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मंच पर बिराजमान प्रात:स्मरणीय, वंदनीय, परम श्रद्धेय पूज्य संतगण, माँ भारती की भक्ति में डूबे हुए उपस्थित सभी महानुभाव, जिन संतो के चरणों में बैठना जीवन का एक बहुत बड़ा सौभाग्य होता है, उन संतों के बगल में बैठने का जो अवसर आए, तो बैठने वाले की हालत क्या हुई होगी इसका आप अंदाज कर सकते हैं..! जिनकी वाणी सुनने के लिए मीलों दूर से कष्ट उठा कर के करोड़ों-करोड़ों लोग पहुंचते हैं, शब्द रूपी प्रसाद ग्रहण करने के लिए तपस्या करते हैं ऐसे ओजस्वी, तेजस्वी, तपस्वी, माँ सरस्वती के धनी, जिनके आशीर्वाद से लाभान्वित हुए हैं ऐसे महापुरूषों के बीच खड़े होकर के कुछ कहने की नौबत आए, तो उस कहने वाले का हाल कैसा होता होगा इसका आप भली-भांति अंदाजा कर सकते हैं..! ईश्वर ने जब से मुझे दुनिया को जानने और समझने का सामर्थ्य दिया, तब से जितने भी कुंभ के मेले हुए उन सब में मैं उपस्थित रहा और कभी ये भी सौभाग्य मिला था कि पूरा समय भी मैं वहाँ रहा था। लेकिन इस बार का ये पहला कुंभ का मेला ऐसा था कि जिसमें मैं पहुंच नहीं पाया था। मन में एक कसक थी, एक पीड़ा थी कि मैं ये क्यों कर नहीं पाया..? और जब मुझे गुरू जी अभी मिले तो तुरंत पूछा कि बेटा, इस बार कुंभ में क्यों नहीं दिखाई दिए..? मन में एक कसक तो अभी भी है कि नहीं पहुंच पाया, लेकिन आज इस समारोह में और वो भी गंगा के तट पर हरिद्वार की भूमि में इसी पवित्र स्थल पर इन सभी संतों, आचार्यों और भगवंतों के दर्शन का मुझे सौभाग्य मिला..! शायद ईश्वर की इच्छा होगी कि मेरी वो कसक कम हो, और इसलिए ही ये कुछ व्यवस्था ईश्वर ने बनाई होगी..! ये मेरा सौभाग्य है कि मुझे आज आप सब लोगों के चरणों में वंदन करने का अवसर मिला है..!

मैं एक बात यहाँ बताना चाहता हूँ। हमारे देश में किसी के लिए कुछ भी कह देना बहुत आसान हो गया है। शब्दों का मूल्य ना समझते हुए, शब्दों का सामर्थ्य ना समझते हुए, किसी के लिए कुछ भी कह देना ये मानों एक नया स्वभाव पनपा है। और इसलिए पता नहीं किस-किस के लिए क्या-क्या कहा गया होगा..! लेकिन एक समृद्व राज्य के इतने वर्षों तक मुख्यमंत्री पद पर रहने के बाद मैं सार्वजनिक रूप से और इन मीडिया वाले मित्रों की हाजिरी में अपने अनुभव से घोषित करना चाहता हूँ। यहाँ एक भी संत महात्मा, एक भी संस्था ऐसी नहीं है जिसने कभी भी, कभी भी गुजरात में मुख्यमंत्री के पास आकर के किसी भी चीज की कभी मांग की हो..! ये देने वाले लोग हैं..! वरना आसानी से यह कह दिया जाता है। और इसलिए आज मैं बड़ी जिम्मेदारी के साथ ये कहना चाहता हूँ कि मेरे 12 साल के कार्यकाल में मुझे एक भी संत महात्मा, एक भी समाज के प्रति समर्पित व्यक्ति ऐसा मिला नहीं है जिसने सरकार से कुछ मांगा हो..! बहुत लोग होंगे जिनको ये बात नजर आना मुश्किल है। संतो की शक्ति ऐसे चश्मों को निर्माण करे, ऐसे ऐनक का निर्माण करे ताकि ऐसे लोगों को कुछ सत्य दिखाई दे..! और उस अर्थ में, उनकी वाणी का सामर्थ्य हजारों गुना बढ जाता है..! उन्होंने जो मर्यादा रेखाएं तय की होती हैं उस मर्यादा रेखाओं के बाहर जाने का साहस कत्तई कोई नहीं कर पाता है, क्योंकि वो सिर्फ शब्द नहीं होते हैं, वो एक साधना का अंश होता है..!

मैं बाबा रामदेव जी को सालों से जानता हूँ। वो जब साइकिल से घूमते थे तब से जानता हूँ और एक छोटी सी पुडिया में से काजू का टुकड़ा देते थे वो भी याद है..! आप कल्पना कर सकते हैं, एक व्यक्ति अहर्निश, एक निष्ठ, अखंड, अविरत, ‘वन लाइफ, वन मिशन’ इस तरह चरैवेति, चरैवेति, चरैवेति... इस देश में लगातार भ्रमण करता रहे..! प्रतिदिन डेढ़-दो लाख लोगों को योग के माध्यम से स्वस्थ रहने के लिए प्रेरित करते रहें..! अगर बाबा रामदेव जी की ये मूवमेंट दुनिया के किसी और देश में हुई होती, तो ना जाने कितनी यूनिवर्सिटीयों ने उस पर पी.एच.डी. की होती..! मैं ‘गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स’ वालों को कहना चाहता हूँ कि आपने ना जाने कितने रिकॉर्ड प्रतिस्थापित किये होगें, लेकिन कभी आपने इस रिकॉर्ड की तरफ ध्यान दिया है कि अपने इतने छोटे से काल खंड में एक व्यक्ति ने टीवी के माध्यम से नहीं, फोटो के माध्यम से नहीं, रेडियो के माध्यम से नहीं, टैक्नोलॉजी के माध्यम से नहीं, रूबरू में इतने करोड़ लोगों के साथ आंख में आंख मिला कर के बात की हो ऐसा रिकॉर्ड शायद दुनिया में कहीं नहीं होगा..!

ये हमारा दुर्भाग्य है मित्रों, कि हम लोग हमारे देश के सामर्थ्य की चर्चा कभी करते नहीं हैं। किसी ने कल्पना की है कुंभ के मेले की..? कुंभ के मेले की व्यवस्था कितनी जबर्दस्त होती है..! वहाँ संतों मंहतों के एक-एक छोटे नगर बस जाते हैं। और गंगा के किनारे पर हर दिन यूरोप का एक देश इक्कठा हो इतनी भीड़ जमा होती है, इतने भक्तों का जमघट जमा होता है। और उसके बाद भी ना कोई मारकाट, ना कोई लूट, ना कोई अकस्मात, ना कोई मौत, ना कोई बीमारी... और दो-दो, तीन-तीन महीने तक बिना किसी आमंत्रण के बिना किसी सूचना के करोड़ों-करोड़ों लोग पहुंचते हैं..! क्या किसी मैनेजमेंट गुरु ने सोचा है, क्या दुनिया को मैनेजमेंट सिखाने वालों ने कभी सोचा है कि ये कौन सी मैनेजमेंट है, ये कौन सी व्यवस्था है..? ये संत-शक्ति के सामर्थ्य और सहस्त्र वर्षों की परंपरा का परिणाम है। लेकिन हम स्वाभिमान खो चुके हैं। आत्म गौरव के साथ दुनिया के साथ आंख में आंख मिला कर के हमारे सामर्थ्य का परिचय कराने की आदत गुलामी के काल खंड के कारण छूट गई है। और तब जा कर के इस चेतना को विश्व के सामने प्रस्तुत करना हर भारतवासी का सपना हो वो बहुत स्वाभाविक है और मैं भी एक हिन्दुस्तान के छोटे बच्चे के नाते उन महापुरूषों के शब्दों पर भरोसा करता हूँ। श्री अरविंद ने कहा था, जिसे मैं वेद वाक्य मानता हूँ, कि मुझे विश्वास है कि मेरी भारतमाता आजाद तो होगी ही, पर इतना ही नहीं, मेरी भारत माता विश्व कल्याणक बन कर रहेगी..! ये सपना देखा था। आज जब पूरा हिन्दुस्तान स्वामी विवेकानंद जी की 150 वीं जयंती मना रहा है तब, इस महापुरूष के सपनों को पूरा कौन करेगा..? क्या इस देश के एक-एक बच्चे का दायित्व नहीं है, हम सभी भारतवासियों का दायित्व नहीं है, हम सभी नौजवानों का दायित्व नहीं है कि जिस स्वामी विवेकानंद जी ने कहा था कि मैं अपनी आंखों के सामने देख रहा हूँ कि मेरी भारत माता जगतगुरू के स्थान पर विराजमान है..! मुझे उस महापुरूष के सपनो में विश्वास है और उन्होंने कहा था कि मेरी आशा देश के नौजवान हैं..! 150 साल हो गए उस महापुरुष के जन्म को, 125 साल पहले ये बात उन्होंने बताई थी और आज पूरे विश्व का सबसे युवा कोई देश है तो वो हिन्दुस्तान है..!

आज पूरे विश्व में चर्चा चल रही है कि 21 वीं सदी हिन्दुस्तान की सदी है। पूरा विश्व ये मानता है कि 21 वीं सदी ज्ञान की सदी है और इसलिए जब-जब मानव जात ने ज्ञान युग में प्रवेश किया है तो उस सभी समय हिन्दुस्तान ने मानव जात का नेतृत्व किया है..! 21 वीं सदी यदि ज्ञान की सदी है तो 21 वीं सदी का नेतृत्व भी ये ज्ञानवान देश के पास होगा, ये हम सबको भरोसा होना चाहिए और उस दिशा में हमें एक नागरिक के नाते, हम जहाँ भी हों, जैसे भी हों, उस कर्तव्य का पालन करने के लिए सवा सौ करोड़ देशवासियों का संकल्प इस आशा-आकांक्षा की परिपूर्ति कर सकता है..!

भाइयो और बहनों, अभी-अभी नवरात्र का पर्व पूरा हुआ है और ये मेरा सौभाग्य रहा कि कुछ कारणवश ऐसे कार्यक्रम बन गए, वैसे मीडिया के मित्र तो उसका ऐसा डिजाइन बना कर के दुनिया को समझा रहे हैं कि मोदी कैसे बड़ी प्लानिंग के साथ आगे बढ़ रहे हैं..! ऐसा बता रहे हैं..! तो ये मैं बताना चाहता हूँ कि कोई प्लानिंग-ब्लानिंग नहीं है..! ईश्वर की इच्छा होगी, मेरा मन करता था बड़े दिनों से कि माँ काली के पास चला जाऊँ, बैलूर मठ चला जाऊँ, जिन संतों के साथ बचपन बिताया था, एक बार फिर उनके पास चला जाऊँ..! और कुछ दिन पहले में बंगाल, कलकत्ता गया और माँ काली के पास गया, रामकृष्ण परमहंस की उस पवित्र भूमि पर गया, बैलूर मठ गया, संतों के बीच समय बिताया..! बाद में सूचना आई केरल से, नारायण गुरू की पवित्र परंपरा के पास दर्शन करने का अवसर आया। नारायण गुरू ने अपना पूरा जीवन वंचितों के लिए, पीड़ितों के लिए, दलितों के लिए, शोषितों के लिए, समाज के निम्न स्तर की भलाई के लिए लगाया था और सौ साल पहले शिक्षा की ऐसी अलख जगाई थी कि उस संत की तपस्या का परिणाम है कि आज पूरे हिन्दुस्तान में सर्वाधिक शिक्षा कहीं है तो उस प्रदेश का नाम केरला है। संत का प्रताप है..! और आज दक्षिण से निकल के मैं सीधा हिमालय की गोद में, गंगा की चरणों में बाबा रामदेव जी जिस गुरूकुल को शुरू कर रहे हैं, आचार्यकुल को शुरु कर रहे हैं, ऐसे एक पवित्र कार्य में जुड़ने का मुझे सौभाग्य मिला है।

मैं जानता हूँ आज के इस अवसर के बाद भांति-भांति की चर्चा हमें सुनने को मिलेगी..! मैं जब छोटा था, तो हमारे कान में एक सवाल पूछा जाता था, हमारे मनो को भ्रमित किया जाता था। कभी-कभी मुझे लगता है कि बाबा रामदेव जी सारे देश को कपालभाति की ओर खींच कर ले गए हैं और उसके कारण जिनके कपाल में भ्रांतियाँ पड़ी हैं, वो ज्यादा परेशान नजर आते हैं..! लेकिन मुझे भरोसा है कि ये कपालभाति कभी ना कभी एक कपाल की भ्रांतियों को भी समाप्त करने का सामर्थ्य दिखाएगी..! हम बचपन में क्या सुनते थे..? हर कोई बोलता था और मैं समझ नहीं पाता था कि ये लोग ऐसा क्यों बोलते हैं और ये अभी भी मेरे मन में है क्योंकि मैं बचपन से किसी संत को देखता था तो बड़ी जिज्ञासा होती थी। कभी उनसे मैं सवाल पूछने चला जाता था, कभी किसी मंदिर में रूके हैं तो खाने-वाने को पूछने चला जाता था, मेरी अपनी एक रुचि थी..! पता नहीं ये ईश्वर ने तय किया होगा मेरे लिए, लेकिन मुझे बड़ा आकर्षण था..! और मैं बहुत छोटे नगर में पैदा हुआ हूँ, मैंने तो गाड़ी भी बचपन में देखी नहीं थी कि कार क्या होती है..! लोग कहते थे कि अरे छोड़ो, ये साधुलोग खाते हैं और सोते हैं, बस। कुछ करते नहीं है, लड्डू खाना बस, और कुछ काम नहीं। और अब जब काम करते हैं तो लोग पूछते हैं कि अरे, आपका ये काम है क्या, क्यों करते हो..? मैं हैरान हूँ..! बाबा रामदेव जी को सबसे बड़ा सवाल ये है कि आप ये सब करते क्यों हो? पहले लोग पूछते थे क्यों नहीं करते हो, अब पूछते हैं कि क्यों करते हो..? क्या इन लोगों को जवाब देना जरूरी बनता है, भाई? इनके लिए समय बर्बाद करने की जरूरत नहीं है। बाबा रामदेव जिस काम को कर रहे हैं, मैं मानता हूँ राष्ट्र की सेवा है। और हमारी पूरी संत परंपरा को देखिए। हर संत ने अपना जीवन उपदेशों तक कभी सीमित नहीं रखा। उन्होंने आचरण पर बल दिया है और कर्त्तव्य भाव से समाज जीवन की पीड़ाओं को दूर करने के लिए उनसे जो कुछ भी उस युग में हो सका, उसे करते रहे। किसी की जेब में एक पैसा ना हो और साल भर हरिद्वार में रहना हो, कोई मुझे बताए, वो भूखा रहेगा..? कौन खिलाता है, ये खिलाने वाले कौन हैं..? ये ही छोटे-मोटे संत हैं, जो अपने यहाँ से किसी भूखे को जाने नहीं देते हैं। मैंने बाबा रामदेव जी से एक बार पूछा था कि मैं तो योग की परंपरा से जुड़ा हुआ इंसान हूँ और दिन-रात दौड़ पाता हूँ उसमें योग का बहुत बड़ा योगदान है। तो, मैंने उनको पूछा एक बार कि योग से ऊर्जा प्राप्त होती है, स्वस्थता प्राप्त होती है, उमंग रहता है, वो सब तो है, लेकिन चारों तरफ से जब इतनी यातनाएं आती हों तो उसको झेलने की ताकत कहाँ से आती है ये तो बताओ..! क्या नहीं बीती बाबा रामदेव पर और क्या गुनाह था उनका..? क्या भारत जैसे लोकतंत्र देश में आपके विचारों से विपरीत विचार कहना गुनाह है..? क्या आपको जो बात पंसद नहीं है वो बात अगर कोई कहे, तो उसके लिए कोई भी अनाप-शनाप शब्द बोलने का आपको अधिकार मिल जाता है..? मैं दिल्ली में बैठे हुए शंहशाहों से पूछना चाहता हूँ, और ये मोदी नहीं पूछ रहा है, देश की भलाई के लिए भक्ति पूर्वक जुल्म के सामने झूझने वाली और जुल्म के सामने ना झुकने वाली माता राजबाला चीख-चीख के पूछ रही है और दिल्ली के शंहशाहों का जवाब मांग रही है..! कुछ लोगों को लगता था कि दमन के दौर से दुनिया को दबोच दिया जाता है। वे लोग कान खोल कर सुन लें, अंग्रेजी सल्तनत भी कभी किसी को दबोच नहीं पाई, आप लोगों की ताकत क्या है..? आप लोग चीज क्या हैं..? एक बार निकलो तो सही, जनता को जवाब देना पड़ जाएगा..!

मित्रों, मैं साफ मानता हूँ कि बाबा रामदेव आज जो कुछ भी कर रहे हैं, मैं नहीं मानता हूँ कि कोई योजना से कर रहे हैं। वो निकले थे तो नागरिकों की स्वस्थता के लिए, वो निकले थे ताकि योग के माध्यम से गरीब से गरीब आदमी अपने आप को स्वस्थ्य रख सके, वो निकले थे क्योंकि महंगी दवा गरीब को बचा नहीं सकती है, योग बचा सकता है और सिर्फ इसलिए निकले थे..! लेकिन दस साल लगातार भ्रमण करते-करते उन्होंने देखा कि नागरिकों के स्वास्थ्य का जितना संकट है, उससे ज्यादा राष्ट्र के स्वास्थ्य का संकट है और तब जा कर के उन्होंने राष्ट्र के लिए आवाज उठाना शुरू किया। और भाइयो-बहनों, इसमें एक सच्चाई है और मुझे विश्वास है कि भले ही उन पर अनेक प्रकार के, भांति-भांति के आरोप लगाने की कोशिश हुई हो... वैसे बाबा रामदेव जी मुझे मिलते हैं तो मुझे कुछ दूसरा कहते हैं। वे मुझे कहते हैं कि मोदी जी, हम दोनों सगे भाई हैं..! मैंने कहा, क्यों..? बोले, जितने प्रकार के जुल्म मुझ पर हो रहे हैं, वो सभी प्रकार के आपके ऊपर भी हो रहे हैं..! तो मैं एक सूची बनाता हूँ कि आज उन पर एक जुल्म हुआ तो मेरी बारी कब आएगी..? क्या शासन का ये काम है..? क्या सद्प्रवृति को बढ़ावा नहीं मिलना चाहिए..? आप बीमारियों की दवाई कहीं और खोज रहे हैं, बीमारी की जड़ों को दूर करने का काम ये संत परंपरा कर रही है और उसी को आप नकार रहे हो तो बुराइयाँ बढ़ती ही जाएगी..! जो श्रेष्ठ है, उत्तम है, सही रास्ता है, इसको नकारने से काम नहीं चलता..!

भाइयो और बहनों, इस देश में ऐसा एक छोटा सा वर्ग है जो ये मानता है कि हिन्दुस्तान का जन्म 15 अगस्त 1947 को हुआ है। और जो लोग ये मानते हैं कि हिन्दुस्तान 15 अगस्त को पैदा हुआ वो सारे गलत रास्ते पर जा रहे हैं..! ये सहस्त्र वर्ष पुराना, एक महान सांस्कृतिक धरोहर वाला, समय के हर पहलु को अनुभव करते हुए, कठिनाइयों से रास्ता खोजते हुए, विश्व कल्याण की कामना करते हुए आगे जा रहा एक समाज है और तभी तो विश्व की अनेक हस्तियाँ मिटने के बाद भी हमारी हस्ती मिटती नहीं है..! जिन चीजों से हम खत्म नहीं हुए हैं, जिसने हमें बचाए रखा है उनको बचाना ये हम लोगों का दायित्व बन जाता है। अगर हम उसको खो देंगे तो समाज कोई भी हो, अगर वो समाज इतिहास की जड़ों से अपने आप को काट डालता है, सांस्कृतिक छाँव से अपने आप को अलग कर देता है, तो उस समाज में इतिहास निर्माण करने की ताकत नहीं रहती है..! इतिहास वही समाज बना सकता है, जो समाज इतिहास में से प्राण शक्ति को प्राप्त करता है..! हम लोग हमारे अपने इतिहास के प्रति शर्मिंदा होते हैं, खुद को इतिहास से अलग रखने का प्रयास करते हैं, सांस्कृतिक विरासत को हम पुराण पंथी कह कर, गालियाँ दे कर के उसका इंकार कर देते हैं... और तब जा कर के स्वस्थ समाज के निर्माण में रुकावटें पैदा होती हैं..!

हमारी समाज व्यवस्था को बढ़िया बनाने का और बचाने का सबसे बड़ा काम परिवार संस्था ने किया है। हम धीरे-धीरे देख रहे हैं कि हमारी परिवार संस्था संकट में आ रही है। ज्वाइंट फैमिली से हट-हट के हम माइक्रो परिवार की ओर बढ़ते चले जा रहे हैं..! बच्चे आया के भरोसे पल रहे हैं..! हमारा सामर्थ्य कितना था, हमारी समाज व्यवस्थाएं क्या थीं, उसमें से कौन सी चीज अच्छी है कौन सी चीज़ें कालबाह्य हैं, जो निकम्मी है उसको उखाड़ फैंकना, ये हमारे समाज की ताकत है..! और मित्रों, आज मैं ये गर्व से कहना चाहता हूँ कि हम ही लोग इतने भाग्यवान हैं, इस भारत भूमि में जन्में हुए हम लोग इतने भाग्यवान है कि हमारी धरती एक ऐसी बहुरत्न वंसुधरा है, हमारी समाज व्यवस्था इतनी जागृत है कि जिसके कारण जब-जब हमारे भीतर बुराइयाँ पैदा हुईं, हमारे अंदर कमियाँ आई तो उन कमियों को दूर करने के लिए, उन बुराइयों की मुक्ति के लिए हमारे ही समाज के भीतर से तेजस्वी, ओजस्वी, प्राणवान महापुरुषों का जन्म हुआ..! अस्पृश्यता को हमने जन्म दिया, तो कोई गांधी आया जिसने अस्पृश्ता के खिलाफ जंग छेड़ा..! हम ईश्वर भक्ति में लीन थे, तब कोई विवेकानंद आया और उसने कहा कि अरे, दरिद्रनारायण की सेवा करो..! हम मंदिर, माता, भगवान उसी में लगे हुए थे, तब कोई विवेकानंद आया और उसने कहा कि अरे छोड़ो सब, तुम्हारे सब भगवानों को डूबा दो, तुम सिर्फ भारत माता की सेवा करो, ये देश तेजस्वी बन कर के निकलेगा..! ये सामर्थ्य है इस समाज का..! विधवाओं के प्रति अन्याय करने वाले इस समाज के खिलाफ इसी कोख से एक महापुरूष पैदा हुए जिन्होंने विधवाओं के कल्याण के लिए अलख जगाई और समाज के खिलाफ लड़ाई लड़े..! ये संतों का, ऋषियों का, मुनियों का, आचार्यों का योगदान है और तब जा कर के हुआ है..! ये देश राजनेताओं ने नहीं बनाया है, ये देश किसी सरकार ने नहीं बनाया है, ये देश ऋषियों ने, मुनियों ने, आचार्यों ने, शिक्षकों ने बनाया है, और तब जा कर के देश आगे बढ़ा है। सारी चीज़ें हमने राज के आस-पास, इर्द-गिर्द हमने इक्कठी कर दी हैं, और इन सारी शक्तियों को हमने नकार दिया है..! आवश्यकता है कि इन सभी शक्तियों को जोड़ें, सब शक्तियों का मिलन हो, सतसंकल्प के साथ सतशक्तियाँ सतपथ पर चलें, तो दुनिया की कोई ताकत ऐसी नहीं है कि इस भारत महामाता को जगदगुरू बनने से रोक सके..!

भाइयो और बहनों, मैं बहुत आशावादी व्यक्ति हूँ। विश्वास मेरी रगों में दौड़ता है। मेरा पसीना विकास मंत्र से पुलकित होता है। और इसलिए मैं कहता हूँ और गुजरात के अनुभव से कहता हूँ कि निराश होने का कोई कारण नहीं है..! मुझे याद है कि 2001 में जब गुजरात में भंयकर भूंकप आया, तब सारा विश्व कहता था कि गुजरात मौत की चादर ओढ कर के सोया है, अब गुजरात खड़ा नहीं हो सकता..! अब गुजरात का कुछ होगा नहीं, अध्याय पूरा हो गया..! जो गुजरात के लिए अच्छा चाहते थे वो भी दु:खी थे, उनको भी लगता था कि परमात्मा ने इतना बड़ा कहर क्यों किया..? लेकिन वही गुजरात ने करके दिखाया..! सारा विश्व कहता है, वर्ल्ड बैंक कहती है कि भयानक भूंकप की आफत में से निकलने में समृद्घ देशों को भी सात साल लगते हैं। हम तो गरीब देशों में गिने जाते हैं, लेकिन गुजरात तीन साल के भीतर-भीतर दौड़ने लग गया था। मित्रों, मैं साफ-साफ कहना चाहता हूँ कि आज जो विश्व भर में गुजरात के विकास की जो चर्चा हो रही है, आज विश्वभर में गुजरात के प्रति संतोष का एक भाव जो प्रकट हो रहा है, उसका कारण नरेन्द्र मोदी नहीं है, नहीं है, नहीं है..! अगर उसका यश भागी कोई है तो छह करेाड़ गुजरातियों का पुरषार्थ है। अगर छह करोड़ गुजरातियों का पुरूषार्थ विश्व के सामने एक आदर्श पैदा कर सकता है, तो सवा सौ करोड़ हिन्दुस्तानियों का पुरुषार्थ पूरे विश्व में एक नई चेतना पैदा कर सकता है, इस विश्वास के साथ आगे बढ़ना चाहिए..!

भाइयो और बहनों, हमने ना कभी जीवन में लेने, पाने, बनने के सपने देखें हैं, ना कभी ऐसे सपने संजोए हैं। हम तो फकीरी को लेकर चलने वाले इंसान हैं..! कल क्या था..? अगर कल कुछ नहीं था तो आने वाले कल में कुछ होना चाहिए इसकी कामना कभी जिंदगी में नहीं की..! और मित्रों, राजा रंतिदेव ने कहा था और ये देश की विशेषता देखिए कि जहाँ एक राजा किस प्रकार की ललकार करता है। राजा रंतिदेव ने कहा था ‘ना कामये राज्यम्, ना मोक्षम्, ना पुर्नभवम्, कामये दु:ख तप्तानाम्, प्राणीनाम् आर्त नाशनम्’... ना मुझे राज्य की कामना है, ना मुझे मोक्ष की कामना है, अगर कामना है तो पीड़ितों के, दुखियारों के, वंचितों के आंसू पोछने की कामना है, ये हमारी पंरपरा रही है..! ‘ना कामये राज्यम्, ना मोक्षम्, ना पुर्नभवम्’, हम उस परंपरा से निकले हैं, जिसने हमें सिखाया है ‘तेन त्यक्तेन भुञ्जीथा’... हम उस परंपरा से निकले हैं..! कुछ लोग हमारे इरादों पर शक करते हैं। अपने-पराए ऐसी दीवारें खड़ी करने की कोशिश करते हैं। मैं उन सबको कहना चाहता हूँ कि मैं जिस परंपरा में पला हूँ, मैं जिस संस्कारों में बड़ा हुआ हूँ और जिसने मुझे जो मंत्र सिखाया है, उस मंत्र को मैं मेरे राजनीतिक जीवन का मेनिफेस्टो मानता हूँ..! वो मंत्र कहता है, ‘सर्वे अपि सुखिन: संतु, सर्वे संतु निरामया’..! मुझे कभी ये नहीं कहा कि ‘हिन्दु सुखिन: संतु, हिन्दु निरामया’, ऐसा नहीं कहा..! मेरे पूर्वजों ने मुझे कहा है, ‘सर्वे अपि सुखिन: संतु, सर्वे संतु निरामया, सर्वे भद्राणी पश्यन्तु, माँ कश्चित दु:ख भाग भवेत’... सबके कल्याण की बात, सबके स्वास्थ्य की बात, सबकी समृद्घि की बात, ये मैनिफैस्टो हमें हमारे पूर्वजों ने दिया है। शायद दुनिया में किसी समाज के पास, किसी धर्म के पास, किसी परंपरा के पास दो लाइन में मानव विकास का चित्र खींचा गया हो, सोशल वैलफेयर के कामों का खाका लिया गया हो, ऐसा शायद दुनिया में कहीं नहीं होगा, ये मेरा ज्ञान कहता है..! और इसलिए भाइयो और बहनों, हमारे पास अगर इतनी बड़ी विरासत है, तो भय किस चीज का..?

मुझे स्मरण है, 2002 में मैं चुनाव जीत कर आया था। कई लोगों के लिए बहुत बड़ा सदमा था, वो बेचारे अभी तक होश में नहीं आए हैं..! 12 साल हो गए..! उस दिन का मेरा एक भाषण है। मैं मीडिया के मित्रों को कहता हूँ कि आप में अगर ईमानदारी नाम की चीज है तो उस समय के यू-टयूब पर जा कर के मेरा वो भाषण देख लीजिए। चुनाव जीतने के बाद मैंने कहा था कि अब चुनाव समाप्त हो चुके हैं, राजनीतिक गहमागहमी समाप्त हो चुकी है, तू-तू, मैं-मैं का दौर खत्म हो चुका है, अब हम सबको मिल कर के गुजरात को आगे बढ़ाना है..! और मैंने कहा था कि जिन्होंने हमें वोट दिए हैं वो भी मेरे हैं, जिन्होंने हमें वोट नहीं दिया वो भी मेरे हैं, और जिन्होंने किसी को वोट नहीं दिया वो भी मेरे हैं..! मैंने ये भी कहा था, ‘अभयम्’, ये मेरा शब्द था उस दिन के भाषण में, 2002 के उस माहौल में..! ये संतो की कृपा रही है, इन्हीं की शिक्षा-दीक्षा रही है कि उस माहौल में भी, इतने विकट वातावरण में भी ईश्वर ने मेरे मुंह से एक शब्द निकाला था और मैंने कहा था कि अब सरकार बन चुकी है और मेरा एक ही मंत्र है, ‘अभयम्’..! भाइयों-बहनों, आज 12 साल हो चुके हैं। जिस गुजरात के अंदर आए दिन दंगे होते थे, निर्दोषों को मौत के घाट उतार दिया जाता था, आज 12 साल हो गए हैं, लेकिन दंगो का नामों-निशान वहां नहीं बचा है, मित्रों..! क्यों..? ‘सर्वे अपि सुखिन: संतु, सर्वे संतु निरामया’, ये मंत्र की साधना की है तब जा कर के ये हुआ है। और इसलिए भाइयों-बहनों, मैं कहना चाहता हूँ कि एक छोटी सी जमात इस राष्ट्र की मूल धारा को ललकारती रही है। हमने उसकी अनदेखी की है, उसके कारण हमें बहुत भुगतना पड़ा है। छोटी सी ही क्यों ना हो, लेकिन सात्विक शक्ति को हमें इतनी उभारनी होगी, ताकि इस प्रकार की विकृतियाँ अपने आप नष्ट हो जाएं।

आयुर्वेद तो यही कहता है..! और आज बहुत बड़ी सेवा की है आचार्य जी ने, इतने बड़े ग्रंथ दिए हैं। देखिए, हमारे यहाँ एक जमाना था, सारा विज्ञान ऋषियों के द्वारा ही आया हुआ है। हमारे ऋषि-मुनि जंगलों में तपस्या करते थे, उसी से तो हमारे सारे ग्रंथ बने थे..! उसी परंपरा की एक छोटी सी कड़ी के रूप में आज इस भूमि पर इतने समृद्घ ग्रंथों का लोकापर्ण किया है और मैंने आचार्य जी से प्रार्थना की है कि इसका डिजिटल फार्म हो ताकि दुनिया, नई पीढ़ी जरा इन्टरनेट पर जाकर देखें कि पेड़-पौधे क्या देते हैं, ये परमात्मा हमें क्या दे रहे हैं..! हमारे लिए सब चीजें मौजूद हैं, उसको जोड़ने का काम आचार्य जी ने इन ग्रंथों के माध्यम से किया है। आने वाली पीढ़ी के लिए सदियों तक काम आने वाला ये उत्तम काम इन्होंने किया है। मैं आपका अभिनंदन करता हूँ, मैं पतंजली योगपीठ का अभिनंदन करता हूँ कि उन्होंने हमारी जो मूलभूत शक्ति है उस पर अत्यन्त भरोसा करते हुए उसका पुनर्जागरण करने का एक अभियान उठाया है..!

भाइयो और बहनों, आज मुझे एक सम्मान पत्र दिया गया। मैं अपने आप से पूछता हूँ कि क्या मैं इसके योग्य हूँ..? मेरी आत्मा कहती है कि नहीं, मैं इसके लिए कत्तई योग्य नहीं हूँ..! लेकिन संत तो मन से माँ के रूप होते हैं, संतों के भीतर माँ का एक विराट रूप का अस्तित्व होता है। और जो संतों के निकट जाता है, उसको संतों की भीतर का जो मातृत्व होता है उसकी अनुभूति होती है। और माँ अपने बच्चे को जब वो चल नहीं पाता है, तो उंगली पकड़ कर चलो-चलो, दौड़ो-दौड़ो, अब बहुत पास में है, ऐसे खींच कर ले जाती है। माँ को मालूम होता है कि बच्चा दौड़ नहीं पाएगा, फिर भी माँ पुचकारती है कि अरे दौड़ो-दौड़ो, आ जाओ-आ जाओ... ऐसा करके दौड़ाती है..! मुझे लगता है कि मेरी दौड़ कुछ कम पड़ रही है, मुझे लगता है कि अभी भी मुझमें कुछ कमियाँ हैं और संतो ने आज मुझे एक अलग ढंग से इंगित किया है कि बेटे, ये सब तुम्हे अभी पूरा करना बाकी है..! ये सम्मान पत्र नहीं है, ये आदेश पत्र है और मेरे लिए ये प्रेरणा पुष्प है..! ये प्रेरणा पुष्प मुझे हर पल कमियों से मुक्ति पाने की ताकत दे..! और मैं संतों से खुले आम कहता हूँ, बुरा मत मानना संतों, मुझे संतों से वो आशीर्वाद नहीं चाहिए जो किसी पद के लिए होते हैं, नहीं चाहिए..! हम उसके लिए पैदा नहीं हुए हैं। मुझे संतो से आशीर्वाद चाहिए और इसलिए चाहिए कि मैं कभी कुछ गलत ना करूँ, मेरे हाथों से कुछ गलत ना हो जाए, मेरे हाथों से किसी का बुरा ना हो जाए..! संत मुझे वो आशीर्वाद दें, गंगा मैया मुझे वो सामर्थ्य दे, राजाधिराज हिमालय मुझे वो प्रेरणा दे और आप सब जनता जर्नादन ईश्वर का रूप होती है, मैं उसके चरणों में नतमस्तक होता हूँ और मैं ईश्चर के चरणों में नमन करता हूँ ताकि 125 करोड़ नागरिकों की तरह एक नागरिक के नाते हम भी कभी भी किसी का बुरा ना करें, किसी के लिए बुरा ना सोचें और जो महान कार्य के लिए यज्ञ चल रहे हैं... आप देखिए, कितनी बड़ी शिक्षा संस्था चला रहे हैं..! मैं तो यहाँ हरिद्वार की धरती पर इस शुभ अवसर पर बाबा रामदेव जी से प्रार्थना करता हूँ कि हिन्दुस्तान में संतों के द्वारा शिक्षा के जो काम हो रहे हैं, एक बार यहीं पर उनका सबसे बड़ा मेला लगना चाहिए और लोग देखें कि कोई पाँच लाख बच्चों को पढ़ा रहा है, कोई दो लाख बच्चों को पढ़ा रहा है और सब संस्कार और शिक्षण दोनों की चिंता कर रहे हैं..! ये छोटे काम नहीं है मित्रों, ये राष्ट्र निर्माण की अमूल्य सेवा है, जो इन महापुरूषों के द्वारा हो रही है..! हम कम से कम देखें तो सही, समझें तो सही, उनका गौरवगान तो करें..! लेकिन नहीं, अगर उनकी राजनीतिक उठापटक में इसका कोई मेल नहीं बैठता है, तो पता नहीं क्या कुछ कह देते हैं..! मैं हैरान हूँ, बाबा रामदेव के लिए क्या-क्या शब्द प्रयोग किए हैं इन लोगों ने, क्या-क्या शब्द बोले हैं, मैं सोच नहीं सकता हूँ, मित्रों..! मन में बड़ी पीड़ा होती है। ईश्वर से हम प्रार्थना करें कि हम सत्संकल्प लिए आगे बढ़ें और स्वामी विवेकानंद जी की 150 वीं जंयति के निमित्त उनके सपनों को पूर्ण करने के लिए ऐसा भारत बनाने के लिए पूरी शक्ति और सामर्थ्य का अनुभव करें, इसी एक प्रार्थना के साथ फिर एक बार इस अवसर पर मुझे आने का अवसर मिला, जीवन की धन्यता के साथ उस ऋण को स्वीकार करते हुए, मैं सभी के चरणों में वंदन करते हुए अपनी वाणी को विराम देता हूँ..!

भारत माता की जय..!

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Text of PM’s speech at foundation stone laying ceremony of ‘Tumakuru Industrial Township’ & dedication of HAL Helicopter Factory to the nation in Tumakuru, Karnataka
February 06, 2023
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Lays foundation stones for Tumakuru Industrial Township and two Jal Jeevan Mission projects in Tumakuru
“Double-engine government has made Karnataka the first choice of investors”
“We have to minimize foreign dependence for our defence needs”
“With the spirit of ‘Nation First’ success is assured”
“This factory and rising strength of HAL has exposed the purveyors of falsehood”
“Industrial township is a huge gift to Tumakuru after the Food Park and HAL which will help in developing Tumakuru as a big industrial center of the country”
“The Double Engine government is paying equal attention to social infrastructure as well as physical infrastructure”
“This budget is a big step in the direction of Samarth Bharat, Sampann Bharat, Swayampurna Bharat, Shaktiman Bharat, Gatiwan Bharat”
There is huge enthusiasm in the middle class due to tax benefits given in this budget”
“Financial inclusion of women strengthens their voice in households and this Budget has many prov

तुमकुरु जिल्ले, गुब्बी तालुकिना, निट्टूर नगरदा, आत्मीय नागरीक-अ बंधु, भगि-नियरे, निमगेल्ला, नन्ना नमस्कार गडु!

कर्नाटक संतों, ऋषियों-मनीषियों की भूमि है। आध्यात्म, ज्ञान-विज्ञान की महान भारतीय परंपरा को कर्नाटक ने हमेशा सशक्त किया है। इसमें भी तुमकुरु का विशेष स्थान है। सिद्धगंगा मठ की इसमें बहुत बड़ी भूमिका है। पूज्य शिवकुमार स्वामी जी ने ‘त्रिविधा दसोही’ यानि "अन्ना" "अक्षरा" और "आसरे" की जो विरासत छोड़ी उसे आज श्री सिद्धलिंगा महास्वामी जी आगे बढ़ा रहे हैं। मैं पूज्य संतों को नमन करता हूं। गुब्बी स्थित श्री चिदम्बरा आश्रम और भगवान चन्नबसवेश्वर को भी मैं प्रणाम करता हूँ !

भाइयों और बहनों,

संतों के आशीर्वाद से आज कर्नाटक के युवाओं को रोज़गार देने वाले, ग्रामीणों और महिलाओं को सुविधा देने वाले, देश की सेना और मेड इन इंडिया को ताकत देने वाले, सैकड़ों करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट्स का लोकार्पण और शिलान्यास हुआ है। आज देश की एक बहुत बड़ी हेलीकॉप्टर फैक्ट्री तुमकुरु को मिली है। आज तुमकुरू इंडस्ट्रियल टाउनशिप का शिलान्यास भी हुआ है और इसके साथ-साथ तुमकुरु जिले के सैकड़ों गांवों को पीने के पानी की स्कीमों पर भी काम शुरू हुआ है और मैं इसके लिए आप सबको बहुत-बहुत बधाई देता हूं।

साथियों,

कर्नाटक युवा टैलेंट, युवा इनोवेशन की धरती है। ड्रोन मैन्युफैक्चरिंग से लेकर तेजस फाइटर प्लेन बनाने तक, कर्नाटक के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की ताकत को दुनिया देख रही है। डबल इंजन सरकार ने कर्नाटक को निवेशकों की पहली पसंद बनाया है। डबल इंजन सरकार कैसे काम करती है, इसका उदाहरण आज जिस हेलीकॉप्टर कारखाने का लोकार्पण हुआ है, वो भी है। साल 2016 में एक संकल्प के साथ मुझे इसके शिलान्यास का सौभाग्य मिला था और संकल्प ये था कि हमें अपनी रक्षा जरूरतों के लिए विदेशों पर निर्भरता को कम से कम करते जाना है। मुझे खुशी है कि आज सैकड़ों ऐसे हथियार और रक्षा उपकरण, जो भारत में ही बन रहे हैं, जो हमारी सेनाएं उपयोग कर रही है। आज आधुनिक असॉल्ट राइफल से लेकर टैंक, तोप, नौसेना के लिए एयरक्राफ्ट करियर, हेलिकॉप्टर, फाइटर जेट, ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट सब कुछ भारत खुद बना रहा है। 2014 से पहले के, ये आंकड़ा याद रखना, याद रखोगे! 2014 से पहले के 15 सालों में जितना निवेश एयरोस्पेस सेक्टर में हुआ, उसका 5 गुणा बीते 8-9 वर्षों में हो चुका है। आज हम अपनी सेना को मेड इन इंडिया हथियार तो दे ही रहे हैं, बल्कि हमारा डिफेंस एक्सपोर्ट भी 2014 की तुलना में कई गुना ज्यादा हो गया है। आने वाले समय में यहां तुमकुरू में ही सैकड़ों, सैकड़ों हेलीकॉप्टर बनने वाले हैं और इससे लगभग 4 लाख करोड़ रुपए का बिजनेस यहां होगा। जब इस प्रकार मैन्युफैक्चरिंग की फैक्ट्रियां लगती हैं, तो हमारी सेना की ताकत तो बढ़ती ही है, हज़ारों रोजगार और स्वरोज़गार के अवसर भी मिलते हैं। तुमकुरु के हेलीकॉप्टर कारखाने से यहां आसपास अनेक छोटे-छोटे उद्योगों को, व्यापार-कारोबार को भी बल मिलेगा।

साथियों,

जब नेशन फर्स्ट, राष्ट्र प्रथम इस भावना से काम होता है, तो सफलता भी ज़रूर मिलती है। बीते 8 वर्षों में हमने एक तरफ सरकारी फैक्ट्रियों, सरकारी डिफेंस कंपनियों के कामकाज में सुधार किया, उनको ताकतवर बनाया, वहीं दूसरी तरफ प्राइवेट सेक्टर के लिए भी दरवाज़े खोले। इससे कितना लाभ हुआ, वो हम HAL- हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड में भी देख रहे हैं। और मैं कुछ सालों पहले की चीजें आज याद कराना चाहता हूँ, मीडिया वालों का भी जरूर ध्‍यान जाएगा, यही HAL है जिसे बहाना बनाकर हमारी सरकार पर तरह-तरह के झूठे आरोप लगाए गए। यही HAL है जिसका नाम लेकर लोगों को भड़काने की साजिशें रचीं गईं, लोगों को उकसाया गया। Parliament के घंटे से घंटे तबाह कर दिये लेकिन मेरे प्यारे भाइयों-बहनों, झूठ कितना ही बड़ा क्यों ना हो, कितनी ही बार बोला जाता हो, कितने ही बड़े लोगों से बोला जाता हो, लेकिन एक ना एक दिन वो सच के सामने हारता ही है। आज HAL की ये हेलीकॉप्टर फैक्ट्री, HAL की बढ़ती ताकत, ढेर सारे पुराने झूठों को और झूठे आरोप लगाने वालों का पर्दाफाश कर रही है, हकीकत खुद बोल रही है। आज वही HAL भारत की सेनाओं के लिए आधुनिक तेजस बना रहा है, विश्व के आकर्षण का केंद्र है। आज HAL डिफेंस सेक्टर में भारत की आत्मनिर्भरता को बल दे रहा है।

साथियों,

आज यहां तुमकुरु इंडस्ट्रियल टाउनशिप के लिए भी काम शुरू हुआ है। फूड पार्क, हेलीकॉप्टर कारखाने के बाद तुमकुरु को मिला एक और बड़ा उपहार है। जो ये नया इंडस्ट्रियल टाउनशिप होगा, इससे तुमकुरु कर्नाटक के ही नहीं, बल्कि भारत के एक बड़े औद्योगिक केंद्र के रूप में विकसित होगा। ये चेन्नई-बेंगलुरु इंडस्ट्रियल कॉरिडोर का हिस्सा है। इस समय चेन्नई-बेंगलुरु, बेंगलुरु-मुंबई और हैदराबाद-बेंगलुरु इंडस्ट्रियल कॉरिडोर्स पर काम चल रहा है। इन सभी में कर्नाटक का एक बहुत बड़ा हिस्सा आता है। मुझे इस बात की भी खुशी है कि तुमकुरु इंडस्ट्रियल टाउनशिप का निर्माण पीएम गतिशक्ति नेशनल मास्टर प्लान के तहत हो रहा है। मुंबई-चेन्नई हाईवे, बेंगुलुरु एयरपोर्ट, तुमकुरु रेलवे स्टेशन, मेंगलुरु पोर्ट और गैस कनेक्टिविटी, ऐसी मल्टी मॉडल कनेक्टिविटी से इसे जोड़ा जा रहा है। इससे यहां बहुत बड़ी संख्या में रोजगार और स्वरोजगार बनने वाले हैं।

साथियों,

डबल इंजन की सरकार का जितना ध्यान फिजिकल इंफ्रास्ट्रक्चर पर है, उतना ही हम सोशल इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी जोर दे रहे हैं। बीते वर्षों में हमने निवासक्के नीरु, भूमिगे नीरावरी यानि हर घर जल, हर खेत को पानी को प्राथमिकता दी है। आज पूरे देश में पीने के पानी के नेटवर्क का अभूतपूर्व विस्तार हो रहा है। इस वर्ष जल जीवन मिशन के लिए बजट में पिछले वर्ष की तुलना में 20 हज़ार करोड़ रुपए से अधिक की वृद्धि की गई है। जब हर घर जल पहुंचता है, तो इसका सबसे बड़ा लाभ गरीब महिलाओं और छोटी बेटियों को ही होता है। उन्हें साफ पानी जुटाने के लिए घरों से दूर नहीं जाना पड़ता। पिछले साढ़े 3 वर्षों में देश में नल से जल का दायरा 3 करोड़ ग्रामीण परिवारों से बढ़कर के 11 करोड़ परिवार हो चुका है। हमारी सरकार निवासक्के नीरु के साथ ही भूमिगे नीरावरी पर भी लगातार बल दे रही है। बजट में अपर भद्रा प्रोजेक्ट के लिए लगभग साढ़े 5 हज़ार करोड़ रुपए की व्यवस्था की गई है। इससे तुमकुरु, चिकमगलुरू, चित्रदुर्ग और दावणगेरे सहित सेंट्रल कर्नाटक के बड़े सूखा प्रभावित क्षेत्र को लाभ होगा। ये हर खेत और हर घर तक पानी पहुंचाने के डबल इंजन सरकार की प्रतिबद्धता को दिखाता है। इसका बहुत बड़ा लाभ हमारे छोटे किसानों को होगा, जो खेती के लिए सिंचाई के पानी पर, वर्षा के पानी पर ही निर्भर रहते आए हैं।

साथियों,

इस साल के गरीब हितैषी, मध्यम वर्ग हितैषी बजट की चर्चा पूरी दुनिया में हो रही है। विकसित भारत के निर्माण के लिए सब जुड़ें, सब जुटें, सबका प्रयास कैसे हो, इसके लिए ये बजट बहुत ताकत देने वाला है। जब भारत अपनी आजादी के 100 वर्ष मनाएगा, उस सशक्त भारत की नींव, इस बार के बजट ने और मजबूत की है। ये बजट, समर्थ भारत, संपन्न भारत, स्वयंपूर्ण भारत, शक्तिमान भारत, गतिवान भारत की दिशा में बहुत बड़ा कदम है। आजादी के इस अमृतकाल में, कर्तव्यों पर चलते हुए विकसित भारत के संकल्पों को सिद्ध करने में इस बजट का बड़ा योगदान है। गांव, गरीब, किसान, वंचित, आदिवासी, मध्यम वर्ग, महिला, युवा, वरिष्ठ जन, सबके लिए बड़े-बड़े फैसले इस बजट में लिए गए हैं। ये सर्वप्रिय बजट है। सर्वहितकारी बजट है। सर्वसमावेशी बजट है। सर्व-सुखकारी बजट है। सर्व-स्पर्शी बजट है। ये भारत के युवा को रोजगार के नए अवसर देने वाला बजट है। ये भारत की नारीशक्ति की भागीदारी बढ़ाने वाला बजट है। ये भारत की कृषि को, गांव को आधुनिक बनाने वाला बजट है। ये श्रीअन्न, श्रीअन्‍न से छोटे किसानों को वैश्विक ताकत देने वाला बजट है। ये भारत में रोजगार बढ़ाने वाला और स्वरोजगार को बल देने वाला बजट है। हमने ‘अवश्यकते, आधारा मत्तु आदाया’ यानि आपकी जरूरतों, आपको दी जाने वाली सहायता और आपकी आय, तीनों का ध्यान रखा है। कर्नाटक के हर परिवार को इससे लाभ मिलेगा।

भाइयों और बहनों,

2014 के बाद से सरकार का प्रयास समाज के उस वर्ग को सशक्त करने का रहा है, जिन्हें पहले सरकारी सहायता मिलनी बहुत मुश्किल होती थी। इस वर्ग तक सरकारी योजनाएं या तो पहुंचती ही नहीं थीं, या फिर वो बिचौलियों के हाथों लुट जाता था। आप देखिए, बीते वर्षों में हमने हर उस वर्ग तक सरकारी सहायता पहुंचाई है, जो पहले इससे वंचित थे। हमारी सरकार में, ‘कार्मिक-श्रमिक’ ऐसे हर वर्ग को पहली बार पेंशन और बीमा की सुविधा मिली है। हमारी सरकार ने छोटे किसान की सहायता के लिए उसे पीएम किसान सम्मान निधि की शक्ति दी है। रेहड़ी, ठेले, फुटपाथ पर काम करने वाले, स्ट्रीट वेंडर्स को हमने पहली बार बैंकों से बिना गारंटी का ऋण दिलाया है। इस वर्ष का बजट इसी भावना को आगे बढ़ाता है। पहली बार, हमारे विश्वकर्मा बहनों-भाइयों के लिए भी देश में एक योजना बनी है। विश्वकर्मा यानि, हमारे वो साथी जो अपने हाथ के कौशल से, हाथ से चलने वाले किसी औजार की मदद से कुछ निर्माण करते हैं, सृजन करते हैं, स्वरोजगार को बढ़ावा देते हैं। जैसे हमारे कुंब्बारा, कम्मारा, अक्कसालिगा, शिल्पी, गारेकेलसदवा, बड़गी आदि जो हमारे सब साथी हैं, पीएम-विकास योजना से अब ऐसे लाखों परिवारों को उनकी कला, उनके कौशल को और समृद्ध करने में मदद मिलेगी।

साथियों,

इस वैश्विक महामारी के समय में राशन पर होने वाले खर्च की चिंता से भी हमारी सरकार ने गरीब परिवारों को मुक्त रख रखा है। इस योजना पर हमारी सरकार 4 लाख करोड़ रुपए से अधिक खर्च कर चुकी है। गांवों में हर गरीब परिवार को पक्का घर देने के लिए बजट में अभूतपूर्व 70 हज़ार करोड़ रुपए रखे गए हैं। इससे कर्नाटक के अनेक गरीब परिवारों को पक्‍का घर मिलेगा, जिन्दगी बदल जाएगी।

भाइयों और बहनों,

इस बजट में मिडिल क्लास के हित में अभूतपूर्व फैसले लिए गए हैं। सात लाख रुपए तक की आय पर इनकम टैक्स जीरो होने से मिडिल क्लास में बहुत उत्साह है। विशेष रूप से 30 वर्ष से कम के युवा साथी, जिनकी नौकरी नई है, बिजनेस नया है, उनके अकाउंट में हर महीने अधिक पैसों की बचत होने वाली है। इतना ही नहीं, जो रिटायर हुए कर्मचारी हैं, जो हमारे सीनियर सिटीजन हैं, वरिष्ठ नागरिक हैं, उनके लिए डिपॉजिट की लिमिट को 15 लाख से बढ़ाकर 30 लाख यानि दोगुना कर दिया है। इससे उन्हें हर महीने मिलने वाला रिटर्न और बढ़ जाएगा। प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले साथियों के लिए Leave encashment पर टैक्स की छूट लंबे समय से सिर्फ 3 लाख रुपए थी। अब 25 लाख रुपए तक के Leave encashment को टैक्स फ्री कर दिया गया है। इससे तुमकुरु, बैंगलुरु सहित कर्नाटक और देश के लाखों परिवारों के पास ज्यादा पैसा आएगा।

साथियों,

हमारे देश की महिलाओं का वित्तीय समावेश, भाजपा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है। महिलाओं का वित्तीय समावेश, घरों में उनकी आवाज मजबूत करता है, घर के निर्णयों में उनकी भागीदारी बढ़ाता है। हमारी माताएं-बहनें-बेटियां, ज्यादा से ज्यादा बैंकों से जुड़ें, इसके लिए इस बजट में हमने बड़े-बड़े कदम उठाए हैं। हम महिला सम्मान बचत पत्र लेकर आए हैं। इसमें बहनें 2 लाख रुपए तक का निवेश कर सकती हैं, जिस पर सबसे अधिक साढ़े 7 प्रतिशत ब्याज मिलेगा। ये परिवार और समाज में महिलाओं की भूमिका को और बढ़ाएगा। सुकन्या समृद्धि, जन धन बैंक खातों, मुद्रा ऋण और घर देने के बाद ये महिला आर्थिक सशक्तिकरण के लिए एक और बड़ी पहल है। गांवों में महिला सेल्फ हेल्प ग्रुप्स के सामर्थ्य को और बढ़ाने के लिए भी बजट में अहम फैसला लिया गया है।

भाइयों और बहनों,

ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर इस बजट में सबसे अधिक फोकस है। किसानों को कदम-कदम पर डिजिटल टेक्नॉलॉजी से मदद हो या सहकारिता का विस्तार, इस पर बहुत फोकस है। इससे किसानों, पशुपालकों और मछुआरों, सभी को लाभ होगा। गन्ने से जुड़ी सहकारी समितियों को विशेष मदद मिलने से कर्नाटक के गन्ना किसानों को बहुत लाभ होगा। आने वाले समय में अनेक नई सहकारी समितियां भी बनेंगी और अनाज की स्टोरेज के लिए देशभर में बड़ी संख्या में स्टोर बनेंगे। इससे छोटे किसान भी अपना अनाज स्टोर कर पाएंगे और बेहतर कीमत मिलने पर बेच पाएंगे। यही नहीं प्राकृतिक खेती से छोटे किसान की लागत कम हो, इसके लिए हज़ारों सहायता केंद्र भी बनाए जा रहे हैं।

साथियों,

कर्नाटक में आप सभी मिलेट्स-मोटे अनाज का महत्व बखूबी समझते हैं। इसलिए मोटे अनाजों को आप सभी पहले से ‘सिरि धान्या’ कहते हैं। अब कर्नाटक के लोगों की इसी भावना को देश आगे बढ़ा रहा है। अब पूरे देश में, मोटे अनाज को श्री-अन्न की पहचान दी गई है। श्री-अन्न यानि, ‘धान्य’ में सर्वश्रेष्ठ। कर्नाटक में तो श्रीअन्न रागी, श्रीअन्न नवणे, श्रीअन्न सामे, श्रीअन्न हरका, श्रीअन्न कोरले, श्रीअन्न ऊदलु, श्रीअन्न बरगु, श्रीअन्न सज्जे, श्रीअन्न बिड़ीजोड़ा, किसान ऐसे अनेक श्री अन्न पैदा करता है। कर्नाटक के ‘रागी मुद्दे’, ‘रागी रोट्टी’ इस स्वाद को कौन भूल सकता है? इस साल के बजट में श्रीअन्न के उत्पादन पर भी बहुत बल दिया गया है। इसका लाभ कर्नाटक के सूखा प्रभावित क्षेत्रों के छोटे-छोटे किसानों को सबसे अधिक लाभ होगा।

साथियों,

डबल इंजन सरकार के ईमानदार प्रयासों के कारण आज भारत के नागरिक का विश्वास बुलंदी पर है, आत्मविश्वास बुलंदी पर है। हम हर देशवासी का जीवन सुरक्षित करने के लिए, भविष्य समृद्ध करने के लिए दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। आपका निरंतर आशीर्वाद ही हम सभी के लिए ऊर्जा है, हमारी प्रेरणा है। एक बार फिर आप सभी को बजट और आज तुमकुरु में जो विकास के प्रोजेक्ट का लोकार्पण और शिलान्यास हुआ है, इसके लिए मैं बहुत-बहुत बधाई देता हूँ। आप आज इतनी बड़ी तादाद में यहाँ आए हैं, हमें आशीर्वाद दे रहे हैं, मैं आप सबका भी हृदय से बहुत-बहुत आभार व्यक्त करता हूँ।

धन्यवाद !