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सामान्य रूप से ऐसे कार्यक्रम मुंबई में ही होते हैं, और इसके कारण इस प्रकार के कार्यक्रम को ऑर्गनाइज़ करने का भी मुम्बई का स्वभाव है और ऑडियंस को भी आदत होती है..! लेकिन मैं सुभाष जी का आभारी हूँ कि उन्होंने इस कार्यक्रम के लिए गुजरात को चुना, अहमदाबाद को चुना..! अगर आप एक बार अहमदाबाद में सफल हो गए, तो फिर आपकी गाड़ी कहीं रूकती नहीं है..! हम अहमदाबियों की पहचान है, ‘सिंगल फेयर, डबल जर्नी’..! और ये आपका क्षेत्र ऐसा है जिसमें हर कोई अपने इन्वेस्टमेंट का कुछ ना कुछ रिवॉर्ड चाहता है और इसलिए रूपये की कीमत क्या होती है, रुपये का माहात्म्य क्या होता है, वो शायद अहमदाबादी से अधिक कोई नहीं जानता है..! और हमारे अहमदाबादियों के लिए इस प्रकार के काफी चुटकुले भी बने हुए हैं..! और उस शहर में फाइनेंशियल वर्ल्ड के लोगों का इस प्रकार से एकत्र आना और इस समारोह को यहाँ संपन्न करना, इसके लिए मैं फिर एक बार ज़ी ग्रुप के सभी मित्रों का धन्यवाद करता हूँ और आभार व्यक्त करता हूँ..!

आप लोग इस विषय के काफी जानकार भी हैं और चिंतित भी हैं। अगर फाइनेंशियल मार्केट बहुत तेजी में होता, तो शायद आज के समारोह में तालियाँ भी ज्यादा बजती। लेकिन मैं देख रहा हूँ मुश्किल से तालियाँ बज रहीं हैं और उसका मूल कारण मार्केट की स्थिति है। अगर मार्केट की स्थिति अच्छी होती, तो शायद आप भी बड़े उमंग से भरे हुए होते, लेकिन मार्केट की स्थिति अच्छी नहीं है इसके लिए आप सुबह-शाम एनालिसिस करते होंगे। आप सोचते भी होंगे कि यार, कुछ भी हो, इस स्थिति से बाहर निकलें..! ये आपके सबके मन में चलता होगा। ये बात सही है कि देश की आर्थिक स्थिति बहुत ही चिंताजनक है। किसी भी देश के जीवन में उतार-चढाव तो आते हैं। कभी अच्छी स्थिति भी आती है, तो कभी बुरे दिन भी आते हैं। कभी हम टॉप पर भी होते हैं, तो कभी लो पर भी पहुंच जाते हैं..! लेकिन नीति निर्धारक जब आत्मविश्वास खो चुके होते हैं, इफ दे लूज़ देयर कॉन्फिडेंस, तो वो निर्णय नहीं कर सकते। उन्होंने निर्णय करने का सामर्थ्य खो दिया है। कभी-कभी देश में चर्चा होती है कि चुनाव बहुत जल्दी आ जाएंगे, समय पर चुनाव नहीं होंगे..! तो मुझ से कुछ लोगों ने बात की थी। मैंने कहा देखिए भाई, चुनाव जल्दी भी अगर लाने हैं तो सरकार को निर्णय करना पड़ता है। जो नौ साल में कोई निर्णय नहीं कर पाए, वो ये निर्णय कैसे कर सकेंगे..? तो आप मान कर चलिए कि मजबूरन स्थितियाँ जहाँ चाहेगी, वहाँ जाएगी। कोई ले जाने वाला नहीं है, कोई दिशा तय करने वाला नहीं है, कोई निर्णय करने वाला नहीं है..! और सवा सौ करोड़ का देश इस स्थिति में जब होता है, तब हर प्रकार के संकट अपने आप बढ़ते चले जाते हैं..!

अब आज देखिए आप, रूपये की कीमत जिस तेजी से गिर रही है..! और कभी-कभी तो लगता है कि दिल्ली सरकार और रुपये के बीच कम्पीटीशन चल रहा है। किसकी आबरू तेजी से गिरती चली जा रही है, कौन आगे जाएगा... इसकी कम्पीटीशन चल रही है..! देश जब आजाद हुआ तब एक डॉलर एक रूपये के बराबर था। एक रूपये में एक डॉलर बिकता था..! जब अटल जी की सरकार थी, अटल जी ने जब पहली बार सरकार बनाई तब तक मामला पहुंच गया था 42 रूपीज तक और अटल जी ने जब छोड़ा तब 44 पर पहुंचा था। चार प्रतिशत का फर्क आया था..! लेकिन इस सरकार के और अर्थशास्त्री प्रधानमंत्री के कालखंड में ये 60 रूपये पर पहुंच गया है..! मित्रों, अगर थोड़ा इतिहास की ओर नजर करें, और आप तो इस आर्थिक जगत की दुनिया से जुड़े हुए लोग हैं..! हिन्दुस्तान 1200 साल की गुलामी के बाद 15 अगस्त, 1947 को जब आजाद हुआ, तो उस समय उसके पास ब्रिटिश गवर्नमेंट से वन थाउसेंड मिलियन पाउंड लेना उधार था। यानि हम लेनदार थे, ब्रिटिश गवर्नमेंट कर्जदार थी..! सैकेंड वर्ल्ड वॉर में भारत से जो कुछ भी गया था, वो कर्ज ब्रिटिशर को हिन्दुस्तान को चुकाना था। यानि 1200 साल की गुलामी के बाद भी आजादी का प्रारंभ आर्थिक संकट से नहीं हुआ, आर्थिक संपन्नता के साथ हुआ था..! इतना ही नहीं, विदेशों से कर्ज लेने का प्रारंभ पंडित नेहरू ने किया। आजादी के कुछ ही समय में फर्स्ट फाइव इयर प्लान आया, तो विदेशों से कर्ज लेना शुरू किया। और तब वर्ल्ड बैंक का स्वतंत्र स्वरूप नहीं था, अमेरिका की गवर्नमेंट की इच्छा से चलता था। और उस समय पंडित नेहरू के जमाने में पहली बार कर्ज लिया गया। आज जरूरत है उस बात को समझने की, कि जब वो पहली बार कर्ज लिया गया, तो उसमें दो शर्त थी। आज डॉलर साठ रूपये पर क्यों बिकता है उसका जवाब वहाँ मिलता है। दो शर्त थी..! एक शर्त ये थी कि वो जो अमेरिका ने पैसे दिए हैं, उन पैसों का उपयोग हिन्दुस्तान के रिसर्च स्कॉलर को अमेरिका में पढ़ने भेजने के लिए स्कॉलरशिप के रूप में खर्च होंगे। देखिए, कितना बुद्घिमानी का काम अमेरिका ने किया..! अमेरिका जिसको चुने वो स्कॉलर, और वो स्कॉलर पढ़ेगे कहाँ..? अमेरिका में..! पैसे कौन से..? जो पैसे अमेरिका ने कर्ज में दिए, वो पैसे..! मतलब आजाद हिन्दुस्तान की पहली स्कॉलर पीढ़ी जो तैयार हो, वो अमेरिका की छाया वाली तैयार हो, ताकि वो गीत अमेरिका के गाएं, इस प्रकार का पहला प्रयास हुआ..! और दूसरा निर्णय किया था कि ये रूपये तब देंगे कि जब आप रूपये की कीमत कम करोगे..! और उस लोन लेने के कारण पंडित नेहरू के समय में पहली बार रूपये की ताकत कम हुई और वो सिलसिला चलता रहा..! मित्रों, कोई भी देश गलत नीतियों के कारण कहाँ जा कर के गिरता है, उसका हम अंदाज कर सकते हैं..!

मैं आज भी मानता हूँ कि भारत जैसा देश, सारी दुनिया की नजर हिन्दुस्तान पे अगर एक बाजार के तौर पर हो और ये देश अगर एक बाजार बन कर के रह जाए, तो ये देश कभी भी अर्थिक संपन्नता प्राप्त नहीं कर सकता..! पूरा विश्व अपना माल हिन्दुस्तान के अंदर जितनी बड़ी मात्रा में डम्प कर सकता है, करना चाहता है..! इतना बड़ा कंज्यूमर मार्केट अवेलेबल है, मित्रों..! अगर से सिलसिला चलता ही रहा और देश का इम्पोर्ट बढ़ता ही गया तो पता नहीं देश की आर्थिक स्थिति कहाँ जा कर के रूकेगी..! मित्रों, आज तेजी से इम्पोर्ट बढ़ रहा है और एक्सपोर्ट में हम पहले से भी नीचे आ गए हैं, यानि स्टेबल भी नहीं रहे, हम जहाँ थे उससे भी नीचे आ गए, और उसके कारण हमारी करेंट अकाउंट डेफिसिट बढ़ती चली गई, जिसने पूरी आर्थिक स्थिति पर एक नया बोझ डाल दिया है..!

एफ.डी.आई. और एफ.आई.आई. दोनों के तराजू पर हम संतुलन नहीं कर पा रहे हैं और उसका मूल कारण है हमारी नीतियाँ..! लोग कहते हैं एफ.डी.आई. नहीं आया, फॉरेन डायरेक्ट इनवेस्टमेंट नहीं आया... क्यों नहीं आया? कोई भी व्यक्ति हिन्दुस्तान के अंदर धन तब लगाता है जब उसको अपनी पूंजी की सिक्योरिटी महसूस हो। उसको लगे कि हाँ, ये मैं इतना लगा रहा हूँ तो मुझे प्रॉफिट मिलेगा, मुझे गुड गवर्नेंस की अनुभूति हुई है तो मुझे एफिशियेंट गवर्नेंस मिलेगा, मुझे सिंगल विंडो क्लिीयरेंस मिलेगा, तो वो हिम्मत करेगा..! लेकिन अगर पॉलिसी पैरालिसिस है तो उसकी कितनी ही आवश्कयकता होगी, लेकिन वो हिन्दुस्तान की तरफ मुंह नहीं फेरेगा। अगर हमारे यहाँ फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट नहीं आता है और अगर हम मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में दुर्बल होते चले जाते हैं, तब जा कर के हम इम्पोर्ट करते हैं, एक्सपोर्ट करने के दरवाजे बंद होते चले जाते हैं और आर्थिक स्थिति और लुढकती चली जाती है..!

मित्रों, आप स्टॉक मार्केट की दुनिया से जुड़े हुए लोग हैं। सरकार अगर तीन चीजों को बैंलेस रूप से आगे ना बढ़ाए, तो मैं मानता हूँ कि किसी भी इन्वेस्टर का विश्वास कभी भी नहीं रहेगा..! अब आप देखिए कि आज हमारा ट्रांजेक्शन कितना होता है..? मैं समझता हूँ, मुझे जो बताया गया है कि वो 15 और 20 परसेंट के बीच में आ गया है। और उसमें भी फ्यूचरिस्टिक वाली संख्या ज्यादा है, रियल ट्रांजेक्शन की संख्या कम होती चली जा रही है..! रियल ट्रांजेक्शन इसलिए नहीं हो रहा है कि उसका कॉन्फिडेंस लेवल टूट चुका है। अगर ये स्थिति बनती है तो आप कल्पना कर सकते हैं कि हम कहाँ जा कर के खड़े रहेंगे..! और इसलिए स्टॉक मार्केट में भी एक रिटेल का क्षेत्र है, दूसरा इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टमेंट है और तीसरा एफ.आई.आई. का है, इन तीनों को इक्वल बैलेंस होना चाहिए। आज मित्रों, अगर एफ.आई.आई. का शेयर बढ़ गया और जस्ट बिकॉज दुनिया का कोई देश अपना इन्टरेस्ट रेट बढ़ा दें और अचानक एफ.आई.आई. की बहुत बड़ी अमाउंट चली जाए तो पूरा स्टॉक मार्केट नीचे गिर जाएगा और उसके कारण सामान्य मानवी को कोई भरोसा नहीं रहेगा..!

मित्रों, आज चिदम्बरम जी ये कहते हैं कि लोग सोना ना खरीदें..! लेकिन लोग सोना खरीदने के लिए मजबूर क्यों हुए..? मुझे मालूम है, हमारे यहाँ गुजरात में स्टॉक मार्केट में इन्वेस्ट करना, यानि एक पीओन होगा वो भी सुबह-शाम देखता है कि स्टॉक मार्केट का क्या हाल है..! हमारे यहाँ एक अखबार तो सिर्फ स्टॉक मार्केट के रेट के ऊपर ही चलता है, पूरा का पूरा अखबार... और लोग उसी को खरीदते हैं क्योंकि उनको उसी में इन्टरेस्ट होता है..! लेकिन आज उसका इन्टरेस्ट नहीं रहा, क्योंकि उसको भरोसा नहीं है कि उसको जो कुछ भी इनवेस्ट करना है, उसको वो वापस मिलेगा या नहीं मिलेगा..! तो फिर उसके बाद दो रास्ते बच जाते हैं, रियल एस्टेट में डालो या फिर गोल्ड में डालो। रियल एस्टेट में डालने के लिए मिडिल क्लास, लोअर मिडिल के पास उतनी अमाउंट नहीं होती, इसलिए उसमें डाल नहीं पाता है। तो क्या करेगा..? चलिए भाई, 10 ग्राम, 20 ग्राम, 50 ग्राम, 100 ग्राम गोल्ड ले लो, पैसा बढ़ जाएगा..! अकेले 2012 के वर्ष में 1 लाख करोड रूपयों का गोल्ड इस देश में इम्पोर्ट हुआ है, एक साल में..! और बताया जाता है कि आज हिन्दुस्तान में 18 लाख करोड़ रूपयों का गोल्ड पड़ा हुआ है। नॉन प्रॉडक्टिव ऐसेट है..! मित्रों, अगर ये स्थिति रही तो हमारी सारी आर्थिक व्यवस्था कैसे चलेगी..? और ये क्यों हो रहा है, क्योंकि व्यक्ति को एक ही जगह पर सिक्योरिटी लगती है कि यार, लेकर के रखो, ज्यादा पैसे मिले या ना मिले, लेकिन पैसे तो बच जाएंगे..! या तो उसको लगता है कि रियल एस्टेट..! मित्रों, रियल एस्टेट में भी जाने का कारण क्यों बना है..? हमारी इकॉनोमी पर ब्लेक मनी की इकॉनोमी डॉमिनेट करने लग गई है। और जब ब्लैक मनी की इकोनॉमी डॉमिनेट करती हो, पैरलल इकॉनोमी चलती हो, तो स्वाभाविक है कि लोगों को रियल एस्टेट में जाने का रास्ता ठीक लगता है। और जैन्यूइन आदमी अगर रीयल एस्टेट में जाना चाहता है, तो वो एंटर नहीं कर पा रहा है क्योंकि ब्लैक मनी नहीं है..! एक ऐसे विश्यस सर्कल को देश में चलाया गया है, जिसके कारण देश का पूरा अर्थतंत्र आज स्थितियों को बिगाड़ते चला जा रहा है..!

एशिया की एक विशेषता रही है, सदियों से कि एशियन कंट्रीज का कल्चरली एक-दूसरे पर काफी प्रभाव रहा है। सेविंग ये वैस्टर्न वर्ल्ड के नेचर में नहीं है, सेविंग ये एशियन कल्चर में है, और भारत उसमें लीड करता रहा है। हमारे यहाँ बचत करना, पैसे बचाना और उसमें महिलाओं का बहुत बड़ा रोल रहता है। गरीब से गरीब महिला होगी, गरीब परिवार की होगी, लेकिन कुछ ना कुछ बचाने की कोशिश करेगी। मित्रों, ये सेविंग का जो स्वभाव है, तो वो पहले स्टॉक मार्केट के अंदर इन्वेस्ट करता था, और उसके कारण हमारी इकॉनोमी को बहुत बड़ा पुश मिलता था, ड्राइविंग फॉर्स बन जाता था। मिडिल क्लास, लोअर मिडिल क्लास जिसके पास सोना खरीदने की ताकत नहीं है, फ्लेट खरीदने की ताकत नहीं है, जमीन में पैसा नहीं लगा सकता है, वो पाँच-दस रूपये वाले दस-बीस शेयर लेने की केाशिश करता था, क्योंकि उसके पास उतने ही पैसे थे..! लेकिन मंहगाई के कारण मीडिल क्लास, लोअर मीडिल क्लास के लिए अपना घर चलाने में दिक्कत हो गई है, सेविंग खत्म हो चुका है और सेविंग खत्म होने के कारण स्टॉक मार्केट में उसकी एंट्री बंद हो गई है। अगर ये स्थिति बनी रही, तो हमारी पूरी फाइनेंशियल स्थिति और दुदर्शा की ओर चली जाएगी..!

आप देखिए, इम्पोर्ट..! ये तो हम समझ सकते हैं कि नेचुरल रिसोर्सिस में हमारी कुछ सीमाएं होंगी..! पेट्रोलियम, गैस और डीजल के इम्पोर्ट के लिए आज हमारे पास कोई रास्ता नहीं होगा, मजबूरन ही सही, लेकिन हमको लेना पड़ेगा..! लेकिन क्या कारण है कि इलेक्ट्रोनिक गुड्स, मोबाइल फोन, वगैरह में हमारा अरबों-खरबों रुपयों का इम्पोर्ट बढ़ता चला जा रहा है..! क्या हमारा देश मोबाइल फोन मैन्यूफैक्चरिंग में एक बहुत बड़ा जंप नहीं लगा सकता है..? हम हमारे इम्पोर्ट को कम करने का रास्ता नहीं खोज सकते हैं..? हमें मालूम है कि हिन्दुस्तान में इलेक्ट्रोनिक गुड्स का एक बहुत बड़ा मार्केट है। और इलेक्ट्रोनिक गुड्स के मैन्यूफैक्चरिंग के लिए कोई आसमान से बहुत बड़ा स्काय रॉकेट इंजीनियरिंग लाने की जरूरत नहीं है, वो बहुत सामान्य प्रकार की टैक्नोलॉजी है। लेकिन हमने उस पर बल नहीं दिया और उसके कारण आज हिन्दुस्तान में सबसे ज्यादा इम्पोर्ट करने वाले जो तीन सेक्टर हैं, उसमें से एक क्षेत्र है इलैक्ट्रोनिक गुड्स..! हाँ, यदि कोई मेडिकल इक्विपमेंट के लिए कोई बहुत बड़ी एक्स्ट्राऑर्डिनरी चीज आती है तो वन कैन अंडरस्टेंड, लेकिन रूटीन में हमारे यहाँ अपना कम्प्यूटर नहीं बन पा रहा है, हम यहाँ लाकर के एसेंबल करते हैं..! हम अगर हमारे देश में योजनाबद्घ तरीके से करें कि भाई, दस साल के अंदर इस सैक्टर के अंदर इम्पोर्ट करने की स्थिति से हम बाहर आ जाएंगे..! हम क्वालिटी मैटीरियल प्रोवाइड करेंगे, सफिशियेंट मटेरियल प्रोवाइड करेंगे, तो देश की स्थितियाँ नहीं बदलेगी..? लेकिन हमारी नीतियों की कमी के कारण ये हाल हुआ है। हमारा मैन्यूफैक्चरिंग कॉस्ट इफेक्टिव नहीं हो रहा है। क्यों नहीं हो रहा है..? अगर हमें दुनिया के सामने टिकना है, तो उत्पादन के क्षेत्र में हमारे लोगों को जरूरत है कि वो कॉस्ट इफैक्टिव हो..! तो उसके लिए क्या चाहिए..? आज देखिए, हिन्दुस्तान में बीस हजार मैगावाट से ज्यादा के बिजली के कारखाने बंद पड़े हैं। कोई देश ऐसा देखा है आपने कि जिसके पास कोयले के खदान हैं, जो अंधेरे में जी रहा है, लोगों को बिजली चाहिए, बिजली के ग्राहक मौजूद हैं और जिसके पास बीस हजार मैगावाट से अधिक बिजली पैदा करने वाले कारखाने तैयार हो..! जस्ट, लीडरशिप नहीं है, पॉलिसी पैरालिसिस है और इसलिए कोयले के निर्णय हो नहीं रहे हैं, खदान में से कोयला निकल नहीं रहा है, कोयला बिजली के कारखाने तक पहुंच नहीं रहा है और देश अंधेरे में डूब रहा है। मैन्यूफैक्चरिंग सैक्टर को सफिशियेंट बिजली मिल नहीं रही है, फार्मर को सफिशियेंट बिजली नहीं मिल रही है और उसके कारण हमारा ग्रोथ कम हो रहा है, हमारे विकास की यात्रा कम हो रही है..!

मित्रों, छोटी-छोटी चीजें है, कोई बहुत बड़ी चीजों की कोई जरूरत नहीं है, सामान्य चीजें... अगर इन पर भी हमने बल दिया होता, तो मैं नहीं मानता हूँ कि देश आज इतने बड़े आर्थिक संकट से गुजर रहा होता..! और ऐसा नहीं है कि इसके रास्ते नहीं हैं। अटल जी के समय की एन.डी.ए. सरकार के कार्यकाल की अगर हम विगत देखे लें, तो सीना तान कर के कोई भी कह सकता है। मित्रों, उन दिनों तो भारत ने न्यूक्लीयर टैस्ट किया था। पूरे विश्व ने सैंक्शन्स लगा दिये थे, देश आर्थिक संकट में फंसा हुआ था..! ऐसे विकट काल में भी अटल जी के नेतृत्व में हिंदुस्तान में एन.डी.ए. की सरकार, वो भी 24 पार्टियां एक साथ सरकार चलाती थी, एक पार्टी की सरकार नहीं थी, उसके बाद भी ना मंहगाई बढ़ने दी थी, ना इम्पोर्ट बढ़ने दिया था, एक्सपॉर्ट में कटौती आने नहीं दी थी..! जब अटल जी की सरकार बनी तब हमारा सेविंग का रेशो 32% से ज्यादा था और आज वो 30% से भी कम हो गया है..! कोई भी पैरामीटर ले लीजिए। भारत की इकॉनोमी में 21वीं सदी की विकास यात्रा के सपनों की मजबूत नींव अटल जी ने अपने शासन काल में रखी थी। लेकिन देखते ही देखते पिछले नौ साल में जो रखा था वो भी खत्म हो गया और नया कुछ अर्जित नहीं हुआ, ऊपर से नए बोझ और नए संकट हमारे देश पर आते गए और उसी के कारण आज हम संकट से गुजर रहे हैं..! आपका तो पूरा मार्केट, पहले जो इन्वेस्टर था वो सुबह जब स्टॉक मार्केट खुलता था तो उसकी सांस ऊपर-नीचे होती थी। शेयर बाजार में जिसने बेचारे ने हजार-दो हजार रूपये लगाए होते थे, तो वो सोचता था कि यार आज कुछ मिला या नहीं मिला..! आज सांस आपकी ऊपर नींचे हो रही है। ये पहली बार हो रहा है..! और इसलिए इस चिंता की अवस्था में देश एक आत्मविश्वास के साथ कैसे आगे बढ़े, पॉलिसी पैरालिसिस में से देश बाहर कैसे आए..!

प्रधानमंत्री ने कहा था, पैसे पेड़ पर नहीं उगते हैं..! प्रधानमंत्री जी, आपके अर्थशास्त्र में पैसे पेड़ पर उगते हों या ना उगते हों, हम गुजरातियों की समझ है और हम मानते हैं कि पैसे खेते में भी उगते हैं, पैसे कारखाने में भी उगते हैं, पैसे मजदूर के पसीने से भी उग सकते हैं, आवश्कता है सही नेतृत्व देकर के नीतियों को बनाने की..! हिन्दुस्तान का किसान खेत में काम करता है तो वो पैसे उगाता है, एक मजदूर फैक्ट्री में मेहनत करता है तो वो पैसे उगाता है और तभी तो देश की तिजोरी भरती है और तभी तो देश चलता है..! ये जो निराशा का माहौल है उससे देश को बाहर लाया जा सकता है। मित्रों, गुजरात एक्सपीरियंस से मैं कहता हूँ कि निराशा की गर्त में डूबे रहने का कोई कारण नहीं है। जब मैं पहली बार मुख्यमंत्री के रूप में आया, तब मेरे यहाँ रेवेन्यू डेफिसिट सिक्स थाउजेंड सेवन हन्डरेड करोड़ रूपीज़ थी, आज हम रेवेन्यू सरप्लस है..! मित्रों, हो सकता है..! हमारी इलेक्ट्रिसिटी कंपनीज वार्षिक 2500 करोड़ रूपये का लॉस करती थी। आज मित्रों, वो प्राफिट करती है और हम 24 घंटे बिजली देते हैं और टेरिफ नहीं बढ़ाते हैं..! कहने का तात्पर्य ये है मित्रों, अगर सही दिशा में निर्णय किए जाए, देश के सामान्य मानवी की शक्ति पर भरोसा करके निर्णय किया जाए तो देश की स्थिति बहुत बदल सकती है। और मैं बहुत आशावादी इंसान हूँ..! इतना बड़ा देश, दुनिया के सामने सीना तान के खड़ा होने का सामर्थ्य है इस देश में, बारह सौ साल की गुलामी के बाद भी जो देश सरप्लस था वो देश आज कर्जदार क्यों बन गया, इसके जवाब हम खोज सकते हैं, इसके उपाय भी खोज सकते हैं, उस विश्वास को लेकर आगे बढ़ें..!

मैं फिर एक बार सुभाष जी का बहुत आभारी हूँ कि आपके बीच आने का मुझे अवसर मिला। बहुत-बहुत धन्यवाद..!

 

Pariksha Pe Charcha with PM Modi
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On May 2 Didi will get certificate of Bengal ex-chief minister by the people of the state: PM Modi
April 17, 2021
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People from all corners of India are seen in Asansol. But the misgovernance of Bengal governments affected Asansol: PM Modi
PM Modi says on May 2, which is the day of assembly election results, Didi will be given the certificate of Bengal ex-chief minister by the people of the state
In Asansol, PM Modi says Mamata Banerjee has skipped several meetings called by the Centre to discuss many key issues
PM Modi promises to implement all the welfare schemes of the central government in West Bengal if BJP is elected to power in the state

 

नमोष्कार !

मां कल्याणेश्वरी और घाघर बूढ़ी चंडी...आज मेरे लिए अवसर है इस पवित्र धरती को श्रद्धापूर्वक प्रणाम करने का। बांग्ला नव वर्ष शुरू होने के बाद आज बंगाल में मेरी ये पहली सभा है। नव वर्ष में बंगाल में बीजेपी की डबल इंजन की सरकार बनने जा रही है।

चार दोफार मोतोदान, टीएमसी होलो खान-खान !

(चार दौर का मतदान, टीएमसी खंड-खंड हो गई)। 

बाकी चार दोफार मोतोदान, दीदी-भाइपो टिकिट कटान ! 

(बाकी चार बार का मतदान, दीदी भाइपो का पत्ता साफ)।

पांचवें चरण के मतदान में भी कमल के फूल पर बटन दबा करके भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनाने के लिए आज सुबह से बहुत बड़ी तादाद में लोग निकले हैं। बहुत भारी मतदान हो रहा है। मैं अब तक मतदान करने वाले सभी मतदाताओं का हृदय से बहुत-बहुत अभिनंदन करता हूं और उनका धन्यवाद करता हूं।  

साथियो

आसनसोल हो, दुर्गापुर हो, इस पूरे क्षेत्र में बंगाल ही नहीं, बल्कि देश के औद्योगिक विकास का प्रमुख केंद्र बनने की क्षमता बहुत पहले से है हमेशा से है। द्वारकानाथ टैगोर जी, राजेन मुखर्जी, बीरेंद्रनाथ मुखर्जी जैसे अनेक व्यक्तित्वों ने इस क्षेत्र की संपदा को देश की आत्मनिर्भरता के संकल्प के रूप में आगे बढ़ाया।

साइकिल से लेकर रेल तक, पेपर से लेकर स्टील तक, एल्यूमिनियम से लेकर ग्लास तक, ऐसे अनेक कारखानों में, यहां की फैक्ट्रियों में काम करने के लिए पूरे देश से लोग यहां आते हैं। आसनसोल एक प्रकार से लघु भारत है, हिन्दुस्तान का हर व्यक्ति यहां मिल जाएगा। लेकिन बंगाल में जो सरकारें रहीं, उनके कुशासन ने आसनसोल को कहां से कहां पहुंचा दिया। जहां लोग चाकरी के लिए आते थे, आज यहां से पलायन कर रहे हैं। मां-माटी-मानुष की बात करने वाली दीदी ने, यहां हर तरफ माफिया राज फैला दिया है। आसनसोल की प्राकृतिक संपदा को लूटने के लिए कोयला माफिया, नदियों की बालू को लूटने के लिए अवैध खनन माफिया, सरकारी जमीन पर कब्जे के लिए भू-माफिया।

साथियो

यहां सालनपुर, बाराबनी, जमुरिया रानीगंज, उखड़ा, बल्लालपुर से लेकर बांकुड़ा बॉर्डर तक अवैध कोयला खनन का साम्राज्य फैला हुआ है। यहां के कोयला, रेत और दूसरे खनिजों का काला माल कहां तक पहुंचता है, किस-किस तक पहुंचता है, ये हर कोई जानता है। बंगाल के ट्रक वालों को, ट्रांसपोर्ट से जुड़े साथियों को, यहां के उद्यमियों को जो भाइपो टैक्स देना पड़ता है, वो भी बंगाल के लोग भली-भांति जानते हैं। 

साथियो

इस चुनाव में आपका एक वोट सिर्फ टीएमसी को साफ करेगा, इतना ही नहीं है बल्कि आपका एक वोट यहां से माफिया राज को भी साफ करेगा। आपको पता है आपके वोट की ताकत क्या है? आपका एक वोट पूरे माफिया राज को यहां साफ कर देगा। ये ताकत है आपके वोट की।  

भाइयो-बहनो 

आज आपसे शिकायत करना चाहता हूं...करूं ?...आपके खिलाफ है शिकायत...करूं ?...बुरा तो नहीं मानोंगे न...लेकिन मेरी शिकायत जरा देखिए…मैं यहां दोबार आया हूं.... लोकसभा के चुनाव में....जब मुझे प्रधानमंत्री बनना था और आप से वोट मांगने आया था। बाबुल जी के लिए वोट मांगने आया था। लेकिन पहले जब आया, तब तो मेरे लिए वोट मांगा था, फिर भी एक चौथाई भी लोग नहीं थे सभा में। लेकिन आज चारों तरफ...मैंने ऐसी सभा पहली बार देखी है। अब बताइए, मेरी शिकायत मिठी है कि कड़वी है। आज आपने ऐसा दम दिखा दिया है। ऐसी ताकत दिखा दिए...मैं जहां देख सकता हूं...मुझे लोग ही लोग दिखते हैं...बाकी कुछ दिखता ही नहीं है। क्या कमाल कर दिया है आप लोगों ने। लेकिन आगे का काम बहुत महत्वपूर्ण है। और वो है वोट देने के लिए जाना, वोट देने के लिए औरों को ले जाना। करोंगे...पक्का करोंगे...सब लोग करोंगे...देखिए तभी यहां से ये माफिया राज समाप्त होगा। ये माफियाशाही तभी समाप्त होगी।

और भाइयो-बहनो

मैं बंगाल जहां भी गया हूं यही माहौल है। और उधर क्या है?

दीदी, ओ दीदी, 

देखिए दीदी...ओ दीदी...2 मई में अब सिर्फ आधा महीना बचा है। आधा चुनाव हो चुका है। सिर्फ कुछ दिन और। कोयला धुले, मोयला जाय ना !

भाइयो और बहनो, 

सोनार बांग्ला के संकल्प के साथ बीजेपी सरकार यहां आपकी हर मुश्किल कम करने के लिए काम करेगी। बंगाल में कानून व्यवस्था का राज स्थापित किया जाएगा। कानून के राज में यहां नए उद्योग लगेंगे, बंगाल में निवेश बढ़ेगा। बीजेपी सरकार में हर कोई अपना काम करेगा। आपके जीवन में टीएमसी के तोलाबाजों की जो घुसपैठ हुई है, उसे जीरो किया जाएगा, उसे दूर किया जाएगा। पुलिस अपनी जिम्मेवारी निभाएगी, अपना काम करेगी, राज्य सरकार के अलग-अलग विभाग अपने जनसेवा का दायित्व निभाएंगे, अपना काम पूरा करेंगेप्रशासन अपनी जिम्मेवारियों को निभाते हुए जनता जनार्दन की अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए दिन-रात काम करेगा। और सरकार अपनी जिम्मेवारियों को पूरा करने के लिए काम करेगी। और बीजेपी कार्यकर्ता...मैं आपको विश्वास दिलाता हूं आपकी सेवा में हरदम खड़ा रहेगा। और इसमें जो भी खेला करने की कोशिश करेगा, उस पर कानून के तहत उतनी ही सख्त कार्रवाई भी होगी।

भाइयो और बहनो,

दीदी ने बीते दस सालों में विकास के नाम पर आपके साथ विश्वासघात किया है। विकास के हर काम में, हर काम के आगे दीदी दीवार बनकर खड़ी हो गई हैं। केंद्र सरकार ने 5 लाख रुपए के मुफ्त इलाज की सुविधा दी, तो दीदी दीवार बन गईं। केंद्र सरकार ने शरणार्थियों की मदद के लिए कानून बनाया, तो दीदी इसका भी विरोध करने लगीं। केंद्र सरकार ने मुस्लिम बहनों को तीन तलाक से मुक्ति के लिए कानून बनाया, तो दीदी फिर आगबबूला हो गईं। केंद्र सरकार ने किसानों को बिचौलियों से मुक्त करने वाले कानून बनाए, तो दीदी विरोध में उतर आईं। केंद्र सरकार ने किसानों के बैंक खातों में सीधे पैसे ट्रांसफर करने शुरू किए, तो दीदी ने इससे भी किसानों को वंचित रख दिया। 

साथियो

बंगाल को विकास रोकने वाली नहीं, डबल इंजन की सरकार चाहिए। बंगाल की बीजेपी सरकार, आपका लाभ कराने वाली हर उस योजना को लागू करेगी, जिन्हें दीदी की सरकार ने रोका हुआ है। पहली ही कैबिनेट में पीएम किसान सम्मान निधि पर बड़ा फैसला लिया जाएगा। बंगाल के हर किसान के खाते में 18 हजार रुपए सीधे ट्रांसफर हो, जिसको दीदी ने रोकने की कोशिश की। 2 मई के बाद नई सरकार बनने के बाद दीदी नहीं रोक पाएंगी। क्योंकि सरकार आपने बनाई है...आपके लिए बनाई है...और वो आपके लिए काम करेगी।

भाइयो और बहनो

आप मुझे बताइए... दीदी को अगर आप लोगों के दु:ख-दर्द की परवाह होती, तो क्या वो आपकी भलाई के...आपके हित वाले कामों को रोकने का काम कभी करती क्या ? ये रुकावटे डालती क्या ? दीवार बनती क्या ? दीदी को अगर आपकी तकलीफ की चिंता होती, तो क्या वो तोलाबाजी होने देतीं क्या ? जरा इधर से जवाब दीजिए तोलाबाजी होने देतीं क्या ?  सिंडिकेट को आगे बढ़ाती क्या ? कटमनी वसूलने देतीं क्या ?

साथियो

दीदी, अपने अहंकार में दीदी इतनी बड़ी हो गई हैं कि हर कोई उन्हें अपने आगे छोटा दिखता है। केंद्र सरकार ने अनेक बार अनेक विषयों पर बात करने के लिए बैठकें बुलाई हैं, लेकिन दीदी कोई न कोई कारण बताकर इन बैठकों में नहीं आतीं। जैसे कोरोना पर पिछली दो बैठकों में बाकी मुख्यमंत्री आए, लेकिन दीदी नहीं आईं। नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की बैठक में बाकी मुख्यमंत्री आए, लेकिन दीदी नहीं आईं। मां गंगा की सफाई के लिए देश में इतना बड़ा अभियान शुरू हुआ, लेकिन दीदी उससे जुड़ी जो बैठक होती है, उसमें भी नहीं आईं। एक-दो बार न आने का तो समझ में आता है साथियों, लेकिन दीदी ने यही तरीका बना लिया है। दीदी बंगाल के लोगों के लिए कुछ देर का समय नहीं निकाल पातीं। ये उन्हें समय की बर्बादी लगता है। और जब दीदी के तोलाबाज, कोरोना के दौरान भेजे गए राशन को लूटते हैं, तो वो उन्हें खुली छूट देती हैं। 

केंद्रीय टीमें चाहे सहयोग के लिए आएं या फिर करप्शन की जांच के लिए, दीदी उनको रोकने के लिए पूरे संसाधन लगा देती हैं। दीदी केंद्रीय वाहिनी ही नहीं, सेना तक को बदनाम करती हैं, राजनीति के लिए झूठे आरोप लगाती हैं। दीदी, खुद को देश के संविधान से ऊपर समझती हैं। दीदी चोखे ओहोन्कारेर पोरदा। (दीदी की आंखों पर अहंकार का पर्दा चढ़ा हुआ है।)

भाइयो और बहनो,

दीदी की राजनीति सिर्फ विरोध और गतिरोध तक सीमित नहीं है। बल्कि दीदी की राजनीति, प्रतिशोध की खतरनाक सीमा को भी पार कर गई है। बीते 10 साल में बीजेपी के अनेकों कार्यकर्ताओं की हत्या की गई है। अभी मेरी... यहां ऊपर आने से पहले... कई पीड़ित परिवारों से बात हुई है। दीदी की वजह से न जाने कितनी माताओं ने अपने बेटों को खोया है, न जाने कितनी बहनें आज भी अपने भाई का इंतजार कर रही हैं। दीदी की निर्ममता, उनकी असंवेदनशीलता हमें कुछ दिन पहले ही फिर एकबार दिखाई दी है, सुनाई दी है।

साथियो

कूचबिहार में जो हुआ, उस पर कल एक ऑडियो टेप आपने सुना होगा। ऑडियो टेप सुना क्या आपने ? 5 लोगों की दुखद मृत्यु के बाद दीदी किस तरह राजनीति कर रही हैं, ये इस ऑडियो टेप के अंदर साफ-साफ खुल गया है, सामने आता है। इस ऑडियो टेप में कूचबिहार के टीएमसी नेता को कहा जा रहा है कि मारे गए लोगों के शवों के साथ रैली निकालो। दीदी, वोटबैंक के लिए कहां तक जाएंगी आप ? सच्चाई ये है कि दीदी ने कूचबिहार में मारे गए लोगों की मृत्यु से भी अपना सियासी फायदा करने की सोची। शवों पर राजनीति करने की दीदी को बहुत पुरानी आदत है।

साथियो

दीदी ने बंगाल में ये हाल बना दिया है। जनता ने भी जब उनके विरोध की कोशिश की, तो उसको कुचल दिया गया है। बंगाल की जनता के अधिकार, दीदी के लिए कोई मायने नहीं रखते। 2018 के पंचायत चुनाव पश्चिम बंगाल कभी नहीं भूल सकता। बर्धमान से लेकर बांकुरा, बीरभूमि, मुर्शीदाबाद के लोगों को आज भी याद है कैसे उनके अधिकारों को छीना गया।

आप सोचिए

बंगाल में 20 हजार से ज्यादा पंचायतों में सीधे दीदी के तोलाबाजों को निर्वाचित कर दिया गया। दीदी ने इतना आतंक फैलाया कि एक तिहाई से भी ज्यादा पंचायतों में कैंडिडेट पर्चा तक नहीं भर पाए। हमले के डर से WhatsApp तक पर नॉमिनेशन फाइल करने पड़े। जीत के बाद भी जनप्रतिनिधियों को पड़ोसी राज्यों में शरण लेनी पड़ी। लोकतंत्र के इस अपमान से, लोकतंत्र को इस तरह कमजोर किए जाने से सुप्रीम कोर्ट तक ने नाराजगी जताई। लेकिन दीदी ने लोकतंत्र का सम्मान नहीं किया, लोकतंत्र की परवाह नहीं की।

साथियो

बंगाल और भारत के लिए रोबी ठाकुर का आदर्श है - चित्तो जेथा, भॉय- शुन्नो। हृदय जहां भय मुक्त रहे। लेकिन दीदी का प्रयास रहता है- चित्तो जेथा भॉया-क्रांतो। हृदय जहां भयाक्रांत रहे। दीदी को इस बार के चुनाव में छप्पा वोट नहीं करने दिया जा रहा, तो वो और बौखला गई हैं। दीदी को गुंडागिरी-मस्तानगिरी का खैला नहीं करने दिया जा रहा है, तो दीदी बौखला गई हैं। दीदी द्वारा हर पैंतरा आजमाया जा रहा है ताकि बंगाल के लोगों को वोट देने से रोका जाए। टीएमसी द्वारा अभियान चलाए जा रहे हैं, चुनाव आयोग पर दबाव बनाया जा रहा है। दिल्ली से लेकर बंगाल तक दीदी ने मोदी के खिलाफ मोर्चा खुलवा दिया है।

दीदी, ओ दीदी, ओ आदरणीय दीदी

आप जितनी चाहे साजिशें कर लीजिए, जितनी चाहे कोशिशें कर लीजिए। इस बार आपकी साजिश बंगाल के लोग खुद ही नाकाम कर रहे हैं। इस बार बंगाल के लोगों ने ही आपके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। बंगाल के लोगों ने आप पर अभूतपूर्व विश्वास किया था। अब वो आपको हमेशा-हमेशा के लिए एक ऐसा सॉर्टिफिकेट देने वाली है बंगाल की जनता इस चुनाव में, जो आप जीवन भर घर में लटका कर रख सकती हो। कौन सा सॉर्टिफेकट जनता देने वाली है, जो 2 मई को आने वाला है ? वो सॉर्टिफिकेट आने वाला है भूतपूर्व मुख्यमंत्री। यानि दीदी, ये बंगाल की जनता आपको आजीवन एक सॉर्टिफिकेट देने वाली है भूतपूर्व मुख्यमंत्री...लेकर घुमते रहना। 

भाइयो-बहनो

बंगाल के लोग, बंगाल के लोगों से आपकी नफरत भी महसूस कर रहे हैं। दीदी के करीबी, शिड्यूल्ड कास्ट के मेरे भाइयों और बहनों को भिखारी कहते हैं, दीदी चुप रहती हैं। दीदी के करीबी बीजेपी को वोट देने वालों को बंगाल से बाहर फेंकने की धमकी देते हैं, दीदी चुप रहती हैं। किसी की दुखद मृत्यु पर दीदी की संवेदना भी वोटबैंक का फिल्टर लगाकर ही प्रकट होती है।

दीदी

पश्चिम बंगाल आपकी दुर्नीति से परेशान है, इतना ही नहीं है, बल्कि बंगाल को आपकी नीयत पर भी शक है। इसलिए पश्चिम बंगाल के कोने-कोने से एक ही आवाज़ सुनाई दे रही है-   

कीच्छू नेइ तृनोमूल, एबार भोट पॉद्दोफूले। (कुछ नहीं अब तृणमूल में, इस बार वोट कमल-फूल में।)

भाइयो और बहनो,

10 साल तक दीदी ने बंगाल को भेदभाव और पक्षपात वाली सरकार दी है। हालात तो ये है कि स्पोर्ट्स क्लबों, खिलाड़ियों तक की मदद में भी दीदी ने भेदभाव किया। जो स्पोर्ट्स क्लब दीदी का गुणगान करे, उनके गीत गाए, उन्हें पैसा। जो खेल पर अपना ध्यान दे, बंगाल का नाम रोशन करे, वो स्पोर्ट्स क्लब यहां पैसे के लिए तरसते हैं। दीदी की इसी दुर्नीति की वजह से बुज़ुर्गों को मिलने वाला ‘भाता’ तक सभी लाभार्थियों तक नहीं पहुंच पा रहा है। गांव की सड़क को भी दीदी की सरकार ने राजनीति का शिकार बना दिया। मनरेगा की मज़दूरी हो या फिर आपदा की राहत हो, दीदी की सरकार ने सबमें भेदभाव किया, पक्षपात किया। आपको तीन साल पहले की रामनवमी याद है? आसनसोल-रानीगंज के दंगे कौन भूल सकता है! इन दंगों में सैकड़ों लोगों की जीवन भर की मेहनत राख हो गई। सबसे ज्यादा नुकसान गरीबों का हुआ, पटरी पर दुकान लगाने वाले और छोटे व्यापारियों का हुआ। 

दंगाइयों का साथ किसने दिया? - दीदी ने।

तुष्टिकरण की नीति किसने पनपाई? – दीदी ने।

किसके कारण पुलिस दंगाइयों के पक्ष में खड़ी रही? –  दीदी के।

एक ही जवाब है न...एक ही जवाब है न...हर कोई कह रहा है दीदी के कारण...दीदी के कारण...।

भाइयो और बहनो,

जो विकास पर विरोध को, विश्वास पर प्रतिशोध को, सुशासन पर राजनीति को, प्राथमिकता देती है, ऐसी सरकार पश्चिम बंगाल का भला नहीं कर सकती। इसलिए बंगाल को आशोल पोरिबोरतोन चाहिए। आशोल पोरिबोरतोन बंगाल में सबका साथसबका विकाससबका विश्वास के लिए, आशोल पोरिबोरतोन बंगाल के युवाओं को रोजगार के लिए, आशोल पोरिबोरतोन बंगाल में कानून के राज के लिए, आशोल पोरिबोरतोन बंगाल की भलाई के लिए।

साथियो

दीदी के राज में महिलाओं के साथ जो अत्याचार हुआ है, उसकी चर्चा तक दीदी ने नहीं होने दी है। राज्य सरकार के आंकड़े छिपाकर, महिलाओं पर अत्याचार की खबरों को दबाकर दीदी ने सबसे बड़ा खेला, बंगाल की महिलाओं के साथ ही किया है। मैं आज विशेष रूप से बंगाल की बहन-बेटियों को एक बात के लिए आश्वस्त करता हूं। बीजेपी की सरकार हर वर्ग, हर मत-मज़हब को उसकी बेटी की सुरक्षा और सम्मान को सुनिश्चित करेगी। दीदी की सरकार ने यहां रेप जैसे संगीन अपराध के दोषियों को जल्द से जल्द सजा सुनाने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट पर अड़ंगा डाला, उसको रोक दिया। देश भर में ऐसी एक हजार अदालतें खोली जा रही हैं लेकिन दीदी ने बेटियों को न्याय दिलाने वाली ऐसी एक भी अदालत खोलने नहीं दी। बीजेपी सरकार में फास्ट ट्रैक कोर्ट का भी तेजी से निर्माण किया जाएगा। गरीब, दलित, आदिवासी बेटियों को यहां से दूसरे राज्यों में भेजने का जो अवैध काम किया जाता है, उस पर रोक लगाने के लिए सख्त कदम उठाए जाएंगे।

साथियो,

सोनार बांग्ला का यही संकल्प बंगाल बीजेपी ने अपने संकल्प पत्र में रखा है। बंगाल में Ease of Living, Ease of Doing Business का माहौल बनाया जाएगा। यहां के इंफ्रास्ट्रक्चर पर, रोड, रेल, एयर, इंटरनेट, हर प्रकार की कनेक्टिविटी को डबल इंजन सरकार, डबल स्पीड के साथ आधुनिक बनाएगी। इस क्षेत्र को आर्सेनिक युक्त ज़हरीले पानी से मुक्ति मिले, इसके लिए पाइप से हर घर जल के प्रकल्प को तेज़ी से यहां लागू किया जाएगा। दीदी ने जो कुछ भी लाभ आप तक पहुंचने से रोका है, वो तेज़ी से मिलेगा। डबल इंजन की सरकार में डबल बेनिफिट और डायरेक्ट बेनिफिट मिलेगा। 

एबार शोंघात नॉय, शॉहोजोगिता होबे!

एबार बिरोध नॉय, बिकाश होबे!

एबार मोने भय नॉय, पेटे भात होबे!

एबार शिक्खा होबे, शिल्पो होबे, कोर्मो-शोंस्थान होबे! 

आप इतनी बड़ी तादाद में आशीर्वाद देने के लिए आए...मैं आपका बहुत-बहुत आभार व्यक्त करता हूं। दोनों हाथ ऊपर करके मेरे साथ बोलिए 

भारत माता की जय !

भारत माता की जय !

भारत माता की जय !

बहुत-बहुत धन्यवाद !