For me Youth is not just 'New Age Voters', they are "New Age power"

Published By : Admin | April 22, 2014 | 13:59 IST

दिन-रात के कमरतोड़ प्रचार के बाद भी चेहरे पर जरा सी थकान के निशान तक नहीं। पांच चरणों के मतदान के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी पूरी तरह आत्मविश्वास से लबरेज नजर आते हैं। भाजपा व राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के अब तक के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन का दावा कर रहे मोदी को सबसे ज्यादा भरोसा देश के युवा मतदाताओं पर है। सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की राजनीति के लिए कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराते हुए वह कहते हैं कि लोगों का मिजाज बदला है और वे विकास चाहते हैं। वोटबैंक की राजनीति करने वाले दलों को सबक सिखाकर जनता ने इस दफा भाजपा को पूर्ण बहुमत देने का निर्णय ले लिया है। दो जगह से चुनाव लड़ने या पूरे चुनाव अभियान पर हावी होने या फिर नकारात्मक लाइन पर चुनाव प्रचार जैसे मसलों पर उन्होंने दैनिक जागरण के सीनियर एक्जीक्यूटिव एडीटर प्रशांत मिश्र से लंबी बातचीत की।

चुनाव शुरू होने के पहले भाजपा सबसे बड़ी पार्टी होने का दावा कर रही थी। फिर 272 प्लस का लक्ष्य रखा गया। अब 300 सीटें जीतने की बात होने लगी है। यह आत्मविश्वास है या माहौल बनाने की रणनीति?

-यह तो वही बात हुई कि पहले मुर्गी आई या अंडा? हममें आत्मविश्वास है इसीलिए हम मेहनत कर रहे हैं। इसके कारण अपार समर्थन भी मिल रहा है और इस प्रकार माहौल तैयार हो रहा है। जैसा माहौल तैयार हुआ है, उससे हमारा आत्मविश्वास और भी बढ़ा है। 13 सितंबर को भाजपा ने मुझे पीएम पद का उम्मीदवार घोषित किया। उसके बाद से 380 से ज्यादा रैलियों को संबोधित कर चुका हूं। चुनाव की घोषणा के बाद से लगभग 185 रैलियों का आयोजन तय हुआ। इसके अलावा 3डी टेक्नोलॉजी के जरिये भी देश के कोने-कोने में जनता से मुखातिब होने का सिलसिला कायम है। कुल मिलाकर 1000 रैलियां 3डी द्वारा हो जाएंगी। जिस प्रकार का जनाक्रोश कांग्रेस के खिलाफ है, उसे देखते हुए दो बातें तय दिखती हैं- पहली, कांग्रेस आजाद भारत के अपने चुनावी इतिहास में सबसे निचली पायदान पर सिमट जाएगी। दूसरी यह कि राजग व भाजपा का अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन तय है।

आप कहीं अतिआत्मविश्वास का शिकार तो नहीं..?

-(बीच में ही) पंडित जी.इस बार अब तक के चरणों में हुए भारी मतदान से एवं खासकर युवाओं ने जो अप्रत्याशित रुचि एवं भागीदारी मतदान प्रक्रिया में दिखाई है, उससे यह बिल्कुल साफ है कि इस बार का चुनाव अभूतपूर्व है। इस बार लोग न सिर्फ मतदान करने के लिए आगे आ रहे हैं, बल्कि लाखों लोग इंडिया272प्लस डाट कॉम वेबसाइट के जरिये वालिंटियर के रूप में भाजपा के साथ जुड़े हैं। यह एक बड़ा बदलाव है। जिस प्रकार का जनसैलाब रैलियों में उमड़ रहा है, उसे देखते हुए लगता है कि शायद यह पहला चुनाव है जहां मतदान से पहले ही मानों पूरे देश के लोगों ने तय कर लिया है कि इस बार भाजपा को अवसर प्रदान करना है। पांच-छह महीने पहले भाजपा को जो व्यापक जनसमर्थन मिल रहा था, वह अब पूर्ण बहुमत से कहीं आगे तब्दील होता हुआ स्पष्ट नजर आ रहा है।

कहते हैं कि मोदी हर चीज पर हावी हो जाते हैं। इस बार चुनाव में जिस तरह व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप का दौर चला है, क्या उसका कारण भी यही है? आप इन आरोपों का जवाब क्यों नहीं दे रहे हैं?

-मैं यदि मिथ्या आरोपों का जवाब दूं तो फिर तू-तू, मैं-मैं की जो राजनीति है, वह और आगे चलती है। हां, यह सच है कि मेरे विरोधियों ने शालीनता की सीमा पार कर मुझ पर अनर्गल आरोप लगाए, व्यर्थ प्रलाप किया है। पर मैंने ये तय कर लिया है कि मैं हर अपमान सिर्फ इसलिए सहन कर लूंगा, सारा विष सिर्फ इसलिए पी लूंगा ताकि इस देश के युवाओं, किसानों, माता-बहनों के अहम मुद्दों से कहीं बात भटक न जाए। विरोधी दलों के राजनेता क्या बात करते हैं, उस पर न तो मैं ज्यादा ध्यान देता हूं और न ही टिप्पणी करना जरूरी समझता हूं। लेकिन दस वर्ष के शासन के बाद संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) की सरकार के पास उनके द्वारा किए गए काम या उनकी उपलब्धियों की चर्चा करने के लिए कुछ न हो और वे भाजपा नेताओं पर टिप्पणी करें, इससे यह तो साफ है कि देश के दस बहुमूल्य साल कांग्रेस ने वाकई बर्बाद कर दिए। एक लंबे अरसे बाद राजनीति में लोगों की दिलचस्पी दिख रही है। राजनेताओं के प्रति जहां तिरस्कार और गुस्से की भावना थी, वहीं मैं पहली बार अपार समर्थन एवं स्नेह का भाव देख रहा हूं। यह जो आशा का संचार हुआ है, इस आशा को, इस विश्वास को बनाए रखने की जरूरत है।

आपने अभियान शुरू किया था तो मुद्दा था विकास। भय, भूख और भ्रष्टाचार, लेकिन आपको नहीं लगता कि पूरा चुनाव ध्रुवीकरण पर लड़ा जा रहा है?

-शुरुआत में हमने तय किया था कि इस पूरे चुनाव को विकास एवं सुशासन जैसे सकारात्मक मुद्दों पर लड़ा जाए। यदि अन्य दल भी ऐसा करते तो शायद हमारी चुनावी राजनीति में एक नया अध्याय जुड़ जाता। अफसोस है कि विरोधी दलों ने चुनाव को उसी पुरानी जाति एवं संप्रदाय की राजनीति की तरफ धकेलने में कोई कमी नहीं छोड़ी। इसके बावजूद यह पहला चुनाव है जिसमें भाजपा जैसी बड़ी पार्टी विकास एवं सुशासन के मुद्दे पर चुनाव लड़ रही है। पिछले छह महीने से मेरा यह पुरजोर प्रयास रहा है कि हम नागरिकों के असली मुद्दों को उठाएं। इस बार देश का मिजाज बदला है और लोगों ने तय किया है कि वे उनके जीवन को छूने वाले असली मुद्दों की बात करने वाली भाजपा को समर्थन देंगे। उन्होंने वोटबैंक की राजनीति करने वाली पार्टियों को सबक सिखाने का निर्णय कर लिया है।

फिर ध्रुवीकरण की सियासत के लिए जिम्मेदार कौन है?

-जिस प्रकार एक हारती हुई सेना अपना अस्तित्व बचाने के लिए बंकर में घुस जाती है उसी तरह कांग्रेस भी इस बार अपने अस्तित्व को बचाने की खातिर एक बार फिर छद्म धर्मनिरपेक्षता के बंकर में छिपकर चुनाव लड़ना चाह रही है। सेक्युलरिज्म की बातें करने वाले दलों को पता नहीं कि 21वीं सदी का भारत एक नया भारत है। आज के युवाओं को जाति-संप्रदाय के आधार पर की जाने वाली राजनीति बिल्कुल नापसंद है। युवाओं को चाहिए एक ऐसी सरकार जो उनकी समस्याओं का समाधान कर सके, जो उनके सपनों को साकार कर सके, जो विकास पर ध्यान देकर उनके लिए रोजगार के अवसर दिला सके।

लेकिन. आरोप आपकी पार्टी के नेताओं पर भी लग रहा है। अमित शाह पर चुनाव आयोग ने पाबंदी भी लगाई..।

-आप मुझे मेरा एक भाषण बताएं, जहां मैंने जाति या संप्रदाय का उल्लेख किया हो। इसी तरह विपक्षी दलों के बड़े नेताओं का एक भाषण ऐसा बताएं, जहां उन्होंने जाति-संप्रदाय का उल्लेख न किया हो। कांग्रेस के कई नेताओं ने अत्यंत आपत्तिजनक बयान दिए हैं और दुर्भाग्य की बात है कि कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने अपने ऐसे नेताओं को नियंत्रित करने के बजाय उन्हें अपनी मौन स्वीकृति दी। अमित शाह ने जिस प्रकार चुनाव आयोग का आदर किया और उसके आधार पर उन पर लगी पाबंदी हटाई गई वह स्पष्ट रूप से आयोग के प्रति हमारे सम्मान एवं इस देश की कानून-व्यवस्था और संवैधानिक परंपराओं में हमारी प्रगाढ़ आस्था को परिलक्षित करता है। ध्रुवीकरण की बात करने वाले विश्लेषकों से मैं पूछना चाहूंगा कि क्या आज तक किसी पार्टी ने विकास एवं सुशासन की बात करने के लिए इतना गंभीर या सशक्त प्रयास किया है? भ्रामक प्रचार करने वालों की दाल नहीं गलने वाली। इस बार देश का मतदाता जागा है और उसने भाजपा को समर्थन करने का मन बना लिया है।

क्या भाजपा आश्वस्त करेगी कि वह ध्रुवीकरण की राजनीति नहीं करेगी?

-हमारी राजनीति सबको साथ लेकर चलने की है। हमारा तो नारा ही है, सबका साथ और सबका विकास। मैं भले ही चुनाव हार जाऊं, लेकिन देश और समाज को तोड़ने वाली राजनीति नहीं करूंगा।

मोदी जी, चुनाव आयोग के आंकड़े दिखाते हैं कि इस चुनाव में 23 करोड़ से ज्यादा 'न्यू एज वोटर्स' ऐसे युवा मतदाता वोट डालेंगे, जिनमें बहुत सारे प्रथम बार मतदान करने वाले हैं। बेरोजगारी जैसे गंभीर मुद्दों के तुरंत हल ढूंढ़ने की जरूरत है, युवा केंद्रित इन मुद्दों को कैसे प्राथमिकता दी जाएगी?

-देखिये, यूथ मेरे लिए सिर्फ 'न्यू एज वोटर्स' नहीं है, बल्कि 'न्यू एज पावर' है। और इन युवाओं को 'राइट अपरचुनिटी' तथा 'राइट इनवायरर्मेट' देना हमारी प्राथमिकता होगी। इसके अंतर्गत स्किल डेवलपमेंट पर जोर देना हमारा सबसे महत्वपूर्ण कदम होगा। परन्तु दुर्भाग्य की बात है कि संप्रग सरकार ने इस मुद्दे पर सिर्फ समितियां ही बनाई। वास्तव में हमें कमेटी नहीं, कमिटमेंट चाहिए। बेरोजगारी इस समय हमारे सामने सबसे बड़ी चुनौती है। पिछले एक दशक की जॉबलेस ग्रोथ ने हमें ऐसी स्थिति में ला दिया है, जहां हमारे युवा बेरोजगार बैठे हैं। जहां राजग के छह वर्ष में छह करोड़ रोजगार प्रदान किए गए, वहीं संप्रग के दस वर्ष में डेढ़ करोड़ से भी कम रोजगार सृजित किए गए। युवाओं को नौकरियां चाहिए। उन्हें स्वरोजगार के अवसर चाहिए। अपने सपनों को साकार कर सकें, ऐसी जिंदगी चाहिए। युवाओं को शिक्षा देना, स्किल डेवलपमेंट पर फोकस करके उन्हें रोजगार मुहैया कराना, यह मेरी सबसे बड़ी प्राथमिकता होगी।

एक दौर था जब यह सवाल उठ रहे थे कि मोदी के केंद्रीय भूमिका में आने पर राजग का दायरा कम होगा। लेकिन वर्तमान में राजग के साथ 27-28 दलों का आंकड़ा है। ऐसा क्या हुआ जो एकबारगी कई दल आपके साथ जुड़ने लगे हैं?

-इस बार राजग या एनडीए का मतलब सिर्फ नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस नहीं, परन्तु नेशनल डेवलपमेंट अलायंस भी बन गया है। सही मायने में यदि कोई ध्रुवीकरण हुआ है तो वह विकास के आधार पर हुआ है। एक तरफ भाजपा एवं राजग के हमारे साथी दल हैं, जो विकास एवं सुशासन की राजनीति करना चाहते हैं। दूसरी तरफ, कांग्रेस एवं उसके साथी दल हैं जो अभी भी धर्म एवं जाति आधारित विघटन की राजनीति करना चाहते हैं। 25 से अधिक राजनीतिक दलों ने राजनीतिक सूझबूझ का परिचय देते हुए जो देश के हित में उचित है, वैसी विकास की राजनीति को अपनाया है एवं भाजपा का साथ देने का निर्णय किया है। शायद स्वतंत्र भारत की चुनावी राजनीति में ये सबसे बड़ा प्री-पोल अलायंस है। मैं उन सभी दलों का आभारी हूं, जिन्होंने इस देश की जनता की आवाज सुनकर उनके सपनों का साकार करने के लिए भाजपा का साथ देने का फैसला किया। उन सभी दलों ने झूठ के बादल छाए होने के बावजूद सच्चाई को समझ अपनी राजनीतिक सूझबूझ का परिचय दिया है।

भाजपा नेताओं का दावा है कि देश में मोदी लहर चल रही है। क्या इस लहर का असर उन राज्यों पर भी दिखेगा, जहां अब तक पार्टी खाता नहीं खोल पाई है?

-अब ये कहना गलत होगा कि मोदी की लहर सिर्फ भाजपा नेताओं को दिख रही है। लगभग हर चुनावी समीक्षक, हर सर्वे में देश के लोगों की इच्छा साफ दिखाई पड़ रही है। मैं तो कहता हूं कि ये सिर्फ एक लहर या आंधी नहीं, सुनामी है और इस बार उत्तर हो या दक्षिण, पूरब हो या पश्चिम, पूरा भारत एक मन बना चुका है। दक्षिण भारत में भी इस बार भाजपा एवं साथी दलों को बड़ी विजय मिलती स्पष्ट दिख रही है। और तो और इस बार दक्षिण एवं पूर्व के कई राज्यों में कांग्रेस का तो खाता तक नहीं खुलेगा।

लालकृष्ण आडवाणी का कहना है कि ऐसा चुनाव उन्होंने पहले कभी नहीं देखा। आप क्या कहेंगे?

-जिन्होंने भी पिछले 25-30 साल से देश की राजनीति को नजदीक से देखा है, वे सभी स्वीकार कर रहे हैं कि यह चुनाव हर मायने में अभूतपूर्व है। ये शायद पहला चुनाव है जहां वर्तमान सरकार के खिलाफ गुस्सा एवं वैकल्पिक सरकार प्रदान करने वाली पार्टी के प्रति आशा, ये दोनों चीजें एक साथ देखने को मिल रही है। ये पहला चुनाव है, जहां देश की जनता ने एकमत होकर एक भ्रष्ट एवं निकम्मी सरकार को उखाड़ फेंकने का फैसला किया है। ये आक्रोश एवं गुस्सा राजनीतिक व्यवस्था के प्रति नहीं, परन्तु केवल कांग्रेस पार्टी एवं उसके साथी दलों के प्रति है। अमूमन ऐसे में राजनीतिक व्यवस्था के प्रति आक्रोश एवं तिरस्कार की भावना देखने को मिलती है।

मतलब पूरा चुनाव निगेटिव लाइन पर जा रहा है?

-नहीं..इस बार न सिर्फ मजबूत सत्ता विरोधी लहर दिख रही है, परंतु 'निगेटिव वोट' के साथ-साथ एक स्पष्ट 'पोजिटिव वोट फार चेंज' भी दिखाई पड़ता है। दूसरी बात, शायद ये पहला चुनाव है, जिसने देश भर के युवाओं को राजनीति की तरफ खींचा है एवं राजनीति में उनकी दिलचस्पी जगाई है। मानों पहली बार इस देश के युवा अपने जीवन की सफलता की कुंजी अपने हाथों में लेना चाहता है। इस कारण मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि इस बार देशभर में अप्रत्याशित मतदान होगा एवं युवा मतदाताओं की सक्रिय भागीदारी उसमें रहेगी। तीसरा बिंदु जिस कारण इस चुनाव को अभूतपूर्व कहा जा सकता है, वह यह है कि इस बार का मतदाता अकल्पनीय परिपक्वता प्रदर्शित कर रहा है। जिन राज्यों में लोकसभा एवं विधानसभा चुनाव एक साथ हो रहे हैं, वहां का मतदाता इतनी परिपक्वता से पेश आ रहा है कि उसे इस बात का अंदाज है कि लोकसभा में किसे वोट देना है एवं विधानसभा में किसे।

आपसे अगर एक लाइन में पूछा जाए कि इस बार के चुनाव का मुख्य मुद्दा क्या है तो?

-इस बार का चुनाव कोई दल या व्यक्ति नहीं लड़ रहा, बल्कि पूरा देश लड़ रहा है। यह शायद पहला चुनाव है, जहां न संप्रदाय के आधार पर वोट पड़ेंगे और न ही जाति के आधार। पहली बार 'इंडिया फ‌र्स्ट' के नारे को जमीन पर सार्थक होते हुए देखा जा सकता है। सही मायने में यह पहला चुनाव है, जो विकास के मुद्दे पर लड़ा जा रहा है। जहां लोगों में सही मायने में आशा का संचार हुआ है। और लोग अपने सपनों के भारत को संजोने के लिए भाजपा को वोट दे रहे हैं।

आप दो स्थानों से चुनाव लड़ रहे हैं। इस पर कुछ सवाल उठ रहे हैं.?

-ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है कि कोई व्यक्ति दो जगह से चुनाव लड़ रहा है। कानून में भी इसकी इजाजत है और ये निर्णय पार्टी ने सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर सामूहिक तौर पर किया है।

अभी हाल में संजय बारू और पीसी परख ने किताबें लिखी हैं। पीएम और कांग्रेस दोनों घेरे में हैं। लेकिन सरकार का कहना है कि बारू झूठ बोल रहे हैं। आप क्या कहेंगे?

-इन किताबों में ऐसी कोई बात नहीं लिखी गई है, जो पहले से देश के लोगों को पता नहीं थी। इसीलिए किसी का ये कहना कि बारू झूठ बोल रहे हैं, गले नहीं उतरता। संजय बारू पर आक्रमण करने वाले लोगों ने ये तो कहा कि उन्होंने विश्वासघात किया है, इस पुस्तक के रिलीज होने के समय पर भी प्रश्नचिह्न लगाए एवं करीबी सलाहकार द्वारा इसे औचित्य भंग भी करार दिया गया। परन्तु कांग्रेस या सरकार में किसी ने भी पुस्तक में लिखी बातों एवं जानकारियों की सत्यता पर सवाल नहीं उठाए हैं। जो तथ्य एंव सच्चाई सामने आई है, वह बड़ी गंभीर है। दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के सबसे महत्वपूर्ण पद की गरिमा को जैसे ठेस पहुंचाई गई है। इससे कहीं न कहीं देश की साख भी कम हुई है। जो काम एक छोटे से राज्य में भी हो, उसकी निंदा की जाती है, वैसा दस साल तक प्रधानमंत्री पद के साथ कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने किया, ये दुर्भाग्यपूर्ण है। परंतु इससे कहीं ज्यादा चिंता उन बुद्धिजीवियों की चुप्पी से होती है जो अब तक इस मामले को लेकर मौन साधे हुए हैं। बारू की किताब 'द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर' के बारे में कहना चाहूंगा कि यह एक्सीडेंट देश को बहुत महंगा पड़ा है। इस एक्सीडेंट से देश का जो नुकसान पहुंचा है, उसे रिपेयर करने में बहुत मेहनत लगेगी। वैसे तो एक्सीडेंट कहना भी गलत होगा, क्योंकि एक्सीडेंट 'हो जाते हैं.. कराए नहीं जाते..'।

गुजरात में आपका लंबा अनुभव रहा है। उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों की राजनीति में आपको क्या अलग दिख रहा है?

-दरअसल मोटे तौर पर हमारे देश के लोगों की समस्याएं समान हैं। लेकिन उत्तर प्रदेश एवं बिहार के लोगों को पिछले कई सालों से जातिवाद का जहर फैलाने वाली पार्टियों का कुशासन भी झेलना पड़ा। इस चुनाव में उत्तर प्रदेश एवं बिहार की भूमिका बहुत बड़ी और अहम रहने वाली है। यह जायज भी है। क्योंकि जब तक उत्तरप्रदेश एवं बिहार विकास की दौड़ में आगे न आएं, तब तक भारत विकसित नहीं हो सकता। उत्तर प्रदेश और बिहार के लोगों में और विशेषकर वहां के युवाओं में इस बार भाजपा को लेकर बहुत उत्साह है, बहुत आशाएं भी हैं। दरअसल अब ये स्पष्ट हो रहा है कि बिहार एवं उत्तरप्रदेश के लोग भी विकास एवं सुशासन के लिए उतने ही तत्पर हैं, जितने अन्य राज्यों के लोग। वहां के लोगों ने इस बार भाजपा को भारी बहुमत से विजयी बनाने का निर्णय कर लिया है।

'पांच-छह महीने पहले भाजपा को जो व्यापक जनसमर्थन मिल रहा था वह अब पूर्ण बहुमत से कहीं आगे तब्दील होता हुआ स्पष्ट नजर आ रहा है।'

'हारती हुई सेना की तरह कांग्रेस भी इस बार अपने अस्तित्व को बचाने की खातिर एक बार फिर छद्म धर्मनिरपेक्षता के बंकर में छिपकर चुनाव लड़ना चाह रही है।'

'क्या आज तक किसी चुनाव में किसी बड़ी पार्टी ने जाति या संप्रदाय की राजनीति से ऊपर विकास एवं सुशासन की बात करने के लिए इतना गंभीर या सशक्त प्रयास किया है?'

Courtesy: Jagran

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्पष्ट मत है कि भ्रष्टाचार निवारण के साथ जनकल्याण के कार्यों से किसी तरह का कोई समझौता नहीं किया जा सकता। अब जब लोकसभा चुनाव के पहले चरण का मतदान महज हफ्ता भर बचा है, तब उन्होंने उत्तराखंड और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लोगों के लिए अपनी योजनाओं का खुलासा किया। प्रधानमंत्री तीसरे कार्यकाल में अब तक हुए जनहितकारी कार्यों को तेजी से बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध दिखे। पेश है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हिन्दुस्तान के प्रधान संपादक शशि शेखर की विशेष बातचीत...

सवाल: आपने हाल में कहा कि तीसरे कार्यकाल में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई और तेज होगी। क्या यह कार्रवाई राजनीतिक भ्रष्टाचार तक ही सीमित रहेगी या नौकरशाही और सरकारी तंत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार को भी खत्म करने के लिए होगी, क्योंकि निचले स्तर पर आज भी भ्रष्टाचार बड़ी समस्या बना हुआ है ?

जवाब: 2014 में सरकार बनने के साथ ही हमने भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए कई स्तरों पर प्रयास शुरू किए। केंद्रीय भर्तियों की समूह-सी, समूह-डी भर्तियों से साक्षात्कार खत्म कर दिए। स्वीकृतियों के लिए राष्ट्रीय एकल विंडो प्रणाली शुरू की गई। सरकारी सेवाएं ज्यादा से ज्यादा फेसलेस हों, इसका प्रयास किया।
हमने गरीबों का पैसा बिचौलियों की जेब में जाने से बचाने के लिए डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) योजना लागू की। आज इस वजह से 10 करोड़ से ज्यादा फर्जी नाम और ऐसे लाभार्थी जो पैदा भी नहीं हुए थे, वो कागजों से हटे हैं। ऐसा करके सरकार ने पौने तीन लाख करोड़ रुपए गलत हाथों में जाने से बचाए। 2014 से पहले ईडी ने सिर्फ पांच हजार करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच की थी, जबकि पिछले 10 वर्षों में एक लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति अटैच हुई। वहीं, 2014 से पहले ईडी ने सिर्फ 34 लाख रुपये जब्त किए थे। हमारी सरकार में यह आंकड़ा 2200 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इस पैसे को गरीब कल्याण की योजनाओं में लगाया जाता तो कितने लोगों को लाभ होता। युवाओं के लिए कितने अवसर तैयार हो सकते थे। बुनियादी ढांचे की कई नई परियोजनाएं तैयार हो जातीं। भ्रष्टाचार चाहे जिस स्तर का हो, उसकी मार देश के लोगों पर ही पड़ती है।

भ्रष्टाचारियों पर कार्रवाई के लिए प्रतिबद्ध हूं। जिन राज्यों में भाजपा की सरकार है, वहां भी भ्रष्टाचार के खिलाफ कदम उठाए जा रहे हैं। अब ये जो नैरेटिव आपके सुनने में आया है कि सिर्फ राजनीतिक भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई हो रही है, ये वो लोग चला रहे हैं जिन पर जांच की तलवार लटकी है। मैं आपको एक और तथ्य बताता हूं, जिसकी ज्यादा चर्चा नहीं होती। ईडी के पास भ्रष्टाचार के जितने मामले हैं, उनमें से केवल तीन फीसदी ही राजनीति से जुड़े व्यक्तियों के हैं। बाकी 97% मामले अधिकारियों और अन्य अपराधियों से संबंधित हैं। इनके विरुद्ध भी कार्रवाई हो रही है। जिन लोगों को भ्रष्ट व्यवस्था में फायदा दिखता है, वो लोगों के सामने गलत तस्वीर पेश कर रहे हैं। ईडी ने कई भ्रष्ट अफसरों को भी गिरफ्तार किया है। भ्रष्ट नौकरशाहों, आतंकी फंडिंग से जुड़े अपराधियों, मादक पदार्थों के तस्करों की भी हजारों करोड़ की संपत्ति जब्त की गई है।

मैं हिन्दुस्तान के पाठकों को विश्वास दिलाता हूं कि देश के लोगों का हक छीनने वालों के खिलाफ कार्रवाई नहीं रुकेगी।

सवाल: यह चुनाव पिछले दो चुनावों से किस प्रकार भिन्न है, क्योंकि यह कहा जा रहा है कि मतदाताओं में ज्यादा उत्साह नहीं है और कोई लहर नजर नहीं आ रही है? क्या एंटी इंकबेंसी हो सकती है?

जवाब: चुनाव तो भारत में लोकतंत्र का महापर्व माना जाता है। चुनाव उत्साहहीन नहीं है। विपक्ष अपनी पक्की हार से उत्साहहीन है। विपक्ष भी यह मानकर चल रहा है कि एनडीए की ही सरकार आएगी। ऐसे में विपक्ष के बहुत से नेता प्रचार में जाने से बच रहे हैं। कई लोगों ने अभी से ईवीएम का बहाना भी अपनी पोटली से निकाल लिया है।

आपको लहर देखनी है तो जमीन पर लोगों के बीच जाना होगा। वहां आपको पता चलेगा कि भाजपा सरकार की तीसरी पारी को लेकर लोगों में कितना उत्साह है। हमारे कार्यकर्ता तो मैदान में हैं ही। जनता भी सड़कों पर उतरकर ‘फिर एक बार मोदी सरकार’ के नारे लगा रही है। आपने पिछली बार पूरे विश्व में ऐसा कब देखा था कि किसी सरकार के 10 साल पूरे होने के बाद भी जनता पूरे जोश के साथ उसी सरकार को वापस लाने में जुटी हो। ऐसे में 2024 का चुनाव राजनीति के जानकारों के लिए भी अध्ययन का विषय है।

भारत के लोग देख रहे हैं कि आज हमारा देश, दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी और तेज गति से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था है। आज दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम भारत में है। भारत के अंतरिक्ष अभियान, मेक इन इंडिया अभियान और अभूतपूर्व ढंग से बुनियादी ढांचे केविस्तार की चर्चा पूरी दुनिया में हो रही है। रेल, सड़क और एयरपोर्ट के विकास से लोगों को सुविधा हुई है। रियल टाइम डिजिटल पेमेंट में हम दुनिया के किसी भी देश के मुकाबले बहुत आगे हैं।

500 वर्षों के इंतजार के बाद भगवान श्री राम अयोध्या में अपने भव्य मंदिर में विराजमान हुए हैं। कश्मीर अनुच्छेद 370 की बेड़ियों से आजाद होकर देश की विकासगाथा का हिस्सा बन गया है और सबसे बड़ी बात, पहली बार देश के लोगों को भाजपा मॉडल और कांग्रेस मॉडल की तुलना करने का स्पष्ट मौका मिला है। पांच से छह दशक तक कांग्रेस ने भी पूर्ण बहुमत वाली सरकार चलाई थी। भाजपा की पूर्ण बहुमत वाली सरकार को अभी सिर्फ एक दशक हुआ है। जब उनकी पूर्ण बहुमत की सरकार थी, तो वो अपने परिवार को मजबूत करने में लगे रहे। आज जब हमारी पूर्ण बहुमत की सरकार है तो हमारी प्राथमिकता देश को मजबूत करना है। गांव, गरीब, किसान और मध्यम वर्ग को सशक्त बनाना है। दोनों का फर्क देश ही नहीं बल्कि विश्व देख रहा है।

हमारा 10 वर्षों का रिपोर्ट कार्ड इस बात का प्रमाण है कि भाजपा की गारंटी पूरी होती है। अब हम 2047 में विकसित भारत का विजन लेकर लोगों के बीच जा रहे हैं। हमारे पास एक ऐसे भारत का विजन है, जिसमें हर व्यक्ति के सिर पर पक्की छत हो और युवाओं के लिए रोजगार के अनेक अवसर हों। हम उस भारत के निर्माण में जुटे हैं जहां किसान समृद्ध और महिलाएं सशक्त हों।

25 करोड़ लोगों का गरीबी से बाहर आना, 11 करोड़ से ज्यादा घरों में शौचालय बनना और चार करोड़ गरीबों को अपना पक्का मकान मिलना, ये दिखाता है कि केंद्र की भाजपा सरकार गरीब की सेवा के लिए समर्पित है। और पिछले 10 वर्षों में जो हुआ है, वो सिर्फ ट्रेलर है। हमें देश को बहुत आगे ले जाना है।

सवाल: गन्ने के साथ ही उसके 126 बाइ-प्रोडक्ट्स के लिए भी कदम उठाए जाने की जरूरत है। जैसे ब्राजील में गन्ने से इथेनॉल का 30 से 35% प्रतिशत इस्तेमाल पेट्रोल में हो रहा है। अपने देश में यह अभी 10 फीसदी तक ही है। कुछ जगह तो गन्ने की खोई से पेपर, क्राकरी और प्लाईबोर्ड भी बन रहे हैं? अगली सरकार में इसे लेकर क्या कुछ नया करने जा रहे हैं?

जवाब: मैं आपको इस प्रश्न के लिए बधाई देता हूं कि आपने इतना महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया। इथेनॉल ब्लेंडिंग से गन्ना किसानों की आय तो बढ़ी ही है, साथ ही सतत विकास के हमारे प्रयासों को भी मजबूती मिली है। हमने पेट्रोल में 10% तक इथेनॉल ब्लेंडिंग का लक्ष्य पांच महीने पहले ही हासिल कर लिया था। फिलहाल हम 12% के आसपास पहुंच चुके हैं। हम 20% तक इथेनॉल ब्लेंडिंग के लक्ष्य की ओर बिल्कुल सही तरीके से बढ़ रहे हैं। जी20 समिट के दौरान भारत ने ग्लोबल बायोफ्यूल अलायंस का गठन किया और दुनियाभर के देशों से इसमें शामिल होने की अपील की। ये बायोफ्यूल और पर्यावरण को लेकर भारत की प्रतिबद्धता का प्रमाण है।

सरकार ने इथेनॉल डिस्टिलरीज में 40 हजार करोड़ रुपए का निवेश भी किया है, जिससे बड़ी संख्या में रोजगार का सृजन हुआ है। हम जीवाश्म ईंधन पर अपनी निर्भरता को तेजी से कम कर रहे हैं। उसमें भी गन्ने के बाइ-प्रोडक्ट्स से काफी मदद मिल रही है। गन्ने की खोई से बिजली उत्पादन में भी वृद्धि हुई है। देश में गन्ने की खोई और बायोमास से ऊर्जा उत्पादन की क्षमता भी लगातार बढ़ाई जा रही है।

अयोध्या में राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा समारोह के दौरान जो कप, प्लेट, कटोरे और चम्मच उपयोग में लाए गए थे, वो गन्ने की खोई से बने थे। हमारे जीवन में इस तरह की चीजों का उपयोग बढ़ने से गन्ने के बाइ-प्रोडक्ट की उपयोगिता बढ़ गई।

सवाल: कहा जाता है पहाड़ का पानी और जवानी उसके काम नहीं आती। हर रोज 230 लोग गांव छोड़ रहे हैं। केंद्र ने बॉर्डर के गांवों के विकास के लिए 49 गांवों में बायब्रेंट विलेज योजना शुरू की है। बाकी इलाकों में पलायन रोकने के लिए क्या उपाय और किए जायेंगे।

जवाब: पिछले 10 वर्षों में मैंने हर उस काम को करने का बीड़ा उठाया है, जिसे पिछली सरकारों ने असंभव मान लिया था। समस्याएं देखकर बैठ जाना, ये मेरे स्वभाव में नहीं है। जिन्होंने दशकों तक पहाड़ी इलाकों की उपेक्षा की उनके समय में ये कहावत ठीक बैठती थी, कि पहाड़ का पानी और जवानी उसके काम नहीं आती। लेकिन मैंने इस कहावत को बदलने का संकल्प लिया है। केंद्र और उत्तराखंड की भाजपा सरकार ने पहाड़ी इलाकों के विकास पर विशेष फोकस रखा है।

जब मैं कहता हूं कि ये दशक उत्तराखंड का दशक है, तो मेरे इस विश्वास के पीछे ठोस आधार है। मुझे उत्तराखंड की क्षमता, यहां के लोगों के सामर्थ्य पर पूरा भरोसा है। यहीं के लोग मिलकर उत्तराखंड को विकास की नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगे। यहां पलायन की समस्या रोकने के लिए पिछले कुछ वर्षों में हमने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। यहां के लोगों को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और कनेक्टिविटी के बेहतर अवसर देने का प्रयास किया है। रोड, रेलवे, रोपवे और एयरवेज को बेहतर करने के लिए अभूतपूर्व कदम उठाए हैं। इसका प्रभाव ये हुआ कि पहाड़ के युवाओं को यहीं पर शिक्षा और रोजगार के बेहतर अवसर मिलने लगे हैं।

जैसे हमने उत्तराखंड के 20 कॉलेज में आईटी लैब और हॉस्टल बनाने की योजना को स्वीकृति दी गई है। आंत्रप्रेन्योरशिप डवलपमेंट इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के साथ मिलकर यहां के कॉलेजों में आंत्रप्रेन्योरशिप कार्यक्रम चलाया जा रहा है। पीएम उषा के तहत कुमाऊं यूनिवर्सिटी में मेरू Ü(MERU) सेंटर को स्वीकृति दी गई है। एसडीएस यूनिवर्सिटी, ओपन यूनिवर्सिटी, दून यूनिवर्सिटी में छात्रों के लिए नए संसाधन विकसित किए जा रहे हैं। उत्तराखंड जैसे पहाड़ी क्षेत्रों में पर्यटकों की संख्या बढ़ने से कई स्तरों पर रोजगार के नए अवसर तैयार होते हैं। हमारी सरकार ने बद्रीनाथ, केदारनाथ, हेमकुंड साहिब, मानस खंड के मंदिरों तक पहुंच को आसान बनाया, और वहां ऐसी सुविधाएं विकसित की, जिससे पर्यटकों की संख्या बढ़ने लगी।

मैं आपको केदारनाथ का उदाहरण देता हूं। 2012 में वहां साढ़े पांच लाख श्रद्धालु आए थे, जो कि एक रिकॉर्ड था। 2013 में आई प्राकृतिक आपदा ने वहां बहुत नुकसान पहुंचाया। वहां की हालत देखकर लोग उम्मीद छोड़ चुके थे कि वो कभी केदारनाथ जा पाएंगे। लेकिन हमारी सरकार ने इस स्थिति को बदलने का संकल्प लिया। इसी का परिणाम है कि 2023 में करीब 20 लाख यात्री बाबा केदारनाथ के दर्शन के लिए पहुंचे थे। अगर मैं पूरी चारधाम यात्रा के श्रद्धालुओं को जोड़ लूं तो ये संख्या 55 लाख से ज्यादा हो जाएगी।

पर्वतमाला योजना, चार धाम परियोजना से आने वाले कुछ समय में उत्तराखंड में अभूतपूर्व तरीके से पर्यटन का विस्तार होगा। मुझे विश्वास है कि जल्द ही श्रद्धालुओं की संख्या करोड़ों में पहुंच जाएगी। पहाड़ों की संवेदनशीलता को देखते हुए हमने आपदाओं से निपटने में भी अपनी क्षमता का विस्तार किया है। आपको याद होगा, तुर्किए में प्राकृतिक आपदा के दौरान बचाव दल के रूप में भारत ने कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस कार्य के लिए दुनियाभर में भारतीय दल की सराहना हुई। उत्तराखंड में भी हम आपदाओं से निपटने और जल्द से जल्द सामान्य स्थिति बहाल करने में और सक्षम हुए हैं। रोजगार को बढ़ावा देने के लिए हमारी सरकार कृषि और बागवानी से जुड़ी कई योजनाएं चला रही है। सेब, कीवी और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में होने वाले फलों की बागवानी और पॉलीहाउस के निर्माण पर विशेष फोकस किया जा रहा है।

हमारी वाइब्रेंट विलेज योजना का लाभ सिर्फ बॉर्डर के गांवों को नहीं होगा। देश के पहले गांव तक अगर सड़क जाएगी तो वो कई जिलों और गांव से होकर ही जाएगी। देश के पहले गांव तक अगर टेलीकॉम सुविधा जाएगी, तो वो उसके पहले के कई गांवों को नेटवर्क से जोड़ती हुई जाएगी। वाइब्रेंट विलेज योजना के तहत 600 से अधिक गांवों का विकास किया जा रहा है। इन गांवों में सुविधाएं बढ़ाने के साथ-साथ इस बात का ख्याल रखा जा रहा है कि वहां की परंपराओं और संस्कृति को कोई नुकसान ना पहुंचे।

सवाल: पर्यटन विकास के लिहाज से नए नगर बसाने की योजना जरूरी मानी जा रही है। सुविधाओं की कमी से दूर दराज के गांवों तक पर्यटक नहीं पहुंच पाते। 429 गांवों में अभी मोबाइल की घंटी नहीं बज सकी। केंद्र मदद करेगा?

जवाब: मुझे लगता है, हिंदुस्तान के संवाददाताओं को ग्राउंड पर और ज्यादा समय बिताने की जरूरत है। ये बात सही है कि आजादी के बाद के दशकों तक उत्तराखंड, कांग्रेस की घनघोर उपेक्षा का शिकार रहा है। इस वजह से उत्तराखंड विकास के मामले में बहुत पीछे रहा। अब भाजपा सरकार इस स्थिति से उत्तराखंड को निकालने के लिए पूरी शक्ति से काम कर रही है। उत्तराखंड में पर्यटन के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर पर जो काम हमारी सरकार ने शुरू किया है, उसने उत्तराखंड के पर्यटन को विस्तार दिया है। मुख्य पर्यटक स्थलों के अलावा ऐसे स्थान जहां बहुत ज्यादा पर्यटक नहीं जाते, उन्हें भी पर्यटन मानचित्र पर लाने के प्रयास किए जा रहे हैं। ऐसे स्थानों पर इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करके पर्यटन की संभावनाएं विकसित की जा रही हैं।

कुछ साल पहले तक पिथौरागढ़ जो कि उत्तराखंड का बहुत ही खूबसूरत पर्यटक स्थल है, देहरादून और दिल्ली से बहुत दूर माना जाता था। यहां पहुंचने में यात्रियों को कई घंटे लग जाते थे, लेकिन आज ये दूरी बहुत कम समय में तय की जा सकती है। हेलीकॉप्टर, विमान सेवाओं ने यहां पहुंचना आसान बनाया है। सड़कों को चौड़ा किया गया है, जिससे सड़क यात्रा भी सुविधाजनक हो गई।

जल्द ही केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री करीब 900 किलोमीटर लंबे हाइवे से जुड़ जाएंगे। कर्णप्रयाग-ऋषिकेश रेलवे लाइन से बद्रीनाथ और केदारनाथ धाम तक पहुंचना आसान हो जाएगा। देहरादून में ट्रैफिक का दबाव कम करने के लिए 700 करोड़ रुपए की लागत से बाइपास रोड तैयार किया जा रहा है। वंदे भारत ट्रेन के जरिए आज दिल्ली से देहरादून 5 घंटे से भी कम वक्त में पहुंचा जा सकता है।

फिजिकल इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ-साथ डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी हमारी सरकार का लगातार फोकस रहा है। उत्तराखंड के दूर-दराज के गांवों तक भी 4G मोबाइल टावर लगाने की मंजूरी दी जा चुकी है। यहां बीएसएनएल करीब 500 नए 4G टावर लगा रही है, साथ ही 60 से ज्यादा टावर अपग्रेड किए जा रहे हैं। इससे जिन गांवों में अभी तक 2G या 3G सर्विस मिल रही है, उन्हें 4G की सुविधा मिलने लगेगी। इस प्रोजेक्ट पर 1000 करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च किए जा रहे हैं। उत्तराखंड की लगभग 93% जनता के पास 4G इंटरनेट सर्विस का लाभ पहुंच रहा है, हमारी सरकार की तीसरी पारी में हम ये आंकड़ा 100% तक ले जाएंगे।

भारत में 5G का विस्तार दुनिया में सबसे तेज गति से हुआ है। उत्तराखंड के भी कई इलाकों में 5G की सर्विस मिल रही है। आज उत्तराखंड के चारों धामों में 5G कनेक्टिविटी है। देश की 2 लाख वीं 5G साइट गंगोत्री ही है। मैं उत्तराखंड के लोगों से कहना चाहूंगा कि उनका सपना ही मेरा संकल्प है। उत्तराखंड के लोगों की आकांक्षाओं को आवाज देने के लिए भाजपा ने मजबूत उम्मीदवार खड़े किए हैं। इन लोगों के माध्यम से वहां के लोग हमेशा मुझसे जुड़े रहेंगे। ये सशक्त, कर्मठ और जमीन से जुड़े उम्मीदवार उत्तराखंड के प्रतिनिधि बनकर देश की संसद में जाएंगे और राज्य के विकास के लिए निरंतर कार्य करते रहेंगे।

Source: Hindustan