Shri Narendra Modi addresses SME Convention of Vibrant Gujarat 2013

Published By : Admin | January 12, 2013 | 15:21 IST
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मंच पर उपस्थित सभी महानुभाव और स्मॉल और मीडियम उद्योग जगत के सभी साहसिक भाईयों और बहनों..! जिन लोगों ने कल का समारोह देखा होगा, वे अगर आज के इस समारोह को देखेंगे तो वे अनुमान लगा सकते हैं कि गुजरात किस रेंज में काम कर रहा है। जितना बड़े उद्योगों का महात्म्य है, उससे भी ज्यादा छोटे उद्योगों का महात्म्य है। और आज पूरा दिन इस समिट में छोटे उद्योगों के विकास के लिए हम सब मिल कर के क्या कर सकते हैं, छोटे उद्योगों के द्वारा प्रोडक्ट की हुई चीजों को मार्केट कैसे मिले, छोटे उद्योग भी विश्व व्यापार में अपनी जगह कैसे बनाएं, छोटे उद्योगों का भी एक ब्रांड इमेज कैसे बने... ये सारे विषय ऐसे हैं कि जिसको अगर हम मिल बैठ कर सोचें तो एक बहुत बड़ा परिवर्तन ला सकते हैं। किसी एक जिले में एकाध छोटे उद्योगकार के लिए एकदम नई टैक्नोलॉजी को लाना उसके बूते से बाहर होता है, उसके लिए कठिनाई होती है। लेकिन बदलती हुई टैक्नोलॉजी के संबंध में हम लगातार हमारे उद्योग जगत के मित्रों को जोड़ते रहें, उनको अवसर दें, चाहे एक्जीबिशन हो, फेयर्स हो, सेमीनार्स हो, तो एक साथ 12-15 लोग आगे आएंगे और कहेंगे कि हाँ भाई, हम इस टैक्नोलॉजी को हायर करना चाहते हैं। और जब सब प्रकार की कोशिश करने के बाद सफलता मिलती है, सब लोग जुड़ते हैं तो अपने आप किसी भी उद्योगकार के लिए निर्णय करने में कठिनाई नहीं होती। इस प्रकार की समिट के माध्यम से हम हमारे गुजरात के छोटी-छोटी तहसील में बैठे हुए जो छोटे-छोटे उद्योगकार हैं, एकाध छोटा मशीन है, खुद मेहनत करते हैं, कुछ ना कुछ कर रहे हैं... लेकिन उनका भी इरादा तो है आगे बढ़ने का। वे भी चाहते हैं कि नई ऊंचाइयों को पार करना है, लेकिन उनको कभी-कभी रास्ता नहीं सूझता है। कभी कान पर कोई जानकारी पड़ती है लेकिन रास्ता पता नहीं होने के कारण, सोर्स पता नहीं होने के कारण, किन लोगों के माध्यम से करें उसका रास्ता पता नहीं होने के कारण वो अपनी जिदंगी उसी में पूरी कर देता है। पिताजी का एक कारखाना छोटा-मोटा चल रहा है, बच्चे बड़े हो रहे हैं, बच्चों को लगता है कि कुछ करें, लेकिन पिताजी को लगता है कि नहीं भाई, इतने साल से मैं चला रहा हूँ, ऐसा साहस करोगे तो कहीं डूब ना जाएं, अभी जरा ठहरो..! कभी माँ-बाप भी जो नई पीढ़ी प्रवेश करती है अपने पारिवारिक व्यवसाय में, तो उससे भी वो कभी-कभी चिंतित हो जाते हैं कि क्या करें..! इस प्रकार के समारोह से दोनों पीढ़ी की सोच को बदलने के लिए हम एक कैटलिक एजेंट के रूप में काम कर रहे हैं। जो पुरानी पीढ़ी के लोग हैं, जो पुरानी परंपरा से अपना काम करना चाहते हैं, पुरानी टैक्नोलॉजी का उपयोग कर के काम करना चाहते हैं, बहुत ही प्रोटेक्टिव एन्वायरमेंट में काम करना चाहते हैं और नई पीढ़ी है जो बहुत ज्यादा एग्रेसिव है, साहस करना चाहती है, नई टैक्नोलॉजी को एडाप्ट करना चाहती है और कुछ भी आने से पहले घर में ही तनाव रहता है। बेटा बाप को समझा नहीं पा रहा है, बाप बेटे को स्वीकार करने को तैयार नहीं होता है और सालों तक ऐसे ही चलता है। यहाँ कई लोग बैठे होंगे जिनको इस प्रकार का अनुभव होता होगा..! लेकिन जब ये दोनों पीढ़ी इस प्रकार के अवसर पर आती हैं तब और ‘सीइंग इज़ बिलीविंग’, जब वो इन चीजों को निकट से देखते हैं तो उनका हौंसला बुलंद हो जाता है और पल भर में वो निर्णय करते हैं कि हाँ बेटे, तुम जो कहते थे वो ठीक है, मुझे भरोसा नहीं था लेकिन मैंने देखा तो मुझे लगता है कि हाँ यार, हम कर सकते हैं..! तो मित्रों, हमें हमारे इस लघु उद्योग क्षेत्र को टैक्नोलॉजी की दृष्टि से अपग्रेड करना है। हम चाहते हैं कि जगत में जो बदलाव आया है उस बदलाव को हम कैसे एडाप्ट करें, अपने मन को कैसे बदलें, उस टैक्नोलॉजी के लिए गवर्नमेंट किस प्रकार से सपोर्ट करे, किस प्रकार की व्यवस्थाओं को विकसित करने से हम अच्छी स्थिति में बदल सकते हैं।

भी-कभी कुछ प्रोडक्ट ऐसे होते हैं जो समाज के लिए बहुत उपयोगी होते हैं। हेल्थ केयर सेक्टर का कोई प्रोडक्ट होगा, एज्यूकेशन सेक्टर का कोई प्रोडक्ट होगा, इवन सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के लिए कोई छोटा सा मशीन बनाता होगा। एकाध व्यक्ति के लिए मुश्किल होता है, वो करता भी है कभी-कभी तो क्या करता है? अगर मान लीजिए साल में वो छह मशीन बनाता है, तो फिर वो आठ-दस ग्राहकों से ज्यादा जगह में पहुंचता नहीं है। उसको लगता है इस आठ-दस क्लाइंट को पकड़ लिया, कस्टमर को पकड़ लिया, काम हो गया। उसकी तो रोजी-रोटी चलती है, लेकिन उसकी वो टैक्नोलॉजी जो सर्वाधिक लोगों को काम आ सकती है वो हर साल आठ या दस जगह पर ही पहुंचती है। उसके पास इतनी बड़ी विरासत है, उसके पास एक एसेट है, उसने एक प्रोडक्ट किया है, अगर वो ऐसे स्थान पर आता है जहां वो प्रोडक्ट बाहर आती है दुनिया के सामने, तो सबको लगता है कि यार, इसका प्रोडक्शन बढ़ाने की जरूरत है, इसका जरा मार्केटिंग करने की जरूरत है। साल में आठ लोग क्यों, अस्सी जगह पर क्यों नहीं पहुंचनी चाहिए..? तो मित्रों, उसके कारण एक उपयोगिता का भी माहौल बनता है। हर किसी को लगता है कि हाँ, अगर ये व्यवस्था विकसित होती है तो ये इस नगरपालिका को काम आ सकती है, पंचायत को काम आ सकती है, सरकारी दफ्तर में काम आ सकती है, कॉर्पोरेट हाऊस में काम आ सकती है..! और इसलिए मित्रों, इस प्रकार के प्रयासों से हम समाजोपयोगी जो प्रोडक्टस हैं, जो व्यवस्थाओं में बदलाव लाने का एक आधार बनती है, उन प्रोडक्ट्स को शो-केस करना चाहते हैं। हम चाहते हैं कि सब लोग इन चीजों को देखें। अब ये बात सही है कि एक छोटे से गाँव में बैठे उद्योगकार के लिए ये सब करना मुश्किल होता है क्योंकि बेचारा खुद ही जा करके लेथ पर बैठ कर के काम करता है, वो मार्केटिंग करने कहाँ जाएगा। उसके लिए वो संभव ही नहीं है, तो फिर हमें ही कोई ऐसा मैकेनिज्म डेवलप करना चाहिए। जैसे हमने कुछ उद्योगकार मित्रों को अभी सम्मानित किया। ये वो लोग हैं जिन्होंने छोटे-छोटे उद्योगों में रहते हुए भी कुछ ना कुछ नया इनोवेशन किया है, कुछ नया अचीव किया है, कुछ वर्क कल्चर में बदलाव लाए हैं, प्रोडक्टिविटी में बदलाव लाए हैं, क्वालिटी ऑफ प्रोडक्शन में बदलाव लाए हैं..! अब इन लोगों को जब ये सब लोग देखते हैं तो इनको लगता है कि अच्छा भाई, हमारे जिले में इस व्यक्ति ने ऐसा काम किया है..? तो देखेंगे, पूछेंगे कि बताओ तुमने क्या किया था। तो उसको भी लगेगा कि हाँ यार, मैं भी अपनी फैक्ट्री में कर सकता हूँ, मैं भी मेरे यहाँ लगा सकता हूँ..!

मित्रों, एक बात सही है कि हमें अधिकतम रोजगार देने की क्षमता इन लघु उद्योगकारों के हाथों में है, आप लोगों के हाथों में है। और हम उस प्रकार की अर्थ व्यवस्था चाहते हैं जिसमें अधिकतम लोगों को लाभ हो। मास प्रोडक्शन हो, वो इकोनॉमी के लिए जरूरी भी है, लेकिन साथ-साथ प्रोडक्शन बाय मासिस भी होना चाहिए। मास प्रोडक्शन हो, लेकिन एक लिमिटेड मशीन के द्वारा सारी दुनिया चल जाती है तो हम जॉब क्रियेट नहीं कर सकते। स्मॉल स्केल इन्डस्ट्रीज के नेटवर्क के माध्यम से प्रोडक्शन बाय मासिस होता है। और जब प्रोडक्शन बाय मासिस होता है, तो लाखों हाथ लगते हैं, तो लाखों लोगों का पेट भी भरता है और इसलिए स्मॉल स्केल इन्डस्ट्रीज अधिकतम लोगों को रोजगार देने का एक अवसर है। अब अधिकतम लोगों को रोजगार देने में भी कभी-कभी ये दिक्कत आती है कि फैक्ट्री में उत्पादन तो बढ़ रहा है, लेकिन कभी किसी नौजवान को रख लेते हैं तो छह महीने तो उसे सिखाने में चले जाते हैं। ये कोई कम इन्वेस्टमेंट नहीं होता है। और उसके बावजूद भी भरोसा नहीं रहता है कि भाई, इस लड़के को मैं लाया हूँ, छह महीने मैंने इसे सिखाया है, उसको काम में लगाया है, लेकिन पता नहीं मेरी गैरहाजिरी में वो जो चीज़ बनाएगा वो बाजार में चलेगी की नहीं चलेगी, उसके मन में टेंशन रहता है। लेकिन अगर उसको स्किल्ड मैन पावर मिले, हर प्रकार से आधुनिक विज्ञान और ज्ञान तथा टैक्नोलॉजी से परिचित नौजवान मिलेगा तो उसका हौंसला बुलंद हो जाता है। उसको लगता है कि मैं जिस पद्घति से काम करता था उसमें तो मेरे दो घंटे ज्यादा जाते थे, ये स्किल्ड लेबर मुझे मिला है, नौजवान ऐसा है, थोड़ा इस विषय को जानता है तो मित्रों, हमारी प्रोडक्शन कॉस्ट भी कम होगी, क्वालिटी इम्प्रूव होगी और उस फील्ड में सालों से काम करने वाला जो उद्योगपति है, जो बिजनस मैन है उसको भी भरोसा हो जाएगा कि यस, स्किल्ड मैनपावर के नेटवर्क के द्वारा, उनकी मदद के द्वारा मैं ऊंची क्वालिटी की चीजें बाजार में ले जा सकता हूँ। और इसलिए मित्रों, जितना समयानुकूल टैक्नोलॉजी अपग्रेडेशन आवश्यक है, जितना हमारी सोच में बदलाव आवश्यक है, उतना ही हमारे लिए स्किल डेवलपमेंट पर बल देना आवश्यक है। और स्किल्ड मैन पावर को तैयार करने के लिए हम टेलर मेड सॉल्यूशन नहीं निकाल सकते। हम लोगों को नीड बेस्ड स्किल डेवलपमेंट करना पड़ेगा। जहां जिस प्रकार की स्किल की आवश्यकता है, उस स्किल को हम प्रोवाइड कर सकते हैं क्या? हम हमारे कोर्सेस को भी उस कंपनी को या उस उद्योग को जिस प्रकार के मैन पावर की आवश्यकता है उस प्रकार के सिलेबस से हम तैयार कर सकते हैं क्या? गुजरात ने उस दिशा में एक प्रयास किया है।

स प्रकार के मिलन के माध्यम से हम ये भी आईडेन्टीफाई करना चाहते हैं कि अगर मान लीजिए गुजरात में लाखों छोटे उद्योग हैं और गुजरात के उद्योगों की बैकबोन स्मॉल स्केल इन्डस्ट्रीज हैं। लोग कितना ही भ्रम क्यों ना फैलाएं, लेकिन सच्चाई जो यहाँ बैठी है वो है। लेकिन कुछ लोगों ने झूठ फैला के रखा है गुजरात के बारे में और लगातार झूठ फैलाने में उनको आनंद भी आता है। और जनता उनको जरा ठीक-ठाक भी करती रहती है। लेकिन उनकी आदत सुधरने की संभावना नहीं है, उन से कोई भरोसा नहीं कर सकते हम, क्योंकि उनके वेस्टेड इन्टरेस्ट है। मित्रों, हमें गुजरात के अंदर स्मॉल स्केल इन्डस्ट्रीज के नेटवर्क को बल देना है, इतना ही नहीं, हम स्मॉल स्केल इन्डस्ट्रीज को भी क्लस्टर के रूप में डेवलप करना चाहते हैं। अब देखिए, यहां साणंद से लेकर बहुचराजी तक पूरा ऑटोमोबाइल का एक क्लस्टर बना रहा है। अब ये ऑटोमोबाइल का क्लस्टर बन रहा है, तो कोई एक बड़ा कारखाना बनने से मोटर बनती नहीं है। एक मोटर तब बनती है जब पाँच सौ-सात सौ छोटे-छोटे उद्योगकार छोटे-छोटे स्पेयर पार्ट्स बना कर के उसको सप्लाई करते हैं, तब जा करके एक कार बनती है। किसी का इस पर ध्यान ही नहीं जाता है, उनको तो मारूति दिखती है या फोर्ड दिखती है या नैनो दिखती है। लेकिन ये फोर्ड हो, मारूति हो या नैनो हो, जब तक ये लोग काम नहीं करते तब तक बन नहीं पाती है। और उसके नेटवर्किंग के लिए आवश्यकता क्या होती है कि जहां पर जिस इन्डस्ट्री का क्लस्टर हो, वहीं पर सराउन्डिंग में अगर हम उस प्रकार के छोटे-छोटे उद्योगों का एक पूरा जाल बिछा दें और फिर मान लो कि ऑटो कम्पोनेंट बनाने वाले अगर लोग हैं, तो वहीं पर उस प्रकार की हमारी आई.टी.आई. जो होंगी, उन आई.टी.आई. के कोर्सेज भी वही होंगे जो वहीं के बच्चों को वहीं के उद्योगों में रोजगार दिला सकें, यानि एक इन्टीग्रेटिड अप्रोच होगा। अब मान लीजिए, वापी में कोई टैक्सटाइल इन्डस्ट्री है और पालनपुर में आई.टी.आई. में टैक्सटाइल का कोर्स चल रहा है। मुझे बताइए, क्या पालनपुर का लड़का वापी के अंदर टैक्सटाइल के कारखाने में नौकरी करने के लिए जाएगा..? अपने माँ-बाप को छोड़ कर जाएगा क्या..? वहाँ पर मकान किराए पर लेकर रहेगा क्या..? नहीं रहेगा..! लेकिन वापी में अगर टैक्सटाइल इन्डस्ट्री है और मैं वापी में ही टैक्सटाइल इन्डस्ट्री के लिए रिक्वायर्ड स्किल डेवलपमेंट के काम को करता हूँ, तो वहां के नौजवानों को रोजगार मिल जाता है, वहां की कंपनी को मैन पावर मिल जाता है और वहां से ज्यादातर लोगों का नौकरी छोड़ कर भाग जाने का कारण भी नहीं बनता है। वरना कभी-कभी क्या होता है, किसी उद्योगकार को चिंता यही रहती है और बड़ा ऑर्डर लेता नहीं है। ऑर्डर क्यों नहीं लेता है..? उसको लगता है कि यार बाकी तो सब ठीक है लेकिन ये नौकरी छोड़ कर चला जाएगा तो मैं आर्डर कैसे पूरा करूंगा, मेरे पास आदमी तो हैं नहीं..! यानि एक प्रकार से वो अपने साथ काम करने वाला जो व्यक्ति है उस पर डिपेन्डेट हो जाता है, लेकिन अगर ऐसा क्लस्टर है और क्लस्टर के अंदर उसी इलाके के नौजवानों को उसी काम के लिए अगर ट्रेन किया गया है तो यदि एक छोड़ कर जाएगा तो दूसरा मिल जाएगा, लेकिन उन उद्योगों को मैन पावर की कभी कमी नहीं पड़ेगी और मैन पावर का भी एक्सप्लॉइटेशन नहीं होगा।

मित्रों, गुजरात में औद्योगिक जगत से जुड़े हुए आप सब मित्रों का एक बात के लिए मैं अभिनंदन करता हूँ कि आज गुजरात में जो ज़ीरो मैन्डेस लॉस है, पीसफुल लेबर है, उसका मूल कारण यह है कि हमारे यहां औद्योगिक जीवन में एक परिवार भाव है। अपनी कंपनी में काम करने वाला लड़का भी परिवार का हिस्सा हो जाता है, एक अपनापन का भाव होता है और उसके कारण कभी मालिक और नौकर का हमारे यहां माहौल नहीं बनता है। हम जितनी मात्रा में ये मालिक और नौकर वाले हिस्से से बचे हैं, उतना हमारा औद्योगिक विकास हुआ है। और हिन्दुस्तान के बहुत से राज्य ऐसे हैं, हिन्दुस्तान के बहुत से छोटे उद्योगकार ऐसे हैं जिनको गुजरात की इस क्वालिटी का बहुत कम पता है। हमारे यहाँ आठ घंटे की नौकरी होगी तो भी वो मजदूर नौ घंटे तक काम क्यों करेगा..? उसको लगता है कि नहीं-नहीं, ये तो मेरी कंपनी की इज्जत का सवाल है, ये माल तो मुझे सात तारिख को देना है, मैं काम करके रहूँगा..! सेठ चाहे या ना चाहे, उद्योगकार की इच्छा हो या ना हो, लेकिन वो लेबर उसको रात तक भी काम करके उसको दे देता है। मित्रों, ये माहौल जो हमारे यहाँ बना है, इसका मतलब यह हुआ कि जिस प्रकार से प्रोडक्ट की वैल्यू हमने बढ़ाई है, उसी प्रकार से उस प्रोडक्ट के पीछे जिन हाथों से काम होता है, उन हाथों की इज्जत हम जितनी बढ़ाते हैं, उतनी ही हमारे व्यवसाय में गारंटी बढ़ती है, क्वालिटी में गारंटी बढ़ती है और हमारे परिणाम में बढोतरी हो जाती है। और इसलिए मित्रों, हमें जितनी छोटे उद्योगों की केयर करनी है, उतनी ही हमारे साथ काम करने वाले हमारे लेबरर्स की चिंता करनी है। हम कभी उनका एक्सप्लॉइटेशन नहीं करेंगे, ये जिन-जिन लोगों ने ठानी और मैंने देखा है कि अगर उसको पाँच रूपये का काम मिलता है तो वो आपको पच्चीस रूपये का काम करके देता है। कभी कोई घाटे में नहीं जाता है। अपने साथियों को संभालने के कारण घाटे में गई हो, ऐसी कोई कंपनी नहीं होगी। लेकिन जो अपनी ही टीम के लोगों के साथ इस प्रकार का काम नहीं करते हैं, तो वो घाटे में जाती है।

सी प्रकार से मित्रों, सरकार भी नहीं चाहती है कि फैक्ट्रियों में जा करके नई-नई परेशानियाँ पैदा करे। पहले तो ऐसे-ऐसे कानून हुआ करते थे, जैसे एक बॉयलर इन्सपेक्शन का रहता था। अब जिन कंपनियों को बॉयलर की जरूरत होती थी वो सरकार को लिखते थे कि फलानी तारिख को हमारा इन्सपेक्शन हो जाना जरूरी है, वरना मुझे अपना बॉयलर ऑपरेशन बंद करना पड़ेगा। अब वो बॉयलर इन्सपेक्शन करने वाला जो होता है, उसके पास लोड बहुत होता है और वो डेट देता नहीं है। उसको टेंशन रहता है और क्या-क्या परेशानियाँ होती है वो सब जानते हैं..! मैंने एक छोटा कानून बना दिया। मैंने कहा भाई, जो फैक्ट्री चलाता है, वो मरना चाहता है क्या? वो अपना बॉयलर फट जाए ऐसी इच्छा करता है क्या? उसको अपने बॉयलर की चिंता नहीं होती होगी क्या? तो हमने कहा कि आप ऐसा काम करो कि उसके ऊपर जिम्मेदारी डालो और उस कंपनी को बोलो कि वो आउट सोर्स करके, जो भी इसके लाइसेंसी लोग हैं, उनसे बॉयलर इन्सपेक्शन करवा लें और कागज सरकार को भेज दें। मित्रों, इतना सरल हो गया..! अच्छा, उसके उपर जिम्मेवारी आ गई और उसके ऊपर जिम्मेवारी आ जाने के कारण वो सरकार जितना करे उससे ज्यादा करने लगा। उसको लगा कि हाँ यार, मेरा बॉलयर अगर कुछ खराब हो गया तो मेरी फैक्ट्री में आग लग जाएगी और मेरे पचास लोग मर जाएंगे। जिम्मेवारी खुद उसके उपर आ गई। मित्रों, ऐसे बहुत से छोटे-मोटे कानूनी बदलाव है। अगर आप में से उस प्रकार के सुझाव आएंगे, जिसके कारण सिम्पलीफिकेशन हो, सरकार आ कर के कम से कम परेशानियाँ पैदा करे... और मित्रों, ये जो मैं बोल रहा हूँ ना, ये मुझे करना है और मैं लगातार करता आया हूँ, काफी कुछ मैंने कर भी लिया है। लेकिन फिर भी कहीं कुछ कोने में रह गया हो तो मुझे उसको ठीक करना है और उसमें मुझे आप लोगों की मदद चाहिए। ये सरकार ऐसी नहीं है कि सब आपके भरोसे छोड़ दे और आप को कह दे कि भाई, जो होगा वो होगा, तुम जानो, तुम्हारा काम जाने, मरो-जीओ तुम्हारी मरजी... नहीं, ये हमारा काम है कि आप प्रगति करो, ये हमारा काम है कि आपकी कठिनाइयाँ दूर हों, ये हमारा काम है कि हम सब मिल कर के आगे बढ़ें..! मित्रों, आज गुजरात में इन्डस्ट्री ग्रो कर रही है उसका कारण यही है कि हमने एक ऐसा इन्वायरमेंट क्रियेट किया है और उस इन्वायरमेंट का लाभ हर किसी को मिले उस दिशा में हम प्रयास कर रहे हैं।

मित्रों, अभी मैं कुछ दिन पहले सूरत में ‘स्पार्कल’ कार्यक्रम में गया था, जेम्स एंड ज्वेलरी का कार्यक्रम था। वहां पर भारत सरकार के भी लघु उद्योग विभाग को देखने वाले एक अधिकारी आए थे। उन्होंने जो भाषण किया वहां, वो जानकारी मेरे लिए भी बहुत आनंद की थी। वही जानकारी मुझे मेरे सरकार के अधिकारियों ने दी होती तो मैं उनको दस सवाल पूछता। मैं उनको कहता कि नहीं यार, ये बात मेरे गले नहीं उतर रही है, ये कैसे हो सकता है..? मेरे मन में सवाल उठते। लेकिन क्योंकि भारत सरकार के अधिकारी ने कहा है तो मुझे मालूम था कि वो सात जगह पर पूछ कर के आया होगा और बिना वेरीफाई किये कुछ नहीं कहेगा। और मित्रों, उन्होंने जो जानकारी दी, वो जानकारी सचमुच में हम सभी लघु उद्योग से जुड़े मित्रों के लिए एक बहुत ही आनंद और प्रोत्साहन का विषय है। उन्होंने कहा कि पूरे हिन्दुस्तान में स्मॉल स्केल इन्डस्ट्रीज़ का जो ग्रोथ है, वो 19% है और गुजरात ऐसा राज्य है जिसकी स्मॉल स्केल इन्डस्ट्रीज़ का ग्रोथ 85% है। आप विचार किजीए मित्रों, इसका मतलब कि भारत सरकार का एक जो रिपोर्ट आया है, वो रिपोर्ट ये कहता है कि गुजरात एक ऐसा राज्य है जहां मिनीमम बेरोजगार लोग हैं। बेकारों की संख्या पूरे हिन्दुस्तान में कम से कम कहीं है, तो गुजरात में है। मैं पॉलिटिकली जो बेकार हो गए हैं उनकी बात नहीं कर रहा हूँ, वो तो बेचारे पंद्रह साल से बेरोजगार हैं। मिनीमम बेरोजगार कहीं किसी राज्य में है तो वो गुजरात में हैं। भारत सरकार का दूसरा एक रिपोर्ट कहता है कि पूरे हिन्दुस्तान में पिछले पांच सात साल में जो रोजगार दिए गए हैं, उसमें 72% रोजगार अकेले गुजरात ने दिए हैं। अब इन तीनों चीजों को मिला कर देखें कि देश का ग्रोथ 19% और हमारा 85%, दूसरा रिपोर्ट कहता है कि मिनीमम बेरोजगार लोग, तीसरा रिपोर्ट कहता है कि 72% एम्लायमेंट हम देते हैं, ये तीनों को जोड़ के जब हम देखते हैं तो साफ नजर आता है कि हमारे स्मॉल स्केल इन्डस्ट्रीज के ग्रोथ ने देश के नौजवानों की कितनी बड़ी सेवा की है। रोजगार देने के लिए एक क्षेत्र कितना बड़ा उपकारक हुआ है, कितना बड़ा लाभ हुआ है। और ये तीनो चीजें, सारे फिगर भारत सरकार के हैं।

मित्रों, इससे स्पष्ट होता है कि हमारा ये जो स्मॉल स्केल इन्डस्ट्रीज पर बल देने का प्रयास है उसमें हम कुछ और कदम आगे बढ़ना चाहते हैं, भाईयों। और आप सब लोग शायद नहीं कर पाओगे, लेकिन मित्रों, निर्णय तो करना ही पड़ेगा..! एक है, सारी दुनिया से आया माल अब डंप हो रहा है, उसके सामने हमें टिकना है। मैं 1999-2000 की बात करता हूँ, तब तो मैं मुख्यमंत्री नहीं था लेकिन मुझे याद है, 12-15 साल पहले की बात है। मैंने उनसे कहा था कि भाई, आपकी चिंता तो सही है लेकिन इसका तो उपाय यही है कि हम चीन से अच्छे जूतें दें और चीन से सस्ते जूतें दें। अगर हम इन बातों पर बल देंगे तो कोई हमारा मुकाबला नहीं कर सकता। और हमने जब कहा कि अच्छे जूतें दें तो उसका मतलब जूतें टिकाऊ होने चाहिए, सिर्फ दिखने में अच्छे नहीं। और मैंने कहा, मेरा विश्वास है कि अगर आप टिकाऊ चीजों पर बल दोगे तो हिन्दुस्तान के ग्राहक का जो मानस है वो टिकाऊ चीजें पंसद करता है और फिर दुनिया की कोई ताकत ऐसी नहीं है कि वो उसका माल यहाँ बेच जाए। मित्रों, ये छोटा सा एक सिद्धांत है, क्या हम जिन चीज़ों का प्रोडक्शन करते हैं उसको दुनिया से जो माल हिन्दुस्तान की तरफ आ रहा है उसके सामने टिकने के लिए क्या वो टिकाउ है या नहीं, इस पर हमें गंभीरता से सोचना पड़ेगा और तभी हम इस ग्लोबल मार्केट में और इस कन्जूमरिज़म के जमाने में हम टिक पाते हैं, अदर्वाइज़ हम टिक नहीं पा सकते, मित्रों। कभी तो हमें कम मुनाफा ले कर भी टिकाउ चीज़ों पर बल देना ही पड़ेगा, ऐट द सैम टाइम, मार्केट का एक दूसरा नेचर बना है, आपने कई लोग देखे होंगे, 20 साल की उम्र में जिस प्रकार का जूता पहेनते थे, वो 75 साल के हो गए तो भी वो बदलते नहीं है। वे वो ही मोची को खोजेंगे, उसी से बनावाएंगे, ऐसा रहता था। लेकिन आज की पीढ़ी में..? आज की पीढ़ी का स्वभाव बदला है। उसको लगातार नई डिजाइन चाहिए, नया कलर चाहिए... इसका मतलब हुआ कि हमारे यहाँ लगातार रिसर्च होना चाहिए। भले ही हम स्मॉल स्केल इन्डस्ट्रीज वाले क्यों ना हो, अगर हम मार्केट में नई चीज नहीं देंगे, तब तक हम ये दुनिया से जो मार्केट का हमला हो रहा है उसके सामने टिक नहीं सकते हैं और इसलिए हमें लगातार डिजाइनिंग हो, क्वालिटी रिसर्च हो, काम्पोनेंट रिसर्च हो, इन सारे विषयों पर बल देना पड़ेगा, क्योंकि हमें टिकना है। वरना बताइए मित्रों, जो लोग होली में पिचकारी बना कर बेचते थे, वो बेचारा साल भर पिचकारी बनाता था और होली के समय माल बेचता था और रोजी-रोटी कमाता था। उसने सब बना कर रखा है और मानो चाइना से पिचकारी आकर डम्प हो गई तो उसकी बेचारे की पिचकारी कौन खरीदेगा..! उसे चिंता रहती है। लेकिन अगर हमारी चीजें टिकाऊ हैं मित्रों, तो मैं मानता हूँ कि हम किसी भी हमले को पार कर सकते हैं।

दूसरी बात है मित्रों, कि हमें डिफेंसिव ही रहना है क्या..? कैसे भी करके अपनी रोजी-रोटी कमा लो, अपने धंधे को बचा लो यार, चला लो। बच्चे बड़े होंगे तो वे देख लेंगे, हम तो हमारा गुजरा कर लें..! ये ज्यादातर हमें सुनने को मिलता है। मैं मानता हूँ कि हमें मनोवैज्ञानिक रूप से एक बहुत बड़े परिवर्तन की आवश्यकता है। हमारे उद्योग जगत के मित्रों को डिफेंसिव नहीं होना चाहिए। क्यों ना हम ये सपना देखें कि मैं जो प्रोडक्ट बना रहा हूँ, मैं दुनिया के बाजार में जाकर के, सीना तान करके बेच कर आऊंगा। हम ही क्यों ना एग्रेसिव हो..? हम पूरे विश्व के बाजार पर कब्ज़ा करने की कोशिश क्यों ना करें..? मित्रों, इस समिट के माध्यम से हम जिस तरह दुनिया की टैक्नोलॉजी लाने के लिए उत्सुक हैं, वैसे दुनिया से बाजार खोजने में भी उत्सुक हैं। विश्व में हम अपना माल कहाँ-कहाँ बेच सकते हैं कहाँ-कहाँ पहुंचा सकते हैं, कहाँ-कहाँ मार्केट की संभावना है, वहाँ की इकॉनोमी के अनुकूल हमारी प्रोडक्ट हम कैसे पहुंचा सकते हैं... अगर इन चीजों पर हमने बल दिया तो मित्रों, हमें कभी भी किस देश का कौन सा माल यहाँ आकर टपक पड़ने वाला है, किसके यहाँ से कितना डंप होने वाला है, ऐसी कोई बात हमारी चिंता का कारण नहीं बनेगी। हम यदि एग्रेसिव होते हैं, ऑफेन्सिव होते हैं, हम विश्व के बाजार पर कब्जा करने के लिए सोचते हैं... और मैं मानता हूँ मित्रों, गुजरात के लोग साहसिक हैं, ये कर सकते हैं। गुजरात के व्यापारियों में दम है, अगर उन्हें कहा जाए कि तुम गंजे को कंघा बेच कर आ जाओ तो वो बेच कर आ जाएगा। उसके अंदर वो एन्टरप्रोन्योशिप है, वो कर सकता है। अगर उसको कहा जाए कि तुम हिमालय के अंदर फ्रिज बेच के आ जाओ तो साहब, वो बेच के आ जाएगा। वो समझा देगा कि ग्लोबल वार्मिंग क्या है, हिमालय अब गर्म होने वाला है, तुम्हे फ्रिज की ऐसे जरूरत पड़ेगी..! मित्रों, जिसके अंदर ये एन्टरप्रन्योरशिप की क्वालिटी है, उसके मन में ये विचार क्यों नहीं आता है कि मैं दुनिया के बाजार पर कब्ज़ा करुँ..!

मित्रों, बदलते हुए युग में हमारी छोटी-मोटी इन्डस्ट्रीज को भी एकाध नौजवान को तो अपने यहां इन्फोर्मेशन टैक्नोलॉजी से जुड़ा रखना ही पड़ेगा। आज ऑनलाइन बिज़नेस इतनी बड़ी मात्रा में होता है, विश्व की रिक्वायरमेंट का पता चलता है। आप किसी को भले ही दो घंटे के लिए टेम्परेरी हायर करो। कुछ ऐसे आई.टी. के बच्चे भी हो सकते हैं कि दिन में छह कंपनीओं में दो-दो घंटे सेवा दे सकते हैं, जैसे एकाउन्टेंट होते थे पहले। आपके यहां एकाउन्टेंट कोई परमानेंट थोड़े ही रखते थे, हफ्ते में दो घंटे आता था और अपना अकाउंट का काम करके चला जाता था। तो इसी प्रकार से हमें एक नई विधा डेवलप करनी होगी। ये जो आई.टी. के क्षेत्र में जिन बच्चों एक्सपर्टीज़ हैं, ऐसे बच्चों की हफ्ते में दो-तीन घंटे सेवा लेना, उनको कहना कि भाई, दुनिया में देखो क्या-क्या हो रहा है, नई टैक्नोलॉजी क्या है, नई व्यापार की संभावनाएं क्या है, देखो और कॉरस्पोन्डैंस करो, अपना माल हम बेच सकते हैं क्या..? मित्रों, थोड़ा अगर आप सोचोगे तो आज जगत इतना छोटा हो गया है कि हम अपना मार्केट खोज सकते हैं और अगर प्रोडक्ट में दम है तो मित्रों, हम अपनी बात दुनिया में पहुंचा भी सकते हैं और माल भी पहुंचा सकते हैं और मुझे लगता है कि हमारे गुजरात के उद्योगकारों को उस दिशा में विचार करना चाहिए।

क और बात है, मित्रों। मैंने देखा है कि कई हमारे उद्योगकार जिन्होंने अपनी चीजों को विशेष रूप से बनाया है, लेकिन अब पुराने जमाने का हमारा स्वाभाव है और उसके कारण हम हमारे प्रोडक्ट का पेटेंट नहीं करवाते हैं। कोई छोटा भी कोई उद्योगकार क्यों ना हो, हमें पेटेंट करवाना चाहिए। मित्रों, इस बार मैं अब से एक काम करने वाला हूँ। सरकार के अंदर जो इन्डेक्स-बी जैसे जो हमारे डिपार्टमेंट हैं, अब के बाद हम डेडिकेटिड टू द स्मॉल स्केल इन्डस्ट्रीज, एक पूरा यूनिट सरकार के उद्योग विभाग में खोलने वाले हैं। पूरी एक सरकारी व्यवस्था डेडिकेटिड टू द स्मॉल स्केल इन्डस्ट्रीज़ होगी। वो लघु उद्योगो के लिए, छोटे उद्योगों के लिए, कॉटेज इन्डस्ट्रीज के लिए होगा और उनको इस प्रकार की कानूनी मदद कैसे मिले जैसे कि पेटेंट कैसे करवाना, पेटेंट कैसे रजिस्टर होगा, उसकी कंपनी का नाम होगा, ब्रांड होगा, प्रेासेस होगा, प्रोडक्ट होगा... इन सारी बातों में सरकार आपकी मदद करना चाहती है। आने वाले दिनों में उस इकाई को भी हम खड़ा करेंगे जिसके कारण छोटे-छोटे लोगों को भी मदद मिलेगी। वरना क्या होता है, आप एक चीज बना लीजिए, दूसरा उसको खोल कर के, सोचेगा कि हाँ यार, ये तो मैं भी कर सकता हूँ, तो वो भी अपने यहां शुरू कर देगा..! और उसके कारण जिसने मेहनत की हो उसको तो बेचारे को मुसीबत हो जाती है। तो हम चाहते हैं कि आपकी सिक्योरिटी के लिए भी व्यवस्था हो और हमारी सरकार की तरफ से हम आपकी मदद करना चाहते हैं ताकि आपके पास जो नॉलेज है, इनोवेशन है, उसका पेटेंट आपके पास रहे, वो आपकी अथॉरिटी बनी रहे, उस दिशा में हम काम कर रहे हैं।

र एक बात है मित्रों, हम सब लोग छुट-पुट अपनी चीजों के लिए दुनिया में अपनी जगह जल्दी बना नहीं सकते। हब सबको मालूम है कि आज से पाँच-दस साल पहले बाजार में हम पैन भी खरीदने जाते थे और अगर उस पर ‘मेड इन जापान’ लिखा है तो हम कभी पूछते नहीं थे कि जापान की किस कंपनी ने इस पेन को बनाया है, कभी नहीं पूछते थे..! उस पेन पर कंपनी का नाम भी नहीं लिखा होता था, लेकिन सिर्फ ‘मेड इन जापान’ लिखा है तो हम खरीद लेते थे, अपनी जेब में रखते थे और अपने दस दोस्तों को महीने भर बताते थे कि देखिए, ‘मेड इन जापान’ है..! ये था एक जमाना..! इसका मतलब ये हुआ कि उन्होंने अपना एक ब्रांड बना लिया, फिर सब कंपनियों का माल ‘मेड इन जापान’ लिख दिया तो बाजार में चल जाता था। मित्रों, हमारे लिए भी आवश्यक है कि हम हर कंपनी का ब्रांड बनाने जाएंगे तो शायद हमारी इतनी पहुंच भी नहीं होगी और इतनी ताकत भी नहीं होगी, लेकिन अगर हम ‘मेड इन गुजरात, इंडिया’ ये अगर माहौल बना दें..! मित्रों, ये बहुत आवश्यक है और इसलिए मेरा आग्रह है कि हम आज मिले हैं उस पर चर्चा करें, आपके छोटे-छोटे एसोसिएशन में भी इस पर चर्चा हो, लेकिन कभी ना कभी इस दिशा में सोचना होगा। लेकिन ये तब होगा, केवल उस पर लिख दिया ‘मेड इन गुजरात, इंडिया’ उससे काम नहीं होता है। हमें हमारी प्रोडक्ट की क्वालिटी के विषय में कोई कॉम्प्रोमाइज नहीं रहने देने के नॉर्म्स बनाने पड़ेंगे। जीरो डिफैक्ट, हम जो भी मैन्यूफक्चर करते हैं, जो भी प्रोडक्ट करते हैं, उसमें अगर जीरो डिफैक्ट होगा तब जाकर दुनिया में हम खड़े हो सकते हैं, हम जो प्रोडक्ट करते हैं वो कॉस्ट इफैक्टिव है तो दुनिया में जाकर हम खड़े हो सकते हैं, हम जो प्रोडक्ट करते हैं वो टिकाऊ है तो हम दुनिया में जा करके खड़े रह सकते हैं और इसलिए भाईयों-बहनों, हमें उस दिशा में काम करना होगा।

र एक मार्केटेबल चीज आज बाजार में है। आप अगर अपने प्रोडक्ट के साथ ये कहो कि ये एन्वायरमेंट फ्रेन्डली टैक्नोलॉजी से बनी है तो दुनिया का एक बहुत बड़ा वर्ग है जो उसको खरीदता है। आज भी जैसे खान-पान में एक बहुत बड़ा वर्ग तैयार हुआ है, उसको अगर ये कहो कि लीजिए खाइए, तो वो कहेगा कि नहीं-नहीं, अभी मैं खाना खा कर आया हूँ, अभी मेरा मन नहीं करता है। लेकिन उसको अगर आप धीरे से ये कहो कि नहीं-नहीं खाइए ना, ये आर्गेनिक है, तो वो तुरंत कहेगा, अच्छा आर्गेनिक है, लाइए-लाइए..! अब चीजें चल पड़ती हैं भइया, अब उसके पास कोई लेबोरेटरी तो है नहीं कि टेस्ट करेगा कि आर्गेनिक है कि नहीं है, लेकिन वो खाएगा कि आर्गेनिक है..! मित्रों, हमें झूठ नहीं करना है, सही करना है। एन्वायरमेंट फ्रेन्डली टैक्नोलॉजी, ये भी प्रोडक्ट के साथ-साथ बिकने वाली चीज बनने वाली है। दुनिया में हर चीज को देखिए, अच्छा ये एन्वायर फ्रेन्डली टैक्नोलॉजी है तो ठीक है..! और इसलिए मित्रों, दुनिया के मार्केट की जो सोच बदल रही है, कंज्यूमर की जो सोच बदल रही है, उन चीजों को भी हमारी स्मॉल स्केल इन्डस्ट्रीज ग्लोबल विजन के साथ तैयार करे ये मेरा सपना है। वो यहां धौलका-धंधुका में माल बेचे इसके लिए हम इतनी मेहनत नहीं कर रहे हैं, मित्रों। दुनिया के बाजार में छाती पर पैर रख के मेरे गुजरात का व्यापारी माल बेचे इसके लिए हम ये कोशिश कर रहे हैं। विश्व के बाजार में हमें अपना कदम रखना है इसके लिए हमारी कोशिश है। हिन्दुस्तान में तो है, हिन्दुस्तान में तो आपका माल बिकना ही बिकना है, आपकी अपनी एक प्रतिष्ठा है, लेकिन उस दिशा में हम प्रयास करें।

मित्रों, मैं चाहता हूँ कि पूरा दिन इस विषय पर चर्चा होने वाली है, बहुत ही एक्सपर्ट लोगों से हमें मदद मिलने वाली है और इस विधा को हम लगातार आगे बढ़ाना चाहते हैं और मेरा मकसद है मित्रों, नई टैक्नोलॉजी कैसे आए, नए इनोवेशंस कैसे हों, अधिकतम नौजवानों को रोजगार कैसे मिले, इसके लिए अनुकूल स्कूल डेवलपमेंट कैसे हो और हम विश्व के बाजार को अपना माल पहुंचाने के लिए किस प्रकार से एग्रेसिव, प्रो-एक्टिव हो कर के काम करें, हम डिफेंसिव ना हों, उस दिशा में आगे बढ़ें। मेरी आप सब को बहुत-बहुत शुभकामनाएं हैं, धन्यवाद..!

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ഹിമാചല്‍ പ്രദേശിലെ ബിലാസ്പൂരില്‍ വിവിധ വികസന പ്രവര്‍ത്തനങ്ങളുടെ ഉദ്ഘാടന വേളയില്‍ പ്രധാനമന്ത്രി നടത്തിയ പ്രസംഗം
October 05, 2022
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PM dedicates AIIMS Bilaspur to the nation
PM inaugurates Government Hydro Engineering College at Bandla
PM lays foundation stone of Medical Device Park at Nalagarh
PM lays foundation stone of project for four laning of National Highway worth over Rs 1690 crores
“Fortunate to have been a part of Himachal Pradesh's development journey”
“Our government definitely dedicates the project for which we lay the foundation stone”
“Himachal plays a crucial role in 'Rashtra Raksha', and now with the newly inaugurated AIIMS at Bilaspur, it will also play pivotal role in 'Jeevan Raksha'”
“Ensuring dignity of life for all is our government's priority”
“Happiness, convenience, respect and safety of women are the foremost priorities of the double engine government”
“Made in India 5G services have started, and the benefits will be available in Himachal very soon”

ജയ് മാതാ നൈനാ ദേവി !
(പ്രാദേശിക ഭാഷയില്‍ ദസറ ആശംസകള്‍)
 
ഹിമാചല്‍ പ്രദേശ് ഗവര്‍ണര്‍ ശ്രീ രാജേന്ദ്ര അര്‍ലേക്കര്‍ ജി; ഹിമാചല്‍ പ്രദേശിലെ ജനപ്രിയ മുഖ്യമന്ത്രി ശ്രീ ജയ് റാം താക്കൂര്‍ ജി; ഭാരതീയ ജനതാ പാര്‍ട്ടിയുടെ ദേശീയ അധ്യക്ഷന്‍, ഞങ്ങളുടെ വഴികാട്ടിയും ഈ മണ്ണിന്റെ മകനുമായ ശ്രീ ജെ പി നദ്ദ ജി; കേന്ദ്രമന്ത്രിസഭയില്‍ എന്റെ സഹപ്രവര്‍ത്തകനും നമ്മുടെ എംപിയുമായ ശ്രീ അനുരാഗ് താക്കൂര്‍ ജി; ഹിമാചല്‍ പ്രദേശ് ബിജെപി അധ്യക്ഷനും പാര്‍ലമെന്റില്‍ എന്റെ സഹപ്രവര്‍ത്തകനുമായ സുരേഷ് കശ്യപ് ജി; പാര്‍ലമെന്റിലെ സഹപ്രവര്‍ത്തകരായ കിഷന്‍ കപൂര്‍ ജി, സഹോദരി ഇന്ദു ഗോസ്വാമി ജി, ഡോ സിക്കന്ദര്‍ കുമാര്‍ ജി; മറ്റ് മന്ത്രിമാര്‍, എംപിമാര്‍, എംഎല്‍എമാര്‍, ഞങ്ങളെ എല്ലാവരെയും അനുഗ്രഹിക്കാന്‍ കൂട്ടത്തോടെ എത്തിയ എന്റെ പ്രിയ സഹോദരീ സഹോദരന്മാരേ! വിജയദശമിയുടെ ഈ വേളയില്‍ നിങ്ങള്‍ക്കും എല്ലാ ദേശവാസികള്‍ക്കും ആശംസകള്‍!
എല്ലാ തിന്മകളെയും അതിജീവിച്ച് രാജ്യം 'അമൃതകാല'ത്തിനായി എടുത്ത അഞ്ച് 'പ്രാണങ്ങള്‍' അല്ലെങ്കില്‍ പ്രതിജ്ഞകള്‍ പൂര്‍ത്തീകരിക്കാനുള്ള പാതയില്‍ മുന്നേറാന്‍ ഈ മഹത്തായ ഉത്സവം നമുക്ക് ഒരു പുത്തന്‍ ഊര്‍ജ്ജം നല്‍കും. വിജയദശമി ദിനത്തില്‍, ആയിരക്കണക്കിന് കോടി രൂപയുടെ ആരോഗ്യം, വിദ്യാഭ്യാസം, തൊഴില്‍, അടിസ്ഥാന സൗകര്യങ്ങള്‍ എന്നിവയുമായി ബന്ധപ്പെട്ട പദ്ധതികള്‍ ഹിമാചല്‍ പ്രദേശിലെ ജനങ്ങള്‍ക്ക് മുന്നില്‍ അവതരിപ്പിക്കാന്‍ എനിക്ക് അവസരം ലഭിച്ചതില്‍ ഞാന്‍ ഭാഗ്യവാനാണ്. യാദൃശ്ചികമായി, വിജയദശമി ആയതിനാല്‍ വിജയത്തിന്റെ മുഴക്കങ്ങള്‍ മുഴങ്ങാന്‍ നമുക്ക് അവസരവും ലഭിച്ചിരിക്കുന്നു. മാത്രമല്ല, ഭാവിയിലെ എല്ലാ വിജയങ്ങളുടെയും തുടക്കം കുറിക്കുന്നു. ബിലാസ്പൂരിന് രണ്ട് സമ്മാനങ്ങളാണു ലഭിക്കുന്നത്; ഒന്ന് വിദ്യാഭ്യാസവുമായി ബന്ധപ്പെട്ടതും മറ്റൊന്ന് ആരോഗ്യ സംരക്ഷണവുമായി ബന്ധപ്പെട്ടതുമാണ്. ഒന്ന് ഹൈഡ്രോ കോളേജ്, മറ്റൊന്ന് എയിംസ്.

സഹോദരീ സഹോദരന്‍മാരേ,


ജയറാം ജി സൂചിപ്പിച്ചതുപോലെ, ഈ വികസന പദ്ധതികള്‍ ഇവിടെ നിങ്ങള്‍ക്ക് കൈമാറിയ ശേഷം, മറ്റൊരു സാംസ്‌കാരിക പൈതൃകത്തിന് സാക്ഷ്യം വഹിക്കാനാണ് ഞാന്‍ പോകുന്നത്. വര്‍ഷങ്ങള്‍ക്ക് ശേഷം ഒരിക്കല്‍ കൂടി കുളു ദസറയുടെ ഭാഗമാകാനുള്ള ഭാഗ്യം എനിക്കുണ്ടാകും. ഭഗവാന്‍ രഘുനാഥ് ജിയുടെയും നൂറുകണക്കിന് മറ്റ് ദേവതകളുടെയും ദസറ രഥയാത്രയില്‍ പങ്കെടുത്ത് ഞാന്‍ രാജ്യത്തിന് അനുഗ്രഹം തേടും. ഇന്ന് ഞാന്‍ ഇവിടെ ബിലാസ്പൂരില്‍ എത്തിയപ്പോള്‍ എന്റെ പഴയ ഓര്‍മ്മകള്‍ പുതുക്കി. ഞങ്ങള്‍ ഈ പ്രദേശത്ത് കറങ്ങി നടന്നിരുന്ന ഒരു കാലമുണ്ടായിരുന്നു. ചിലപ്പോള്‍ ഞാനും ധുമല്‍ ജിയും നദ്ദ ജിയും ചന്തയിലൂടെ നടക്കുമായിരുന്നു. ഞങ്ങള്‍ ബിലാസ്പൂരിലെ തെരുവുകളിലൂടെ ഒരു വലിയ രഥയാത്ര പരിപാടിയുമായി കടന്നുപോയി. തുടര്‍ന്ന് സ്വര്‍ണജയന്തി രഥയാത്രയും പ്രധാന അങ്ങാടിയിലൂടെ കടന്ന് പൊതുസമ്മേളനം നടത്തി. പിന്നെ ഞാന്‍ പലതവണ ഇവിടെ വന്നിട്ടുണ്ട്, നിങ്ങളുടെ എല്ലാവരുടെയും ഇടയില്‍ ഉണ്ടായിരുന്നു.
ഹിമാചലില്‍ ജോലി ചെയ്യുമ്പോള്‍ തുടര്‍ച്ചയായി ഹിമാചലിന്റെ വികസന പ്രയാണത്തിന് സാക്ഷിയാകാന്‍ എനിക്ക് അവസരം ലഭിച്ചു. ഞാന്‍ മുമ്പത്തെ പ്രസംഗങ്ങള്‍ കേള്‍ക്കുകയായിരുന്നു. മോദി ജി ഇത് ചെയ്തു, അത് ചെയ്തു എന്ന് അനുരാഗ് ജി വളരെ ആവേശത്തോടെ സംസാരിച്ചു. നദ്ദാജിയും നമ്മുടെ മുഖ്യമന്ത്രി ജയറാം ജിയും പോലും മോദിജി ഇതും ചെയ്തുവെന്നും പറഞ്ഞുകൊണ്ടിരുന്നു. എന്നാല്‍ ഞാന്‍ സത്യം പറയട്ടെ. ആരാണ് ഈ കാര്യങ്ങള്‍ ചെയ്തത്? ഞാന്‍ പറയണോ? ഇന്ന് എന്ത് സംഭവിച്ചാലും നിങ്ങളൊക്കെ കാരണമാണ്. നിങ്ങള്‍ അത് ചെയ്തു. നിങ്ങള്‍ കാരണമാണ് അത് സംഭവിച്ചത്. നിങ്ങള്‍ ഡല്‍ഹിയില്‍ മോദിജിക്ക് മാത്രം അനുഗ്രഹം ചൊരിയുകയും മോദിജിയുടെ ഹിമാചല്‍ പ്രദേശിലെ സഹപ്രവര്‍ത്തകര്‍ക്കുമേല്‍ ഉണ്ടാകാതിരിക്കുകയുമായിരുന്നു എങ്കില്‍, ഇവിടുത്തെ എല്ലാ പ്രവൃത്തികള്‍ക്കും പദ്ധതികള്‍ക്കും തടസ്സങ്ങളും തടസ്സങ്ങളും ഉണ്ടാകുമായിരുന്നു. ഡല്‍ഹിയില്‍ വിഭാവനം ചെയ്യുന്ന പദ്ധതികള്‍ ഇവിടെ അതിവേഗം നടപ്പാക്കുന്നത് ജയറാം ജിയും സംഘവും കാരണമാണ്. അതുകൊണ്ടാണ് ഈ മാറ്റം സംഭവിക്കുന്നത്. നിങ്ങളുടെ 'ഓരോ വോട്ടിന്റെയും' ശക്തി കൊണ്ടാണ് ഈ എയിംസ് നിര്‍മ്മിച്ചത്.
ഒരു തുരങ്കം നിര്‍മ്മിക്കപ്പെട്ടാല്‍ അത് നിങ്ങളുടെ വോട്ടിന്റെ ശക്തി കൊണ്ടാണ്; ഹൈഡ്രോ എഞ്ചിനീയറിംഗ് കോളേജ് സ്ഥാപിക്കുകയാണെങ്കില്‍, അത് നിങ്ങളുടെ വോട്ടിന്റെ ശക്തിയാണ്; ഒരു മെഡിക്കല്‍ ഉപകരണ പാര്‍ക്ക് സ്ഥാപിക്കുകയാണെങ്കില്‍, അത് വീണ്ടും നിങ്ങളുടെ ശക്തി മൂലമാണ്. 'ഓരോ ഒറ്റ വോട്ടിനും' അധികാരമുണ്ട്. അതുകൊണ്ട് ഇന്ന് ഹിമാചല്‍ പ്രദേശിന്റെ പ്രതീക്ഷകള്‍ കണക്കിലെടുത്ത് ഞാന്‍ ഒന്നിന് പുറകെ ഒന്നായി വികസന പദ്ധതികള്‍ ആരംഭിക്കുകയാണ്.
വികസനവുമായി ബന്ധപ്പെട്ട് വികലമായ ചിന്താഗതി രാജ്യത്ത് നിലനില്‍ക്കുന്നത് ഏറെക്കാലമായി നാം കണ്ടു. എന്തായിരുന്നു ഈ ചിന്ത? 'നല്ല റോഡുകള്‍ ഏതാനും സംസ്ഥാനങ്ങളിലും ചില വലിയ നഗരങ്ങളിലും ഡല്‍ഹിക്ക് ചുറ്റുമായി മാത്രമേ ഉണ്ടാകാവൂ; എല്ലാ മുന്‍നിര വിദ്യാഭ്യാസ സ്ഥാപനങ്ങളും വന്‍ നഗരങ്ങളിലായിരിക്കണം; എല്ലാ നല്ല ആശുപത്രികളും ഡല്‍ഹിയിലായിരിക്കണം, മറ്റെവിടെയുമല്ല; വന്‍കിട വ്യവസായങ്ങളും ബിസിനസ്സുകളും വലിയ നഗരങ്ങളില്‍ സ്ഥാപിക്കണം'. വാസ്തവത്തില്‍, രാജ്യത്തിന്റെ മലയോര മേഖലകളിലെ അടിസ്ഥാന സൗകര്യങ്ങള്‍ വര്‍ഷങ്ങളുടെ കാത്തിരിപ്പിന് ശേഷമാണ് ഒടുവില്‍ എത്തിച്ചേരുന്നത്. ആ പഴയ ചിന്തയുടെ ഫലം, അത് രാജ്യത്ത് വികസനത്തിന്റെ വലിയ അസന്തുലിതാവസ്ഥ സൃഷ്ടിച്ചു എന്നതാണ്. ഇതുമൂലം രാജ്യത്തിന്റെ വലിയൊരു ഭാഗം അസൗകര്യത്തിലാണ് ജീവിച്ചത്.
കഴിഞ്ഞ 8 വര്‍ഷത്തിനിടയില്‍, രാജ്യം ഇപ്പോള്‍ ആ പഴയ ചിന്തയെ ഉപേക്ഷിച്ച് ഒരു പുതിയ ചിന്തയുമായി, ആധുനിക ചിന്തയുമായി മുന്നോട്ട് പോകുന്നു. ഞാന്‍ ഇവിടെ വരുമ്പോഴെല്ലാം, ഇവിടെയുള്ള ആളുകള്‍ ഒരു സര്‍വകലാശാലയെ മാത്രം ആശ്രയിക്കുന്നത് ഞാന്‍ നിരന്തരം ശ്രദ്ധിക്കാറുണ്ടായിരുന്നു. ചികിത്സയുടെയോ മെഡിക്കല്‍ വിദ്യാഭ്യാസത്തിന്റെയോ കാര്യത്തില്‍, ആളുകള്‍ ഐജിഎംസി ഷിംലയെയോ ടാറ്റ മെഡിക്കല്‍ കോളേജിനെയോ ആശ്രയിച്ചു. ഗുരുതരമായ രോഗങ്ങളെക്കുറിച്ചോ വിദ്യാഭ്യാസത്തെക്കുറിച്ചോ ജോലിയെക്കുറിച്ചോ പറഞ്ഞാല്‍, ഹിമാചലിലെ ജനങ്ങള്‍ ചണ്ഡീഗഡിലേക്കും ഡല്‍ഹിയിലേക്കും പോകാന്‍ നിര്‍ബന്ധിതരായിരുന്നു. എന്നാല്‍ കഴിഞ്ഞ എട്ട് വര്‍ഷത്തിനുള്ളില്‍ നമ്മുടെ ഇരട്ട എന്‍ജിന്‍ ഗവണ്‍മെന്റ് ഹിമാചലിന്റെ വികസന ഗാഥയെ ഒരു പുതിയ മാനത്തിലേക്ക് കൊണ്ടുപോയി. ഇന്ന് ഹിമാചലില്‍ കേന്ദ്ര സര്‍വകലാശാല, ഐഐടി, ഐഐഐടി, ഇന്ത്യന്‍ ഇന്‍സ്റ്റിറ്റ്യൂട്ട് ഓഫ് മാനേജ്മെന്റ് (ഐഐഎം) എന്നിവയും ഉണ്ട്. ഇപ്പോള്‍ രാജ്യത്തെ ഏറ്റവും വലിയ മെഡിക്കല്‍ വിദ്യാഭ്യാസ, ആരോഗ്യ സ്ഥാപനമായ എയിംസ് ബിലാസ്പൂരിലെയും ഹിമാചലിലെയും ജനങ്ങളുടെ അഭിമാനം വര്‍ധിപ്പിക്കുന്നു.
മറ്റൊരു മാറ്റത്തിന്റെ പ്രതീകം കൂടിയാണ് ബിലാസ്പൂര്‍ എയിംസ്. പൂര്‍ണമായും പരിസ്ഥിതി സൗഹൃദമായ ഗ്രീന്‍ എയിംസ് എന്നാണ് ഇത് അറിയപ്പെടുക. കഴിഞ്ഞ സര്‍ക്കാരുകള്‍ തറക്കല്ലിടുകയും തെരഞ്ഞെടുപ്പിന് ശേഷം അതെല്ലാം മറക്കുകയും ചെയ്തിരുന്നതായി നമ്മുടെ സഹപ്രവര്‍ത്തകരെല്ലാം അല്‍പം മുമ്പ് സൂചിപ്പിച്ചിരുന്നു. തറക്കല്ലിട്ടിട്ടും പണി നടക്കാത്ത എല്ലാ പദ്ധതികളും കണ്ടെത്താന്‍ ധുമാല്‍ ജി ഒരിക്കല്‍ ഒരു ഡ്രൈവ് സംഘടിപ്പിച്ചിരുന്നു.
ഞാന്‍ ഒരിക്കല്‍ റെയില്‍വേയെ അവലോകനം ചെയ്തിരുന്നതായി ഇപ്പോഴും ഓര്‍ക്കുന്നു. ഉനയ്ക്ക് സമീപം ഒരു റെയില്‍വേ ലൈന്‍ സ്ഥാപിക്കേണ്ടതായിരുന്നു. 35 വര്‍ഷം മുമ്പാണ് തീരുമാനം. പാര്‍ലമെന്റില്‍ പ്രഖ്യാപനമുണ്ടായെങ്കിലും ഫയല്‍ അടച്ചുപൂട്ടി. ആരാണ് ഹിമാചലിനെ ചോദ്യം ചെയ്യുക? പക്ഷേ ഹിമാചലിന്റെ മകനായ തനിക്ക് ഹിമാചലിനെ മറക്കാനാവില്ല. ഒരു പദ്ധതിയുടെ തറക്കല്ലിട്ടാല്‍ അതിന്റെ ഉദ്ഘാടനവും നടക്കുമെന്നതാണ് നമ്മുടെ ഗവണ്‍മെന്റിന്റെ പ്രത്യേകത. മുടങ്ങിക്കിടന്നതും മന്ദഗതിയിലുള്ളതുമായ പദ്ധതികളുടെ യുഗം ഇല്ലാതായി.

സുഹൃത്തുക്കളേ,

രാഷ്ട്ര പ്രതിരോധത്തില്‍ ഹിമാചലിന് എന്നും വലിയ സംഭാവനയുണ്ട്. രാഷ്ട്രത്തെ സംരക്ഷിക്കുന്ന വീരന്മാരുടെ പേരില്‍രാജ്യമെമ്പാടും അറിയപ്പെടുന്ന ഹിമാചല്‍, അതേ ഹിമാചല്‍ ഇപ്പോള്‍ ഈ എയിംസ് ഉപയോഗിച്ച് ആളുകളുടെ ജീവന്‍ രക്ഷിക്കുന്നതില്‍ പ്രധാന പങ്ക് വഹിക്കാന്‍ പോകുന്നു. 2014 വരെ ഹിമാചലില്‍ 3 മെഡിക്കല്‍ കോളേജുകള്‍ മാത്രമേ ഉണ്ടായിരുന്നുള്ളൂ, അതില്‍ 2 എണ്ണം ഗവണ്‍മെന്റ് ഉടമസ്ഥയില്‍ ആയിരുന്നു. കഴിഞ്ഞ 8 വര്‍ഷത്തിനിടെ ഹിമാചലില്‍ 5 പുതിയ ഗവണ്‍മെന്റ് മെഡിക്കല്‍ കോളേജുകള്‍ സ്ഥാപിച്ചു. 2014 വരെ 500 വിദ്യാര്‍ത്ഥികള്‍ക്ക് മാത്രമേ ബിരുദ-ബിരുദാനന്തര മെഡിക്കല്‍ കോഴ്സുകളില്‍ പഠിക്കാന്‍ കഴിയുമായിരുന്നുള്ളൂ, ഇന്ന് ഈ എണ്ണം 1200-ലധികമായി വര്‍ദ്ധിച്ചു, അതായത് ഇരട്ടിയിലധികം. എല്ലാ വര്‍ഷവും നിരവധി പുതിയ ഡോക്ടര്‍മാര്‍ എയിംസില്‍ നിന്ന് പുറത്തുവരും, നഴ്സിംഗുമായി ബന്ധപ്പെട്ട യുവജനങ്ങള്‍ക്ക് ഇവിടെ പരിശീലനം ലഭിക്കും. ജയറാം ജിയുടെ ടീമിനെയും ജയറാം ജിയെയും കേന്ദ്ര ആരോഗ്യമന്ത്രിയെയും ആരോഗ്യ മന്ത്രാലയത്തെയും ഞാന്‍ പ്രത്യേകം അഭിനന്ദിക്കേണ്ടതുണ്ട്. നദ്ദ ജി ആരോഗ്യമന്ത്രിയായിരിക്കെ ഞങ്ങള്‍ ഈ തീരുമാനം എടുത്തിരുന്നു. അതിനാല്‍, അദ്ദേഹത്തിന് വലിയ ഉത്തരവാദിത്തമുണ്ടായിരുന്നു. ഇവിടെ തറക്കല്ലിട്ടതും ഞാനായിരുന്നു. ഭയങ്കരമായ കൊറോണ മഹാമാരിയുടെ കാലഘട്ടമായിരുന്നു അത്. എല്ലാത്തിനുമുപരി, മലകളില്‍ ഓരോന്നും കൊണ്ടുവന്ന് ഹിമാചലില്‍ നിര്‍മ്മാണ പ്രവര്‍ത്തനങ്ങള്‍ നടത്തുന്നത് ബുദ്ധിമുട്ടാണെന്ന് നമുക്കറിയാം. സമതലങ്ങളില്‍ ഒരു മണിക്കൂര്‍ കൊണ്ട് തീര്‍ക്കുന്ന ജോലി ഇവിടെ മലനിരകളില്‍ പൂര്‍ത്തിയാക്കാന്‍ ഒരു ദിവസമെടുക്കും. എന്നിരുന്നാലും, കൊറോണ മഹാമാരി ഉണ്ടായിട്ടും, കേന്ദ്ര ആരോഗ്യ മന്ത്രാലയവും ജയറാം ജിയുടെ കീഴിലുള്ള സംസ്ഥാന ഗവണ്‍മെന്റിന്റെ സംഘവും എയിംസ് വിജയകരമായി പൂര്‍ത്തിയാക്കി. ഇന്ന് എയിംസും പ്രവര്‍ത്തനം തുടങ്ങി.
മെഡിക്കല്‍ കോളേജ് മാത്രമല്ല, ഞങ്ങള്‍ മറ്റൊരു ദിശയിലേക്കും നീങ്ങി. മരുന്നുകളുടെയും ജീവന്‍രക്ഷാ വാക്സിനുകളുടെയും നിര്‍മ്മാതാവെന്ന നിലയിലുള്ള ഹിമാചലിന്റെ പങ്ക് വളരെയധികം വിപുലീകരിക്കുകയാണ്. ബള്‍ക്ക് ഡ്രഗ് പാര്‍ക്ക് സ്‌കീമിലേക്ക് രാജ്യത്തെ മൂന്ന് സംസ്ഥാനങ്ങളെ മാത്രമേ തിരഞ്ഞെടുത്തിട്ടുള്ളൂ, അവയിലൊന്ന് ഏത് സംസ്ഥാനമാണ്? അതെ, ഹിമാചല്‍ ആണ്. അതില്‍ നിങ്ങള്‍ക്ക് അഭിമാനമുണ്ടോ ഇല്ലയോ? ഇത് നിങ്ങളുടെ കുട്ടികളുടെ ശോഭനമായ ഭാവിയുടെ അടിത്തറയാണോ അല്ലയോ? ഇത് നിങ്ങളുടെ കുട്ടികള്‍ക്ക് ശോഭനമായ ഭാവിയുടെ ഉറപ്പാണോ അല്ലയോ? ഇന്നത്തെ തലമുറയ്ക്കുവേണ്ടി മാത്രമല്ല, വരും തലമുറയ്ക്കുവേണ്ടിയും ഞങ്ങള്‍ ഉത്സാഹത്തോടെ പ്രവര്‍ത്തിക്കുന്നു.
അതുപോലെ, വൈദ്യശാസ്ത്രത്തില്‍ സാങ്കേതികവിദ്യ വ്യാപകമായി ഉപയോഗിക്കുന്ന മെഡിക്കല്‍ ഉപകരണ പാര്‍ക്കിനായി 4 സംസ്ഥാനങ്ങളെ തിരഞ്ഞെടുത്തു. പ്രത്യേക തരം ഉപകരണങ്ങള്‍ നിര്‍മിക്കാന്‍ രാജ്യത്ത് നാല് സംസ്ഥാനങ്ങളെ തിരഞ്ഞെടുത്തിട്ടുണ്ട്. ഇന്ത്യ വലിയ ജനസംഖ്യയുള്ള ഒരു വലിയ രാജ്യമാണ്. അതേസമയം ഹിമാചല്‍ വളരെ ചെറിയ സംസ്ഥാനമാണ്. പക്ഷേ, ഇത് വീരന്മാരുടെ നാടാണ്, എന്റെ വിഹിതം ഈ സ്ഥലത്ത് ഞാന്‍ കഴിച്ചിട്ടുണ്ട്. അതിനാല്‍, എനിക്ക് അതു തിരികെ നല്‍കണം. നാലാമത്തെ മെഡിക്കല്‍ ഉപകരണ പാര്‍ക്ക് എവിടെയാണ് നിര്‍മ്മിക്കുന്നതെന്ന് നിങ്ങള്‍ക്ക് ഊഹിക്കാന്‍ കഴിയുമോ? സുഹൃത്തുക്കളേ, നാലാമത്തെ മെഡിക്കല്‍ ഉപകരണ പാര്‍ക്ക് ഹിമാചലില്‍ നിര്‍മ്മിക്കുന്നു. ലോകത്തിന്റെ വിവിധ ഭാഗങ്ങളില്‍ നിന്നുള്ള വിവിധ വമ്പന്മാരും ഇവിടെയെത്തും. ഈ പദ്ധതിയുടെ ഭാഗമാണ് നാലഗഡിലെ ഈ മെഡിക്കല്‍ ഉപകരണ പാര്‍ക്കിന്റെ ശിലാസ്ഥാപനം. ഈ ഉപകരണ പാര്‍ക്കിന്റെ നിര്‍മാണത്തിനായി ആയിരക്കണക്കിന് കോടി രൂപ ഇവിടെ നിക്ഷേപിക്കും. ഇതുമായി ബന്ധപ്പെട്ട നിരവധി ചെറുകിട ഇടത്തരം സംരംഭങ്ങള്‍ സമീപത്ത് വികസിക്കും. ഇത് ആയിരക്കണക്കിന് യുവാക്കള്‍ക്ക് ഇവിടെ തൊഴിലവസരങ്ങള്‍ നല്‍കും.

സുഹൃത്തുക്കളേ,


വികസനത്തിന്റെ അനന്ത സാധ്യതകള്‍ മറഞ്ഞിരിക്കുന്ന ഹിമാചലിന്റെ മറ്റൊരു വശമുണ്ട്, അതാണ് മെഡിക്കല്‍ ടൂറിസം. ഇവിടുത്തെ കാലാവസ്ഥ, അന്തരീക്ഷം, പരിസ്ഥിതി, ഔഷധസസ്യങ്ങള്‍ എന്നിവ നല്ല ആരോഗ്യത്തിന് അനുയോജ്യമാണ്. മെഡിക്കല്‍ ടൂറിസത്തിന്റെ കാര്യത്തില്‍ ഇന്ത്യ ഇന്ന് ലോകത്തിന്റെ പ്രധാന ആകര്‍ഷണ കേന്ദ്രമായി മാറുകയാണ്. രാജ്യത്തെയും ലോകത്തെയും ആളുകള്‍ വൈദ്യചികിത്സയ്ക്കായി ഇന്ത്യയിലേക്ക് വരാന്‍ ആഗ്രഹിക്കുമ്പോള്‍, ഈ സ്ഥലത്തിന്റെ പ്രകൃതി സൗന്ദര്യം കാരണം അവര്‍ ഇവിടം സന്ദര്‍ശിക്കാന്‍ ആഗ്രഹിക്കുന്നു. ഒരു വിധത്തില്‍ പറഞ്ഞാല്‍, അവര്‍ക്ക് രണ്ട് തരത്തില്‍ പ്രയോജനം ലഭിക്കും, ഒന്ന് ആരോഗ്യം, മറ്റൊന്ന് വിനോദസഞ്ചാരം. അതിനാല്‍, ഹിമാചല്‍ രണ്ട് വഴികളിലും ലാഭമുണ്ടാക്കുന്നു.

സുഹൃത്തുക്കളേ,


പാവപ്പെട്ടവരുടെയും ഇടത്തരക്കാരുടെയും ചികിത്സാച്ചെലവ് പരമാവധി കുറയ്ക്കാനും ചികിത്സയുടെ ഗുണനിലവാരം മെച്ചപ്പെടാനും അടുത്തടുത്ത് ചികിത്സ ലഭ്യമാക്കാനുമാണ് കേന്ദ്രഗവണ്‍മെന്റു ശ്രമിക്കുന്നത്. അതുകൊണ്ട് ഇന്ന് ഞങ്ങള്‍ എയിംസ് മെഡിക്കല്‍ കോളേജ്, ജില്ലാ ആശുപത്രികളിലെ ക്രിട്ടിക്കല്‍ കെയര്‍ സൗകര്യങ്ങള്‍, ഗ്രാമങ്ങളില്‍ ആരോഗ്യ, പരിരക്ഷാ കേന്ദ്രങ്ങള്‍ എന്നിവ നിര്‍മ്മിച്ച് തടസ്സമില്ലാത്ത കണക്റ്റിവിറ്റിക്കായി പ്രവര്‍ത്തിക്കുന്നു. ഈ വശങ്ങള്‍ ഇപ്പോള്‍ ഊന്നിപ്പറയുന്നു. ആയുഷ്മാന്‍ ഭാരത് പദ്ധതി പ്രകാരം ഹിമാചലിലെ ഭൂരിഭാഗം കുടുംബങ്ങള്‍ക്കും 5 ലക്ഷം രൂപ വരെ സൗജന്യ ചികിത്സയാണ് ലഭിക്കുന്നത്.
ഈ പദ്ധതി പ്രകാരം ഇതുവരെ 3 കോടി 60 ലക്ഷം പാവപ്പെട്ട രോഗികള്‍ക്ക് രാജ്യത്തുടനീളം സൗജന്യ ചികിത്സ നല്‍കി. ഇതില്‍ 1.5 ലക്ഷം ഗുണഭോക്താക്കള്‍ ഹിമാചലില്‍ നിന്നുള്ളവരാണ്. ഇതുവരെ 45,000 കോടിയിലധികം രൂപയാണ് രാജ്യത്ത് ഇവരുടെയെല്ലാം ചികിത്സയ്ക്കായി ഗവണ്‍മെന്റ് ചെലവഴിച്ചത്. ആയുഷ്മാന്‍ ഭാരത് പദ്ധതി ഇല്ലായിരുന്നുവെങ്കില്‍, ഈ പാവപ്പെട്ട കുടുംബങ്ങള്‍ക്ക് അതിന്റെ ഇരട്ടിയോളം, അതായത് ഏകദേശം 90,000 കോടി രൂപ അവരുടെ പോക്കറ്റില്‍ നിന്ന് ചികിത്സയ്ക്കായി നല്‍കേണ്ടിവരുമായിരുന്നു. അതായത്, ദരിദ്രരും ഇടത്തരക്കാരുമായ കുടുംബങ്ങള്‍ക്ക് മികച്ച ചികിത്സ ലഭിക്കുന്നു, ആരോഗ്യ സംരക്ഷണത്തിനായി ഇത്രയും പണം ലാഭിക്കുന്നു.

സുഹൃത്തുക്കളേ,


മറ്റൊരു കാരണത്താല്‍ ഞാന്‍ സന്തോഷിക്കുന്നു. ഇത്തരം ഗവണ്‍മെന്റ് പദ്ധതികള്‍ കൊണ്ട് ഏറ്റവും കൂടുതല്‍ പ്രയോജനം നേടിയത് നമ്മുടെ അമ്മമാരും സഹോദരിമാരും പെണ്‍മക്കളുമാണ്. ശരീരത്തില്‍ ഒരുപാട് വേദനകളും ബുദ്ധിമുട്ടുകളും ഉണ്ടായിട്ടും നമ്മുടെ അമ്മയ്ക്കും സഹോദരിമാര്‍ക്കും അതിനെക്കുറിച്ച് മിണ്ടാതിരിക്കുന്ന സ്വഭാവമുണ്ടെന്ന് നമുക്കറിയാം. കുടുംബത്തില്‍ ആരോടും പറയാറില്ല. അവര്‍ വേദന സഹിക്കുന്നു, ജോലി തുടരുന്നു; അവര്‍ മുഴുവന്‍ കുടുംബത്തെയും പരിപാലിക്കുന്നു. വീട്ടുകാര്‍ രോഗവിവരം അറിയുകയോ കുട്ടികള്‍ അറിയുകയോ ചെയ്താല്‍ പിന്നെ കടം വാങ്ങി ചികിത്സ നല്‍കുമെന്ന തോന്നലാണ് കാരണം. അസുഖം സഹിക്കാമെന്നും എന്നാല്‍ മക്കളെ കടക്കെണിയിലാക്കാന്‍ അനുവദിക്കില്ലെന്നും അമ്മ കരുതുന്നു. അതിനാല്‍ അവള്‍ ആശുപത്രികളില്‍ പണം ചെലവഴിക്കില്ല. ഈ അമ്മമാരെക്കുറിച്ച് ആരു ചിന്തിക്കും? ഈ അമ്മമാര്‍ നിശ്ശബ്ദരായി ഇത്തരം ദുരിതങ്ങള്‍ അനുഭവിക്കണോ? പിന്നെ എന്നെപ്പോലൊരു മകനെക്കൊണ്ട് എന്ത് പ്രയോജനം? അതിനാല്‍, എന്റെ അമ്മമാര്‍ക്കും സഹോദരിമാര്‍ക്കും രോഗങ്ങളുടെ ഭാരത്താല്‍ ജീവിക്കേണ്ടിവരാതിരിക്കാനാണ് ആയുഷ്മാന്‍ ഭാരത് പദ്ധതിയും അതേ ആവേശത്തില്‍ പിറന്നത്. ആയുഷ്മാന്‍ ഭാരത് പദ്ധതിയുടെ ഗുണഭോക്താക്കളില്‍ 50 ശതമാനത്തിലധികം അമ്മമാരും സഹോദരിമാരുമാണ്.
 
സുഹൃത്തുക്കളേ,


കക്കൂസുകള്‍ നിര്‍മിക്കാനുള്ള ശുചിത്വഭാരത് അഭിയാന്‍ ആയാലും, സൗജന്യ ഗ്യാസ് കണക്ഷന്‍ നല്‍കുന്ന ഉജ്ജ്വല പദ്ധതി ആയാലും, സൗജന്യ സാനിറ്ററി നാപ്കിനുകള്‍ നല്‍കുന്ന പ്രചാരണമായാലും, മാതൃ വന്ദന യോജനയുടെ കീഴില്‍ എല്ലാ ഗര്‍ഭിണികള്‍ക്കും പോഷക സമൃദ്ധമായ ഭക്ഷണത്തിന് ആയിരക്കണക്കിന് രൂപയുടെ സഹായമായാലും, വീടുകളില്‍ ടാപ്പു വെള്ളം വിതരണം ചെയ്യുന്നതിനുള്ള ഞങ്ങളുടെ പ്രചാരണമായാലും, എന്റെ അമ്മമാരെയും സഹോദരിമാരെയും ശാക്തീകരിക്കുന്നതിനായി ഞങ്ങള്‍ ഈ ജോലികളെല്ലാം ഒന്നിനുപുറകെ ഒന്നായി ചെയ്യുന്നു. അമ്മമാരുടെയും സഹോദരിമാരുടെയും പെണ്‍മക്കളുടെയും സന്തോഷം, സൗകര്യം, ബഹുമാനം, സുരക്ഷ, ആരോഗ്യം എന്നിവയാണ് ഇരട്ട എഞ്ചിന്‍ ഗവണ്‍മെന്റിന്റെ ഏറ്റവും വലിയ മുന്‍ഗണന.
ജയറാം ജിയും അദ്ദേഹത്തിന്റെ മുഴുവന്‍ സംഘവും കേന്ദ്രസര്‍ക്കാര്‍ ആവിഷ്‌കരിച്ച പദ്ധതികള്‍ വളരെ വേഗത്തില്‍ യാഥാര്‍ത്ഥ്യമാക്കി. അത് നമ്മുടെ എല്ലാവരുടെയും മുന്നിലാണു ചെയ്തത്. എല്ലാ വീടുകളിലും പൈപ്പ് വെള്ളം എത്തിക്കുന്ന ജോലികള്‍ അതിവേഗം പൂര്‍ത്തിയാക്കി. കഴിഞ്ഞ 7 പതിറ്റാണ്ടിനിടയില്‍ ഹിമാചലില്‍ നല്‍കിയിരുന്നതിന്റെ ഇരട്ടിയിലധികം ടാപ്പ് കണക്ഷനുകള്‍ കഴിഞ്ഞ 3 വര്‍ഷത്തിനിടെ ഞങ്ങള്‍ നല്‍കിയിട്ടുണ്ട്. ഈ മൂന്ന് വര്‍ഷത്തിനുള്ളില്‍ 8.5 ലക്ഷത്തിലധികം പുതിയ കുടുംബങ്ങള്‍ക്ക് പൈപ്പ് വെള്ള സൗകര്യം ലഭിച്ചു.

സഹോദരീ സഹോദരന്മാരേ,


മറ്റൊരു കാര്യത്തിന് രാജ്യം ജയറാം ജിയെയും അദ്ദേഹത്തിന്റെ ടീമിനെയും വളരെയധികം അഭിനന്ദിക്കുന്നു. അത് സാമൂഹിക സുരക്ഷയുമായി ബന്ധപ്പെട്ട കേന്ദ്രഗവണ്‍മെന്റിന്റെ ശ്രമങ്ങള്‍ വിപുലപ്പെടുത്തുന്നതിനാണ്. ഇന്ന്, ഒരാള്‍ക്ക് അല്ലെങ്കില്‍ മറ്റൊരാള്‍ക്ക് പെന്‍ഷന്‍ സൗകര്യം ലഭിക്കാത്ത ഒരു കുടുംബവും ഹിമാചലില്‍ ഇല്ല. ഇത്തരം കുടുംബങ്ങള്‍ക്ക്, പ്രത്യേകിച്ച് അവശതയനുഭവിക്കുന്നവര്‍ക്കും ഗുരുതരമായ അസുഖങ്ങള്‍ ബാധിച്ചവര്‍ക്കും പെന്‍ഷന്‍, ചികിത്സാ ചെലവുകള്‍ എന്നിവയുമായി ബന്ധപ്പെട്ട സഹായങ്ങള്‍ നല്‍കാനുള്ള ശ്രമങ്ങള്‍ പ്രശംസനീയമാണ്. ഹിമാചല്‍ പ്രദേശിലെ ആയിരക്കണക്കിന് കുടുംബങ്ങള്‍ 'വണ്‍ റാങ്ക് വണ്‍ പെന്‍ഷന്‍' നടപ്പാക്കിയതിലൂടെ വളരെയധികം പ്രയോജനം നേടിയിട്ടുണ്ട്.
 
സുഹൃത്തുക്കളേ,


അവസരങ്ങളുടെ നാടാണ് ഹിമാചല്‍. ജയറാം ജിയെ ഒരിക്കല്‍ കൂടി അഭിനന്ദിക്കാന്‍ ഞാന്‍ ആഗ്രഹിക്കുന്നു. രാജ്യത്തുടനീളം പ്രതിരോധ കുത്തിവയ്പു ജോലികള്‍ നടക്കുന്നുണ്ടെങ്കിലും നിങ്ങളുടെ സുരക്ഷയ്ക്കായി 100% വാക്‌സിനേഷന്‍ പൂര്‍ത്തിയാക്കിയ രാജ്യത്തെ ആദ്യത്തെ സംസ്ഥാനമാണ് ഹിമാചല്‍. അതിനാല്‍, അശ്രദ്ധമായ ജോലികള്‍ക്ക് ഇടമില്ല. തീരുമാനിച്ചുകഴിഞ്ഞാല്‍ അത് ചെയ്യണം.
ഇവിടെ ജലവൈദ്യുതിയില്‍ നിന്നാണ് വൈദ്യുതി ഉത്പാദിപ്പിക്കുന്നത്. പഴങ്ങള്‍ക്കും പച്ചക്കറികള്‍ക്കും ഫലഭൂയിഷ്ഠമായ ഭൂമിയുണ്ട്. ടൂറിസം ഇവിടെ അനന്തമായ തൊഴിലവസരങ്ങള്‍ പ്രദാനം ചെയ്യുന്നു. മെച്ചപ്പെട്ട കണക്റ്റിവിറ്റിയുടെ അഭാവമായിരുന്നു ഈ അവസരങ്ങള്‍ക്ക് മുന്നിലുള്ള ഏറ്റവും വലിയ തടസ്സം. 2014 മുതല്‍, ഹിമാചല്‍ പ്രദേശിലെ എല്ലാ ഗ്രാമങ്ങളിലും മികച്ച അടിസ്ഥാന സൗകര്യങ്ങള്‍ കൊണ്ടുവരാനുള്ള ശ്രമങ്ങള്‍ നടക്കുന്നുണ്ട്. ഇന്ന് ഹിമാചലിലെ റോഡുകളുടെ വീതി കൂട്ടുന്ന ജോലിയും എല്ലായിടത്തും നടക്കുന്നുണ്ട്. നിലവില്‍ 50,000 കോടി രൂപയാണ് ഹിമാചലിലെ കണക്ടിവിറ്റി പദ്ധതികള്‍ക്കായി ചെലവഴിക്കുന്നത്. പിഞ്ചോര്‍ മുതല്‍ നലഗഡ് വരെയുള്ള നാലുവരി പാതയുടെ പ്രവൃത്തി പൂര്‍ത്തിയാകുമ്പോള്‍, നലഗഡ്, ബഡ്ഡി തുടങ്ങിയ വ്യവസായ മേഖലകള്‍ക്ക് മാത്രമല്ല, ചണ്ഡീഗഡ്, അംബാല എന്നിവിടങ്ങളില്‍ നിന്ന് ബിലാസ്പൂര്‍, മാണ്ഡി, മണാലി എന്നിവിടങ്ങളിലേക്കുള്ള യാത്രക്കാര്‍ക്കും പ്രയോജനം ലഭിക്കും. മാത്രമല്ല, വളഞ്ഞ റോഡുകളില്‍ നിന്ന് ഹിമാചലിലെ ജനങ്ങളെ മോചിപ്പിക്കാന്‍ തുരങ്കങ്ങളുടെ ഒരു ശൃംഖലയും സ്ഥാപിക്കുന്നുണ്ട്.

സുഹൃത്തുക്കളേ,

ഡിജിറ്റല്‍ കണക്ടിവിറ്റിയുടെ കാര്യത്തില്‍ ഹിമാചലിലും അഭൂതപൂര്‍വമായ പ്രവര്‍ത്തനങ്ങള്‍ നടന്നിട്ടുണ്ട്. കഴിഞ്ഞ 8 വര്‍ഷത്തിനുള്ളില്‍, 'ഇന്ത്യയില്‍ നിര്‍മിച്ച' മൊബൈല്‍ ഫോണുകള്‍ക്കു വിലകുറഞ്ഞതു മാത്രമല്ല, നെറ്റ്വര്‍ക്ക് എല്ലാ ഗ്രാമങ്ങളിലും എത്തിയിട്ടുമുണ്ട്. മികച്ച 4ജി കണക്റ്റിവിറ്റി കാരണം ഹിമാചല്‍ പ്രദേശും ഡിജിറ്റല്‍ ഇടപാടുകളുടെ കാര്യത്തില്‍ വളരെ വേഗത്തില്‍ മുന്നേറുകയാണ്. 'ഡിജിറ്റല്‍ ഇന്ത്യ' പ്രചാരണപരിപാടിയുടെ പരമാവധി നേട്ടം ഹിമാചലിലെ എന്റെ സഹോദരീസഹോദരന്മാരാണ് കൊയ്യുന്നത്. ബില്ലുകള്‍ അടയ്ക്കുക, അല്ലെങ്കില്‍ ബാങ്കുമായി ബന്ധപ്പെട്ട ജോലികള്‍, അഡ്മിഷന്‍, അപേക്ഷകള്‍ എന്നിങ്ങനെ എല്ലാ ചെറിയ ജോലികള്‍ക്കും ആളുകള്‍ക്ക് സമതലത്തില്‍ സ്ഥിതി ചെയ്യുന്ന ഓഫീസുകളില്‍ പോകേണ്ടി വന്നിരുന്നു. അതിന് ഒരു ദിവസമോ മറ്റോ സമയമെടുക്കുമായിരുന്നു. ചിലപ്പോള്‍ ഒരാള്‍ക്ക് രാത്രി താമസിക്കേണ്ടിവന്നു. ഇപ്പോള്‍ രാജ്യത്ത് ആദ്യമായി 'ഇന്ത്യന്‍ നിര്‍മിത' 5G സേവനങ്ങളും ആരംഭിച്ചു, ഇതിന്റെ പ്രയോജനം വളരെ വേഗം ഹിമാചലില്‍ എത്താന്‍ പോകുന്നു.
ഡ്രോണുകള്‍ സംബന്ധിച്ച് ഇന്ത്യ രൂപീകരിച്ചതും മാറ്റിയതുമായ നിയമങ്ങള്‍ക്ക് ഞാന്‍ ഹിമാചലിനെ അഭിനന്ദിക്കുന്നു. സംസ്ഥാനത്ത് ഡ്രോണ്‍ നയം രൂപീകരിച്ച രാജ്യത്തെ ആദ്യ സംസ്ഥാനമാണ് ഹിമാചല്‍. ഇപ്പോള്‍ ഗതാഗതത്തിനായി ഡ്രോണുകളുടെ ഉപയോഗം വന്‍തോതില്‍ വര്‍ധിക്കാന്‍ പോകുന്നു. ഉദാഹരണത്തിന്, നമുക്ക് കിന്നൗറില്‍ നിന്ന് ഡ്രോണുകള്‍ ഉപയോഗിച്ച് ഉരുളക്കിഴങ്ങ് എടുത്ത് വളരെ ചുരുങ്ങിയ സമയത്തിനുള്ളില്‍ ഏതെങ്കിലും വലിയ വിപണിയില്‍ എത്തിക്കാം. നമ്മുടെ പഴങ്ങള്‍ നശിക്കുമായിരുന്നു. പക്ഷേ, ഇപ്പോള്‍ ഡ്രോണുകള്‍ ഉപയോഗിച്ച് എടുക്കാം. വരുംദിവസങ്ങളില്‍ നിരവധി നേട്ടങ്ങള്‍ ഉണ്ടാകും. ഓരോ പൗരന്റെയും സൗകര്യം വര്‍ദ്ധിപ്പിക്കുകയും ഓരോ പൗരനെയും സമൃദ്ധിയുമായി ബന്ധപ്പെടുത്തുകയും ചെയ്യുന്ന ഇത്തരത്തിലുള്ള വികസനത്തിനാണ് ഞങ്ങള്‍ പരിശ്രമിക്കുന്നത്. ഇത് 'വികസിത ഇന്ത്യ'യുടെയും വികസിത ഹിമാചല്‍ പ്രദേശിന്റെയും ദൃഢനിശ്ചയം നിറവേറ്റും.
വിജയദശമി മഹോത്സവത്തില്‍ നിങ്ങളുടെ എല്ലാവരുടെയും അനുഗ്രഹാശിസ്സുകള്‍ക്ക് നടുവില്‍ വിജയത്തിന്റെ മുഴക്കങ്ങള്‍ മുഴക്കാന്‍ എനിക്ക് അവസരം ലഭിച്ചതില്‍ ഞാന്‍ സന്തോഷിക്കുന്നു. എയിംസ് ഉള്‍പ്പെടെയുള്ള എല്ലാ വികസന പദ്ധതികള്‍ക്കും ഒരിക്കല്‍ കൂടി ഞാന്‍ നിങ്ങളെ എല്ലാവരെയും അഭിനന്ദിക്കുന്നു. രണ്ട് മുഷ്ടികളും ചുരുട്ടി എന്നോട് ഉറക്കെ പറയൂ:
 
ഭാരത് മാതാ കീ ജയ്! ഉറക്കെ പറയൂ -

ഭാരത് മാതാ കീ ജയ്!

ഭാരത് മാതാ കീ ജയ്!

ഭാരത് മാതാ കീ ജയ്!
 
 വളരെയധികം നന്ദി!