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In the 2014 Lok Sabha elections, the people of Telangana supported the NDA whole-heartedly, which emboldened me to take bold decisions in the long-term benefit of the country: PM Modi in Secunderabad
We are going forward with a vision of ‘Sabka Saath, Sabka Vikas’ and are making all efforts to ensure equitable development for all: PM Modi
The people of Telangana will reject all kinds of opportunistic alliances in the state and will fully support a strong, decisive and transparent BJP government that puts their interests first: Prime Minister Modi

भारत माता की... जय
भारत माता की... जय

तेलंगाना की महान धरती को मैं प्रणाम करता हूं। ये धरती अत्याचारियों के खिलाफ संघर्ष की गवाह रही है। हैदराबाद और तेलंगाना ने एक भारत-श्रेष्ठ भारत के सरदार पटेल के प्रयासों को मजबूती देने का काम किया है। आज मुझे खुशी है कि अनेक वरिष्ठ महानुभाव भारतीय जनता पार्टी से जुड़कर के देश को मजबूत बनाने का संकल्प लेकर के हमारे साथ जुड़ रहे हैं। भाई जितेंद्र रेड्डी जी हों, विजय रामा राव जी हों, सुधाकर रेड्डी जी हों, ये सारे लोग और बाकी वरिष्ठ लोग, जिन्होंने जब संयुक्त आंध्र था तब भी और तेलंगाना बना तब भी, गांव-गांव अपनी पार्टी के लिए अपना जीवन खपाया, ये ऐसे लोग हैं। कोई 30 साल-कोई 40 साल, ऐसा क्या हुआ कि ऐसे दल को छोड़ने के लिए उनको मजबूर होना पड़ा। जब मैं उनकी बातें सुनता हूं, मैं हैरान हो जाता हूं, जब उस पार्टी के नेता राजनीतिक स्वार्थ के लिए वो बातें बोलें जो पाकिस्तान में पसंद आएं और हिन्दुस्तान के लोगों को चोट पहुंचाए तब जाकर के ये सुधाकर रेड्डी जैसे लोग देश के स्वाभिमान के लिए दल छोड़ कर के आज आप के बीच आए हैं। मैं इन सब का स्वागत करता हूं और विश्वास दिलाता हूं कि भारतीय जनता पार्टी सिर्फ मेंमबरशिप से चलने वाली पार्टी नहीं है, मेंमबरशिप तो हैं लेकिन हमारे यहां आते ही रिलेशनशिप बन जाती है, खून का रिश्ता बन जाता है।

साथियो, 11 अप्रैल को हैदराबाद और तेलंगाना के आप सभी साथी नए भारत के नए सपनों के लिए आदेश देने वाले हैं। ये नया भारत उस मजबूत नींव पर बनने वाला है जिसका निर्माण करने का एक ईमानदार प्रयास आपके इस चौकीदार ने किया है। मैं आज हैदराबाद का विशेष आभार व्यक्त करना चाहता हूं। हैदराबाद ने 2013-14 में, जब भारतीय जनता पार्टी ने मुझे प्रधानमंत्री पद के लिए पसंद किया, चुनाव के मैदान में उतारा और हैदराबाद के इसी स्टेडियम में आप लोग मुझे आशीर्वाद देने के लिए आए थे उस घटना ने पूरे हिन्दुस्तान में इतनी चर्चा फैलाई थी और देश के वातावरण को तैयार करने की बहुत बड़ी भूमिका, ये मेरे हैदराबाद ने निभाई थी। इसलिए पूरे हिन्दुस्तान को राजनीतिक दिशा दिखाने का काम जिस हैदराबाद के जागरूक नागरिकों ने किया उनके बीच जब मैं आया हूं तब मैं हमारे तेलंगाना के सभी मतदाताओं को और हैदराबाद की इस धरती से हिन्दुस्तान भर के मतदाताओं को पिछले पांच साल देश की भलाई के लिए जो कुछ करने में मैं सफल हुआ हूं वो सारा यश आज आपके चरणों में समर्पित करने के लिए आया हूं। मैं हैदराबाद की धरती से, सिकंदराबाद के, तेलंगाना के, देश के सभी नागरिकों का आभार व्यक्त करता हूं कि आपने मेरा साथ दिया, सहयोग दिया, आशीर्वाद दिए, उत्साह, उमंग से मुझे भर दिया, नई ऊर्जा दी, नित्य प्रेरणा दी। उसके कारण मैं देश के लिए कुछ ना कुछ सकारात्मक काम कर पाया। इसके यश, इसके हकदार हिन्दुस्तान के नागरिक हैं, हैदराबाद के नागरिक हैं, तेलंगाना के नागरिक हैं, मेरे देशवासी हैं। बीते पांच सालों में नामुमकिन अगर मुमकिन हो पाया है तो इसके पीछे आप सभी देशवासियों का, सिकंदराबाद, हैदराबाद, तेलंगाना के आप सब का साथ है। आप अगर मेरे साथ मजबूती से खड़े ना रहते तो राष्ट्रहित में कड़े और बड़े फैसले लेना संभव नहीं हो पाता। यही कारण है कि आज आप के बीच अपने काम का हिसाब देने के साथ ही, मैं आपका आभार जताने के लिए भी आया हूं।

साथियो, सिकंदराबाद, हैदराबाद की इस धरती से मैं मिडिल क्लास के उन सभी साथियों का भी आभार व्यक्त करना चाहता हूं जिन्होंने मुझे निरंतर आगे बढ़ने का हौसला दिया। ये मेरा दायित्व है कि मैं आपके हितों का दायित्व रखते हुए आपके सपनों को पूरा करने में, इस दिशा में एक के बाद एक सार्थक कदम उठाऊं। साथियो, मिडिल क्लास के लिए पढ़ाई, कमाई, दवाई और महंगाई हर मोर्चे पर राहत देने का प्रयास किया है। एजुकेशन लोन हो या फिर होम लोन, ईएमआई कम हो गई है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मिलने वाले होम लोन के तहत मध्यम वर्ग को पांच से छे लाख रुपए तक की बचत हो रही है। पहले की सरकारों में अगर मध्यम वर्गीय परिवारों को अगर मकान बनाना हो तो योजना का नामोनिशान नहीं था, उनको परवाह ही नहीं थी।

भाइयो-बहनो, महंगाई, जरा याद कीजिए 2013-14 में महंगाई की स्थिति क्या थी, उसको काबू करने में कांग्रेस पार्टी की एक भी सरकार कभी भी सफल नहीं हुई है। जब अटल जी की सरकार थी महंगाई को काबू करने में हम सफल हुए और उसके बाद दूसरा मौका मुझे मिला, हम महंगाई को काबू करने में सफल हुए और अगर पहले वाली सरकार की तरह महंगाई बढ़ती होती, बिना रोक-टोक के बढ़ती होती तो आज सामान्य आदमी की रसोई का बजट पूरे परिवार को तबाह कर देता, ऑउट ऑफ कंट्रोल हो जाता, ये स्थिति पैदा हो गई थी। बिजली का बिल हो, मोबाइल फोन का बिल हो, स्वास्थ्य से जुड़ा बिल हो, वो पहले की अपेक्षा कम हुआ है। हाल में जो पांच लाख की टैक्सेबल इनकम पर टैक्स जीरो करने का फैसला सरकार ने किया है। बजट की दृष्टि से आज नया बजटिंग वर्ष शुरू होता है, फाइनेंशियल इयर शुरू होता है और इसी बजट में हमने पांच लाख तक की टैक्सेबल इनकम को जीरो कर दिया। इसका लाभ जो नौकरीपेशा के लोग हैं, जो छोटे काम करने वाले लोग हैं उनको सीधा-सीधा लाभ मिला है। करोड़ों की तादाद में लोगों को लाभ मिला है। ये मांग पिछले 25 साल से हर सरकार के सामने आई है लेकिन एक भी सरकार ने इसका निर्णय नहीं किया, ये आपका आशीर्वाद है कि मोदी सरकार ने उस काम को करके दिखाया है। लेकिन यहां आप सभी को बहुत सावधान रहने की जरूरत है क्योंकि संकेत स्पष्ट हैं कि अगर 11 अप्रैल को जरा सी भी चूक हो गई, अगर महामिलावट को जरा सा भी अवसर मिल गया तो ये जीरो टैक्स का बेनिफिट तो जाएगा ही, ये सब लूट लेंगे, ये लोग और ज्यादा वोट डालने का भी पूरा प्लान बना चुके हैं और हमारी सरकार पांच साल रही पांच साल में एक नए पैसा का टैक्स नहीं डाला है। साथ ही विकास का कोई काम भी नहीं रोका है, पिछली सरकार में सेना अगर बुलेटप्रूफ जैकेट मांगती थी तो ये रोते थे कि पैसे नहीं हैं।

वायु सेना आधुनिक लड़ाकू विमान मांगती थी तो ये पत्रकार वार्ता करके कहते थे कि सरकार के पास इतने पैसे नहीं हैं, हमने तो एक रुपया टैक्स नहीं लगाया नया, पैसे हमारे पास कहां से आए, हम सेना को मजबूत कैसे बना रहे हैं, हम टैक्स में लगातार कमी क्यों कर रहे हैं। इसका कारण है, पहले लीकेज होता था, मोदी ने सारे लीकेज बंद कर दिए और इसलिए जो किसी की जेब में जाते थे और जो लोगों को मूर्ख बनाने के लिए फटी जेब दिखाते थे। एक जेब फटी रखते थे लेकिन दूसरी जेब में माल रखते थे। आपातकाल में श्रीमती इंदिरा गांधी ने देशभक्तों के जेल में डाल दिया था तो जो जेल में होते थे, गुजरात के अंदर, वहां उस समय कांग्रेस के दो भाग थे एक कांग्रेसी परंपरा के व्यक्ति जेल में आ गए थे तो वो क्या करते थे। जब वो शाम को टहलने के लिए निकलते थे तो जेब में से कुछ लेकर के खाते थे और सामने कोई मिलता था, जेल के अंदर टहलते समय तो उसको भी जेब से निकाल कर के मूंगफली के दाने या चने के दाने देते थे। कुछ दिन के बाद पता चला कि दाहिनी जेब में मूंगफली और चना रखते हैं और बाईं जेब में काजू-बदाम सब रखते हैं। खुद दाईं वाली जेब से खाते थे और कोई सामने मिले तो बाईं वाली जेब से देते थे। ऐसे लोग दुनिया को एक फटी जेब दिखाते हैं बाकी सारी जेब भरी रहती हैं, ऐसे लोगों को पहचानने की जरूरत है।

साथियो, हैदराबाद तो युवा सपनों और आकांक्षाओं को विस्तार देने वाला शहर है, ये भारत के युवा साथियों की प्रेरणा का ही परिणाम है कि पांच वर्ष में हमारा देश दुनिया के टॉप स्टार्टअप ईको सिस्टम में गिना जा रहा है। बीते 3-4 वर्ष में ही 15 हजार से अधिक स्टार्टअप रिकॉग्नाइज किए गए हैं, इनमें लाखों युवा साथी आज काम कर रहे हैं। इस ईको सिस्टम को और मजबूत करने के लिए NDA की सरकार पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।

भाइयो-बहनो, उद्यम को इंटरप्राइस स्पिरिट को बढ़ावा देने के लिए मुद्रा योजना के माध्यम से एक बहुत बड़ा योगदान चलाया है। मुद्रा योजना के माध्यम से 15 करोड़ से अधिक बिना गारंटी युवाओं को लोन ताकि वो कारोबार कर सकें, ये ऑलरेडी कर दिया गया है और इसमें से करीब 20 लाख ये लोन पाने वाले नौजवान मेरे इस तेलंगाना के हैं। नया भारत जॉब सीकर से भी आगे जॉब क्रिएटर बने, यही हमारा विजन है। वो नौकरी मांगने वाला नहीं, वो नौकरी देने वाला बने, उस दिशा में हम सफलता पूर्वक आगे बढ़े हैं। ईमानदारी के साथ हमने ऐसे काम को आगे बढ़ाया है।
साथियो, दिल्ली में जो पहले की सरकार थी और पांच वर्षों से जो चौकीदार की सरकार है इन दोनों सरकारों ने तेलंगाना के लिए क्या किया, इस पर आप गौर करेंगे तो नीयत में साफ नजर आ जाएगा। आज पूरे तेलंगाना में 35 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा के दर्जनों प्रोजेक्ट्स भारत सरकार की तरफ से चल रहे हैं। रामागुंडम का फर्टीलाइजर प्लांट हो, डिफेंस प्रोजेक्ट हो या फिर लाखों रोजगार पैदा करने वाला नेशनल इन्वेस्टमेंट मैनुफैक्चरिंग जोन हो या ईज ऑफ लिविंग और ईज ऑफ डूइंग बिजिनेस सुधरे इसके लिए हर संभव प्रयास किया गया है।

साथियो, सिकंदराबाद में, हैदराबाद में, उद्योगों के लिए और बेहतर माहौल बने इसके लिए नेक्स्ट जनरेशन इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जा रहा है। रेलवे और नेशनल हाईवे से जुड़े अनेक प्रोजेक्ट्स पूरे हो चुके हैं और हजारों करोड़ के प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है। इसी तरह हमारा प्रयास है कि हैदराबाद की मेट्रो का विस्तार दिल्ली मेट्रो की तरह हो, तेज गति से हो लेकिन समस्या क्या है ये आप भली भांति जानते हैं। यहां जो सरकार चला रहे हैं उनका ध्यान आपके विकास पर नहीं, अपने वंश और वोट बैंक पर ही केंद्रित है। वो या तो अपने वोट बैंक को मजबूत करने के लिए काम करेंगे या तो अपने वंश के दूर-दूर के रिशतेदारों को भी मजबूत करने के लिए काम करेंगे। अगर यही होगा तो तेलंगाना मजबूत होगा क्या? आप सब मजबूत होंगे क्या, आपका भाग्य बदलेगा क्या, आपके सपने पूरे होंगे क्या?

भाइयो-बहनो, बीते पांच वर्षों में, मूसी नदी के एक तरफ तो विकास होता है लेकिन दूसरी तरफ हैदराबाद की स्थिति जस की तस है। वहां ना गलियां सुधरती हैं और ना नालियां सुधरती हैं। केंद्र सरकार हैदराबाद के इंफ्रास्ट्रक्चर को, यहां की मेट्रो को ओल्ड हैदराबाद में भी गति देना चाहती है लेकिन वहां मजलिस नाम का एक बहुत बड़ा स्पीडब्रेकर लगा हुआ है। उनको विकास की भाषा समझ ही नहीं आती, वो तो दिन-रात सोते- जागते सिर्फ, उनको मोदी याद रहता है। ये चौकीदार उनको रात को सोने नहीं देता है।

साथियो, तेलंगाना और देश के विकास के लिए, बेटियों और बहनों की इनकी अत्याचारी सोच से मुक्ति के लिए मोदी जो भी कदम उठाता है, इन लोगों को चुभता है। आप सभी ने देखा है कि तीन तलाक जैसी अत्याचारी परंपरा के खिलाफ जब संसद में कानून आया तो मोदी को क्या नहीं कहा। मैं तीन तलाक से पीड़ित, तीन तलाक से डरी हुई हर बहन-बेटी से आग्रह करता हूं कि हमें सहयोग करें, हमारी शक्ति बढ़ाएं, आपकी सुरक्षा की गारंटी हम लोग लेते हैं। जब ऐसे लोगों का साथ हो तो TRS की कार का बेकार होना स्वाभाविक है। तेलुगू में तो एक कहावत बहुत मशहूर है। कहावत तो 6 महीने के साथ की है लेकिन यहां तो साथ 6 साल का हो गया और इसके कारण उनकी जो आदतें हैं वो इनमें आ गई हैं तो अंदाज लगाइए कि कार में भले ही KCR सवार हों लेकिन स्टेयरिंग मजलिस के हाथ में है। ये मैं नहीं कह रहा हूं आप लोग कह रहे हैं। इन्होंने विधानसभा से पहले दावा भी तो यही किया था और इसलिए यहां की सरकार को जगाना जरूरी है।

साथियो, 11 अप्रैल को सिर्फ किसी पार्टी या पक्ष की जीत का फैसला नहीं होना है, ये सिर्फ संसद का चुनाव नहीं है बल्कि इस बात का फैसला होगा कि नए भारत की नीति और रीति आतंकवाद को मुंहतोड़ जबाव देने की रहेगी या फिर दुबक के निंदा करके ये मुंह छिपाते घूमेंगे। फैसला इस बात का होना है कि हिन्दुस्तान के हीरो का मान होगा या पाकिस्तान के पक्षकारों का मान बढ़ेगा। फैसला इस बात का होगा कि देश में पहले जैसे बम धमाके होते थे वैसा ही दौर लौट आए या फिर बीते पांच वर्षों जैसा माहौल बना है, उस रास्ते पर देश को आगे बढ़ना है। बम धमाके वाला हिन्दुस्तान चाहिए या शांति वाला चाहिए, बम धमाके वाला हिन्दुस्तान मंजूर है हमें? अगर वो मंजूर नहीं है तो मजबूत सरकार जरूरी है कि नहीं है और ये चौकीदार मजबूती दे सकता है कि नहीं दे सकता है? ये चौकीदार आपको सुरक्षा दे सकता है कि नहीं दे सकता है? ये चौकीदार बड़ी-बड़ी ताकतों से भिड़ सकता है कि नहीं भिड़ सकता है?

साथियो, आपका ये मिजाज, ये उत्साह देश के कोने-कोने में पहुंच रहा है। अब देश एक भी हमला सहने को तैयार नहीं है और अब तो हमें भी तरीका पता चल गया है। घर में घुस कर के मारा जा सकता है। 40 साल हो गए, आए दिन मारते चले जाएं और हम हाथ पर हाथ धरे बैठे रहें। हिसाब-किताब, अगर हम कुछ करेंगे तो हिन्दुस्तान में वोट बैंक नाराज हो जाएगी तो, हिन्दुस्तान में वोट खिसक जाएगा तो, अरे चुनाव के लिए इतना, अरे देश बचेगा तो चुनाव आएगा, देश नहीं बचेगा तो चुनाव कहां से आएगा। बहुत हो चुका दोस्तों, अब मोदी ज्यादा सहन करने को तैयार नहीं है।

साथियो, अभी जब मैं यहां आ रहा था तो मीडिया में एक खबर चल रही थी और ये गंभीर बात है। कांग्रेस के एक बड़े सहयोगी दल, महागठबंधन के सूत्रधारों में से एक, महागठबंधन के सबसे तगड़े साथी, नेशनल कांफ्रेंस, फारुख अब्दुल्ला साहब और उनके बेटे उमर अबदुल्ला साहब की (PD) प्राइवेट कंपनी। इस नेशनल कांफ्रेंस ने बयान दिया है कि कश्मीर में अलग प्रधानमंत्री होना चाहिए। आप मुझे बताइए कांग्रेस के साथी पार्टी की ये मांग आपको मंजूर है? हिन्दुस्तान में किसी को भी मंजूर है? वो कहते हैं हम घड़ी की सुई पीछे ले जाएंगे और 1953 के पहले की स्थिति पैदा करेंगे और हिन्दुस्तान में दो प्रधानमंत्री होंगे, कश्मीर का प्रधानमंत्री अलग होगा। मैं जरा जानना चाहता हूं, जवाब कांग्रेस को देना पड़ेगा, महागठबंधन के सभी पार्टनरों को देना पड़ेगा, इस चुनाव में उनको जवाब देना पड़ेगा। क्या कारण है कि उनका साथी दल इस प्रकार की बात बोलने की हिम्मत कर रहा है, कुछ दिन पहले उनके एक पार्लियामेंट के उम्मीदवार ने ऐसी ही बदतमीजी की थी। भारत को गाली देने की खुली घोषणा की थी लेकिन कांग्रेस पार्टी और नेशनल कांफ्रेंस इस विषय में चुप बैठे हैं और दिल्ली में मीडिया भी एक दिन के बाद विषय को भूल गया। आज उन्होंने दूसरी हरकत की है, उन्होंने कहा है, कश्मीर का अलग प्रधानमंत्री होगा। मैं इन महागठबंधन के सभी साथियों को पूछना चाहता हूं। बंगाल की दीदी, बहुत चिल्लाती हैं आप, जरा जवाब दीजिए ये नेशनल कांफ्रेंस आपके साथी हैं, क्या ये नेशनल कांफ्रेंस के दूसरे प्रधानमंत्री की मांग, इससे आप सहमत हैं कि नहीं हैं, देश की जनता को जवाब दीजिए? यहां पड़ोस में आंध्र प्रदेश में यू-टर्न बाबू बैठे हैं। ये यू-टर्न बाबू अभी दो दिन पहले, वो बड़ा स्पेशल गमछा लगा कर के फारुख अब्दुल्ला के साथ जुलूस निकाल रहे थे।

जरा यू-टर्न बाबू बताइए और आंध्र की जनता भी जरा जाग जाइए, चेत जाइए ये वहीं चंद्रबाबू है, जिसके बगल में फारुख अब्दुल्ला वोट मांगने के लिए निकले हैं और जिनका बेटा कश्मीर में अलग प्रधानमंत्री होने की मांग कर रहा है। क्या चंद्रबाबू को वोट मिलना चाहिए क्या? मैं पूछना चाहता हूं श्रीमान शरद पवार जी को, आप तो कभी देश के रक्षा मंत्री रहे हैं, आप कभी महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रहे हैं, आप बताइए क्या आप हिन्दुस्तान की सुई को पीछे ले जाने के लिए तैयार हैं, 1953 के पहले? उसी तरह आप कश्मीर में प्रधानमंत्री बनाने के लिए, आपके इन साथी दलों के रवैये से सहमत हैं क्या, साफ कीजिए? मैं श्रीमान एच.डी. देवगौड़ा जी से भी पूछना चाहता हूं, देवगौड़ा जी आप देश के प्रधानमंत्री रह चुके हो, आपका बेटा मुख्यमंत्री है, आपके परिवार के सारे लोग इस लोकतंत्र में वोट की राजनीति का मजा ले रहे हैं। जरा जवाब दीजिए देवगौड़ा जी, आप पूर्व प्रधानमंत्री हैं, आपका साथी दल नेशनल कांफ्रेंस डंके की चोट पर कहने की हिम्मत करता है कि कश्मीर में अलग प्रधानमंत्री होना चाहिए। देवगौड़ा जी कर्नाटक की जनता को जवाब दीजिए, क्या आप ये अलग प्रधानमंत्री होने के सपने देखने की बात को, ऐसे लोगों के साथ चलना चाहते हो या नाता तोड़ने को तैयार हो?

साथियो, देश को बांटने की इसी मानसिकता ने भारत का बहुत बड़ा नुकसान किया है। मत भूलिए, दो-तीन दिन पहले ही नेशनल कांफ्रेंस के एक नेता, आतंक सरपरस्तों के लिए, पाकिस्तान के लिए जिंदाबाद के नारे लगाए थे। इस बयान के बाद कांग्रेस के सारे बड़े नेता चुप्पी साध कर के बैठ गए थे। कांग्रेस की यही मानसिकता है जो देश विरोधी ताकतों को मजबूत करती है। इसी मानसिकता की वजह से ये लोग एयर-स्ट्राइक पर सवाल उठाते हैं, इसी मानसिकता की वजह से ये लोग सर्जिकल-स्ट्राइक पर सवाल उठाते हैं, सेना के पराक्रम का अपमान करते हैं। यही मानसिकता है जो उन्हें डोकलाम विवाद के समय चीनी राजदूत से मिलने जाने के लिए प्रेरणा देती है। इसी मानसिकता की वजह से ये सेना को गाली देते हैं, सेना को कठघरे में खड़ा करते हैं। इन लोगों को मैं कहना चाहता हूं, कान खोलकर के सुन लीजिए। अरे चुनाव तो आएंगे-जाएंगे लेकिन ये लोग लिखकर के रखें, जब तक मोदी है आपकी साजिशों को कभी कामयाब नहीं होने देगा। मोदी देश के दुश्मनों और देश के लोगों के बीच दीवार बनकर के खड़ा रहेगा, ये लिखकर के रखिए। और ये जरा नेशनल कांफ्रेंस वाले भी समझ लें, ये पीडीपी वाले भी समझ लें।

भाइयो-बहनो, ये कश्मीर में दो-चार परिवारों की दुकानें हैं, वो पिछले 40 साल से देश को मूर्ख बनाते रहे हैं और दिल्ली भी उनकी बातों में आ जाता है। इनका धरती पर कुछ नहीं बचा है। आपको पता होगा, वहां गवर्नर रूल लगने के बाद, नेशनल कांफ्रेंस का विरोध था, पीडीपी का विरोध था। ये दोनों कद्दावर परिवार भारत सरकार के खिलाफ खड़े हो गए थे, कांग्रेस भी मिल गई थी और उन्होंने ऐलान कर दिया था कि पंचायतों के चुनाव नहीं होने देंगे, बहिष्कार करेंगे और ये सोचते थे कि कश्मीर की जनता उनकी बात मान लेगी।

मेरे देशवासियों आपको जानकर खुशी होगी, ये अबदुल्ला परिवार, मुफ्ती परिवार, कांग्रेस के लोग ऊपर से नीचे कूदते रहे, चिल्लाते रहे। पंचायत के चुनाव हुए, 70-75 प्रतिशत वोटिंग हुई और 30 हजार से ज्यादा लोग वहां चुनकर के पंचायतों में कारोबार चला रहे हैं, उन्होंने इनका बहिष्कार कर दिया। जो चुनाव का बहिष्कार करने निकले थे उनका बहिष्कार कश्मीर की जनता ने कर दिया था। जिनका धरती पर कुछ नहीं बचा है वो कांग्रेस के लोगों के कुर्ते पकड़-पकड़ कर लोगों को धमका रहे हैं, अब जमाना चला गया, कांग्रेस नहीं है मोदी है। जम्मू हो, कश्मीर हो, लद्दाख हो वहां के नागरिकों के लिए हम अपनी जान देने के लिए तैयार हैं लेकिन इन ठेकेदारों को अब सहने के लिए तैयार नहीं हैं।

साथियो, मुझे पता है की आप कमल को वोट देने का मन बना चुके हैं। आपका ये स्नेह, ये आशीर्वाद मुझ पर ऐसे ही बना रहे। हम सब मिलकर के मजबूत देश बनाने के लिए मजबूत सरकार बनाएं। इनको मजबूर सरकार बनानी है, हमें मजबूत देश बनाने के लिए मजबूत सरकार बनानी है। आपका वोट मजबूत देश के लिए है, आपका वोट मजबूत सरकार के लिए है, आपका वोट मोदी के लिए है, आपके इस चौकीदार के लिए है।

भाइयो-बहनो, मैं बोलता हूं आप मेरे साथ नारा बोलेंगे, पूरी ताकत से बोलेंगे, मैं कहूंगा मैं भी, आप कहेंगे चौकीदार हूं।

मैं भी…चौकीदार हूं, मैं भी…चौकीदार हूं, मैं भी…चौकीदार हूं। गली-गली में चौकीदार, चौक-चौक पर चौकीदार, गांव-गांव में चौकीदार, शहर-शहर में चौकीदार, बच्चा-बच्चा चौकीदार, बड़े-बुजुर्ग भी चौकीदार, माता-बहनें चौकीदार, घर-घर में चौकीदार, खेत-खलिहान में चौकीदार, बाग-बगीचे में चौकीदार, देश के अंदर चौकीदार, सीमा के अंदर चौकीदार, व्यापारी भी चौकीदार, डॉक्टर भी चौकीदार, शिक्षक भी चौकीदार, इंजीनियर भी चौकीदार, सारा देश… चौकीदार, बहुत-बहुत धन्यवाद।

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PM interacts with CEOs and Experts of Global Oil and Gas Sector
October 20, 2021
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Our goal is to make India Aatmanirbhar in the oil & gas sector: PM
PM invites CEOs to partner with India in exploration and development of the oil & gas sector in India
Industry leaders praise steps taken by the government towards improving energy access, energy affordability and energy security

Prime Minister Shri Narendra Modi interacted with the CEOs and Experts of the global oil and gas sector earlier today, via video conferencing.

Prime Minister discussed in detail the reforms undertaken in the oil and gas sector in the last seven years, including the ones in exploration and licensing policy, gas marketing, policies on coal bed methane, coal gasification, and the recent reform in Indian Gas Exchange, adding that such reforms will continue with the goal to make India ‘Aatmanirbhar in the oil & gas sector’.

Talking about the oil sector, he said that the focus has shifted from ‘revenue’ to ‘production’ maximization. He also spoke about the need to enhance  storage facilities for crude oil.  He further talked about the rapidly growing natural gas demand in the country. He talked about the current and potential gas infrastructure development including pipelines, city gas distribution and LNG regasification terminals.

Prime Minister recounted that since 2016, the suggestions provided in these meetings have been immensely useful in understanding the challenges faced by the oil and gas sector. He said that India is a land of openness, optimism and opportunities and is brimming with new ideas, perspectives and innovation. He invited the CEOs and experts to partner with India in exploration and development of the oil and gas sector in India. 

The interaction was attended by industry leaders from across the world, including Dr. Igor Sechin, Chairman & CEO, Rosneft; Mr. Amin Nasser, President & CEO, Saudi Aramco; Mr. Bernard Looney, CEO, British Petroleum; Dr. Daniel Yergin, Vice Chairman, IHS Markit; Mr. Olivier Le Peuch, CEO, Schlumberger Limited; Mr. Mukesh Ambani, Chairman & Managing Director, Reliance Industries Limited; Mr Anil Agarwal, Chairman, Vedanta Limited, among others.

They praised several recent achievements of the government towards improving energy access, energy affordability and energy security. They appreciated the leadership of the Prime Minister towards the transition to cleaner energy in India, through visionary and ambitious goals. They said that India is adapting fast to newer forms of clean energy technology, and can play a significant role in shaping global energy supply chains. They talked about ensuring sustainable and equitable energy transition, and also gave their inputs and suggestions about further promotion of clean growth and sustainability.