मिले ऐसा काम हुआ है। कठिन काम है, फार्मेसी क्षेत्र के सभी लोगों को नाराज कर के करना पड़े ऐसा कम है, लेकिन फिर भी किया, क्योंकि वो समान्य मानवी के लिए करना था।

हार्ट के ऑपरेशन हों, स्टेंट लगवाने हो, घुटने का ओपरेशन हो, 1 लाख, 1.5 लाख, 3 लाख इतने महँगे। इन कम्पनियों के साथ बातचीत कर के स्थिति ऐसी हो गई की कुछ चीजों की कीमत 30 प्रतिशत कर दी, 40 प्रतिशत कर दी गई। गरीब इन्सान को घुटने का ऑपरेशन करवाना हो या स्टेंट लगवाना हो उसके खर्चे में कमी कर दी गई। एक तरह से समाज जीवन की व्यवस्था के लिए आरोग्य के क्षेत्र में चाहे इन्फ्रास्ट्रक्चर का काम हो, चाहे प्रिवेन्टिव हेल्थकेयर का काम हो, चाहे मानव संसाधन विकास का काम हो, हम काम करते आए हैं।

हमारे यहाँ गुजरात में भी मैं जब मुख्यमंत्री था उस वक्त ये सब नेता भाषण करते थे, लेकिन उनके विरोध में कोई कुछ कहता नही था। हमारे यहाँ उमरगाम से अंबाजी तक आदिवासी पट्टे में साइन्‍स स्ट्रीम का एक भी स्‍कूल नहीं था। बोलिए, अब साइंस स्ट्रीम की स्कूल आदिवासी पट्टे में न हो तो मेडिकल कोलेज में विद्यार्थी जाएगा कैसे और मेडिकल का विद्यार्थी बनेगा कैसे और आरक्षण जो हुआ है, अनमता जो मिला हुआ है उसका लाभ भी नहीं ले सकते।

मैं मुख्यमंत्री बना उसके बाद यहाँ साइंस स्ट्रीम का स्कूल आदिवासी विस्तार में शुरू किया और उसमें से मेडिकल के अंदर बच्चे पढ़ने लगे और आज गुजरात के अंदर लगभग हर साल एक नए मेडिकल कॉलेज बनाने की दिशा में हम सफल रहे हैं। बच्चों के लिए जो सीटें थी उस में भी बड़ी मात्रा में वृद्धि की गई है, उसका फायदा भी गुजरात के बच्चों को मिला है।

कहने का मेरा तात्पर्य यह है की सर्वांगीण विकास के लिए जब हम काम कर रहे हैं तब एक महत्वूर्ण फैसला, खास कर के सवर्ण समाज के अंदर एक जो आक्रोश, एक अपेक्षा और उस आरक्षण के मुद्दे पर काफी कुछ हो गया। बहुत ज्यादा हिम्मत कर के भारत के संविधान में हमने परिवर्तन किया है। और संविधान परिवर्तन के अलावा ये बात संभव होनेवाली नही थी यह बात हम डंके की चोट पर कहते थे,लेकिन कुछ राजनीतिक पक्ष अपने राजनीतिक हितों को पूरा करने के लिए इस बात को स्‍वीकार नहीं करते थे। आज हमने संविधान संशोधन किया और सवर्ण समाज के गरीब बच्चों को 10 प्रतिशत आरक्षण पक्का कर दिया और मैं गुजरात सरकार को बधाई देता हूँ की उसने सबसे पहले इसे अमली भी बना दिया।

शिक्षा में, नौकरी में सवर्ण समाज के गरीब परिवार को इसका लाभ मिलेगा और इस बात का भी ध्यान रखा गया की जिनको पहले से मिल रहा है उसमें से एक प्रतिशत की भी कमी नहीं आएगी। नई व्यवस्था खड़ी की गई और अवसर कम न हो इसलिए शिक्षा में 10 प्रतिशत सीटें बढ़ाने का भी फैसला ले लिया गया, जिससे की एक स्वस्थ विकास की दिशा पकड़ी जा सके। ऐसा एक मॉडल समाज में तनाव पैदा किए बिना खड़ा करने का हमने काम किया है।

समाज की सेवा के लिए शासन व्यवस्था का समर्पणभाव से उपयोग ऐसे ही एक भाव के साथ यह एक श्रेष्ठ काम चल रहा है। मैं आज सेवंतीभाई का, उनके परिवारजनों का उनके इस साहस के लिए, उनके इस सेवा भाव के लिए, उनके इस समपर्ण भाव के लिए ह्रदय से अभिनंदन करता हूँ और साथ ही अनेक अनेक शुभकामनाएँ भी देता हूँ और भारत सरकार की तरफ से भी मैं आश्वासन देता हूँ, विश्वास दिलाता हूँ की सेवा के इस काम में सरकार भी कंधे से कंधा मिलाकर के आपके साथ रहेगी।

बहुत बहुत धन्यवाद।

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