"हमारा तिरंगा, अतीत में हमारे गौरव, वर्तमान के प्रति कर्तव्यनिष्ठा और भविष्य के सपनों का प्रतिबिंब है"
"हमारा राष्ट्रीय ध्वज देश के वस्त्र उद्योग, देश की खादी और हमारी आत्मनिर्भरता का प्रतीक है"
"हमारा तिरंगा भारत की एकता, भारत की अखंडता और भारत की विविधता का प्रतीक है"
"जनभागीदारी के ये अभियान नए भारत की नींव को मजबूत करेंगे"

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए सूरत में आयोजित तिरंगा रैली को संबोधित किया। उन्होंने सभी को अमृत महोत्सव की शुभकामनाएं देते हुए अपने संबोधन की शुरुआत की और कहा कि कुछ ही दिनों में भारत अपनी आजादी के 75 साल पूरे कर रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि हम सभी इस ऐतिहासिक स्वतंत्रता दिवस की तैयारी कर रहे हैं और भारत के कोने-कोने में तिरंगा फहराया गया है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि गुजरात का हर कोना उत्साह से भरा हुआ है और सूरत ने अपनी गरिमा बढ़ाई है। उन्होंने कहा, ''आज पूरे देश का ध्यान सूरत पर है। एक तरह से सूरत की तिरंगा यात्रा में मिनी इंडिया देखने को मिल रहा है। इसमें समाज के हर वर्ग के लोग एक साथ शामिल हैं।” प्रधानमंत्री ने कहा कि सूरत ने तिरंगे की असली एकजुटता की ताकत दिखाई है। उन्होंने कहा कि भले ही सूरत ने अपने व्यापार और अपने उद्योगों के कारण दुनिया पर एक छाप छोड़ी है, लेकिन आज की तिरंगा यात्रा पूरी दुनिया के लिए आकर्षण का केंद्र होगी।

 

सभा को संबोधित करते हुए, प्रधानमंत्री ने सूरत के लोगों की सराहना की, जिन्होंने तिरंगा यात्रा में हमारे स्वतंत्रता संग्राम की भावना को जीवंत किया। उन्होंने कहा, "चाहे कपड़ा बेचने वाला हो, दुकानदार हो, कोई करघे कारीगर हो, कोई सिलाई और कढ़ाई का कारीगर हो, अथवा परिवहन से जुड़ा हो, वे सभी इसमें जुड़े हुए हैं।" उन्होंने सूरत के पूरे कपड़ा उद्योग के प्रयासों की सराहना की, जिन्होंने इसे एक भव्य आयोजन में बदल दिया। प्रधानमंत्री ने तिरंगा अभियान में इस जनभागीदारी के लिए विशेष रूप से श्री सांवर प्रसाद बुधिया और इस पहल को शुरू करने वाले 'साकेत - सेवा ही लक्ष्य' समूह से जुड़े स्वयंसेवकों को बधाई दी। प्रधानमंत्री ने इस पहल को सशक्त बनाने वाले सांसद श्री सी. आर. पाटिल जी को भी धन्यवाद दिया।

प्रधानमंत्री ने कहा, "हमारा राष्ट्रीय ध्वज अपने आपमें देश के वस्त्र उद्योग, देश की खादी और हमारी आत्मनिर्भरता का एक प्रतीक रहा है।" उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में सूरत ने हमेशा से आत्मनिर्भर भारत के लिए आधार तैयार किया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि गुजरात ने बापू के रूप में आजादी की लड़ाई को नेतृत्व दिया और गुजरात ने लौह पुरुष सरदार पटेल जैसे नायक दिये, जिन्होंने आजादी के बाद एक भारत-श्रेष्ठ भारत की बुनियाद रखी। बारडोली आंदोलन और दांडी यात्रा से निकले संदेश ने पूरे देश को एक कर दिया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत का तिरंगा केवल तीन रंगों को ही स्वयं में नहीं समेटे है। हमारा तिरंगा, हमारे अतीत के गौरव को, हमारे वर्तमान की कर्तव्यनिष्ठा को और भविष्य के सपनों का भी एक प्रतिबिंब है। प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारा तिरंगा भारत की एकता का, भारत की अखंडता का और भारत की विविधता का भी एक प्रतीक है। हमारे सेनानियों ने तिरंगे में देश का भविष्य देखा, देश के सपने देखे और इसे कभी झुकने नहीं दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि आजादी के 75 साल बाद जब हम एक नए भारत की यात्रा की शुरुआत कर रहे हैं, तिरंगा एक बार फिर भारत की एकता और चेतना का प्रतिनिधित्व कर रहा है।

प्रधानमंत्री ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि देश भर में हो रही तिरंगा यात्राएं हर घर तिरंगा अभियान की शक्ति और निष्ठा का प्रतिबिंब हैं। प्रधानमंत्री ने कहा, “13 से 15 अगस्त तक भारत के हर घर में तिरंगा फहराया जाएगा। समाज के हर वर्ग, हर जाति और पंथ के लोग अनायास ही एक पहचान के साथ जुड़ रहे हैं। यही भारत के एक कर्तव्यनिष्ठ नागरिक की पहचान है।"

प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि यही भारत माता की संतान की पहचान है। प्रधानमंत्री ने संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि हर घर तिरंगा अभियान को समर्थन देने में पुरुषों और महिलाओं, युवाओं, बुजुर्गों के साथ-साथ, हर कोई अपनी भूमिका निभा रहा है। प्रधानमंत्री ने इस बात पर भी प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि हर घर तिरंगा अभियान से कई गरीब लोगों, बुनकरों और हथकरघा श्रमिकों को भी अतिरिक्त आय हो रही है। प्रधानमंत्री ने आजादी का अमृत महोत्सव में हमारे संकल्पों को नई ऊर्जा देने वाले आयोजनों के महत्व के बारे में चर्चा करते हुए अपने संबोधन का समापन किया। प्रधानमंत्री ने कहा, ''जनभागीदारी के इन अभियानों से नए भारत की बुनियाद मजबूत होगी।''

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