प्रधानमंत्री ने राष्ट्र और मानवता की सेवा में सर्वस्व समर्पण को दर्शाते हुए संस्कृत सुभाषित साझा किया

February 11th, 10:31 am

आज पीएम मोदी ने एक संस्कृत सुभाषितम साझा किया, जो पूरी निष्ठा के साथ राष्ट्र और मानवता की सेवा का संदेश देता है – और जिसे पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी ने भी जीवनभर अपनाया। इस सुभाषितम का अर्थ है कि जिस राष्ट्र की महिमा का गान हिमालय करता हैं, जिसकी कीर्ति नदियों के साथ समुद्र तक प्रवाहित होती है, और जिसकी भुजाओं के समान दिशाएँ उसे नमन करती हैं, उस राष्ट्र को हम अपना सर्वस्व समर्पित करते हैं।