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Today Madhya Pradesh is touching skies of development and strengthening India's economy: PM Modi
Every state has something to learn from Madhya Pradesh: PM Narendra Modi
The 'Hawalabaaz' are now worried about tough decisions being taken by Govt s against black money: PM
PM Modi urges other parties to support Govt decisions in national interest
Govt at Centre is dedicated to serve the nation, dedicated to development of the nation: PM
Mudra Bank, Jan Dhan Yojana, DBT transforming lives of the poor, says PM Modi
PM Modi urges BJP Karyakartas to organise nationwide Swachhta Abhiyan from Sept 25-Oct 2

मध्यप्रदेश के यशस्वी एवं लोकप्रिय मुख्यमंत्री एवं मेरे मित्र श्रीमान शिवराज जी, मध्यप्रदेश भाजपा के अध्यक्ष श्रीमान नंद कुमार सिंह जी, पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. विनय जी, संगठन महासचिव श्रीमान मेनन जी और विशाल संख्या में पधारे हुए प्यारे कार्यकर्ता भाईयों और बहनों

प्रधानमंत्री बनने के बाद मध्यप्रदेश में तो आना हुआ है और हर बार मध्यप्रदेश ने लाजवाब स्वागत-सम्मान भी किया है लेकिन आज राधधानी में आने का मुझे पहली बार अवसर मिला है और मैं देख रहा हूँ कि आपका पंडाल छोटा पड़ गया है। जितने लोग आये हैं, उससे ज्यादा बाहर हैं; जो बाहर हैं, न मैं उनको देख पा रहा हूँ और न वो मुझे देख पा रहे हैं लेकिन मैं उनके प्यार को अनुभव कर रहा हूँ। मैं आप सब का और मध्यप्रदेश की जनता का बहुत आभारी हूँ क्योंकि पिछले चुनाव में जो भारी समर्थन मध्यप्रदेश ने दिया और पूरे हिंदुस्तान में देखा जाए तो संगठन की दृष्टि से हर प्रदेश मध्यप्रदेश से कुछ-न-कुछ सीखने का प्रयास करता रहा है।

मैं जब गुजरात में भाजपा से नया-नया आया था और संगठन के कार्य की जिम्मेवारी मुझे मिली थी तो हर बार हम आदरणीय कुशाबाबू ठाकरे को याद करते थे। मध्यप्रदेश में कुशाबाबू ठाकरे ने काम कैसे किया... एक-एक कार्यकर्ता को कैसे उन्होंने सजाया, सवांरा; ये सारी चीजें हम सुनते थे और सीखते थे। मध्यप्रदेश आज जो कुछ भी है, कुशाबाबू ठाकरे, राजमाता विजयराजे सिंधिया जैसे अनेक-अनेक कार्यकर्ताओं ने दो-दो, तीन-तीन पीढ़ी इसमें खपा दी है और तब जाकर के वटवृक्ष तैयार हुआ है। ये सच्चे कार्यकर्ताओं की पार्टी है। मध्यप्रदेश का नेतृत्व भी कार्यकर्ता की परंपरा से पनपा हुआ नेतृत्व है, उस कसौटी से निकला हुआ नेतृत्व है और यही हमारी सबसे बड़ी अमानत और पूँजी है। इसलिए मैं मध्यप्रदेश के भाजपा संगठन और उसके कार्यकर्ताओं को एवं कुशाबाबू ठाकरे से लेकर के जो महान परंपरा और विरासत चली है, उन सब का गौरवगान और अभिनन्दन करता हूँ।

राजनीतिक दल की कसौटी चुनाव की जीत और हार के साथ जुड़ जाती है और यह स्वाभाविक भी है क्योंकि लोकतंत्र का यह एक मानदंड माना जाता है। मुझे ख़ुशी है कि मध्यप्रदेश की जनता का भाजपा के प्रति दिन-रात विश्वास बढ़ता ही चला जा रहा है और लगातार एक के बाद एक चुनाव जीतते चले जा रहे हैं। मैं इस विश्वास के लिए मध्यप्रदेश की जनता को नमन करता हूँ। आपने हम पर जो भरोसा रखा है, चाहे हम पंचायत में हों या संसद में, हम जनता-जनार्दन के विश्वास को पूरा करने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। हम परिश्रम की पराकाष्ठा करेंगे और देश को नई उंचाईयों तक ले जाने का निरंतर प्रयास करते रहेंगे।

भाईयों-बहनों, लोकतंत्र में जय और पराजय एक सहज बात होती है। कभी भाजपा सिर्फ दो सांसदों की पार्टी थी। अटल जी समेत सब लोग चुनाव हार गए थे और तब के प्रधानमंत्री श्रीमान राजीव गाँधी संसद के अंदर भाजपा का मजाक उड़ाते थे – ‘दो या तीन बस’। उनका ये मजाक उड़ाना हमें सुनना पड़ता था। एक जमाना था जो दल 400 से भी अधिक सीट लेकर के बैठा था, वो दल अब 40 पर सिमट गया है। हमें 1984 में जो पराजय मिली, हमने उससे सीखने का प्रयास किया; हमने अपनी गलतियों पर अध्ययन किया; हमारी दिशा सही थी कि नहीं थी, उसपर मंथन किया; ऊपर से नीचे तक सबने किया; जनता और पत्रकारों से भी पूछा; साल भर मंथन किया कि इतनी घोर पराजय कैसे हुई। वैसे उस चुनाव को हमारे देश में श्रीमती इंदिरा गाँधी की श्रद्धांजलि के रूप में देखा गया था। लेकिन इसके बावजूद हमने औरों को दोष नहीं दिया; औरों की आलोचना नहीं की। हमने खुद के भीतर झांक करके अपनी कमियों को दूर करने का प्रयास किया और आज स्थिति ऐसी है कि 30 साल के बाद देश की जनता ने पूर्ण बहुमत वाली सरकार बनाई।

लोकतंत्र में हर राजनीतिक दल का यह कर्त्तव्य होता है कि अगर जय मिला है तो जनता-जनार्दन के जय के लिए खप जाना होगा और अगर पराजय मिली है तो आत्ममंथन करके लोकतंत्र के लिए अपने आपको अधिक सुदृढ़ कैसे किया जाए, इसका प्रयास करना होगा। लेकिन आज मुझे देश की जनता के सामने कहना पड़ रहा है कि संसद का सत्र... जिसका सत्रावसान हमने नहीं किया था और इस आशा में नहीं किया था कि विपक्षी पार्टियाँ देश की आशा और आकांक्षाओं को समझेगी; जनता-जनार्दन ने जो निर्णय किया है, उसे सर-आँखों पर चढाएगी; अगर जनता ने पराजित किया है और पांच साल तक जिसको विजय मिला है, उसका आदर और सत्कार करेगी। बाद में हम आशा करते थे कि कुछ दिन बाद माहौल शांत होगा और संसद चल पड़ेगी; देश के सामान्य लोगों के काम आने वाले जो महत्वपूर्ण निर्णय अटके पड़े हैं, वो निर्णय हो जाएंगे।

पिछले दिनों मंत्रिपरिषद के वरिष्ठ मंत्री लगातार विरोधी दलों के साथ बात करते रहे। करीब-करीब सभी दल इस बात पर सहमत हुए कि संसद भी चलनी चाहिए, निर्णय भी आगे बढ़ने चाहिए लेकिन एक है कि जो मानता नहीं। मैं समझ नहीं पा रहा कि क्या लोकतंत्र के साथ हमारे अहंकार का टकराव रहेगा क्या। जिनका पराजय हुआ है और जिन्हें जनता ने नकार दिया है, उनको मैं सार्वजनिक रूप से आग्रह करता हूँ कि हम लोकतंत्र के गौरव के लिए... जब विश्व आर्थिक संकट में फंसा पड़ा है तो हिंदुस्तान अकेला इस स्थिति में आज भी स्थिर बना हुआ है। भारत को आगे बढ़ने का एक अभूतपूर्व अवसर मिला है, इस अवसर को हाथ से जाने न देना चाहिए। आईये, संसद में निर्णयों को आगे बढ़ने में सहयोग करें लेकिन हमारी बात नहीं मानी जा रही है। आखिकार बड़े भारी और दुखी मन से हमें कल संसद के सत्रावसान की दिशा में आगे बढ़ना पड़ा। हम आशा करते थे कि हो सकता है, हम फिर से संसद बुला पाएंगे, कुछ निर्णय कर पाएंगे लेकिन उन्होंने होने नहीं दिया। मैं उनकी परेशानी जानता हूँ।

संसद में एक के बाद एक जो निर्णय हुए हैं और उसमें भी काले धन के खिलाफ जो कठोर कानून बनाया है, उसके कारण जो ‘हवालाबाज’ है, वो परेशान है। हवालाबाज लोगों को पैरों के नीचे धरती खिसकती नज़र आ रही है और इसलिए ये हवालाबाजों की जमात लोकतंत्र में रूकावटें पैदा करने का प्रयास कर रही है। मैं देशवासियों को विश्वास दिलाता हूँ कि हम लोकतंत्र की मर्यादा का पालन करते हुए जनता-जनार्दन की आशा-आंकाक्षाओं को पूरा करने में कोई कमी नहीं रहने देंगे। कोई रूकावट आएगी तो उसे पार करने का रास्ता खोज कर रहेंगे।

विकास के लिए हमने अनेक कदम उठाए हैं। ये सरकार ऐसी है जो जिन योजनाओं की घोषणा करती है, उन्हें लागू करने का काम भी करती है। सिर्फ कानून बदल देना, उद्घाटन के फीते काट देना, दीये जला देना; वहां पर अटकने वाली सरकार नहीं है ये, उसको घर-घर तक लागू करने का प्रयास करने वाली सरकार है। देश के सामान्य एवं गरीब से गरीब व्यक्ति का भला कैसे हो... हमने पिछले बजट में मुद्रा बैंक की बात कही थी।

हमारे देश में जो निम्न-मध्यम वर्ग के लोग हैं, गरीबी के साथ जिन्दगी गुजारने वाले लोग हैं; कोई धोबी है, कोई मोची है, कोई अखबार बेचता है, कोई दूध बेचता है, इन सब लोगों को अपने परिवार में कोई छोटा-मोटा काम पड़ जाए तो साहूकारों से कर्ज लेना पड़ता है; कारोबार चलाने के लिए या घर में कोई मेहमान आ गया तो भी 50-100 रूपये का कर्ज लेना पड़ता है और भारी ब्याज चुकाना पड़ता है। ये वो लोग हैं जो आर्थिक व्यवस्था में बहुत बड़ा योगदान देते हैं। हमने मुद्रा बैंक के द्वारा यह तय किया है कि ये जो सामान्य लोग हैं; ठेला चलाते हैं, पकोड़े बेचते हैं, छोटा-मोटा काम करते हैं, उनके लिए अलग से बैंक बनाई गई है और इन लोगों को 10,000 से 50,000 रूपये तक उन्हें ऋण दिया जाए और वे साहूकारों और ब्याजखोरों से बच जाएंगे। ये बैंक उन्हें अपने कारोबारों को बढ़ाने का ताकत देगी और इन लोगों की ताकत है – उनका कारोबार थोड़ा बढे तो और एकाध लोगों को रोजगार मिलेगा। रोजगार देने की सबसे बड़ी ताकत इन छोटे-छोटे व्यापारियों के हाथ में होती है। उनको ताकत देने का ये बड़ा काम – मुद्रा बैंक, हमने अपने हाथों में लिया है।  मुद्रा बैंक जन-धन खातों

विपक्षी दलों को लगता था कि सिर्फ बैंक के खाते खोलने से क्या होता है। क्या होता है, मैं बताता हूँ... हमारे देश में बड़े-बड़े अर्थशास्त्री कहते रहते हैं कि बहुत बड़ी चीजें होनी चाहिए; धमाका हो, ऐसी चीजें होनी चाहिए; ऐसा एक वर्ग है हमारे देश में लेकिन मेरा वो स्वभाव नहीं है। जिन चीजों को मैं करता हूँ, उसका कैसा फर्क पड़ता है... मैं बताता हूँ।

हमारे यहाँ घरों में जो गैस सिलिंडर देते हैं, हमने गैस सिलिंडर को जन-धन खातों और आधार के साथ जोड़ दिया। अब हमने किया कि ये जो गैस सिलिंडर की सब्सिडी है, वो बिचौलियों, दलालों और ठेकेदारों के पास न जाकर सीधे-सीधे जिसका गैस सिलिंडर है, उसके जन-धन खाते में जमा हो जाएगी। आपको अंदाज है कि इससे क्या हुआ? पहले जितने लोग गैस सिलिंडर की सब्सिडी लेते थे, जब वे व्यवस्था बनी तो लगभग 5 करोड़ संख्या कम हो गई, कोई लेने वाला नहीं मिला। इतने सालों से 5 करोड़ लोगों के नाम पर रूपयों के खेल खेले जाते थे। ये हवालाबाजों का खेल चलता था। अब 5 करोड़ लोग मिलते नहीं हैं जिन्हें हम देना चाहते हैं। इसके कारण सरकार की तिजोरी में 19,000 करोड़ रूपया हर वर्ष बचेगा। यह 19,000 करोड़ रूपया चोरी होता था कि नहीं होता था? भ्रष्टाचार होता था कि नहीं होता था? हवालेबाजों की जेब में जाता था कि नहीं जाता था? ये हवालेबाज लोग हमारा हिसाब मांग रहे हैं?

मेरे भाईयों-बहनों, अब भ्रष्टाचार भी देखेगा कि कोई हो-हल्ला नहीं, अख़बार की सुर्ख़ियों में कोई हेडलाइन नहीं, फिर भी काम होता चला जा रहा है। देश में जो बुराईयाँ हैं, उन बुराईयों से सरकारें मुक्त होती चली जा रही हैं। एक के बाद एक निर्णय हम करते जा रहे हैं। आने वाले दिनों में भाजपा के कार्यकर्ता... 25 सितम्बर पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जन्म जयंती है, 2 अक्टूबर पूज्य महात्मा गाँधी की जन्म जयंती है। क्या भाजपा के सभी कार्यकर्ता 25 सितम्बर से 2 अक्टूबर, पूरे सप्ताह गाँव-गाँव और गली-गली में सफ़ाई अभियान चला सकते हैं क्या। इस स्वच्छता अभियान के द्वारा पंडित दीनदयाल उपाध्याय, जिन्होंने अन्त्योदय की बात की थी; उन गरीब बस्तियों में जाकर भी स्वच्छता का सन्देश दे सकते हैं क्या। हमारे स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, रेलवे स्टेशन हों, चारों तरफ महात्मा गाँधी और दीनदयाल उपाध्याय को याद करके स्वच्छता का अभियान चला सकते हैं क्या।

मैं आपसे आग्रह करूँगा कि आईये भाजपा के मेरे भाईयों-बहनों, न सिर्फ मध्यप्रदेश में बल्कि हिंदुस्तान के और राज्यों में भी भाजपा के कार्यकर्ता ये बीड़ा उठा लें और स्वच्छता के अभियान को आगे बढ़ाएं। मैं फिर एक बार अपने स्वागत-सम्मान के लिए आपका आभारी हूँ। मध्यप्रदेश आज विकास की नई उंचाईयों पर पहुंचा है और यह प्रदेश देश के अर्थतंत्र को ताकत दे रहा है। कृषि के क्षेत्र में मध्यप्रदेश ने जो क्रांति की है, वो देश के गरीब से गरीब का पेट भरने का काम आ रहा है। मैं मध्यप्रदेश के किसानों, श्रीमान शिवराज और यहाँ की सरकार का अभिनंदन करता हूँ।             

बहुत-बहुत धन्यवाद!

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‘We the people’ in the Preamble is a call, an oath and a trust: PM Modi on Constitution Day
November 26, 2022
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Launches various new initiatives under e-court project
Pays tributes to the victims of 26/11 terrorist attack
“India is moving ahead with force and taking full pride in its diversity”
“‘We the people’ in the Preamble is a call, an oath and a trust”
“In the modern time, the Constitution has embraced all the cultural and moral emotions of the nation”
“Identity of India as the mother of democracy needs to be further strengthened”
“Azadi ka Amrit Kaal is ‘Kartavya Kaal’ for the nation”
“Be it people or institutions, our responsibilities are our first priority”
“Promote the prestige and reputation of India in the world as a team during G20 Presidency”
“Spirit of our constitution is youth-centric”
“We should talk more about the contribution of the women members of the Constituent Assembly”

भारत के मुख्य न्यायधीश जस्टिस डी. वाई चंद्रचूड़ जी, केंद्रीय कानून मंत्री श्री किरण जी, जस्टिस श्री संजय किशन कौल जी, जस्टिस श्री एस अब्दुल नज़ीर जी, कानून राज्यमंत्री श्री एस.पी सिंह बघेल जी, एटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणि जी, सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के प्रेसिडेंट श्री विकास सिंह जी, सभी उपस्थित न्यायाधीशगण, सम्मानित अतिथिगण, देवियों और सज्जनों, नमस्‍कार!

आप सभी को और सभी देशवासियों को संविधान दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं! 1949 में, ये आज का ही दिन था, जब स्वतंत्र भारत ने अपने लिए एक नए भविष्य की नींव डाली थी। इस बार का संविधान दिवस इसलिए भी विशेष है क्योंकि भारत ने अपनी आजादी के 75 वर्ष पूरे किए हैं, हम सभी अमृत महोत्सव मना रहे हैं।

मैं आधुनिक भारत का सपना देखने वाले बाबा साहेब आंबेडकर समेत संविधान सभा के सभी सदस्यों को, सभी संविधान निर्माताओं को आदरपूर्वक नमन करता हूं। बीते सात दशकों में संविधान की विकास और विस्तार यात्रा में legislature, judiciary और executive के अनगिनत लोगों का भी योगदान रहा है। मैं इस अवसर पर देश की ओर से उन सबके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करता हूँ।

साथियों,

आज 26/11, मुंबई आतंकी हमले का दिन भी है। 14 वर्ष पहले, जब भारत, अपने संविधान और अपने नागरिकों के अधिकारों का पर्व मना रहा था, उसी दिन मानवता के दुश्मनों ने भारत पर सबसे बड़ा आतंकवादी हमला किया था। मुंबई आतंकी हमले में जिनकी मृत्यु हुई, मैं उन्हें अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।

साथियों,

आज की वैश्विक परिस्थितियों में, पूरे विश्व की नजर भारत पर है। भारत के तेज विकास, भारत की तेजी से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था और भारत की मजबूत होती अंतरराष्ट्रीय छवि के बीच, दुनिया हमें बहुत उम्मीदों से देख रही है। एक ऐसा देश, जिसके बारे में आशंका जताई जाती थी कि वो अपनी आजादी बरकरार नहीं रख पाएगा, जिसके बारे में कहा जाता था कि वो बिखर जाएगा, आज पूरे सामर्थ्य से, अपनी सारी विविधताओं पर गर्व करते हुए, ये देश आगे बढ़ रहा है। और इन सबके पीछे, हमारी सबसे बड़ी ताकत हमारा संविधान है।

हमारे संविधान के preamble की शुरुआत में जो ‘We the people’ लिखा है, ये सिर्फ तीन शब्द नहीं हैं। ‘We the people’ एक आह्वान है, एक प्रतिज्ञा है, एक विश्वास है। संविधान में लिखी ये भावना, उस भारत की मूल भावना है, जो दुनिया में लोकतंत्र की जननी रहा है, mother of democracy रहा है। यही भावना हमें वैशाली के गणराज्य में भी दिखती है, वेद की ऋचाओं में भी दिखती है।

महाभारत में भी कहा गया है-

लोक-रंजनम् एव अत्र, राज्ञां धर्मः सनातनः।

सत्यस्य रक्षणं चैव, व्यवहारस्य चार्जवम्॥

अर्थात्, लोक को, यानी नागरिकों को सुखी रखना, सच्चाई के साथ खड़े होना और सरल व्यवहार, यही राज्य का व्यवहार होना चाहिए। आधुनिक संदर्भ में भारत के संविधान ने देश की इन सभी सांस्कृतिक और नैतिक भावनाओं को समाहित किया हुआ है।

मुझे संतोष है कि, आज देश mother of democracy के रूप में अपने इन प्राचीन आदर्शों को, और संविधान की भावना को लगातार मजबूत कर रहा है। Pro-people policies की ताकत से आज देश और देश का गरीब, देश की माताएं-बहनें, उनका सशक्तिकरण हो रहा है। सामान्य मानवी के लिए आज क़ानूनों को सरल बनाया जा रहा है। Timely justice के लिए हमारी judiciary भी लगातार कई सार्थक कदम उठा रही है। आज भी सुप्रीम कोर्ट द्वारा शुरू किए गए e-initiatives को launch करने का अवसर मुझे मिला है। मैं इस शुरुआत के लिए, और ‘ease of justice’ के प्रयासों के लिए मैं आप सभी को बधाई देता हूँ।

साथियों,

इस बार 15 अगस्त को लाल किले से मैंने कर्तव्यों की बात पर बल दिया था। ये हमारे संविधान की ही भावना का प्रकटीकरण है। महात्मा गांधी कहते थे कि- ‘हमारे अधिकार हमारे वो कर्तव्य हैं, जिन्हें हम सच्ची integrity और dedication के साथ पूरा करते हैं’। आज अमृतकाल में, जब हम आज़ादी के 75 वर्ष पूर्ण करके अगले 25 वर्षों की यात्रा शुरू कर रहे हैं, तो संविधान का ये मंत्र देश के लिए एक संकल्प बन रहा है।

आज़ादी का ये अमृतकाल देश के लिए कर्तव्यकाल है। चाहे व्यक्ति हों या संस्थाएं, हमारे दायित्व ही आज हमारी पहली प्राथमिकता हैं। अपने कर्तव्य पथ पर चलते हुए ही हम देश को विकास की नई ऊंचाई पर ले जा सकते हैं। आज भारत के सामने नित नए अवसर बन रहे हैं, भारत हर चुनौती को पार करते हुए आगे बढ़ रहा है।

एक सप्ताह के बाद भारत को जी-20 की प्रेसीडेंसी भी मिलने वाली है। ये बहुत बड़ा अवसर है। हम सभी टीम इंडिया के रूप में विश्व में भारत की प्रतिष्ठा को बढ़ाएं, भारत का योगदान विश्व के सामने लेकर जाएं, ये भी हम सभी का सामूहिक दायित्व है। भारत की Mother of Democracy के तौर पर जो पहचान है, हमें उसे औऱ सशक्त करना है।

साथियों,

हमारे संविधान की एक और विशेषता है, जो आज के युवा भारत में और भी प्रासंगिक हो गई है। हमारे संविधान निर्माताओं ने हमें एक ऐसा संविधान दिया है, जो open है, futuristic है, और अपने आधुनिक विज़न के लिए जाना जाता है। इसलिए, स्वाभाविक तौर पर, हमारे संविधान की स्पिरिट, youth centric है।

आज स्पोर्ट्स हों या स्टार्टअप्स, इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी हो या डिजिटल पेमेंट्स, भारत के विकास के हर आयाम में युवाशक्ति अपना परचम लहरा रही है। हमारे संविधान और संस्थाओं के भविष्य की जिम्मेदारी भी हमारे इन युवाओं के कंधों पर ही है।

इसलिए, आज संविधान दिवस पर मैं सरकार की व्यवस्थाओं से, देश की न्यायपालिका से एक आग्रह भी करूंगा। आज के युवाओं में संविधान को लेकर समझ और बढ़े, इसके लिए ये जरूरी है कि वो संवैधानिक विषयों पर debates और discussions का हिस्सा बनें। जब हमारा संविधान बना, तब देश के सामने क्या परिस्थितियां थीं, संविधान सभा की बहसों में उस समय क्या हुआ था, हमारे युवाओं को इन सब विषयों की जानकारी होनी चाहिए। इससे उनकी संविधान को लेकर दिलचस्पी और बढ़ेगी। इससे युवाओं में Equality और Empowerment जैसे विषयों को समझने का विज़न पैदा होगा।

उदाहरण के तौर पर, हमारी संविधान सभा में 15 महिला सदस्य थीं। और उनमें एक ‘दक्शायिनी वेलायुधन’ वो महिला थी, जे एक प्रकार से वंचित समाज से निकल करके वहां तक पहुंची थीं। उन्होंने दलितों, मजदूरों से जुड़े कई विषयों पर महत्वपूर्ण interventions किए I दुर्गाबाई देशमुख, हंसा मेहता, राजकुमारी अमृतकौर, ऐसे ही और कई महिला सदस्यों ने भी महिलाओं से जुड़े विषयों पर अहम योगदान दिया था। इनके योगदान की चर्चा कम ही हो पाती है।

जब हमारे युवा इन्हें जानेंगे, तो उन्हें अपने सवालों का जवाब भी मिलेगा। इससे संविधान के प्रति जो निष्ठा पैदा होगी, वो हमारे लोकतंत्र को, हमारे संविधान को और देश के भविष्य को मजबूत करेगी। आजादी के अमृतकाल में, ये भी देश की एक अहम जरूरत है। मुझे आशा है, संविधान दिवस इस दिशा में हमारे संकल्पों को और अधिक ऊर्जा देगा।

इसी विश्वास के साथ, आप सभी का बहुत-बहुत धन्यवाद!