ಶೇರ್
 
Comments

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जन्मदिन की बधाई देते समय प्रधानमंत्री के रूप में उनके द्वारा किए कार्यों का मूल्यांकन करना प्रासंगिक होगा, क्योंकि अंत में किसी भी सत्तारूढ़ दल के नेता के लिए सामाजिक प्रतिबद्धता प्रमुख मुद्दा होता है।

दरअसल, नरेंद्र मोदी ने अपने पहले और दूसरे कार्यकाल में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक सशक्त राजनेता के रूप में अपनी पहचान बनाते हुए इस बात पर जोर दिया कि दुनियाभर में भारत की प्रतिष्ठा कैसे बढ़ेगी और भारत विश्व राजनीति में किस तरह से हस्तक्षेप करेगा।


पड़ोसी देशों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध बनाए रखते हुए, नरेंद्र मोदी ने अमेरिका जैसी महाशक्ति के साथ साथ यूरोपीय देशों के साथ भी घनिष्ठ संबंध बनाए।

देश में अंदरुनी मामले में कई मुद्दों पर कठोर रुख अख्तियार करना और सही निर्णय लेना मोदी के कार्यशैली की विशेषता रही है। कोई क्या सोचता है इस पर ध्यान न देते हुए किसी नीति या निर्णय से देश को किस तरह ज्यादा फायदा होगा, मोदी इस दिशा में सोचते रहे हैं और मोदी की ये कुशलता अनेक बार नज़र आई है।

पीएम मोदी एक अलग व्यक्तित्व 

बेशक कोई भी सरकार आम आदमी के खिलाफ नहीं होती, लेकिन नीति बनाने और उसके वास्तविक कार्यान्वयन के स्तर में अंतर होता है। मोदी सरकार ने इन दोनों स्तरों पर अपनी प्रतिबद्धता बरकरार रखी है।

मोदी का नाम एक ऐसे नेता के रूप में प्रमुखता से लिया जाएगा, जो स्वतंत्र भारत में लोगों के साथ सीधे संवाद करते हैं। मोदी इसे सहजता से कर लेते हैं, क्योंकि वो न केवल आम आदमी को समझते हैं, बल्कि आम आदमी के लिए उनके मन में एक तड़प भी होती है। जागरूकता के नाते और सरकारी कर्तव्य के लिए कार्य करने और सामाजिक तत्वों के प्रति आदरभाव और कर्तव्य की भावना होने के बीच एक बुनियादी अंतर होता है।
 
नरेंद्र मोदी का जन्म जिस सामाजिक परिवेश में हुआ, उनके बचपन का संघर्ष और बाद में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के माध्यम से मिले। देशभक्ति के संस्कार उन्हें तपाते गए और आम आदमी, गरीबों, दलितों और शोषितों के लिए दिन-रात काम करना उनके जीवन का ध्येय बन गया।


उनके कार्यकाल में कांग्रेस ने जो किया, वह यहां चर्चा का विषय नहीं है, लेकिन कांग्रेस की नीतियों से समाज में कोई मूलभूत परिवर्तन नहीं हुआ या फिर उसकी गति बहुत ही धीमी रही।

हमें यह स्वीकार करना होगा कि मोदी की नीति आम लोगों के जीवन में बुनियादी बदलाव ला रही है। उनकी जनधन योजना का ही उदाहरण लें। लाखों लोग कभी बैंक गए ही नहीं थे, क्योंकि उनका कभी किसी बैंक में खाता ही नहीं था।

देखा जाए तो ये बेहद आसान लगनेवाली बात है, लेकिन हम ऐसे करोड़ों जनता को ये प्रतिष्ठा देंगे या नहीं? मोदी सरकार की इस योजना के कारण देश की 30 करोड़ से अधिक जनता को ये प्रतिष्ठा मिली। इस योजना से अन्य आर्थिक लाभ तो हुए ही, लेकिन मेरी राय में, उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा बढ़ना अधिक महत्वपूर्ण है।

मोदी सरकार ने निर्णय लिया कि सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ लाभार्थियों को मिले, किसान, खेतिहर मजदूर, छात्र और महिलाएं समाज के इन सभी घटकों के खाते में सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे पहुंचे।

जनधन योजना का ये भी एक उल्लेखनीय पहलू रहा है। गरीबों को न केवल स्वास्थ्य सुविधाएं मिलें, बल्कि उन्हें बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने के लिए प्रधानमंत्री आरोग्य योजना शुरू की गई। इस योजना से आज देश के करोड़ों लोग लाभान्वित हो रहे हैं।

नरेंद्र मोदी की कार्यशैली की एक और विशेषता योजनाओं का सरलीकरण है। कहीं कोई जटिलता नहीं, बस सहजता से संबंधित स्थान पर जाएं और योजना का लाभ उठाएं। सरकारी बाबूगिरी और इन योजनाओं का लाभ पाने के लिए होनेवाली परेशानियों को खत्म करने के लिए नरेंद्र मोदी ने एक ईमानदार कोशिश की है।

व्यक्ति का काम ही पहचान बनता है..!

एक तरफ नरेंद्र मोदी ने औद्योगीकरण पर जोर देने के लिए कई प्रयोग किए और निर्णय लिए। वहीं दूसरी तरफ गरीब, मध्यम वर्ग के किसानों के हितों के लिए भी काम किया। किसानों को बुवाई के मौसम में समय पर अच्छी गुणवत्ता के बीज और खाद मिलें, यह सुनिश्चित करने के लिए खुद नरेंद्र मोदी ने पहल की।

यूरिया खाद की कालाबाजारी रोकने की कोशिश करने के साथ ही उसकी गुणवत्ता बरकरार रखने के प्रयास किए जा रहे हैं। यह एक छोटी सी बात लग सकती है, लेकिन किसानों के जीवन में इसका क्या महत्व है, इसे केवल वही जान पाएंगे जो इसका अर्थ जानते हैं।

हमारे देश में फसलों को किफायती दाम मिलने की बात पिछले कई दशकों से होती रही है, लेकिन दशकों से चली आ रही किसान विरोधी बाजार नीति को बदले बिना यह संभव नहीं था। इसके लिए मोदी ने देशभर में बाजार समितियों का आधुनिकीकरण करने के साथ ही बाजार समितियों के किसान विरोधी नियमों और कायदों को निरस्त करने का साहसिक निर्णय लिया। साथ ही इस बात का भी ध्यान रखा गया है कि सभी किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य मिले और यह मूल्य हर साल बढ़ाया जाता है।
 
विदेश नीति, आर्थिक नीति, रक्षा नीति आदि बहुत ही बड़े और व्यापक मुद्दे हैं। मोदी ने इसके लिए क्या किया, इसके बारे में बहुत विस्तार से लिखा जा सकता है, लेकिन मुझे यहां आम भारतीयों के लिए मोदी द्वारा किए कार्य पर प्रकाश डालना ज़्यादा महत्वपूर्ण लग रहा है।

कुंभ मेले में सफ़ाई कर्मचारियों के पैर धोना भले ही सामान्य बात लग सकती है, लेकिन मोदी के इस कार्य के दूरगामी सामाजिक परिणाम होंगे। सामाजिक परिवर्तन, सुधार की गणना करने का निश्चित उपाय नहीं, बल्कि एक प्रक्रिया है।

इस प्रक्रिया की गति हमेशा धीमी रही है। सिर पर मैला ढोकर ले जाने के कार्य को कानूनी रूप से बंद कर दिया गया। इस तरह की जबरदस्ती करने के कार्य को एक अपराध की श्रेणी में रख दिया गया। मुझे लगता है कि इस सामाजिक प्रक्रिया का अंतिम पड़ाव मोदी द्वारा सफाई कर्मियों के पैर धोना है।

मोदी ने सामाजिक स्तर पर दमनकारी कई कानूनों को निरस्त किया या संशोधित कर दिया। दलित समुदाय के लिए कानून को और अधिक सक्षम बनाने का प्रयास किया गया। खास बात यह है कि यह सब करते हुए चुनाव, वोटों की राजनीति को ध्यान में नहीं रखा गया, यही मोदी की विशेषता है, यही उनकी समाज के प्रति प्रतिबद्धता है।

दूसरी ओर, आम आदमी, विशेषकर दलित और आदिवासी समुदायों को आर्थिक रूप से मुख्यधारा में लाने के लिए मुद्रा योजना शुरू की गई। ऐसा कोई नहीं कह रहा, इससे पहले समाज के इन वर्गों को आर्थिक सहायता प्रदान करने के लिए कोई योजना नहीं थी। लेकिन देश की समग्र स्थिति और उपलब्ध सरकारी नौकरियों की मात्रा को देखते हुए, सभी को रोजगार प्रदान करना मुश्किल काम है। इसके लिए इसे अलग करना जरूरी है। मुद्रा योजना इसका एक विकल्प साबित हुई है। इस योजना के माध्यम से दलित, आदिवासी युवा नौकरी की तलाश में नहीं, बल्कि दूसरों को नौकरी के अवसर देने के स्तर तक पहुंच रहे हैं।

इस योजना ने न केवल दलित और आदिवासी युवाओं को उद्योग शुरू करने के लिए सुलभ आर्थिक सहायता प्रदान किया, बल्कि उनके उत्पादों के लिए बाज़ार उपलब्ध कराने का भी प्रयत्न किया गया। इन युवाओं द्वारा उत्पादित 4% उत्पादों को सरकार द्वारा खरीदने का एक बहुत ही महत्वपूर्ण निर्णय मोदी ने लिया। इससे अब तक देश के 2.75 करोड़ युवाओं को लाभ हुआ है।

इस योजना में कितने करोड़ रुपए आवंटित किए गए, यह संख्या का खेल था, इस योजना के कारण वास्तव में क्या बदल रहा है, यह योजना इस समाज के युवाओं में विश्वास पैदा कर रही है, मेरे लिए यही महत्वपूर्ण है।

दलित, आदिवासी विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा, विदेशों में शिक्षा के अवसर मिले, इसके लिए मोदी काम कर रहे हैं। अल्पसंख्यक समुदायों के छात्रों को भी इसी तरह के अवसर प्रदान किए जा रहे हैं। महिला सशक्तिकरण के लिए कई योजनाएं शुरू की गई हैं।

यहां सरकारी योजनाओं की सूची देने का मेरा इरादा नहीं है, बल्कि किसी नेता के काम का मूल्यांकन करने में कौन से कारक महत्वपूर्ण हैं, यह जांचना जरूरी है। इसलिए मैंने केवल कुछ निर्णयों की यहां चर्चा की है।

डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर ने कहा था-

सत्ता की कुंजी सामाजिक परिवर्तन और प्रगति का साधन है।

जाहिर है बाबा साहेब ने अपने अनुयायियों और समाज को सत्ता की परिधि से बाहर आनेवाले लोगों को सत्ता में सहभागिता मिले, इसके लिए प्रयत्न किए और उसके अनुसार कानून बनाए। इस समुदाय को संसदीय राजनीति में मौका देने के लिए उन्होंने एक संवैधानिक प्रावधान किया। हालांकि सत्ता में उन्हें प्रत्यक्ष मौका मिलेगा, ऐसी उस पार्टी की नीति होनी चाहिए।

यदि आप इस दृष्टि से मोदी के मंत्रिमंडल पर एक नज़र डालें, तो आप देखेंगे कि इस मंत्रिमंडल का चेहरा पिछले सभी मंत्रिमंडलों से अलग है। सत्ता के केंद्र में तो सभी जातियों को मौका मिलता ही है, लेकिन समाज के जिन वर्गों को सत्ता में प्रत्यक्ष मौका नहीं दिया गया है, ऐसे अनेक चेहरे मोदी के मंत्रिमंडल में उनके सहयोगी हैं, यही बात मोदी को विशिष्ट बनाती है।

डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के राजनीतिक विचारों को लागू करते हुए डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर की प्रेरणा मिलती रहे, इसके लिए डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर से संबंधित स्थलों का विकास किया जा रहा है। मोदी के समग्र व्यक्तित्व से देश के युवाओं में आत्मविश्वास का माहौल बन रहा है।
 
उदाहरण के लिए, ओलंपिक में हमने अब तक का ऐतिहासिक प्रदर्शन किया है। इसका श्रेय किसी नेता या विभाग को देने का मेरा इरादा नहीं है, इससे पहले भी एक खेल विभाग था, एक वित्तीय प्रावधान था, विभिन्न खेल संगठन थे, लेकिन एक आत्मविश्वास का माहौल, सरकार हमारे साथ है, ये आश्वासन और खेल व खिलाड़ियों के लिए एक निश्चित नीति ज़रूरी होती है। मैंने राज्य के खेल मंत्री के रूप में कार्य किया है, इसलिए इस क्षेत्र में अपने अनुभव के आधार पर मैं दावा कर सकता हूं कि देश में खेल क्षेत्र के लिए हालात पहले से कहीं बेहतर हैं।  

पार्टी नेता, मित्र और मार्गदर्शक के रूप में नरेंद्र मोदी की विशिष्टता का अनुभव हम करते रहते हैं, लेकिन सार्वजनिक जीवन में भी विभिन्न स्तरों पर उनका अलग होना, उनका सहज  व्यक्तित्व, साहसिक निर्णय लेने वाले नेता के रूप में, विभिन्न स्तरों पर वे सबसे अलग हैं।

सत्ता के सर्वोच्च पद पर होते हुए भी लोगों से सीधे संवाद करनेवाले, दिन-रात काम करनेवाले और हमेशा देश एवं आम आदमी के हितों के बारे में सोचनेवाले नेता यानी नरेंद्र मोदी। उनकी छवि कोई अतिशयोक्ति नहीं है, बल्कि लोगों का इतना प्यार और समर्थन बहुत कम नेताओं को मिलता है। मोदी ने ये सब अपने कार्यों से अर्जित किया है, यह बात उनके विरोधियों को भी स्वीकार करनी होगी।

हमारे नेता, देश के नेता, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी को एक बार फिर बधाई..!

Author Name : Vinod Tawde

Disclaimer:

This article was first published in Amar Ujala.

It is part of an endeavour to collect stories which narrate or recount people’s anecdotes/opinion/analysis on Prime Minister Shri Narendra Modi & his impact on lives of people.

20 ವರ್ಷಗಳ ಸೇವಾ ಮತ್ತು ಸಮರ್ಪಣದ 20 ಚಿತ್ರಗಳು
Explore More
ಚಾಲ್ತಾ ಹೈ' ವರ್ತನೆಯನ್ನು ಬಿಟ್ಟು  ಮತ್ತು ' ಬದಲ್ ಸಕ್ತ ಹೈ'  ಬಗ್ಗೆ ಯೋಚಿಸುವ ಸಮಯವಿದು : ಪ್ರಧಾನಿ ಮೋದಿ

ಜನಪ್ರಿಯ ಭಾಷಣಗಳು

ಚಾಲ್ತಾ ಹೈ' ವರ್ತನೆಯನ್ನು ಬಿಟ್ಟು ಮತ್ತು ' ಬದಲ್ ಸಕ್ತ ಹೈ' ಬಗ್ಗೆ ಯೋಚಿಸುವ ಸಮಯವಿದು : ಪ್ರಧಾನಿ ಮೋದಿ
Narendra Modi’s Gettysburg Moment—A Billion Doses

Media Coverage

Narendra Modi’s Gettysburg Moment—A Billion Doses
...

Nm on the go

Always be the first to hear from the PM. Get the App Now!
...
ನರೇಂದ್ರ ಮೋದಿ ಉನ್ನತ ಅಧಿಕಾರದ ಗದ್ದುಗೆ ಏರಿ ಇಂದಿಗೆ 20 ವರ್ಷ; ಇಷ್ಟು ವರ್ಷದ ಅವರ ಸಾಧನೆಯ ಹಾದಿ! :
October 20, 2021
ಶೇರ್
 
Comments

ಈ ತಿಂಗಳ ಅಕ್ಟೋಬರ್ 7 ಕ್ಕೆ ನರೇಂದ್ರ ಮೋದಿ (Narendra Modi) ಸರ್ಕಾರದ ಮುಖ್ಯಸ್ಥರಾಗಿ ಅಧಿಕಾರಿಯಾಗಿ 20 ವರ್ಷಗಳನ್ನು ಪೂರೈಸಿದ್ದಾರೆ. ನರೇಂದ್ರ ಮೋದಿ ಪ್ರಧಾನಿಯಾಗುವ ಮುನ್ನ ಗುಜರಾತ್ ಮುಖ್ಯಮಂತ್ರಿಯಾಗಿ ರಾಜ್ಯದ ಪಥವನ್ನು ಹೇಗೆ ಬದಲಾಯಿಸಿದರು ಎಂಬುದನ್ನು ನಾವು ಹತ್ತಿರದಿಂದ ನೋಡಿದ್ದೇವೆ. ಮೋದಿಯನ್ನು ಇತರೆ ನಾಯಕರಿಂದ ಬೇರ್ಪಡಿಸುವ ಒಂದು ವಿಷಯ ಯಾವುದು? ಎಂದು ಜನರು ಹೆಚ್ಚಾಗಿ ಕೇಳುತ್ತಿರುತ್ತಾರೆ. ಆದರೆ, ಜನರೊಂದಿಗಿನ ಅವರ ಮಾನವೀಯ ಸಂಪರ್ಕ ಮತ್ತು ವೈಯಕ್ತಿಕ ಸಂವಹನವೇ ಅವರನ್ನು ಇಷ್ಟು ಎತ್ತರಕ್ಕೆ ಏರಿಸಿದೆ ಎಂದರೆ ತಪ್ಪಾಗಲಾರದು.

1980ರ ದಶಕ ಗುಜರಾತ್ ರಾಜಕೀಯದಲ್ಲಿ ಒಂದು ಕುತೂಹಲಕಾರಿ ಅವಧಿ. ಕೇಂದ್ರ ಮತ್ತು ರಾಜ್ಯದಲ್ಲಿ ಕಾಂಗ್ರೆಸ್ ಆರಾಮವಾಗಿ ಅಧಿಕಾರದಲ್ಲಿತ್ತು. ನೀರಸ ಆಡಳಿತ, ಕಹಿ ಗುಂಪುಗಾರಿಕೆ ಮತ್ತು ತಪ್ಪಾದ ಆದ್ಯತೆಗಳ ಹೊರತಾಗಿಯೂ, ಯಾವುದೇ ರಾಜಕೀಯ ಪಕ್ಷವು ಅಧಿಕಾರಕ್ಕೆ ಬರುವುದು ಊಹಿಸಲೂ ಸಾಧ್ಯವಿರಲಿಲ್ಲ. ಹಾರ್ಡ್‌ಕೋರ್ ಬಿಜೆಪಿ ಬೆಂಬಲಿಗರು ಮತ್ತು ಕಾರ್ಯಕರ್ತರಲ್ಲೂ ಸಹ ಈ ನಂಬಿಕೆ ಇರಲಿಲ್ಲ.

ಇಂತಹ ಸಮಯದಲ್ಲಿ ನರೇಂದ್ರ ಮೋದಿ ಅವರು ಆರ್‌ಎಸ್‌ಎಸ್‌ನಿಂದ ಬಿಜೆಪಿಯಲ್ಲಿ ಹೆಚ್ಚು ರಾಜಕೀಯ ಜೀವನಕ್ಕೆ ಬದಲಾದರು. ಎಎಂಸಿ ಚುನಾವಣೆಗೆ ಪಕ್ಷವನ್ನು ಸಿದ್ಧಪಡಿಸುವ ಸವಾಲನ್ನು ಅವರು ಕೈಗೆತ್ತಿಕೊಂಡರು. ಅವರ ಆರಂಭಿಕ ಹೆಜ್ಜೆಗಳೆಂದರೆ ವೃತ್ತಿಪರರನ್ನು ಬಿಜೆಪಿಯೊಂದಿಗೆ ಸಂಯೋಜಿಸುವುದು. ಪಕ್ಷದ ಯಂತ್ರಗಳಾದ ಖ್ಯಾತ ವೈದ್ಯರು, ವಕೀಲರು, ಎಂಜಿನಿಯರ್‌ಗಳು ಮತ್ತು ಶಿಕ್ಷಕರನ್ನು ಚುನಾವಣಾ ಮತ್ತು ರಾಜಕೀಯ ಪ್ರಕ್ರಿಯೆಗೆ ಸೇರಲು ಪ್ರೇರೇಪಿಸಿದರು. ಅಂತೆಯೇ, ನರೇಂದ್ರ ಮೋದಿ ಕೇವಲ ರಾಜಕೀಯದ ಜೊತೆಗೆ ಆಡಳಿತದ ಸಮಸ್ಯೆಗಳ ಬಗ್ಗೆ ಮಾತನಾಡಲು ಹೆಚ್ಚಿನ ಪ್ರಾಮುಖ್ಯತೆಯನ್ನು ನೀಡಿದರು. ಅವರು ನಿರಂತರವಾಗಿ ಜನರನ್ನು ಮೇಲೆತ್ತುವ ಮತ್ತು ಜೀವನವನ್ನು ಪರಿವರ್ತಿಸುವ ನವೀನ ಮಾರ್ಗಗಳ ಬಗ್ಗೆ ಯೋಚಿಸುತ್ತಿದ್ದರು.

ಸಂವಹನಕಾರರಾಗಿ, ನರೇಂದ್ರ ಮೋದಿ ಅವರು ಯಾವಾಗಲೂ ಮಹೋನ್ನತರಾಗಿದ್ದರು ಮತ್ತು ಅದಕ್ಕಿಂತ ಹೆಚ್ಚಾಗಿ ಅವರು ಜನರನ್ನು ಪ್ರೇರೇಪಿಸುತ್ತಿದ್ದರು. ಅಹಮದಾಬಾದ್‌ನ ಧರ್ನಿಧರ್‌ನಲ್ಲಿ ನಿರ್ಮಲ್ ಪಾರ್ಟಿ ಪ್ಲಾಟ್‌ನಲ್ಲಿ ಮಧ್ಯಮ ಗಾತ್ರದ ಸಭೆಯಲ್ಲಿ ಈ ಒಂದು ನಿರ್ದಿಷ್ಟ ಭಾಷಣವನ್ನು ನಾನು ನೆನಪಿಸಿಕೊಳ್ಳುತ್ತೇನೆ. ಮೊದಲ ಕೆಲವು ನಿಮಿಷಗಳಲ್ಲಿ ಅವರು ತಮಗೆ ತಿಳಿದಿರುವ ಹಾಸ್ಯದ ಕಾಮೆಂಟ್‌ಗಳ ಮೂಲಕ ಜನರನ್ನು ನಗುವಂತೆ ಮಾಡಿದರು. ನಂತರ ಅವರು ಗುಂಪನ್ನು ನೋಡಿ ಪ್ರಶ್ನೆಗಳನ್ನು ಕೇಳಲು ಹೋದರು- ನಾವು ತಮಾಷೆ ಮಾಡುವುದನ್ನು ಮುಂದುವರಿಸಬೇಕೇ ಅಥವಾ ನಾವು ರಾಷ್ಟ್ರೀಯ ಪ್ರಾಮುಖ್ಯತೆಯ ಸಮಸ್ಯೆಗಳ ಬಗ್ಗೆ ಮಾತನಾಡೋಣವೇ ಎಂದು ಪ್ರಶ್ನಿಸಿದ್ದರು.

ನಾನು ಹೇಳುವುದನ್ನು ಕೇಳಿದ ನಂತರ ಅವನು ನನ್ನ ಕಡೆಗೆ ತಿರುಗಿ ಹೇಳಿದರು. ಇಲ್ಲ, ನಾವು ಎರಡನ್ನೂ ಮಾಡಲು ಸಾಧ್ಯವಿಲ್ಲ. ನಂತರ ಅವರು ಬಿಜೆಪಿಯ ಆಡಳಿತ ದೃಷ್ಟಿಕೋನ, ಆರ್ಟಿಕಲ್ 370, ಷಾ ಬಾನೋ ಪ್ರಕರಣ ಮತ್ತು ಹೆಚ್ಚಿನವುಗಳ ಬಗ್ಗೆ ಸುದೀರ್ಘವಾಗಿ

ಗುಜರಾತ್‌ನ ಹೊರಗಿನವರಿಗೆ ತಿಳಿದಿಲ್ಲ ಆದರೆ 1990 ರ ದಶಕದ ಆರಂಭದಲ್ಲಿ ಮೋದಿಯವರ ಭಾಷನದ ಕ್ಯಾಸೆಟ್‌ಗಳು ಗುಜರಾತ್‌ನಲ್ಲಿ ಬಹಳ ಜನಪ್ರಿಯವಾಗಿತ್ತು. ಈ ಕ್ಯಾಸೆಟ್‌ಗಳು ನರೇಂದ್ರ ಮೋದಿಯವರು ರಾಜ್ಯದ ಕೆಲವು ಭಾಗಗಳಲ್ಲಿ ನೀಡಿದ ಭಾಷಣದ ಭಾಗಗಳನ್ನು ಒಳಗೊಂಡಿತ್ತು.

ಲಾತೂರ್ ಭೂಕಂಪದ ನಂತರ 1994 ರಲ್ಲಿ ಅವರ ಮತ್ತೊಂದು ಭಾಷಣ ಸಾಕಷ್ಟು ಜನಪ್ರಿಯವಾಗಿತ್ತು. ಅಹಮದಾಬಾದ್‌ನ ಆರ್‌ಎಸ್‌ಎಸ್ ಕಾರ್ಯಾಲಯದಿಂದ, ಪರಿಹಾರ ಸಾಮಗ್ರಿ ಮತ್ತು ಕೆಲವು ಸ್ವಯಂಸೇವಕರು ಲಾತೂರಿಗೆ ಹೊರಡಬೇಕಿತ್ತು. ನರೇಂದ್ರ ಮೋದಿ ಆಶು ಭಾಷಣ ಮಾಡಿದರು. ಭಾಷಣದ ನಂತರ, ಕನಿಷ್ಠ ಐವತ್ತು ಜನರು ತಾವು ಈಗಿನಿಂದಲೇ ಲಾತೂರಿಗೆ ಹೊರಡಲು ಬಯಸುತ್ತೇವೆ ಎಂದು ಎದ್ದು ನಿಂತರು. ಮೋದಿ ಆಜ್ಞಯಂತೆ ಹೆಚ್ಚಿನ ಪರಿಹಾರ ಕಾರ್ಯಗಳನ್ನು ಜನರನ್ನು ತಲುಪಿದ್ದವು.

ನರೇಂದ್ರ ಮೋದಿಯವರು ವಿವಿಧ ವಿಭಾಗಗಳೊಂದಿಗೆ ಸಂಪರ್ಕ ಹೊಂದಿದ್ದು, ಸಮಾಜದ ವಿವಿಧ ವಿಭಾಗಗಳನ್ನು ತಲುಪುವ ಅವರ ಸಾಮರ್ಥ್ಯಕ್ಕೂ ಸಂಬಂಧವಿದೆ. 2013-2014ರಲ್ಲಿ ಜಗತ್ತು ಅವರ ‘ಚಾಯ್ ಪೇ ಚರ್ಚಾ’ವನ್ನು ಕಂಡಿತು ಆದರೆ ಬೆಳಗಿನ ವಾಕಿಂಗ್ ಮಾಡುವವರೊಂದಿಗೆ ಸಂವಹನ ನಡೆಸುವ ಮೂಲಕ ನರೇಂದ್ರ ಮೋದಿ ಅವರು ವಿವಿಧ ಜನರೊಂದಿಗೆ ಬಾಟಲಿಯ ಬಾಂಧವ್ಯವನ್ನು ಹೇಗೆ ಮಾಡಿಕೊಂಡರು ಎಂಬುದನ್ನು ನಾನು ಮರೆಯಲು ಸಾಧ್ಯವಿಲ್ಲ. 1990 ರ ಸಮಯದಲ್ಲಿ ನಾನು ಅವರನ್ನು ಅಹಮದಾಬಾದ್‌ನ ಪ್ರಸಿದ್ಧ ಪರಿಮಲ್ ಗಾರ್ಡನ್ ನಲ್ಲಿ ಭೇಟಿಯಾದೆ, ಅಲ್ಲಿ ಅವರು ಬೆಳಗಿನ ವಾಕರ್ಸ್ ಗುಂಪನ್ನು ಉದ್ದೇಶಿಸಿ ಮಾತನಾಡುತ್ತಿದ್ದರು. ನನಗೆ ತಿಳಿದಿರುವ ವೈದ್ಯರೊಬ್ಬರು ನರೇಂದ್ರ ಭಾಯ್ ಅವರೊಂದಿಗಿನ ಅಂತಹುದೇ ಸಂವಹನಗಳು ಪ್ರಚಲಿತ ವಿದ್ಯಮಾನಗಳನ್ನು ಅರ್ಥಮಾಡಿಕೊಳ್ಳಲು ಬಹಳ ಸಹಾಯಕವಾಗಿದೆ ಎಂದು ಹೇಳಿದರು.

ಮಾನವೀಯತವಾದಿ ಮೋದಿ:

ನರೇಂದ್ರ ಮೋದಿಯವರ ಮಾನವೀಯ ಭಾಗವನ್ನು ತೋರಿಸುವ ಎರಡು ಪ್ರಸಂಗಗಳಿವೆ. ಅವುಗಳಲ್ಲಿ ಒಂದು 2000 ರ ದಶಕದ ಆರಂಭದಲ್ಲಿದೆ. ಇತಿಹಾಸಕಾರ ರಿಜ್ವಾನ್ ಕದ್ರಿ ಮತ್ತು ನಾನು ಗುಜರಾತಿ ಸಾಹಿತ್ಯದ ಡೋಯೆನ್ ಮತ್ತು ಸಂಘ ಪರಿಸರ ವ್ಯವಸ್ಥೆಯ ಅನುಭವಿ ಕೆಕೆ ಶಾಸ್ತ್ರಿಯವರ ಕೆಲವು ಕೃತಿಗಳನ್ನು ದಾಖಲಿಸುತ್ತಿದ್ದೆವು. ನಾವು ಆತನನ್ನು ಭೇಟಿಯಾಗಲು ಹೋಗಿದ್ದೆವು ಮತ್ತು ಅವರ ಆರೋಗ್ಯದ ಕೊರತೆಯಿಂದಾಗಿ ಭೇಟಿ ಸಾಧ್ಯವಾಗಲಿಲ್ಲ. ನಾನು ಛಾಯಾಚಿತ್ರ ತೆಗೆದು ನರೇಂದ್ರ ಮೋದಿಯವರ ಕಚೇರಿಗೆ ಕಳುಹಿಸಿದೆ.

ಇನ್ನೊಂದು ಲೇಖಕ ಪ್ರಿಯಕಾಂತ್ ಪರಿಖ್‌ಗೆ ಸಂಬಂಧಿಸಿದೆ. ತನ್ನ 100 ನೇ ಕೆಲಸವನ್ನು ನರೇಂದ್ರ ಮೋದಿಯವರು ಮಾತ್ರ ಪ್ರಾರಂಭಿಸಬೇಕೆಂಬ ಬಲವಾದ ಆಸೆಯನ್ನು ಅವರು ಹೊಂದಿದ್ದರು. ಆದರೆ ಒಂದೇ ಒಂದು ತೊಡಕು- ಅವರು ಒಂದು ದೊಡ್ಡ ಅಪಘಾತದಿಂದಾಗಿ ನಿಶ್ಚಲವಾಗಿ ಮನೆಯಲ್ಲೇ ಇರುವಂತಾಗಿತ್ತು. ಸಿಎಂ ಮೋದಿ ಅವರು ಆಶ್ರಮ ರಸ್ತೆಯಲ್ಲಿರುವ ಪ್ರಿಯಕಾಂತ್ ಪರಿಖ್ ಅವರ ಮನೆಗೆ ಹೋಗಿ ಅವರ ಪುಸ್ತಕವನ್ನು ಬಿಡುಗಡೆ ಮಾಡಿದ ನೆನಪು. ಕುಳಿತಿದ್ದ ಸಿಎಂ ಅನಾರೋಗ್ಯದ ಲೇಖಕರ ಡ್ರಾಯಿಂಗ್ ರೂಮಿಗೆ ಹೋಗಿ ಅವರ ಪುಸ್ತಕವನ್ನು ಬಿಡುಗಡೆ ಮಾಡುತ್ತಾರೆ ಎಂದು ಗುಜರಾತಿ ಸಾಹಿತ್ಯ ವಲಯಗಳು ಮಂತ್ರಮುಗ್ಧವಾಗಿದ್ದವು!

ಪ್ರತಿಯೊಬ್ಬ ರಾಜಕೀಯ ವ್ಯಕ್ತಿಗೂ ಉತ್ತಮವಾಗಿ ಸೇವೆ ಸಲ್ಲಿಸುವ ಎರಡು ಸದ್ಗುಣಗಳೆಂದರೆ - ಅವರ ತೀಕ್ಷ್ಣವಾದ ಆಲಿಸುವ ಕೌಶಲ್ಯ ಮತ್ತು ತಂತ್ರಜ್ಞಾನದ ಮೇಲಿನ ಪ್ರೀತಿ. ತಂತ್ರಜ್ಞಾನದ ಬಗ್ಗೆ ಅವರ ಏಕೈಕ ವಿಷಾದ- ಫೋನ್ ಸಂಖ್ಯೆಗಳನ್ನು ನೆನಪಿಸಿಕೊಳ್ಳುವ ಕಲೆ ನಡೆಯುತ್ತಿದೆ ಎಂದು!

ನರೇಂದ್ರ ಮೋದಿ ಅವರಿಗೆ ಪಕ್ಷದ ಕಾರ್ಯತಂತ್ರವನ್ನು ಸಮನ್ವಯಗೊಳಿಸುವ ಕೆಲಸವನ್ನು ನೀಡಿದಾಗ, ಲೋಕಸಭೆ, ವಿಧಾನಸಭೆ ಅಥವಾ ಸ್ಥಳೀಯ ಸಂಸ್ಥೆಗಳಾಗಿರಲಿ, ಬಿಜೆಪಿ ಒಂದೇ ಒಂದು ಚುನಾವಣೆಯಲ್ಲಿ ಸೋತಿಲ್ಲ. 2000 ನೇ ಇಸವಿಯಲ್ಲಿ ಮಾತ್ರ ಬಿಜೆಪಿ ಚುನಾವಣಾ ಹಿನ್ನಡೆ ಕಂಡಿತು ಮತ್ತು ನರೇಂದ್ರ ಮೋದಿ ರಾಜ್ಯದ ಹೊರಗಿದ್ದರು.
ಪತ್ರಕರ್ತರಾಗಿ, ನಾವು ಹಲವಾರು ಜನರನ್ನು ಭೇಟಿ ಮಾಡಬೇಕು ಪ್ರಯತ್ನಿಸಿದೆವು.

ಪತ್ರಕರ್ತರಾಗಿ, ನಾವು ಹಲವಾರು ಜನರನ್ನು ಭೇಟಿ ಮಾಡಬೇಕು ಆದರೆ ನರೇಂದ್ರ ಮೋದಿ ನಾನು ಯುವ ವರದಿಗಾರನಾಗಿದ್ದಾಗ ನನಗೆ ಹೇಳಿದ್ದು ಇವುಗಳು ವಹಿವಾಟಿನ ಸಂಬಂಧಗಳಾಗಿರಬಾರದು ಆದರೆ ಜೀವಮಾನವಿಡೀ ಇರುವ ಬಾಂಡ್‌ಗಳು ಎಂದು. 1998 ರಲ್ಲಿ ಹೋಳಿಯ ಸುತ್ತಲೂ ನಾನು ದೆಹಲಿಯಲ್ಲಿದ್ದೆ. ನಾನು ಎಂದಿಗೂ ಮರೆಯಲಾರದಂತಹದ್ದನ್ನು ನರೇಂದ್ರ ಮೋದಿ ಹೇಳಿದರು. "ನಿಮ್ಮ ದೂರವಾಣಿ ಡೈರಿಯಲ್ಲಿ ನೀವು 5000 ಸಂಖ್ಯೆಗಳನ್ನು ಹೊಂದಿರಬೇಕು ಮತ್ತು ನೀವು ಅವರನ್ನು ಒಮ್ಮೆಯಾದರೂ ಭೇಟಿಯಾಗಬೇಕು" ಎಂದು ಮೋದಿ ಹೇಳಿದ ಮಾತು ಇನ್ನೂ ನೆನಪಿದೆ.

ನೀವು ಅವರನ್ನು ಸುದ್ದಿ ಮೂಲವಾಗಿ ತಿಳಿಯದೆ ಪರಿಚಯಸ್ಥ ಅಥವಾ ಸ್ನೇಹಿತನಾಗಿ ತಿಳಿದಿರಬೇಕು ಎಂದು ಮೋದಿ ಹೇಳಿದ್ದರು. ನರೇಂದ್ರ ಮೋದಿಯವರು ಕೇಳಿದಂತೆ ನಾನು 5000 ಜನರನ್ನು ಭೇಟಿ ಮಾಡಿಲ್ಲ. ಆದರೆ ಮಾನವ ಸ್ಪರ್ಶದ ಪ್ರಾಮುಖ್ಯತೆಯನ್ನು ನಾನು ತಿಳಿದುಕೊಂಡೆ. ನರೇಂದ್ರ ಮೋದಿಯವರು ಅದನ್ನು ಸಾಕಷ್ಟು ಹೊಂದಿದ್ದಾರೆ, ಅದಕ್ಕಾಗಿಯೇ ಅವರು ಯಶಸ್ವಿಯಾಗಿದ್ದಾರೆ.

 

Author Name: Japan K Pathak

Disclaimer:

This article was first published in News 18

It is part of an endeavour to collect stories which narrate or recount people’s anecdotes/opinion/analysis on Prime Minister Shri Narendra Modi & his impact on lives of people.