प्रधानमंत्री ने अच्छी संगति और समझदारी भरी सलाह पर जोर देते हुए संस्कृत सुभाषितम साझा किया
August 25th, 11:09 am
पीएम नरेन्द्र मोदी ने एक संस्कृत सुभाषितम साझा किया, जिसमें बताया गया है कि अच्छी संगति, समझदारी भरी सलाह और निस्वार्थ दोस्ती हमारे जीवन को कैसे समृद्ध बना सकती है। यह सुभाषितम हमें याद दिलाता है कि सही संगति और अच्छे विचारों से भरी बातचीत हमें अधिक संतुष्ट और शांतिपूर्ण जीवन की ओर ले जा सकती है।प्रधानमंत्री ने करुणा और संतोष का महत्व बताने वाला संस्कृत सुभाषितम साझा किया
August 24th, 08:08 am
पीएम नरेन्द्र मोदी ने एक संस्कृत सुभाषितम साझा किया, जिसमें बताया गया है कि कैसे करुणा, संतोष, प्रयास और दृढ़ संकल्प आत्म-सम्मान बढ़ाने, लालच और आलस्य पर काबू पाने और जीवन में अधिक संतुष्टि हासिल करने में मदद करते हैं। उन्होंने कहा कि ये गुण समाज में सहयोग और सद्भाव के बंधन को भी मजबूत करते हैं।प्रधानमंत्री ने निःस्वार्थ सेवा और समर्पण की भावना को रेखांकित करते हुए संस्कृत सुभाषितम् साझा किया
August 21st, 10:51 am
पीएम मोदी ने एक संस्कृत श्लोक साझा करते हुए इस बात पर प्रकाश डाला कि निःस्वार्थ सेवा, परोपकार और समर्पण की भावना देश को एक नई दिशा देती है। यह श्लोक संदेश देता है कि मनुष्यों को अपना जीवन सदैव दूसरों की सेवा और कल्याण के लिए समर्पित करना चाहिए, ठीक उसी प्रकार जैसे नदियाँ बिना किसी स्वार्थ के निरंतर बहती हुई अपने जल से असंख्य प्राणियों का जीवन पोषित करती हैं।पीएम मोदी ने उत्साह और दृढ़ता का महत्व बताने वाला संस्कृत सुभाषितम् साझा किया
August 20th, 10:40 am
पीएम नरेन्द्र मोदी ने एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया, जिसमें मुश्किल समय में भी उत्साह और दृढ़ता बनाए रखने के महत्व पर जोर दिया गया है। इसमें बताया गया है कि समझदार और दृढ़ निश्चयी लोग कठिन परिस्थितियों में भी हिम्मत या उत्साह नहीं खोते हैं।प्रधानमंत्री ने परोपकार और दूसरों के कल्याण के महत्व पर आधारित संस्कृत सुभाषित साझा किया
August 19th, 08:20 am
पीएम मोदी ने एक संस्कृत श्लोक साझा करते हुए इस बात पर प्रकाश डाला कि मनुष्यों के जन्म की पूर्ण सार्थकता अन्य प्राणियों के कल्याण के लिए कार्य करने में ही निहित है। यह श्लोक साथी प्राणियों के हित के लिए अपने शारीरिक सामर्थ्य, धन-सम्पत्ति, बुद्धि तथा वाणी का उपयोग करने पर बल देता है।पीएम मोदी ने आत्म-सम्मान, साहस और दृढ़ता के महत्व को रेखांकित करने वाला संस्कृत सुभाषितम् साझा किया
August 18th, 09:11 am
पीएम नरेन्द्र मोदी ने आत्म-सम्मान, साहस और गरिमा के साथ जीने के महत्व को बताते हुए एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया। इसमें किसी भी परिस्थिति में अपने सिद्धांतों और मूल्यों से समझौता किए बिना उन पर अडिग रहने पर जोर दिया गया।पीएम मोदी ने सामाजिक प्रगति को आगे बढ़ाने में सामूहिक संकल्प और एकता की शक्ति पर जोर देने वाला संस्कृत सुभाषितम् साझा किया
August 17th, 09:40 am
पीएम नरेन्द्र मोदी ने एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया, जिसमें राष्ट्रीय प्रगति को आगे बढ़ाने में सामूहिक संकल्प, विचारों की एकता और आपसी सहयोग की शक्ति पर जोर दिया गया। इसमें बताया गया कि कैसे एक साझा उद्देश्य की भावना एक समृद्ध समाज की नींव को मजबूत कर सकती है।विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर प्रधानमंत्री ने विभाजन पीड़ितों के साहस को किया याद
August 14th, 08:58 am
पीएम नरेन्द्र मोदी ने विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर विभाजन से प्रभावित लोगों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने उनके साहस और सामर्थ्य को याद किया, जिसके बल पर उन्होंने अपने जीवन को फिर से संभाला और भारत की प्रगति में अमूल्य योगदान दिया। उन्होंने एक संस्कृत सुभाषितम् भी साझा किया, जिसमें बताया गया है कि कड़ी मेहनत, साहस और मानवीय प्रयास मुश्किल परिस्थितियों को पार करने और अपने भाग्य को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं।पीएम मोदी ने जीवन की चुनौतियों से पार पाने में दृढ़ संकल्प, अथक परिश्रम और पुरुषार्थ के महत्व को रेखांकित करते हुए संस्कृत सुभाषितम् साझा किया
August 13th, 07:37 am
पीएम नरेन्द्र मोदी ने एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया, जिसमें जीवन की चुनौतियों का सामना करने और विपरीत परिस्थितियों को अनुकूल बनाने में दृढ़ संकल्प, अथक परिश्रम और पुरुषार्थ की शक्ति को रेखांकित किया गया है। सुभाषितम् में बताया गया है कि निरंतर प्रयास और अटूट संकल्प के माध्यम से व्यक्ति आगे बढ़ता है और अंततः सफलता प्राप्त करता है।पीएम मोदी ने दूरदर्शिता, विचारों, शब्दों और कार्यों के माध्यम से लोगों का दिल जीतने वाला संस्कृत सुभाषितम् साझा किया
August 12th, 08:10 am
पीएम नरेन्द्र मोदी ने एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया, जिसमें बताया गया है कि कैसे सही सोच, विचार, शब्द और काम लोगों का दिल जीत सकते हैं और उनका भरोसा, सम्मान और सद्भावना भी हासिल कर सकते हैं। उन्होंने भारत के युवाओं की संवेदनशीलता, सेवा की भावना और क्षमताओं पर भी जोर दिया और उन्हें देश की सबसे बड़ी ताकत बताया।पीएम मोदी ने व्यक्ति के जीवन और चरित्र को निखारने वाले आठ आवश्यक गुणों पर आधारित संस्कृत सुभाषितम् साझा किया
August 11th, 08:11 am
पीएम मोदी ने एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया, जिसमें बताया गया है कि जीवन को बेहतर बनाने और चरित्र को मजबूत करने के लिए आठ गुण बेहद जरूरी हैं। इनमें बुद्धिमत्ता, अच्छा आचरण, आत्मसंयम, ज्ञान, साहस, कुशल वाणी, उदारता और कृतज्ञता शामिल हैं।प्रधानमंत्री ने सत्य और प्रामाणिक सूचनाओं के महत्व पर आधारित संस्कृत सुभाषितम् साझा किया
August 10th, 10:00 am
पीएम मोदी ने आज एक संस्कृत श्लोक साझा करते हुए सत्य, प्रामाणिक और जनहितकारी सूचनाओं का प्रसार करने के महत्व पर प्रकाश डाला। यह श्लोक लोगों से ऐसा विश्वसनीय ज्ञान साझा करने का आग्रह करता है जो राष्ट्र और समाज को जागरूक, सशक्त तथा समरस बनाए।प्रधानमंत्री ने निःस्वार्थ सेवा भावना के महत्व को दर्शाने वाला संस्कृत सुभाषितम् साझा किया
August 07th, 11:17 am
पीएम नरेन्द्र मोदी ने एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया, जिसमें बताया गया है कि सच्ची महानता निस्वार्थ सेवा और बिना किसी फल की इच्छा के दूसरों की सहायता करने में होती है। उन्होंने कहा कि समाज की सेवा करना महान और श्रेष्ठ व्यक्तियों के जीवन का स्वाभाविक मार्ग होता है।पीएम नरेन्द्र मोदी ने संस्कृत सुभाषितम साझा किया, पृथ्वी को बताया सभी जीवों की माँ
August 06th, 11:07 am
पीएम नरेन्द्र मोदी ने एक संस्कृत सुभाषितम साझा किया, जिसमें पृथ्वी को सभी जीवों का पालन-पोषण करने वाली माँ बताया है। इस सुभाषितम के माध्यम से उन्होंने पृथ्वी के प्रति सम्मान, धर्म और सद्भाव के साथ जीवन जीने का संदेश दिया। उन्होंने प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर रहने और हमारे ग्रह की रक्षा करने वाले मूल्यों को बनाए रखने के महत्व पर भी बात की।प्रधानमंत्री ने आत्मिक विकास के महत्व पर आधारित संस्कृत सुभाषितम् साझा किया
August 05th, 12:30 pm
पीएम मोदी ने एक संस्कृत सुभाषितम् साझा करते हुए इस बात पर प्रकाश डाला कि आत्मिक विकास व्यक्ति के भीतर सेवा, समर्पण और राष्ट्र निर्माण की भावना का संचार करता है। उन्होंने बताया कि भारत की युवा शक्ति आज इन्हीं आदर्शों से प्रेरित होकर देश को हर क्षेत्र में आगे ले जा रही है।प्रधानमंत्री ने भारत के युवाओं के समर्पण और प्रयासों की सराहना करते हुए संस्कृत सुभाषितम् साझा किया
August 04th, 11:25 am
पीएम नरेन्द्र मोदी ने भारत के युवाओं के समर्पण और प्रयासों की सराहना करते हुए एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया। श्री मोदी ने कहा है कि निरंतर प्रयास और समर्पण से हमारी प्रतिभा निखरती है और उसमें सुधार होता है, और हमारे युवा इन्हीं गुणों को अपनाकर भारत का गौरव बढ़ा रहे हैं।प्रधानमंत्री ने साहस और दृढ़ता के महत्व को रेखांकित करते हुए संस्कृत सुभाषितम साझा किया
August 03rd, 09:51 am
पीएम नरेन्द्र मोदी ने एक संस्कृत सुभाषितम साझा किया, जिसमें बताया गया है कि साहस और दृढ़ता सबसे कठिन चुनौतियों से पार पाने में मदद करते हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जिस तरह जहाज के डूबने के बाद भी नाविक हार नहीं मानता, उसी तरह दृढ़ संकल्प और निरंतर प्रयास सफलता का मार्ग प्रशस्त करते हैं।प्रधानमंत्री ने प्रकृति के प्रति सम्मान और पर्यावरण संरक्षण पर प्रकाश डालते हुए संस्कृत सुभाषितम् साझा किया
July 30th, 10:26 am
पीएम नरेन्द्र मोदी ने एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया, जिसमें बताया गया है कि प्रकृति, पर्यावरण और समस्त सृष्टि के प्रति सम्मान हमारे जीवन का मूल आधार है। उन्होंने सभी से आह्वान किया कि हम कृतज्ञ भाव से प्रकृति की सेवा करें और मिलकर एक स्वस्थ, समृद्ध और मजबूत राष्ट्र के निर्माण के लिए कार्य करें।प्रधानमंत्री ने गुरु पूर्णिमा पर शिक्षकों की भूमिका को रेखांकित करते हुए संस्कृत सुभाषित साझा किया
July 29th, 08:20 am
पीएम नरेन्द्र मोदी ने गुरु पूर्णिमा के अवसर पर सभी देशवासियों को शुभकामनाएँ दीं और जीवन को आकार देने में शिक्षकों की अमूल्य भूमिका को रेखांकित करते हुए एक संस्कृत सुभाषितम साझा किया। उन्होंने बताया कि गुरु किस तरह प्रेरणा देते हैं, मार्गदर्शन करते हैं, शिक्षा प्रदान करते हैं और ज्ञान का संचार करते हैं। प्रधानमंत्री ने सभी से आग्रह किया कि वे गुरुओं के आदर्शों को अपने जीवन में मार्गदर्शक शक्ति बनाएं।प्रधानमंत्री ने प्रकृति संरक्षण के महत्व को दर्शाने वाला संस्कृत सुभाषितम् साझा किया
July 28th, 07:48 am
पीएम नरेन्द्र मोदी ने एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया है, जिसमें बताया गया है कि मानवता का कल्याण प्रकृति की रक्षा और सम्मान करने में ही निहित है। भारत की प्राचीन परंपराओं का जिक्र करते हुए, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि धर्म और प्रकृति के साथ मिल-जुलकर रहना ही शांति, समृद्धि और भलाई का आधार है।