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सामान्य रूप से ऐसे कार्यक्रम मुंबई में ही होते हैं, और इसके कारण इस प्रकार के कार्यक्रम को ऑर्गनाइज़ करने का भी मुम्बई का स्वभाव है और ऑडियंस को भी आदत होती है..! लेकिन मैं सुभाष जी का आभारी हूँ कि उन्होंने इस कार्यक्रम के लिए गुजरात को चुना, अहमदाबाद को चुना..! अगर आप एक बार अहमदाबाद में सफल हो गए, तो फिर आपकी गाड़ी कहीं रूकती नहीं है..! हम अहमदाबियों की पहचान है, ‘सिंगल फेयर, डबल जर्नी’..! और ये आपका क्षेत्र ऐसा है जिसमें हर कोई अपने इन्वेस्टमेंट का कुछ ना कुछ रिवॉर्ड चाहता है और इसलिए रूपये की कीमत क्या होती है, रुपये का माहात्म्य क्या होता है, वो शायद अहमदाबादी से अधिक कोई नहीं जानता है..! और हमारे अहमदाबादियों के लिए इस प्रकार के काफी चुटकुले भी बने हुए हैं..! और उस शहर में फाइनेंशियल वर्ल्ड के लोगों का इस प्रकार से एकत्र आना और इस समारोह को यहाँ संपन्न करना, इसके लिए मैं फिर एक बार ज़ी ग्रुप के सभी मित्रों का धन्यवाद करता हूँ और आभार व्यक्त करता हूँ..!

आप लोग इस विषय के काफी जानकार भी हैं और चिंतित भी हैं। अगर फाइनेंशियल मार्केट बहुत तेजी में होता, तो शायद आज के समारोह में तालियाँ भी ज्यादा बजती। लेकिन मैं देख रहा हूँ मुश्किल से तालियाँ बज रहीं हैं और उसका मूल कारण मार्केट की स्थिति है। अगर मार्केट की स्थिति अच्छी होती, तो शायद आप भी बड़े उमंग से भरे हुए होते, लेकिन मार्केट की स्थिति अच्छी नहीं है इसके लिए आप सुबह-शाम एनालिसिस करते होंगे। आप सोचते भी होंगे कि यार, कुछ भी हो, इस स्थिति से बाहर निकलें..! ये आपके सबके मन में चलता होगा। ये बात सही है कि देश की आर्थिक स्थिति बहुत ही चिंताजनक है। किसी भी देश के जीवन में उतार-चढाव तो आते हैं। कभी अच्छी स्थिति भी आती है, तो कभी बुरे दिन भी आते हैं। कभी हम टॉप पर भी होते हैं, तो कभी लो पर भी पहुंच जाते हैं..! लेकिन नीति निर्धारक जब आत्मविश्वास खो चुके होते हैं, इफ दे लूज़ देयर कॉन्फिडेंस, तो वो निर्णय नहीं कर सकते। उन्होंने निर्णय करने का सामर्थ्य खो दिया है। कभी-कभी देश में चर्चा होती है कि चुनाव बहुत जल्दी आ जाएंगे, समय पर चुनाव नहीं होंगे..! तो मुझ से कुछ लोगों ने बात की थी। मैंने कहा देखिए भाई, चुनाव जल्दी भी अगर लाने हैं तो सरकार को निर्णय करना पड़ता है। जो नौ साल में कोई निर्णय नहीं कर पाए, वो ये निर्णय कैसे कर सकेंगे..? तो आप मान कर चलिए कि मजबूरन स्थितियाँ जहाँ चाहेगी, वहाँ जाएगी। कोई ले जाने वाला नहीं है, कोई दिशा तय करने वाला नहीं है, कोई निर्णय करने वाला नहीं है..! और सवा सौ करोड़ का देश इस स्थिति में जब होता है, तब हर प्रकार के संकट अपने आप बढ़ते चले जाते हैं..!

अब आज देखिए आप, रूपये की कीमत जिस तेजी से गिर रही है..! और कभी-कभी तो लगता है कि दिल्ली सरकार और रुपये के बीच कम्पीटीशन चल रहा है। किसकी आबरू तेजी से गिरती चली जा रही है, कौन आगे जाएगा... इसकी कम्पीटीशन चल रही है..! देश जब आजाद हुआ तब एक डॉलर एक रूपये के बराबर था। एक रूपये में एक डॉलर बिकता था..! जब अटल जी की सरकार थी, अटल जी ने जब पहली बार सरकार बनाई तब तक मामला पहुंच गया था 42 रूपीज तक और अटल जी ने जब छोड़ा तब 44 पर पहुंचा था। चार प्रतिशत का फर्क आया था..! लेकिन इस सरकार के और अर्थशास्त्री प्रधानमंत्री के कालखंड में ये 60 रूपये पर पहुंच गया है..! मित्रों, अगर थोड़ा इतिहास की ओर नजर करें, और आप तो इस आर्थिक जगत की दुनिया से जुड़े हुए लोग हैं..! हिन्दुस्तान 1200 साल की गुलामी के बाद 15 अगस्त, 1947 को जब आजाद हुआ, तो उस समय उसके पास ब्रिटिश गवर्नमेंट से वन थाउसेंड मिलियन पाउंड लेना उधार था। यानि हम लेनदार थे, ब्रिटिश गवर्नमेंट कर्जदार थी..! सैकेंड वर्ल्ड वॉर में भारत से जो कुछ भी गया था, वो कर्ज ब्रिटिशर को हिन्दुस्तान को चुकाना था। यानि 1200 साल की गुलामी के बाद भी आजादी का प्रारंभ आर्थिक संकट से नहीं हुआ, आर्थिक संपन्नता के साथ हुआ था..! इतना ही नहीं, विदेशों से कर्ज लेने का प्रारंभ पंडित नेहरू ने किया। आजादी के कुछ ही समय में फर्स्ट फाइव इयर प्लान आया, तो विदेशों से कर्ज लेना शुरू किया। और तब वर्ल्ड बैंक का स्वतंत्र स्वरूप नहीं था, अमेरिका की गवर्नमेंट की इच्छा से चलता था। और उस समय पंडित नेहरू के जमाने में पहली बार कर्ज लिया गया। आज जरूरत है उस बात को समझने की, कि जब वो पहली बार कर्ज लिया गया, तो उसमें दो शर्त थी। आज डॉलर साठ रूपये पर क्यों बिकता है उसका जवाब वहाँ मिलता है। दो शर्त थी..! एक शर्त ये थी कि वो जो अमेरिका ने पैसे दिए हैं, उन पैसों का उपयोग हिन्दुस्तान के रिसर्च स्कॉलर को अमेरिका में पढ़ने भेजने के लिए स्कॉलरशिप के रूप में खर्च होंगे। देखिए, कितना बुद्घिमानी का काम अमेरिका ने किया..! अमेरिका जिसको चुने वो स्कॉलर, और वो स्कॉलर पढ़ेगे कहाँ..? अमेरिका में..! पैसे कौन से..? जो पैसे अमेरिका ने कर्ज में दिए, वो पैसे..! मतलब आजाद हिन्दुस्तान की पहली स्कॉलर पीढ़ी जो तैयार हो, वो अमेरिका की छाया वाली तैयार हो, ताकि वो गीत अमेरिका के गाएं, इस प्रकार का पहला प्रयास हुआ..! और दूसरा निर्णय किया था कि ये रूपये तब देंगे कि जब आप रूपये की कीमत कम करोगे..! और उस लोन लेने के कारण पंडित नेहरू के समय में पहली बार रूपये की ताकत कम हुई और वो सिलसिला चलता रहा..! मित्रों, कोई भी देश गलत नीतियों के कारण कहाँ जा कर के गिरता है, उसका हम अंदाज कर सकते हैं..!

मैं आज भी मानता हूँ कि भारत जैसा देश, सारी दुनिया की नजर हिन्दुस्तान पे अगर एक बाजार के तौर पर हो और ये देश अगर एक बाजार बन कर के रह जाए, तो ये देश कभी भी अर्थिक संपन्नता प्राप्त नहीं कर सकता..! पूरा विश्व अपना माल हिन्दुस्तान के अंदर जितनी बड़ी मात्रा में डम्प कर सकता है, करना चाहता है..! इतना बड़ा कंज्यूमर मार्केट अवेलेबल है, मित्रों..! अगर से सिलसिला चलता ही रहा और देश का इम्पोर्ट बढ़ता ही गया तो पता नहीं देश की आर्थिक स्थिति कहाँ जा कर के रूकेगी..! मित्रों, आज तेजी से इम्पोर्ट बढ़ रहा है और एक्सपोर्ट में हम पहले से भी नीचे आ गए हैं, यानि स्टेबल भी नहीं रहे, हम जहाँ थे उससे भी नीचे आ गए, और उसके कारण हमारी करेंट अकाउंट डेफिसिट बढ़ती चली गई, जिसने पूरी आर्थिक स्थिति पर एक नया बोझ डाल दिया है..!

एफ.डी.आई. और एफ.आई.आई. दोनों के तराजू पर हम संतुलन नहीं कर पा रहे हैं और उसका मूल कारण है हमारी नीतियाँ..! लोग कहते हैं एफ.डी.आई. नहीं आया, फॉरेन डायरेक्ट इनवेस्टमेंट नहीं आया... क्यों नहीं आया? कोई भी व्यक्ति हिन्दुस्तान के अंदर धन तब लगाता है जब उसको अपनी पूंजी की सिक्योरिटी महसूस हो। उसको लगे कि हाँ, ये मैं इतना लगा रहा हूँ तो मुझे प्रॉफिट मिलेगा, मुझे गुड गवर्नेंस की अनुभूति हुई है तो मुझे एफिशियेंट गवर्नेंस मिलेगा, मुझे सिंगल विंडो क्लिीयरेंस मिलेगा, तो वो हिम्मत करेगा..! लेकिन अगर पॉलिसी पैरालिसिस है तो उसकी कितनी ही आवश्कयकता होगी, लेकिन वो हिन्दुस्तान की तरफ मुंह नहीं फेरेगा। अगर हमारे यहाँ फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट नहीं आता है और अगर हम मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में दुर्बल होते चले जाते हैं, तब जा कर के हम इम्पोर्ट करते हैं, एक्सपोर्ट करने के दरवाजे बंद होते चले जाते हैं और आर्थिक स्थिति और लुढकती चली जाती है..!

मित्रों, आप स्टॉक मार्केट की दुनिया से जुड़े हुए लोग हैं। सरकार अगर तीन चीजों को बैंलेस रूप से आगे ना बढ़ाए, तो मैं मानता हूँ कि किसी भी इन्वेस्टर का विश्वास कभी भी नहीं रहेगा..! अब आप देखिए कि आज हमारा ट्रांजेक्शन कितना होता है..? मैं समझता हूँ, मुझे जो बताया गया है कि वो 15 और 20 परसेंट के बीच में आ गया है। और उसमें भी फ्यूचरिस्टिक वाली संख्या ज्यादा है, रियल ट्रांजेक्शन की संख्या कम होती चली जा रही है..! रियल ट्रांजेक्शन इसलिए नहीं हो रहा है कि उसका कॉन्फिडेंस लेवल टूट चुका है। अगर ये स्थिति बनती है तो आप कल्पना कर सकते हैं कि हम कहाँ जा कर के खड़े रहेंगे..! और इसलिए स्टॉक मार्केट में भी एक रिटेल का क्षेत्र है, दूसरा इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टमेंट है और तीसरा एफ.आई.आई. का है, इन तीनों को इक्वल बैलेंस होना चाहिए। आज मित्रों, अगर एफ.आई.आई. का शेयर बढ़ गया और जस्ट बिकॉज दुनिया का कोई देश अपना इन्टरेस्ट रेट बढ़ा दें और अचानक एफ.आई.आई. की बहुत बड़ी अमाउंट चली जाए तो पूरा स्टॉक मार्केट नीचे गिर जाएगा और उसके कारण सामान्य मानवी को कोई भरोसा नहीं रहेगा..!

मित्रों, आज चिदम्बरम जी ये कहते हैं कि लोग सोना ना खरीदें..! लेकिन लोग सोना खरीदने के लिए मजबूर क्यों हुए..? मुझे मालूम है, हमारे यहाँ गुजरात में स्टॉक मार्केट में इन्वेस्ट करना, यानि एक पीओन होगा वो भी सुबह-शाम देखता है कि स्टॉक मार्केट का क्या हाल है..! हमारे यहाँ एक अखबार तो सिर्फ स्टॉक मार्केट के रेट के ऊपर ही चलता है, पूरा का पूरा अखबार... और लोग उसी को खरीदते हैं क्योंकि उनको उसी में इन्टरेस्ट होता है..! लेकिन आज उसका इन्टरेस्ट नहीं रहा, क्योंकि उसको भरोसा नहीं है कि उसको जो कुछ भी इनवेस्ट करना है, उसको वो वापस मिलेगा या नहीं मिलेगा..! तो फिर उसके बाद दो रास्ते बच जाते हैं, रियल एस्टेट में डालो या फिर गोल्ड में डालो। रियल एस्टेट में डालने के लिए मिडिल क्लास, लोअर मिडिल के पास उतनी अमाउंट नहीं होती, इसलिए उसमें डाल नहीं पाता है। तो क्या करेगा..? चलिए भाई, 10 ग्राम, 20 ग्राम, 50 ग्राम, 100 ग्राम गोल्ड ले लो, पैसा बढ़ जाएगा..! अकेले 2012 के वर्ष में 1 लाख करोड रूपयों का गोल्ड इस देश में इम्पोर्ट हुआ है, एक साल में..! और बताया जाता है कि आज हिन्दुस्तान में 18 लाख करोड़ रूपयों का गोल्ड पड़ा हुआ है। नॉन प्रॉडक्टिव ऐसेट है..! मित्रों, अगर ये स्थिति रही तो हमारी सारी आर्थिक व्यवस्था कैसे चलेगी..? और ये क्यों हो रहा है, क्योंकि व्यक्ति को एक ही जगह पर सिक्योरिटी लगती है कि यार, लेकर के रखो, ज्यादा पैसे मिले या ना मिले, लेकिन पैसे तो बच जाएंगे..! या तो उसको लगता है कि रियल एस्टेट..! मित्रों, रियल एस्टेट में भी जाने का कारण क्यों बना है..? हमारी इकॉनोमी पर ब्लेक मनी की इकॉनोमी डॉमिनेट करने लग गई है। और जब ब्लैक मनी की इकोनॉमी डॉमिनेट करती हो, पैरलल इकॉनोमी चलती हो, तो स्वाभाविक है कि लोगों को रियल एस्टेट में जाने का रास्ता ठीक लगता है। और जैन्यूइन आदमी अगर रीयल एस्टेट में जाना चाहता है, तो वो एंटर नहीं कर पा रहा है क्योंकि ब्लैक मनी नहीं है..! एक ऐसे विश्यस सर्कल को देश में चलाया गया है, जिसके कारण देश का पूरा अर्थतंत्र आज स्थितियों को बिगाड़ते चला जा रहा है..!

एशिया की एक विशेषता रही है, सदियों से कि एशियन कंट्रीज का कल्चरली एक-दूसरे पर काफी प्रभाव रहा है। सेविंग ये वैस्टर्न वर्ल्ड के नेचर में नहीं है, सेविंग ये एशियन कल्चर में है, और भारत उसमें लीड करता रहा है। हमारे यहाँ बचत करना, पैसे बचाना और उसमें महिलाओं का बहुत बड़ा रोल रहता है। गरीब से गरीब महिला होगी, गरीब परिवार की होगी, लेकिन कुछ ना कुछ बचाने की कोशिश करेगी। मित्रों, ये सेविंग का जो स्वभाव है, तो वो पहले स्टॉक मार्केट के अंदर इन्वेस्ट करता था, और उसके कारण हमारी इकॉनोमी को बहुत बड़ा पुश मिलता था, ड्राइविंग फॉर्स बन जाता था। मिडिल क्लास, लोअर मिडिल क्लास जिसके पास सोना खरीदने की ताकत नहीं है, फ्लेट खरीदने की ताकत नहीं है, जमीन में पैसा नहीं लगा सकता है, वो पाँच-दस रूपये वाले दस-बीस शेयर लेने की केाशिश करता था, क्योंकि उसके पास उतने ही पैसे थे..! लेकिन मंहगाई के कारण मीडिल क्लास, लोअर मीडिल क्लास के लिए अपना घर चलाने में दिक्कत हो गई है, सेविंग खत्म हो चुका है और सेविंग खत्म होने के कारण स्टॉक मार्केट में उसकी एंट्री बंद हो गई है। अगर ये स्थिति बनी रही, तो हमारी पूरी फाइनेंशियल स्थिति और दुदर्शा की ओर चली जाएगी..!

आप देखिए, इम्पोर्ट..! ये तो हम समझ सकते हैं कि नेचुरल रिसोर्सिस में हमारी कुछ सीमाएं होंगी..! पेट्रोलियम, गैस और डीजल के इम्पोर्ट के लिए आज हमारे पास कोई रास्ता नहीं होगा, मजबूरन ही सही, लेकिन हमको लेना पड़ेगा..! लेकिन क्या कारण है कि इलेक्ट्रोनिक गुड्स, मोबाइल फोन, वगैरह में हमारा अरबों-खरबों रुपयों का इम्पोर्ट बढ़ता चला जा रहा है..! क्या हमारा देश मोबाइल फोन मैन्यूफैक्चरिंग में एक बहुत बड़ा जंप नहीं लगा सकता है..? हम हमारे इम्पोर्ट को कम करने का रास्ता नहीं खोज सकते हैं..? हमें मालूम है कि हिन्दुस्तान में इलेक्ट्रोनिक गुड्स का एक बहुत बड़ा मार्केट है। और इलेक्ट्रोनिक गुड्स के मैन्यूफैक्चरिंग के लिए कोई आसमान से बहुत बड़ा स्काय रॉकेट इंजीनियरिंग लाने की जरूरत नहीं है, वो बहुत सामान्य प्रकार की टैक्नोलॉजी है। लेकिन हमने उस पर बल नहीं दिया और उसके कारण आज हिन्दुस्तान में सबसे ज्यादा इम्पोर्ट करने वाले जो तीन सेक्टर हैं, उसमें से एक क्षेत्र है इलैक्ट्रोनिक गुड्स..! हाँ, यदि कोई मेडिकल इक्विपमेंट के लिए कोई बहुत बड़ी एक्स्ट्राऑर्डिनरी चीज आती है तो वन कैन अंडरस्टेंड, लेकिन रूटीन में हमारे यहाँ अपना कम्प्यूटर नहीं बन पा रहा है, हम यहाँ लाकर के एसेंबल करते हैं..! हम अगर हमारे देश में योजनाबद्घ तरीके से करें कि भाई, दस साल के अंदर इस सैक्टर के अंदर इम्पोर्ट करने की स्थिति से हम बाहर आ जाएंगे..! हम क्वालिटी मैटीरियल प्रोवाइड करेंगे, सफिशियेंट मटेरियल प्रोवाइड करेंगे, तो देश की स्थितियाँ नहीं बदलेगी..? लेकिन हमारी नीतियों की कमी के कारण ये हाल हुआ है। हमारा मैन्यूफैक्चरिंग कॉस्ट इफेक्टिव नहीं हो रहा है। क्यों नहीं हो रहा है..? अगर हमें दुनिया के सामने टिकना है, तो उत्पादन के क्षेत्र में हमारे लोगों को जरूरत है कि वो कॉस्ट इफैक्टिव हो..! तो उसके लिए क्या चाहिए..? आज देखिए, हिन्दुस्तान में बीस हजार मैगावाट से ज्यादा के बिजली के कारखाने बंद पड़े हैं। कोई देश ऐसा देखा है आपने कि जिसके पास कोयले के खदान हैं, जो अंधेरे में जी रहा है, लोगों को बिजली चाहिए, बिजली के ग्राहक मौजूद हैं और जिसके पास बीस हजार मैगावाट से अधिक बिजली पैदा करने वाले कारखाने तैयार हो..! जस्ट, लीडरशिप नहीं है, पॉलिसी पैरालिसिस है और इसलिए कोयले के निर्णय हो नहीं रहे हैं, खदान में से कोयला निकल नहीं रहा है, कोयला बिजली के कारखाने तक पहुंच नहीं रहा है और देश अंधेरे में डूब रहा है। मैन्यूफैक्चरिंग सैक्टर को सफिशियेंट बिजली मिल नहीं रही है, फार्मर को सफिशियेंट बिजली नहीं मिल रही है और उसके कारण हमारा ग्रोथ कम हो रहा है, हमारे विकास की यात्रा कम हो रही है..!

मित्रों, छोटी-छोटी चीजें है, कोई बहुत बड़ी चीजों की कोई जरूरत नहीं है, सामान्य चीजें... अगर इन पर भी हमने बल दिया होता, तो मैं नहीं मानता हूँ कि देश आज इतने बड़े आर्थिक संकट से गुजर रहा होता..! और ऐसा नहीं है कि इसके रास्ते नहीं हैं। अटल जी के समय की एन.डी.ए. सरकार के कार्यकाल की अगर हम विगत देखे लें, तो सीना तान कर के कोई भी कह सकता है। मित्रों, उन दिनों तो भारत ने न्यूक्लीयर टैस्ट किया था। पूरे विश्व ने सैंक्शन्स लगा दिये थे, देश आर्थिक संकट में फंसा हुआ था..! ऐसे विकट काल में भी अटल जी के नेतृत्व में हिंदुस्तान में एन.डी.ए. की सरकार, वो भी 24 पार्टियां एक साथ सरकार चलाती थी, एक पार्टी की सरकार नहीं थी, उसके बाद भी ना मंहगाई बढ़ने दी थी, ना इम्पोर्ट बढ़ने दिया था, एक्सपॉर्ट में कटौती आने नहीं दी थी..! जब अटल जी की सरकार बनी तब हमारा सेविंग का रेशो 32% से ज्यादा था और आज वो 30% से भी कम हो गया है..! कोई भी पैरामीटर ले लीजिए। भारत की इकॉनोमी में 21वीं सदी की विकास यात्रा के सपनों की मजबूत नींव अटल जी ने अपने शासन काल में रखी थी। लेकिन देखते ही देखते पिछले नौ साल में जो रखा था वो भी खत्म हो गया और नया कुछ अर्जित नहीं हुआ, ऊपर से नए बोझ और नए संकट हमारे देश पर आते गए और उसी के कारण आज हम संकट से गुजर रहे हैं..! आपका तो पूरा मार्केट, पहले जो इन्वेस्टर था वो सुबह जब स्टॉक मार्केट खुलता था तो उसकी सांस ऊपर-नीचे होती थी। शेयर बाजार में जिसने बेचारे ने हजार-दो हजार रूपये लगाए होते थे, तो वो सोचता था कि यार आज कुछ मिला या नहीं मिला..! आज सांस आपकी ऊपर नींचे हो रही है। ये पहली बार हो रहा है..! और इसलिए इस चिंता की अवस्था में देश एक आत्मविश्वास के साथ कैसे आगे बढ़े, पॉलिसी पैरालिसिस में से देश बाहर कैसे आए..!

प्रधानमंत्री ने कहा था, पैसे पेड़ पर नहीं उगते हैं..! प्रधानमंत्री जी, आपके अर्थशास्त्र में पैसे पेड़ पर उगते हों या ना उगते हों, हम गुजरातियों की समझ है और हम मानते हैं कि पैसे खेते में भी उगते हैं, पैसे कारखाने में भी उगते हैं, पैसे मजदूर के पसीने से भी उग सकते हैं, आवश्कता है सही नेतृत्व देकर के नीतियों को बनाने की..! हिन्दुस्तान का किसान खेत में काम करता है तो वो पैसे उगाता है, एक मजदूर फैक्ट्री में मेहनत करता है तो वो पैसे उगाता है और तभी तो देश की तिजोरी भरती है और तभी तो देश चलता है..! ये जो निराशा का माहौल है उससे देश को बाहर लाया जा सकता है। मित्रों, गुजरात एक्सपीरियंस से मैं कहता हूँ कि निराशा की गर्त में डूबे रहने का कोई कारण नहीं है। जब मैं पहली बार मुख्यमंत्री के रूप में आया, तब मेरे यहाँ रेवेन्यू डेफिसिट सिक्स थाउजेंड सेवन हन्डरेड करोड़ रूपीज़ थी, आज हम रेवेन्यू सरप्लस है..! मित्रों, हो सकता है..! हमारी इलेक्ट्रिसिटी कंपनीज वार्षिक 2500 करोड़ रूपये का लॉस करती थी। आज मित्रों, वो प्राफिट करती है और हम 24 घंटे बिजली देते हैं और टेरिफ नहीं बढ़ाते हैं..! कहने का तात्पर्य ये है मित्रों, अगर सही दिशा में निर्णय किए जाए, देश के सामान्य मानवी की शक्ति पर भरोसा करके निर्णय किया जाए तो देश की स्थिति बहुत बदल सकती है। और मैं बहुत आशावादी इंसान हूँ..! इतना बड़ा देश, दुनिया के सामने सीना तान के खड़ा होने का सामर्थ्य है इस देश में, बारह सौ साल की गुलामी के बाद भी जो देश सरप्लस था वो देश आज कर्जदार क्यों बन गया, इसके जवाब हम खोज सकते हैं, इसके उपाय भी खोज सकते हैं, उस विश्वास को लेकर आगे बढ़ें..!

मैं फिर एक बार सुभाष जी का बहुत आभारी हूँ कि आपके बीच आने का मुझे अवसर मिला। बहुत-बहुत धन्यवाद..!

 

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Corona period has proved importance of skill, re-skill and up-skill: PM Modi
June 18, 2021
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One lakh youth will be trained under the initiative in 2-3 months: PM
6 customized courses launched from 111 centres in 26 states
Virus is present and possibility of mutation is there, we need to stay prepared: PM
Corona period has proved importance of skill, re-skill and up-skill: PM
The pandemic has tested the strength of every country, institution, society, family and person of the world: PM
People below 45 years of age will get the same treatment for vaccination as for people above 45 years of age from June 21st: PM
PM Lauds ASHA workers, ANM, Anganwadi and health workers deployed in the dispensaries in the villages

नमस्कार, केंद्रीय मंत्रिमंडल के मेरे सहयोगी श्रीमान महेंद्र नाथ पांडे जी, आर के सिंह जी, अन्य सभी वरिष्ठ मंत्रीगण, इस कार्यक्रम में जुड़े सभी युवा साथी, प्रोफेशनल्स, अन्य महानुभाव और भाइयों और बहनों,

कोरोना के खिलाफ महायुद्ध में आज एक महत्वपूर्ण अभियान का अगला चरण प्रारंभ हो रहा है। कोरोना की पहली वेव के दौरान देश में हजारों प्रोफेशनल्स, स्किल डवलपमेंट अभियान से जुड़े। इस प्रयास ने देश को कोरोना से मुकाबला करने की बड़ी ताकत दी। अब कोरोना की दूसरी वेव के बाद जो अनुभव मिले हैं, वो अनुभव आज के इस कार्यक्रम का प्रमुख आधार बने हैं। कोरोना की दूसरी वेव में हम लोगों ने देखा कि कोरोना वायरस का बदलना और बार-बार बदलता स्वरूप किस तरह की चुनौतियां हमारे सामने ला सकता है। ये वायरस हमारे बीच अभी भी है और जब तक ये है, इसके म्यूटेट होने की संभावना भी बनी हुई है। इसलिए हर इलाज, हर सावधानी के साथ-साथ आने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए हमें देश की तैयारियों को और ज्यादा बढ़ाना होगा। इसी लक्ष्य के साथ आज देश में 1 लाख फ्रंटलाइन कोरोना वॉरियर्स तैयार करने का महाअभियान शुरु हो रहा है।

साथियों,

इस महामारी ने दुनिया के हर देश, हर संस्था, हर समाज, हर परिवार, हर इंसान के सामर्थ्य को, उनकी सीमाओं को बार-बार परखा है। वहीं, इस महामारी ने साइंस, सरकार, समाज, संस्था और व्यक्ति के रूप में भी हमें अपनी क्षमताओं का विस्तार करने के लिए सतर्क भी किया है। पीपीई किट्स और टेस्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर से लेकर कोविड केयर और ट्रीटमेंट से जुड़े मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर का जो बड़ा नेटवर्क आज भारत में बना है, वो काम अब भी चल रहा है और वो इसी का परिणाम है। आज देश के दूर-सुदूर में अस्पतालों तक भी वेंटिलेटर्स, ऑक्सीजन कंसंट्रेटर्स पहुंचाने का भी तेज गति से प्रयास किया जा रहा है। डेढ़ हजार से ज्यादा ऑक्सीजन प्लांट्स बनाने का काम युद्ध स्तर पर जारी है और हिन्दुस्तान के हर जिले में पहुंचने का एक भगीरथ प्रयास है। इन प्रयासों के बीच एक स्किल्ड मैनपावर का बड़ा पूल होना, उस पूल में नए लोग जुड़ते रहना, ये भी उतना ही जरूरी है। इसी को देखते हुए, कोरोना से लड़ रही वर्तमान फोर्स को सपोर्ट करने के लिए, देश में करीब 1 लाख युवाओं को ट्रेन करने का लक्ष्य रखा गया है। ये कोर्स दो-तीन महीने में ही पूरा हो जाएगा, इसलिए ये लोग तुरंत काम के लिए उपलब्ध भी हो जाएंगे और एक ट्रेन्ड सहायक के रूप में वर्तमान व्यवस्था को काफी कुछ सहायकता देंगे, उनका बोझ हल्का करेंगे। देश के हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों की मांग के आधार पर, देश के टॉप एक्सपर्ट्स ने क्रैश कोर्स डिजायन किया है। आज 6 नए कस्टमाइज़्ड कोर्स लॉन्च किए जा रहे हैं। नर्सिंग से जुड़ा सामान्य काम हो, होम केयर हो, क्रिटिकल केयर में मदद हो, सैंपल कलेक्शन हो, मेडिकल टेक्निशियन हों, नए-नए उपकरणों की ट्रेनिंग हो, इसके लिए युवाओं को तैयार किया जा रहा है। इसमें नए युवाओं की स्किलिंग भी होगी और जो पहले से इस प्रकार के काम में ट्रेन्ड हो चुके हैं, उनकी अप-स्किलिंग भी होगी। इस अभियान से, कोविड से लड़ रही हमारी हेल्थ सेक्टर की फ्रंटलाइन फोर्स को नई ऊर्जा भी मिलेगी और हमारे युवाओं रोजगार के नए अवसर के लिए उनके लिए सुविधा भी बनेगी।

साथियों,

Skill, Re-skill और Up-Skill, ये मंत्र कितना महत्वपूर्ण है, ये कोरोना काल ने फिर सिद्ध किया है। हेल्थ सेक्टर के लोग Skilled तो थे ही, उन्होंने कोरोना से निपटने के लिए बहुत कुछ नया सीखा भी। यानि एक तरह से उन्होंने खुद को Re-skill किया। इसके साथ ही, उनमें जो स्किल पहले से थी, उसका भी उन्होंने विस्तार किया। बदलती परिस्थितियों के अनुसार अपनी स्किल को अपग्रेड या वैल्यू एडिशन करना, ये Up-Skilling है, और समय की यही मांग है और जिस गति से टेक्नोलॉजी जीवन के हर क्षेत्र में प्रवेश कर रही है तब लगातार dynamic व्यवस्था Up-Skilling की अनिवार्य हो गई है। Skill, Re-skill और Up-Skill, के इसी महत्व को समझते हुए ही देश में Skill India Mission शुरु किया गया था। पहली बार अलग से कौशल विकास मंत्रालय बनाना हो, देशभर में प्रधानमंत्री कौशल विकास केंद्र खोलना हो, ITI's की संख्या बढ़ाना हो, उनमें लाखों नई सीट्स जोड़ना हो, इस पर लगातार काम किया गया है। आज स्किल इंडिया मिशन हर साल लाखों युवाओं को आज की जरूरत के हिसाब से ट्रेनिंग देने में बहुत बड़ी मदद कर रहा है। इस बात की देश में बहुत चर्चा नहीं हो पाई, कि स्किल डवलपमेंट के इस अभियान ने, कोरोना के इस समय में देश को कितनी बड़ी ताकत दी। बीते साल जब से कोरोना की चुनौती हमारे सामने आई है, तब से ही कौशल विकास मंत्रालय ने देशभर के लाखों हेल्थ वर्कर्स को ट्रेन करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। Demand Driven Skill Sets तैयार करने की जिस भावना के साथ इस मंत्रालय को बनाया गया था, उस पर आज और तेजी से काम हो रहा है।

साथियों,

हमारी जनसंख्या को देखते हुए, हेल्थ सेक्टर में डॉक्टर, नर्स और पैरामेडिक्स से जुड़ी जो विशेष सेवाएं हैं, उनका विस्तार करते रहना उतना ही आवश्यक है। इसे लेकर भी पिछले कुछ वर्षों में एक फोकस्ड अप्रोच के साथ काम किया गया है। बीते 7 साल में नए AIIMS, नए मेडिकल कॉलेज और नए नर्सिंग कॉलेज के निर्माण पर बहुत ज्यादा बल दिया गया। इनमें से अधिकांश ने काम करना शुरू भी कर दिया है। इसी तरह, मेडिकल एजुकेशन और इससे जुड़े संस्थानों में रिफॉर्म्स को प्रोत्साहित किया जा रहा है। आज जिस गति से, जिस गंभीरता से हेल्थ प्रोफेशनल्स तैयार करने पर काम चल रहा है, वो अभूतपूर्व है।

साथियों,

आज के इस कार्यक्रम में, मैं हमारे हेल्थ सेक्टर के एक बहुत मजबूत स्तंभ की चर्चा भी जरूर करना चाहता हूं। अक्सर, हमारे इन साथियों की चर्चा छूट जाती है। ये साथी हैं- हमारे आशा-एनम-आंगनवाड़ी और गांव-गांव में डिस्पेंसरियों में तैनात हमारे स्वास्थ्य कर्मी। हमारे ये साथी संक्रमण को रोकने से लेकर दुनिया के सबसे बड़े टीकाकरण अभियान तक में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। मौसम की स्थितियां, भौगौलिक परिस्थिति कितनी भी विपरीत हों, ये साथी एक-एक देशवासी की सुरक्षा के लिए दिन-रात जुटे हुए हैं। गांवों में संक्रमण के फैलाव को रोकने में, दूर-सुदूर के क्षेत्रों में, पहाड़ी और जनजातीय क्षेत्रों में टीकाकरण अभियान को सफलता पूर्वक चलाने में हमारे इन साथियों ने बहुत बड़ी भूमिका अदा की है। 21 जून से जो देश में टीकाकरण अभियान का विस्तार हो रहा है, उसे भी हमारे ये सारे साथी बहुत ताकत दे रहे हैं, बहुत ऊर्जा दे रहे हैं। मैं आज सार्वजनिक रूप से इनकी भूरि-भूरि प्रशंसा करता हूं, इन हमारी सभी साथियों की सराहना करता हूं।

साथियों,

21 जून से जो टीकाकरण अभियान शुरू हो रहा है, उससे जुड़ी अनेक गाइडलाइंस जारी की गई हैं। अब 18 साल से ऊपर के साथियों को वही सुविधा मिलेगी, जो अभी तक 45 साल से ऊपर के हमारे महानुभावों को मिल रही थी। केंद्र सरकार, हर देशवासी को टीका लगाने के लिए, 'मुफ्त' टीका लगाने के लिए, प्रतिबद्ध है। हमें कोरोना प्रोटोकॉल का भी पूरा ध्यान रखना है। मास्क और दो गज़ की दूरी, ये बहुत ज़रूरी है। आखिर में, मैं ये क्रैश कोर्स करने वाले सभी युवाओं को बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं। मुझे विश्वास है, आपकी नई स्किल्स, देशवासियों का जीवन बचाने में लगातार काम आएगी और आपको भी अपने जीवन का एक नया प्रवेश एक बहुत ही संतोष देगा क्योंकि आप जब पहली बार रोजगार के लिए जीवन की शुरूआत कर रहे थे तब आप मानव जीवन की रक्षा में अपने आप को जोड़ रहे थे। लोगों की जिन्दगी बचाने के लिए जुड़ रहे थे। पिछले डेढ़ साल से रात-दिन काम कर रहे हमारे डॉक्टर, हमारी नर्सिस इतना बोझ उन्होंने झेला है, आपके आने से उनको मदद मिलने वाली है। उनको एक नई ताकत मिलने वाली है। इसलिए ये कोर्स अपने आप में आपकी जिन्दगी में एक नया अवसर लेकर के आ रहा है। मानवता की सेवा का लोक कल्याण का एक विशेष अवसर आपको उपलब्ध हो रहा है। इस पवित्र कार्य के लिए, मानव सेवा के कार्य के लिए ईश्वर आपको बहुत शक्ति दे। आप जल्द से जल्द इस कोर्स की हर बारीकी को सीखें। आपने आप को उत्तम व्यक्ति बनाने का प्रयास करें। आपके पास वो स्किल हो जो हर किसी की जिन्दगी बचाने के काम आए। इसके लिए मेरी तरफ से आपको बहुत-बहुत शुभकामनाएं हैं।

बहुत-बहुत धन्यवाद !