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छठे ब्रिक्स शिखर सम्मेलन: “समावेशी विकास : स्थायी समाधान” के पूर्ण अधिवेशन में प्रधानमंत्री के वक्तव्य का मूल पाठ

महामहिम राष्ट्रपति डिलमा राउजेफ

महामहिम राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन

महामहिम राष्ट्रपति सी जिनपिंग

महामहिम राष्ट्रपति जैकब जुमा

गणमान्य प्रतिनिधि, देवियो और सज्जनों

मुझे ब्राजील आकर बहुत खुशी हो रही है। मैं राष्ट्रपति राउजेफ, सरकार और ब्राजील के अद्भुत लोगों को उनके आतिथ्य के लिए धन्यवाद देता हूं।

यह मेरा पहला ब्रिक्स शिखर सम्मेलन है और वास्तव में यह एक शानदार अनुभव रहा है। मुझे यहाँ आये हुए दुनिया के नेताओं के विचार और उनकी दूरदृष्टि से बहुत कुछ सीखने को मिला है।

मुझे इन सभी नेताओं में से प्रत्येक के साथ व्यक्तिगत संबंधों की शुरुआत करने का भी सौभाग्य प्राप्त है। मुझे विश्वास है कि आगे आने वाले दिनों में हमारे व्यक्तिगत संबंध और गहरे एवं मजबूत होंगे।

महानुभावों, आज ब्रिक्स अपने शिखर सम्मलेन के दूसरे दौर में है।

यह शिखर सम्मेलन एक नाजुक समय पर हो रहा है। विश्व जबर्दस्त आर्थिक और राजनीतिक उथलपुथल का सामना कर रहा है। कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में संघर्ष और अस्थिरता बढ़ी है।

इससे गरीबी से निपटने, विकास को और अधिक समावेशी बनाने और विकास का एक स्थायी मॉडल विकसित करने की चुनौतियों बढ़ जाती है।

विश्व में शांति और स्थिरता का माहौल तैयार करने की जरुरत है। सहयोग और सहभागिता के नए रास्ते बनाने की जरुरत है।

मुझे विश्वास है कि ब्रिक्स इन समस्याओं को हल कर सकता है। अंतरराष्ट्रीय संस्था के रूप में ब्रिक्स की विशिष्टता यह साबित करती है। पहली बार मौजूदा समृद्धि या साझा पहचान के पैरामीटर पर नहीं बल्कि ‘संभावित भविष्य’ के पैरामीटर पर यह देशों के एक समूह को एक साथ लेकर आया है। ब्रिक्स के यह विचार भविष्य की तरफ इशारा करता है।

इसलिए मुझे विश्वास है कि यह मौजूदा अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में नया दृष्टिकोण और तंत्र जोड़ सकता है।

अतः हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हमारी साझेदारी और संस्थाओं का भविष्य में विकास इस मूल विचार पर आधारित हो।

ब्रिक्स को एक शांतिपूर्ण, संतुलित और स्थिर विश्व को आकार देने में एक संयुक्त और स्पष्ट भूमिका निभानी होगी।

हमें आतंकवाद, साइबर सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन जैसी वैश्विक चुनौतियों से लड़ने में अपने सहयोग को तेज करने की जरुरत है।

ब्रिक्स को संवृद्धि और विकास पर वैश्विक विचार-विमर्श को आकार देने में एक सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। इसे 2015 के बाद विकास एजेंडा को एक अलग रूप देना होगा जिसमें गरीबी उन्मूलन मुख्य होगा।

हमें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों की तरह शासन की वैश्विक संस्थाओं में तत्काल सुधार करने का प्रयास करना चाहिए।

हमें विश्व व्यापार संगठन की व्यवस्था को एक नया रूप देने में मदद करनी चाहिए। मजबूत, संतुलित और सतत वैश्विक आर्थिक विकास के लिए एक मुक्त व्यापार व्यवस्था अत्यंत महत्वपूर्ण है।

इसे विकासशील देशों की विकास सबंधी आकांक्षाओं पर ध्यान देना होगा।

इसे कमजोर वर्गों की विशेष जरूरतों, खासकर खाद्य सुरक्षा जैसे क्षेत्रों को भी पूरा करना होगा।

महामहिम, ब्रिक्स के पास इतना अनुभव है और इसका सभी जगहों पर इतना प्रभाव है कि यह दुनिया को इन मुद्दों पर कार्य के लिए बाध्य कर सकती है। यद्यपि हमारा अपना लाभ हमारे अपने संबंधों को और अधिक मजबूत करने में निहित है।

यही कारण है कि हमारे पहले विचार-विमर्श में मैंने इस शक्तिशाली मंच के विकेन्द्रीकरण की बात की है। हमें शिखर सम्मेलन केंद्रित विचार से आगे बढ़कर सक्रिय होना होगा।

हमें उप-राष्ट्र स्तरीय आदान-प्रदान को प्रखर बनाना चाहिए। हमारे राज्यों, शहरों और अन्य स्थानीय निकायों के बीच प्रखर संबंध होने चाहिए।

वास्तव में, ब्रिक्स को ‘लोग से लोग’ संबंध से प्रेरित किया जाना चाहिए। विशेष रूप से हमारे युवाओं को इसके लिए आगे आना होगा। ब्रिक्स को युवाओं की सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए अभिनव तंत्र विकसित करना चाहिए। एक ऐसी संभव पहल की जानी चाहिए जिसमें नवाचार को बढ़ावा देने के लिए ब्रिक्स युवा वैज्ञानिक फोरम की स्थापना की जाए।

एक और संभावना यह हो सकती है कि ब्रिक्स भाषा स्कूलों की स्थापना की जाये जिसमें हमारे देशों की भाषाओं में प्रशिक्षण दिया जाए।

हम गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के लिए बड़े पैमाने पर खुले ऑनलाइन पाठ्यक्रम तैयार करने पर भी विचार कर सकते हैं ताकि सभी आसानी से शिक्षा प्राप्त कर सकें।

हम एक ब्रिक्स विश्वविद्यालय की भी स्थापना कर सकते हैं। इसके माध्यम से और साथ-ही-साथ मेधावी छात्र, संकाय और अनुसंधान सहयोग के माध्यम से हमारे सभी देशों के प्रत्येक विश्वविद्यालयों के परिसर आपस में जुड़ जायेंगे।

महानुभाव, मुझे विश्वास है कि हम सभी आपस में मिलकर और साथ काम कर और अधिक सफल हो सकते हैं।

हमें ज्ञान, कौशल और संसाधनों में एक-दूसरे की शक्ति का लाभ उठाना चाहिए।

हमें अपने अनुभव, नवाचार और प्रौद्योगिकी को साझा करने के लिए तंत्र विकसित करना चाहिए। इसके लिए कई चीजें की जा सकती हैं, जैसे :

• सस्ती और विश्वसनीय स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकियों के विकास पर अपने अनुभवों को साझा करने।

• गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य और शिक्षा की सुलभ उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए उपग्रह संचार जैसी उन्नत प्रौद्योगिकी का उपयोग करना।

• ब्रिक्स देशों के बीच पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए एक रूपरेखा तैयार करना।

• आपदा प्रबंधन से संबंधित अनुभव साझा करना और

• खेलों में सहयोग और प्रतिस्पर्धा

महानुभाव, वैश्विक संबंधों में आर्थिक ताकतों का महत्व तेजी से बढ़ रहा है। व्यापार, पर्यटन, प्रौद्योगिकी, परंपरा और प्रतिभा में मौजूदा मानदंडों को फिर से तैयार करने की शक्ति है।

ब्रिक्स के हम सभी देश अनुभव और संसाधनों का एक अनूठा मिश्रण लेकर आये हैं। हम चार महाद्वीपों का प्रतिनिधित्व करते हैं। हम में से हर एक के पास तुलनात्मक लाभ और पूरक शक्ति है। हमारे संयुक्त एवं व्यक्तिगत भलाई के लिए ब्रिक्स को इसका उपयोग करने हेतु एक तंत्र विकसित करना चाहिए। इस दिशा में अच्छे कार्य पहले ही किये जा चुके हैं।

दो साल पहले दिल्ली में हुए शिखर सम्मेलन में एक नए विकास बैंक स्थापित करने के कार्य को फ़ोर्टालेज़ा में कार्यान्वित किया जा चुका है। इससे ब्रिक्स राष्ट्रों को फायदा होगा। लेकिन यह अन्य विकासशील देशों का भी सहयोग करेगा। और विकासशील देशों के रूप में हमारे स्वयं के अनुभवों में निहित होगा।

ब्रिक्स आकस्मिक रिजर्व व्यवस्था ब्रिक्स देशों को अपनी आर्थिक स्थिरता की रक्षा करने का एक नया साधन देता है। वैश्विक वित्तीय बाजारों में आयी जबर्दस्त अस्थिरता के इस समय में यह एक महत्वपूर्ण पहल है।

सहयोग के लिए एक्सपोर्ट क्रेडिट गारंटी एजेंसियों और नवाचार पर इंटर-बैंक सहयोग करार के बीच समझौता ज्ञापन एक अन्य ठोस कदम है जो ब्रिक्स देशों के बीच सहयोग को प्रोत्साहित करेंगे।

मुझे लगता है कि हम एक ऐसे स्तर तक पहुँच चुके हैं जहाँ हमें और अधिक महत्वाकांक्षी होना चाहिए। हमें ऐसे ठोस तंत्रों और परिणामों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। ब्रिक्स को प्रभावशाली मंच बनायें।

महानुभावों, हमारे पास भविष्य को परिभाषित करने का एक अवसर है - न सिर्फ अपने देशों की बल्कि पूरे विश्व की। मैं एक ऐसी धरती से आया हूं, जहां पूरे विश्व को अपना परिवार मानने अर्थात – ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ का विचार हमारी संस्कृति के चारित्रिक गुणों के मूल में समाया है; मैं इसे एक बड़ी जिम्मेदारी समझता हूँ।

हमारे कदम विकासशील दुनिया की आशाओं, आकांक्षाओं और विश्वास को सुदृढ़ करने चाहिए।

एक बार फिर, मैं इस शिखर सम्मेलन की मेजबानी के लिए राष्ट्रपति राउजेफ और ब्राजील के अद्भुत लोगों को धन्यवाद देता हूं।

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पश्चिम बंगाल के किसानों को पहली बार पीएम किसान योजना का लाभ मिलना शुरू हुआ है
एमएसपी पर गेहूं की खरीद ने इस साल नए रिकॉर्ड बनाए हैं
सरकार पूरी ताकत से कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई लड़ रही है

आप सभी किसान साथियों से ये चर्चा अपने आप में एक नई उम्‍मीद जगाती है, नया विश्‍वास पैदा करती है। आज जैसा अभी हमारे मंत्री जी श्रीमान नरेंद्र सिंह तोमर जी बता रहे थे आज भगवान बसवेश्वर जयंती है, परशुराम जयंती भी है। आज अक्षय तृतीया का भी पावन पर्व है। और मेरी तरफ से देशवासियों को ईद की भी मुबारक।

कोरोना के इस समय में समस्त देशवासियों का हौसला बढ़े, इस महामारी को परास्त करने का संकल्प और दृढ़ हो, इस कामना के साथ आप सब किसान भाईयों से जो मेरी बातचीत हुई है अब मैं इसको आगे बढ़ाउंगा। इस कार्यक्रम में उपस्थित कृषि और किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र श्रीमान सिंह तोमर जी, केंद्रीय मंत्रिमंडल के मेरे अन्य सहयोगी गण, सभी मुख्यमंत्री, राज्य सरकारों के आदरणीय मंत्रिगण, सांसदगण, विधायकगण और देश भर के मेरे किसान भाईयों और बहनों,

आज बहुत ही चुनौतीपूर्ण समय में हम ये संवाद कर रहे हैं। इस कोरोना काल में भी देश के किसानों, हमारे कृषि क्षेत्र मे अपने दायित्व को निभाते हुए, अन्न की रिकॉर्ड पैदावार की है, आप कृषि में नए-नए तरीके आजमा रहे हैं। आपके प्रयासों को पीएम किसान सम्मान निधि की एक और किश्त और मदद करने वाली है। आज अक्षय तृतीया का पावन पर्व है, कृषि के नए चक्र की शुरुआत का समय है और आज ही करीब 19 हज़ार करोड़ रुपए किसानों के बैंक खातों में सीधे ट्रांसफर किए गए हैं। इसका लाभ करीब-करीब 10 करोड़ किसानों को होगा। बंगाल के किसानों को पहली बार इस सुविधा का लाभ मिलना शुरू हुआ है। आज बंगाल के लाखों किसानों को पहली किश्त पहुंची है। जैसे-जैसे राज्य से किसानों के नाम केंद्र सरकार को मिलेंगे, वैसे-वैसे लाभार्थी किसानों की संख्या और बढ़ती जाएगी।

 

साथियों,

पीएम किसान सम्मान निधि से विशेष रूप से छोटे और मझोले किसानों को अधिक लाभ हो रहा है। आज के कठिन समय में ये राशि इन किसान परिवारों के बहुत काम आ रही है। अभी तक इस योजना के तहत देश के लगभग 11 करोड़ किसानों के पास लगभग 1 लाख 35 हज़ार करोड़ रुपए पहुंच चुके हैं मतलब की सवा लाख करोड़ से भी ज्‍यादा सीधे किसानों के खाते में, कोई बिचौलिया नहीं। इनमें से सिर्फ कोरोना काल में ही 60 हज़ार करोड़ रुपए से ज्यादा पहुंचे हैं। ज़रूरत के समय देशवासियों तक सीधी मदद पहुंचे, तेज़ी से पहुंचे, जिसको ज़रूरत है, उस तक पूरी पारदर्शिता के साथ पहुंचे, यही सरकार का निरंतर प्रयास है।

भाइयों और बहनों,

तेजी से, सीधे किसानों तक लाभ पहुंचाने का ये काम उपज की सरकारी खरीद में भी बहुत व्यापक स्केल पर किया जा रहा है। कोरोना की मुश्किल चुनौतियों के बीच जहां किसानों ने कृषि और बागबानी में रिकॉर्ड उत्पादन किया है, वहीं सरकार भी हर साल MSP पर खरीद के नए-नए रिकॉर्ड बना रही है। पहले धान की और अब गेहूं की भी रिकॉर्ड खरीद हो रही है। इस वर्ष, अभी तक बीते वर्ष की तुलना में लगभग 10 प्रतिशत अधिक गेहूं एमएसपी पर खरीदा जा चुका है। अभी तक गेहूं की खरीद का लगभग 58 हज़ार करोड़ रुपए सीधे किसानों के खाते में पहुंच चुका है। सबसे बड़ी बात ये कि अब किसान जो उपज मंडी में बेच रहा है, उसको अब अपने पैसे के लिए लंबा इंतज़ार नहीं करना पड़ता, परेशान नहीं होना पड़ता। किसान के हक का पैसा सीधा उसके बैंक खाते में जमा हो रहा है। मुझे संतोष है कि पंजाब और हरियाणा के लाखों किसान पहली बार डायरेक्ट ट्रांसफर की इस सुविधा से जुड़े हैं। अभी तक पंजाब के किसानों के बैंक खाते में करीब 18 हज़ार करोड़ रुपए, और हरियाणा के किसानों के बैंक खाते में 9 हज़ार करोड़ रुपए सीधे उनके बैंक अकाउंट में जमा हो चुके हैं। अपना पूरा पैसा अपने बैंक खाते में पाने का संतोष क्या होता है ये पंजाब और हरियाणा के किसान भी अनुभव भी कर रहे हैं और मुखर हो कर बोल भी रहे हैं। मैंने सोशल मीडिया में इतने वीडियो देखें हैं किसानों के खासकर के पंजाब के किसानों के कि इस प्रकार से उनको पैसा पहुंचाना और वो भी पूरा-पूरा पैसा पहुंचाना उसका संतोष इतने उमंग के साथ वो बता रहे हैं।

साथियों,

खेती में नए समाधान, नए विकल्प देने के लिए सरकार निरंतर प्रयास कर रही है। जैविक खेती को बढ़ावा देना ऐसा ही प्रयास है। इस प्रकार की फसलों में लागत भी कम है, ये मिट्टी और इंसान के स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है और इनकी कीमत भी ज्यादा मिलती हैं। थोड़ी देर पहले इस प्रकार की खेती में जुटे देशभर के कुछ किसानों से मेरी बातचीत भी हुई है। उनके हौसले, उनके अनुभवों को जानकर मैं बहुत उत्साहित हूं। आज गंगा जी के दोनों ओर करीब 5 किलोमीटर के दायरे में जैविक खेती को व्यापक स्तर पर प्रोत्साहित किया जा रहा है ताकि वो जो खेत में उपयोग किया गया केमिकल है, बारिश के समय जो पानी बहकर के गंगा जी में न चला जाए और गंगा जी प्रदूषित न हों, इसलिए गंगा जी के दोनों तट के 5-5 किलोमीटर के करीब-करीब ये जैविक उत्‍पादक को विशेष बल दिया जा रहा है। ये जैविक उत्पाद नमामि गंगे के ब्रांड के साथ बाज़ार में उपलब्ध किए जा रहे हैं। इसी तरह भारतीय प्राकृतिक कृषि पद्धति को, उसको भी व्यापक स्तर पर प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसके साथ-साथ सरकार की ये निरंतर कोशिश है कि छोटे और सीमांत किसानों को बैंकों से सस्ता और आसान ऋण मिले। इसके लिए बीते डेढ़ साल से किसान क्रेडिट कार्ड उपलब्ध कराने का एक विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इस दौरान 2 करोड़ से ज्यादा किसान क्रेडिट कार्ड जारी किए गए हैं। इन कार्ड्स पर किसानों ने 2 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का ऋण बैंकों से लिया है। इसका बहुत बड़ा लाभ पशुपालन, डेयरी और मछली पालन से जुड़े किसानों को भी मिलना शुरू हुआ है। अभी हाल ही में सरकार ने एक और अहम फैसला लिया है और मैं चाहूंगा कि मेरे किसान भाईयों-बहनों को ये सरकार के निर्णय से खुशी होगी, उनके लिए ये बहुत लाभकर्ता होगा। सरकार ने निर्णय किया है कि कोरोना काल को देखते हुए, KCC ऋण के भुगतान या फिर नवीनीकरण की समय सीमा को बढ़ा दिया गया है। ऐसे सभी किसान जिनका ऋण बकाया है, वो अब 30 जून तक ऋण का नवीनीकरण कर सकते हैं। इस बढ़ी हुई अवधि में भी किसानों को 4 प्रतिशत ब्याज पर जो ऋण मिलता है, जो लाभ मिलता है, वो लाभ भी चालू रहेगा, मिलता रहेगा।

साथियों,

गांव का, किसान का कोरोना के विरुद्ध भारत की लड़ाई में बहुत बड़ा योगदान रहा है। ये आपके ही श्रम का परिणाम है कि आज इस कोरोना काल में भारत दुनिया की सबसे बड़ी मुफ्त राशन की योजना चला रहा है। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के माध्यम से पिछले वर्ष आठ महीने तक गरीबों को मुफ्त राशन दिया गया था। इस बार मई और जून महीने में देश के 80 करोड़ से ज्यादा साथियों को राशन मिले, इसका प्रबंध किया गया है। इस पर भी केंद्र सरकार 26 हजार करोड़ रुपए, हमारे गरीब के घर में चूल्‍हा जले, इसलिए खर्च कर रही है। मैं राज्य सरकारों से आग्रह करूंगा कि गरीबों को इस राशन के वितरण में कोई परेशानी ना आए, ये सुनिश्‍चत करें।

साथियों,

100 साल बाद आई इतनी भीषण महामारी कदम-कदम पर दुनिया की परीक्षा ले रही है। हमारे सामने एक अदृश्य दुश्मन है और ये दुश्‍मन बहुरूपिया भी है और इस दुश्‍मन के कारण, इस कोरोना वायरस के कारण हम अपने बहुत से करीबियों को खो चुके हैं। बीते कुछ समय से जो कष्ट देशवासियों ने सहा है, अनेकों लोग जिस दर्द से गुजरे हैं, तकलीफ से गुजरे हैं, वो मैं भी उतना ही महसूस कर रहा हूं। देश का प्रधान सेवक होने के नाते, आपकी हर भावना का मैं सहभागी हूं। कोरोना की सेकेंड वेव से मुकाबले में, संसाधनों से जुड़े जो भी गतिरोध थे, वो तेजी से दूर किए जा रहे हैं। युद्ध स्‍तर पर काम करने के प्रयास हो रहा है। आपने देखा होगा, सरकार के सभी विभाग, सारे संसाधन, हमारे देश के सुरक्षा बल, हमारे साइंटिस्ट, हर कोई दिन रात कोविड की चुनौती का मुकाबला करने में एकजुट है। देश के अलग-अलग हिस्सों में तेजी के साथ कोविड अस्पताल बन रहे हैं, नई टेक्नोलॉजी से ऑक्सीजन प्लांट लगाये जा रहे हैं। हमारी तीनों सेनाएं- वायुसेना, नेवी, आर्मी सभी पूरी शक्‍ति से इस काम में जुटे हैं। ऑक्सीजन रेल, इसने कोरोना के खिलाफ इस लड़ाई को बहुत बड़ी ताकत दी है। देश के दूर-सुदूर हिस्सों में ये स्पेशल ट्रेन्स, ये ऑक्‍सीजन रेल ऑक्सीजन पहुंचाने में जुटीं हैं। ऑक्सीजन टैंकर्स ले जाने वाले ट्रक ड्राइवर्स, बिना रुके काम कर रहे हैं। देश के डॉक्टर्स हों, नर्सिंग स्टाफ हो, सफाई कर्मचारी हों, एंबुलेंस के ड्राइवर्स हों, लैब में काम करने वाले सज्‍जन हों, सैंपल कलेक्ट करने वाले हों, एक-एक जीवन को बचाने के लिए चौबीसों घंटे जुटे हुए हैं। आज देश में जरूरी दवाइयों की आपूर्ति बढ़ाने पर युद्ध स्तर पर काम किया जा रहा है। सरकार और देश के फार्मा सेक्टर ने पिछले कुछ दिनों में जरूरी दवाइयों का उत्पादन कई गुना बढ़ाया है। बाहर से भी दवाइयां मंगवाई जा रही हैं। इस संकट के समय में, दवाइयों और जरूरी वस्तुओं की जमाखोरी और कालाबाजारी में भी कुछ लोग अपने निहित स्‍वार्थ के कारण लगे हुए हैं। मैं राज्य सरकारों से आग्रह करूंगा कि ऐसे लोगों पर कठोर से कठोर कार्रवाई की जाए। ये मानवता के खिलाफ का कृत्‍य है। भारत हिम्मत हारने वाला देश नहीं है। न भारत हिम्मत हारेगा और न कोई भारतवासी हिम्मत हारेंगे। हम लड़ेंगे और जीतेंगे।

साथियों,

आज के इस कार्यक्रम में, मैं देश के सभी किसानों को, गांव में रहने वाले सभी भाइयों-बहनों को कोरोना से फिर सतर्क करना चाहता हूं। ये संक्रमण अभी गांव में भी तेजी से पहुंच रहा है। देश की हर सरकार इससे निपटने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। इसमें गांव के लोगों की जागरूकता, हमारी पंचायती राज से जुड़ी जो भी व्यवस्थाएं हैं, उनका सहयोग, उनकी भागीदारी उतनी ही आवश्यक है। आपने देश को कभी निराश नहीं किया है, इस बार भी आपसे यही अपेक्षा है। कोरोना से बचाव के लिए आपको खुद पर, अपने परिवार पर, सामाजिक स्तर पर जो भी ज़रूरी कदम हैं, आवश्‍यकताएं हैं, उसे हमें उठाने ही हैं। मास्क लगातार पहनना बहुत ज़रुरी है। वो भी ऐसा पहनना है कि नाक और मुंह पर पूरी तरह से ढका रहे। दूसरी बात, आपको किसी भी प्रकार के खांसी, सर्दी ज़ुकाम, बुखार, उल्टी-दस्त, जैसे लक्षणों को सामान्य मान कर नहीं चलना है। पहले तो खुद को यथासंभव दूसरों से अलग करना है। फिर जल्द से जल्द कोरोना टेस्ट करना है। और जब तक रिपोर्ट ना आए तब तक डॉक्टरों ने जो दवा बताई हैं, वो ज़रूर लेते रहना है।

साथियों,

बचाव का एक बहुत बड़ा माध्यम है, कोरोना का टीका। केंद्र सरकार और सारी राज्य सरकारें मिलकर ये निरंतर प्रयास कर रही हैं कि ज्यादा से ज्यादा देशवासियों को तेज़ी से टीका लग पाए। देशभर में अभी तक करीब 18 करोड़ वैक्सीन डोज दी जा चुकी है। देशभर के सरकारी अस्पतालों में मुफ्त टीकाकरण किया जा रहा है। इसलिए जब भी आपकी बारी आए तो टीका ज़रूर लगाएं। ये टीका हमें कोरोना के विरुद्ध सुरक्षा कवच देगा, गंभीर बीमारी की आशंका को कम करेगा। हां, टीका लगाने के बाद भी मास्क और दो गज़ की दूरी के मंत्र को अभी हमें छोड़ना नहीं है। एक बार फिर सभी किसान साथियों को मैं बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं।

बहुत-बहुत धन्यवाद !