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बैठक में कोविड-19 टीके की आपूर्ति, वितरण और टीकाकरण की व्‍यवस्‍था के तौर-तरीके पर चर्चा हुई
जिस तरह कोविड के खिलाफ जंग में हरेक व्‍यक्ति की जान बचाने पर ध्‍यान केन्द्रित किया गया, उसी तरह हमारी प्राथमिकता यह सुनिश्चित करने की होगी कि टीका हर व्‍यक्ति तक पहुंचें : प्रधानमंत्री
मुख्‍यमंत्रियों ने अपने राज्यों के जमीनी हालात के बारे में विस्तृत विवरण दिया

 

सबसे पहले तो मैं सभी आदरणीय मुख्‍यमं‍त्री जी का आभार व्‍यक्‍त करता हूं कि आपने समय भी निकाला और बहुत गंभीरता के साथ अपनी बातें रखीं हैं। लेकिन मेरा आपसे आग्रह है कि अब तक जो कुछ भी चर्चाएं, discussion   हुआ है, उसमें सभी राज्‍य involve हैं, अफसर लेवल पर involve हैं। दुनिया के अनुभवों का भी शेयर है, लेकिन फिर भी मुख्‍यमंत्रियों का अपना एक विशेष अनुभव होता है।

पब्लिक लाइफ में काम करने वाले लोगों की एक विशेष दृष्टि होती है। क्‍योंकि इन चीजों को अगर आपके सुझाव मिलेंगे तो मेरा आग्रह है कि आप लिखित में अगर हो सके उतना जल्‍दी, क्‍योंकि आज भी कुछ अच्‍छे मुद्दे उठाए सबने कि ये हो, ये हो, ये हो, इससे भी ज्‍यादा होंगे; ये अगर मिल जाएंगे तो हमें अपनी strategy workout करने में सुविधा होगी। और ये कोई किसी पर थोप नहीं सकता है। भारत सरकार निर्णय करे कि हम ये करेंगे और राज्‍य सरकार....ऐसा नहीं हो सकता। हम सबको मिल करके ही इस चीज को आगे बढ़ाना पड़ेगा और इसलिए सबके विषयों का बड़ा महत्‍व है।  

कोरोना संक्रमण से जुड़े जो प्रजेंटेशन हुए, उनमें भी काफी जानकारियां उभर कर आईं हैं। आज मैंने प्रारंभ में कुछ मुख्‍यमंत्रियों से बात की थी जहां स्थिति जरा बिगड़ रही है। जहां तक वैक्‍सीन का सवाल है, वैक्सीन की स्थिति और डिस्ट्रीब्यूशन को लेकर भी जो कुछ भी चर्चाएं हुई हैं एक प्रकार से मीडिया में जो चलता है वो अलग चीज होती है। हमें तो इन चीजों को authentically ही आगे बढ़ना पड़ेगा क्‍योंकि हम सिस्‍टम का हिस्‍सा हैं। लेकिन फिर भी काफी चित्र स्‍पष्‍ट  हुआ है।    

एक समय था जब हम सभी के सामने चुनौती एक अनजान ताकत से लड़ने की थी। लेकिन देश के संगठित प्रयासों ने इस चुनौती से मुकाबला किया, नुकसान को कम से कम रखा।

आज Recovery Rate और Fatality Rate, दोनों ही मामलों में भारत दुनिया के अधिकतर देशों से बहुत संभली हुई स्थिति में है। हम सभी के अथक प्रयासों से देश में टेस्टिंग से लेकर ट्रीटमेंट का एक बहुत बड़ा नेटवर्क आज काम कर रहा है। इस नेटवर्क का लगातार विस्तार भी किया जा रहा है।

पीएम केयर्स के माध्यम से ऑक्सीजन और वेंटिलेटर्स उपलब्ध कराने पर भी विशेष जोर है। कोशिश ये है कि देश के मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पतालों को ऑक्सीजन जेनरेशन के मामले में Self-sufficient बनाया जाए। इसलिए अभी 160 से ज्यादा नए ऑक्सीजन प्लांट्स के निर्माण की प्रक्रिया already शुरू की गई है। पीएम केयर्स फंड से देश के अलग-अलग अस्पतालों को हजारों नए वेंटिलेटर्स मिलने भी सुनिश्चित हुए हैं। वेंटिलेटर्स के लिए पीएम केयर्स फंड से 2 हजार करोड़ रुपए already स्वीकृत किए गए हैं।

साथियों,

कोरोना से मुकाबले के बीते 8-10 महीने के अनुभवों के बाद देश के पास पर्याप्त डेटा है,

कोरोना के मैनेजमेंट को लेकर एक व्यापक अनुभव है। आगे की रणनीति बनाते समय हमें बीते कुछ महीनों के दौरान देश के लोगों ने, हमारे समाज ने कैसे रिएक्ट किया है, मुझे लगता है इसको भी हमें समझना होगा। देखिए, कोरोना के दौरान भारत के लोगों का व्यवहार भी

एक तरह से अलग-अलग चरणों में रहा है और अलग-अलग जगह पर अलग-अलग रहा है।

जैसे हम मोटा-मोटा देखें तो पहला चरण था बड़ा डर था, खौफ था, किसी को ये समझ नहीं आ रहा था कि उसके साथ क्या हो जाएगा और पूरी दुनिया का ये हाल था। हर कोई panic में था और उसी हिसाब से हर कोई react कर रहा था। हमने देखा प्रांरभ में आत्‍महत्‍या तक की घटनाएं घटी थीं। पता चला कोरोना हुआ तो आत्‍महत्‍या कर ली।

इसके बाद धीरे-धीरे दूसरा चरण आया। दूसरे चरण में लोगों के मन में भय के साथ-साथ दूसरों के लिए संदेह भी जुड़ गया। उनको लगने लगा कि इसको कोरोना हो गया मतलब कोई गंभीर मामला है, दूर भागो। एक प्रकार से घर में भी नफरत का माहौल बन गया। और बीमारी की वजह से समाज से कटने का डर लोगों को लगने लगा। इस कारण कोरोना के बाद कई लोग संक्रमण को छिपाने लगे। उनको लगा ये तो बताना नहीं चाहिए, नहीं तो समाज से मैं कट जाऊंगा। अब उसमें से भी धीरे-धीरे समझे लोग, इससे बाहर आए।

इसके बाद आया तीसरा चरण। तीसरे चरण में लोग काफी हद तक संभलने लगे। अब संक्रमण को स्वीकारने भी लगे और announce भी करने लगे कि मुझे ये तकलीफ है, मैं आइसोलेशन कर रहा हूं, मैं क्‍वारंटाइन कर रहा हूं, आप भी करएि। यानि एक प्रकार से लोग भी अपने-आप लोगों को समझाने लगे। 

देखिए आपने भी देखा होगा कि लोगों में अधिक गंभीरता भी आने लगी, और हमने देखा कि लोग अलर्ट भी होने लगे। और इस तीसरे चरण के बाद हम चौथे चरण में पहुंचे हैं। जब कोरोना से रिकवरी का रेट बढ़ा है तो लोगों को लगता है कि ये वायरस नुकसान नहीं कर रहा है, ये कमज़ोर हो गया है। बहुत से लोग ये भी सोचने लगे हैं कि अगर बीमार हो भी गए तो ठीक हो ही जाएंगे।

इस वजह से लापरवाही का ये स्‍टेज बहुत बड़ा व्‍यापक हो गया है। और इसलिए मैने हमारे त्‍योहारों की शुरूआत में ही specially राष्‍ट्र के नाम संदेश दे करके, सबको हाथ जोड़ करके प्रार्थना की थी कि ढिलाई मत बरतिए क्‍योंकि कोई वैक्‍सीन नहीं है, दवाई नहीं है हमारे पास। एक ही रास्‍ता बचा है कि हम हरेक को कैसे अपने-आप बचाएं और हमारी जो गलतियां हुई, वो ही एक खतरा बन गया, थोड़ी ढिलाई आ गई।

इस चौथे चरण में लोगों को कोरोना की गंभीरता के प्रति हमें फिर से जागरूक करना ही होगा। हम एकदम से वैक्‍सीन पर शिफ्ट हों, जिसको काम करना है करेंगे। हमें तो कोरोना पर ही फोकस करना है। हमें किसी भी हालत में ढिलाई नहीं बरतने देनी है। हां, शुरू में कुछ बंधन इसलिए लगाने पड़े ताकि व्‍यवस्‍थाएं भी विकसित करनी थीं, लोगों को थोड़ा एजुकेट भी करना था। अब हमारे पास टीम तैयार है, लोग भी तैयार हैं। थोडा आग्रह रखेंगे तो चीजें संभल सकती हैं। जो-जो चीज हम तैयार करें उसको उसी तरह implement करें। और हमें आगे अब कोई बढ़े नहीं, इसकी चिंता जरूर करनी होगी, कोई नई गड़बड़ न हो। 

आपदा के गहरे समंदर से निकलकर हम किनारे की तरफ बढ़ रहे हैं। हम सभी के साथ वो पुरानी जो एक शेरो-शायरी चलती है, ऐसा न हो जाए -

हमारी किश्ती भी

वहां डूबी जहां पानी कम था।

ये स्थिति हमें नहीं आने देनी है।

साथियों,

आज हम दुनियाभर में देख रहे हैं कि जिन देशों में कोरोना कम हो रहा था, आपको पूरा चार्ट बताया कैसे तेजी से संक्रमण फैल रहा है। हमारे यहां भी कुछ राज्यों में ये ट्रेंड चिंताजनक है ही है। इसलिए हम सभी को, शासन प्रशासन को पहले से भी अधिक जागरूक, अधिक सतर्क रहने की ज़रूरत है। हमें ट्रांसमिशन को कम करने के लिए अपने प्रयासों और जरा और गति देनी होगी। टेस्टिंग हो, कन्फर्मेशन, कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग और डेटा से जुड़ी किसी भी तरह की कमी को हमें सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए उसको ठीक करना होगा। Positivity Rate को 5% के दायरे में लाना ही होगा और मैं मानता हूं छोटी-छोटी इकाइयों पर ध्‍यान देना होगा कि ये क्‍यों बढ़ा, आधा क्‍यों बढ़ा, दो क्‍यों बढ़ा। हम राज्‍य के स्‍केल पर चर्चा करने के बजाय जितनी localize चर्चा करेंगे शायद हम address जल्‍दी कर पाएंगे।

दूसरा हम सबने अनुभव किया है कि artificial test का अनुपात बढ़ना चाहिए। जो घरों में आइसोलेटेड मरीज़ हैं, उनकी मॉनीटरिंग ज्यादा बेहतर तरीके से करनी होगी। आप भी जानते हैं कि अगर वहां थोड़ी भी ढिलाई हुई वही मरीज़ बहुत गंभीर स्थिति में अस्पताल आता है फिर हम बचा नहीं पाते हैं। जो गांव और कम्यूनिटी के स्तर पर हेल्थ सेंटर्स हैं, उनको भी हमें ज्यादा equip करना होगा। गांव के आसपास भी इंफ्रास्ट्रक्चर ठीक रहे, ऑक्सीजन की सप्लाई पर्याप्त रहे, ये हमें देखना होगा।

हम लोगों का लक्ष्य होना चाहिए कि Fatality रेट को 1 प्रतिशत से भी नीचे लाएं। और वो भी मैंने जैसे कहा, छोटे-छोटे इलाकों में देखा जब एक मृत्‍यु हुई, क्‍यों हुई। जितना ज्‍यादा फोकस करेंगे, तब स्थिति को संभाल पाएंगे। और सबसे बड़ी बात, जागरूकता अभियानों में कोई कमी न आए। कोरोना से बचाव के लिए जो ज़रूरी मैसेजिंग है, इसके लिए समाज को जोड़े रखना होगा। जैसे कुछ समय पहले हर संगठन, हर प्रभावी व्यक्ति को हमने Engage किया था, उन्हें फिर active करना होगा।

साथियों,

आप भली-भांति परिचित हैं कि कोरोना की वैक्सीन को लेकर Internationally और nationally किस तरह की खबरें आ रही हैं। आज दुनिया में भी और देश में भी जैसा अभी आपको presentation में पूरा डिटेल बताया गया है, करीब-करीब आखिरी दौर में वैक्‍सीन की रिसर्च पर काम पहुंचा है। भारत सरकार हर Development पर बारीकी से नजर रखे हुए है, हम सबके संपर्क में भी हैं। और अभी ये तय नहीं है कि वैक्सीन की एक डोज होगी, दो डोज होंगी या तीन डोज होंगी। ये भी तय नहीं है कि इसकी कीमत कितनी होगी, उसकी कीमत कितनी होगी, ये कैसी होगी।

यानि अभी भी इन सारी चीजों के सवालों के जवाब हमारे पास नहीं हैं। क्‍योंकि जो इसके बनाने वाले हैं, दुनिया में जिस प्रकार के corporate world भी हैं उनका भी competition है। दुनिया के देशों के भी अपने-अपने diplomatic interest होते हैं। WHO से भी हमें इंतज़ार करना पड़ता है तो हमें इन चीज़ों को वैश्विक सन्दर्भ मैं ही आगे बढ़ना पड़ेगा। हम Indian developers और manufacturers के साथ भी संपर्क में हैं। इसके अलावा global regulators, अन्य देशों की governments, multilateral institutions और साथ ही international companies, सभी के साथ जितना संपर्क बढ़ सके, यानी real time communication हो, इसके लिए पूरा प्रयास, एक व्‍यवस्‍था बनी हुई है।

साथियों,

कोरोना के खिलाफ अपनी लड़ाई में हमने शुरुआत से ही एक-एक देशवासी का जीवन बचाने को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। अब वैक्सीन आने के बाद भी हमारी प्राथमिकता यही होगी कि सभी तक कोरोना की वैक्सीन पहुंचे, इसमें तो कोई विवाद हो ही नहीं सकता है। लेकिन

कोरोना की वैक्सीन से जुड़ा भारत का अभियान, अपने हर नागरिक के लिए एक प्रकार से नेशनल कमिटमेंट की तरह है।

इतना बड़ा टीकाकरण अभियान Smooth हो, Systematic हो, और Sustained हो, ये लंबा चलने वाला है, इसके लिए हम सभी को, हर सरकार को, हर संगठन को एकजुट हो करके, coordination के साथ एक टीम के रूप में काम करना ही पड़ेगा।

साथियों,

वैक्सीन को लेकर भारत के पास जैसा अनुभव है, वो दुनिया के बड़े-बड़े देशों को नहीं है।

हमारे लिए जितनी ज़रूरी Speed है, उतनी ही जरूरी Safety भी है। भारत जो भी वैक्सीन अपने नागरिकों को देगा, वो हर वैज्ञानिक कसौटी पर खरी होगी। जहां तक वैक्सीन के डिस्ट्रीब्यूशन की बात है तो उसकी तैयारी भी आप सभी राज्यों के साथ मिलकर की जा रही है।

वैक्सीन प्राथमिकता के आधार पर किसे लगाई जाएगी, ये राज्यों के साथ मिल करके एक मोटा-मोटा खाका अभी आपके सामने रखा है कि भई अगर इस प्रकार से WHO ने जो कहा है, हम चलते हैं तो अच्‍छा है। लेकिन फिर भी ये निर्णय तो हम सब मिलकर ही करेंगे, हर राज्‍यों के सुझाव का महत्‍व इसमें बहुत रहेगा क्‍योंकि आखिरकर उनको अंदाज है कि उनके राज्‍य में कैसे होगा, हमें कितने अतिरिक्त कोल्ड चेन स्टोरेज की ज़रूरत रहेगी।

मुझे लगता है कि राज्‍यों को अभी इस पर बल दे करके व्‍यवस्‍थाएं खड़ी करना शुरू कर देना चाहिए। कहां-कहां ये संभव होगा, उसके पैरामीटर्स क्‍या होंगे। उस पर यहां से सूचनाएं तो डिपार्टमेंट्स को चली गई हैं लेकिन इसको अब implement करने के के लिए हमें रेड्डी रहना होगा। और ज़रूरत पड़ी तो अतिरिक्त सप्लाई भी सुनिश्चित की जाएगी। और इसका विस्तृत प्लान बहुत जल्द ही राज्य सरकारों के साथ मिलकर तय कर लिया जाएगा। हमारी राज्‍यों की और केंद्र की टीम साथ लगातार वो बातचीत कर रहे हैं, काम चल रहा है।

केंद्र सरकार ने राज्यों से कुछ समय पहले आग्रह किया था कि State लेवल पर एक Steering Committee एवं State और District लेवल पर टास्क फोर्स का और मैं तो चाहूंगा कि Block level तक हम जितना जल्‍दी व्‍यवस्‍थाएं खड़ी करेंगे और किसी न किसी एक व्‍यक्ति को काम देना पड़ेगा। इन कमेटियों की regular बैठकें हों, उनकी ट्रेनिंग हो, उनकी मॉनिटरिंग हो, और जो ऑनलाइन ट्रेनिंग होती है, वो भी शुरू हो। हमें हमारे रोजमर्रा के काम के साथ कोरोना से लड़ते-लड़ते भी इस एक व्‍यवस्‍था को विकसित तुरंत करना पड़ेगा। ये मेरा आग्रह रहेगा।

जो कुछ सवाल आपने कहे हैं – कौन सी वैक्‍सीन कितनी कीमत में आएगी, ये भी तय नहीं है। मूल भारतीय वैक्‍सीन अभी दो मैदान में आगे है। लेकिन बाहर के साथ मिल करके हमारे लोग काम कर रहे हैं। दुनिया में जो वैक्‍सीन बन रही हैं वे भी manufacturing के लिए भारत के लोगों के साथ ही बात कर रहे हैं, कंपनियों के साथ। लेकिन इन सारे विषयों में हम जानते हैं कि 20 साल से मान लीजिए कोई दवाई popular हुई है, 20 साल से लाखों लोग उसका उपयोग कर रहे हैं। लेकिन कुछ लोगों को उसका रिएक्‍शन आता है, आज भी आता है, 20 साल के बाद भी आता है, तो ऐसा इसमें भी संभव है। निर्णय वैज्ञानिक तराजू पर ही तोला जाना चाहिए। निर्णय उसकी जो authorities हैं उन authorities की certified व्‍यवस्‍था से ही होना चाहिए।

हम लोग समाज-जीवन की चिंता करते हैं लेकिन हम सब जानते हैं कि हम कोई वैज्ञानिक नहीं हैं। हम इसकी expertise नहीं है। तो हमें दुनिया में से जो व्‍यवस्‍था के तहत जो चीजें आती हैं आखिरकार उसी को स्‍वीकार करना पड़ेगा। और उसको स्‍वीकार करके हम आगे चलेंगे। लेकिन मैं आपसे आग्रह करूंगा कि आपके मन में जो योजना हो खास करके वैक्‍सीन के संबंध में, किस प्रकार से आप delivery नीचे तक ले जाएंगे- आप जितना जल्‍दी बहुत डिटेल प्‍लान करके लिख करके भेजेंगे तो निर्णय करने में सुविधा होगी और आपके विचारों की ताकत इसमें बहुत है। राज्‍यों का अनुभव बहुत अहमियत रखता है क्‍योकि वहीं से ये चीजें आगे बढ़ने वाली हैं। और इसलिए मैं चाहूंगा कि आपका बहुत ही एक प्रकार से proactive participation इसमें बने, यही मेरी अपेक्षा है।  

लेकिन मैंने पहले ही कहा वैक्‍सीन अपनी जगह पर है, वो काम होना है, करेंगे। लेकिन कोरोना की लड़ाई जरा भी ढीली नहीं पड़नी चाहिए, थोड़ी सी भी ढिलास नहीं आनी चाहिए। यही मेरी आप सबसे request है।

आज तमिलनाडु और पुडीचेरी के मुख्‍यमंत्रियों से बात करने का मुझे अवसर मिला। आंध्र से मैं फोन नहीं कर पाया था सुबह। एक साइक्‍लोन हमारे पूर्वी तट पर एक्टिव हुआ है। वो कल शायद तमिलनाडु, पुडीचेरी और आंध्र का कुछ हिस्‍सा, वहां पर आगे बढ़ रहा है। सारी भारत सरकार की टीमें बहुत एक्टिव है, सब लोग गए हैं।

मैंने आज दो आदरणीय मुख्‍यमंत्रियों से बात की थी, आंध्र के मुख्‍यमंत्री जी से अभी इसके बाद बात करूंगा। लेकिन सबके लिए पूरी तरह भारत सरकार और राज्‍य सरकारें मिल करके और पहला काम खाली करवाना, लोगों को बचाना इस पर हमारा जोर रहे।

फिर एक बार मैं आप सबका बहुत आभारी हूं, आप सबने समय निकाला। लेकिन मैं आग्रह करूंगा कि आप जल्‍दी से मुझे कुछ न कुछ जानकारियां भेजिए।             

धन्यवाद!

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