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भाईयो और बहनों,

केम छो,

नए साल में गुजरात का ये मेरा पहला दौरा है। आप सभी को एक बार फिर नववर्ष की बहुत-बहुत शुभकामनाएं। ये त्‍यौहारों का समय है, आने वाले समय में अनेक त्‍योहार आने वाले भी हैं। उतरायन का पावन उत्‍सव आप सभी ने बड़े धूम-धाम से मनाया। गुजरात में एक और उत्‍सव कल से शुरू होने वाला है। Vibrant Gujrat इस साल यानी दुनिया भर से लोग यहां जुटे हैं, व्‍यापार और कारोबार की दुनिया के बड़े-बड़े नाम उनको गुजरात अब अपना लगने लगा है।

नए भारत की नई व्‍यवस्‍थाओं के कारण व्‍यापार और कारोबार में भी उत्‍सव का माहौल और यही तो गुजरात की विशेषता है।

साथियों, उत्‍सव का आनंद तब और अधिक आता है जब परिवार का सब सदस्‍य.. उनका स्‍वास्‍थ्‍य उत्‍तम रहता है। आज इसी दिशा में एक बहुत बड़ा कार्य संपन्‍न हुआ है।

आज अहमदाबाद के लिए, गुजरात के लिए एक बहुत बड़ी सुविधा को सौंपने का मुझे अवसर मिला है। मैं Ahmadabad Municipal corporation का आभारी हूं, गुजरात सरकार का आभारी हूं कि आपने मुझे मौका दिया।

750 करोड़ रुपये की लागत से बना सरदार वल्‍लभ भाई पटेल Institute of Medical Science of Research आपकी सेवा के लिए समर्पित है। इस विश्‍वस्‍तरीय अस्‍पताल के लिए मैं आप सबको बहुत-बहुत बधाई देता हूं।

साथियों, देश सरदार साहब को एक कुशल प्रशासक, विजनरी नेता और किसानों के मसीहा के तौर पर जानता है लेकिन साथ-साथ सरदार साहब स्‍वच्‍छता और जन आरोग्‍य को लेकर भी बहुत आग्राही थे। इसी भावना के तहत उन्‍होंने अनेक स्‍वास्‍थ्‍य सुविधाओं के निर्माण में अपना योगदान दिया है। सरदार साहब की आत्‍मा जहां भी होगी, जिस शहर से उन्‍होंने अपना राजनीतिक दायित्‍व का प्रारंभ किया था उस शहर का इस प्रकार से फलना-फूलना, ऐसी बड़ी अस्‍पताल बनना... सरदार साहब जहां होंगे वहां उनकी आत्‍मा को जरूर शांति मिलेगी। और इस कार्य से जुड़े आप सबको सरदार साहब के अनेक-अनेक आशीर्वाद भी प्राप्‍त होते रहेंगे। ये मेरा विश्‍वास है।

अहमदाबाद में बना ये नया आधुनिक अस्‍पताल भी... मैं समझता हूं स्‍वास्‍थ्‍य सेवाओं की दुनियां में अपने आप में अपना एक महात्‍मय बना हुआ है।

साथियों, इस अस्‍पताल का थोड़ी देर पहले मैंने निरिक्षण किया, मैं वाकई कहता हूं मैं मंत्रमुग्‍ध हूं और सच में और जब एक सपना सच होता है, अपनी आखों के सामने उसे देखने का मौका मिलता है, इतना संतोष होगा इसकी आप कल्‍पना भली-भांति कर सकते हैं।

2011-12 में जिस विषय की हम चिंता कर रहे थे तब भी न जाने कैसी-कैसी नकारात्‍मक बाते चलती थी बाजार में, कैसे-कैसे मनगंढत आरोप लगते थे। लेकिन आज जो भी इसे देखेगा उसे जरूर संतोष होगा कि सामान्‍य मानव के जीवन में ऐसी व्‍यवस्‍थाओं का कितना महत्‍व होता है। और देश में शायद बहुत कम कॉरपोरेशन होंगे जो अपनी निर्धारित सेवाओं को जिम्‍मेवारी के अतिरिक्‍त, इस प्रकार की जिम्‍मेवारियों को संभालते हों और उसको उत्‍तम तरीके से, आधुनिक तरीके से दुनिया की बराबरी करने वाली व्‍यवस्‍था बनाते हों ऐसा बहुत कम नजर आता है।

और इसलिए Ahmadabad municipal corporation विशेष रूप से अभिनंदन के अधिकारी हैं, इस काम को करने वाले... जिन-जिनको जिम्‍मा मिला क्‍योंकि ये करीब 2012 से चल रहा है... जिन-जिनको जिम्‍मा मिला... जिन जिन लोगों ने अपना समय दिया, अपनी बुद्धि कौशल या सामर्थ्‍य को समर्पित भाव से लगाया, वे सभी अभिनंदन के अधिकारी हैं जिसके कारण आज ऐसा उत्‍तम अस्‍पताल और ये सिर्फ गुजरात के लिए नहीं देश के अन्‍य राज्‍यों के लिए भी.. और मैं समझता हूं ये वर्ल्‍ड क्‍लास अस्‍पताल के मुकाबले में अस्‍पताल है। यहां के कमरे हों, बैड हों या‍ फिर ये पूरा कैंपस। आधुनिकता और पर्यावरण का भी पूरा ध्‍यान रखा गया है। 15 सौ बैड की सुविधा वाला ये अस्‍पताल अहमदाबाद की स्‍वास्‍थ्‍य सुविधाओं को बहुत उचित स्‍तर पर ले जाने वाला है। ये यहां का पहला ऐसा सरकारी अस्‍पताल है जहां अपना हैलीपेड है, एयर एम्‍बुलेस को उतारने की सुविधा है,

साथियों, मुझे याद है कि 2000 से पहले तक गुजरात में न सिर्फ अच्‍छे सरकारी अस्‍पतालों का अभाव था बल्कि इनके लिए डॉक्‍टर और दूसरे मैन पावर की आवश्‍यकता होती थी उसकी भी बहुत बड़ी कमी थी।

सरकारी अस्‍पतालों में जाने से लोग बचते थे। और पहले अस्‍पतालों में इलाज करवाना सिर्फ साधन संपन्‍न लोगों के लिए ही बस में था वही कर पाते थे। और ये चीजें मन को पीड़ा कर जाती थी। इसी स्थिति को पीड़ा से बाहर निकालने के लिए सरकार ने अनेक नीतिग‍त फैसले लिए थे, हमने नए सरकारी अस्‍पताल बनवाए, नए मेडिकल कॉलेज बनवाए, और मेडिकल सीटों की संख्‍या बढ़ाने पर सबसे ज्‍यादा जोर दिया।

मुझे अब ये देखकर खुशी होती है कि आज गुजरात न सिर्फ गुजरातियों को बल्कि दूसरो राज्‍यों और दूसरे देशों के लोगों को भी बेहतर स्‍वास्‍थ्‍य सुविधा उपलब्‍ध कराने में एक सक्षम इकाई के रूप में खड़ा हुआ है।

पिछले डेढ़ दशक से गुजरात में मेडिकल टूरिज्‍म भी बढ़ा है, अब विदेश से स्‍वास्‍थ्‍य लाभ के लिए लोग गुजरात आते हैं। और सरदार साहब के नाम पर बना ये अस्‍पताल अब यहां के हेल्‍थ सेक्‍टर को और ज्‍यादा मजबूती देगा। और सबसे अहम बात ये कि आयुष्‍मान भारत योजना से जुड़ने वाला ये एक और अस्‍पताल है।

आम तौर पर होता ये है कि इतने आलीशान, इतने भव्‍य अस्‍पताल में पैर रखने से भी गरीब घबराता है। वो मानता है कि इतनी चकाचौंध में इलाज तो बहुत मंहगा ही होगा। लेकिन मुझे बहुत संतोष है कि सरदार साहब को समर्पित इस अस्‍पताल में आयुष्‍मान योजना के तहत गरीब का मुफ्त में इलाज होगा।

भाईयो और बहनों आयुष्‍मान भारत, प्रधानमंत्री जन आरोग्‍य योजना ये बहुत ही कम समय में गरीब से गरीब के भीतर स्‍वास्‍थ्‍य के संबंध में एक सुरक्षा का भाव जगाया है। आज देश के करीब 50 करोड़ गरीब भाई बहनों को ये विश्‍वास मिला है कि गंभीर बीमारी की स्थिति में सरकार उसके साथ खड़ी है। उसको अपना घर, जमीन, गिरवी रखने की जरूरत न पड़े, पैसा न भी हो..तो भी वो स्‍वस्‍थ हो सकता है। ये विश्‍वास आज हर गरीब को मिला है।

साथियों, कुछ लोग इस योजना को मोदी केयर भी कहते हैं, इसकी सफलता का अंदाज इसी बात से लगाया जा सकता है कि सिर्फ सौ दिन के भीतर ही 60 लाख गरीबों का अस्‍पताल में मुफ्त इलाज सुनिश्चित हुआ है।

इस योजना तहत अब हर दिन एवरज-औसतन दस हजार गरीबों को मुफ्त इलाज मिल रहा है। अभाव के कारण वर्षों-वर्षों तक ये लोग, ये परिवार इलाज नहीं करवा पा रहे थे, अगर मुसीबत आ भी गई तो वो कहता है कि कितने दिन जीना है, परेशानी झेलेंगें, बच्‍चों को कर्ज के अंदर डुबोकर के नहीं जाता है। और परिवार के लोग पीड़ा सहते थे पर उपचार नहीं करवाते थे, क्‍योंकि संभव नहीं था। आज इनको आयुषमान भारत का सहारा मिला है।

साथियों, देश के हर नागरिक का स्‍वास्‍थ्‍य बेहतर रहे, इसके लिए सरकार दिन-रात काम में जुटी है। सरकार का ये निरंतर प्रयास है कि देश के गरीब को, मध्‍यम वर्ग के परिवारों को कम-से-कम कीमत में उत्‍तम स्‍वास्‍थ्‍य सुविधाएं मिलें। इसके लिए केंद्र सरकार ने जेनरिक दवाओं को भी प्राथमिकता दी है। हमने प्रधानमंत्री जन औषधी केंद्र खोलने का एक अभियान चलाया है। अभी तक देश भर में करीब 5 हजार से ज्‍यादा केंद्र खोल जा चुके हैं। इन केंद्रों पर जेने‍रिक दवाएं मार्किट रेट से लगभग 50 प्रतिशत सस्‍ती हैं। जो दवाई एक हजार रुपये में आती है वो साढे तीन सौ, चार सौ, पांच सौ रुपयें में मिल जाती है। इन केंद्रों से विशेष तौर पर उन परिवारों को लाभ हुआ है जिनको डायबिटिज जैसी बीमारियों के चलते नियमित रूप से दवाई लेनी पड़ती है। इतना ही नहीं सरकार ने बीते साढ़े चार वर्षों में साढ़े आठ सौ से अधिक दवाओं और सर्जरी के सामान की अधिकतम कीमत निर्धारित की है उससे ज्‍यादा नहीं ले सकते हैं और उसका परिणाम ये आया है कि कि आज सर्जरी का सामान हो, दवाईयां हों, ये सस्‍ते में उपलब्‍ध संभव हुई है।

भाईयो और बहनों हार्ट की बीमारी में काम आने वाले स्‍टंट 85 प्रतिशत, तो घुटने की सर्जरी में काम आने वाले इंप्‍लाट करीब 70 प्रतिशत सस्‍ते हुए हैं। सिर्फ स्‍टंट की कीमत कम किए जाने से ही गरीब और मध्‍यम वर्ग के लोगों को साल भर में साढे चार हजार करोड़ रुपये से भी अधिक की बचत हुई है। और इन्‍हीं प्‍लांट की कीमत कम होने से लोगों को सालाना लगभग 15 सौ करोड़ रुपये की बचत हुई है। इसके अलावा किडनी की बीमारी से पीडि़त बहनों भाईयो के लिए देश में लगभग साढे चार सौ दिनों में डायलिसिस सेंटर बनाए चुके हैं। इन सेंटरस पर मुफ्त में डायलिसिस की सुविधा दी जा रही है। इसके पिछले वर्ष तक करीब 35 लाख मुफ्त डायलिसस सेशन हो चुके हैं। इतना ही नहीं हर सेशन से किसी न किसी गरीब के लगभग दो हजार रुपये बच भी रहे हैं।

साथियों, बीजेपी के नेतृत्‍व में केंद्र सरकार ने देश के गांव-गांव तक प्राइ‍मरी हेल्‍थ केयर सुविधाओं को बेहतर बनाने का बीड़ा उठाया है। आजादी के जब 75 साल होंगे, वर्ष 2022 तक, देश भर में डेढ़ लाख Health and Wellness Centre बनाने के लक्ष्‍य को लेकर आज भारत सरकार काम कर रही है।

इस पर गुजरात सहित सभी राज्‍यों ने तेजी से काम चल रहा है। यहां पर सामान्‍य बीमारियों की जांच तो होगी ही अनेक प्रकार के स्‍टंट भी मुफ्त में उपलब्‍ध होंगे।

साथियों, बीते चार वर्ष में स्‍वास्‍थ्‍य सुविधाओं के साथ-साथ मेडिकल एजुकेशन भी उसका भी अभुतपूर्व विस्‍तार किया गया है। इस दौरान 18 हजार से अधिक एमबीबीएस और 13 हजार से ज्‍यादा पोस्‍ट ग्रेजुएट सीटें बढ़ाई गई हैं। मध्‍यम वर्ग के बच्‍चे जो हेल्‍थ सेक्‍टर में कैरियर बनाना चाहते हैं, उनके लिए बहुत बड़ा अवसर पैदा हुआ है। यहां गुजरात में भी हजारों नई सीटें जोड़ी गई हैं। देश के हर तीन संसदीय क्षेत्र में कम से कम एक मेडिकल कॉलेज खोलने की योजना पर काम चल रहा है।

साथियों, स्‍वास्‍थ्‍य पर इतना जोर दिया जाने की वजह से निजी अस्‍पतालों के नेटवर्क का भी विस्‍तार हो रहा है। आयुषमान भारत जैसी योजना के कारण छोटे-छोटे कस्‍बों में भी जरूरत बढ़ रही है। लिहाजा नए अस्‍पताल भी तेजी से खुल रहे हैं।

नए अस्‍पताल खुल रहे हैं तो डॉक्‍टरों, नर्सों और दूसरे पैरामेडिकल स्‍टाफ की भी मांग बढ़ रही है। यानी युवाओं के लिए रोजगार के अनेक अवसर हेल्‍थ सेक्‍टर में आने वाले समय में बनने वाले हैं।

भाईयो और बहनों, जब रोजगार और युवाओं को अवसरों की बात आती है तो ... हाल में सरकार ने एक बहुत बड़ा फैसला लिया है। सामान्‍य श्रेणी के गरीब बच्‍चों को सरकारी सेवाओं के साथ-साथ, सरकारी और निजी शिक्षण संस्‍थानों में 10 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान संविधान में किया गया है।

मैं गुजरात सरकार को बधाई देता हूं कि आपने सबसे पहले इसको लागू किया है। अब तो केंद्र सरकार सहित अनेक राज्‍य सरकारों ने इसको लागू करने के आदेश जारी कर दिए हैं।

साथियों, जाति, वर्ग, संप्रदाय से ऊपर उठते हुए सामान्‍य वर्ग के गरीबों को आरक्षण की मांग तो.. दशकों से चल रही थी। लेकिन राजनीति की इच्‍छा शक्ति की कमी, चुनाव-चुनाव के दौरान, राजनीतिक दल ये तीर फेंक दिया करते थे। लेकिन संविधान संशोधन की प्रक्रिया होती थी, वो करने की हिम्‍मत इनमें नहीं थी, लेकिन केंद्र की एनडीए सरकार ने ये इच्‍छा शक्ति दिखाई, हमने करके दिखाया।

मैं फिर कह रहा हूं कि आरक्षण की व्‍यवस्‍था से, ये जो व्‍यवस्‍था हमने की है, ये बाकि किसी भी वर्गों के हक को छेड़े बिना की गई है। यानी इससे सामाजिक समरसता के नए द्वार खुलेगें, जो गिले-शिकवे पहले रहते थे वो इससे दूर होंगे।

साथियों, केंद्र सरकार ने ये फैसला भी किया है कि शिक्षण संस्‍था में इस नए आरक्षण का लाभ इसी साल नए सेशन से मिलेगा। देश की नौ सौ युनिवर्सिटी, और लगभग 40 हजार कॉलेजों पर ये आरक्षण लागू हो जाएगा।

इसमें Technical, Non-Technical, Management हर प्रकार की संस्‍थाओं में ये व्‍यवस्‍था लागू हो जाएगी। इसके लिए जल्‍द ही जरूरी आदेश जारी हो जाएगा। इतना ही नहीं, नई व्‍यवस्‍था का मौजूदा स्थितियों पर असर न पड़े इसके लिए संस्‍थानों में सीटों की संख्‍या भी 10 प्रतिशत बढ़ाई जाएगी।

भाईयो और बहनों हमारी सरकार देश में अवसरों की समानता के प्रति प्रतिबद्ध है। नए भारत की शक्ति हमारी युवा शक्ति है, युवा शक्ति अपनी ऊर्जा का सही उपयोग तभी कर पाएगा जब उसको उपयुक्‍त अवसर मिलेंगे। अवसरों में भेद-भाव से प्रतिभा पर असर पड़े, ये बातें पुरानी कर दी हैं। समानता के लिए बीजेपी का समर्पण हमारे संस्‍कारों से, हमारी संगत से जुड़ा है। हमें पता है कि गरीब का संघर्ष क्‍या होता है। और इसलिए हम पूरी निष्‍ठा के साथ समाज के हर क्षेत्र में समान अवसरों के लिए प्रतिबद्ध है। 

 

भाईयो और बहनों, अवसरों के अभाव में कोई पीछे न रहे, मध्‍यम वर्ग हो या गरीब, शहर हो या गांव, देश का कोई वर्ग, कोई भी कोना विकास से न छूटे, इसके लिए सरकार लगातार काम कर रही है। यही सबका साथ-सबका विकास है। और यही न्‍यू इंडिया के निर्माण के लिए हमारा रास्‍ता है। हम सभी को मिलकर इस रास्‍ते पर पूरी रफ्तार से चलना है। इसी आग्रह के साथ मैं एक बार फिर आप सबको इस नई स्‍वास्‍थ्‍य सेवाओं के लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूं लेकिन अस्‍पताल के उद्घाटन में ये तो नहीं कह सकते कि अस्‍पताल भरा रहे। मैं तो चाहूंगा कि ऐसी स्थिति न आए, किसी को अस्पताल आना ही न पड़े लेकिन अगर आना पड़े तो पहले जब आए थे, पहले थे उससे ज्‍यादा अच्‍छे बनकर के जाएं, ये मेरी आप सबको शुभकामना है। बहुत-बहुत धन्‍यवाद, फिर से एक बार Ahmadabad Municipal corporation को उनके इस सफल प्रयास के लिए अनेक-अनेक साधुवाद देता हूं। धन्‍यवाद।

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