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Hon’ble Chief Minister Shri Narendra Modi inaugurated a four-day meet of forensic and security experts from SAARC countries organised with the help of the Interpol headquarters, France and the Gujarat Forensic Science University.

In his inaugural address, Chief Minister Modi said that a database containing voice samples of criminals and terrorists needs to be created to combat the world—wide menace of cross—border terrorism.

“As criminals become more sophisticated, it has become important for the law enforcement agencies to go for advanced technology for investigating complex crime. The old methods of investigation are useful in conventional crimes, but no longer applicable in sophisticated crimes,” Shri Narendra Modi said.

“There are various technologies available for interception, recording and identification. It will be appropriate to create a database of voice sample of criminals and terrorists which could help in combating cross border terrorism,” he said, adding that Interpol could support in developing necessary software for this purpose.

He also asked various experts at the meet to come up with suggestions for framing a DNA Act for the country.

“In all developed countries, most of the investigation are carried out using DNA profiling and fingerprinting. But in India we are yet to come out with a DNA Act for the country,” Mr. Modi said.

“I request all of you to deliberate on this issue of DNA profiling and fingerprinting and come out with certain suggestions which would be useful in framing the DNA Act for the country,” he added.

The four—day meet is the first of its kind being organised in Asia.

“The meet is to develop cooperation and collaboration between different countries in order to fight crimes which have no borders now,” Olaf Worbes , special officer for DVI at Interpol said.

“We are also looking at enhancing databases of various Asian countries with regard to fingerprints and DNA profiling.

There is also a need for uniformity in recording these useful data,” Mr. Worbes said.

“We are also looking at sharing of these databases which would help in investigation of cross-border crimes and terrorism,” he added.

Experts from Afghanistan, Bangladesh, Bhutan, India, Maldives, Nepal, Pakistan and Sri Lanka would be deliberating on various topics which include DNA profiling, fingerprinting techniques used by Interpol and DVI data collection, besides sharing experiences.

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मुझे आप लोगों की बातें सुनकर के बहुत अच्छा लगा और मुझे खुशी है आज हमारे साथी मंत्री पियूष जी, संजय जी, ये सारे लोग भी हमारे साथ हैं और साथि‍यों 'टॉय-केथॉनमें जो देशभर से प्रतिभागी हैं, अन्य जो महानुभव हैं और भी आज इस कार्यक्रम को जो देख रहे हैं।

देखि‍ए हमारे यहां कहा जाता है-'साहसे खलु श्री: वसति'यानि साहस में ही श्री रहती है, समृद्धि रहती है। इस चुनौतीपूर्ण समय में देश के पहले टॉय-केथॉन का आयोजन इसी भावना को मजबूत करता है। इस'टॉय-केथॉनमें हमारे बाल मित्रों से लेकर, युवा साथियों, टीचर्स, स्टार्ट अप्स और उद्यमियों ने भी बहुत उत्साह से हिस्सा लिया है। पहली बार ही डेढ़ हजार से ज्यादा टीमों का ग्रैंड फिनाले में शामिल होना, ये अपने आप में उज्जवल भविष्य के संकेत देता है।ये Toys और games के मामले में आत्मनिर्भर भारत अभियान को भी मजबूती देता है। इसमें कुछ साथियों के बहुत अच्छे आइडियाज भी उभर कर के आगे आए हैं। अभी कुछ साथियों के साथ मुझे बातचीत करने का अवसर भी मिला। मैं इसके लिए फिर  से एक  बार बधाई देता हूँ।

साथियों,

बीते 5-6 वर्षों में हैकाथॉन को देश की समस्याओं के समाधान का एक बड़ा प्लेटफॉर्म बनाया गया है। इसके पीछे की सोच है- देश के सामर्थ्य को संगठित करना, उसे एक माध्यम देना। कोशिश ये है कि देश की चुनौतियों और समाधान से हमारे नौजवान का सीधा कनेक्ट हो। जब ये कनेक्ट मजबूत होता है तो हमारी युवा शक्ति की प्रतिभा भी सामने आती है और देश को बेहतर समाधान भी मिलते हैं। देश के पहले 'टॉय-केथॉन' का मकसद भी यही है। मुझे याद है, मैंने खिलौनों और डिजिटल गेमिंग की दुनिया में आत्मनिर्भरता और लोकल सोल्यूशंस के लिए युवा साथियों से अपील की थी। उसका एक पॉजिटिव रिस्पॉन्स देश में देखने को मिल रहा है। हालांकि चंद लोगों को ये भी लगता है कि खिलौने ही तो हैं, इनको लेकर इतनी गंभीर चर्चा की ज़रूरत क्यों है? असल में ये Toys, ये Games, हमारी मानसिक शक्ति, हमारी क्रिएटिविटी और हमारी अर्थव्यवस्था पर, ऐसे अनेक पहलुओं को प्रभावित करते हैं। इसलिए इन विषयों कीबात भी उतनी ही आवश्यक है।हम सब जानते हैं किबच्चे की पहली पाठशाला अगर परिवार होता है तो, पहली किताब और पहला दोस्त, ये खिलौने ही होते हैं। समाज के साथ बच्चे का पहला संवाद इन्हीं खिलौनों के माध्यम से होता है।आपने देखा होगा, बच्चे खि‍लौनो से बाते करते रहते हैं, उनको instruction देते हैं, उनसे कुछ काम करवाते हैं। क्योंकि उसी से उसके सामाजिक जीवन की एक प्रकार से शुरुआत होती है।इसी तरह, ये Toys, ये बोर्ड गेम्स, धीरे-धीरे उसकी स्कूल लाइफ का भी एक अहम हिस्सा बन जाते हैं, सीखने और सिखाने का माध्यम बन जाते हैं। इसके अलावा खिलौनों से जुड़ा एक और बहुत बड़ा पक्ष है, जिसे हर एक को जानने की जरूरत है। ये है Toys और Gaming की दुनिया की अर्थव्यवस्था- Toyconomy आज हम जब बात कर रहे हैं तो Global Toy Market करीब करीब 100 बिलियन डॉलर का है। इसमें भारत की हिस्सेदारी सिर्फ डेढ़ बिलियन डॉलर के आस पास ही है, सिर्फ डेढ़ बिलियन। आज हम अपनी आवश्यकता के भी लगभग 80 प्रतिशत खिलौने विदेशों से आयात करते हैं। यानि इन पर देश का करोड़ों रुपए बाहर जा रहा है। इस स्थिति को बदलना बहुत ज़रूरी है। और ये सिर्फ आंकड़ों की ही बात नहीं है, बल्कि ये सेक्टर देश के उस वर्ग तक, उस हिस्से तक विकास पहुंचाने में सामर्थ्य रखता है, जहां इसकी अभी सबसे ज्यादा ज़रूरत है। खेल से जुड़ा जो हमारा कुटीर उद्योग है, जो हमारी कला है, जो हमारे कारीगर हैं, वो गांव, गरीब, दलित, आदिवासी समाज में बड़ी संख्या में हैं। हमारे ये साथी बहुत सीमित संसाधनों में हमारी परंपरा, हमारी संस्कृति को अपनी बेहतरीन कला से निखारकर अपने खिलौनों में ढालते रहे हैं। इसमें भी विशेष रूप से हमारी बहनें, हमारी बेटियां बहुत बड़ी भूमिका निभा रही हैं। खिलौनों से जुड़े सेक्टर के विकास से, ऐसी महिलाओं के साथ ही देश के दूर-दराज इलाकों में रहने वाले हमारे आदिवासी और गरीब साथियों को भी बहुत लाभ होगा। लेकिन ये तभी संभव है जब, हम अपने लोकल खिलौनों के लिए वोकल होंगे, लोकल के लिए वोकल होना जरूरी है औरउनको बेहतर बनाने के लिए, ग्लोबल मार्केट में कंपिटेंट बनाने के लिए हर स्तर पर प्रोत्साहन देंगे। इसके लिए इनोवेशन से लेकर फाइनेंसिंग तक नए मॉडल विकसित करना बहुत ज़रूरी है। हर नए आइडिया को Incubate करना ज़रूरी है। नए Start ups को कैसे प्रमोट करें और खिलौनों की पारंपरिक कला को, कलाकारों को, कैसे नई टेक्नॉलॉजी, नई मार्केट डिमांड के अनुसार तैयार करें, ये भी आवश्यक है। 'टॉय-केथॉन' जैसे आयोजनों के पीछे यही सोच है।

साथियों,

सस्ता डेटा और इंटरनेट में आई तेजी, आज गांव- गांव तक देश को डिजिटली कनेक्ट कर रही है। ऐसे में फिजिकल खेल और खिलौनों के साथ-साथ वर्चुअल, डिजिटल, ऑनलाइन गेमिंग में भी भारत की संभावनाएं और सामर्थ्य, दोनों तेज़ी से बढ़ रहे हैं। लेकिन जितने भी ऑनलाइन या डिजिटल गेम्स आज मार्केट में उपलब्ध हैं, उनमें से अधिकतर का कॉन्सेप्ट भारतीय नहीं है, हमारी सोच से मेल नहीं खाता है। आप भी जानते हैं कि इसमें अनेक गेम्स के कॉन्सेप्ट या तो Violence को प्रमोट करते हैं या फिर Mental Stress का कारणबनातेहैं। इसलिए हमारा दायित्व है कि ऐसे वैकल्पिक कॉन्सेप्ट डिजायन हों, जिसमें भारत का मूल चिंतन, जो सम्पूर्ण मानव कल्याण से जुड़ा हुआ हो, वो हो, तकनीकि रूप में Superior हों, Fun भी हो, Fitness भी हो, दोनों को बढ़ावा मिलता रहे।और मैं अभी ये स्पष्ट देख रहा हूं कि Digital Gaming के लिए ज़रूरी Content और Competence हमारे यहां भरपूर है। हम 'टॉय-केथॉन' में भी हम भारत की इस ताकत को साफ देख सकते हैं। इसमें भी जो आइडिया सलेक्ट हुए हैं, उनमें मैथ्स और कैमिस्ट्री को आसान बनाने वाले कॉन्सेप्ट हैं, और साथ ही Value Based Society को मजबूत करने वाले आइडियाज भी हैं। अब जैसे, ये जो आई कॉग्नीटो Gaming का कॉन्सेप्ट आपने दिया है, इसमें भारत की इसी ताकत का समावेश है। योगसे VR और AI टेक्नॉलॉजी से जोड़कर एक नया गेमिंग सोल्यूशन दुनिया को देना बहुत अच्छा प्रयास है। इसी तरह आयुर्वेद से जुड़ा बोर्ड गेम भी पुरातन और नूतन का अद्भुत संगम है। जैसा कि थोड़ी देर पहले बातचीत के दौरान नौजवानों ने बताया भीकिये कंपीटिटिव गेम, दुनिया में योग को दूर-सुदूर पहुंचाने में बहुत मदद कर सकता है।

साथियों,

भारत के वर्तमान सामर्थ्य को, भारत की कला-संस्कृति को, भारत के समाज को आज दुनिया ज्यादा बेहतर तरीके सेसमझने के लिए बहुत उत्सुक है, लोग समझना चाहते हैं। इसमें हमारी Toys और Gaming Industry बहुत बड़ी भूमिका निभा सकती है। मेरा हर युवा इनोवेटर से, हर स्टार्ट-अप से ये आग्रह है कि एक बात का बहुत ध्यान रखें। आप पर दुनिया में भारत के विचार और भारत का सामर्थ्य, दोनों की सही तस्वीर रखने की जिम्मेदारी भी है।एक भारतश्रेष्ठ भारत से लेकर वसुधैव कुटुंबकम की हमारी शाश्वत भावना को समृद्ध करने का दायित्व भी आप पर है। आज जब देश आज़ादी के 75 वर्ष का अमृत महोत्सव मना रहा है, तो ये Toys और Gaming से जुड़े सभी Innovators और creators के लिए बहुत बड़ा अवसर है। आज़ादी के आंदोलन से जुड़ी अनेक ऐसी दास्तान हैं, जिनको सामने लाना ज़रूरी हैं। हमारे क्रांतिवीरों, हमारे सेनानियों के शौर्य की, लीडरशिप की कई घटनाओं को खिलौनों और गेम्स के कॉन्सेप्ट के रूप में तैयार किया जा सकता है। आप भारत के Folk को Future से कनेक्ट करने वाली भी एक मज़बूत कड़ी हैं। इसलिए ये ज़रूरी है कि हमारा फोकस ऐसे Toys, ऐसे गेम्स का निर्माण करने पर भी हो जो हमारी युवा पीढ़ी को भारतीयता के हर पहलू को Interesting और Interactive तरीके से बताए। हमारे Toys और Games, Engage भी करें, Entertain भी करें और Educate भी करें, ये हमें सुनिश्चित करना है। आप जैसे युवा इनोवेटर्स और क्रिएटर्स से देश को बहुत उम्मीदें हैं। मुझे पूरा विश्वास है कि आप अपने लक्ष्यों में जरूर सफल होंगे, अपने सपनों को जरूर साकार करेंगे। एक बार फिर इस 'टॉय-केथॉन' के सफल आयोजन के लिए मैं बहुत-बहुत बधाई देता हूँ, बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूँ !

धन्यवाद !