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“सरकार बिना थके स्वस्थ भारत के सपने को साकार करने के लिए प्रयासरत है, जहां हर नागरिक को सही और सस्ती स्वास्थ्य सेवा का अधिकार मिले।” - नरेंद्र मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने लोकसभा क्षेत्र वाराणसी में विकास कार्यों को एक नई गति दी है। उनके ही प्रयासों का परिणाम है कि परियोजनाओं के समय पर क्रियान्वयन के साथ ही काशी का कायाकल्प होना प्रारंभ हो गया है। स्वास्थ्य क्षेत्र में ही पीएम मोदी ने कई परियोजनाएं काशी को समर्पित किए हैं। पिछले ढाई साल में उन्होंने 1200 करोड़ रुपए से ज्यादा के स्वास्थ्य सेवाओं को यहां के लोगों को उपहार दिए हैं। इसका फायदा काशी ही नहीं पूरे पूर्वांचल के लोगों को मिल रहा है।

प्रधानमंत्री ने सांसद बनने के बाद काशी हिंदू विश्वविद्यालय के आईएमएस में 334 बेड के ट्रॉमा सेंटर का उद्घाटन किया। 146.60 करोड़ की लागत से बने 334 बेड के इस ट्रामा सेंटर में अप्रैल, 2017 से मरीजों के लिए चौबीसों घंटे मुफ्त इलाज और जांच की व्यवस्था होगी। ट्रॉमा सेंटर के 334 बेड के लिए प्रति बेड अनुदान को एक लाख रुपए से बढ़ाकर दो लाख रुपए कर दिया गया है। साथ ही टेलीमेडिसिन के लिए भी 103 करोड़ रुपए दिए गए।

मरीजों की सुविधा के लिए आईएमएस के सर सुंदरलाल अस्पताल में बेड की संख्या 1200 से बढ़ाकर 1500 कर दी गई। इसके साथ ही आईएमएस में 580 करोड़ रुपये की लागत से 250 बेड के मदन मोहन मालवीय कैंसर सेंटर का शिलान्यास किया गया। पीएम मोदी ने आईएमएस में ही 200 करोड़ की लागत से 250 बेड के शताब्दी सुपर स्पेशलिटी काम्पलेक्स का भी शिलान्यास किया।

प्रधानमंत्री ने मरीजों के लिए अमृत योजना के तहत सस्ती दवाइयों की उपलब्धता सुनिश्चित करते हुए राष्ट्रीय आरोग्य निधि से बीपीएल कार्ड धारकों को गंभीर बीमारियों के मुफ्त इलाज के लिए 50 लाख रुपए स्वीकृत किए।

पांडेयपुर ईएसआई अस्पताल में सुविधा बढ़ाते हुए इसमें 150 करोड़ की लागत से बेड की संख्या 60 से बढ़ाकर 150 कर दी गई है। ईएसआई डिस्पेंसरी भेलुपुर में भी 3.5 करोड़ की लागत से नई सुविधाएं प्रदान की गई है। वाराणसी के चैकाघाट मातृगृह, दुर्गाकुंड मातृगृह का एनएचएम के तहत जीर्णोद्वार और शिवपुर सीएचसी का नवनिर्माण किया गया है।

साफ है कि पीएम मोदी ने अपने लोकसभा क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं के लिए ढेरों काम किए हैं। सांसद बनने के बाद से यहां उन्होंने 1200 करोड़ रुपए से ज्यादा की स्वास्थ्य परियोजनाएं शुरू की हैं, जिसका फायदा पूरे पूर्वांचल के लोगों को मिल रहा है।

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2022 एससीओ शिखर सम्मेलन में वाराणसी पहली एससीओ पर्यटन एवं सांस्कृतिक राजधानी नामित
September 16, 2022
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शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के राष्ट्राध्यक्षों की परिषद की समरकंद, उज्बेकिस्तान में आयोजित 22वीं शिखर बैठक में 16 सितंबर, 2022 को वाराणसी शहर को 2022-2023 की अवधि के लिए पहली एससीओ पर्यटन और सांस्कृतिक राजधानी नामित किया गया है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने शिखर सम्मेलन में भाग लिया था।


वाराणसी को पहली एससीओ पर्यटन और सांस्कृतिक राजधानी नामित किए जाने से भारत और एससीओ के सदस्य देशों के बीच पर्यटन, सांस्कृतिक और लोगों के आदान-प्रदान को बढ़ावा मिलेगा। यह एससीओ के सदस्य देशों, विशेष रूप से मध्य एशियाई गणराज्यों के साथ भारत के प्राचीन सभ्यतागत संबंधों को भी रेखांकित करता है।


इस प्रमुख सांस्कृतिक आउटरीच कार्यक्रम के फ्रेमवर्क के अंतर्गत, वर्ष 2022-23 के दौरान वाराणसी में अनेक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिनमें भाग लेने के लिए एससीओ के सदस्य देशों से मेहमानों को आमंत्रित किया जाएगा। इन आयोजनों के प्रति भारतविदों, विद्वानों, लेखकों, संगीतकारों और कलाकारों, फोटो पत्रकारों, यात्रा ब्लॉगर्स और अन्य आमंत्रित अतिथियों के आकर्षित होने की आशा है।


एससीओ सदस्य देशों के बीच संस्कृति और पर्यटन के क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एससीओ पर्यटन और सांस्कृतिक राजधानी नामित किए जाने संबंधी नियमों को 2021 में दुशांबे एससीओ शिखर सम्मेलन के दौरान अंगीकृत किया गया था।