साझा करें
 
Comments

केंद्रीय मंत्रिपरिषद में शामिल होने के बाद जब मैं पहली बार अपने राज्य कर्नाटक वापस आया, तो वह जन आशीर्वाद यात्रा के लिए था। चार दिनों की इस यात्रा के दौरान मुझे छह जिलों के सैकड़ों नागरिकों, सोशल लीडर्स और कार्यकर्ताओं से मिलने का मौका मिला।

पूरी यात्रा के दौरान मुझे आशीर्वाद और शुभकामनाएं देने वालों का शानदार रेस्पांस था- लोगों ने अपने पीएम और नेता नरेन्द्र मोदी पर जो भरोसा, विश्वास और गर्व महसूस किया। शिमोगा के एक किसान ने मुझे उनके जीवन को बदलने के लिए सरकार द्वारा मदद किए जाने पर धन्यवाद दिया। सिरसी में उज्ज्वला की एक गृहिणी लाभार्थी से लेकर श्रद्धेय स्वामीजी से आशीर्वाद के लिए मैंने जिन विभिन्न मठों का दौरा किया और जिन हेल्थ वॉरियर्स और कार्यकर्ताओं से उन्हें धन्यवाद देने के लिए मिला, उन सभी ने खुद को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के न्यू इंडिया के विजन में एक भागीदार के रूप में देखा। मुझ पर स्नेह, समर्थन और आशीर्वाद की बौछार इसलिए हुई क्योंकि मैं भी नरेन्द्र मोदी की टीम में था, जैसे उनमें हर एक था।

17 सितंबर को प्रधानमंत्री मोदी का जन्मदिन है। विश्वकर्मा दिवस भी है। गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में उनके 13 साल और प्रधानमंत्री के रूप में 7 साल ने गवर्मेंट लीडरशिप, कड़ी मेहनत और नीति निर्माण में नए मानक स्थापित किए हैं और सार्वजनिक जीवन और सार्वजनिक सेवा के सभी लोगों के लिए बार (Bar) को महत्वपूर्ण रूप से उठाया है।

गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में उनके 13 साल और प्रधान मंत्री के रूप में सात साल ने सरकारी नेतृत्व, कड़ी मेहनत और नीति निर्माण में नए मानक स्थापित किए हैं और सार्वजनिक जीवन और सार्वजनिक सेवा में उन सभी के लिए बार को महत्वपूर्ण रूप से ऊपर उठाया है।

उन्होंने हमारे लोकतंत्र के बारे में स्थायी राजनीतिक राजवंश, भ्रष्टाचार, और यथास्थितिवाद के मिथकों को खत्म कर दिया है और टेरर रेस्पांस सहित कई मुद्दों के बारे में बताया है, जो 1947 के बाद से कायम है जब हम एक स्वतंत्र देश बन गए।

उन्होंने प्रत्येक भारतीय के आत्मविश्वास, महत्वाकांक्षाओं और आकांक्षाओं को भी फिर से स्थापित किया है। ये उपलब्धियां आज और अभी विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि हम आजादी के 75वें वर्ष का जश्न मना रहे हैं और भारत के भविष्य पर अपनी नजरें गड़ाए हुए हैं।

30 मई, 2019 को उन्हें एक जबरदस्त और अभूतपूर्व जनादेश मिला। हाल के इतिहास में किसी भी नेता द्वारा सबसे निर्णायक जनादेश, लगभग तीन दशकों के बाद एक नेता और राजनीतिक दल के लिए पूर्ण बहुमत। 61 करोड़ लोगों द्वारा वोट डालने के बाद ये लोकप्रिय वोट उनके पहले पांच वर्षों के कार्यकाल पर लोगों की मुहर थी।  निहित स्वार्थों के एक गठबंधन द्वारा झूठ और बदनामी के दुष्प्रचार अभियान के साथ लगभग लगातार टारगेटेड किए जाने के बावजूद यह जीत थी।

उनका राजनीतिक और शासन दर्शन एक समान रहा है - सभी के लिए समान अवसर के आसपास। सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास।

नरेन्द्र मोदी ने इन सात वर्षों में एक प्रधानमंत्री के रूप में वह किया जो अधिकांश सरकारें दशकों तक नहीं कर पाई थीं। वित्तीय क्षेत्र में पारदर्शिता, सभी के लिए आर्थिक अवसरों का विस्तार, राष्ट्रीय सुरक्षा, रिकॉर्ड उच्च निवेश, टेक्नोलॉजी, आर्टिकल 370, नया केंद्र शासित प्रदेश, नागरिक संशोधन अधिनियम, राम मंदिर का सौहार्दपूर्ण समाधान आदि।  हम सभी के आभारी होने के लिए बहुत कुछ है।

लेकिन कोविड महामारी के इस अंतिम 18 महीनों के दौरान उनका नेतृत्व, दूरदर्शिता और अथक परिश्रम ही है जिसके लिए हम वास्तव में आभारी हैं।

उन्होंने वायरस से लड़ने और इस पर काबू पाने के लिए देश के सामूहिक संकल्प को बनाने के लिए प्रत्येक नागरिक को एकजुट किया और कठिन लॉकडाउन के दौरान सभी 1.4 बिलियन भारतीयों का शांतिपूर्वक नेतृत्व किया।

जब कोविड महामारी ने हमें प्रभावित किया, हमारे पास पीपीई किट मैन्युफैक्चरिंग, सीमित अस्पताल और आईसीयू बेड, राज्यों में खराब स्वास्थ्य देखभाल क्षमता, फार्मा, वैक्सीन, उपकरण और स्वास्थ्य सेवा कर्मचारियों की सीमित क्षमता थी। जैसे कि ये वास्तविक चुनौतियाां ही सिर्फ निरुत्साहित करने वाली नहीं थीं, बल्कि पीएम मोदी को हमारी उत्तरी सीमाओं पर चीन की आक्रामकता और पाकिस्तान द्वारा जारी आतंक और निश्चित रूप से जुझना पड़ा और यही नहीं भारत के कुछ राजनेता, कुछ राज्यों के अयोग्य / या गैर-जिम्मेदार मुख्यमंत्री कोविड महामारी को जनता की सेवा करने के बजाय एक राजनीतिक अवसर के रूप में देखते थे।

लेकिन इन सबके बीच उन्होंने बगैर विचलित हुए हमलोगों को नेतृत्व प्रदान किया।

इस महामारी के दौरान भारत का लचीलापन (Resilience) और रेस्पांस नरेन्द्र मोदी के पहले कार्यकाल में कई दूरदर्शी फैसलों के कारण भी संभव हुआ। इस झटके से सबसे अधिक प्रभावित गरीब और कमजोर लोगों को जन-धन योजना (JDY) योजना के बैंक खातों के माध्यम से त्वरित वित्तीय राहत प्रदान की गई। जन-धन योजना (JDY), पीएम गरीब कल्याण योजना, पीडीएस और पीएम किसान ने यह सुनिश्चित किया है कि सरकार द्वारा बिना किसी लीकेज के सीधे ग्रामीण, किसानों और गरीबों को आर्थिक रूप से राहत प्रदान किया जा सके।

डिजिटल इंडिया ने करोड़ों लोगों को सूचनाओं से जुड़ने और घर से ही व्यवसायों को जारी रखने में मदद की। खाना पकाने के सिलेंडर के लिए उज्ज्वला योजना, जन औषधि योजना और पीएम आयुष्मान जैसी योजनाएं इस महामारी के दौरान आम लोगों के लिए बड़ी मदद के रूप में सामने आईं। पीएम मोदी के नेतृत्व ने सुनिश्चित किया है कि भारत झटके को संभाल सकता है और अन्य विकसित देशों की तुलना में मौतों की संख्या को बहुत कम रख सकता है। 13 सितंबर को भारत ने 75 करोड़ टीकाकरण को पार कर लिया।

दुनिया कोविड के बाद बड़ा 'टेक्टॉनिक' परिवर्तन देख रही है। भारत भी अपने भविष्य के बारे में अधिक लचीला, आत्मविश्वास और महत्वाकांक्षी होकर उभरा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के  आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण और उनके दृढ़ विश्वास के नेतृत्व के कारण 'भारत का समय' आ गया है। जैसा कि उन्होंने इस साल 15 अगस्त को कहा था- यही समय है, यही समय है....

सभी भारतीयों के लिए पीएम मोदी का जन्मदिन मनाने का सबसे अच्छा तरीका है कि वे सभी के लिए एक मजबूत, समृद्ध भारत के उनके सपने पर विश्वास करें और उस पर काम करें।  सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास। इस दिन मैं उनके दीर्घायु, अच्छे स्वास्थ्य और मातृभूमि की सेवा करने की कामना करता हूं।

 

लेखक का नाम : राजीव चंद्रशेखर

डिस्कलेमर :

यह आर्टिकल पहली बार The Economic Times में पब्लिश हुआ था।

यह उन कहानियों या खबरों को इकट्ठा करने के प्रयास का हिस्सा है जो प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और लोगों के जीवन पर उनके प्रभाव पर उपाख्यान / राय / विश्लेषण का वर्णन करती हैं।

20 Pictures Defining 20 Years of Seva Aur Samarpan
Explore More
'चलता है' नहीं बल्कि बदला है, बदल रहा है, बदल सकता है... हम इस विश्वास और संकल्प के साथ आगे बढ़ें: पीएम मोदी

लोकप्रिय भाषण

'चलता है' नहीं बल्कि बदला है, बदल रहा है, बदल सकता है... हम इस विश्वास और संकल्प के साथ आगे बढ़ें: पीएम मोदी
How India is becoming self-reliant in health care

Media Coverage

How India is becoming self-reliant in health care
...

Nm on the go

Always be the first to hear from the PM. Get the App Now!
...
Modi’s Human Touch in Work, Personal Interactions Makes Him The Successful Man He is Today : Japan K Pathak
October 20, 2021
साझा करें
 
Comments

On October 7, Narendra Modi completed 20 years as the head of a government. For those of us in Gujarat, we have closely seen the rise of Narendra Modi and how he altered the trajectory of the state. People often ask what is the one thing that separates Modi. For me, it is the human touch, be it in work or personal interactions that has led to him scaling heights.

The 1980s were an interesting period in the politics of Gujarat. The Congress was comfortably ensconced in power, both at the Centre and in the state. Despite its lackluster governance, bitter factionalism and misplaced priorities, it was unimaginable that any other political party would come to power. Hardcore BJP supporters and workers were also uncertain.

It was in such times that Modi made a shift from RSS to a more political life in the BJP. He took up the challenge of preparing the party for the Ahmedabad Municipal Corporation elections. One of his earliest steps was to integrate professionals with the BJP. The party machinery reached out to eminent doctors, lawyers, engineers and teachers to join the electoral and political process. Similarly, Modi attached great importance to talking about governance issues in addition to only politics. He was constantly thinking of innovative ways of uplifting people and transforming lives.

As a communicator, Modi was always outstanding and more than that he was motivating. I recall this one particular speech at a medium sized gathering at Nirmal Party Plot in Ahmedabad’s Dharnidhar. For the first few minutes, he made people laugh through the witty comments he was known for. He then went on to ask the crowd — shall we continue joking or shall we talk about issues of national importance? I do not know what courage I developed at that time that I shouted – Both. On hearing me say that he turned to me and said – No, we cannot do both. He then talked at length about BJP’s governance vision, Article 370, the Shah Bano Case and more. The ideological clarity left me spellbound.

Those outside Gujarat would not know that Modi’s cassettes of speeches were very popular in urban Gujarat during early 1990s. These cassettes would include parts of a speech Modi would have given in some part of the state.
One more of his moving speeches came in 1994 just after the Latur earthquake. From the RSS Karyalaya in Ahmedabad, relief material and a few volunteers were sent to Latur. Modi gave an impromptu speech. After the speech, at least 50 people said they want to leave for Latur right away and that Modi’s words have had a great impact on their mind. He dissuaded them and said it is more important relief work reaches than people going, and that they must keep working for the nation where they are.

Narendra Modi’s connect with different sections was also linked to his ability to reach out to different sections of society. The world saw his ‘Chai Pe Charcha’ in 2013-2014 but I cannot forget how Modi forged a bond with different people over cups of tea by interacting with morning walkers. During the 1990s, I met him at Ahmedabad’s famous Parimal Garden where he was addressing a group of morning walkers. I could instantly see the connect. One of the doctors who knew me told me that similar interactions with Narendra Bhai were very helpful for him to understand current affairs.

There are two anecdotes, which to me show the humane side of Narendra Modi. One of them dates back to the early 2000s. Historian Rizvan Kadri and I were documenting some of the works of KeKa Shastri, a doyen of Gujarati literature and veteran of the Sangh eco-system. We had gone to meet him and one thing that struck me was his poor health. I took a photograph and got it sent to Narendra Modi’s office. At soonest, KeKa Shastri had a nurse who would attend to him.

The other relates to author Priyakant Parikh. He had a strong desire that his 100th work be launched only by Modi but the only glitch — he is immobile and homebound due to a major accident. I remember CM Modi going to Priyakant Parikh’s house at Ashram Road and launching his book. Gujarati literature circles were spellbound that a sitting CM would go to the drawing room of an ailing author and launch his book!

Two virtues that have stood him well, which would serve every political person well are – his sharp listening skills and his love for technology. His only regret about technology — that the art of remembering phone numbers was going!

Through his political career, party disciple has been paramount for Narendra Modi. Ambition is not known to him. No wonder the BJP has never lost a single election – be it Lok Sabha, Vidhan Sabha or local body, when Narendra Modi was given the task of coordinating the party strategy. The only time the BJP saw electoral setback was in the year 2000 and that was when Narendra Modi was outside the state.

As journalists, we have to meet several people but Narendra Modi told me when I was a young reporter that these must not be transactional relations but bonds that last a lifetime. Sometime around Holi in 1998 I happened to be in Delhi. Narendra Modi said something I will never forget. He said, “You must have 5,000 numbers in your telephone diary and you must have met them once and that too not in a formal way. You must know them just not as a source but as an acquaintance or friend.” I have not met 5,000 people as Narendra Modi asked me to but it did make me realise the importance of a human touch that is so important. Narendra Modi has it in plenty, which is why he is so successful.

 

Author Name: Japan K Pathak

Disclaimer:

This article was first published in News 18

It is part of an endeavour to collect stories which narrate or recount people’s anecdotes/opinion/analysis on Prime Minister Shri Narendra Modi & his impact on lives of people.