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मंच पर विराजमान भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष, हम सबके मार्गदर्शक आदरणीय राजनाथ सिंह जी, गुजरात प्रदेश भारतीय जनता पार्टी के नवनिर्वाचित प्रदेश अध्यक्ष श्रीमान आर. सी. फलदू जी, श्रीमान रूपाला जी, श्री वी. सतीश जी, कैप्टन अभिमन्यु जी, अमितभाई शाह, स्मृति बहन, मंत्री परिषद के मेरे सभी साथी, संसद सदस्य श्री, पार्टी के सभी वरिष्ठ साथी और गुजरात के कोने-कोने से आए हुए पार्टी के सभी कार्यकर्ता भाइयों और बहनों..!

ज 6 अप्रैल है। भारतीय जनता पार्टी के रुप में हमारी विकास यात्रा के 32 वर्ष पूर्ण हो करके 33 वें वर्ष में हम लोग प्रयाण कर रहे हैं। भाइयों-बहनों, 33 वर्ष की यात्रा पूरे हिन्दुस्तान के अंदर एक नई आशा को जन्म देने वाली यात्रा है। भारतीय जनता पार्टी का जन्म उस समय हुआ था जब कुछ निजी स्वार्थ वाले तत्व अपने निहित स्वार्थ के खातिर नए नए सवाल उठा कर के देश में कोई आल्टरनेट पनपे नहीं उस षडयंत्र के शिकार हुए थे। एक सौ से ज्यादा सदस्य वाले सदन में आए दिन भारतीय जनता पार्टी को अपमानित करने का प्रयास होता था। लोकतंत्र की मर्यादाओं को तोड़ा जाता था और उस पीड़ा में से, उस दर्द में से सत्ता के मार्ग को छोड कर के जनता के बीच जाने का फैसला भारतीय जनता पार्टी ने लिया था और तब से हमारे वरिष्ठ नेताओं के नेतृत्व में, कार्यकर्ताओं के अथक परिश्रम से इस पार्टी ने जनसामान्य की आशा-आकांक्षाओं की पूर्ति के लिए प्रयास प्रारंभ किया था। भारतीय जनता पार्टी का जन्म सत्ता भूख में से नहीं हुआ है, भारतीय जनता पार्टी का जन्म सत्ता के दलालों की भलाई करने के लिए नहीं हुआ है। इस पार्टी का जन्म देश के कोटी-कोटी नागरिकों के भाग्य को बदलने के लिए हुआ है, कल्याण के लिए हुआ है। और जब कोई अच्छा काम करता है तो रूकावटें भी कम नहीं आती है। भाइयों-बहनों, कभी मैं केरल की तरफ देखता हूँ। क्या कारण है कि साम्यवादियों के लगातार हमलों के बावजूद भी, हमारे सैंकड़ों कार्यकर्ताओं को मौत के घाट उतारने के बावजूद भी, चाहे केरल हो या बंगाल हो भारतीय जनता पार्टी का कार्यकर्ता जीत मिले या ना मिले, जिंदगी खपा देने में कभी कमी नहीं रखता..! क्या कारण है कि सत्ता के गलियारों से दूर-दूर का नाता नहीं होने के बावजूद भी, एक भारत माता की जय के लिए अपना जीवन न्यौछावर करने वाले लक्षावती लोग आज भारतीय जनता पार्टी का कमल का झंडा उठा कर के चल रहे हैं..!

मैं दिल्ली में बैठे हुए शासकों को चेतावनी देता हूँ कि अगर आप सोचते हैं कि आपकी सी.बी.आई. के हमले भारतीय जनता पार्टी को निराश करेंगे, तो आप सोचने में गलती कर रहे हैं। आपको लगता है कि अपने गर्वनरों के माध्यम से आप भारतीय जनता पार्टी की सरकारों को परेशान करोगे, तो आप लिख कर रखिए, जहाँ भाजपा की सरकारें हैं, वहाँ की जनता दिल्ली सरकार के और काँग्रेस पार्टी के इस रवैये का चुन-चुन के जवाब देती है और देती रहेगी..! सारी संवैधानिक संस्थाओं को भारतीय जनता पार्टी की सरकारो को परेशान करना, भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं को परेशान करना, भारतीय जनता पार्टी के दल को परेशानियों में डालना, इसी के लिए उपयोग में लाया जाता है। कांग्रेस के मित्रों, ये दिल्ली में आपकी सत्ता का नशा लंबे दिनों तक रहने वाला नहीं है..!

भाइयों-बहनों, कांग्रेस में और भारतीय जनता पार्टी में बहुत बड़ा अंतर है। भारतीय जनता पार्टी की सोच और कांग्रेस पार्टी की सोच के बीच कभी कोई मेल नहीं हो सकता। भाजपा के चरित्र और कांग्रेस के चरित्र की कभी कोई तुलना नहीं कर सकता। भाइयो-बहनों, कांग्रेस जिन पर आस लगा कर बैठी है, जिनके शब्द कांग्रेस की नीति माने जाते हैं, ऐसे एक नेता का मैंने दो दिन पूर्व मैंने एक भाषण सुना। मित्रों, मुझे बहुत गहरा धक्का लगा, मन को एक पीड़ा हुई के क्या ये लोग देश के विषय में ऐसा सोचते हैं..? भाइयों-बहनों, कांग्रेस के एक नेता कह रहे हैं और कांग्रेस पार्टी की सोच को प्रकट कर रहे हैं कि ये भारत देश मधुमक्खियों का छत्ता है। मेरे कांग्रेस के मित्रों, आपके लिये ये देश मधुमक्खी का छाता हो सकता है, हमारे लिए ये देश हमारी माँ है..! ये भारत हमारी माता है, इसके सौ करोड देशवासी हमारे भाई-बहन हैं..! ये पवित्र भूमि है, ये ऋषि-मुनियों की भूमी है। अटल बिहारी वाजपेयी कहा करते थे कि यहाँ का कंकर-कंकर हमारे लिए शंकर है। अटल बिहारी बाजपेयी कहा करते थे कि गंगा जी में बहती हुई हमारी हड्डी को कान में लाकर सुनोगे तो उस हड्डी में से भी आवाज आएगी, भारत माता की जय..! ये हमारे संस्कार है। हमारे लिए ये माँ है माँ..! इस माँ की पीड़ा हम देख नहीं सकते हैं। ये हमारी माँ है, जिसके संतानों का दु:ख-दर्द हमारी चिंता का कारण है। आपके लिए ये मधुमक्खी का छाता हो सकता है, हमारे लिए तो हमारी माँ है..! और मेहरबानी करके कांग्रेस के मित्रों, हमारी भारत माता का अपमान मत करो..! आपको अगर हिन्दुस्तान के लोगों की भाषा समज नहीं आती है तो कहीं से सीखा करो, लेकिन आपके अज्ञान के कारण मेरे देश की संस्कृति और परंपरा को बर्बाद करने का पाप मत करो..! भाइयो और बहनों, मैं कभी किसी नेता के भाषण पर समय बर्बाद नहीं करता, क्योंकि वो ध्यान देने योग्य होते भी नहीं हैं। लेकिन जब हमारी भावनाओं पर चोट पहुंचाई जाती है तब इस माँ के कल्याण के लिए जीवन खपाने वाले लक्षावती कार्यकर्ता को पीड़ा होनी बहुत स्वाभाविक है।

भाइयों-बहनों, मैं हैरान हूँ..! इस देश में पानी की समस्या है इसका देश के नेताओं को अता-पता भी नहीं है। आप पर हमें दया आती है..! हमारे गुजरात कांग्रेस के नेता पानी को लेकर के गुजरात के किसानों को, गुजरात के नागरिकों को भ्रमित करने का प्रयास कर रहे हैं। मैं कांग्रेस के मित्रों को प्रार्थना करता हूँ, आवाहन भी करता हूँ कि अगर आपको गुजरात के किसानों की इतनी चिंता है, अगर आपको गुजरात के गांव में पानी की चिंता है और सच्चे दिल से चिंता है तो आप समय बर्बाद किये बिना दिल्ली की आपकी सरकार पर दबाव डालो और सरदार सरोवर डेम की ऊंचाई का काम जो रुका हुआ है, उसको पहले पूरा करो..! मेरे पार्टी के सभी कार्यकर्ताओं, गाँव-गाँव से आवाज उठनी चाहिए, नर्मदा डैम को पूर्ण करने के लिए अब हम ज्यादा इंतजार नहीं करेंगे..! हम दिल्ली के तख्त के साथ लड़ाई लड़ेंगे और कांग्रेस के लोगों को हर गली-मौहल्ले में जवाब देना पड़ेगा।

भाइयो-बहनों, कांग्रेस पार्टी से सुधरने की अपेक्षा मत करना, वो कभी नहीं सुधर सकते..! इस चुनाव में गुजरात की जनता ने जिस प्रकार से कांग्रेस पार्टी को सजा दी है, जिस प्रकार से उनके एक-एक दिग्गज नेताओं को गुजरात की जनता ने परास्त कर दिया है... जिस भाषा का पिछले पांच साल से वे प्रयोग कर रहे थे, जिस झूठ के सहारे गुजरात की जनता को गुमराह करने का रात-दिन प्रयास रहे थे, जिस गंदी गालियों का उपयोग किया जा रहा था... गुजरात की जनता ने उस भाषा को बोलने वालों को चुन-चुन कर साफ कर दिया। आशा थी कि वे समझेंगे, सुधरेंगे और लोकतंत्र की मार्यादाओं का पालन करेंगे, लेकिन भाइयों और बहनों, इस सरकार को अभी तो कल 101 दिन हुए हैं, लेकिन 100 दिन भी वे इंतजार करने को तैयार नहीं हैं, उनकी मन:स्थिति क्या होगी इसका आप अंदाजा लगा सकते हो..!

भाइयों-बहनों, भारतीय जनता पार्टी विकास के मंत्र को लेकर चली है। आज गुजरात की धरती पर हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष पधारे हैं तब मैं गुजरात की जनता की ओर से उनसे कहना चाहता हूँ कि आज चारों तरफ आपने इतना बड़ा दिल बताया है, सार्वजनिक जीवन में इतनी ऊंचाई का अनुभव करवाया है, मेरे जैसे छोटे कार्यकर्ता को आपने बहुत बड़ा बड़प्पन दिया है। भाइयों-बहनों, राजनीति में ये छोटी घटना नहीं होती है। अपने साथी को इस ऊंचाई तक ले जाने के लिए बहुत बड़ा दिल लगता है..! लेकिन मैं आज कहना चाहता हूँ कि आपने जो मुझ मान-सम्मान दिया है, आपने जो मेरी इज्जत की है, देश भर के कार्यकर्ताओं के दिलों में मेरी जगह बनाने के लिए आपने कोई कसर नहीं छोड़ी है, लेकिन ये यश भले ही मोदी को मिलता होगा, नाम भले ही मोदी का लिया जाता होगा, लेकिन इस यश के हकदार ये सारे मेरे भाई-बहन हैं, मेरे कार्यकर्ता हैं..! मेरे कार्यकर्ता भाइयों-बहनों, आपने परिश्रम ना किया होता, आपने विकास में विश्वास ना किया होता, आपने इस देश की भलाई के मंत्र को चरित्रार्थ ना किया होता, तो नरेन्द्र मोदी को कौन पहचानने वाला था..? ये पहचान आपके कारण बनी है, आपके पुरषार्थ के कारण बनी है, आपके त्याग और तपश्चर्या के कारण बनी है। और आज जब भारतीय जनता पार्टी का जन्म दिन है मैं आप सब का अभिनंदन करता हूँ, आप सबको वंदन करता हूँ..! मेरे कार्यकर्ता भाइयो-बहनों, मैंने पहले ही दिन जब से कार्य संभाला है, उस दिन से मैंने कहा है, आज मैं दोबारा दोहराता हूँ कि मैं परिश्रम में कोई कमी नहीं रखूँगा, मैं बद इरादे से कोई पाप नहीं करूंगा..! भाइयों-बहनों, जब मैं कहता हूँ कि इंडिया फर्स्ट, तो उस लक्ष्य से, उस मार्ग से भारतीय जनता पार्टी कभी चलित नहीं हो सकती। हमारे लिए दल से बड़ा देश है। हम देश के लिए जीने-मरने वाले लोग हैं। गली-मौहल्ले में भी काम करेंगे लेकिन भारत माता के लिए करेंगे। हम गुजरात की सेवा करते हैं लेकिन हमारा तो मंत्र है, ‘भारत के विकास के लिए गुजरात का विकास’..! हम सबको इस माँ भारती के कल्याण के लिए, निराशा की गर्त में डूबे हुए सामाज में एक नया विश्वास पैदा करने के लिए अपने इस कार्य को हमें करते रहना है।

भाइयो-बहनों, भारतीय जनता पार्टी आज पूरे देश में एक आशा की किरण बनी हुई है। और ये बात पॉलिटिकल पंडित हैं वो जानें। पॉलिटिकल पार्टीयों का जन्म होने के बाद अस्सी-अस्सी साल तक उन्हें सत्ता स्थान पर पहुंचने का मौका नहीं मिला हो, ऐसे दुनिया में कई उदाहरण हैं। ये भारतीय जनता पार्टी है। इतना बड़ा देश, इतना बड़ा लोकतंत्र, लेकिन जन्म से जवानी की यात्रा पूरी होने से पहले तक पहुंचते-पहुंचते, इस देश की जनता ने अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में हमें सेवा करने का मौका दिया था। इंग्लैंड की लेबर पार्टी को अस्सी साल तक मौका नहीं मिला था। भारतीय जनता पार्टी को जन्म से जवानी की यात्रा पूरी होने से पहले देश की जनता ने उस पर अमी वर्षा कर दी थी। आप कल्पना कर सकते हो कि लोग कांग्रेस से कितने तंग आ गए हैं, लोग देश की तबाही से कितने तंग आ चुके हैं..! और तब जा करके भाइयो-बहनों, भारत माँ का भाग्य बदलना ये भारतीय जनता पार्टी के हर कार्यकर्ता का दायित्व है। स्वामी विवेकानंद जी की स्मृती में हम ये 150 वां वर्ष मना रहे हैं। विवेकानंद जी का सपना पूरा करने के लिए देशवासियों को बाहर से नई प्रेरणा की जरूरत नहीं है। विवेकानंद जी के शब्द काफी है, विवेकानंद जी का संदेश काफी है, विवेकानंद जी का जीवन काफी है..! उससे प्रेरणा लेकर के एक नए उमंग और विश्वास के साथ आगे बढ़ना है।

भाइयो-बहनों, आज भारतीय जनता पार्टी जहाँ भी पहुँची है, गुजरात में भारतीय जनता पार्टी ने जो स्थिति पैदा की है वो किसी एक व्यक्ति के कारण नहीं है। पीढ़ियाँ की पीढ़ियाँ बीत गई, परिवार के परिवार इस पार्टी के लिए खप गए हैं। एक जमाना था, अगर मंहगाई के लिए भाजपा के कार्यकर्ता जुलूस निकालते थे तो 21-21 दिन की सजा हुआ करती थी। पूरा परिवार 21-21 दिन तक गुजरात की जेलों में रहने के लिए मजबूर हुआ करता था। ऐसे अनेक कार्यकर्ताओं के परिश्रम के कारण ये पार्टी यहाँ पहुँची है। इस पार्टी को यहाँ तक पहुँचाने वाले, अपने परिवारों को खपा देने वाले, अपनी जवानी को खपा देने वाले उन लक्षावधी कार्यकर्ताओं का मैं आज पुण्य स्मरण करता हूँ, उनका अभिनंदन करता हूँ, उनको वंदन करता हूँ..!

भाइयो-बहनों, एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम आज हमको करना है। हम यहाँ से संकल्प लेकर के जाने वाले हैं। हमारे पार्टी के पूर्व अध्यक्ष श्रीमान् रूपाला जी हम सबको एक संकल्प दिलाने वाले हैं। लेकिन इस संकल्प की भी एक विशेषता है। हमारे हाथ में एक मोमबत्ती दी गई है, जो जलानी है। जब मोमबत्ती जलाएंगे तो ये सारी रोशनी बंद होने वाली है। भाइयों-बहनों, ये प्रकाश की ओर जाने का संदेश है और घर-घर, गाँव-गाँव कमल खिलाने का संदेश है। और जो लोग भारतीय जनता पार्टी को दिन-रात गाली देते हैं, नई-नई डिक्शनरी के शब्द निकालते हैं वे कान खोल कर के सुन लें, आप भारतीय जनता पार्टी पर जितना ज्यादा कीचड़ उछालोगे कमल उतना ही ज्यादा खिलने वाला है। उस कमल के संदेश को ले कर के आईये भाइयो-बहनों, आज अपनी पार्टी के 33 वर्ष की यात्रा का गौरव करते हुए एक नई यात्रा का शुभ संकल्प करके चलें। मेरी आप सब से प्रार्थना है कि आप सबको जो मोमबत्ती दी गई है उसको जलाया जाए और यहाँ की व्यवस्था वालों से मेरी प्रार्थना है कि स्टेडियम में और लाइटें बंद करके इस नजारे का अनुभव किया जाए और जब तक ये विधि पूरी नहीं होती है, हम अपना स्थान छोड़ेगें नहीं, हम जाएंगे नहीं। मेरे साथ बोलिए -

भारत माता की जय..!

भारत माता की जय..!

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ദേശീയ വികസന 'മഹായജ്ഞ'ത്തില്‍ എന്‍ഇപി സുപ്രധാന ഘടകം: പ്രധാനമന്ത്രി
July 29, 2021
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ദേശീയ വികസന 'മഹായജ്ഞ'ത്തില്‍ എന്‍ഇപി സുപ്രധാന ഘടകം: പ്രധാനമന്ത്രി
യുവാക്കള്‍ക്കും അവരുടെ ആഗ്രഹങ്ങള്‍ക്കുമൊപ്പം രാജ്യവുമുണ്ടെന്ന് പുതിയ വിദ്യാഭ്യാസ നയം ഉറപ്പ് നല്‍കുന്നു: പ്രധാനമന്ത്രി
സുതാര്യതയും സമ്മര്‍ദമില്ലായ്മയും പുതിയ വിദ്യാഭ്യാസ നയത്തിലെ പ്രധാന സവിശേഷതകള്‍: പ്രധാനമന്ത്രി
8 സംസ്ഥാനങ്ങളിലെ 14 എന്‍ജിനിയറിങ് കോളേജുകള്‍ 5 ഇന്ത്യന്‍ ഭാഷകളില്‍ വിദ്യാഭ്യാസം നല്‍കുന്നതിനു തുടക്കം കുറിക്കും: പ്രധാനമന്ത്രി
മാതൃഭാഷ പഠനമാധ്യമമാക്കുന്നത്, പാവപ്പെട്ട, ഗ്രാമീണ, ഗോത്രവര്‍ഗ പശ്ചാത്തലത്തില്‍ നിന്നുള്ള വിദ്യാര്‍ത്ഥികള്‍ക്ക് ആത്മവിശ്വാസം പകരും: പ്രധാനമന്ത്രി

नमस्कार! कार्यक्रम में मेरे साथ जुड़ रहे कैबिनेट के मेरे सभी सहयोगीगण, राज्यों के माननीय राज्यपाल, सभी सम्मानित मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, राज्य सरकारों के मंत्रीगण, उपस्थित शिक्षाविद, अध्यापकगण, सभी अभिभावक और मेरे प्रिय युवा साथियों!

नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति को एक साल पूरा होने पर सभी देशवासियों और विशेषकर सभी विद्यार्थियों को बहुत-बहुत शुभकामनाएं। बीते एक वर्ष में देश के आप सभी महानुभावों, शिक्षकों, प्रधानाचार्यों, नीतिकारों ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति को धरातल पर उतारने में बहुत मेहनत की है। कोरोना के इस काल में भी लाखों नागरिकों से, शिक्षकों, राज्यों, ऑटोनॉमस बॉडीज से सुझाव लेकर, टास्क फोर्स बनाकर नई शिक्षा नीति को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है। बीते एक वर्ष में राष्ट्रीय शिक्षा नीति को आधार बनाकर अनेक बड़े फैसले लिए गए हैं। आज इसी कड़ी में मुझे बहुत सारी नई योजनाओं, नए initiatives की शुरुआत करने का सौभाग्य मिला है।

साथियों, 
ये महत्वपूर्ण अवसर ऐसे समय में आया है जब देश आज़ादी के 75 साल का अमृत महोत्सव मना रहा है। आज से कुछ ही दिन बाद 15 अगस्त को हम आज़ादी के 75वें साल में प्रवेश भी करने जा रहे हैं। एक तरह से, नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति का implementation, आजादी के अमृत महोत्सव का प्रमुख हिस्सा बन गया है। इतने बड़े महापर्व के बीच 'राष्ट्रीय शिक्षा नीति' के तहत आज शुरू हुई योजनाएं 'नए भारत के निर्माण' में बहुत बड़ी भूमिका निभाएंगी। भारत के जिस सुनहरे भविष्य के संकल्प के साथ आज हम आज़ादी का अमृत महोत्सव मना रहे हैं, उस भविष्य की ओर हमें आज की नई पीढ़ी ही ले जाएगी। भविष्य में हम कितना आगे जाएंगे, कितनी ऊंचाई प्राप्त करेंगे, ये इस बात पर निर्भर करेगा कि हम अपने युवाओं को वर्तमान में, यानि आज कैसी शिक्षा दे रहे हैं, कैसी दिशा दे रहे हैं। इसीलिए, मैं मानता हूं, भारत की नई 'राष्ट्रीय शिक्षा नीति' राष्ट्र निर्माण के महायज्ञ में बड़े factors में से एक है। और इसीलिए, देश ने इस शिक्षा नीति को इतना आधुनिक बनाया है, इतना फ्यूचर रेडी रखा है। आज इस कार्यक्रम में जुड़े अधिकांश महानुभाव, नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति की बारीकियों से परिचित हैं, लेकिन ये कितना बड़ा मिशन है, इस ऐहसास को हमें बार-बार याद करना ही है।

साथियों, 
देश भर से हमारे कई युवा स्टूडेंट्स भी इस कार्यक्रम में हमारे साथ हैं। अगर इन साथियों से हम उनकी आकांक्षाओं के बारे में, सपनों के बारे में पूछें, तो आप देखेंगे कि हर एक युवा के मन में एक नयापन है, एक नई ऊर्जा है। हमारा युवा बदलाव के लिए पूरी तरह से तैयार है। वो इंतज़ार नहीं करना चाहता। हम सबने देखा है, कोरोनाकाल में कैसे हमारी शिक्षा व्यवस्था के सामने इतनी बड़ी चुनौती आई। स्टूडेंट्स की पढ़ाई का, जीवन का ढंग बदल गया। लेकिन देश के विद्यार्थियों ने तेजी से इस बदलाव को adopt किया। ऑनलाइन एजुकेशन अब एक सहज चलन बनती जा रही है। शिक्षा मंत्रालय ने भी इसके लिए अनेक प्रयास किए हैं। मंत्रालय ने दीक्षा प्लेटफॉर्म शुरु किया, स्वयं पोर्टल पर पाठ्यक्रम शुरू किए, और हमारे स्टूडेंट्स पूरे जोश से इनका हिस्सा बन गए। दीक्षा पोर्टल पर मुझे बताया गया कि पिछले एक साल में 23 सौ करोड़ से ज्यादा हिट होना बताता है कि ये कितना उपयोगी प्रयास रहा है। आज भी इसमें हर दिन करीब 5 करोड़ हिट हो रहे हैं। साथियों, 21वीं सदी का आज का युवा अपनी व्यवस्थाएं, अपनी दुनिया खुद अपने हिसाब से बनाना चाहता है। इसलिए, उसे exposure चाहिए, उसे पुराने बंधनों, पिंजरों से मुक्ति चाहिए। आप देखिए, आज छोटे छोटे गाँवों से, कस्बों से निकलने वाले युवा कैसे-कैसे कमाल कर रहे हैं। इन्हीं दूर-दराज इलाकों और सामान्य परिवारों से आने वाले युवा आज टोक्यो ओलंपिक्स में देश का झण्डा बुलंद कर रहे हैं, भारत को नई पहचान दे रहे हैं। ऐसे ही करोड़ों युवा आज अलग अलग क्षेत्रों में असाधारण काम कर रहे हैं, असाधारण लक्ष्यों की नींव रख रहे हैं। कोई कला और संस्कृति के क्षेत्र में पुरातन और आधुनिक के fusion से नई विधाओं को जन्म दे रहा है, कोई रोबोटिक्स के क्षेत्र में कभी साई-फ़ाई मानी जाने वाली कल्पनाओं को हकीकत में बदल रहा है। कोई artificial intelligence के क्षेत्र में मानवीय क्षमताओं को नई ऊंचाई दे रहा है, तो कोई मशीन लर्निंग में नए माइल स्टोन्स की तैयारी कर रहा है। यानि हर क्षेत्र में भारत के युवा अपना परचम लहराने के लिए आगे बढ़ रहे हैं। यही युवा भारत के स्टार्टअप eco-system को revolutionize कर रहे हैं, इंडस्ट्री 4.0 में भारत के नेतृत्व को तैयार कर रहे हैं, और डिजिटल इंडिया को नई गति दे रहे हैं। आप कल्पना करिए, इस युवा पीढ़ी को जब इनके सपनों के अनुरूप वातावरण मिलेगा तो इतनी शक्ति कितनी ज्यादा बढ़ जाएगी। और इसीलिए, नई 'राष्ट्रीय शिक्षा नीति' युवाओं को ये विश्वास दिलाती है कि देश अब पूरी तरह से उनके साथ है, उनके हौसलों के साथ है। जिस आर्टिफिसियल इंटेलीजेंस के प्रोग्राम को अभी लॉंच किया गया है, वो भी हमारे युवाओं को future oriented बनाएगा, AI driven economy के रास्ते खोलेगा। शिक्षा में ये डिजिटल revolution, पूरे देश में एक साथ आए, गाँव-शहर सब समान रूप से डिजिटल लर्निंग से जुड़ें, इसका भी खास ख्याल रखा गया है। National Digital Education Architecture, यानी NDEAR और नेशनल एजुकेशन टेक्नोलॉजी फोरम -NETF इस दिशा में पूरे देश में डिजिटल और टेक्नोलॉजिकल फ्रेमवर्क उपलब्ध कराने में अहम भूमिका निभाएंगे। युवा मन जिस दिशा में भी सोचना चाहे, खुले आकाश में जैसे उड़ना चाहे, देश की नई शिक्षा व्यवस्था उसे वैसे ही अवसर उपलब्ध कराएगी।


साथियों, 
बीते एक वर्ष में आपने भी ये महसूस किया होगा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति को किसी भी तरह के दबाव से मुक्त रखा गया है। जो openness पॉलिसी के लेवेल पर है, वही openness स्टूडेंट्स को मिल रहे विकल्पों में भी है। अब स्टूडेंट्स कितना पढ़ें, कितने समय तक पढ़ें, ये सिर्फ बोर्ड्स और universities नहीं तय करेंगी। इस फैसले में स्टूडेंट्स की भी सहभागिता होगी। Multiple entry and exit की जो व्यवस्था आज शुरू हुई है, इसने स्टूडेंट्स को एक ही क्लास और एक ही कोर्स में जकड़े रहने की मजबूरी से मुक्त कर दिया है। आधुनिक टेक्नालजी पर आधारित 'अकैडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट' इस सिस्टम से इस दिशा में स्टूडेंट्स के लिए revolutionary change आने वाला है। अब हर युवा अपनी रुचि से, अपनी सुविधा से कभी भी एक स्ट्रीम को choose कर सकता है, छोड़ सकता है। अब कोई कोर्स सलेक्ट करते समय ये डर भी नहीं रहेगा कि अगर हमारा डिसिज़न गलत हो गया तो क्या होगा? इसी तरह, 'Structured Assessment for Analyzing Learning levels' यानी 'सफल' के जरिए स्टूडेंट्स के आंकलन की भी वैज्ञानिक व्यवस्था शुरू हुई है। ये व्यवस्था आने वाले समय में स्टूडेंट्स को परीक्षा के डर से भी मुक्ति दिलाएगी। ये डर जब युवा मन से निकलेगा तो नए-नए स्किल लेने का साहस और नए नए innovations का नया दौर शुरू होगा, संभावनाएं असीम विस्तार होंगी। इसलिए, मैं फिर कहूंगा कि आज नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत जो ये नए कार्यक्रम शुरू हुए हैं, उनमें भारत का भाग्य बदलने का सामर्थ्य है।

साथियों,
हमने-आपने दशकों से ये माहौल देखा है जब समझा जाता था कि अच्छी पढ़ाई करने के लिए विदेश ही जाना होगा। लेकिन अच्छी पढ़ाई के लिए विदेशों से स्टूडेंट्स भारत आयें, बेस्ट institutions भारत आयें, ये अब हम देखने जा रहे हैं। ये जानकारी बहुत उत्साह बढ़ाने वाली है कि देश की डेढ़ सौ से ज्यादा यूनिवर्सिटीज में Office of International Affairs स्थापित किए जा चुके हैं। भारत के Higher Education Institutes, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रिसर्च और एकैडेमिक में और आगे बढ़ें, इसके लिए आज नई गाइडलाइंस भी जारी की गई हैं।

साथियों,
आज बन रही संभावनाओं को साकार करने के लिए हमारे युवाओं को दुनिया से एक कदम आगे होना पड़ेगा, एक कदम आगे का सोचना होगा। हेल्थ हो, डिफेंस हो, इनफ्रास्ट्रक्चर हो, टेक्नोलॉजी हो, देश को हर दिशा में समर्थ और आत्मनिर्भर होना होगा। 'आत्मनिर्भर भारत' का ये रास्ता स्किल डेव्लपमेंट और टेक्नालजी से होकर जाता है, जिस पर NEP में विशेष ध्यान दिया गया है। मुझे खुशी है कि बीते एक साल में 1200 से ज्यादा उच्च शिक्षा संस्थानों में स्किल डवलपमेंट से जुड़े सैकड़ों नए कोर्सेस को मंजूरी दी गई है।

साथियों,
शिक्षा के विषय में पूज्य बापू महात्मा गांधी कहा करते थे- "राष्ट्रीय शिक्षा को सच्चे अर्थों में राष्ट्रीय होने के लिए राष्ट्रीय परिस्थितियों को reflect करना चाहिए"। बापू के इसी दूरदर्शी विचार को पूरा करने के लिए स्थानीय भाषाओं में, mother language में शिक्षा का विचार NEP में रखा गया है। अब हायर एजुकेशन में 'मीडियम ऑफ इन्सट्रक्शन' के लिए स्थानीय भाषा भी एक विकल्प होगी। मुझे खुशी है कि 8 राज्यों के 14 इंजीनियरिंग कॉलेज, 5 भारतीय भाषाएं- हिंदी, तमिल, तेलुगू, मराठी और बांग्ला में इंजीनियरिंग की पढ़ाई शुरू करने जा रहे हैं। इंजीनिरिंग के कोर्स का 11 भारतीय भाषाओं में ट्रांसलेशन के लिए एक टूल भी डवलप किया जा चुका है। क्षेत्रीय भाषा में अपनी पढ़ाई शुरू करने जा रहे छात्र-छात्राओं को मैं विशेष बधाई देना चाहता हूं। इसका सबसे बड़ा लाभ देश के गरीब वर्ग को, गाँव-कस्बों में रहने वाले मध्यम वर्ग के स्टूडेंट्स को, दलित-पिछड़े और आदिवासी भाई-बहनों को होगा। इन्हीं परिवारों से आने वाले बच्चों को सबसे ज्यादा language divide का सामना करना पड़ता था, सबसे ज्यादा नुकसान इन्हीं परिवार के होनहार बच्चों को उठाना पड़ता था। मातृभाषा में पढ़ाई से गरीब बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ेगा, उनके सामर्थ्य और प्रतिभा के साथ न्याय होगा।

साथियों,
प्रारम्भिक शिक्षा में भी मातृ भाषा को प्रोत्साहित करने का काम शुरू हो चुका है। जो 'विद्या प्रवेश' प्रोग्राम आज लाँच किया गया, उसकी भी इसमें बहुत बड़ी भूमिका है। प्ले स्कूल का जो कान्सेप्ट अभी तक बड़े शहरों तक ही सीमित है, 'विद्या प्रवेश' के जरिए वो अब दूर-दराज के स्कूलों तक जाएगा, गांव-गांव जाएगा। ये प्रोग्राम आने वाले समय में universal प्रोग्राम के तौर पर लागू होगा, और राज्य भी अपनी-अपनी जरूरत के हिसाब से इसे लागू करेंगे। यानी, देश के किसी भी हिस्से में, बच्चा अमीर का हो या गरीब का हो, उसकी पढ़ाई खेलते और हँसते हुए ही होगी, आसानी से होगी, इस दिशा का ये प्रयास होगा। और जब शुरुआत मुस्कान के साथ होगी, तो आगे सफलता का मार्ग भी आसानी से ही पूरा होगा।

साथियों, 
आज एक और काम हुआ है, जो मेरे हदय के बहुत करीब है, बहुत संवेदनशील है। आज देश में 3 लाख से ज्यादा बच्चे ऐसे हैं जिनको शिक्षा के लिए सांकेतिक भाषा की आवश्यकता पड़ती है। इसे समझते हुए भारतीय साइन लैंग्वेज को पहली बार एक भाषा विषय यानि एक Subject का दर्जा प्रदान किया गया है। अब छात्र इसे एक भाषा के तौर पर भी पढ़ पाएंगे। इससे भारतीय साइन लैंग्वेज को बहुत बढ़ावा मिलेगा, हमारे दिव्यांग साथियों को बहुत मदद मिलेगी। 

साथियों,
आप भी जानते हैं कि किसी भी स्टूडेंट की पूरी पढ़ाई में, उसके जीवन में बड़ी प्रेरणा उसके अध्यापक होते हैं। हमारे यहाँ तो कहा गया है- 

गुरौ न प्राप्यते यत् तत्, 
न अन्य अत्रापि लभ्यते। 

अर्थात्, जो गुरु से प्राप्त नहीं हो सकता वो कहीं प्राप्त नहीं हो सकता। यानी, ऐसा कुछ भी नहीं है जो एक अच्छा गुरु, अच्छा शिक्षक मिलने के बाद दुर्लभ हो। इसीलिए, राष्ट्रीय शिक्षा नीति के formulation से लेकर implementation तक हर स्टेज पर हमारे शिक्षक सक्रिय रूप से इस अभियान का हिस्सा हैं। आज लाँच हुआ ‘निष्ठा' 2.0 ये प्रोग्राम भी इस दिशा में एक अहम भूमिका निभाएगा। इस प्रोग्राम के जरिए देश के शिक्षकों को आधुनिक जरूरतों के हिसाब से ट्रेनिंग भी मिलेगी, और वो अपने सुझाव भी विभाग को दे पाएंगे। मेरा आप सभी शिक्षकों से, academicians से अनुरोध है कि इन प्रयासों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लीजिये, अधिक से अधिक योगदान दीजिये। आप सभी शिक्षा के क्षेत्र में इतना अनुभव रखते हैं, व्यापक अनुभव के धारक हैं, इसलिए जब आप प्रयास करेंगे तो आपके प्रयास राष्ट्र को बहुत आगे लेकर जाएंगे। मैं मानता हूँ, कि इस कालखंड में हम जिस भी भूमिका में हैं, हम सौभाग्यशाली हैं कि हम इतने बड़े बदलावों के गवाह बन रहे हैं, इन बदलावों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। आपके जीवन में ये स्वर्णिम अवसर आया है कि आप देश के भविष्य का निर्माण करेंगे, भविष्य की रूपरेखा अपने हाथों से खींचेगे। मुझे पूरा विश्वास है, आने वाले समय में जैसे-जैसे नई 'राष्ट्रीय शिक्षा नीति' के अलग-अलग Features, हकीकत में बदलेंगे, हमारा देश एक नए युग का साक्षात्कार करेगा। जैसे-जैसे हम अपनी युवा पीढ़ी को एक आधुनिक और राष्ट्रीय शिक्षा व्यवस्था से जोड़ते जाएंगे, देश आज़ादी के अमृत संकल्पों को हासिल करता जाएगा। इन्हीं शुभकामनाओं के साथ मैं अपनी बात समाप्त करता हूँ। आप सब स्वस्थ रहें, और नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ते रहें। बहुत बहुत धन्यवाद।