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नरेन्द्र मोदी भारत के प्रधानमंत्री हैं। एंटोनियो कोस्टा पुर्तगाल के प्रधानमंत्री हैं, जो वर्तमान में यूरोपीय संघ की परिषद के प्रेसिडेंट हैं।  

यूरोपीय संघ और भारत के नेताओं की शनिवार को हो रही बैठक, महत्वपूर्ण भू-राजनैतिक महत्व का क्षण है।  दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतांत्रिक देशों के बीच संवाद को मजबूत कर, यह हमारी साझेदारी को नई गति प्रदान करेगा, जिसका अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और निवेश पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

आने वाले वर्षो में महत्वपूर्ण क्षेत्रीय एवं वैश्विक ताकत के रूप में भारत की भूमिका का विस्तार जारी रहेगा और यह मजबूत साझेदारी, यूरोप को दुनिया के सामरिक महत्व के क्षेत्र में संबंधों को विविधता प्रदान करने का अवसर प्रदान करेगी ।

यूरोपीय संघ और भारत ने समय-समय पर अपने सहयोग को विस्तार देने का वादा किया है, जो हमारे 1994 की स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप में स्थापित आर्किटेक्चर पर आधारित है, लेकिन हमारी अर्थव्यवस्थाओं द्वारा प्रदान किए गए अवसरों और टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट की डाइनैमिक्स की तुलना में उस महत्वाकांक्षा को प्राप्त करना अभी भी एक चुनौती है।

पुर्तगाल ईयू-इंडिया लीडर्स की बैठक, इस संबंध में एक महत्वपूर्ण क्षण होने का वादा करती है, जिसने दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतांत्रिक स्थानों के बीच साझेदारी को नई गति प्रदान की, जो 1.8 बिलियन से अधिक लोगों से बना है। यह डायलॉग ईयू और इंडो-पैसिफिक के बीच संबंधों को पुनर्जीवित करने के लिए महत्वपूर्ण होगी। यह हमारे लिए लोकतंत्र, कानून के शासन, सहिष्णुता, और मानव अधिकारों की सार्वभौमिकता और अविभाज्यता में हमारे दृढ़ विश्वास की पुष्टि करने के लिए महत्वपूर्ण है।

हमें व्यापार और निवेश संबंधों को आगे बढ़ाने और प्रभावी बहुपक्षवाद और एक नियम-आधारित व्यवस्था का समर्थन करने के लिए अपने लोकतांत्रिक स्थानों की विशाल क्षमता का उपयोग करते हुए, अपने रिश्ते को ऊंचा करने के लिए इस अवसर का फायदा उठाना चाहिए।

यूरोपीय संघ और भारत के बीच यह बैठक समसामयिक समाज और अर्थव्यवस्थाओं के विकास के लिए डिजिटल ट्रांसजिशन, कनेक्टिविटी, मोबिलिटी, हेल्थ, द एनर्जी ट्रांजिशन और क्लाइमेट एक्शन जैसे निर्णायक महत्व के नए क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने का एक मौका है।

यूरोपीय संघ और भारत पहले से ही अपने समाजों के विकास और स्थिरता के लिए बढ़ती प्रासंगिकता के मुद्दों में महत्वपूर्ण भागीदार हैं। कल, हम सहयोग के नए मार्ग खोलेंगे और आगे बढा़एंगे। उदाहरण के लिए यूरोपीय संघ और भारत,  ट्रांसपोर्ट, एनर्जी, डिजिटल और लोगों से लोगों के बीच संपर्क को बढ़ाने के उद्देश्य से एक कनेक्टिविटी पार्टनरशिप का शुभारंभ करेंगे।

यह बैठक यूरोपीय संघ और भारत के बीच व्यापार और निवेश समझौता को एक नई गति देने का एक अवसर है।

यूरोपीय संघ, भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और भारतीय निर्यात के लिए दूसरा सबसे बड़ा डेस्टिनेशन है। यूरोपीय संघ और भारत के बीच व्यापार, पिछले दशक में 72 प्रतिशत बढ़ा है। यूरोपीय संघ भी भारत में अग्रणी विदेशी निवेशक है। विदेशी निवेश में इसकी हिस्सेदारी पिछले एक दशक में दोगुनी से अधिक हो गई है। कुछ 6,000 यूरोपीय कंपनियां भारत में मौजूद हैं, जो 1.7 मिलियन प्रत्यक्ष और 5 मिलियन अप्रत्यक्ष नौकरियां पैदा करती हैं। हाल के वर्षों में भारत से बढ़ते निवेश का मतलब यूरोपीय संघ में भारतीय कंपनियों की सक्रिय उपस्थिति से भी है।

यह भारत और यूरोप दोनों के लिए सस्टेनेबल ग्रोथ और जॉब्स क्रिएशन के लिए एक महत्वपूर्ण संचालक के रूप में कार्य करने में सक्षम एक महत्वाकांक्षी और संतुलित व्यापार समझौते की ओर बातचीत को फिर से शुरू करने का सही समय है। इसके अलावा यूरोपीय संघ-भारत समझौता, अंतर्राष्ट्रीय कारोबार सहयोग के फायदे के बारे में दुनिया को मजबूत संदेश देगा ।

इसी तरह का तर्क निवेश पर भी लागू होता है। यूरोपीय संघ के व्यापक इन्वेस्टमेंट प्रोटेक्शन फ्रेमवर्क की बातचीत, भारत और यूरोपीय संघ की कंपनियों को एक दूसरे के बाजारों में अपनी उपस्थिति का विस्तार करने के लिए अधिक स्थिरता और निश्चितता प्रदान करेगी।

यूरोपीय संघ-भारत संबंधों को हमेशा आपसी सहयोग और एकजुटता द्वारा चिह्नित किया गया है। यह कोरोना वायरस महामारी के दौरान स्पष्ट हुआ है जब दोनों ने एक-दूसरे और दुनिया के बाकी हिस्सों का सहयोग किया। भारत ने पहले यूरोप को मेडिकल सप्लाई की और अब यूरोपीय संघ ने भारत को सहायता प्रदान की, क्योंकि भारत कोविड-19 की दूसरी लहर की चपेट में है।

अतीत और हाल, दोनों में पुर्तगाल और भारत ने हमेशा दो महाद्वीपों को एक साथ लाने की भूमिका निभाई है। पुर्तगाली ईयू प्रेसीडेंसी में वर्ष 2000 में पुर्तगाल ने लिस्बन में पहली ईयू- इंडिया समिट की मेजबानी की और भारत ने 2007 में पुर्तगाली प्रेसीडेंसी में ही नई दिल्ली में आठवें ईयू-इंडिया समिट की मेजबानी की।

साहित्य में नोबल पुरस्कार विजेता रवींद्रनाथ टैगोर 160 साल पहले 9 मई को पैदा हुए थे। उन्होंने अपने जीवन के विभिन्न काल में यूरोप की व्यापक यात्रा की। महान कवि को ईस्ट और वेस्ट को एक साथ लाने के लिए भारत के मिशन में लोगों के बीच म्यूचल अंडरस्टैंडिंग के सिद्धांतों में दृढ़ विश्वास था। उन्होंने यूरोप और भारत के मिलन बारे में अक्सर लिखा, जिसमें उन्होंने गहरे सांस्कृतिक, राजनीतिक और यहां तक कि व्यक्तिगत महत्व को भी बताया: "मैंने अपने व्यक्तिगत जीवन में पूर्व और पश्चिम के मिलन को महसूस किया है।"

इसी तरह, पुर्तगाली पहचान को बेहतर ढंग से प्रस्तुत करने वाली महाकाव्य, भारत की यात्रा को बयान करती है। लुइस वाज़ डे कैमेस द्वारा लिखित "लुसीड्स" भी यूरोप और भारत के बीच संबंधों के बारे में बताता है।

यह हमें विशेष रूप से दो महाद्वीपों में फैले रिश्ते के गुणों बारे में जागरूक करता है और दो विशाल महासागरों को जोड़ता है, जो हमारे देशों और समाजों में विशाल परिवर्तनों के साथ विकसित हुए हैं। यह महत्वपूर्ण है कि हम इस महत्वपूर्ण पल को हमारे पास से न जाने दें।

यूरोपीय संघ और भारत के बीच यात्रा एक साथ जारी रहेगी और राजनीतिक, आर्थिक और तकनीकी सहयोग के नए मार्गों की तलाश में आगे बढ़ेगी, जिससे आपसी लाभ की संभावनाएं बढ़ेंगी।

 

डिस्कलेमर :

यह आर्टिकल पहली बार Politico में पब्लिश हुआ था।

यह उन कहानियों या खबरों को इकट्ठा करने के प्रयास का हिस्सा है जो प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और लोगों के जीवन पर उनके प्रभाव पर उपाख्यान / राय / विश्लेषण का वर्णन करती हैं।

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जिस कश्मीर के लिए जेल गए थे नन्ना, मोदी ने पूरा किया वह सपना
November 16, 2021
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जनसंघ और उसके बाद बनी भाजपा के संस्थापक सदस्य रहे लक्ष्मीनारायण गुप्ता 'नन्ना' प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की कार्यशैली से अत्यधिक प्रभावित हैं। नन्ना ने बताया कि वे डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी द्वारा कश्मीर में दो निशान, दो विधान के खिलाफ शुरू किए गए आंदोलन में शामिल होकर जेल गए थे। आज कश्मीर से धारा-370 और 35-ए हटाकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने श्यामा प्रसाद मुखर्जी सहित करोड़ों देशवासियों का जो सपना पूरा किया है। उससे वह मोदी से बेहद प्रभावित हैं और उनकी लंबी आयु के लिए ईश्वर से प्रार्थना करते हैं। हरिभूमि के साथ इंटरव्यू में नन्ना ने विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की।

सवाल : मोदी की कार्यशैली से आप कितने प्रभावित हैं, उनके योगदान को किस रूप में देखते हैं।

जवाब : मैं, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की कार्यशैली से बहुत प्रभावित हूं। मैंने जिस कश्मीर में दो निशान, दो विधान का विरोध करते हुए डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के आंदोलन में सहभागिता की और जेल गया। आज वर्षो बाद कश्मीर में धारा-370 और 35-ए हटने के बाद वह सपना पूरा हुआ। मेरे साथ करोड़ों भारतीयों का सपना पूरा हुआ। मोदी की कार्यशैली सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास है, जो देशवासियों को बिना भेदभाव के साथ एकजुटता और समानता का संदेश देती है। उनके नेतृत्व में देश का सम्मान दुनियाभर में बढ़ा है, आज भारत मजबूत राष्ट्रों में गिना जाता है।

सवाल : आप जनसंघ के संस्थापक सदस्य रहे, आपके सामने भाजपा का गठन हुआ, उस दौरान पार्टी के लिए क्या चुनौतियां थीं।

जवाब : उस दौरान पार्टी के पास संसाधनों का बेहद अभाव था। तब हम साइकिल से गांव-गांव जाकर लोगों के बीच भाजपा का प्रचार करते थे। ग्रामीणों के बीच पहुंचकर मीटिंग करके उन्हें पार्टी की नीतियों के बारे में समझाते थे। पैसों का अभाव था तो वकालत करने से जो राशि प्राप्त हो जाती थी, उसी में से खर्च चलाते थे। तब गांवों में जाकर कैंप लगाकर फॉर्म भरवाए। पार्टी से हजारों कार्यकर्ताओं को जोड़ा, जिससे पार्टी मजबूत हुई।

सवाल: उस समय की भाजपा और आज की भाजपा में संगठन स्तर पर क्या परिवर्तन देखते हैं।

जवाब : उस दौरान कार्यकर्ताओं ने साधनों के अभाव के बीच पार्टी के लिए पूरी मेहनत व निष्ठा के साथ काम किया। आज भी कर रहे हैं, लेकिन आज संसाधन बेहतर है। उस वक्त की गई मेहनत से जो प्लेटफॉर्म तैयार हुआ, उससे संगठन शक्ति बढ़ती गई और आज संगठन का स्वरूप देश में सबसे मजबूत है।

सवाल : आज भाजपा में दूसरे दलों से बाहरी नेता बड़ी संख्या में आ रहे हैं, उन्हें सत्ता व संगठन में महत्वपूर्ण पद मिल रहे हैं। इससे भाजपा के पुराने नेता अपने को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं, आप क्या मानते हैं।

जवाब : मैं ऐसा नहीं मानता हूं, भाजपा परिवार की राष्ट्रवादी विचारधारा से अगर लोग जुड़ रहे हैं तो स्वाभाविक रूप से नए लोगों को स्थान दिया जाता है। ऐसा नहीं है कि पुराने कार्यकर्ता की उपेक्षा हो रही है। पुराने लोगों को अब पद की जरूरत नहीं हैं। वे संरक्षक के रूप में नई भूमिका को स्वीकार कर रहे हैं।

 

 

Author Name: HariBhoomi News - Bhopal

Disclaimer:

This article was first published in HariBhoomi News - Bhopal.

It is part of an endeavour to collect stories which narrate or recount people’s anecdotes/opinion/analysis on Prime Minister Shri Narendra Modi & his impact on lives of people.