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ब्रह्म श्री प्रकाशानंदा स्वामीगल, श्रीमद ऋतंभरा नंदा स्वामीगल, श्री नारायण धर्मा संगम सन्यासिन्स, श्री मुरलीधरन, सहोदरी, सहोदर नवारे, नमस्काम्..! श्रीमान मुरलीधरन की मदद से मैं अपने दिल की बात आप सब तक पहुंचा पाऊंगा। मैं देख रहा हूँ कि यहाँ जो व्यवस्था बनी है वो व्यवस्था कम पड़ गई है और बहुत बड़ी मात्रा में लोग दूर-दूर बाहर खड़े हैं..! भाइयो-बहनों, इस शामियाने में जगह शायद कम होगी, लेकिन आप भरोसा रखिए कि मेरे दिल में आप लोगों के लिए बहुत जगह है..!

मेरा बहुत बड़ा सौभाग्य रहा कि बचपन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की गतिविधि से जुड़ा। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की गतिविधि में एक महत्वपूर्ण संस्कार कार्यक्रम होता है, प्रात:स्मरण काल। और जब हमें प्रात: स्मरण सिखाया गया था उसी समय से प्रतिदिन सुबह परम पूज्य ब्रह्मलीन नारायण गुरू स्वामी का स्मरण करने का सौभाग्य मिलता था। आज देश कि जिन समस्याओं की ओर हम देख रहे हैं, उन समस्याओं की ओर नजर करें और श्री नारायण गुरू स्वामी कि शिक्षा पर नजर करें, तो हमें ध्यान में आता है कि अगर ये देश श्री नारायण गुरू स्वामी की शिक्षा-दीक्षा पर चला होता तो आज हमारे देश का ये हाल ना हुआ होता..! श्री नारायण गुरू स्वामी ने समाजिक जीवन की शक्ति बढ़ाने के मूलभूत तत्वों पर सबसे अधिक बल दिया था। आज समाज में किसी ना किसी स्वरूप में अस्पृश्यता आज भी नजर आती है। हमारे संतों के प्रयत्नों के द्वारा समाज जीवन की छूआछूत कम होती गई, लेकिन राजनीतिक जीवन में छूआछूत और भी बढ़ती चली जा रही है..! यह देश स्वामी विवेकानंद जी की 150 वीं जयंती मना रहा है और हम जब स्वामी विवेकानंद की 150 वीं जयंती मना रहे हैं तब, इस बात का भी संयोग है कि श्री नारायण गुरू स्वामी के जीवन में भी इस कार्य को आगे बढ़ाने में स्वामी विवेकानंद जी का सीधा-सीधा संबंध आया था। हम पूरे आजादी के आंदोलन की ओर नजर करें तो हमारे ध्यान में आएगा कि अठारहवीं शताब्दी का उत्तरार्ध, उन्नीसवीं शताब्दी और बीसवीं शताब्दी में भारत की आजादी के आंदोलन की पिठीका तैयार करने में सबसे बड़ा योगदान किसी ने दिया है तो हमारे संतों ने दिया है, महापुरूषों ने दिया है, सन्यासियों ने दिया है, जिनके पुरुषार्थ के कारण एक समाज जागरण का काम, सामाजिक चेतना का काम, सामाजिक एकता का काम निरंन्तर चलता रहा और उसी का परिणाम हुआ कि देश की आजादी के आंदोलन के लिए एक मजबूत पीठिका का निर्माण हुआ। 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के बाद अंग्रेज ये मान कर चलते थे कि अब हिन्दुस्तान को हजारों सालों तक गुलाम बनाए रखा जा सकता है, अब हिन्दुस्तान खड़ा नहीं हो सकता है। लेकिन 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के बाद पूरी तीन शताब्दी की ओर देखा जाए तो इस देश में इन महापुरूषों की एक श्रुंखला रही है और उस श्रुंखला के कारण निरंतर हिन्दुस्तान का कोई एक राज्य ऐसा नहीं होगा, हिन्दुस्तान का कोई समाज ऐसा नहीं होगा, हिन्दुस्तान का कोई क्षेत्र ऐसा नही होगा कि जहाँ पर पिछली तीन शताब्दी के अंदर कोई ना कोई ऐसे महापुरूष का जन्म ना हुआ हो जिस महापुरूष ने समाजिक संस्कारों के लिए, समाज सुधार के लिए सोशल रिफार्मर के नाते काम ना किया हो और समाज को जोड़ने का काम ना किया हो, ऐसा पिछली तीन शताब्दी में किसी भूभाग में नहीं मिलेगा..! चाहे स्वामी राम दास हो, चाहे स्वामी विवेकानंद हो, चाहे स्वामी दयानंद से लेकर के स्वामी श्रद्घानंद तक की परंपरा हो, चाहे बस्वेश्वर हो, चाहे चेतन्य महाप्रभु हो, चाहे गुजरात के नरसिंह मेहता हो, इस देश के अंदर ऐसी एक परंपरा रही और केरल में भी पूज्य नारायण स्वामी जी का हो या अयंकाली जी का हो, इन सबकी परंपरा के कारण हिन्दुस्तान के अंदर इस चेतना को जागृत रखने में सफलता मिली थी। इन महापुरुषों ने त्याग और तपश्चर्या के द्वारा देश में जागरण का काम किया, देशभक्ति जगाने का काम किया, हमारी संस्कृति, हमारे धर्म और हमारी परंपरा को जगाने का काम किया और उसके कारण भारत के आजादी के आंदोलन के लिए एक बहुत बड़ी पीठीका तैयार हुई..!

लोगों को लगता है कि दुनिया की अनेक परंपराएं, अनेक संस्कृतियां, समाज जीवन की अनेक परंपराएं धवस्त हो गई, इतिहास के किनारे जा कर के उन्होंने अपनी जगह ले ली और आज उनका कहीं नामोनिशान नहीं रहा..! लोग पूछते हैं कि क्या कारण रहा कि हजारों साल के बाद भी ये समाज, ये संस्कृति, इस देश की परंपरा मिटती नहीं है, पूरे विश्व के अंदर ये सवाल उठाया जाता है..! समाज जीवन में अगर हम बारीकी से देंखें कि हजारों साल हुए, हमारी हस्ती मिटती क्यों नहीं है..? क्या हजारों साल में हमारे अंदर बुराइयाँ नहीं आई हैं? आई हैं..! हमारे में विकृतियाँ नहीं आई हैं? आई हैं..! हमारे समाज में बिखराव नहीं आया है? आया है..! अनेक बुराइयाँ आने के बावजूद भी इस समाज की ताकत ये रही है कि हिन्दु समाज ने हमेशा अपने ही भीतर संतो को जन्म दिया, समाज सुधारकों को जन्म दिया, एक नई चेतना, नया स्वस्थ जगत बनाने के लिए जो-जो लोगों ने जन्म लिया उन महापुरूषों के पीछे चलने का साहस दिखाया और अपनी ही बुराइयों पर वार करने की ताकत हमारे ही समाज में से पैदा होती थी, ऐसे महापुरूष हमारे समाज में से ही पैदा होते थे और उन महारुषों की पैकी एक बहुत बड़ा नाम केरल की धरती पर जन्मे हुए परमपूज्य श्री नारायण स्वामी का है..! श्री नारायण गुरू जी ने उस कालखंड में शिक्षा को सर्वाधिक महत्व दिया और आज अगर केरल गर्व से खड़ा है और शिक्षा के क्षेत्र में पूरे देश में केरल ने जो अपना एक रूतबा जमाया है, अगर उसके मूल में हम देखें तो सौ-सवा सौ साल पहले ऐसे महापुरूषों ने शिक्षा के लिए अपना जीवन खपा दिया था और उसके कारण शिक्षा का ये मजबूत फाउंडेशन आज केरल की धरती पर नजर आता है..!

विश्व के कई समाज ऐसे हैं कि जो 20 वीं शताब्दी तक नारी को बराबर का दर्जा देने के लिए तैयार नहीं थे। विश्व के प्रगतिशील माने जाने वाले देश भी, लोकतंत्र में विश्वास रखने के बावजूद भी महिला को मताधिकार देने के लिए सदियों तक तैयार नहीं थे। उस युग में भी हिन्दुस्तान में ऐसे संत महात्माओं की परंपरा पैदा हुई जिन्होंने नारी कल्याण के लिए, नारी उत्थान के लिए, नारी शिक्षा के लिए, नारी समानता के लिए अपने आप को खपा दिया था और समाज के अंदर परिवर्तन लाने का प्रयास किया था। समाज के दलित, पीडित, शोषित, उपेक्षित, वंचित ऐसे समाज की भलाई के लिए अनेक प्रकार के समाज सुधार के काम सदियों से चलते आए हैं, लेकिन जिन समाज सुधार के कामों में राजनीति जुड़ती है वहाँ पर हैट्रेड का माहौल भी जन्म लेता है। एकता सुधार करने के लिए, एक को अधिकार देने के लिए दूसरे को नीचे दिखाना, दूसरे को हेट करना, दूसरे को दूर करना, दूसरे के खिलाफ बगावत का माहौल बनाना ये परंपरा रहती है। लेकिन जब समाज सुधार के अंदर आध्यात्म जुड़ता है तब समाज सुधार भी हो, लेकिन समाज टूटे भी नहीं, नफरत की आग पैदा ना हो, जिनके कारण समाज में बुराई आई हैं उनके प्रति रोष का भाव पैदा ना हो, उनको भी जोड़ना, इनको भी जोड़ना, सबको जोड़कर के चलने का काम होता है। जब समाज सुधार के साथ आध्यात्मिक चेतना का मिलन होता है तब इस प्रकार का परिवर्तन आता है। श्री नारायण गुरू के माध्यम से समाज सुधार और आध्यात्म का ऐसा अद्भुत मिलन था कि समाज में कहीं पर भी उन्होंने नफरत को जन्म देने का अधिकार किसी को भी नहीं दिया..!

हमारे देश में उस काल खंड की ओर अगर हम नजर करें..! समाज के अंदर बुराइयों ने जब पूरी तरह समाज पर कब्जा जमाया हो, स्थापित हितों का जमावड़ा इसको बरकरार रखने के लिए भरपूर कोशिश करता हो, ऐसे समय में ऐसे संत खड़े हुए जिनके पास कुछ नहीं था, लेकिन बुराइयों के खिलाफ लड़ने का संकल्प था और वो बुराइयों के खिलाफ खड़े हुए, समाज स्वीकार करे या ना करे, वे बुराइयों के खिलाफ लड़ने से पीछे नहीं हटे और पूरी जिन्दगी समाज सुधार के लिए घिस दी। जिस समाज के अंदर ईश्वर भक्ति सर्वश्रेष्ठ मानी जाती हो, परमात्मा सबकुछ है ऐसा माना जाता हो, उस कालखंड में भी इस देश में ऐसे सन्यासी हुए जो कहते थे कि ईश्वर भक्ति बाद में करो, पहले दरिद्र नारायण की सेवा करो, दरिद्र नारायण ही भगवान का रूप होता है और उन गरीबों की भलाई करोगे तो ईश्वर प्राप्त हो जाएगा, ये संदेश देने की ताकत इस भूमि में थी..! समाज सुधारको ने अपने जीवन को बलि चढ़ा करके भी समाज की बुराइयों के खिलाफ लड़ाई लड़ी और उसको प्राप्त किया। श्री नारायण गुरू की तरफ हम नजर करें तो ध्यान में आता है कि उस समय जब अंग्रेजों का राज चलता था और गुलामी की जो मानसिकता थी, उस मानसिकता को बढ़ावा देने के लिए वो अंग्रेजी का प्रभाव बढ़ाना चाहते थे और अंग्रेजी के माध्यम से इस देश को दबाने के लिए रास्ता खोजते थे, ऐसे समय में नारायण गुरू की दृष्टि देखिए... उन्होंने समाज को कहा कि अंग्रेजी सीख कर के उनको उन्हीं की भाषा में जवाब देने की ताकत पैदा करनी चाहिए, अंग्रेजों से लड़ना होगा तो अंग्रेजों को अंग्रेजी की भाषा में समझाना पड़ेगा, ये हिम्मत देने का काम नारायण गुरू ने उस समय किया था..!

21 वीं सदी हिन्दुस्तान की सदी है ऐसा कहते हैं, 21 वीं सदी ज्ञान की सदी है ऐसा भी कहते हैं और ये हमारा सौभाग्य है कि आज हिन्दुस्तान दुनिया का सबसे युवा देश है। इस देश की 65% जनसंख्या 35 साल से कम आयु की है और इसलिए ये युवा देश हमारा डेमोग्राफिक डिविडेंड है और ये अपने आप में एक बड़ी शक्ति है..! लेकिन जो लोग प्रगति करना चाहते हैं वो सारे देश इन दिनों एक विषय पर बड़े आग्रह से बात करते हैं। अभी-अभी अमेरिका में चुनाव समाप्त हुए, श्रीमान ओबामा ने दोबारा अपनी प्रेसिडेंटशिप को धारण किया, और दोबारा प्रेसिडेंट बनने के बाद उन्होंने जो पहला भाषण किया उस पहले भाषण में उन्होंने एक बात पर बल दिया और कहा कि लोगों को स्किल डेवलपमेंट, हुनर सिखाओ। जब तक हम व्यक्ति के हाथ में हुनर नहीं देते, जब तक उसको रोजगार की संभावनाएं नहीं देते, वो दुनिया में कुछ कर नहीं सकता..! अमेरिका जैसे समृद्घ देश की अर्थनीति के बीज में भी स्किल डेवलपमेंट की बात होती है। हिन्दुस्तान के अंदर डॉ. मनमोहन सिंह और कांग्रेस की सरकार भी स्किल डेवलपमेंट की बात करती है और मुझे गर्व से कहना है कि अभी 21 अप्रैल को भारत के प्रधानमंत्री ने स्किल डेवलपमेंट के क्षेत्र में सर्वश्रेष्ट कार्य करने के लिए गुजरात सरकार को विशेष रूप से सम्मानित किया। गुजरात देश में पहला राज्य है जिसने अलग स्किल यूनिवर्सिटी बनाने का निर्णय किया है और दुनिया का सबसे समृद्घ देश भी स्किल डेवलपमेंट की बात करता है, दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र देश भी स्किल डेवलपमेंट की बात करता है। दुनिया भर में स्किल डेवलपमेंट की चर्चा हो रही है, लेकिन मजा देखिए, सौ साल पहले केरल की धरती पर एक नारायण गुरू का जन्म हुआ जिन्होंने सौ साल पहले स्किल डेवलपमेंट पर बल देने के लिए बातचीत नहीं, प्रयास किये थे..!

आज पूरा विश्व दो समस्याओं से झूझ रहा है..! एक, ग्लोबल वार्मिंग और दूसरा, टेररिज़म, आंतकवाद..! पूरा विश्व इन दोनों चीजों से परेशान है, लेकिन आज अगर हम हमारे पूर्वजों की बातों को ध्यान में लें, हमारे संतों की बातों को ध्यान में लें, हमारे शास्त्रों की बातों को ध्यान में लें और अगर उसके आधार पर जीवनचर्या को काम में लें तो मैं विश्वास से कहता हूँ कि ग्लोबल वार्मिंग से मानवजात को बचाई जा सकती है, टेररिज़म के रास्ते से लोगों को वापस ला कर के सदभावना और प्रेम के रास्ते पर लाया जा सकता है, ये संदेश पूज्य नारायण गुरू स्वामी ने उस जमाने में दिए थे, जब वो कहते थे एक जन, एक देश, एक देवता..! ये बात उस समय की है, और आज तो इतने बिखराव के माहौल कि चर्चा हो रही है। एक राज्य दूसरे राज्य को पानी देने को तैयार नहीं है, ऐसे माहौल में उस महापुरूष ने दूर का देखा था और कहा था कि यह देश एक, जन एक और परमात्मा एक... ये संदेश देने का काम श्री नारायण गुरू ने किया था। श्री नारायण गुरू स्वामी ने जैसे कहा था उस प्रकार से कश्मीर से कन्याकुमारी, अटक से कटक तक का पूरा हिन्दुस्तान करूणा और प्रेम से बंधा हुआ रहता, हमारे अंदर कोई बिखराव ना होता तो आज हमारे भीतर से कोई भी आंतकवाद को साथ देने का पाप ना करता, नारायण गुरू के रास्ते पर चलते तो यहाँ आंतकवाद को कभी जगह नहीं मिलती..!

एक समय था जब बड़े-बड़े भव्य मंदिरों से प्रभाव पैदा होता था, मंदिरों के निर्माण में भी एक स्पर्धा का माहौल चलता था, प्रकृति का जितना भी शोषण करके जो कुछ भी किया जा सकता था वो सब होता था। ऐेसे समय में आप दक्षिण के मंदिर देखिए, कितने विशाल मंदिर होते हैं..! ऐसे समय में नारायण गुरू ने समाज के उस प्रवास को काट कर के उल्टी दिशा में चल कर के दिखाया कि जरूरत नहीं है बड़े-बड़े विशाल मंदिरों की..! छोटे-छोटे मंदिरों की रचना करने की एक नई परंपरा शुरू की। सामान्य संसाधनों से बनने वाले मंदिरों की एक परंपरा शुरू की। ईश्वर कहीं पर भी विराजमान रहता है इस प्रकार से उन्होंने चिंता की और एक प्रकार से पर्यावरण की रक्षा के लिए, प्रकृति का कम से कम उपभोग करने का संदेश देने का काम श्री नारायण गुरू ने किया था, अगर उस परंपरा को हम जीवित रखते तो आज ग्लोबल वार्मिंग की समस्या पैदा नहीं होती..!

दुनिया के कर्इ देश ऐसे हैं जो आज भी नारी के नेतृत्व को स्वीकार करने का समार्थ्य नहीं रखते हैं। पश्चिम के आधुनिक कहे जाने वाले राष्ट्र भी नारी शक्ति के सामर्थ्य को स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं। लेकिन यह देश ऐसा है कि सदियों पहले अगर हमारे देश में नारी के सम्मान को चोट पहुंचे ऐसी कोई भी चीज पनपती थी, तो हमारे संत बहुत जागरूक हो जाते थे और वूमन एम्पावरमेंट के लिए अपने युग में हमेशा वो प्रयास करते रहे हैं। समाज की बुराइयों से समाज को बाहर ला करके मातृ-शक्ति के सामर्थ्य की चिंता करने का काम हमारे देश में होता रहा है और श्री नारायण गुरू ने हमेशा वुमन एम्पावरमेंट को हमेशा बल दिया, उनको शिक्षित करने की बात पर बल दिया, उनको विकास प्रक्रिया में भागीदार बनाने के विचार को बल दिया, उन्होंने माताओं-बहनों को परिवार के अंदर कोई ना कोई रोजगार खड़ा करने की स्वतंत्रता पर बल दिया और समाज के विकास की यात्रा में नारी को भी भागीदार बनाने के लिए श्री नारायण गुरू ने प्रयास किए..! श्री नारायण गुरू ने प्रेम की, करूणा की, समाज की एकता की बातों के साथ-साथ सादगी का भी बहुत आग्रह रखा था, सिम्पलीसिटी का बहुत आग्रह रखा था..! मैं आज भी इस परंपरा से जुड़े हुए इन सभी महान संतों को प्रणाम करते हुए उनका अभिनंदन करना चाहता हूँ, क्योंकि नारायण गुरू ने जिस परंपरा में सादगी का आग्रह रखा था, आज भी उस सादगी को निभाने का प्रयास इस परंपरा को निभाने वाले सभी लोगों के द्वारा हो रहा है, ये अपने आप में बड़े गर्व की बात है..! ये मेरा सौभाग्य है कि इस महान परंपरा के साथ आज निकट से जुड़ने का मुझे सौभाग्य मिला है और इसलिए मैं इन सभी संतों का बहुत ही आभारी हूँ..!

यहाँ पर अभी पूज्य ऋतंभरानंद जी ने अपने भाषण में कुछ अपेक्षाएं व्यक्त की थी कि गुजरात की धरती पर भी ये संदेश कैसे पहुंचे..! ये मेरे लिए गर्व की बात होगी कि इतनी अच्छी बात, समाज के गरीब, दुखियारों की सेवा की बात मेरे गुजरात के अंदर अगर केरल की धरती से पहुंचती है तो मैं उसका स्वागत करता हूँ, सम्मान करता हूँ..! केरल का कोई जिला ऐसा नहीं होगा, कोई तालुका या ब्लॉक ऐसा नहीं होगा, जहाँ के लोग मेरे गुजरात में ना रहते हों..! आज गुजरात की प्रगति की जो चर्चा हो रही है, उस प्रगति में मेरे केरल के भाईयों के पसीने की भी महक है और इसलिए मैं आज केरल के मेरे सभी भाइयों-बहनों का आभार भी व्यक्त करना चाहूँगा, अभिनंदन भी करना चाहूँगा..! और मुझे विश्वास है कि आने वाले दिनों में केरल के मेरे भाई जो गुजरात में रहते हैं, उनको जब पता चलेगा कि यहाँ नारायण गुरू की प्रेरणा से कुछ ना कुछ गतिविधि चल रही है, तो गुजरात में रहने वाले केरल के भाइयों के लिए भी एक अच्छा स्थान बन जाएगा। मैं नारायण गुरु की इस परंपरा को निभाने वाले, इस सदविचार को घर-घर गाँव-गाँव पहुंचाने वाले, समाज के पिछड़े, दलित, पीड़ित, शोषितों का भला करने के लिए जीवन आहूत करने वाले सभी महानुभावों से प्रार्थना करूँगा कि गुजरात आपका ही है, आप जब मर्जी पड़े आइए, गुजरात की भी सेवा कीजिए..!

इस पवित्र धरती पर आने का मुझे सौभाग्य मिला, मुझे निमंत्रण मिला, मैं इसके लिए फिर एक बार आप सबका बहुत-बहुत आभार व्यक्त करता हूँ, सभी संतों को वंदन करता हूँ और पूज्य स्वामी नारायण गुरू के चरणों में प्रार्थना करके उनसे आशीर्वाद लेता हूँ कि ईश्वर ने मुझे जो काम दिया है, मैं गरीब, पीड़ित, शोषित, दलित, सबकी भलाई के लिए अपने जीवन में कुछ ना कुछ अच्छा करता रहूँ, ऐसे आशीर्वाद मुझे आज इस तपोभूमि से मिले..! मैं केरल के सभी भाइयों-बहनों का भी आभार व्यक्त करता हूँ कि आज मैं शाम को त्रिवेन्द्रम एयरपोर्ट पर उतरा और वहाँ से यहाँ तक आया, चारों ओर जिस प्रकार से आप लोगों ने मेरा स्वागत किया, सम्मान किया, मुझे प्रेम दिया, इसके लिए मैं केरल के सभी भाईयों-बहनों का भी बहुत हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ..! फिर एक बार सहोदरी-सहोदर हमारे, नमस्कारम्..!

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जब नेशन फर्स्ट की भावना से काम होता है, तो सफलता जरूर मिलती है: पीएम मोदी
February 06, 2023
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तुमकुरु में तुमकुरु औद्योगिक टाउनशिप और दो जल जीवन मिशन परियोजनाओं की आधारशिला रखी
"डबल इंजन सरकार ने कर्नाटक को निवेशकों की पहली पसंद बनाया है"
"हमें अपनी रक्षा जरूरतों के लिए विदेशों पर निर्भरता को कम से कम करना है"
"'जब नेशन फर्स्ट, राष्ट्र प्रथम की भावना से काम होता है, तो सफलता जरूर मिलती है"
"आज एचएएल की यह हेलीकॉप्टर फैक्ट्री, एचएएल की बढ़ती ताकत, बहुत से पुराने झूठे और झूठे आरोप लगाने वालों का पर्दाफाश कर रही है"
"फूड पार्क और एचएएल के बाद औद्योगिक टाउनशिप तुमकुरु के लिए एक बड़ा उपहार है जो तुमकुरु को देश के एक बड़े औद्योगिक केंद्र के रूप में विकसित करने में मदद करेगा"
"डबल इंजन सरकार भौतिक बुनियादी ढांचे के साथ-साथ सामाजिक बुनियादी ढांचे पर भी समान ध्यान दे रही है"
“यह बजट समर्थ भारत, संपन्न भारत, स्वयंपूर्ण भारत, शक्तिमान भारत, गतिवान भारत की दिशा में बहुत बड़ा कदम है”
इस बजट में दिए गए कर लाभों से मध्यम वर्ग में भारी उत्साह है।
“महिलाओं का वित्तीय समावेशन घरों में उनकी आवाज को मजबूत करता है और इस बजट में उसके लिए कई प्रावधान हैं”

तुमकुरु जिल्ले, गुब्बी तालुकिना, निट्टूर नगरदा, आत्मीय नागरीक-अ बंधु, भगि-नियरे, निमगेल्ला, नन्ना नमस्कार गडु!

कर्नाटक संतों, ऋषियों-मनीषियों की भूमि है। आध्यात्म, ज्ञान-विज्ञान की महान भारतीय परंपरा को कर्नाटक ने हमेशा सशक्त किया है। इसमें भी तुमकुरु का विशेष स्थान है। सिद्धगंगा मठ की इसमें बहुत बड़ी भूमिका है। पूज्य शिवकुमार स्वामी जी ने ‘त्रिविधा दसोही’ यानि "अन्ना" "अक्षरा" और "आसरे" की जो विरासत छोड़ी उसे आज श्री सिद्धलिंगा महास्वामी जी आगे बढ़ा रहे हैं। मैं पूज्य संतों को नमन करता हूं। गुब्बी स्थित श्री चिदम्बरा आश्रम और भगवान चन्नबसवेश्वर को भी मैं प्रणाम करता हूँ !

भाइयों और बहनों,

संतों के आशीर्वाद से आज कर्नाटक के युवाओं को रोज़गार देने वाले, ग्रामीणों और महिलाओं को सुविधा देने वाले, देश की सेना और मेड इन इंडिया को ताकत देने वाले, सैकड़ों करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट्स का लोकार्पण और शिलान्यास हुआ है। आज देश की एक बहुत बड़ी हेलीकॉप्टर फैक्ट्री तुमकुरु को मिली है। आज तुमकुरू इंडस्ट्रियल टाउनशिप का शिलान्यास भी हुआ है और इसके साथ-साथ तुमकुरु जिले के सैकड़ों गांवों को पीने के पानी की स्कीमों पर भी काम शुरू हुआ है और मैं इसके लिए आप सबको बहुत-बहुत बधाई देता हूं।

साथियों,

कर्नाटक युवा टैलेंट, युवा इनोवेशन की धरती है। ड्रोन मैन्युफैक्चरिंग से लेकर तेजस फाइटर प्लेन बनाने तक, कर्नाटक के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की ताकत को दुनिया देख रही है। डबल इंजन सरकार ने कर्नाटक को निवेशकों की पहली पसंद बनाया है। डबल इंजन सरकार कैसे काम करती है, इसका उदाहरण आज जिस हेलीकॉप्टर कारखाने का लोकार्पण हुआ है, वो भी है। साल 2016 में एक संकल्प के साथ मुझे इसके शिलान्यास का सौभाग्य मिला था और संकल्प ये था कि हमें अपनी रक्षा जरूरतों के लिए विदेशों पर निर्भरता को कम से कम करते जाना है। मुझे खुशी है कि आज सैकड़ों ऐसे हथियार और रक्षा उपकरण, जो भारत में ही बन रहे हैं, जो हमारी सेनाएं उपयोग कर रही है। आज आधुनिक असॉल्ट राइफल से लेकर टैंक, तोप, नौसेना के लिए एयरक्राफ्ट करियर, हेलिकॉप्टर, फाइटर जेट, ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट सब कुछ भारत खुद बना रहा है। 2014 से पहले के, ये आंकड़ा याद रखना, याद रखोगे! 2014 से पहले के 15 सालों में जितना निवेश एयरोस्पेस सेक्टर में हुआ, उसका 5 गुणा बीते 8-9 वर्षों में हो चुका है। आज हम अपनी सेना को मेड इन इंडिया हथियार तो दे ही रहे हैं, बल्कि हमारा डिफेंस एक्सपोर्ट भी 2014 की तुलना में कई गुना ज्यादा हो गया है। आने वाले समय में यहां तुमकुरू में ही सैकड़ों, सैकड़ों हेलीकॉप्टर बनने वाले हैं और इससे लगभग 4 लाख करोड़ रुपए का बिजनेस यहां होगा। जब इस प्रकार मैन्युफैक्चरिंग की फैक्ट्रियां लगती हैं, तो हमारी सेना की ताकत तो बढ़ती ही है, हज़ारों रोजगार और स्वरोज़गार के अवसर भी मिलते हैं। तुमकुरु के हेलीकॉप्टर कारखाने से यहां आसपास अनेक छोटे-छोटे उद्योगों को, व्यापार-कारोबार को भी बल मिलेगा।

साथियों,

जब नेशन फर्स्ट, राष्ट्र प्रथम इस भावना से काम होता है, तो सफलता भी ज़रूर मिलती है। बीते 8 वर्षों में हमने एक तरफ सरकारी फैक्ट्रियों, सरकारी डिफेंस कंपनियों के कामकाज में सुधार किया, उनको ताकतवर बनाया, वहीं दूसरी तरफ प्राइवेट सेक्टर के लिए भी दरवाज़े खोले। इससे कितना लाभ हुआ, वो हम HAL- हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड में भी देख रहे हैं। और मैं कुछ सालों पहले की चीजें आज याद कराना चाहता हूँ, मीडिया वालों का भी जरूर ध्‍यान जाएगा, यही HAL है जिसे बहाना बनाकर हमारी सरकार पर तरह-तरह के झूठे आरोप लगाए गए। यही HAL है जिसका नाम लेकर लोगों को भड़काने की साजिशें रचीं गईं, लोगों को उकसाया गया। Parliament के घंटे से घंटे तबाह कर दिये लेकिन मेरे प्यारे भाइयों-बहनों, झूठ कितना ही बड़ा क्यों ना हो, कितनी ही बार बोला जाता हो, कितने ही बड़े लोगों से बोला जाता हो, लेकिन एक ना एक दिन वो सच के सामने हारता ही है। आज HAL की ये हेलीकॉप्टर फैक्ट्री, HAL की बढ़ती ताकत, ढेर सारे पुराने झूठों को और झूठे आरोप लगाने वालों का पर्दाफाश कर रही है, हकीकत खुद बोल रही है। आज वही HAL भारत की सेनाओं के लिए आधुनिक तेजस बना रहा है, विश्व के आकर्षण का केंद्र है। आज HAL डिफेंस सेक्टर में भारत की आत्मनिर्भरता को बल दे रहा है।

साथियों,

आज यहां तुमकुरु इंडस्ट्रियल टाउनशिप के लिए भी काम शुरू हुआ है। फूड पार्क, हेलीकॉप्टर कारखाने के बाद तुमकुरु को मिला एक और बड़ा उपहार है। जो ये नया इंडस्ट्रियल टाउनशिप होगा, इससे तुमकुरु कर्नाटक के ही नहीं, बल्कि भारत के एक बड़े औद्योगिक केंद्र के रूप में विकसित होगा। ये चेन्नई-बेंगलुरु इंडस्ट्रियल कॉरिडोर का हिस्सा है। इस समय चेन्नई-बेंगलुरु, बेंगलुरु-मुंबई और हैदराबाद-बेंगलुरु इंडस्ट्रियल कॉरिडोर्स पर काम चल रहा है। इन सभी में कर्नाटक का एक बहुत बड़ा हिस्सा आता है। मुझे इस बात की भी खुशी है कि तुमकुरु इंडस्ट्रियल टाउनशिप का निर्माण पीएम गतिशक्ति नेशनल मास्टर प्लान के तहत हो रहा है। मुंबई-चेन्नई हाईवे, बेंगुलुरु एयरपोर्ट, तुमकुरु रेलवे स्टेशन, मेंगलुरु पोर्ट और गैस कनेक्टिविटी, ऐसी मल्टी मॉडल कनेक्टिविटी से इसे जोड़ा जा रहा है। इससे यहां बहुत बड़ी संख्या में रोजगार और स्वरोजगार बनने वाले हैं।

साथियों,

डबल इंजन की सरकार का जितना ध्यान फिजिकल इंफ्रास्ट्रक्चर पर है, उतना ही हम सोशल इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी जोर दे रहे हैं। बीते वर्षों में हमने निवासक्के नीरु, भूमिगे नीरावरी यानि हर घर जल, हर खेत को पानी को प्राथमिकता दी है। आज पूरे देश में पीने के पानी के नेटवर्क का अभूतपूर्व विस्तार हो रहा है। इस वर्ष जल जीवन मिशन के लिए बजट में पिछले वर्ष की तुलना में 20 हज़ार करोड़ रुपए से अधिक की वृद्धि की गई है। जब हर घर जल पहुंचता है, तो इसका सबसे बड़ा लाभ गरीब महिलाओं और छोटी बेटियों को ही होता है। उन्हें साफ पानी जुटाने के लिए घरों से दूर नहीं जाना पड़ता। पिछले साढ़े 3 वर्षों में देश में नल से जल का दायरा 3 करोड़ ग्रामीण परिवारों से बढ़कर के 11 करोड़ परिवार हो चुका है। हमारी सरकार निवासक्के नीरु के साथ ही भूमिगे नीरावरी पर भी लगातार बल दे रही है। बजट में अपर भद्रा प्रोजेक्ट के लिए लगभग साढ़े 5 हज़ार करोड़ रुपए की व्यवस्था की गई है। इससे तुमकुरु, चिकमगलुरू, चित्रदुर्ग और दावणगेरे सहित सेंट्रल कर्नाटक के बड़े सूखा प्रभावित क्षेत्र को लाभ होगा। ये हर खेत और हर घर तक पानी पहुंचाने के डबल इंजन सरकार की प्रतिबद्धता को दिखाता है। इसका बहुत बड़ा लाभ हमारे छोटे किसानों को होगा, जो खेती के लिए सिंचाई के पानी पर, वर्षा के पानी पर ही निर्भर रहते आए हैं।

साथियों,

इस साल के गरीब हितैषी, मध्यम वर्ग हितैषी बजट की चर्चा पूरी दुनिया में हो रही है। विकसित भारत के निर्माण के लिए सब जुड़ें, सब जुटें, सबका प्रयास कैसे हो, इसके लिए ये बजट बहुत ताकत देने वाला है। जब भारत अपनी आजादी के 100 वर्ष मनाएगा, उस सशक्त भारत की नींव, इस बार के बजट ने और मजबूत की है। ये बजट, समर्थ भारत, संपन्न भारत, स्वयंपूर्ण भारत, शक्तिमान भारत, गतिवान भारत की दिशा में बहुत बड़ा कदम है। आजादी के इस अमृतकाल में, कर्तव्यों पर चलते हुए विकसित भारत के संकल्पों को सिद्ध करने में इस बजट का बड़ा योगदान है। गांव, गरीब, किसान, वंचित, आदिवासी, मध्यम वर्ग, महिला, युवा, वरिष्ठ जन, सबके लिए बड़े-बड़े फैसले इस बजट में लिए गए हैं। ये सर्वप्रिय बजट है। सर्वहितकारी बजट है। सर्वसमावेशी बजट है। सर्व-सुखकारी बजट है। सर्व-स्पर्शी बजट है। ये भारत के युवा को रोजगार के नए अवसर देने वाला बजट है। ये भारत की नारीशक्ति की भागीदारी बढ़ाने वाला बजट है। ये भारत की कृषि को, गांव को आधुनिक बनाने वाला बजट है। ये श्रीअन्न, श्रीअन्‍न से छोटे किसानों को वैश्विक ताकत देने वाला बजट है। ये भारत में रोजगार बढ़ाने वाला और स्वरोजगार को बल देने वाला बजट है। हमने ‘अवश्यकते, आधारा मत्तु आदाया’ यानि आपकी जरूरतों, आपको दी जाने वाली सहायता और आपकी आय, तीनों का ध्यान रखा है। कर्नाटक के हर परिवार को इससे लाभ मिलेगा।

भाइयों और बहनों,

2014 के बाद से सरकार का प्रयास समाज के उस वर्ग को सशक्त करने का रहा है, जिन्हें पहले सरकारी सहायता मिलनी बहुत मुश्किल होती थी। इस वर्ग तक सरकारी योजनाएं या तो पहुंचती ही नहीं थीं, या फिर वो बिचौलियों के हाथों लुट जाता था। आप देखिए, बीते वर्षों में हमने हर उस वर्ग तक सरकारी सहायता पहुंचाई है, जो पहले इससे वंचित थे। हमारी सरकार में, ‘कार्मिक-श्रमिक’ ऐसे हर वर्ग को पहली बार पेंशन और बीमा की सुविधा मिली है। हमारी सरकार ने छोटे किसान की सहायता के लिए उसे पीएम किसान सम्मान निधि की शक्ति दी है। रेहड़ी, ठेले, फुटपाथ पर काम करने वाले, स्ट्रीट वेंडर्स को हमने पहली बार बैंकों से बिना गारंटी का ऋण दिलाया है। इस वर्ष का बजट इसी भावना को आगे बढ़ाता है। पहली बार, हमारे विश्वकर्मा बहनों-भाइयों के लिए भी देश में एक योजना बनी है। विश्वकर्मा यानि, हमारे वो साथी जो अपने हाथ के कौशल से, हाथ से चलने वाले किसी औजार की मदद से कुछ निर्माण करते हैं, सृजन करते हैं, स्वरोजगार को बढ़ावा देते हैं। जैसे हमारे कुंब्बारा, कम्मारा, अक्कसालिगा, शिल्पी, गारेकेलसदवा, बड़गी आदि जो हमारे सब साथी हैं, पीएम-विकास योजना से अब ऐसे लाखों परिवारों को उनकी कला, उनके कौशल को और समृद्ध करने में मदद मिलेगी।

साथियों,

इस वैश्विक महामारी के समय में राशन पर होने वाले खर्च की चिंता से भी हमारी सरकार ने गरीब परिवारों को मुक्त रख रखा है। इस योजना पर हमारी सरकार 4 लाख करोड़ रुपए से अधिक खर्च कर चुकी है। गांवों में हर गरीब परिवार को पक्का घर देने के लिए बजट में अभूतपूर्व 70 हज़ार करोड़ रुपए रखे गए हैं। इससे कर्नाटक के अनेक गरीब परिवारों को पक्‍का घर मिलेगा, जिन्दगी बदल जाएगी।

भाइयों और बहनों,

इस बजट में मिडिल क्लास के हित में अभूतपूर्व फैसले लिए गए हैं। सात लाख रुपए तक की आय पर इनकम टैक्स जीरो होने से मिडिल क्लास में बहुत उत्साह है। विशेष रूप से 30 वर्ष से कम के युवा साथी, जिनकी नौकरी नई है, बिजनेस नया है, उनके अकाउंट में हर महीने अधिक पैसों की बचत होने वाली है। इतना ही नहीं, जो रिटायर हुए कर्मचारी हैं, जो हमारे सीनियर सिटीजन हैं, वरिष्ठ नागरिक हैं, उनके लिए डिपॉजिट की लिमिट को 15 लाख से बढ़ाकर 30 लाख यानि दोगुना कर दिया है। इससे उन्हें हर महीने मिलने वाला रिटर्न और बढ़ जाएगा। प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले साथियों के लिए Leave encashment पर टैक्स की छूट लंबे समय से सिर्फ 3 लाख रुपए थी। अब 25 लाख रुपए तक के Leave encashment को टैक्स फ्री कर दिया गया है। इससे तुमकुरु, बैंगलुरु सहित कर्नाटक और देश के लाखों परिवारों के पास ज्यादा पैसा आएगा।

साथियों,

हमारे देश की महिलाओं का वित्तीय समावेश, भाजपा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है। महिलाओं का वित्तीय समावेश, घरों में उनकी आवाज मजबूत करता है, घर के निर्णयों में उनकी भागीदारी बढ़ाता है। हमारी माताएं-बहनें-बेटियां, ज्यादा से ज्यादा बैंकों से जुड़ें, इसके लिए इस बजट में हमने बड़े-बड़े कदम उठाए हैं। हम महिला सम्मान बचत पत्र लेकर आए हैं। इसमें बहनें 2 लाख रुपए तक का निवेश कर सकती हैं, जिस पर सबसे अधिक साढ़े 7 प्रतिशत ब्याज मिलेगा। ये परिवार और समाज में महिलाओं की भूमिका को और बढ़ाएगा। सुकन्या समृद्धि, जन धन बैंक खातों, मुद्रा ऋण और घर देने के बाद ये महिला आर्थिक सशक्तिकरण के लिए एक और बड़ी पहल है। गांवों में महिला सेल्फ हेल्प ग्रुप्स के सामर्थ्य को और बढ़ाने के लिए भी बजट में अहम फैसला लिया गया है।

भाइयों और बहनों,

ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर इस बजट में सबसे अधिक फोकस है। किसानों को कदम-कदम पर डिजिटल टेक्नॉलॉजी से मदद हो या सहकारिता का विस्तार, इस पर बहुत फोकस है। इससे किसानों, पशुपालकों और मछुआरों, सभी को लाभ होगा। गन्ने से जुड़ी सहकारी समितियों को विशेष मदद मिलने से कर्नाटक के गन्ना किसानों को बहुत लाभ होगा। आने वाले समय में अनेक नई सहकारी समितियां भी बनेंगी और अनाज की स्टोरेज के लिए देशभर में बड़ी संख्या में स्टोर बनेंगे। इससे छोटे किसान भी अपना अनाज स्टोर कर पाएंगे और बेहतर कीमत मिलने पर बेच पाएंगे। यही नहीं प्राकृतिक खेती से छोटे किसान की लागत कम हो, इसके लिए हज़ारों सहायता केंद्र भी बनाए जा रहे हैं।

साथियों,

कर्नाटक में आप सभी मिलेट्स-मोटे अनाज का महत्व बखूबी समझते हैं। इसलिए मोटे अनाजों को आप सभी पहले से ‘सिरि धान्या’ कहते हैं। अब कर्नाटक के लोगों की इसी भावना को देश आगे बढ़ा रहा है। अब पूरे देश में, मोटे अनाज को श्री-अन्न की पहचान दी गई है। श्री-अन्न यानि, ‘धान्य’ में सर्वश्रेष्ठ। कर्नाटक में तो श्रीअन्न रागी, श्रीअन्न नवणे, श्रीअन्न सामे, श्रीअन्न हरका, श्रीअन्न कोरले, श्रीअन्न ऊदलु, श्रीअन्न बरगु, श्रीअन्न सज्जे, श्रीअन्न बिड़ीजोड़ा, किसान ऐसे अनेक श्री अन्न पैदा करता है। कर्नाटक के ‘रागी मुद्दे’, ‘रागी रोट्टी’ इस स्वाद को कौन भूल सकता है? इस साल के बजट में श्रीअन्न के उत्पादन पर भी बहुत बल दिया गया है। इसका लाभ कर्नाटक के सूखा प्रभावित क्षेत्रों के छोटे-छोटे किसानों को सबसे अधिक लाभ होगा।

साथियों,

डबल इंजन सरकार के ईमानदार प्रयासों के कारण आज भारत के नागरिक का विश्वास बुलंदी पर है, आत्मविश्वास बुलंदी पर है। हम हर देशवासी का जीवन सुरक्षित करने के लिए, भविष्य समृद्ध करने के लिए दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। आपका निरंतर आशीर्वाद ही हम सभी के लिए ऊर्जा है, हमारी प्रेरणा है। एक बार फिर आप सभी को बजट और आज तुमकुरु में जो विकास के प्रोजेक्ट का लोकार्पण और शिलान्यास हुआ है, इसके लिए मैं बहुत-बहुत बधाई देता हूँ। आप आज इतनी बड़ी तादाद में यहाँ आए हैं, हमें आशीर्वाद दे रहे हैं, मैं आप सबका भी हृदय से बहुत-बहुत आभार व्यक्त करता हूँ।

धन्यवाद !