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अव्यावहारिक राजनेताओं और 2013 के राजनीतिक वर्ग के व्यापक ट्रेंड को याद करें? कैसे अन्ना हजारे, जिनके आंदोलन हमेशा राजनीतिक वर्ग के उपहास पर फलते-फूलते रहे हैं, कुशासन पर तीखे हमले और उनकी रैलियों व अनशनों पर तीखी प्रतिक्रिया, कोई भी माहौल बदलने को लेकर आकलन करने में सक्षम होगा। निश्चित तौर पर बेहतरी के लिए, जिसे देश ने 2014 के बाद साकार होते देखा। पिछले 7 वर्षों के दौरान पीएम नरेन्द्र मोदी के शासन की एक महत्वपूर्ण विशेषता, राजनीतिक वर्ग को बार-बार नीचा दिखाने के कारोबार का कम होता प्रभाव है जो लोकतंत्र को नुकसान पहुंचाते हैं।

कैनेडी स्कूल ऑफ गवर्नमेंट की प्रसिद्ध राजनीतिक वैज्ञानिक पिप्पा नॉरिस ने ठीक ही तर्क दिया है कि लोकतंत्र के अस्तित्व के लिए लोकतांत्रिक जवाबदेही और राज्य की प्रभावशीलता को साथ-साथ चलना होगा। वह आगे कहती हैं कि हालांकि यह निर्विवाद है कि लोकतंत्र की संस्थाएं राज्य सत्ता के दुरुपयोग को रोकती हैं, इसका मतलब यह नहीं है कि शासन के लिए चुने गए लोगों में सामाजिक जरूरतों का समाधान करने वाली प्रभावी सार्वजनिक नीतियों को लागू करने की क्षमता स्वतः ही होगी। जाहिर है, इसलिए लोकतंत्र और शासन का विलय, विशेष रूप से राज्य की क्षमता, विकास के लक्ष्यों को प्राप्त करने का एकमात्र तरीका है। मोदी ने जो किया है, ठीक वैसा ही किया है।

इस साल, 7 अक्टूबर को सरकार के मुखिया के रूप में नरेन्द्र मोदी के दो दशक पूरे हो रहे हैं: शुरुआत में गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में 13 साल और बाद में प्रधानमंत्री के रूप में 7 साल।

उनके शासन के कई पहलू हैं जिसने उन्हें उल्लेखनीय सफलता दिलाई है। हालांकि, मोदी द्वारा लाए गए महत्वपूर्ण वैल्यू एडिशन की कम से कम तीन महत्वपूर्ण विशेषताओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। सबसे पहले, उनका इरादा और उद्देश्य की शुद्धता; दूसरे, उनके इनोवेटिव और कल्पनाशील विचार; तीसरा, मजबूत और दोषरहित कार्यान्वयन के लिए उनके अथक प्रयास।

यह सच है कि कुछ मुद्दों पर सरकार की आलोचना करने वाले लोग हो सकते हैं, लेकिन उनमें से भी कई लोग मोदी का समर्थन करते हैं क्योंकि जिस उद्देश्य के साथ वह काम कर रहे हैं, वह मजबूत और पारदर्शी है। कोई भी ऐसा आरोप नहीं लगा पाया है जो पीएम की मंशा पर सवालिया निशान लगाए। वे बगैर किसी 'बोझ' के आए हैं। याद रखें कि उन्हें वही विरासत, वही  नौकरशाही, वही न्यायिक प्रणाली, वही कानूनी ढांचे और वही कार्यात्मक व्यवस्था के साथ काम करना था। फिर भी वे अधिकारियों को प्रेरित करने, रिजल्ट देने और यह स्थापित करने में सक्षम रहे हैं कि ट्रांसफॉर्मेशनल पॉलटिक्स या परफॉर्मेंस पॉलिटिक्स भी जीत सकती है। लोगों की भागीदारी, मिनिमम गवर्नमेंट मैक्सिमम गवर्नेंस, जीवन की गुणवत्ता को ऊपर उठाने और लोकतंत्र को डिलीवर करने जैसे कुछ विषयों पर उनका जोर, उन्हें दूसरों से अलग करता है।

जब इनोवेशन की बात आती है, तो पिछली किसी भी सरकार ने लोक प्रशासन में उलझे मुद्दों से निपटने के दौरान लीक से हटकर अप्रोच को बढ़ावा देने के लिए इतनी लगन से काम नहीं किया है। निजी तौर पर, मोदी हमेशा इनोवेशन के माध्यम से समाधान खोजने के लिए बहुत उत्सुक रहे हैं। जब वे गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तो उन्होंने अहमदाबाद में बस रैपिड ट्रांसपोर्ट सिस्टम (बीआरटीएस) पर सफलतापूर्वक काम किया, जब दूसरे राज्यों के लगभग सभी शहरों में यह विफल रहा। उन्होंने इनोवेटिव रिफॉर्म्स की शुरुआत करते हुए इसे सुनिश्चित किया। उनका रचनात्मक झुकाव, उनकी कई तरह की फर्स्ट इनिशिएटिव के माध्यम से स्पष्ट है। इस सूची में MyGov पोर्टल, मन की बात के जरिए देशवासियों के साथ सीधा संवाद, सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM) पोर्टल, मेगा इंफ्रा प्रोजेक्ट्स पर नजर रखने के उद्देश्य से उनकी मासिक 'प्रगति' बैठकें, टॉप पुलिस अधिकारियों के साथ उनकी वार्षिक विस्तृत बातचीत शामिल हैं हालांकि सूची काफी लंबी है। वे यथास्थिति को बरकरार रखने या फिर जो पहले हुआ है, उसे बदला नहीं जा सकता है, में विश्वास नहीं करते हैं। वह अपने रास्ते में आने वाली असंख्य चुनौतियों का सामना आगे बढ़ कर सामना करते हैं। पीपुल पद्म (People’s Padma) अवार्ड से लेकर प्रधानमंत्री संग्रहालय तक और क्षमता निर्माण आयोग (Capacity Building Commission) से लेकर अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन तक,  वे नए विचारों के साथ आते हैं। बिना कोई शोर-शराबा किए उन्होंने चुपचाप सबसे पिछड़े जिलों को आकांक्षी जिलों और विकलांगों को दिव्यांगों में बदल दिया है। ये सिर्फ नामकरण में बदलाव नहीं हैं। ये मानसिकता और आउटलुक बदलने के उदाहरण हैं।

एक दोष रहित कार्यान्वयन के लिए दृढ़ता से किए गए उपाय पीएम मोदी के शासन की तीसरी प्रमुख विशेषता है। कुछ और महीनों तक प्रतीक्षा करें और कई नई तकनीक सुविधाओं से लैस, लोकतंत्र का एक नया मंदिर, नया संसद भवन तैयार हो जाएगा। सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के बारे में भी यही कहा जा सकता है। कुछ साल पहले, उन्होंने स्वतंत्र रूप से प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की पूरी समीक्षा की और अधिकांश शैक्षिक परिणामों (आउट्कम) की समीक्षा करने और रिफॉर्म्स की सिफारिश करने के बाद, अधिकारियों को पूरी तरह से समीक्षा करने का निर्देश दिया।

लोगों ने पहले जिसे अति महत्वाकांक्षी या लगभग असंभव बताया था, उसे मोदी ने सुनिश्चित कर दिखाया।  जिस तरह से उन्होंने अति-राजनीतिक मुद्दों पर दृढ़ता से काम किया है, जैसे- आर्टिकल 370 को रद्द करना और तीन तलाक प्रथा को समाप्त करना, जिसे लंबे समय से संवैधानिक जनादेश की अवहेलना करते हुए अनदेखा किया गया था, उनकी अटल प्रतिबद्धता का संकेत है। यह अकारण ही नहीं था कि उनके कार्यकाल में ही सड़क निर्माण की गति बढ़ी, ओलंपिक और पैरालंपिक खेलों में बेहतर प्रदर्शन के प्रयासों ने गति पकड़ी, उद्यमिता और स्टार्ट-अप जेननेक्स्ट के मूलमंत्र बन गए हैं और नई शिक्षा नीति ने ठोस रूप लेना शुरू कर दिया है। यहां तक कि उनके आलोचक भी इस बात से सहमत होंगे कि पीएम मोदी ने कोविड-19 महामारी के दौरान चुनौतीपूर्ण स्थिति को शानदार तरीके से हैंडल किया है।

भगवद-गीता अधिष्ठान (सनातन मूल्यों/ सिद्धांतों के एक समूह में विश्वास/ प्रतिबद्धता) के बारे मे बात करती है और जब कोई किसी मिशन पर निकलता है तो कर्ता, मौलिक रूप से आवश्यक घटक (Ingredients) के रूप में होता है। पीएम मोदी का मिशन 'एक भारत-श्रेष्ठ भारत' है और अपनी तरह के एक अकेले कर्मयोगी हैं जो एक निश्चित अधिष्ठान के साथ, निकट भविष्य में इस महान मिशन को पूरा कर सकते हैं।

लेखक का नाम : विनय सहस्रबुद्धे

डिस्कलेमर :

यह आर्टिकल पहली बार The New Indian Express में पब्लिश हुआ था।

यह उन कहानियों या खबरों को इकट्ठा करने के प्रयास का हिस्सा है जो प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और लोगों के जीवन पर उनके प्रभाव पर उपाख्यान / राय / विश्लेषण का वर्णन करती हैं।

 

 

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जिस कश्मीर के लिए जेल गए थे नन्ना, मोदी ने पूरा किया वह सपना
November 16, 2021
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जनसंघ और उसके बाद बनी भाजपा के संस्थापक सदस्य रहे लक्ष्मीनारायण गुप्ता 'नन्ना' प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की कार्यशैली से अत्यधिक प्रभावित हैं। नन्ना ने बताया कि वे डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी द्वारा कश्मीर में दो निशान, दो विधान के खिलाफ शुरू किए गए आंदोलन में शामिल होकर जेल गए थे। आज कश्मीर से धारा-370 और 35-ए हटाकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने श्यामा प्रसाद मुखर्जी सहित करोड़ों देशवासियों का जो सपना पूरा किया है। उससे वह मोदी से बेहद प्रभावित हैं और उनकी लंबी आयु के लिए ईश्वर से प्रार्थना करते हैं। हरिभूमि के साथ इंटरव्यू में नन्ना ने विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की।

सवाल : मोदी की कार्यशैली से आप कितने प्रभावित हैं, उनके योगदान को किस रूप में देखते हैं।

जवाब : मैं, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की कार्यशैली से बहुत प्रभावित हूं। मैंने जिस कश्मीर में दो निशान, दो विधान का विरोध करते हुए डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के आंदोलन में सहभागिता की और जेल गया। आज वर्षो बाद कश्मीर में धारा-370 और 35-ए हटने के बाद वह सपना पूरा हुआ। मेरे साथ करोड़ों भारतीयों का सपना पूरा हुआ। मोदी की कार्यशैली सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास है, जो देशवासियों को बिना भेदभाव के साथ एकजुटता और समानता का संदेश देती है। उनके नेतृत्व में देश का सम्मान दुनियाभर में बढ़ा है, आज भारत मजबूत राष्ट्रों में गिना जाता है।

सवाल : आप जनसंघ के संस्थापक सदस्य रहे, आपके सामने भाजपा का गठन हुआ, उस दौरान पार्टी के लिए क्या चुनौतियां थीं।

जवाब : उस दौरान पार्टी के पास संसाधनों का बेहद अभाव था। तब हम साइकिल से गांव-गांव जाकर लोगों के बीच भाजपा का प्रचार करते थे। ग्रामीणों के बीच पहुंचकर मीटिंग करके उन्हें पार्टी की नीतियों के बारे में समझाते थे। पैसों का अभाव था तो वकालत करने से जो राशि प्राप्त हो जाती थी, उसी में से खर्च चलाते थे। तब गांवों में जाकर कैंप लगाकर फॉर्म भरवाए। पार्टी से हजारों कार्यकर्ताओं को जोड़ा, जिससे पार्टी मजबूत हुई।

सवाल: उस समय की भाजपा और आज की भाजपा में संगठन स्तर पर क्या परिवर्तन देखते हैं।

जवाब : उस दौरान कार्यकर्ताओं ने साधनों के अभाव के बीच पार्टी के लिए पूरी मेहनत व निष्ठा के साथ काम किया। आज भी कर रहे हैं, लेकिन आज संसाधन बेहतर है। उस वक्त की गई मेहनत से जो प्लेटफॉर्म तैयार हुआ, उससे संगठन शक्ति बढ़ती गई और आज संगठन का स्वरूप देश में सबसे मजबूत है।

सवाल : आज भाजपा में दूसरे दलों से बाहरी नेता बड़ी संख्या में आ रहे हैं, उन्हें सत्ता व संगठन में महत्वपूर्ण पद मिल रहे हैं। इससे भाजपा के पुराने नेता अपने को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं, आप क्या मानते हैं।

जवाब : मैं ऐसा नहीं मानता हूं, भाजपा परिवार की राष्ट्रवादी विचारधारा से अगर लोग जुड़ रहे हैं तो स्वाभाविक रूप से नए लोगों को स्थान दिया जाता है। ऐसा नहीं है कि पुराने कार्यकर्ता की उपेक्षा हो रही है। पुराने लोगों को अब पद की जरूरत नहीं हैं। वे संरक्षक के रूप में नई भूमिका को स्वीकार कर रहे हैं।

 

 

Author Name: HariBhoomi News - Bhopal

Disclaimer:

This article was first published in HariBhoomi News - Bhopal.

It is part of an endeavour to collect stories which narrate or recount people’s anecdotes/opinion/analysis on Prime Minister Shri Narendra Modi & his impact on lives of people.