Shri Modi's speech at Dharma Meemamsa Parishad at Sivagiri Mutt, Kerala

Published By : Admin | April 24, 2013 | 16:53 IST

ब्रह्म श्री प्रकाशानंदा स्वामीगल, श्रीमद ऋतंभरा नंदा स्वामीगल, श्री नारायण धर्मा संगम सन्यासिन्स, श्री मुरलीधरन, सहोदरी, सहोदर नवारे, नमस्काम्..! श्रीमान मुरलीधरन की मदद से मैं अपने दिल की बात आप सब तक पहुंचा पाऊंगा। मैं देख रहा हूँ कि यहाँ जो व्यवस्था बनी है वो व्यवस्था कम पड़ गई है और बहुत बड़ी मात्रा में लोग दूर-दूर बाहर खड़े हैं..! भाइयो-बहनों, इस शामियाने में जगह शायद कम होगी, लेकिन आप भरोसा रखिए कि मेरे दिल में आप लोगों के लिए बहुत जगह है..!

मेरा बहुत बड़ा सौभाग्य रहा कि बचपन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की गतिविधि से जुड़ा। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की गतिविधि में एक महत्वपूर्ण संस्कार कार्यक्रम होता है, प्रात:स्मरण काल। और जब हमें प्रात: स्मरण सिखाया गया था उसी समय से प्रतिदिन सुबह परम पूज्य ब्रह्मलीन नारायण गुरू स्वामी का स्मरण करने का सौभाग्य मिलता था। आज देश कि जिन समस्याओं की ओर हम देख रहे हैं, उन समस्याओं की ओर नजर करें और श्री नारायण गुरू स्वामी कि शिक्षा पर नजर करें, तो हमें ध्यान में आता है कि अगर ये देश श्री नारायण गुरू स्वामी की शिक्षा-दीक्षा पर चला होता तो आज हमारे देश का ये हाल ना हुआ होता..! श्री नारायण गुरू स्वामी ने समाजिक जीवन की शक्ति बढ़ाने के मूलभूत तत्वों पर सबसे अधिक बल दिया था। आज समाज में किसी ना किसी स्वरूप में अस्पृश्यता आज भी नजर आती है। हमारे संतों के प्रयत्नों के द्वारा समाज जीवन की छूआछूत कम होती गई, लेकिन राजनीतिक जीवन में छूआछूत और भी बढ़ती चली जा रही है..! यह देश स्वामी विवेकानंद जी की 150 वीं जयंती मना रहा है और हम जब स्वामी विवेकानंद की 150 वीं जयंती मना रहे हैं तब, इस बात का भी संयोग है कि श्री नारायण गुरू स्वामी के जीवन में भी इस कार्य को आगे बढ़ाने में स्वामी विवेकानंद जी का सीधा-सीधा संबंध आया था। हम पूरे आजादी के आंदोलन की ओर नजर करें तो हमारे ध्यान में आएगा कि अठारहवीं शताब्दी का उत्तरार्ध, उन्नीसवीं शताब्दी और बीसवीं शताब्दी में भारत की आजादी के आंदोलन की पिठीका तैयार करने में सबसे बड़ा योगदान किसी ने दिया है तो हमारे संतों ने दिया है, महापुरूषों ने दिया है, सन्यासियों ने दिया है, जिनके पुरुषार्थ के कारण एक समाज जागरण का काम, सामाजिक चेतना का काम, सामाजिक एकता का काम निरंन्तर चलता रहा और उसी का परिणाम हुआ कि देश की आजादी के आंदोलन के लिए एक मजबूत पीठिका का निर्माण हुआ। 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के बाद अंग्रेज ये मान कर चलते थे कि अब हिन्दुस्तान को हजारों सालों तक गुलाम बनाए रखा जा सकता है, अब हिन्दुस्तान खड़ा नहीं हो सकता है। लेकिन 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के बाद पूरी तीन शताब्दी की ओर देखा जाए तो इस देश में इन महापुरूषों की एक श्रुंखला रही है और उस श्रुंखला के कारण निरंतर हिन्दुस्तान का कोई एक राज्य ऐसा नहीं होगा, हिन्दुस्तान का कोई समाज ऐसा नहीं होगा, हिन्दुस्तान का कोई क्षेत्र ऐसा नही होगा कि जहाँ पर पिछली तीन शताब्दी के अंदर कोई ना कोई ऐसे महापुरूष का जन्म ना हुआ हो जिस महापुरूष ने समाजिक संस्कारों के लिए, समाज सुधार के लिए सोशल रिफार्मर के नाते काम ना किया हो और समाज को जोड़ने का काम ना किया हो, ऐसा पिछली तीन शताब्दी में किसी भूभाग में नहीं मिलेगा..! चाहे स्वामी राम दास हो, चाहे स्वामी विवेकानंद हो, चाहे स्वामी दयानंद से लेकर के स्वामी श्रद्घानंद तक की परंपरा हो, चाहे बस्वेश्वर हो, चाहे चेतन्य महाप्रभु हो, चाहे गुजरात के नरसिंह मेहता हो, इस देश के अंदर ऐसी एक परंपरा रही और केरल में भी पूज्य नारायण स्वामी जी का हो या अयंकाली जी का हो, इन सबकी परंपरा के कारण हिन्दुस्तान के अंदर इस चेतना को जागृत रखने में सफलता मिली थी। इन महापुरुषों ने त्याग और तपश्चर्या के द्वारा देश में जागरण का काम किया, देशभक्ति जगाने का काम किया, हमारी संस्कृति, हमारे धर्म और हमारी परंपरा को जगाने का काम किया और उसके कारण भारत के आजादी के आंदोलन के लिए एक बहुत बड़ी पीठीका तैयार हुई..!

लोगों को लगता है कि दुनिया की अनेक परंपराएं, अनेक संस्कृतियां, समाज जीवन की अनेक परंपराएं धवस्त हो गई, इतिहास के किनारे जा कर के उन्होंने अपनी जगह ले ली और आज उनका कहीं नामोनिशान नहीं रहा..! लोग पूछते हैं कि क्या कारण रहा कि हजारों साल के बाद भी ये समाज, ये संस्कृति, इस देश की परंपरा मिटती नहीं है, पूरे विश्व के अंदर ये सवाल उठाया जाता है..! समाज जीवन में अगर हम बारीकी से देंखें कि हजारों साल हुए, हमारी हस्ती मिटती क्यों नहीं है..? क्या हजारों साल में हमारे अंदर बुराइयाँ नहीं आई हैं? आई हैं..! हमारे में विकृतियाँ नहीं आई हैं? आई हैं..! हमारे समाज में बिखराव नहीं आया है? आया है..! अनेक बुराइयाँ आने के बावजूद भी इस समाज की ताकत ये रही है कि हिन्दु समाज ने हमेशा अपने ही भीतर संतो को जन्म दिया, समाज सुधारकों को जन्म दिया, एक नई चेतना, नया स्वस्थ जगत बनाने के लिए जो-जो लोगों ने जन्म लिया उन महापुरूषों के पीछे चलने का साहस दिखाया और अपनी ही बुराइयों पर वार करने की ताकत हमारे ही समाज में से पैदा होती थी, ऐसे महापुरूष हमारे समाज में से ही पैदा होते थे और उन महारुषों की पैकी एक बहुत बड़ा नाम केरल की धरती पर जन्मे हुए परमपूज्य श्री नारायण स्वामी का है..! श्री नारायण गुरू जी ने उस कालखंड में शिक्षा को सर्वाधिक महत्व दिया और आज अगर केरल गर्व से खड़ा है और शिक्षा के क्षेत्र में पूरे देश में केरल ने जो अपना एक रूतबा जमाया है, अगर उसके मूल में हम देखें तो सौ-सवा सौ साल पहले ऐसे महापुरूषों ने शिक्षा के लिए अपना जीवन खपा दिया था और उसके कारण शिक्षा का ये मजबूत फाउंडेशन आज केरल की धरती पर नजर आता है..!

विश्व के कई समाज ऐसे हैं कि जो 20 वीं शताब्दी तक नारी को बराबर का दर्जा देने के लिए तैयार नहीं थे। विश्व के प्रगतिशील माने जाने वाले देश भी, लोकतंत्र में विश्वास रखने के बावजूद भी महिला को मताधिकार देने के लिए सदियों तक तैयार नहीं थे। उस युग में भी हिन्दुस्तान में ऐसे संत महात्माओं की परंपरा पैदा हुई जिन्होंने नारी कल्याण के लिए, नारी उत्थान के लिए, नारी शिक्षा के लिए, नारी समानता के लिए अपने आप को खपा दिया था और समाज के अंदर परिवर्तन लाने का प्रयास किया था। समाज के दलित, पीडित, शोषित, उपेक्षित, वंचित ऐसे समाज की भलाई के लिए अनेक प्रकार के समाज सुधार के काम सदियों से चलते आए हैं, लेकिन जिन समाज सुधार के कामों में राजनीति जुड़ती है वहाँ पर हैट्रेड का माहौल भी जन्म लेता है। एकता सुधार करने के लिए, एक को अधिकार देने के लिए दूसरे को नीचे दिखाना, दूसरे को हेट करना, दूसरे को दूर करना, दूसरे के खिलाफ बगावत का माहौल बनाना ये परंपरा रहती है। लेकिन जब समाज सुधार के अंदर आध्यात्म जुड़ता है तब समाज सुधार भी हो, लेकिन समाज टूटे भी नहीं, नफरत की आग पैदा ना हो, जिनके कारण समाज में बुराई आई हैं उनके प्रति रोष का भाव पैदा ना हो, उनको भी जोड़ना, इनको भी जोड़ना, सबको जोड़कर के चलने का काम होता है। जब समाज सुधार के साथ आध्यात्मिक चेतना का मिलन होता है तब इस प्रकार का परिवर्तन आता है। श्री नारायण गुरू के माध्यम से समाज सुधार और आध्यात्म का ऐसा अद्भुत मिलन था कि समाज में कहीं पर भी उन्होंने नफरत को जन्म देने का अधिकार किसी को भी नहीं दिया..!

हमारे देश में उस काल खंड की ओर अगर हम नजर करें..! समाज के अंदर बुराइयों ने जब पूरी तरह समाज पर कब्जा जमाया हो, स्थापित हितों का जमावड़ा इसको बरकरार रखने के लिए भरपूर कोशिश करता हो, ऐसे समय में ऐसे संत खड़े हुए जिनके पास कुछ नहीं था, लेकिन बुराइयों के खिलाफ लड़ने का संकल्प था और वो बुराइयों के खिलाफ खड़े हुए, समाज स्वीकार करे या ना करे, वे बुराइयों के खिलाफ लड़ने से पीछे नहीं हटे और पूरी जिन्दगी समाज सुधार के लिए घिस दी। जिस समाज के अंदर ईश्वर भक्ति सर्वश्रेष्ठ मानी जाती हो, परमात्मा सबकुछ है ऐसा माना जाता हो, उस कालखंड में भी इस देश में ऐसे सन्यासी हुए जो कहते थे कि ईश्वर भक्ति बाद में करो, पहले दरिद्र नारायण की सेवा करो, दरिद्र नारायण ही भगवान का रूप होता है और उन गरीबों की भलाई करोगे तो ईश्वर प्राप्त हो जाएगा, ये संदेश देने की ताकत इस भूमि में थी..! समाज सुधारको ने अपने जीवन को बलि चढ़ा करके भी समाज की बुराइयों के खिलाफ लड़ाई लड़ी और उसको प्राप्त किया। श्री नारायण गुरू की तरफ हम नजर करें तो ध्यान में आता है कि उस समय जब अंग्रेजों का राज चलता था और गुलामी की जो मानसिकता थी, उस मानसिकता को बढ़ावा देने के लिए वो अंग्रेजी का प्रभाव बढ़ाना चाहते थे और अंग्रेजी के माध्यम से इस देश को दबाने के लिए रास्ता खोजते थे, ऐसे समय में नारायण गुरू की दृष्टि देखिए... उन्होंने समाज को कहा कि अंग्रेजी सीख कर के उनको उन्हीं की भाषा में जवाब देने की ताकत पैदा करनी चाहिए, अंग्रेजों से लड़ना होगा तो अंग्रेजों को अंग्रेजी की भाषा में समझाना पड़ेगा, ये हिम्मत देने का काम नारायण गुरू ने उस समय किया था..!

21 वीं सदी हिन्दुस्तान की सदी है ऐसा कहते हैं, 21 वीं सदी ज्ञान की सदी है ऐसा भी कहते हैं और ये हमारा सौभाग्य है कि आज हिन्दुस्तान दुनिया का सबसे युवा देश है। इस देश की 65% जनसंख्या 35 साल से कम आयु की है और इसलिए ये युवा देश हमारा डेमोग्राफिक डिविडेंड है और ये अपने आप में एक बड़ी शक्ति है..! लेकिन जो लोग प्रगति करना चाहते हैं वो सारे देश इन दिनों एक विषय पर बड़े आग्रह से बात करते हैं। अभी-अभी अमेरिका में चुनाव समाप्त हुए, श्रीमान ओबामा ने दोबारा अपनी प्रेसिडेंटशिप को धारण किया, और दोबारा प्रेसिडेंट बनने के बाद उन्होंने जो पहला भाषण किया उस पहले भाषण में उन्होंने एक बात पर बल दिया और कहा कि लोगों को स्किल डेवलपमेंट, हुनर सिखाओ। जब तक हम व्यक्ति के हाथ में हुनर नहीं देते, जब तक उसको रोजगार की संभावनाएं नहीं देते, वो दुनिया में कुछ कर नहीं सकता..! अमेरिका जैसे समृद्घ देश की अर्थनीति के बीज में भी स्किल डेवलपमेंट की बात होती है। हिन्दुस्तान के अंदर डॉ. मनमोहन सिंह और कांग्रेस की सरकार भी स्किल डेवलपमेंट की बात करती है और मुझे गर्व से कहना है कि अभी 21 अप्रैल को भारत के प्रधानमंत्री ने स्किल डेवलपमेंट के क्षेत्र में सर्वश्रेष्ट कार्य करने के लिए गुजरात सरकार को विशेष रूप से सम्मानित किया। गुजरात देश में पहला राज्य है जिसने अलग स्किल यूनिवर्सिटी बनाने का निर्णय किया है और दुनिया का सबसे समृद्घ देश भी स्किल डेवलपमेंट की बात करता है, दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र देश भी स्किल डेवलपमेंट की बात करता है। दुनिया भर में स्किल डेवलपमेंट की चर्चा हो रही है, लेकिन मजा देखिए, सौ साल पहले केरल की धरती पर एक नारायण गुरू का जन्म हुआ जिन्होंने सौ साल पहले स्किल डेवलपमेंट पर बल देने के लिए बातचीत नहीं, प्रयास किये थे..!

आज पूरा विश्व दो समस्याओं से झूझ रहा है..! एक, ग्लोबल वार्मिंग और दूसरा, टेररिज़म, आंतकवाद..! पूरा विश्व इन दोनों चीजों से परेशान है, लेकिन आज अगर हम हमारे पूर्वजों की बातों को ध्यान में लें, हमारे संतों की बातों को ध्यान में लें, हमारे शास्त्रों की बातों को ध्यान में लें और अगर उसके आधार पर जीवनचर्या को काम में लें तो मैं विश्वास से कहता हूँ कि ग्लोबल वार्मिंग से मानवजात को बचाई जा सकती है, टेररिज़म के रास्ते से लोगों को वापस ला कर के सदभावना और प्रेम के रास्ते पर लाया जा सकता है, ये संदेश पूज्य नारायण गुरू स्वामी ने उस जमाने में दिए थे, जब वो कहते थे एक जन, एक देश, एक देवता..! ये बात उस समय की है, और आज तो इतने बिखराव के माहौल कि चर्चा हो रही है। एक राज्य दूसरे राज्य को पानी देने को तैयार नहीं है, ऐसे माहौल में उस महापुरूष ने दूर का देखा था और कहा था कि यह देश एक, जन एक और परमात्मा एक... ये संदेश देने का काम श्री नारायण गुरू ने किया था। श्री नारायण गुरू स्वामी ने जैसे कहा था उस प्रकार से कश्मीर से कन्याकुमारी, अटक से कटक तक का पूरा हिन्दुस्तान करूणा और प्रेम से बंधा हुआ रहता, हमारे अंदर कोई बिखराव ना होता तो आज हमारे भीतर से कोई भी आंतकवाद को साथ देने का पाप ना करता, नारायण गुरू के रास्ते पर चलते तो यहाँ आंतकवाद को कभी जगह नहीं मिलती..!

एक समय था जब बड़े-बड़े भव्य मंदिरों से प्रभाव पैदा होता था, मंदिरों के निर्माण में भी एक स्पर्धा का माहौल चलता था, प्रकृति का जितना भी शोषण करके जो कुछ भी किया जा सकता था वो सब होता था। ऐेसे समय में आप दक्षिण के मंदिर देखिए, कितने विशाल मंदिर होते हैं..! ऐसे समय में नारायण गुरू ने समाज के उस प्रवास को काट कर के उल्टी दिशा में चल कर के दिखाया कि जरूरत नहीं है बड़े-बड़े विशाल मंदिरों की..! छोटे-छोटे मंदिरों की रचना करने की एक नई परंपरा शुरू की। सामान्य संसाधनों से बनने वाले मंदिरों की एक परंपरा शुरू की। ईश्वर कहीं पर भी विराजमान रहता है इस प्रकार से उन्होंने चिंता की और एक प्रकार से पर्यावरण की रक्षा के लिए, प्रकृति का कम से कम उपभोग करने का संदेश देने का काम श्री नारायण गुरू ने किया था, अगर उस परंपरा को हम जीवित रखते तो आज ग्लोबल वार्मिंग की समस्या पैदा नहीं होती..!

दुनिया के कर्इ देश ऐसे हैं जो आज भी नारी के नेतृत्व को स्वीकार करने का समार्थ्य नहीं रखते हैं। पश्चिम के आधुनिक कहे जाने वाले राष्ट्र भी नारी शक्ति के सामर्थ्य को स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं। लेकिन यह देश ऐसा है कि सदियों पहले अगर हमारे देश में नारी के सम्मान को चोट पहुंचे ऐसी कोई भी चीज पनपती थी, तो हमारे संत बहुत जागरूक हो जाते थे और वूमन एम्पावरमेंट के लिए अपने युग में हमेशा वो प्रयास करते रहे हैं। समाज की बुराइयों से समाज को बाहर ला करके मातृ-शक्ति के सामर्थ्य की चिंता करने का काम हमारे देश में होता रहा है और श्री नारायण गुरू ने हमेशा वुमन एम्पावरमेंट को हमेशा बल दिया, उनको शिक्षित करने की बात पर बल दिया, उनको विकास प्रक्रिया में भागीदार बनाने के विचार को बल दिया, उन्होंने माताओं-बहनों को परिवार के अंदर कोई ना कोई रोजगार खड़ा करने की स्वतंत्रता पर बल दिया और समाज के विकास की यात्रा में नारी को भी भागीदार बनाने के लिए श्री नारायण गुरू ने प्रयास किए..! श्री नारायण गुरू ने प्रेम की, करूणा की, समाज की एकता की बातों के साथ-साथ सादगी का भी बहुत आग्रह रखा था, सिम्पलीसिटी का बहुत आग्रह रखा था..! मैं आज भी इस परंपरा से जुड़े हुए इन सभी महान संतों को प्रणाम करते हुए उनका अभिनंदन करना चाहता हूँ, क्योंकि नारायण गुरू ने जिस परंपरा में सादगी का आग्रह रखा था, आज भी उस सादगी को निभाने का प्रयास इस परंपरा को निभाने वाले सभी लोगों के द्वारा हो रहा है, ये अपने आप में बड़े गर्व की बात है..! ये मेरा सौभाग्य है कि इस महान परंपरा के साथ आज निकट से जुड़ने का मुझे सौभाग्य मिला है और इसलिए मैं इन सभी संतों का बहुत ही आभारी हूँ..!

यहाँ पर अभी पूज्य ऋतंभरानंद जी ने अपने भाषण में कुछ अपेक्षाएं व्यक्त की थी कि गुजरात की धरती पर भी ये संदेश कैसे पहुंचे..! ये मेरे लिए गर्व की बात होगी कि इतनी अच्छी बात, समाज के गरीब, दुखियारों की सेवा की बात मेरे गुजरात के अंदर अगर केरल की धरती से पहुंचती है तो मैं उसका स्वागत करता हूँ, सम्मान करता हूँ..! केरल का कोई जिला ऐसा नहीं होगा, कोई तालुका या ब्लॉक ऐसा नहीं होगा, जहाँ के लोग मेरे गुजरात में ना रहते हों..! आज गुजरात की प्रगति की जो चर्चा हो रही है, उस प्रगति में मेरे केरल के भाईयों के पसीने की भी महक है और इसलिए मैं आज केरल के मेरे सभी भाइयों-बहनों का आभार भी व्यक्त करना चाहूँगा, अभिनंदन भी करना चाहूँगा..! और मुझे विश्वास है कि आने वाले दिनों में केरल के मेरे भाई जो गुजरात में रहते हैं, उनको जब पता चलेगा कि यहाँ नारायण गुरू की प्रेरणा से कुछ ना कुछ गतिविधि चल रही है, तो गुजरात में रहने वाले केरल के भाइयों के लिए भी एक अच्छा स्थान बन जाएगा। मैं नारायण गुरु की इस परंपरा को निभाने वाले, इस सदविचार को घर-घर गाँव-गाँव पहुंचाने वाले, समाज के पिछड़े, दलित, पीड़ित, शोषितों का भला करने के लिए जीवन आहूत करने वाले सभी महानुभावों से प्रार्थना करूँगा कि गुजरात आपका ही है, आप जब मर्जी पड़े आइए, गुजरात की भी सेवा कीजिए..!

इस पवित्र धरती पर आने का मुझे सौभाग्य मिला, मुझे निमंत्रण मिला, मैं इसके लिए फिर एक बार आप सबका बहुत-बहुत आभार व्यक्त करता हूँ, सभी संतों को वंदन करता हूँ और पूज्य स्वामी नारायण गुरू के चरणों में प्रार्थना करके उनसे आशीर्वाद लेता हूँ कि ईश्वर ने मुझे जो काम दिया है, मैं गरीब, पीड़ित, शोषित, दलित, सबकी भलाई के लिए अपने जीवन में कुछ ना कुछ अच्छा करता रहूँ, ऐसे आशीर्वाद मुझे आज इस तपोभूमि से मिले..! मैं केरल के सभी भाइयों-बहनों का भी आभार व्यक्त करता हूँ कि आज मैं शाम को त्रिवेन्द्रम एयरपोर्ट पर उतरा और वहाँ से यहाँ तक आया, चारों ओर जिस प्रकार से आप लोगों ने मेरा स्वागत किया, सम्मान किया, मुझे प्रेम दिया, इसके लिए मैं केरल के सभी भाईयों-बहनों का भी बहुत हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ..! फिर एक बार सहोदरी-सहोदर हमारे, नमस्कारम्..!

Explore More
ಶ್ರೀರಾಮ ಜನ್ಮಭೂಮಿ ಮಂದಿರದ ಧ್ವಜಾರೋಹಣ ಉತ್ಸವ ಉದ್ದೇಶಿಸಿ ಪ್ರಧಾನಮಂತ್ರಿ ಅವರ ಭಾಷಣ

ಜನಪ್ರಿಯ ಭಾಷಣಗಳು

ಶ್ರೀರಾಮ ಜನ್ಮಭೂಮಿ ಮಂದಿರದ ಧ್ವಜಾರೋಹಣ ಉತ್ಸವ ಉದ್ದೇಶಿಸಿ ಪ್ರಧಾನಮಂತ್ರಿ ಅವರ ಭಾಷಣ
Chandrababu Naidu writes: 12 years on, leadership that endured, India that emerged

Media Coverage

Chandrababu Naidu writes: 12 years on, leadership that endured, India that emerged
NM on the go

Nm on the go

Always be the first to hear from the PM. Get the App Now!
...
ದಮನ್‌ನಲ್ಲಿ ವಿವಿಧ ಅಭಿವೃದ್ಧಿ ಕಾರ್ಯಗಳ ಶಿಲಾನ್ಯಾಸ/ರಾಷ್ಟ್ರಕ್ಕೆ ಸಮರ್ಪಣೆ ಸಮಾರಂಭದಲ್ಲಿ ಪ್ರಧಾನಮಂತ್ರಿ ಅವರು ಮಾಡಿದ ಭಾಷಣದ ಕನ್ನಡ ಅವತರಣಿಕೆ
June 05, 2026
The launch of projects across healthcare, aviation, tourism and infrastructure marks a new development push for Daman that will transform lives across the UT: PM
The data released today reflects the strength of India's economy, with growth of 7.7% in FY 2025–26 and 7.8% in the quarter ending March 31: PM
Even amid severe global challenges, the collective efforts of 1.4 billion Indians have ensured that India is not only sustaining itself but also staying ahead of the curve: PM
The National Family Health Survey clearly reflects the government's focus on healthcare. While most deliveries in India earlier took place outside hospitals, today over 90% of all deliveries occur in hospitals: PM
Thanks to Mission Indradhanush, child immunization coverage in India has risen from 60% before 2014 to nearly 90% today: PM

ಭಾರತ್ ಮಾತಾ ಕಿ ಜೈ!

ಭಾರತ್ ಮಾತಾ ಕಿ ಜೈ!

ದಾದ್ರಾ ಮತ್ತು ನಗರ ಹವೇಲಿ, ದಮನ್ ಮತ್ತು ಡಿಯು ಆಡಳಿತಾಧಿಕಾರಿ ಪ್ರಫುಲ್ ಭಾಯಿ ಪಟೇಲ್, ಸಂಸತ್ತಿನಲ್ಲಿ ನನ್ನ ಸಹೋದ್ಯೋಗಿ ಕಲಾಬೆನ್ ದೇಲ್ಕರ್, ದಮನ್ ಪುರಸಭೆಯ ಅಧ್ಯಕ್ಷೆ ದೀಪಿಕಾ ತಂಡೇಲ್ ಜೀ, ದಮನ್ ಜಿಲ್ಲಾ ಪಂಚಾಯತ್ ಅಧ್ಯಕ್ಷರಾದ ಧರ್ಮ ಬಾಬು ಪಟೇಲ್, ಸಿಲ್ವಾಸ್ಸಾ ಪುರಸಭೆಯ ಅಧ್ಯಕ್ಷ ಸೋಮನಾಥ್ ದೇವ್ರೆ ಜೀ, ದಾದ್ರಾ ನಗರ ಹವೇಲಿ ಜಿಲ್ಲಾ ಪಂಚಾಯತ್ ಅಧ್ಯಕ್ಷೆ ನಿಶಾ ಭಾವ್ಸರ್ ಜೀ, ದಿಯು ಪುರಸಭೆಯ ಅಧ್ಯಕ್ಷ ಹರೀಶ್ ಕಪಾಡಿಯಾ ಜೀ, ದಿಯು ಜಿಲ್ಲಾ ಪಂಚಾಯತ್ ಅಧ್ಯಕ್ಷೆ ಕೋಟಿಯಾ ರಂಜಿತಾಬೆನ್ ಮತ್ತು ಇಲ್ಲಿ ಇಷ್ಟೊಂದು ಬೃಹತ್ ಸಂಖ್ಯೆಯಲ್ಲಿ ನೆರೆದಿರುವ ನನ್ನ ಪ್ರೀತಿಯ ಸಹೋದರರೇ ಮತ್ತು  ಸಹೋದರಿಯರೇ,

ನೀವು ಇಲ್ಲಿ ನೆರೆದಿರುವಂತೆಯೇ, ಲಕ್ಷದ್ವೀಪದಲ್ಲಿಯೂ ಸಹ ಹೆಚ್ಚಿನ ಸಂಖ್ಯೆಯ ಜನರು ವೀಡಿಯೊ ಮೂಲಕ ನಮ್ಮೊಂದಿಗೆ ಸಂಪರ್ಕ ಹೊಂದಿದ್ದಾರೆ, ಏಕೆಂದರೆ ಇಂದು ಲಕ್ಷದ್ವೀಪದಲ್ಲಿ ಅಭಿವೃದ್ಧಿಯ ಹೊಸ ಆರಂಭ, ಲಕ್ಷದ್ವೀಪದ ಜನರ ಜೀವನದಲ್ಲಿ ಕ್ರಾಂತಿಕಾರಿ ಬದಲಾವಣೆಯನ್ನು ತರುವ ಹೊಸ ಯೋಜನೆ, ಉದ್ಘಾಟನೆಗೊಂಡಿದೆ ಮತ್ತು ಕೆಲವು ಯೋಜನೆಗಳಿಗೆ ಅಡಿಪಾಯ ಹಾಕಲಾಗಿದೆ.

 

ಸ್ನೇಹಿತರೇ,

ಕೆಲವು ವರ್ಷಗಳ ಹಿಂದೆ, ನಾನು ನಿಮ್ಮ ಬಳಿಗೆ ಬಂದಾಗ, ನಮ್ಮ ದಮನ್ ವೇಗವಾಗಿ ಮಿನಿ ಇಂಡಿಯಾ ಆಗುತ್ತಿದೆ ಎಂದು ಹೇಳಿದ್ದೆ, ಮತ್ತು ಇಂದು ನಾನು ನೋಡುತ್ತಿದ್ದೇನೆ, ಎಡಭಾಗದಲ್ಲಿ ಇಡೀ ಬಂಗಾಳ ಮತ್ತು ಬಲಭಾಗದಲ್ಲಿ ಇಡೀ ಅಸ್ಸಾಂ ಇದೆ. ದಮನ್ ಮಿನಿ ಭಾರತದ ಜೀವಂತ ಉದಾಹರಣೆಯಾಗಿದೆ. ಇಲ್ಲಿ ವಾಸಿಸುವ ವಿವಿಧ ಪ್ರದೇಶಗಳ ಜನರು, ನಿಮ್ಮಲ್ಲಿರುವ ವೈವಿಧ್ಯತೆಯು ಇಡೀ ಭಾರತದ ಸುಂದರ ನೋಟವನ್ನು ನೀಡುತ್ತದೆ. ನೀವೆಲ್ಲರೂ ನಮ್ಮನ್ನು ಆಶೀರ್ವದಿಸಲು ಇಷ್ಟು ದೊಡ್ಡ ಸಂಖ್ಯೆಯಲ್ಲಿ ಬಂದಿದ್ದೀರಿ, ಇದಕ್ಕಾಗಿ ನಾನು ನಿಮ್ಮೆಲ್ಲರಿಗೂ ತುಂಬಾ ಆಭಾರಿ.

ಸಹೋದರರೇ ಮತ್ತು  ಸಹೋದರಿಯರೇ,

ದಮನ್ ಮತ್ತು ದಿಯುಗೆ ಹಲವು ಬಾರಿ ಬರುವ ಅವಕಾಶ ನನಗೆ ಸಿಕ್ಕಿದೆ. ನಾನು ದಾದ್ರಾ ಮತ್ತು ನಗರ ಹವೇಲಿಗೆ ಕೂಡಾ ಭೇಟಿ ನೀಡುತ್ತಲೇ ಇರುತ್ತೇನೆ, ಮತ್ತು ನಾನು ಮುಖ್ಯಮಂತ್ರಿ ಅಥವಾ ಪ್ರಧಾನಿಯಾಗಿಲ್ಲದಿದ್ದಾಗ, ನಾನು ಇಲ್ಲಿಗೆ ಹಲವು ಬಾರಿ ಬರುತ್ತಿದ್ದೆ. ಆದರೆ ಈಗ ನಾನು ಇಲ್ಲಿಗೆ ಬಂದು ಉತ್ತಮ ಆಡಳಿತ, ಆಡಳಿತ ಮಾದರಿಯನ್ನು ನೋಡಿದಾಗ, ಅದು ತುಂಬಾ ಚೆನ್ನಾಗಿದೆ ಎಂಬ ಭಾವನೆ ತರುತ್ತದೆ. ಕಳೆದ ಬಾರಿಗೆ ಹೋಲಿಸಿದಾಗ  ಈ ಬಾರಿ ಈ ಪ್ರದೇಶವು ಅಭಿವೃದ್ಧಿಯ ಹಾದಿಯಲ್ಲಿ ಮೈಲುಗಳಷ್ಟು ಮುಂದೆ ಸಾಗಿದೆ ಎಂದು ನನಗೆ ಅನಿಸುತ್ತದೆ.

ಸ್ನೇಹಿತರೇ,

ದಾದ್ರಾ ಮತ್ತು ನಗರ ಹವೇಲಿ, ದಮನ್ ಮತ್ತು ಡಿಯು ದಶಕಗಳಿಂದ ಅಭಿವೃದ್ಧಿಯ ಕನಸು ಕಂಡಿದ್ದವು. ಹಿಂದೆ ಕನಸು ಕಂಡಿದ್ದ ತಲೆಮಾರುಗಳ ಜನರು ನಿಧನರಾದರು. ಆದರೆ ಇಂದು ಇಂದಿನ ಪೀಳಿಗೆ ತಮ್ಮ ಹೆತ್ತವರು ಮತ್ತು ಅಜ್ಜಿಯರು ಕಂಡ ಕನಸುಗಳು ಈಗ ತಮ್ಮ ಕಣ್ಣ ಮುಂದೆಯೇ ನನಸಾಗುತ್ತಿರುವುದನ್ನು ನೋಡುತ್ತಿದ್ದಾರೆ. ಇಂದು, ಸಂಪರ್ಕ, ಆರೋಗ್ಯ, ಶಿಕ್ಷಣ, ಪ್ರವಾಸೋದ್ಯಮ ಮತ್ತು ನಗರ ಮೂಲಸೌಕರ್ಯಕ್ಕೆ ಸಂಬಂಧಿಸಿದ ಅನೇಕ ಯೋಜನೆಗಳನ್ನು ಇಲ್ಲಿ ಉದ್ಘಾಟಿಸಲಾಗಿದೆ ಮತ್ತು ಅಡಿಪಾಯ ಹಾಕಲಾಗಿದೆ. ಈ ಅಭಿವೃದ್ಧಿ ಕಾರ್ಯಗಳು ದಮನ್ ಮತ್ತು ಇಡೀ ಕೇಂದ್ರಾಡಳಿತ ಪ್ರದೇಶದ ಜನರಿಗೆ ಜೀವನವನ್ನು ಸುಲಭಗೊಳಿಸುತ್ತದೆ. ಅವು ಯುವಜನರಿಗೆ ಹೊಸ ಅವಕಾಶಗಳನ್ನು ಸೃಷ್ಟಿಸುತ್ತವೆ. ಈ ಕೆಲಸಗಳ ಹಿಂದೆ, ಪ್ರಫುಲ್ ಭಾಯಿ ಪಟೇಲ್ ಅವರ ಮತ್ತು ಅವರ ತಂಡದ ಕಠಿಣ ಪರಿಶ್ರಮದ ದೃಷ್ಟಿಕೋನವು ಸ್ಪಷ್ಟವಾಗಿ ಗೋಚರಿಸುತ್ತದೆ. ಇದಕ್ಕಾಗಿ, ನಾನು ಪ್ರಫುಲ್ ಭಾಯಿ ಮತ್ತು ಅವರ ಇಡೀ ತಂಡವನ್ನು ಸಹ ಶ್ಲಾಘಿಸುತ್ತೇನೆ. ಲಕ್ಷದ್ವೀಪ ಮತ್ತು ದಾದ್ರಾ-ನಗರ ಹವೇಲಿಯ ಜನರಿಗೆ ನಾನು ಅನೇಕ ಅಭಿನಂದನೆಗಳು ಮತ್ತು ಶುಭಾಶಯಗಳನ್ನು ಸಲ್ಲಿಸುತ್ತೇನೆ.

ಸ್ನೇಹಿತರೇ,

ಇಂದು ನಾನು ನಿಮ್ಮ ನಡುವೆ ಬಂದಿರುವಂತೆಯೇ, ಒಂದು ಒಳ್ಳೆಯ ಸುದ್ದಿ ಬಂದಿದೆ. ನಾನು ಇಂದು ಬೆಳಿಗ್ಗೆ ದೆಹಲಿಯಿಂದ ಹೊರಟಿದ್ದೆ, ಆದರೆ ಇದೀಗ ಬಂದಿರುವ ಅಂಕಿಅಂಶಗಳು, ಬಂದಿರುವ ಸುದ್ದಿಗಳು ನಿಜಕ್ಕೂ ಸಂತೋಷಕರವಾಗಿವೆ ಮತ್ತು ನಾನು ಈ ಸಂತೋಷವನ್ನು ನಿಮ್ಮೊಂದಿಗೆ ಹಂಚಿಕೊಳ್ಳಲು ಬಯಸುತ್ತೇನೆ. ಇಂದು ಬಂದಿರುವ ಅಂಕಿಅಂಶಗಳು ಭಾರತದ ಆರ್ಥಿಕತೆಯ ಅಡಿಪಾಯ ಎಷ್ಟು ಪ್ರಬಲವಾಗಿದೆ ಎಂಬುದನ್ನು ಸ್ಪಷ್ಟವಾಗಿ ತೋರಿಸುತ್ತವೆ. 2025-26ನೇ ವರ್ಷದಲ್ಲಿ, ಅಂದರೆ, ಇದೀಗ ಕೊನೆಗೊಂಡಿರುವ ಹಣಕಾಸು ವರ್ಷದಲ್ಲಿ, ಭಾರತವು ಶೇಕಡಾ 7.7, 7.7 ರ ಬೆಳವಣಿಗೆಯ ದರವನ್ನು ಸಾಧಿಸಿದೆ ಮತ್ತು ಮಾರ್ಚ್ 31 ರಂದು ಕೊನೆಗೊಂಡ ಕೊನೆಯ ತ್ರೈಮಾಸಿಕವು ಭಾರತದ ಬೆಳವಣಿಗೆಯನ್ನು ಶೇಕಡಾ 7.8, 7.8 ರಷ್ಟು ಎಂದು ದಾಖಲಿಸಿದೆ. ಮತ್ತು ಇದು ವಿಶ್ವದಲ್ಲೇ ವೇಗವಾಗಿ ಬೆಳೆಯುತ್ತಿರುವ ದೊಡ್ಡ ಆರ್ಥಿಕತೆಯಾಗಿದೆ. ಪ್ರತಿಯೊಬ್ಬ ಭಾರತೀಯನೂ ಹೆಮ್ಮೆಪಡಬೇಕು, ಇದು ಅದರ ವೇಗ. ಇಂದು ದೇಶವು ಸುಧಾರಣಾ ಎಕ್ಸ್‌ಪ್ರೆಸ್‌ನಲ್ಲಿ ಓಡುತ್ತಿದೆ, ಇಂದು ದೇಶವು ಅಂತಹ ಬೃಹತ್ ಮೂಲಸೌಕರ್ಯ ಅಭಿವೃದ್ಧಿಯನ್ನು ವೀಕ್ಷಿಸುತ್ತಿದೆ, ಬಡವರ ಕಲ್ಯಾಣಕ್ಕಾಗಿ ಅಂತಹ ದೊಡ್ಡ ಪ್ರಮಾಣದ ಕೆಲಸವನ್ನು ಮಾಡಲಾಗುತ್ತಿದೆ ಮತ್ತು ಈ ಎಲ್ಲಾ ಪ್ರಯತ್ನಗಳ ಫಲಿತಾಂಶವೆಂದರೆ ಇಂದು ದೇಶವು ವೇಗವಾಗಿ ಬೆಳೆಯುತ್ತಿರುವ ದೊಡ್ಡ ಆರ್ಥಿಕತೆಯಾಗಿ ಮುಂದುವರಿಯುತ್ತಿದೆ. ಮತ್ತು ನಮಗೆಲ್ಲರಿಗೂ ತಿಳಿದಿದೆ, ಜಗತ್ತು ಬಿಕ್ಕಟ್ಟುಗಳಲ್ಲಿ ಮುಳುಗಿದೆ, ಇಡೀ ಪ್ರಪಂಚದ ಆರ್ಥಿಕತೆಗಳು ಪ್ರಶ್ನಾರ್ಥಕ ಚಿಹ್ನೆಗಳ ಅಡಿಯಲ್ಲಿ ಹೂತುಹೋಗಿವೆ, ಆದರೆ ಜಾಗತಿಕ ಬಿಕ್ಕಟ್ಟಿನ ಈ ಕೆಟ್ಟ ಸಮಯದಲ್ಲಿಯೂ ಸಹ, 1.4 ಶತಕೋಟಿ ದೇಶವಾಸಿಗಳ ಸಾಮೂಹಿಕ ಪ್ರಯತ್ನಗಳಿಂದ, ಭಾರತವು ತನ್ನನ್ನು ತಾನು ಉಳಿಸಿಕೊಳ್ಳಲು ಮಾತ್ರವಲ್ಲದೆ ಮುಂದೆ ಬರುವಲ್ಲಿಯೂ ಯಶಸ್ವಿಯಾಗಿದೆ. ಆರ್ಥಿಕ ಕ್ಷೇತ್ರದಲ್ಲಿ ಈ ಹೊಸ ಎತ್ತರವನ್ನು ಸಾಧಿಸಿದ್ದಕ್ಕಾಗಿ ನಾನು ದೇಶವಾಸಿಗಳಿಗೆ ಅನೇಕ ಅಭಿನಂದನೆಗಳನ್ನು ಸಲ್ಲಿಸುತ್ತೇನೆ ಮತ್ತು ಪ್ರಪಂಚದಾದ್ಯಂತ ಚಾಲ್ತಿಯಲ್ಲಿರುವ ಈ ಬಿಕ್ಕಟ್ಟುಗಳನ್ನು ಎದುರಿಸುವಾಗ, ದೇಶವು ದೃಢ ಸಂಕಲ್ಪದೊಂದಿಗೆ, ಸುಧಾರಣೆ, ಕಾರ್ಯಕ್ಷಮತೆ ಮತ್ತು ಪರಿವರ್ತನೆಯ ಹಾದಿಯಲ್ಲಿ ವೇಗವಾಗಿ ಮುಂದುವರಿಯುತ್ತದೆ ಎಂದು ನಾನು ಮತ್ತೊಮ್ಮೆ ರಾಷ್ಟ್ರಕ್ಕೆ ಭರವಸೆ ನೀಡುತ್ತೇನೆ. ಇದು ದೇಶವಾಸಿಗಳಿಗೆ ನನ್ನ ಭರವಸೆ.

 

ಸ್ನೇಹಿತರೇ,

ಇಂದು ಅಭಿವೃದ್ಧಿಯು ಬಹಳ ಮುಖ್ಯ ಮತ್ತು  ನಮ್ಮ ಅಭಿವೃದ್ಧಿ ಮಾದರಿ ಸುಸ್ಥಿರವಾಗಿರುವುದನ್ನು ಖಚಿತಪಡಿಸಿಕೊಳ್ಳುವುದೂ ಅಷ್ಟೇ ಮುಖ್ಯವಾಗಿದೆ. ಇಂದು, ವಿಶ್ವ ಪರಿಸರ ದಿನದಂದು, ನಮ್ಮ ಕೇಂದ್ರಾಡಳಿತ ಪ್ರದೇಶವು ಈ ನಿರ್ಣಯವನ್ನು ಸಾಕಾರಗೊಳಿಸುತ್ತಿದೆ. ಇಂದು, ಒಂದೆಡೆ, ಸಾವಿರಾರು ಕೋಟಿ ಮೌಲ್ಯದ ಅಭಿವೃದ್ಧಿ ಯೋಜನೆಗಳನ್ನು ಇಲ್ಲಿ ಉದ್ಘಾಟಿಸಲಾಗಿದೆ ಮತ್ತು ಶಂಕುಸ್ಥಾಪನೆ ಮಾಡಲಾಗಿದೆ. ಅದೇ ಸಮಯದಲ್ಲಿ, ತಾಯಿಯ ಹೆಸರಿನಲ್ಲಿ ಸುಮಾರು ಒಂದು ಲಕ್ಷ ಒಂದು ಗಿಡಗಳು, ಒಂದು ಲಕ್ಷ ಸಸಿಗಳನ್ನು ಸಹ ಇಲ್ಲಿ ನೆಡಲಾಗುತ್ತಿದೆ. ಸರಕಾರಿ ಕಟ್ಟಡಗಳಲ್ಲಿ ಸೌರಶಕ್ತಿಯ 100 ಪ್ರತಿಶತ ಬಳಕೆಯ ಸಾಧನೆಯನ್ನು ಸಾಧಿಸಿರುವ ಕೇಂದ್ರಾಡಳಿತ ಪ್ರದೇಶ ಇದಾಗಿದೆ ಎಂದು ನನಗೆ ಹೆಮ್ಮೆ ಇದೆ. ಇಂದು, ದಿಯುನಲ್ಲಿ, ಸಂಪೂರ್ಣ ಹಗಲಿನ ವಿದ್ಯುತ್ ಬೇಡಿಕೆಯನ್ನು ಸೌರಶಕ್ತಿಯಿಂದಲೇ ಪೂರೈಸಲಾಗುತ್ತಿದೆ ಮತ್ತು ನಾವು ಇದನ್ನು ಮತ್ತಷ್ಟು ಮುಂದುವರಿಸಬೇಕಾಗಿದೆ. ಸೌರಶಕ್ತಿಯ ಮೂಲಕ ಮನೆಗಳಲ್ಲಿಯೂ ವಿದ್ಯುತ್ ಲಭ್ಯವಿರಬೇಕು ಮತ್ತು ಅಷ್ಟೇ ಅಲ್ಲ, ಕುಟುಂಬಗಳು ಹೆಚ್ಚುವರಿ ವಿದ್ಯುತ್‌ನಿಂದ ಆದಾಯವನ್ನು ಗಳಿಸಬೇಕು. ಇದಕ್ಕಾಗಿ, ಮೇಲ್ಛಾವಣಿಯ ಸೌರ ಸ್ಥಾವರಗಳನ್ನು ಸ್ಥಾಪಿಸುವ ಉಪಕ್ರಮವು ಪ್ರಾರಂಭವಾಗಿದೆ. ಈ ಸಾಧನೆಗಳಿಗಾಗಿ ನಾನು ನಿಮ್ಮೆಲ್ಲರನ್ನು ಅಭಿನಂದಿಸುತ್ತೇನೆ.

ಸ್ನೇಹಿತರೇ,

ಇದರೊಂದಿಗೆ, ದಮನ್‌ನ ಜನರು ಇತ್ತೀಚಿನ ದಿನಗಳಲ್ಲಿ ಸ್ವಚ್ಛತಾ ಅಭಿಯಾನವನ್ನು ನಡೆಸುತ್ತಿದ್ದಾರೆ ಎಂದು ನನಗೆ ತಿಳಿಸಲಾಗಿದೆ. ಇದು ಸ್ವಚ್ಛತೆ ಹೇಗೆ ದಮನ್‌ನ ಸಾರ್ವಜನಿಕ ಜೀವನದ ಸಂಸ್ಕೃತಿಯ ಭಾಗವಾಗಿ ಮಾರ್ಪಟ್ಟಿದೆ ಎಂಬುದನ್ನು ತೋರಿಸುತ್ತದೆ ಮತ್ತು ಈ ಸಂಸ್ಕೃತಿಯು ಸ್ವಚ್ಛತಾ ಪ್ರಯತ್ನಗಳಲ್ಲಿ ಗೋಚರಿಸುತ್ತದೆ. ಈ ಭಾಗವಹಿಸುವ ಪ್ರಯತ್ನಗಳಿಗಾಗಿ ನಾನು ದಮನ್ ಜನರನ್ನು ಅಭಿನಂದಿಸುತ್ತೇನೆ.

ಸ್ನೇಹಿತರೇ,

ದಾದ್ರಾ ನಗರ ಹವೇಲಿ, ದಮನ್ ಮತ್ತು ಡಿಯು ಕೇಂದ್ರಾಡಳಿತ ಪ್ರದೇಶವಾಗಿರುವುದರಿಂದ ಭಾರತದ ಗುರುತು ಮತ್ತು ಪರಂಪರೆಯೂ ಆಗಿದೆ. ಆದ್ದರಿಂದ, ಅದರ ಅಭಿವೃದ್ಧಿಗಾಗಿ ನಮ್ಮ ಗುರಿಗಳು ಸಾಮಾನ್ಯವಲ್ಲ. ಕಳೆದ ವರ್ಷ ನಾನು ಸಿಲ್ವಾಸ್ಸಾಗೆ ಬಂದಾಗ, ನಾನು ನಿಮಗೆ ಸಿಂಗಾಪುರದ ಉದಾಹರಣೆಯನ್ನು ನೀಡಿದ್ದೇನೆ ಎಂದು ನನಗೆ ನೆನಪಿದೆ. ಒಂದು ಕಾಲದಲ್ಲಿ ಸಿಂಗಾಪುರವು ಒಂದು ಸಣ್ಣ ಮೀನುಗಾರಿಕಾ ಹಳ್ಳಿಯಾಗಿತ್ತು ಎಂದು ನಾನು ಹೇಳಿದ್ದೆ. ಆದರೆ ಸಿಂಗಾಪುರದ ಜನರು ಕನಸು ಕಂಡರು, ಅವರು ದೊಡ್ಡ ಗುರಿಗಳನ್ನು ಹೊಂದಿದ್ದರು ಮತ್ತು ಇಂದು ಅದೇ ಸಿಂಗಾಪುರವು ವಿಶ್ವದ ಅತಿದೊಡ್ಡ ವ್ಯಾಪಾರ ಕೇಂದ್ರವಾಗಿದೆ. ಇಂದು ದಾದ್ರಾ ಮತ್ತು ನಗರ ಹವೇಲಿ, ದಮನ್ ಮತ್ತು ಡಿಯು ಕೂಡ ಅದೇ ಕನಸನ್ನು ಕಾಣುತ್ತಿವೆ. ನಮೋ ವಿಮಾನ ನಿಲ್ದಾಣ, ದಮನಗಂಗಾ ನದಿಗೆ ಕಟ್ಟಲಿರುವ ಐಕಾನಿಕ್ ಸೇತುವೆ, 'ಬೀಚ್ ಫ್ರಂಟ್' ನಲ್ಲಿ ಕಟ್ಟಲಾಗುವ ಸಮಾವೇಶ ಕೇಂದ್ರದಂತಹ ಯೋಜನೆಗಳು, ಇಂತಹ ಮೂಲಸೌಕರ್ಯಗಳ ಮೂಲಕ ನಾವು ಭವಿಷ್ಯಕ್ಕಾಗಿ ದೊಡ್ಡ ನಿರ್ಣಯಗಳಿಗೆ ಅಡಿಪಾಯ ಹಾಕುತ್ತಿದ್ದೇವೆ. ಈ ಯೋಜನೆಗಳ ಮೂಲಕ, ನಿಮ್ಮ ಚಲನೆ ಸುಲಭವಾಗುತ್ತದೆ. ಇಲ್ಲಿ ವ್ಯವಹಾರಕ್ಕೆ ಹೊಸ ಸಾಧ್ಯತೆಗಳು ಸೃಷ್ಟಿಯಾಗುತ್ತವೆ. ದಮನ್ ನ ಎರಡೂ ಬದಿಗಳಲ್ಲಿ ಅಭಿವೃದ್ಧಿಯ ವೇಗವು ಹೆಚ್ಚುತ್ತದೆ.

 

ಸ್ನೇಹಿತರೇ,

ಇಲ್ಲಿ ಆತಿಥ್ಯ ಆರ್ಥಿಕತೆಗೆ ಸಂಬಂಧಿಸಿದ ಅವಕಾಶಗಳು ಹೆಚ್ಚಾಗುತ್ತವೆ ಮತ್ತು ಅದರೊಂದಿಗೆ, ಸಾರಿಗೆ ನಗರದಂತಹ ಸೌಲಭ್ಯಗಳು ವ್ಯಾಪಾರ ಮತ್ತು ಲಾಜಿಸ್ಟಿಕ್ಸ್‌ಗೆ ಹೊಸ ವೇಗವನ್ನು ನೀಡುತ್ತವೆ.

ಸ್ನೇಹಿತರೇ,

ಈ ಪ್ರದೇಶದಲ್ಲಿ ನೀಲಿ ಆರ್ಥಿಕತೆಗಾಗಿ ನಾವು ಸಿದ್ಧಪಡಿಸಿರುವ ದೃಷ್ಟಿಕೋನವು ಹೈಟೆಕ್ ಮೂಲಸೌಕರ್ಯದ ಬಲದ ಮೂಲಕ ಮಾತ್ರ ಸಾಕಾರಗೊಳ್ಳುತ್ತದೆ. ಅದಕ್ಕಾಗಿಯೇ ಇಂದು ಲಕ್ಷದ್ವೀಪದ ಕಲ್ಪೇನಿ ಮತ್ತು ಕಡ್ಮತ್ ದ್ವೀಪಗಳಲ್ಲಿ ಆಧುನಿಕ ಬಂದರುಗಳ ಅಡಿಪಾಯ ಹಾಕಲಾಗುತ್ತಿದೆ. ಈ ಎಲ್ಲಾ ಪ್ರಯತ್ನಗಳು ನೀಲಿ ಆರ್ಥಿಕತೆಯಲ್ಲಿ ದೇಶದ ಬಲವನ್ನು ಹೆಚ್ಚಿಸುತ್ತವೆ ಮತ್ತು ನಾನು ಹೇಳಿದಂತೆ, ಇವು ಲಕ್ಷದ್ವೀಪದ ಭವಿಷ್ಯವನ್ನು ಬದಲಾಯಿಸುವ ಉಪಕ್ರಮಗಳಾಗಿವೆ.

ಸ್ನೇಹಿತರೇ,

ಬಿಜೆಪಿ ಸರ್ಕಾರದಲ್ಲಿ, ನಮ್ಮ ಎನ್‌ಡಿಎ ಸರ್ಕಾರದಲ್ಲಿ, ನಮಗೆ ಅಭಿವೃದ್ಧಿಯ ಮೊದಲ ಮಾನದಂಡವೆಂದರೆ - ಬಡವರು, ವಂಚಿತರು, ಬುಡಕಟ್ಟು ಜನಾಂಗದವರು ಮತ್ತು ಮಧ್ಯಮ ವರ್ಗದವರ ಜೀವನದಲ್ಲಿ ಬದಲಾವಣೆ! ಇದಕ್ಕಾಗಿ, ಆರೋಗ್ಯ ಕ್ಷೇತ್ರವು ನಮ್ಮ ದೊಡ್ಡ ಆದ್ಯತೆಯಾಗಿದೆ. ಕಳೆದ ವರ್ಷಗಳಲ್ಲಿ, ದೇಶವು ಆರೋಗ್ಯ ರಕ್ಷಣೆಗಾಗಿ ಸಮಗ್ರ ದೃಷ್ಟಿಕೋನದೊಂದಿಗೆ ಮುಂದುವರೆದಿದೆ. ಚಿಕಿತ್ಸೆಗೆ ಸಂಬಂಧಿಸಿದ ಪ್ರತಿಯೊಂದು ಕಳವಳವನ್ನು ನಾವು ಪರಿಹರಿಸಿದ್ದೇವೆ. ಇಂದು ಬಡವರಿಗೂ ಸಹ ಆಯುಷ್ಮಾನ್ ಕಾರ್ಡ್ ಸೌಲಭ್ಯವಿದೆ. ಅವರಿಗೆ 5 ಲಕ್ಷ ರೂಪಾಯಿಗಳವರೆಗೆ ಉಚಿತ ಚಿಕಿತ್ಸೆಯ ಭರವಸೆ ಇದೆ. ರೋಗಗಳ ಸಕಾಲಿಕ ರೋಗನಿರ್ಣಯವನ್ನು ಖಚಿತಪಡಿಸಿಕೊಳ್ಳಲು, ಪ್ರಧಾನ ಮಂತ್ರಿ ಆಯುಷ್ಮಾನ್ ಆರೋಗ್ಯ ಮಂದಿರಗಳ ವ್ಯವಸ್ಥೆ ಇದೆ. ಜನೌಷಧಿ ಕೇಂದ್ರಗಳ ಮೂಲಕವೂ ಕೈಗೆಟುಕುವ ಔಷಧಿಗಳು ಲಭ್ಯವಿವೆ. ಈ ಸೌಲಭ್ಯಗಳನ್ನು ಇನ್ನಷ್ಟು ಉತ್ತಮ ಮತ್ತು ಆಧುನಿಕವಾಗಿಸಲು, ಇಂದು ಆರೋಗ್ಯ ಸೇವೆಗಳನ್ನು ಆಯುಷ್ಮಾನ್ ಭಾರತ್ ಡಿಜಿಟಲ್ ಮಿಷನ್ ಮೂಲಕ ತಂತ್ರಜ್ಞಾನದೊಂದಿಗೆ ಸಂಪರ್ಕಿಸಲಾಗುತ್ತಿದೆ.

ಸ್ನೇಹಿತರೇ,

ಆಯುಷ್ಮಾನ್ ಕಾರ್ಡ್‌ಗಳು ಮತ್ತು ಜನೌಷಧಿ ಕೇಂದ್ರಗಳಿಂದಾಗಿ, ಬಡವರು ಮತ್ತು ಮಧ್ಯಮ ವರ್ಗದವರು ಸುಮಾರು 2.25 ಲಕ್ಷ ಕೋಟಿ ರೂಪಾಯಿಗಳನ್ನು ಖರ್ಚು ಮಾಡದಂತೆ ಉಳಿಸಿದ್ದಾರೆ.

 

ಸಹೋದರರೇ ಮತ್ತು  ಸಹೋದರಿಯರೇ,

ಕೇಂದ್ರ ಸರ್ಕಾರದ ನೀತಿಗಳು ಈ ಪ್ರದೇಶದ ಜನರಿಗೆ ಸಹ ಹೆಚ್ಚಿನ ಪ್ರಯೋಜನವನ್ನು ನೀಡಿವೆ. ಒಂದು ಕಾಲದಲ್ಲಿ, ಇಲ್ಲಿ ಉತ್ತಮ ಚಿಕಿತ್ಸಾ ಸೌಲಭ್ಯಗಳ ಕೊರತೆ ಇತ್ತು. ಇಲ್ಲಿ ವೈದ್ಯಕೀಯ ಕಾಲೇಜು ಕೂಡ ಇರಲಿಲ್ಲ. ಆದರೆ ಈಗ ವೈದ್ಯಕೀಯ ಕಾಲೇಜು ಇದೆ, ಮತ್ತು ಸ್ನಾತಕೋತ್ತರ ಅಧ್ಯಯನಗಳು ಸಹ ಪ್ರಾರಂಭವಾಗಿವೆ. ಸಿಲ್ವಾಸಾದ ನಮೋ ಆಸ್ಪತ್ರೆ ಕಳೆದ ವರ್ಷದಿಂದ ಸಾವಿರಾರು ಜನರಿಗೆ ಸೇವೆ ಸಲ್ಲಿಸುತ್ತಿದೆ. ಇಂದು, ದಮನ್‌ನಲ್ಲಿ ನಮೋ ಆಸ್ಪತ್ರೆಯನ್ನು ಸಹ ಉದ್ಘಾಟಿಸಲಾಗಿದೆ. ಈ ಪ್ರದೇಶದ ಜನರು ಈಗ ಇನ್ನೂ ಉತ್ತಮ ಆರೋಗ್ಯ ಸೇವೆಯ ಪ್ರಯೋಜನವನ್ನು ಪಡೆಯಲಿದ್ದಾರೆ.

ಸ್ನೇಹಿತರೇ,

ನಮ್ಮ ಸರ್ಕಾರ ಆರೋಗ್ಯಕ್ಕೆ ಹೇಗೆ ಆದ್ಯತೆ ನೀಡುತ್ತಿದೆ ಎಂಬುದು ರಾಷ್ಟ್ರೀಯ ಕುಟುಂಬ ಆರೋಗ್ಯ ಸಮೀಕ್ಷೆಯ ಫಲಿತಾಂಶಗಳಲ್ಲಿಯೂ ಸ್ಪಷ್ಟವಾಗಿದೆ. ಒಂದು ಕಾಲದಲ್ಲಿ, ಭಾರತದಲ್ಲಿ ಹೆಚ್ಚಿನ ಹೆರಿಗೆಗಳು ಆಸ್ಪತ್ರೆಗಳಲ್ಲಿ ನಡೆಯುತ್ತಿರಲಿಲ್ಲ. ಇಂದು, ದೇಶದಲ್ಲಿ ಶೇ. 90 ಕ್ಕಿಂತ ಹೆಚ್ಚು ಹೆರಿಗೆಗಳು ಆಸ್ಪತ್ರೆಗಳಲ್ಲಿ ನಡೆಯುತ್ತಿವೆ, ಇದು ತಾಯಂದಿರ ಮರಣ ಮತ್ತು ಶಿಶು ಮರಣವನ್ನು ಬಹಳ ಕಡಿಮೆ ಮಾಡಿದೆ. ಮಿಷನ್ ಇಂದ್ರಧನುಷ್ ಕಾರಣದಿಂದಾಗಿ, ಭಾರತವು ಮಕ್ಕಳ ಲಸಿಕೆ ಕ್ಷೇತ್ರದಲ್ಲಿಯೂ ಉತ್ತಮ ಪ್ರಗತಿಯನ್ನು ಸಾಧಿಸಿದೆ. 2014 ಕ್ಕಿಂತ ಮೊದಲು, ಕೇವಲ ಶೇ. 60 ರಷ್ಟು ಮಕ್ಕಳಿಗೆ ಮಾತ್ರ ಸಂಪೂರ್ಣವಾಗಿ ಲಸಿಕೆ ನೀಡಲಾಗುತ್ತಿತ್ತು. ಇಂದು ಈ ಅಂಕಿ ಅಂಶವು ಸುಮಾರು ಶೇ. 90 ಕ್ಕೆ ಏರಿದೆ. ಆರೋಗ್ಯ ಭದ್ರತಾ ಕ್ಷೇತ್ರದಲ್ಲಿಯೂ ದೊಡ್ಡ ಬದಲಾವಣೆಯಾಗಿದೆ. 2014 ಕ್ಕಿಂತ ಮೊದಲು, ಶೇ. 30 ಕ್ಕಿಂತ ಕಡಿಮೆ ಕುಟುಂಬಗಳು ಆರೋಗ್ಯ ವಿಮಾ ಯೋಜನೆಗಳೊಂದಿಗೆ ಸಂಪರ್ಕ ಹೊಂದಿದ್ದವು. ಇಂದು ಆಯುಷ್ಮಾನ್ ಭಾರತ್ ಆ ಅಂಕಿಅಂಶಗಳನ್ನು ಸಹ ಬದಲಾಯಿಸಿದೆ. ಈಗ ಶೇ. 60 ಕ್ಕೂ ಹೆಚ್ಚು ಕುಟುಂಬಗಳು ಈ ರಕ್ಷಣೆಯನ್ನು ಪಡೆಯುತ್ತಿವೆ.

ಸ್ನೇಹಿತರೇ,

ಆರೋಗ್ಯ ಕ್ಷೇತ್ರದಲ್ಲಿ ಸರ್ಕಾರದ ಈ ಪ್ರಯತ್ನಗಳಿಂದ ಯಾರಾದರೂ ಹೆಚ್ಚು ಪ್ರಯೋಜನ ಪಡೆದಿದ್ದರೆ, ಅದು ನನ್ನ ದೇಶದ ಮಹಿಳಾ ಶಕ್ತಿ.

ಸ್ನೇಹಿತರೇ,

ಹಿಂದೆ ಈ ಪ್ರದೇಶದ ಯುವಜನರು ಉನ್ನತ ಶಿಕ್ಷಣಕ್ಕಾಗಿ ಹೊರಗೆ ಹೋಗಬೇಕಾಗಿತ್ತು. ಆದರೆ ಇಂದು, ಒಂದಲ್ಲ, ಹಲವು ರಾಷ್ಟ್ರೀಯ ಮಟ್ಟದ ಸಂಸ್ಥೆಗಳು ಇಲ್ಲಿ ಸ್ಥಾಪನೆಯಾಗಿವೆ. ಇತ್ತೀಚಿನ ವರ್ಷಗಳಲ್ಲಿ, ಇಲ್ಲಿ ಹೊಸ ಶಾಲಾ ಕಟ್ಟಡಗಳನ್ನು ನಿರ್ಮಿಸಲಾಗಿದೆ, ಶಾಲೆಗಳಲ್ಲಿ ಸ್ಮಾರ್ಟ್ ತರಗತಿ ಕೊಠಡಿಗಳನ್ನು ಸಹ ನಿರ್ಮಿಸಲಾಗಿದೆ. 40 ಸಾವಿರಕ್ಕೂ ಹೆಚ್ಚು ವಿದ್ಯಾರ್ಥಿಗಳು ಅವುಗಳ ಪ್ರಯೋಜನ ಪಡೆಯುತ್ತಿದ್ದಾರೆ. ಕೇಂದ್ರಾಡಳಿತ ಪ್ರದೇಶವು ಶಿಕ್ಷಣ ಕ್ಷೇತ್ರದಲ್ಲಿ ಕ್ರಮೇಣ ಮುಂದುವರಿಯುತ್ತಿದೆ ಎಂದು ನನಗೆ ಸಂತೋಷವಾಗಿದೆ. ಸ್ವಾಮಿ ವಿವೇಕಾನಂದ ಶಿಕ್ಷಣ ಕೇಂದ್ರದಂತಹ ಅನೇಕ ನಿರ್ಮಾಣಗಳು ಇಲ್ಲಿ ನಡೆಯುತ್ತಿವೆ.

 

 

ಸಹೋದರರೇ ಮತ್ತು  ಸಹೋದರಿಯರೇ,

ಈ ಶಿಕ್ಷಣ ಕ್ರಾಂತಿಯಲ್ಲಿ ನಮ್ಮ ಹೆಣ್ಣುಮಕ್ಕಳು ಹಿಂದುಳಿಯಬಾರದು ಎಂಬುದು ನಮ್ಮ ಸಂಕಲ್ಪ. ಇದಕ್ಕಾಗಿ ಅನೇಕ ದೊಡ್ಡ ಪ್ರಯತ್ನಗಳನ್ನು ಮಾಡಲಾಗುತ್ತಿದೆ. ಸರಸ್ವತಿ ಸೈಕಲ್ ಯೋಜನೆ ಮತ್ತು ಸರಸ್ವತಿ ವಿದ್ಯಾ ಯೋಜನೆಯಂತಹ ಯೋಜನೆಗಳು ಇಲ್ಲಿನ ಹೆಣ್ಣುಮಕ್ಕಳಿಗೆ ಸಾಕಷ್ಟು ಸಹಾಯ ಮಾಡುತ್ತಿವೆ.

ಸ್ನೇಹಿತರೇ,

ಇಂದು ಭಾರತವು ದೇಶದ ಯುವಜನರು ಪದವಿಯ ಜೊತೆಗೆ ಸರಿಯಾದ ಸ್ಥಾನಮಾನಗಳನ್ನು ಪಡೆಯಬೇಕೆಂದು ಪ್ರಯತ್ನಿಸುತ್ತಿದೆ. ಸ್ಥಳೀಯ ಪ್ರತಿಭೆಗಳನ್ನು ಜಾಗತಿಕ ಅವಕಾಶಗಳೊಂದಿಗೆ ಸಂಪರ್ಕಿಸುವಂತಹ ಮಾನ್ಯತೆಯನ್ನು ಅವರು ಪಡೆಯಬೇಕು. ವಿನ್ಯಾಸ, ಕಾನೂನು, ಎಂಜಿನಿಯರಿಂಗ್, ವೈದ್ಯಕೀಯ ಶಿಕ್ಷಣ, ಐಟಿ, ಡ್ರೋನ್ ಮತ್ತು ನವೀಕರಿಸಬಹುದಾದ ಇಂಧನದಂತಹ ಕ್ಷೇತ್ರಗಳಲ್ಲಿ, ನಮ್ಮ ಪ್ರಸ್ತುತ ಸಿದ್ಧತೆಯು ಭಾರತದ ಕಾರ್ಯಪಡೆಯನ್ನು ಬಲಪಡಿಸುತ್ತದೆ. ಆದ್ದರಿಂದ, ವೃತ್ತಿಪರ ಸಂಸ್ಥೆಗಳ ವಿಸ್ತರಣೆ ಬಹಳ ಮುಖ್ಯವಾಗಿದೆ.

ಸ್ನೇಹಿತರೇ,

ಇಂದು ಎನ್.ಐ.ಎಫ್.ಟಿ. (NIFT)  ಯ ಹದಿನೆಂಟನೇ ಕ್ಯಾಂಪಸ್‌ಗೆ ಅಡಿಪಾಯ ಹಾಕಲಾಗಿದೆ. ಈ ಸಂಸ್ಥೆಯು ಇಲ್ಲಿನ ಯುವಜನರನ್ನು ಜಾಗತಿಕ ಮಾನ್ಯತೆಯೊಂದಿಗೆ ಜೋಡಿಸುತ್ತದೆ. ಐಟಿಐ ದಮನ್‌ನಲ್ಲಿ ಡ್ರೋನ್ ತಂತ್ರಜ್ಞರಂತಹ ಹೊಸ ಕೋರ್ಸ್‌ಗಳು ಸಹ ಪ್ರಾರಂಭವಾಗಿವೆ. ಪಿಎಂ ವಿಶ್ವಕರ್ಮ ಮತ್ತು ಪಿಎಂ ಸೂರ್ಯ ಘರ್ ಉಚಿತ ವಿದ್ಯುತ್ ಯೋಜನೆಗೆ ಸಂಬಂಧಿಸಿದ ತರಬೇತಿ ಕಾರ್ಯಕ್ರಮಗಳು ಸಹ ಯುವಜನರಿಗೆ ಪ್ರಯೋಜನವನ್ನು ನೀಡುತ್ತಿವೆ.

ಸ್ನೇಹಿತರೇ,

ದೇಶದಲ್ಲಿ ಕ್ರೀಡೆಗಳು ಹೊಸ ಚಿಂತನೆಯೊಂದಿಗೆ ಮುಂದುವರೆದಿವೆ. ನಮ್ಮ ಕ್ರೀಡೆಗಳು ಇನ್ನು ಮುಂದೆ ದೊಡ್ಡ ನಗರಗಳು ಅಥವಾ ದೊಡ್ಡ ಕ್ರೀಡಾಂಗಣಗಳಿಗೆ ಸೀಮಿತವಾಗಿರಲಾರವು. ಖೇಲೋ ಇಂಡಿಯಾದಂತಹ ಪ್ರಯತ್ನಗಳು ಯುವಜನರಿಗೆ ತಮ್ಮ ಪ್ರತಿಭೆಯನ್ನು ಪ್ರದರ್ಶಿಸಲು ಹೊಸ ವೇದಿಕೆಯನ್ನು ನೀಡಿವೆ. ಈ ಕಾರಣದಿಂದಾಗಿ ಕ್ರೀಡಾ ಕ್ಷೇತ್ರದಲ್ಲಿ, ಸಣ್ಣ ಪ್ರದೇಶಗಳ ಮಕ್ಕಳು ರಾಷ್ಟ್ರೀಯ ಮಟ್ಟದಲ್ಲಿ ಮುಂದೆ ಬರುತ್ತಿದ್ದಾರೆ ಮತ್ತು ಈ ಪ್ರದೇಶವು ಸಹ ಅದರಿಂದ ಪ್ರಯೋಜನ ಪಡೆದಿದೆ. ಡಿಯು ಇಂದು ಬೀಚ್ ಕ್ರೀಡೆಗಳ ದೊಡ್ಡ ಕೇಂದ್ರವಾಗಿ ಹೊರಹೊಮ್ಮಿದೆ. ಘೋಘ್ಲಾ ಬೀಚ್‌ನಲ್ಲಿ ನಡೆದ ಬೀಚ್ ಕ್ರೀಡಾಕೂಟವು ಈ ಪ್ರದೇಶದತ್ತ ದೇಶದ ಗಮನವನ್ನು ಸೆಳೆದಿದೆ. ಇಂದು ಇಲ್ಲಿ ಆಧುನಿಕ ಕ್ರೀಡಾ ಮೂಲಸೌಕರ್ಯವನ್ನು ನಿರಂತರವಾಗಿ ಅಭಿವೃದ್ಧಿಪಡಿಸಲಾಗುತ್ತಿದೆ. ಖಾನ್ವೆಲ್‌ನಲ್ಲಿರುವ ಫುಟ್‌ಬಾಲ್ ಕೇಂದ್ರ ಮತ್ತು ದಮನ್‌ನಲ್ಲಿರುವ ವಾಲಿಬಾಲ್ ತರಬೇತಿ ಕೇಂದ್ರವು ಇಲ್ಲಿನ ಕ್ರೀಡಾ ಸಂಸ್ಕೃತಿಯನ್ನು ಬಲಪಡಿಸುತ್ತಿವೆ.

 

ಸ್ನೇಹಿತರೇ,

ಇಂದು ದೇಶದ ಆದ್ಯ ಗಮನ ಪ್ರವಾಸೋದ್ಯಮದ ಮೇಲೂ ಇದೆ. ಪ್ರವಾಸೋದ್ಯಮವು ಸ್ಥಳೀಯ ಕಲೆ ಮತ್ತು ಸಂಸ್ಕೃತಿಯನ್ನು ಉತ್ತೇಜಿಸಬೇಕು ಎಂಬುದು ನಮ್ಮ ಪ್ರಯತ್ನ. ಸಣ್ಣ ಸ್ಥಳಗಳನ್ನು ಸಹ ದೊಡ್ಡ ಅವಕಾಶಗಳೊಂದಿಗೆ ಸಂಪರ್ಕಿಸಬೇಕು. 'ದೇಖೋ ಅಪ್ನಾ ದೇಶ್' ನಂತಹ ಪ್ರಯತ್ನಗಳು ದೇಶದ ವೈವಿಧ್ಯತೆಯ ಬಗ್ಗೆ ತಿಳಿದುಕೊಳ್ಳಲು ಜನರನ್ನು ಪ್ರೇರೇಪಿಸಿವೆ. ಇಂದು ಭಾರತದಲ್ಲಿ ಪರಂಪರೆ ಪ್ರವಾಸೋದ್ಯಮ, ಬೀಚ್ ಪ್ರವಾಸೋದ್ಯಮ, ಪರಿಸರ ಪ್ರವಾಸೋದ್ಯಮ, ಸಾಹಸ ಪ್ರವಾಸೋದ್ಯಮಗಳು ಹೊಸ ಶಕ್ತಿಯನ್ನು ಪಡೆಯುತ್ತಿವೆ.

ಸ್ನೇಹಿತರೇ,

ದಾದ್ರಾ ಮತ್ತು ನಗರ ಹವೇಲಿ, ದಮನ್ ಮತ್ತು ಡಿಯುಗಳಲ್ಲಿ, ಪ್ರವಾಸೋದ್ಯಮವು ಅಪಾರ ಸಾಧ್ಯತೆಗಳನ್ನು ಹೊಂದಿರುವ ವಲಯವಾಗಿದೆ. ಈ ಪ್ರದೇಶವು ನೈಸರ್ಗಿಕ ಸೌಂದರ್ಯದಿಂದ ಆಶೀರ್ವದಿಸಲ್ಪಟ್ಟಿದೆ. ಅದಕ್ಕಾಗಿಯೇ ಪ್ರವಾಸೋದ್ಯಮಕ್ಕೆ ಸಂಬಂಧಿಸಿದಂತೆ ದೇಶವು ಕೆಲಸ ಮಾಡಿದ ನೀತಿಗಳು ದಾದ್ರಾ ಮತ್ತು ನಗರ ಹವೇಲಿ, ದಮನ್ ಮತ್ತು ಡಿಯುಗೆ ಹೆಚ್ಚಿನ ಪ್ರಯೋಜನವನ್ನು ನೀಡಿವೆ. 2021 ರಲ್ಲಿ, ಸುಮಾರು 6 ಲಕ್ಷ ಪ್ರವಾಸಿಗರು ಇಲ್ಲಿಗೆ ಬಂದರು. 2025 ರಲ್ಲಿ, ಈ ಸಂಖ್ಯೆ ಸುಮಾರು 50 ಲಕ್ಷಕ್ಕೆ ಏರಿತು. ಅಂದರೆ ಕೆಲವೇ ವರ್ಷಗಳಲ್ಲಿ, ಪ್ರವಾಸಿಗಳ  ಸಂಖ್ಯೆ ಸುಮಾರು ಹತ್ತು ಪಟ್ಟು ಹೆಚ್ಚಾಗಿದೆ. ಉತ್ತಮ ಮೂಲಸೌಕರ್ಯ, ಉತ್ತಮ ಸೌಲಭ್ಯಗಳು ಮತ್ತು ಸ್ವಚ್ಛ ಕಡಲತೀರಗಳಿಂದಾಗಿ ಇದು ಸಾಧ್ಯವಾಗಿದೆ. ದಮನ್ ರಾತ್ರಿ ಮಾರುಕಟ್ಟೆ, ರಾಮಸೇತು ಸಮುದ್ರ ಮುಂಭಾಗ, ನಮೋಪಥ ಸಮುದ್ರ ಮುಂಭಾಗ, ನಾನಿ ದಮನ್ ಕೋಟೆ, ಗಂಗೇಶ್ವರ ದೇವಾಲಯ ಸಂಕೀರ್ಣ, ಇಂತಹ ಹಲವಾರು ಸ್ಥಳಗಳು ಇಂದು ಈ ಇಡೀ ಪ್ರದೇಶದ ಹೊಸ ಗುರುತಾಗುತ್ತಿವೆ.

ಸ್ನೇಹಿತರೇ,

ದಾದ್ರಾ ಮತ್ತು ನಗರ ಹವೇಲಿ, ದಮನ್ ಮತ್ತು ಡಿಯುಗಳ ಕನಸುಗಳನ್ನು ನನಸಾಗಿಸಲು, ನಾವು ಇಲ್ಲಿ ಕೈಗಾರಿಕಾ ಬಲವನ್ನು ಹೆಚ್ಚಿಸಬೇಕಾಗಿದೆ. ಈ ಕೇಂದ್ರಾಡಳಿತ ಪ್ರದೇಶವು ಮಾನವ ನಿರ್ಮಿತ ಫೈಬರ್ ಕ್ಷೇತ್ರದಲ್ಲಿ ತನ್ನ ವಿಶಿಷ್ಟ ಗುರುತನ್ನು ಸಾಧಿಸಿದೆ ಎಂಬುದು ಹೆಮ್ಮೆಯ ವಿಷಯ. ದಾದ್ರಾ ಮತ್ತು ನಗರ ಹವೇಲಿಯನ್ನು ರಾಷ್ಟ್ರೀಯ ಮಾನವ ನಿರ್ಮಿತ ಫೈಬರ್ ರಾಜಧಾನಿ ಎಂದು ಗುರುತಿಸಲಾಗಿದೆ. ಈ ಪ್ರದೇಶವು ಪ್ಲಾಸ್ಟಿಕ್ ರಫ್ತಿನಲ್ಲಿ ನಿರಂತರವಾಗಿ ಪ್ರಗತಿ ಸಾಧಿಸುತ್ತಿದೆ. ಇಲ್ಲಿನ ಕೈಗಾರಿಕೆಗಳು ಮತ್ತು ಎಂ.ಎಸ್.ಎಂ.ಇ. ( MSME)  ಗಳನ್ನು ಬೆಂಬಲಿಸಲು ಸರ್ಕಾರ ನಿರಂತರ ಪ್ರಯತ್ನಗಳನ್ನು ಮಾಡಿದೆ. ಇಲ್ಲಿನ ಎಂ.ಎಸ್.ಎಂ.ಇ. ಗಳು ಮತ್ತು ಇತರ ಕೈಗಾರಿಕೆಗಳಿಗೆ ಕೋಟ್ಯಂತರ ರೂಪಾಯಿಗಳಿಗಿಂತ ಹೆಚ್ಚಿನ ಆರ್ಥಿಕ ನೆರವು ನೀಡಲಾಗಿದೆ. ಕೇಂದ್ರಾಡಳಿತ ಪ್ರದೇಶದ ಸಣ್ಣ ಮತ್ತು ಗುಡಿ ಕೈಗಾರಿಕೆಗಳಿಗೆ ಹೊಸ ಅವಕಾಶಗಳು ತೆರೆದುಕೊಳ್ಳುತ್ತಿವೆ. ಮುಂಬರುವ ದಿನಗಳಲ್ಲಿ ಈ ಪ್ರದೇಶವು ಉತ್ಪಾದನಾ ಕೇಂದ್ರವಾಗಲಿದೆ ಎಂದು ನನಗೆ ವಿಶ್ವಾಸವಿದೆ.

ಸ್ನೇಹಿತರೇ,

ಸೂಕ್ಷ್ಮ ಆಡಳಿತವು ಅಭಿವೃದ್ಧಿಯ ದೃಷ್ಟಿಕೋನದೊಂದಿಗೆ ಸಂಯೋಜಿಸಲ್ಪಟ್ಟಾಗ, ರೂಪಾಂತರವು ವೇಗವಾಗಿ ವಾಸ್ತವವಾಗಿ ರೂಪುಗೊಳ್ಳುತ್ತದೆ. ದಾದ್ರಾ ಮತ್ತು ನಗರ ಹವೇಲಿ, ದಮನ್ ಮತ್ತು ಡಿಯುಗಳಲ್ಲಿ ನಮ್ಮ ಪ್ರಯತ್ನಗಳ ಪರಿಣಾಮವನ್ನು ನೋಡಿದಾಗ ತೃಪ್ತಿ ಸಿಗುತ್ತದೆ. ಈ ನೆಲದ ಜನರ ಮೇಲೆ ನನಗೆ ಸಂಪೂರ್ಣ ನಂಬಿಕೆ ಇದೆ. ಇಲ್ಲಿನ ಯುವಜನರು, ಇಲ್ಲಿನ ತಾಯಂದಿರು ಮತ್ತು ಸಹೋದರಿಯರು, ರೈತರು, ಕುಶಲಕರ್ಮಿಗಳು, ಕಾರ್ಮಿಕರು ಮತ್ತು ಉದ್ಯಮಿಗಳು ಮುಂಬರುವ ವರ್ಷಗಳಲ್ಲಿ ಈ ಅಭಿವೃದ್ಧಿ ಪ್ರಯಾಣವನ್ನು ಮತ್ತಷ್ಟು ಮುಂದೆ ಕೊಂಡೊಯ್ಯುತ್ತಾರೆ. ನಿಮ್ಮ ಕನಸುಗಳನ್ನು ನನಸಾಗಿಸಲು ಕೇಂದ್ರ ಸರ್ಕಾರವು ನಿಮ್ಮೊಂದಿಗೆ ಹೆಗಲಿಗೆ ಹೆಗಲು ಕೊಟ್ಟು ನಿಲ್ಲುತ್ತದೆ ಎಂದು ನಾನು ನಿಮಗೆ ಭರವಸೆ ನೀಡುತ್ತೇನೆ. ಈ ನಂಬಿಕೆಯೊಂದಿಗೆ, ಅಭಿವೃದ್ಧಿ ಯೋಜನೆಗಳಿಗಾಗಿ ನಾನು ಮತ್ತೊಮ್ಮೆ ನಿಮಗೆ ಅನೇಕ ಅಭಿನಂದನೆಗಳನ್ನು ಸಲ್ಲಿಸುತ್ತೇನೆ. ನನ್ನೊಂದಿಗೆ ಹೇಳಿ, ಭಾರತ್ ಮಾತಾ ಕಿ ಜೈ! ಭಾರತ್ ಮಾತಾ ಕಿ ಜೈ! ಭಾರತ್ ಮಾತಾ ಕಿ ಜೈ!

ತುಂಬಾ ಧನ್ಯವಾದಗಳು.