"Shri Narendra Modi in Kerala, attends 51st Dharma Meemamsa Parishad at Kerala’s Sivagiri Mutt"
"Shri Modi pays rich tributes to Sree Narayana Guru"
"Sree Narayana Guru epitomized the epitomized the merger of ‘Adhyatma’ (spirituality) with ‘Samajh Sudhar’ (social reform), and ensured there is no room for hatred: Shri Modi"
"CM remembers glorious contribution of saints and seers in India’s freedom struggle"
"Hindu society has always produced saints, social reformers and people have followed their path & corrected the wrongs in society: Shri Modi"
"Our Saints and seers made efforts to reduce untouchability in society but untouchability increased in politics: Shri Modi"

ऋषि-मनीषियों की संस्कार सिंचन परंपरा ने भारत की महानविरासत को एक एवं अखंड रखाः मुख्यमंत्री

केरल के शिवगिरि मठ में धर्म मीमांसा परिषद को गुजरात के मुख्यमंत्री का प्रेरक संबोधन

गुजरात के मुख्यमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज केरल में शिवगिरि मठ की ओर से आयोजित श्री नारायण गुरु धर्म मीमांसा परिषद को संबोधित करते हुए देश में नये स्वरूप में समाज को तोड़ने वाली राजनीतिक अस्पृश्यता के गंदे स्वरूप के खिलाफ सावधान रहने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि नारायण गुरु स्वामी जैसे देश के अनेक संतों और समाज सुधारकों ने समाज में दलित, शोषित और पीड़ितों के अस्पृश्यता निवारण को लेकर समाज जागृति अभियान सफलतापूर्वक चलाया था। लेकिन आजादी के बाद देश में राजनीति ने राजनीतिक अस्पृश्यता का अवतार धारण कर लिया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय संत शक्ति एवं समाज सुधारकों ने समाज में नफरत और धिक्कार का वातावरण सृजित किये बगैर समाज में से बुराइयों और अस्पृश्यता के शोषण को दूर करने के लिये प्रेम और सद्भावना के माहौल का प्रभाव खड़ा किया था।परन्तु स्थापित हित रखने वाले देश के राजनीतिज्ञों ने समाज को तोड़ने का कार्य किया है।

देश की सांप्रत समस्याओं के सन्दर्भ में मुख्यमंत्री ने कहा कि श्री नारायण गुरु जैसे महान संतों एवं समाज सुधारकों द्वारा प्रेरित शिक्षा-दीक्षा के मार्ग पर हम चले होते तो देश समस्यामुक्त होता। उन्होंने कहा कि समाजजीवन शक्ति को संतों के प्रभाव से ही संस्कार मिले हैं।

आज शाम केरल के शिवगिरि मठ में पहुंचने पर मुख्यमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का नारायण गुरु धर्म संगम ट्रस्ट के प्रमुख श्री प्रकाशानंद जी एवं अन्य संत पदाधिकारियों ने भावभीना स्वागत किया। श्री मोदी ने नारायण गुरु की समाधि के समक्ष श्रद्धासुमन अर्पित करने के साथ ही माता शारदादेवी मंदिर में भक्तिभाव से दर्शन भी किये। श्री नारायण गुरु द्वारा स्थापित शिवगिरि मठ में आज से तीन दिनों के लिए शारदादेवी मंदिर की १०१वीं प्रतिष्ठा जयंती महोत्सव एवं धर्म मीमांसा परिषद का प्रारंभ हुआ है, जिसमें मुख्यमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने बतौर मुख्य अतिथि प्रेरक संबोधन दिया। विराट संख्या में उपस्थित भाविक जनसमुदाय का अभिवादन करते हुए श्री मोदी ने कहा कि अंग्रेजों की गुलामी के कालखंड में और तत्कालीन समाज व्यवस्था की अनेक बुराइयों के खिलाफ देशभक्ति और समाजशक्ति का जागरण करने के लिए नारायण गुरु स्वामी जैसे समाज सुधारकों ने सामाजिक चेतना खड़ी की थी। उन्होंने कहा कि १८५७ के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के बाद भी अंग्रेज तो हजारों वर्ष तक भारत को गुलामी की जंजीरों में जकड़े रखने को प्रतिबद्ध थे। लेकिन भारतीय संस्कृति से जुड़े संत-महंतों की संत-शक्ति ने भारत को गुलामी से मुक्त कराने के लिए आजादी के आंदोलन का आधार संत आंदोलन के जरिए खड़ा किया, नतीजतन समग्र समाज में सामाजिक एकता और जागरण का वातावरण सृजित हुआ।

मुख्यमंत्री ने कहा कि दुनिया में अनेक मानव संस्कृतियां स्थापित हुईं और काल के गर्त में विलिन भी हो गई। लेकिन क्या वजह है कि अनेकों आक्रमण के पश्चात भी भारतीय संस्कृति टिकी हुई है। वजह यह है कि हजारों वर्षों की ऋषि-मनीषियों की प्रेरणा और संस्कार ने हमारी संस्कृति का जतन किया है। हिन्दू समाज में अनेक बुराइयां, उतार-चढ़ाव और खराबी आने के बावजूद भारतीय संस्कृति ने स्वयं में ही ऐसे संत एवं सुधारक पैदा किये जिन्होंने समाज को विकृति से बचाने के लिए संस्कार-संस्कृति का जतन किया है।

श्री मोदी ने कहा कि आजादी के बाद भारत में राजनीति ने समाज को जोड़ने के बजाय तोड़ने का कार्य किया है। लेकिन यदि हम भारत-भक्ति और समाजशक्ति को जोड़ने वाले संतों-महापुरुषों ने अपना समग्र जीवन जिन संस्कारों और संस्कृति के लिए समर्पित किया, उस मार्ग पर चलें तो कश्मीर से कन्याकुमारी तक भारत की एकता और शक्ति को आंच भी नहीं आएगी।मुख्यमंत्री ने भूमिका पेश करते हुए कहा कि श्री नारायण स्वामी ने दलितों, शोषितों एवं वंचितों के विकास, नारी सशक्तिकरण एवं युवाओं के कौशल विकास के लिए आज से सौ वर्ष पूर्व शिक्षा एवं संस्कार का समाज जागृति एवं समाज सुधार का जो अभियान छेड़ा था उसमें आध्यात्मिकता का अद्भुत समन्वय कर बताया था। मंदिरों को उन्होंने सामाजिक चेतना का केन्द्र बनाया था और शिक्षा के लिए विद्या मंदिर बनाये। अंग्रेजों के खिलाफ उन्हीं की भाषा में टक्कर लेकर उन्होंने भारत माता को आजाद कराने के लिए अंग्रेजी शिक्षा की सुविधा हेतु साहसिक कदम उठाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज समग्र विश्व जलवायु परिवर्तन और आतंकवाद के भय से त्रस्त है, ऐसे में श्री नारायण गुरु स्वामी जैसे भारतीय संतों ने एक जात, एक धर्म और एक ईश्वर का मंत्र देकर विश्व को प्राकृतिक तथा मानव सृजित समस्या से बचने का मार्ग दिखाया है। श्री मोदी ने कहा कि २१वीं सदी में भारत को विश्व गुरु बनाने के लिए स्वामी विवेकानंद ने जो स्वप्न देखा था, उसे साकार करने के लिए हमारी युवा और मातृशक्ति को भारत को शक्तिशाली बनाने विकास की प्रक्रिया में जोड़ने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि संतशक्ति का प्रभाव ही समाज को बुराइयों से दूर रखेगा, समाज को तोड़ने वाले तत्वों के विरुद्ध समाज की एकता को मजबूत बनाएगा। शिक्षा एवं संस्कार ही भारत में समाज की शक्ति को देशभक्ति एवं देश के निर्माण के लिए चेतनवंत रखेंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि गुजरात ने श्री नारायण स्वामी के जीवन आदर्शों से प्रेरणा लेकर नारी सशक्तिकरण और युवाओं के कौशल विकास के लिए अनेक उपलब्धियां हासिल की हैं और हाल ही में गुजरात ने कौशल विकास के उत्तम कार्य का प्रधानमंत्री अवार्ड भी अर्जित किया है। शिवगिरि मठ के प्रमुख श्री प्रकाशानंद जी गुरु ने स्वागत भाषण में श्री नरेन्द्र मोदी को एक ईमानदार और कुशल प्रशासक के रूप में श्रेय देते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में गुजरात ने देश और दुनिया में अनोखा गौरव प्राप्त किया है।

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Prime Minister shares a Sanskrit Subhashitam highlighting the qualities of a truly wise person dedicated to the welfare of society
June 09, 2026

Prime Minister Shri Narendra Modi shared a Sanskrit Subhashitam today highlighting the qualities of a truly wise person dedicated to the welfare of society.

The Prime Minister noted that through continuous efforts inspired by the spirit of 'Sabka Saath, Sabka Vikas' over the last 12 years, we are today moving forward towards a strong and self-reliant India.

The Prime Minister wrote on X:

"राष्ट्र निर्माण के लिए समर्पण और सेवाभाव हमारी अमूल्य पूंजी रही है। बीते 12 वर्षों में 'सबका साथ, सबका विकास' की भावना से प्रेरित निरंतर प्रयासों से ही आज हम एक सशक्त और आत्मनिर्भर भारत की ओर अग्रसर हैं।

#12YearsOfSeva

आर्यकर्मणि रज्यन्ते भूतिकर्माणि कुर्वते।
हितं च नाभ्यसूयन्ति स वै पण्डित उच्यते॥"

A person who is always engaged in noble and virtuous deeds, remains dedicated to progress and the welfare of society, respects the beneficial words and actions of others and harbors no ill will toward them, is truly called wise.