Shri Narendra Modi addresses SME Convention of Vibrant Gujarat 2013

Published By : Admin | January 12, 2013 | 15:21 IST
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मंच पर उपस्थित सभी महानुभाव और स्मॉल और मीडियम उद्योग जगत के सभी साहसिक भाईयों और बहनों..! जिन लोगों ने कल का समारोह देखा होगा, वे अगर आज के इस समारोह को देखेंगे तो वे अनुमान लगा सकते हैं कि गुजरात किस रेंज में काम कर रहा है। जितना बड़े उद्योगों का महात्म्य है, उससे भी ज्यादा छोटे उद्योगों का महात्म्य है। और आज पूरा दिन इस समिट में छोटे उद्योगों के विकास के लिए हम सब मिल कर के क्या कर सकते हैं, छोटे उद्योगों के द्वारा प्रोडक्ट की हुई चीजों को मार्केट कैसे मिले, छोटे उद्योग भी विश्व व्यापार में अपनी जगह कैसे बनाएं, छोटे उद्योगों का भी एक ब्रांड इमेज कैसे बने... ये सारे विषय ऐसे हैं कि जिसको अगर हम मिल बैठ कर सोचें तो एक बहुत बड़ा परिवर्तन ला सकते हैं। किसी एक जिले में एकाध छोटे उद्योगकार के लिए एकदम नई टैक्नोलॉजी को लाना उसके बूते से बाहर होता है, उसके लिए कठिनाई होती है। लेकिन बदलती हुई टैक्नोलॉजी के संबंध में हम लगातार हमारे उद्योग जगत के मित्रों को जोड़ते रहें, उनको अवसर दें, चाहे एक्जीबिशन हो, फेयर्स हो, सेमीनार्स हो, तो एक साथ 12-15 लोग आगे आएंगे और कहेंगे कि हाँ भाई, हम इस टैक्नोलॉजी को हायर करना चाहते हैं। और जब सब प्रकार की कोशिश करने के बाद सफलता मिलती है, सब लोग जुड़ते हैं तो अपने आप किसी भी उद्योगकार के लिए निर्णय करने में कठिनाई नहीं होती। इस प्रकार की समिट के माध्यम से हम हमारे गुजरात के छोटी-छोटी तहसील में बैठे हुए जो छोटे-छोटे उद्योगकार हैं, एकाध छोटा मशीन है, खुद मेहनत करते हैं, कुछ ना कुछ कर रहे हैं... लेकिन उनका भी इरादा तो है आगे बढ़ने का। वे भी चाहते हैं कि नई ऊंचाइयों को पार करना है, लेकिन उनको कभी-कभी रास्ता नहीं सूझता है। कभी कान पर कोई जानकारी पड़ती है लेकिन रास्ता पता नहीं होने के कारण, सोर्स पता नहीं होने के कारण, किन लोगों के माध्यम से करें उसका रास्ता पता नहीं होने के कारण वो अपनी जिदंगी उसी में पूरी कर देता है। पिताजी का एक कारखाना छोटा-मोटा चल रहा है, बच्चे बड़े हो रहे हैं, बच्चों को लगता है कि कुछ करें, लेकिन पिताजी को लगता है कि नहीं भाई, इतने साल से मैं चला रहा हूँ, ऐसा साहस करोगे तो कहीं डूब ना जाएं, अभी जरा ठहरो..! कभी माँ-बाप भी जो नई पीढ़ी प्रवेश करती है अपने पारिवारिक व्यवसाय में, तो उससे भी वो कभी-कभी चिंतित हो जाते हैं कि क्या करें..! इस प्रकार के समारोह से दोनों पीढ़ी की सोच को बदलने के लिए हम एक कैटलिक एजेंट के रूप में काम कर रहे हैं। जो पुरानी पीढ़ी के लोग हैं, जो पुरानी परंपरा से अपना काम करना चाहते हैं, पुरानी टैक्नोलॉजी का उपयोग कर के काम करना चाहते हैं, बहुत ही प्रोटेक्टिव एन्वायरमेंट में काम करना चाहते हैं और नई पीढ़ी है जो बहुत ज्यादा एग्रेसिव है, साहस करना चाहती है, नई टैक्नोलॉजी को एडाप्ट करना चाहती है और कुछ भी आने से पहले घर में ही तनाव रहता है। बेटा बाप को समझा नहीं पा रहा है, बाप बेटे को स्वीकार करने को तैयार नहीं होता है और सालों तक ऐसे ही चलता है। यहाँ कई लोग बैठे होंगे जिनको इस प्रकार का अनुभव होता होगा..! लेकिन जब ये दोनों पीढ़ी इस प्रकार के अवसर पर आती हैं तब और ‘सीइंग इज़ बिलीविंग’, जब वो इन चीजों को निकट से देखते हैं तो उनका हौंसला बुलंद हो जाता है और पल भर में वो निर्णय करते हैं कि हाँ बेटे, तुम जो कहते थे वो ठीक है, मुझे भरोसा नहीं था लेकिन मैंने देखा तो मुझे लगता है कि हाँ यार, हम कर सकते हैं..! तो मित्रों, हमें हमारे इस लघु उद्योग क्षेत्र को टैक्नोलॉजी की दृष्टि से अपग्रेड करना है। हम चाहते हैं कि जगत में जो बदलाव आया है उस बदलाव को हम कैसे एडाप्ट करें, अपने मन को कैसे बदलें, उस टैक्नोलॉजी के लिए गवर्नमेंट किस प्रकार से सपोर्ट करे, किस प्रकार की व्यवस्थाओं को विकसित करने से हम अच्छी स्थिति में बदल सकते हैं।

भी-कभी कुछ प्रोडक्ट ऐसे होते हैं जो समाज के लिए बहुत उपयोगी होते हैं। हेल्थ केयर सेक्टर का कोई प्रोडक्ट होगा, एज्यूकेशन सेक्टर का कोई प्रोडक्ट होगा, इवन सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के लिए कोई छोटा सा मशीन बनाता होगा। एकाध व्यक्ति के लिए मुश्किल होता है, वो करता भी है कभी-कभी तो क्या करता है? अगर मान लीजिए साल में वो छह मशीन बनाता है, तो फिर वो आठ-दस ग्राहकों से ज्यादा जगह में पहुंचता नहीं है। उसको लगता है इस आठ-दस क्लाइंट को पकड़ लिया, कस्टमर को पकड़ लिया, काम हो गया। उसकी तो रोजी-रोटी चलती है, लेकिन उसकी वो टैक्नोलॉजी जो सर्वाधिक लोगों को काम आ सकती है वो हर साल आठ या दस जगह पर ही पहुंचती है। उसके पास इतनी बड़ी विरासत है, उसके पास एक एसेट है, उसने एक प्रोडक्ट किया है, अगर वो ऐसे स्थान पर आता है जहां वो प्रोडक्ट बाहर आती है दुनिया के सामने, तो सबको लगता है कि यार, इसका प्रोडक्शन बढ़ाने की जरूरत है, इसका जरा मार्केटिंग करने की जरूरत है। साल में आठ लोग क्यों, अस्सी जगह पर क्यों नहीं पहुंचनी चाहिए..? तो मित्रों, उसके कारण एक उपयोगिता का भी माहौल बनता है। हर किसी को लगता है कि हाँ, अगर ये व्यवस्था विकसित होती है तो ये इस नगरपालिका को काम आ सकती है, पंचायत को काम आ सकती है, सरकारी दफ्तर में काम आ सकती है, कॉर्पोरेट हाऊस में काम आ सकती है..! और इसलिए मित्रों, इस प्रकार के प्रयासों से हम समाजोपयोगी जो प्रोडक्टस हैं, जो व्यवस्थाओं में बदलाव लाने का एक आधार बनती है, उन प्रोडक्ट्स को शो-केस करना चाहते हैं। हम चाहते हैं कि सब लोग इन चीजों को देखें। अब ये बात सही है कि एक छोटे से गाँव में बैठे उद्योगकार के लिए ये सब करना मुश्किल होता है क्योंकि बेचारा खुद ही जा करके लेथ पर बैठ कर के काम करता है, वो मार्केटिंग करने कहाँ जाएगा। उसके लिए वो संभव ही नहीं है, तो फिर हमें ही कोई ऐसा मैकेनिज्म डेवलप करना चाहिए। जैसे हमने कुछ उद्योगकार मित्रों को अभी सम्मानित किया। ये वो लोग हैं जिन्होंने छोटे-छोटे उद्योगों में रहते हुए भी कुछ ना कुछ नया इनोवेशन किया है, कुछ नया अचीव किया है, कुछ वर्क कल्चर में बदलाव लाए हैं, प्रोडक्टिविटी में बदलाव लाए हैं, क्वालिटी ऑफ प्रोडक्शन में बदलाव लाए हैं..! अब इन लोगों को जब ये सब लोग देखते हैं तो इनको लगता है कि अच्छा भाई, हमारे जिले में इस व्यक्ति ने ऐसा काम किया है..? तो देखेंगे, पूछेंगे कि बताओ तुमने क्या किया था। तो उसको भी लगेगा कि हाँ यार, मैं भी अपनी फैक्ट्री में कर सकता हूँ, मैं भी मेरे यहाँ लगा सकता हूँ..!

मित्रों, एक बात सही है कि हमें अधिकतम रोजगार देने की क्षमता इन लघु उद्योगकारों के हाथों में है, आप लोगों के हाथों में है। और हम उस प्रकार की अर्थ व्यवस्था चाहते हैं जिसमें अधिकतम लोगों को लाभ हो। मास प्रोडक्शन हो, वो इकोनॉमी के लिए जरूरी भी है, लेकिन साथ-साथ प्रोडक्शन बाय मासिस भी होना चाहिए। मास प्रोडक्शन हो, लेकिन एक लिमिटेड मशीन के द्वारा सारी दुनिया चल जाती है तो हम जॉब क्रियेट नहीं कर सकते। स्मॉल स्केल इन्डस्ट्रीज के नेटवर्क के माध्यम से प्रोडक्शन बाय मासिस होता है। और जब प्रोडक्शन बाय मासिस होता है, तो लाखों हाथ लगते हैं, तो लाखों लोगों का पेट भी भरता है और इसलिए स्मॉल स्केल इन्डस्ट्रीज अधिकतम लोगों को रोजगार देने का एक अवसर है। अब अधिकतम लोगों को रोजगार देने में भी कभी-कभी ये दिक्कत आती है कि फैक्ट्री में उत्पादन तो बढ़ रहा है, लेकिन कभी किसी नौजवान को रख लेते हैं तो छह महीने तो उसे सिखाने में चले जाते हैं। ये कोई कम इन्वेस्टमेंट नहीं होता है। और उसके बावजूद भी भरोसा नहीं रहता है कि भाई, इस लड़के को मैं लाया हूँ, छह महीने मैंने इसे सिखाया है, उसको काम में लगाया है, लेकिन पता नहीं मेरी गैरहाजिरी में वो जो चीज़ बनाएगा वो बाजार में चलेगी की नहीं चलेगी, उसके मन में टेंशन रहता है। लेकिन अगर उसको स्किल्ड मैन पावर मिले, हर प्रकार से आधुनिक विज्ञान और ज्ञान तथा टैक्नोलॉजी से परिचित नौजवान मिलेगा तो उसका हौंसला बुलंद हो जाता है। उसको लगता है कि मैं जिस पद्घति से काम करता था उसमें तो मेरे दो घंटे ज्यादा जाते थे, ये स्किल्ड लेबर मुझे मिला है, नौजवान ऐसा है, थोड़ा इस विषय को जानता है तो मित्रों, हमारी प्रोडक्शन कॉस्ट भी कम होगी, क्वालिटी इम्प्रूव होगी और उस फील्ड में सालों से काम करने वाला जो उद्योगपति है, जो बिजनस मैन है उसको भी भरोसा हो जाएगा कि यस, स्किल्ड मैनपावर के नेटवर्क के द्वारा, उनकी मदद के द्वारा मैं ऊंची क्वालिटी की चीजें बाजार में ले जा सकता हूँ। और इसलिए मित्रों, जितना समयानुकूल टैक्नोलॉजी अपग्रेडेशन आवश्यक है, जितना हमारी सोच में बदलाव आवश्यक है, उतना ही हमारे लिए स्किल डेवलपमेंट पर बल देना आवश्यक है। और स्किल्ड मैन पावर को तैयार करने के लिए हम टेलर मेड सॉल्यूशन नहीं निकाल सकते। हम लोगों को नीड बेस्ड स्किल डेवलपमेंट करना पड़ेगा। जहां जिस प्रकार की स्किल की आवश्यकता है, उस स्किल को हम प्रोवाइड कर सकते हैं क्या? हम हमारे कोर्सेस को भी उस कंपनी को या उस उद्योग को जिस प्रकार के मैन पावर की आवश्यकता है उस प्रकार के सिलेबस से हम तैयार कर सकते हैं क्या? गुजरात ने उस दिशा में एक प्रयास किया है।

स प्रकार के मिलन के माध्यम से हम ये भी आईडेन्टीफाई करना चाहते हैं कि अगर मान लीजिए गुजरात में लाखों छोटे उद्योग हैं और गुजरात के उद्योगों की बैकबोन स्मॉल स्केल इन्डस्ट्रीज हैं। लोग कितना ही भ्रम क्यों ना फैलाएं, लेकिन सच्चाई जो यहाँ बैठी है वो है। लेकिन कुछ लोगों ने झूठ फैला के रखा है गुजरात के बारे में और लगातार झूठ फैलाने में उनको आनंद भी आता है। और जनता उनको जरा ठीक-ठाक भी करती रहती है। लेकिन उनकी आदत सुधरने की संभावना नहीं है, उन से कोई भरोसा नहीं कर सकते हम, क्योंकि उनके वेस्टेड इन्टरेस्ट है। मित्रों, हमें गुजरात के अंदर स्मॉल स्केल इन्डस्ट्रीज के नेटवर्क को बल देना है, इतना ही नहीं, हम स्मॉल स्केल इन्डस्ट्रीज को भी क्लस्टर के रूप में डेवलप करना चाहते हैं। अब देखिए, यहां साणंद से लेकर बहुचराजी तक पूरा ऑटोमोबाइल का एक क्लस्टर बना रहा है। अब ये ऑटोमोबाइल का क्लस्टर बन रहा है, तो कोई एक बड़ा कारखाना बनने से मोटर बनती नहीं है। एक मोटर तब बनती है जब पाँच सौ-सात सौ छोटे-छोटे उद्योगकार छोटे-छोटे स्पेयर पार्ट्स बना कर के उसको सप्लाई करते हैं, तब जा करके एक कार बनती है। किसी का इस पर ध्यान ही नहीं जाता है, उनको तो मारूति दिखती है या फोर्ड दिखती है या नैनो दिखती है। लेकिन ये फोर्ड हो, मारूति हो या नैनो हो, जब तक ये लोग काम नहीं करते तब तक बन नहीं पाती है। और उसके नेटवर्किंग के लिए आवश्यकता क्या होती है कि जहां पर जिस इन्डस्ट्री का क्लस्टर हो, वहीं पर सराउन्डिंग में अगर हम उस प्रकार के छोटे-छोटे उद्योगों का एक पूरा जाल बिछा दें और फिर मान लो कि ऑटो कम्पोनेंट बनाने वाले अगर लोग हैं, तो वहीं पर उस प्रकार की हमारी आई.टी.आई. जो होंगी, उन आई.टी.आई. के कोर्सेज भी वही होंगे जो वहीं के बच्चों को वहीं के उद्योगों में रोजगार दिला सकें, यानि एक इन्टीग्रेटिड अप्रोच होगा। अब मान लीजिए, वापी में कोई टैक्सटाइल इन्डस्ट्री है और पालनपुर में आई.टी.आई. में टैक्सटाइल का कोर्स चल रहा है। मुझे बताइए, क्या पालनपुर का लड़का वापी के अंदर टैक्सटाइल के कारखाने में नौकरी करने के लिए जाएगा..? अपने माँ-बाप को छोड़ कर जाएगा क्या..? वहाँ पर मकान किराए पर लेकर रहेगा क्या..? नहीं रहेगा..! लेकिन वापी में अगर टैक्सटाइल इन्डस्ट्री है और मैं वापी में ही टैक्सटाइल इन्डस्ट्री के लिए रिक्वायर्ड स्किल डेवलपमेंट के काम को करता हूँ, तो वहां के नौजवानों को रोजगार मिल जाता है, वहां की कंपनी को मैन पावर मिल जाता है और वहां से ज्यादातर लोगों का नौकरी छोड़ कर भाग जाने का कारण भी नहीं बनता है। वरना कभी-कभी क्या होता है, किसी उद्योगकार को चिंता यही रहती है और बड़ा ऑर्डर लेता नहीं है। ऑर्डर क्यों नहीं लेता है..? उसको लगता है कि यार बाकी तो सब ठीक है लेकिन ये नौकरी छोड़ कर चला जाएगा तो मैं आर्डर कैसे पूरा करूंगा, मेरे पास आदमी तो हैं नहीं..! यानि एक प्रकार से वो अपने साथ काम करने वाला जो व्यक्ति है उस पर डिपेन्डेट हो जाता है, लेकिन अगर ऐसा क्लस्टर है और क्लस्टर के अंदर उसी इलाके के नौजवानों को उसी काम के लिए अगर ट्रेन किया गया है तो यदि एक छोड़ कर जाएगा तो दूसरा मिल जाएगा, लेकिन उन उद्योगों को मैन पावर की कभी कमी नहीं पड़ेगी और मैन पावर का भी एक्सप्लॉइटेशन नहीं होगा।

मित्रों, गुजरात में औद्योगिक जगत से जुड़े हुए आप सब मित्रों का एक बात के लिए मैं अभिनंदन करता हूँ कि आज गुजरात में जो ज़ीरो मैन्डेस लॉस है, पीसफुल लेबर है, उसका मूल कारण यह है कि हमारे यहां औद्योगिक जीवन में एक परिवार भाव है। अपनी कंपनी में काम करने वाला लड़का भी परिवार का हिस्सा हो जाता है, एक अपनापन का भाव होता है और उसके कारण कभी मालिक और नौकर का हमारे यहां माहौल नहीं बनता है। हम जितनी मात्रा में ये मालिक और नौकर वाले हिस्से से बचे हैं, उतना हमारा औद्योगिक विकास हुआ है। और हिन्दुस्तान के बहुत से राज्य ऐसे हैं, हिन्दुस्तान के बहुत से छोटे उद्योगकार ऐसे हैं जिनको गुजरात की इस क्वालिटी का बहुत कम पता है। हमारे यहाँ आठ घंटे की नौकरी होगी तो भी वो मजदूर नौ घंटे तक काम क्यों करेगा..? उसको लगता है कि नहीं-नहीं, ये तो मेरी कंपनी की इज्जत का सवाल है, ये माल तो मुझे सात तारिख को देना है, मैं काम करके रहूँगा..! सेठ चाहे या ना चाहे, उद्योगकार की इच्छा हो या ना हो, लेकिन वो लेबर उसको रात तक भी काम करके उसको दे देता है। मित्रों, ये माहौल जो हमारे यहाँ बना है, इसका मतलब यह हुआ कि जिस प्रकार से प्रोडक्ट की वैल्यू हमने बढ़ाई है, उसी प्रकार से उस प्रोडक्ट के पीछे जिन हाथों से काम होता है, उन हाथों की इज्जत हम जितनी बढ़ाते हैं, उतनी ही हमारे व्यवसाय में गारंटी बढ़ती है, क्वालिटी में गारंटी बढ़ती है और हमारे परिणाम में बढोतरी हो जाती है। और इसलिए मित्रों, हमें जितनी छोटे उद्योगों की केयर करनी है, उतनी ही हमारे साथ काम करने वाले हमारे लेबरर्स की चिंता करनी है। हम कभी उनका एक्सप्लॉइटेशन नहीं करेंगे, ये जिन-जिन लोगों ने ठानी और मैंने देखा है कि अगर उसको पाँच रूपये का काम मिलता है तो वो आपको पच्चीस रूपये का काम करके देता है। कभी कोई घाटे में नहीं जाता है। अपने साथियों को संभालने के कारण घाटे में गई हो, ऐसी कोई कंपनी नहीं होगी। लेकिन जो अपनी ही टीम के लोगों के साथ इस प्रकार का काम नहीं करते हैं, तो वो घाटे में जाती है।

सी प्रकार से मित्रों, सरकार भी नहीं चाहती है कि फैक्ट्रियों में जा करके नई-नई परेशानियाँ पैदा करे। पहले तो ऐसे-ऐसे कानून हुआ करते थे, जैसे एक बॉयलर इन्सपेक्शन का रहता था। अब जिन कंपनियों को बॉयलर की जरूरत होती थी वो सरकार को लिखते थे कि फलानी तारिख को हमारा इन्सपेक्शन हो जाना जरूरी है, वरना मुझे अपना बॉयलर ऑपरेशन बंद करना पड़ेगा। अब वो बॉयलर इन्सपेक्शन करने वाला जो होता है, उसके पास लोड बहुत होता है और वो डेट देता नहीं है। उसको टेंशन रहता है और क्या-क्या परेशानियाँ होती है वो सब जानते हैं..! मैंने एक छोटा कानून बना दिया। मैंने कहा भाई, जो फैक्ट्री चलाता है, वो मरना चाहता है क्या? वो अपना बॉयलर फट जाए ऐसी इच्छा करता है क्या? उसको अपने बॉयलर की चिंता नहीं होती होगी क्या? तो हमने कहा कि आप ऐसा काम करो कि उसके ऊपर जिम्मेदारी डालो और उस कंपनी को बोलो कि वो आउट सोर्स करके, जो भी इसके लाइसेंसी लोग हैं, उनसे बॉयलर इन्सपेक्शन करवा लें और कागज सरकार को भेज दें। मित्रों, इतना सरल हो गया..! अच्छा, उसके उपर जिम्मेवारी आ गई और उसके ऊपर जिम्मेवारी आ जाने के कारण वो सरकार जितना करे उससे ज्यादा करने लगा। उसको लगा कि हाँ यार, मेरा बॉलयर अगर कुछ खराब हो गया तो मेरी फैक्ट्री में आग लग जाएगी और मेरे पचास लोग मर जाएंगे। जिम्मेवारी खुद उसके उपर आ गई। मित्रों, ऐसे बहुत से छोटे-मोटे कानूनी बदलाव है। अगर आप में से उस प्रकार के सुझाव आएंगे, जिसके कारण सिम्पलीफिकेशन हो, सरकार आ कर के कम से कम परेशानियाँ पैदा करे... और मित्रों, ये जो मैं बोल रहा हूँ ना, ये मुझे करना है और मैं लगातार करता आया हूँ, काफी कुछ मैंने कर भी लिया है। लेकिन फिर भी कहीं कुछ कोने में रह गया हो तो मुझे उसको ठीक करना है और उसमें मुझे आप लोगों की मदद चाहिए। ये सरकार ऐसी नहीं है कि सब आपके भरोसे छोड़ दे और आप को कह दे कि भाई, जो होगा वो होगा, तुम जानो, तुम्हारा काम जाने, मरो-जीओ तुम्हारी मरजी... नहीं, ये हमारा काम है कि आप प्रगति करो, ये हमारा काम है कि आपकी कठिनाइयाँ दूर हों, ये हमारा काम है कि हम सब मिल कर के आगे बढ़ें..! मित्रों, आज गुजरात में इन्डस्ट्री ग्रो कर रही है उसका कारण यही है कि हमने एक ऐसा इन्वायरमेंट क्रियेट किया है और उस इन्वायरमेंट का लाभ हर किसी को मिले उस दिशा में हम प्रयास कर रहे हैं।

मित्रों, अभी मैं कुछ दिन पहले सूरत में ‘स्पार्कल’ कार्यक्रम में गया था, जेम्स एंड ज्वेलरी का कार्यक्रम था। वहां पर भारत सरकार के भी लघु उद्योग विभाग को देखने वाले एक अधिकारी आए थे। उन्होंने जो भाषण किया वहां, वो जानकारी मेरे लिए भी बहुत आनंद की थी। वही जानकारी मुझे मेरे सरकार के अधिकारियों ने दी होती तो मैं उनको दस सवाल पूछता। मैं उनको कहता कि नहीं यार, ये बात मेरे गले नहीं उतर रही है, ये कैसे हो सकता है..? मेरे मन में सवाल उठते। लेकिन क्योंकि भारत सरकार के अधिकारी ने कहा है तो मुझे मालूम था कि वो सात जगह पर पूछ कर के आया होगा और बिना वेरीफाई किये कुछ नहीं कहेगा। और मित्रों, उन्होंने जो जानकारी दी, वो जानकारी सचमुच में हम सभी लघु उद्योग से जुड़े मित्रों के लिए एक बहुत ही आनंद और प्रोत्साहन का विषय है। उन्होंने कहा कि पूरे हिन्दुस्तान में स्मॉल स्केल इन्डस्ट्रीज़ का जो ग्रोथ है, वो 19% है और गुजरात ऐसा राज्य है जिसकी स्मॉल स्केल इन्डस्ट्रीज़ का ग्रोथ 85% है। आप विचार किजीए मित्रों, इसका मतलब कि भारत सरकार का एक जो रिपोर्ट आया है, वो रिपोर्ट ये कहता है कि गुजरात एक ऐसा राज्य है जहां मिनीमम बेरोजगार लोग हैं। बेकारों की संख्या पूरे हिन्दुस्तान में कम से कम कहीं है, तो गुजरात में है। मैं पॉलिटिकली जो बेकार हो गए हैं उनकी बात नहीं कर रहा हूँ, वो तो बेचारे पंद्रह साल से बेरोजगार हैं। मिनीमम बेरोजगार कहीं किसी राज्य में है तो वो गुजरात में हैं। भारत सरकार का दूसरा एक रिपोर्ट कहता है कि पूरे हिन्दुस्तान में पिछले पांच सात साल में जो रोजगार दिए गए हैं, उसमें 72% रोजगार अकेले गुजरात ने दिए हैं। अब इन तीनों चीजों को मिला कर देखें कि देश का ग्रोथ 19% और हमारा 85%, दूसरा रिपोर्ट कहता है कि मिनीमम बेरोजगार लोग, तीसरा रिपोर्ट कहता है कि 72% एम्लायमेंट हम देते हैं, ये तीनों को जोड़ के जब हम देखते हैं तो साफ नजर आता है कि हमारे स्मॉल स्केल इन्डस्ट्रीज के ग्रोथ ने देश के नौजवानों की कितनी बड़ी सेवा की है। रोजगार देने के लिए एक क्षेत्र कितना बड़ा उपकारक हुआ है, कितना बड़ा लाभ हुआ है। और ये तीनो चीजें, सारे फिगर भारत सरकार के हैं।

मित्रों, इससे स्पष्ट होता है कि हमारा ये जो स्मॉल स्केल इन्डस्ट्रीज पर बल देने का प्रयास है उसमें हम कुछ और कदम आगे बढ़ना चाहते हैं, भाईयों। और आप सब लोग शायद नहीं कर पाओगे, लेकिन मित्रों, निर्णय तो करना ही पड़ेगा..! एक है, सारी दुनिया से आया माल अब डंप हो रहा है, उसके सामने हमें टिकना है। मैं 1999-2000 की बात करता हूँ, तब तो मैं मुख्यमंत्री नहीं था लेकिन मुझे याद है, 12-15 साल पहले की बात है। मैंने उनसे कहा था कि भाई, आपकी चिंता तो सही है लेकिन इसका तो उपाय यही है कि हम चीन से अच्छे जूतें दें और चीन से सस्ते जूतें दें। अगर हम इन बातों पर बल देंगे तो कोई हमारा मुकाबला नहीं कर सकता। और हमने जब कहा कि अच्छे जूतें दें तो उसका मतलब जूतें टिकाऊ होने चाहिए, सिर्फ दिखने में अच्छे नहीं। और मैंने कहा, मेरा विश्वास है कि अगर आप टिकाऊ चीजों पर बल दोगे तो हिन्दुस्तान के ग्राहक का जो मानस है वो टिकाऊ चीजें पंसद करता है और फिर दुनिया की कोई ताकत ऐसी नहीं है कि वो उसका माल यहाँ बेच जाए। मित्रों, ये छोटा सा एक सिद्धांत है, क्या हम जिन चीज़ों का प्रोडक्शन करते हैं उसको दुनिया से जो माल हिन्दुस्तान की तरफ आ रहा है उसके सामने टिकने के लिए क्या वो टिकाउ है या नहीं, इस पर हमें गंभीरता से सोचना पड़ेगा और तभी हम इस ग्लोबल मार्केट में और इस कन्जूमरिज़म के जमाने में हम टिक पाते हैं, अदर्वाइज़ हम टिक नहीं पा सकते, मित्रों। कभी तो हमें कम मुनाफा ले कर भी टिकाउ चीज़ों पर बल देना ही पड़ेगा, ऐट द सैम टाइम, मार्केट का एक दूसरा नेचर बना है, आपने कई लोग देखे होंगे, 20 साल की उम्र में जिस प्रकार का जूता पहेनते थे, वो 75 साल के हो गए तो भी वो बदलते नहीं है। वे वो ही मोची को खोजेंगे, उसी से बनावाएंगे, ऐसा रहता था। लेकिन आज की पीढ़ी में..? आज की पीढ़ी का स्वभाव बदला है। उसको लगातार नई डिजाइन चाहिए, नया कलर चाहिए... इसका मतलब हुआ कि हमारे यहाँ लगातार रिसर्च होना चाहिए। भले ही हम स्मॉल स्केल इन्डस्ट्रीज वाले क्यों ना हो, अगर हम मार्केट में नई चीज नहीं देंगे, तब तक हम ये दुनिया से जो मार्केट का हमला हो रहा है उसके सामने टिक नहीं सकते हैं और इसलिए हमें लगातार डिजाइनिंग हो, क्वालिटी रिसर्च हो, काम्पोनेंट रिसर्च हो, इन सारे विषयों पर बल देना पड़ेगा, क्योंकि हमें टिकना है। वरना बताइए मित्रों, जो लोग होली में पिचकारी बना कर बेचते थे, वो बेचारा साल भर पिचकारी बनाता था और होली के समय माल बेचता था और रोजी-रोटी कमाता था। उसने सब बना कर रखा है और मानो चाइना से पिचकारी आकर डम्प हो गई तो उसकी बेचारे की पिचकारी कौन खरीदेगा..! उसे चिंता रहती है। लेकिन अगर हमारी चीजें टिकाऊ हैं मित्रों, तो मैं मानता हूँ कि हम किसी भी हमले को पार कर सकते हैं।

दूसरी बात है मित्रों, कि हमें डिफेंसिव ही रहना है क्या..? कैसे भी करके अपनी रोजी-रोटी कमा लो, अपने धंधे को बचा लो यार, चला लो। बच्चे बड़े होंगे तो वे देख लेंगे, हम तो हमारा गुजरा कर लें..! ये ज्यादातर हमें सुनने को मिलता है। मैं मानता हूँ कि हमें मनोवैज्ञानिक रूप से एक बहुत बड़े परिवर्तन की आवश्यकता है। हमारे उद्योग जगत के मित्रों को डिफेंसिव नहीं होना चाहिए। क्यों ना हम ये सपना देखें कि मैं जो प्रोडक्ट बना रहा हूँ, मैं दुनिया के बाजार में जाकर के, सीना तान करके बेच कर आऊंगा। हम ही क्यों ना एग्रेसिव हो..? हम पूरे विश्व के बाजार पर कब्ज़ा करने की कोशिश क्यों ना करें..? मित्रों, इस समिट के माध्यम से हम जिस तरह दुनिया की टैक्नोलॉजी लाने के लिए उत्सुक हैं, वैसे दुनिया से बाजार खोजने में भी उत्सुक हैं। विश्व में हम अपना माल कहाँ-कहाँ बेच सकते हैं कहाँ-कहाँ पहुंचा सकते हैं, कहाँ-कहाँ मार्केट की संभावना है, वहाँ की इकॉनोमी के अनुकूल हमारी प्रोडक्ट हम कैसे पहुंचा सकते हैं... अगर इन चीजों पर हमने बल दिया तो मित्रों, हमें कभी भी किस देश का कौन सा माल यहाँ आकर टपक पड़ने वाला है, किसके यहाँ से कितना डंप होने वाला है, ऐसी कोई बात हमारी चिंता का कारण नहीं बनेगी। हम यदि एग्रेसिव होते हैं, ऑफेन्सिव होते हैं, हम विश्व के बाजार पर कब्जा करने के लिए सोचते हैं... और मैं मानता हूँ मित्रों, गुजरात के लोग साहसिक हैं, ये कर सकते हैं। गुजरात के व्यापारियों में दम है, अगर उन्हें कहा जाए कि तुम गंजे को कंघा बेच कर आ जाओ तो वो बेच कर आ जाएगा। उसके अंदर वो एन्टरप्रोन्योशिप है, वो कर सकता है। अगर उसको कहा जाए कि तुम हिमालय के अंदर फ्रिज बेच के आ जाओ तो साहब, वो बेच के आ जाएगा। वो समझा देगा कि ग्लोबल वार्मिंग क्या है, हिमालय अब गर्म होने वाला है, तुम्हे फ्रिज की ऐसे जरूरत पड़ेगी..! मित्रों, जिसके अंदर ये एन्टरप्रन्योरशिप की क्वालिटी है, उसके मन में ये विचार क्यों नहीं आता है कि मैं दुनिया के बाजार पर कब्ज़ा करुँ..!

मित्रों, बदलते हुए युग में हमारी छोटी-मोटी इन्डस्ट्रीज को भी एकाध नौजवान को तो अपने यहां इन्फोर्मेशन टैक्नोलॉजी से जुड़ा रखना ही पड़ेगा। आज ऑनलाइन बिज़नेस इतनी बड़ी मात्रा में होता है, विश्व की रिक्वायरमेंट का पता चलता है। आप किसी को भले ही दो घंटे के लिए टेम्परेरी हायर करो। कुछ ऐसे आई.टी. के बच्चे भी हो सकते हैं कि दिन में छह कंपनीओं में दो-दो घंटे सेवा दे सकते हैं, जैसे एकाउन्टेंट होते थे पहले। आपके यहां एकाउन्टेंट कोई परमानेंट थोड़े ही रखते थे, हफ्ते में दो घंटे आता था और अपना अकाउंट का काम करके चला जाता था। तो इसी प्रकार से हमें एक नई विधा डेवलप करनी होगी। ये जो आई.टी. के क्षेत्र में जिन बच्चों एक्सपर्टीज़ हैं, ऐसे बच्चों की हफ्ते में दो-तीन घंटे सेवा लेना, उनको कहना कि भाई, दुनिया में देखो क्या-क्या हो रहा है, नई टैक्नोलॉजी क्या है, नई व्यापार की संभावनाएं क्या है, देखो और कॉरस्पोन्डैंस करो, अपना माल हम बेच सकते हैं क्या..? मित्रों, थोड़ा अगर आप सोचोगे तो आज जगत इतना छोटा हो गया है कि हम अपना मार्केट खोज सकते हैं और अगर प्रोडक्ट में दम है तो मित्रों, हम अपनी बात दुनिया में पहुंचा भी सकते हैं और माल भी पहुंचा सकते हैं और मुझे लगता है कि हमारे गुजरात के उद्योगकारों को उस दिशा में विचार करना चाहिए।

क और बात है, मित्रों। मैंने देखा है कि कई हमारे उद्योगकार जिन्होंने अपनी चीजों को विशेष रूप से बनाया है, लेकिन अब पुराने जमाने का हमारा स्वाभाव है और उसके कारण हम हमारे प्रोडक्ट का पेटेंट नहीं करवाते हैं। कोई छोटा भी कोई उद्योगकार क्यों ना हो, हमें पेटेंट करवाना चाहिए। मित्रों, इस बार मैं अब से एक काम करने वाला हूँ। सरकार के अंदर जो इन्डेक्स-बी जैसे जो हमारे डिपार्टमेंट हैं, अब के बाद हम डेडिकेटिड टू द स्मॉल स्केल इन्डस्ट्रीज, एक पूरा यूनिट सरकार के उद्योग विभाग में खोलने वाले हैं। पूरी एक सरकारी व्यवस्था डेडिकेटिड टू द स्मॉल स्केल इन्डस्ट्रीज़ होगी। वो लघु उद्योगो के लिए, छोटे उद्योगों के लिए, कॉटेज इन्डस्ट्रीज के लिए होगा और उनको इस प्रकार की कानूनी मदद कैसे मिले जैसे कि पेटेंट कैसे करवाना, पेटेंट कैसे रजिस्टर होगा, उसकी कंपनी का नाम होगा, ब्रांड होगा, प्रेासेस होगा, प्रोडक्ट होगा... इन सारी बातों में सरकार आपकी मदद करना चाहती है। आने वाले दिनों में उस इकाई को भी हम खड़ा करेंगे जिसके कारण छोटे-छोटे लोगों को भी मदद मिलेगी। वरना क्या होता है, आप एक चीज बना लीजिए, दूसरा उसको खोल कर के, सोचेगा कि हाँ यार, ये तो मैं भी कर सकता हूँ, तो वो भी अपने यहां शुरू कर देगा..! और उसके कारण जिसने मेहनत की हो उसको तो बेचारे को मुसीबत हो जाती है। तो हम चाहते हैं कि आपकी सिक्योरिटी के लिए भी व्यवस्था हो और हमारी सरकार की तरफ से हम आपकी मदद करना चाहते हैं ताकि आपके पास जो नॉलेज है, इनोवेशन है, उसका पेटेंट आपके पास रहे, वो आपकी अथॉरिटी बनी रहे, उस दिशा में हम काम कर रहे हैं।

र एक बात है मित्रों, हम सब लोग छुट-पुट अपनी चीजों के लिए दुनिया में अपनी जगह जल्दी बना नहीं सकते। हब सबको मालूम है कि आज से पाँच-दस साल पहले बाजार में हम पैन भी खरीदने जाते थे और अगर उस पर ‘मेड इन जापान’ लिखा है तो हम कभी पूछते नहीं थे कि जापान की किस कंपनी ने इस पेन को बनाया है, कभी नहीं पूछते थे..! उस पेन पर कंपनी का नाम भी नहीं लिखा होता था, लेकिन सिर्फ ‘मेड इन जापान’ लिखा है तो हम खरीद लेते थे, अपनी जेब में रखते थे और अपने दस दोस्तों को महीने भर बताते थे कि देखिए, ‘मेड इन जापान’ है..! ये था एक जमाना..! इसका मतलब ये हुआ कि उन्होंने अपना एक ब्रांड बना लिया, फिर सब कंपनियों का माल ‘मेड इन जापान’ लिख दिया तो बाजार में चल जाता था। मित्रों, हमारे लिए भी आवश्यक है कि हम हर कंपनी का ब्रांड बनाने जाएंगे तो शायद हमारी इतनी पहुंच भी नहीं होगी और इतनी ताकत भी नहीं होगी, लेकिन अगर हम ‘मेड इन गुजरात, इंडिया’ ये अगर माहौल बना दें..! मित्रों, ये बहुत आवश्यक है और इसलिए मेरा आग्रह है कि हम आज मिले हैं उस पर चर्चा करें, आपके छोटे-छोटे एसोसिएशन में भी इस पर चर्चा हो, लेकिन कभी ना कभी इस दिशा में सोचना होगा। लेकिन ये तब होगा, केवल उस पर लिख दिया ‘मेड इन गुजरात, इंडिया’ उससे काम नहीं होता है। हमें हमारी प्रोडक्ट की क्वालिटी के विषय में कोई कॉम्प्रोमाइज नहीं रहने देने के नॉर्म्स बनाने पड़ेंगे। जीरो डिफैक्ट, हम जो भी मैन्यूफक्चर करते हैं, जो भी प्रोडक्ट करते हैं, उसमें अगर जीरो डिफैक्ट होगा तब जाकर दुनिया में हम खड़े हो सकते हैं, हम जो प्रोडक्ट करते हैं वो कॉस्ट इफैक्टिव है तो दुनिया में जाकर हम खड़े हो सकते हैं, हम जो प्रोडक्ट करते हैं वो टिकाऊ है तो हम दुनिया में जा करके खड़े रह सकते हैं और इसलिए भाईयों-बहनों, हमें उस दिशा में काम करना होगा।

र एक मार्केटेबल चीज आज बाजार में है। आप अगर अपने प्रोडक्ट के साथ ये कहो कि ये एन्वायरमेंट फ्रेन्डली टैक्नोलॉजी से बनी है तो दुनिया का एक बहुत बड़ा वर्ग है जो उसको खरीदता है। आज भी जैसे खान-पान में एक बहुत बड़ा वर्ग तैयार हुआ है, उसको अगर ये कहो कि लीजिए खाइए, तो वो कहेगा कि नहीं-नहीं, अभी मैं खाना खा कर आया हूँ, अभी मेरा मन नहीं करता है। लेकिन उसको अगर आप धीरे से ये कहो कि नहीं-नहीं खाइए ना, ये आर्गेनिक है, तो वो तुरंत कहेगा, अच्छा आर्गेनिक है, लाइए-लाइए..! अब चीजें चल पड़ती हैं भइया, अब उसके पास कोई लेबोरेटरी तो है नहीं कि टेस्ट करेगा कि आर्गेनिक है कि नहीं है, लेकिन वो खाएगा कि आर्गेनिक है..! मित्रों, हमें झूठ नहीं करना है, सही करना है। एन्वायरमेंट फ्रेन्डली टैक्नोलॉजी, ये भी प्रोडक्ट के साथ-साथ बिकने वाली चीज बनने वाली है। दुनिया में हर चीज को देखिए, अच्छा ये एन्वायर फ्रेन्डली टैक्नोलॉजी है तो ठीक है..! और इसलिए मित्रों, दुनिया के मार्केट की जो सोच बदल रही है, कंज्यूमर की जो सोच बदल रही है, उन चीजों को भी हमारी स्मॉल स्केल इन्डस्ट्रीज ग्लोबल विजन के साथ तैयार करे ये मेरा सपना है। वो यहां धौलका-धंधुका में माल बेचे इसके लिए हम इतनी मेहनत नहीं कर रहे हैं, मित्रों। दुनिया के बाजार में छाती पर पैर रख के मेरे गुजरात का व्यापारी माल बेचे इसके लिए हम ये कोशिश कर रहे हैं। विश्व के बाजार में हमें अपना कदम रखना है इसके लिए हमारी कोशिश है। हिन्दुस्तान में तो है, हिन्दुस्तान में तो आपका माल बिकना ही बिकना है, आपकी अपनी एक प्रतिष्ठा है, लेकिन उस दिशा में हम प्रयास करें।

मित्रों, मैं चाहता हूँ कि पूरा दिन इस विषय पर चर्चा होने वाली है, बहुत ही एक्सपर्ट लोगों से हमें मदद मिलने वाली है और इस विधा को हम लगातार आगे बढ़ाना चाहते हैं और मेरा मकसद है मित्रों, नई टैक्नोलॉजी कैसे आए, नए इनोवेशंस कैसे हों, अधिकतम नौजवानों को रोजगार कैसे मिले, इसके लिए अनुकूल स्कूल डेवलपमेंट कैसे हो और हम विश्व के बाजार को अपना माल पहुंचाने के लिए किस प्रकार से एग्रेसिव, प्रो-एक्टिव हो कर के काम करें, हम डिफेंसिव ना हों, उस दिशा में आगे बढ़ें। मेरी आप सब को बहुत-बहुत शुभकामनाएं हैं, धन्यवाद..!

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হিমাচল প্রদেশের বিলাসপুরে বিবিধ উন্নয়নমূলক প্রকল্পের উদ্বোধন উপলক্ষে প্রধানমন্ত্রীর ভাষণ
October 05, 2022
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PM dedicates AIIMS Bilaspur to the nation
PM inaugurates Government Hydro Engineering College at Bandla
PM lays foundation stone of Medical Device Park at Nalagarh
PM lays foundation stone of project for four laning of National Highway worth over Rs 1690 crores
“Fortunate to have been a part of Himachal Pradesh's development journey”
“Our government definitely dedicates the project for which we lay the foundation stone”
“Himachal plays a crucial role in 'Rashtra Raksha', and now with the newly inaugurated AIIMS at Bilaspur, it will also play pivotal role in 'Jeevan Raksha'”
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“Happiness, convenience, respect and safety of women are the foremost priorities of the double engine government”
“Made in India 5G services have started, and the benefits will be available in Himachal very soon”

জয় মাতা নয়না দেবী, জয় বজিয়ে বাবা। 

বিলাসপুরে এসেছি, আমার জীবন ধন্য হয়ে গেছে। আজ শুভ দশহরা, এই পবিত্র উৎসব উপলক্ষে মা নয়না দেবীর আশীর্বাদ পাওয়া আর আপনাদের মতো ভক্তদের সঙ্গে সাক্ষাতের সৌভাগ্য আমার হয়েছে। আপনাদের সকলকে আমার ‘রাম রাম’। কনে এইমস্‌ – এর জন্য আপনাদের সকলকে অনেক অনেক শুভেচ্ছা। 

হিমাচল প্রদেশের রাজ্যপাল মাননীয় শ্রী আরলেকরজী, হিমাচল প্রদেশের জনপ্রিয় মুখ্যমন্ত্রী শ্রী জয়রাম ঠাকুরজী, ভারতীয় জনতা পার্টির জাতীয় সভাপতি, আমাদের সকলের পথপ্রদর্শক এবং এই ভূমির সন্তান শ্রী জে পি নাড্ডাজী আমার কেন্দ্রীয় মন্ত্রিসভার সহযোগী ও সাংসদ শ্রী অনুরাগ সিং ঠাকুরজী, হিমাচল প্রদেশ ভারতীয় জনতা পার্টির অধ্যক্ষ ও সংসদে আমার সঙ্গী শ্রী সুরেশ কশ্যপজী, সাংসদ কিষাণ কাপুরজী, ভগিনী ইন্দু গোস্বামীজী, ডঃ সিকান্দর কুমারজী, অন্য মন্ত্রী, সাংসদ ও বিধায়কগণ আর এখানে আমাদের সবাইকে আশীর্বাদ দেওয়ার জন্য বিপুল সংখ্যায় সমাগত আমার প্রিয় হিমাচল প্রদেশের ভাই ও বোনেরা! আপনাদের সকলকে দেশবাসীকে বিজয়া দশমী উপলক্ষে অনেক অনেক শুভেচ্ছা। 

এই পবিত্র উৎসব সমস্ত অশুভ শক্তির বিরুদ্ধে জয়, অমৃতকালের জন্য আমরা যে ৫টি সংকল্প দেশের জন্য নিয়েছি, সেই সংকল্পগুলি বাস্তবায়নের লক্ষ্যে নতুন প্রাণশক্তি সঞ্চার করবে। আমার সৌভাগ্য যে আজ এই বিজয়া দশমীর দিনে হিমাচল প্রদেশের জনগণের উদ্দেশে স্বাস্থ্য, শিক্ষা, কর্মসংস্থান ও পরিকাঠামো খাতে কয়েক হাজার কোটি টাকার প্রকল্পগুলি উপহার দেওয়ার সু্যোগ পেয়েছি। আর সুযোগ পেয়েছি, এই বিজয়া দশমীর দিনেই বিজয়ার রণসিঙ্গাতে ফু দেওয়া, যা ভবিষ্যতে সমস্ত বিজয়ের সম্ভাবনাকে সূচিত করছে। বিলাসপুর তো শিক্ষা ও স্বাস্থ্য পরিষেবার ‘ডবল গিফ্‌ট’ পেয়েছে। কহলু’তে বন্দলে ধারার উপরে হাইড্রো কলেজ আর নীচে কনে’তে এইমস্‌ হাসপাতাল - এই দুটি এখন থেকে এই এলাকার পরিচয় হয়ে উঠবে। 

ভাই ও বোনেরা, 

এখানে এই উন্নয়নমূলক প্রকল্পগুলি আপনাদের উদ্দেশে সমর্পণের পর, যেমন জয়রামজী একটু আগেই বললেন, আমরা আরেকটি সাংস্কৃতিক ঐতিহ্যের সাক্ষী হয়ে উঠতে চলেছি। এছাড়া, অনেক বছর পর আমার আরেকবার কুল্লুর বিখ্যাত দশহরা উৎসবে অংশগ্রহণের সৌভাগ্য হবে। কয়েকশো দেবদেবীর সঙ্গে ভগবান রঘুনাথজীর যাত্রা সমারোহে সামিল হয়ে আমি দেশের জন্যও আশীর্বাদ প্রার্থনা করবো। আর আজ যখন বিলাসপুরে এসেছি, তখন অনেক পুরনো স্মৃতি জেগে ওঠা অত্যন্ত স্বাভাবিক। একটা সময় ছিল, যখন আমি এখানে ধুমলজী ও নাড্ডাজীর সঙ্গে পায়ে হেঁটে বাজার করতাম, ঘুরে বেড়াতাম। আমরা এখানে একটি বড় রথযাত্রা কর্মসূচিতে বিলাসপুরের অলিগলিতে শোভাযাত্রা করেছি। আর স্বর্ণ জয়ন্তী রথযাত্রা হ’ল, সেটিও এখানকার মেইন মার্কেট হয়ে এগিয়েছে এবং সেখানে একটি জনসভাও হয়েছিল। এছাড়াও, অনেকবার আমি এখানে এসেছি, আপনাদের সঙ্গে থেকেছি। 

হিমাচলের এই ভূমিতে কাজ করার সময় ক্রমাগত হিমাচল প্রদেশে উন্নয়ন যাত্রার সহযোগী হওয়ার সৌভাগ্য হয়েছে। একটু আগেই অনুরাগজী, আমাদের নাড্ডাজী এবং আমাদের মুখ্যমন্ত্রী জয়রামজী তাঁদের ভাষণে আমার প্রশংসায় পঞ্চমুখ হয়ে বলছিলেন যে, মোদীজী এটা করেছিলেন – ওটা করেছিলেন – এটা বলেছিলেন – ওটা বলেছিলেন। কিন্তু আমি সত্যি কথা বলছি, এখানে যা কিছু হচ্ছে, তা আমি নই, আপনারাই করেছেন, আপনাদের জন্যই হয়েছে। যদি আপনারা আমাকে আশীর্বাদ দিয়ে দিল্লিতে না পাঠাতেন, তা হলে এসব সম্ভব হ’ত না, আর হিমাচল প্রদেশে আমার সঙ্গী-সাথীদের যদি আশীর্বাদ না দিতেন, তা হলে অন্যরা এত দ্রুত এসব কাজ হতে দিত না। এসব তো জয়রামজী ও তাঁর টিম তৎপরতা দেখিয়ে দিল্লি থেকে আদায় করে ছেড়েছেন। এই এইমস্‌ হাসপাতাল, এখানকার সুড়ঙ্গ আপনাদের ভোটের শক্তিতেই হয়েছে। এই হাইড্রো ইঞ্জিনিয়ারিং কলেজ আর এই মেডিকেল ডিভাইস পার্কও আপনাদের ভোটের শক্তিতেই হয়েছে। সেজন্য আজ হিমাচল প্রদেশের প্রত্যাশাগুলির দিকে লক্ষ্য রেখে আমরা একের পর এক উন্নয়ন কর্মসূচি এগিয়ে নিয়ে যেতে পারছি। 

উন্নয়ন নিয়ে আমাদের দেশে দীর্ঘ সময় ধরে একটি বিকৃত ভাবনা প্রকট হয়ে উঠছিল। ভালো সড়ক, ভালো শিক্ষা প্রতিষ্ঠান, ভালো হাসপাতাল শুধু কিছু কিছু রাজ্যের রাজধানী আর দিল্লির আশেপাশে নির্মিত হ’ত। এর বাইরে হ’তই না। ব্যবসা-বাণিজ্য শিল্প প্রতিষ্ঠানও শুধু কিছু কিছু রাজ্যের রাজধানী আর দিল্লির আশেপাশে গড়ে উঠত। বিশেষ করে, দেশের পাহাড়ি রাজ্য ও প্রত্যন্ত এলাকাগুলিতে মৌলিক সুযোগ-সুবিধা দীর্ঘকাল অপেক্ষার পর পৌঁছতো। সেই পুরনো ভাবনার ফলেই দেশের উন্নয়নের ক্ষেত্রে একটি ভারসাম্যহীনতা সৃষ্টি হয়েছিল। এর ফলে, দেশের একটা বড় অংশ ও সেখানকার জনগণ অনেক সমস্যার সম্মুখীন হয়েছেন, অভাবের শিকার হয়েছেন। 

বিগত ৮ বছরে দেশ এখন সেই পুরনো ভাবনাকে পেছনে ফেলে নতুন ও আধুনিক ভাবনা নিয়ে এগিয়ে চলেছে। এখন দেখুন, দীর্ঘ সময় ধরে আমরা দেখেছি যে, এখানকার জনগণকে একটি বিশ্ববিদ্যালয়ের উপরই নির্ভরশীল থাকতে হ’ত। আর চিকিৎসা থেকে শুরু করে চিকিৎসা শাস্ত্র নিয়ে পড়াশুনা করতে হলে আইজিএমসি সিমলা এবং টাটা মেডিকেল কলেজের উপর নির্ভর করতে হ’ত। কোনও কঠিন রোগের চিকিৎসা আর শিক্ষা ও কর্মসংস্থানের জন্য হিমাচল প্রদেশের জনগণকে চন্ডীগড় কিংবা দিল্লি যেতে হ’ত। কিন্তু বিগত ৮ বছরে আমাদের ডবল ইঞ্জিন সরকার হিমাচলের উন্নয়ন গাথাকে নতুন মাত্রায় পৌঁছে দিয়েছে। আজ হিমাচলে কেন্দ্রীয় বিশ্ববিদ্যালয়, আইআইটি, আইআইআইটি এবং আইআইএম – এর মতো প্রতিষ্ঠানগুলিও গড়ে উঠেছে। দেশে চিকিৎসা শিক্ষা ও স্বাস্থ্যের সর্ববৃহৎ প্রতিষ্ঠান এইমস্‌-ও এখন বিলাসপুর তথা হিমাচল প্রদেশের জনগণের গর্বের বিষয় হয়ে উঠেছে। 

বিলাসপুর এইমস্‌ আরেকটি পরিবর্তনেরও প্রতীক। সেটি হ’ল – পরিবেশ-বান্ধব এইমস্‌। সমস্ত এইমস্‌ – এর মধ্যে সবচেয়ে সবুজ - প্রকৃতিপ্রেমী এইমস্‌। আমরা সকলে জানি, আগের সরকারগুলি ভোটের আগে শিলান্যাসের পাথর বসিতে যেত, আর ভোটের পর ভুলে যেত। আজও হিমাচল প্রদেশের অনেক জায়গায় এরকম পাথর খুঁজে বের করছেন আমাদের ধুমলজী। কোথায় কোথায় এরকম পাথর রয়েছে, কিন্তু কাজ হয়নি, সেগুলি খুঁজে সেই অসম্পূর্ণ উন্নয়নমূলক কাজগুলি সম্পূর্ণ করার লক্ষ্যে ধুমলজী কাজ করছেন। 

আমার মনে আছে, একবার রেলপথের সমীক্ষা করতে গিয়ে দেখি যে, আমাদের ঊনার কাছে একটি রেললাইন পাতার সিদ্ধান্ত নেওয়া হয়েছিল ৩৫ বছর আগে। সংসদে ঘোষণা হয়েছিল, তারপর সব ফাইল বন্ধ। হিমাচলের কথা কে মনে রাখবেন ভাই! কিন্তু, এই হিমাচলের সন্তান এই হিমাচলকে কখনই ভুলতে পারবেন না। আমাদের সরকারের পরিচয় হ’ল যে, আমরা যে প্রকল্পের শিলান্যাস করি, তার উদ্বোধনও করি। আটকে দেওয়া, ঝুলিয়ে রাখা, বিভ্রান্ত করার যুগ আমরা পেরিয়ে এসেছি বন্ধুগণ! 

বন্ধুগণ,

দেশ রক্ষার ক্ষেত্রে সর্বদাই হিমাচলের অনেক বড় অবদান ছিল। যে হিমাচল প্রদেশের সৈনিকরা গোটা দেশের সুরক্ষার জন্য জীবন উৎসর্গ করে, এখন থেকে সেই সৈনিকদের পরিবার ও আত্মীয় স্বজনদের চিকিৎসার জন্য এইমস্‌ - এর মতো বড় হাসপাতাল গুরুত্বপূর্ণ ভূমিকা পালন করবে। ২০১৪ সাল পর্যন্ত হিমাচল প্রদেশে মাত্র ৩টি মেডিকেল কলেজ ছিল। এর মধ্যে ২টি ছিল সরকারের। আর বিগত ৮ বছরে হিমাচলে আরও ৫টি নতুন সরকারি মেডিকেল কলেজ গড়ে উঠেছে। ২০১৪ সাল পর্যন্ত এই রাজ্যে পোস্ট গ্র্যাজুয়েট সহ ৫০০ জন পড়ুয়ার আসন ছিল। আজ সেই সংখ্যা বেড়ে দ্বিগুণেরও বেশি, ১ হাজার ২০০-রও বেশি হয়েছে। এবার এই এইমস্‌ থেকেও প্রতি বছর অনেক নতুন চিকিৎসক, নার্স ও অন্যান্য চিকিৎসা কর্মী পাশ প্রশিক্ষণ নেবেন। সেজন্য আমি জয়রামজী ও তাঁর টিমকে ভারত সরকার আরোগ্য মন্ত্রী ও আরোগ্য মন্ত্রককে বিশেষভাবে শুভেচ্ছা জানাচ্ছি। আমাদের নাড্ডাজী যখন স্বাস্থ্য মন্ত্রী ছিলনে, তখনই তিনি এই সিদ্ধান্ত নিয়েছিলেন, আমি শিলান্যাস করেছিলাম। এরপর তো নাড্ডাজী আরও বড় দায়িত্ব নিলেন। তারপর, এল ভয়ঙ্কর বিশ্বব্যাপী করোনা মহামারী। তখনও হিমাচলের পাহাড়ে এই উন্নয়নমূলক কাজগুলি থেমে থাকেনি। আপনারা সকলে জানেন, তখন এই কাজ করে যাওয়া কতটা কঠিন ছিল। একেকটি জিনিসকে পাহাড়ে তুলে আনতে কত না সমস্যার সম্মুখীন হতে হ’ত। যে কাজ সমতল এলাকায় ১ ঘন্টায় হয়ে যায়, সেই কাজ এই পাহাড়ে সম্পন্ন করতে এক দিন লেগে যায়। তা সত্ত্বেও কেন্দ্রীয় সরকারের আরোগ্য মন্ত্রক ও জয়রামজীর নেতৃত্বে রাজ্য সরকারের টিম এই কাজ করে দেখিয়েছে। আজ এইমস্‌ – এর শুভ উদ্বোধন হ’ল। কিছুদিন ধরেই এখানে বিশ্বমানের চিকিৎসা পরিষেবা প্রদান শুরু হয়ে গেছে। 

শুধু মেডিকেল কলেজ নয়, জীবনদায়ী ওষুধ প্রস্তুত এবং রোগ-প্রতিরোধক টিকা উৎপাদনের ক্ষেত্রেও হিমাচল প্রদেশের ভূমিকাকে অনেক গুণ বিস্তারিত করা হচ্ছে। বাল্ক ড্রাগস্‌ পার্ক গড়ে তোলার জন্য দেশের মাত্র ৩টি রাজ্যকে বেছে নেওয়া হয়েছে। এর মধ্যে হিমাচল অন্যতম। তাই, এটি এই রাজ্যের শিশুদের উজ্জ্বল ভবিষ্যৎ সুনিশ্চিত করারও শিলান্যাস। এভাবে আমরা বর্তমান প্রজন্মের পাশাপাশি, ভবিষ্যৎ প্রজন্মের কথা মাথায় রেখে কাজ করে চলেছি। 

আজ চিকিৎসায় আধুনিক প্রযুক্তির ব্যবহার বেড়েছে। আধুনিক প্রযুক্তির নানা সরঞ্জাম উৎপাদনের জন্য একই রকমভাবে মেডিকেল ডিভাইস পার্কের জন্য যে ৪টি রাজ্যকে বেছে নেওয়া হয়েছে, তার মধ্যেও হিমাচল প্রদেশ অন্যতম। এত বড় দেশ, এত জনসংখ্যা, আমার হিমাচল প্রদেশ তো অনেক ছোট রাজ্য। কিন্তু, এটি বীরদের ভূমি। আর আমি এই রাজ্যের রুটি খেয়েছি। এই ঋণ আমাকে শোধ করতেই হ’ত। এর ফলে, বিশ্বের অনেক বড় বড় মানুষ এখানে আসবেন। নালাগড়ে কয়েক হাজার কোটি টাকা বিনিয়োগে নির্মীয়মান এই মেডিকেল ডিভাইস পার্কের শিলান্যাসের মাধ্যমে একটি নতুন অধ্যায়ের সূচনা হ’ল। এর পাশাপাশি, অনেক আনুষঙ্গিক সরঞ্জাম উৎপাদনের জন্য অতিক্ষুদ্র, ক্ষুদ্র ও মাঝারি শিল্পোদ্যোগও এই এলাকায় গড়ে উঠবে। ফলে, এই এলাকায় হাজার হাজার নবীন প্রজন্মের মানুষের কর্মসংস্থান হবে। 

বন্ধুগণ, 

হিমাচল প্রদেশের আরেকটি দিক রয়েছে, যাতে উন্নয়নের অনন্ত সম্ভাবনা সুপ্ত রয়েছে। সেটি হ’ল – স্বাস্থ্য ও পর্যটন। এখানকার আবহাওয়া, প্রকৃতি, পরিবেশ, ভেষজ বৃক্ষ ও লতাগুল্ম – এই সব কিছু সুস্বাস্থ্যের অনুকুল। আজ ভারত স্বাস্থ্য ও পর্যটনের ক্ষেত্রে বিশ্বের একটি বড় আকর্ষণের কেন্দ্র হয়ে উঠছে। যখন দেশের নানা প্রান্ত এবং বিশ্বের বিভিন্ন দেশ থেকে মানুষ চিকিৎসার জন্য আসতে চাইবেন, তখন এখানকার প্রাকৃতিক সৌন্দর্য ও উন্নত চিকিৎসা পরিষেবার কথা জেনে তাঁরা আরোগ্য লাভের পাশাপাশি, পর্যটনের কথা মাথায় রেখেও এখানে আসতে চাইবেন। এভাবে হিমাচল দু’ভাবেই উপকৃত হবে। 

বন্ধুগণ, 

কেন্দ্রীয় সরকার চাইছে যে, গরীব ও মধ্যবিত্তদের সুলভে উন্নত চিকিৎসা হোক। আর সেই চিকিৎসার জন্য যেন তাঁদের দূরে না যেতে হয়। সেজন্য আজ এইমস্‌ মেদিকেল কলেজ ছাড়াও, প্রতিটি জেলা হাসপাতালে ‘ক্রিটিকাল কেয়ার’ পরিষেবা এবং গ্রামে গ্রামে ক্রমাগত হেলথ অ্যান্ড ওয়েলনেস সেন্টার গড়ে তোলার কাজে জোর দিয়েছে। আয়ুষ্মান ভারত যোজনার মাধ্যমে হিমাচল প্রদেশের অধিকাংশ পরিবার ৫ লক্ষ টাকা পর্যন্ত বিনামূল্যে চিকিৎসার সুবিধা পাচ্ছেন। 

ইতিমধ্যেই এই প্রকল্পের মাধ্যমে সারা দেশে ৩ কোটি ৬০ লক্ষেরও বেশি দরিদ্র রোগীরা বিনামূল্যে চিকিৎসা পেয়েছেন। এদের মধ্যে দেড় লক্ষেরও বেশি সুফলভোগী আমার হিমাচল প্রদেশে আত্মীয়-পরিজন। দেশের মধ্যে এই দরিদ্র ও মধ্যবিত্তদের চিকিৎসা খাতে সরকার ইতিমধ্যে ৪৫ হাজার কোটি টাকারও বেশি খরচ করেছে। এখন আয়ুষ্মান ভারত যোজনা না থাকলে আমার এই গরীব ও মধ্যবিত্ত পরিবারের মানুষকে এই চিকিৎসার জন্য নিজেদের পকেট থেকে প্রায় ৯০ হাজার কোটি টাকা খরচ করতে হ’ত। আমাদের এই উদ্যোগে দরিদ্র ও মধ্যবিত্ত পরিবারের সদস্যদের উন্নত চিকিৎসার পাশাপাশি, বিপুল পরিমাণ অর্থ সাশ্রয়ও হয়েছে। 

বন্ধুগণ, 

আমার জন্য আরেকটি খুশির বিষয় হ’ল – সরকারের এ ধরনের প্রকল্পগুলির মাধ্যমে সবচেয়ে বেশি উপকৃত হয়েছেন আমাদের মা-বোন-কন্যারা। আমরা সকলে জানি, শরীরে যত কষ্টই থাকুক না কেন, আমাদের মা-বোনেরা স্বভাবগত কারণে কাউকে সেটা বলেন না, সহ্য করে যান। নিরলস কাজ করে যান, গোটা পরিবারকে সামলান। তাঁরা ভাবেন যে, ঋণ করে আমার চিকিৎসা করলে ছেলেমেয়েদের ভরণ-পোষণের জন্য টাকা কোথায় পাব। সেজন্য তাঁরা নীরবে কষ্ট সহ্য করে যেতেন। কিন্তু, তাঁদের এই সন্তান দেশের প্রধানমন্ত্রী হয়ে তাঁদের এই কষ্ট মেনে নিতে পারেনি। সেই ভাবনা থেকেই আয়ুষ্মান ভারত যোজনার জন্ম। আমাদের মা ও বোনেদের জীবনে এত কষ্ট না সহ্য করতে হয়। আমরা দেখেছি, এই আয়ুষ্মান ভারত যোজনা চালু হওয়ার ফলে ৫০ শতাংশেরও বেশি সুফলভোগী হয়েছেন আমাদের মা-বোন-কন্যারা। 

বন্ধুগণ, 

শৌচালয় নির্মাণ থেকে শুরু করে স্বচ্ছ ভারত অভিযান, বিনামূল্যে রান্নার গ্যাস সিলিন্ডার সরবরাহের জন্য উজ্জ্বলা যোজনা, বিনামূল্যে স্যানিটারি ন্যাপকিন সরবরাহ অভিযান, মাতৃ বন্দনা যোজনার মাধ্যমে প্রত্যেক গর্ভবতী মহিলার পুষ্টি সুনিশ্চিত করতে হাজার হাজার টাকা সাহায্য এবং প্রত্যেক বাড়িতে নলবাহিত জল পৌঁছে দেওয়ার অভিযান – এইসব কিছু আমাদের মা-বোনদের কষ্ট দূর করার কথা ভেবে চালু করা হয়েছে। আমাদের ডবল ইঞ্জিন সরকারের অনেক বড় অগ্রাধিকার হ’ল – মা, বোন ও কন্যাদের সুখ, সুবিধা, সম্মান, সুরক্ষা এবং সুস্বাস্থ্য সুনিশ্চিত করা। 

কেন্দ্রীয় সরকারের যত প্রকল্প রয়েছে, সেগুলিকে জয়রামজী এবং তাঁর গোটা টিম দ্রুতগতিতে হিমাচল প্রদেশে বাস্তবায়িত করে চলেছে। প্রত্যেক বাড়িতে নলবাহিত জল পৌঁছে দেওয়ার কাজ কত দ্রুত সম্পন্ন হয়েছে, তা আপনারা সকলেই দেখেছেন। বিগত সাত দশকে হিমাচল প্রদেশে যত বাড়িতে নলের মাধ্যমে জল পৌঁছেছে, তার দ্বিগুণেরও বেশি বাড়িতে মাত্র গত তিন বছরে পৌঁছে দেওয়া হয়েছে। এই তিন বছরে হিমাচল প্রদেশে ৮ লক্ষেরও বেশি নতুন পরিবারকে নল বাহিত জল পৌঁছে দেওয়া হয়েছে। 

ভাই ও বোনেরা, 

এই সাফল্যের জন্য সারা দেশে জয়রামজী ও তাঁর টিম অত্যন্ত প্রশংসিত। এই প্রশংসা বিবিধ সামাজিক সুরক্ষার প্রকল্প বাস্তবায়ন থেকে শুরু করে কেন্দ্রীয় সরকারের বিভিন্ন প্রকল্পের বিস্তারকে সুসম্পন্ন করার জন্যও। আজ হিমাচল প্রদেশে সম্ভবত এমন কোনও পরিবার নেই, যার কোনও না কোনও সদস্য পেনশন পান না। বিশেষ করে, অসহায়, জটিল কোনও রোগে আক্রান্ত সদস্য যে পরিবারগুলিতে রয়েছেন, তাঁদের জন্য পেনশন সুনিশ্চিত করা এবং চিকিৎসার খরচ বহন করা – অত্যন্ত প্রশংসনীয়। হিমাচল প্রদেশের হাজার হাজার পরিবারের সদস্যরা ‘এক পদ, এক পেনশন’ বাস্তবায়নের সুফলও পাচ্ছেন। 

বন্ধুগণ, 

হিমাচল প্রদেশ আজ অনেক সুযোগ-সুবিধা ও সম্ভাবনার প্রদেশ। আরেকটি কারণে আমি জয়রামজীকে শুভেচ্ছা জানাতে চাই। তা হ’ল – টিকাকরণের সাফল্য। হিমাচল প্রদেশ দেশের প্রথম রাজ্য, যেখানে ১০০ শতাংশ করোনা টিকাকরণ সম্পন্ন হয়েছে। ‘চলছে, চলবে’ – এই মনোভাব নিয়ে কাজ করার মানসিকতার ঊর্ধ্বে উঠে আপনারা দৃঢ় সংকল্প হয়ে যা ভাবেন – সেটাই করেন। 

এই রাজ্যে এখন হাইড্রো ইলেক্ট্রিক প্রকল্পের মাধ্যমে যথেষ্ট বিদ্যুৎ উৎপাদন হয়। উর্বর মাটি থেকে পর্যাপ্ত পরিমাণ ফল ও সব্জি উৎপাদিত হয়। আর এই রাজ্যে পর্যটন শিল্পে রয়েছে পরিসীম কর্মসংস্থানের সম্ভাবনা। এই সম্ভাবনাগুলি উন্নত যোগাযোগ ব্যবস্থার অভাবে বাস্তবায়িত করা যাচ্ছিল না। ২০১৪ সালের পর থেকে হিমাচল প্রদেশের গ্রামে গ্রামে যোগাযোগ ব্যবস্থার উন্নত পরিকাঠামো গড়ে তোলার কাজ চলছে। হিমাচল প্রদেশের সর্বত্র সড়ক প্রশস্তিকরণের কাজও চলছে। এই যোগাযোগ ব্যবস্থা উন্নয়ন খাতে ৫০ হাজার কোটি টাকারও বেশি খরচ করা হচ্ছে। পিঞ্জর থেকে নালাগড় মহাসড়ককে চারলেনে পরিণত করার কাজ যেদিন সম্পন্ন হবে, সেদিন নালাগড় ও বদ্দির শিল্পাঞ্চলগুলি যেমন লাভবান হবে, তেমনই চন্ডীগড় ও আম্বালা থেকে বিলাসপুর মান্ডি এবং মানালির দিকে যাঁরা সফর করবেন, তাঁরাও উন্নত পরিষেবা পাবেন। শুধু তাই নয়, আঁকা-বাঁকা পথ ধরে দীর্ঘ পথ সফরের সময় ও অর্থ সাশ্রয়ের জন্য গোটা হিমাচল প্রদেশে অনেক সুড়ঙ্গ পথ তৈরি করা হচ্ছে। 

বন্ধুগণ, 

ডিজিটাল যোগাযোগ ব্যবস্থা বিস্তারের ক্ষেত্রেও হিমাচল প্রদেশে বিগত ৮ বছরে অভূতপূর্ব কাজ হয়েছে। ভারতে তৈরি মোবাইল ফোন সুলভে পাওয়া যাচ্ছে। আর গ্রামে গ্রামে মোবাইল নেটওয়ার্ক পৌঁছেছে। উন্নত ফোর-জী যোগাযোগ ব্যবস্থার কারণে হিমাচল প্রদেশ ডিজিটাল লেনদেনের ক্ষেত্রেও দ্রুতগতিতে এগিয়ে চলেছে। ডিজিটাল ইন্ডিয়া প্রকল্পে দেশে সর্বাধিক উপকৃত রাজ্যগুলির মধ্যে আমার হিমাচল প্রদেশ অন্যতম। তা না হলে, নানা ধরণের বিল মেটানো থেকে শুরু করে, ব্যাঙ্কের কাজ, নানা ভর্তির ফর্ম, নানা প্রকার দরখাস্ত ভরা এরকম ছোট ছোট কাজের জন্য পাহাড় থেকে সমতলে আসতে হ’ত, বিভিন্ন অফিস ঘুরে ঘুরে জুতোর শুকতলা খসাতে হ’ত। একদিনে কাজ না হলে রাতে থেকে যেতে হ’ত। এখন দেশে প্রথমবার ভারতে তৈরি ফাইভ-জি মোবাইল পরিষেবাও শুরু হয়ে গেছে। অতিসত্ত্বর এর মাধ্যমে হিমাচল প্রদেশের মানুষ অনেক উপকৃত হবেন। 

ভারতে আগে ড্রোন নিয়ে যেত বাধা-নিষেধ ছিল, সেই নিয়ম পরিবর্তন করার পর, যে রাজ্যগুলি অনেক উপকৃত হয়েছে, হিমাচল তার অন্যতম। দেশে হিমাচল প্রদেশই প্রথম রাজ্য, যেখানে রাজ্যের জন্য ড্রোন নীতি রচনা করা হয়েছে। এখন ড্রোনের মাধ্যমে পণ্য পরিবহণ ক্রমে বাড়ছে। এর ফলে, যেমন কিন্নৌর থেকে আলু ড্রোনের মাধ্যমে তুলে এনে দ্রুত বড় বাজারে পৌঁছে দেওয়া যাচ্ছে, তেমনই রাজ্যের বিভিন্ন প্রান্ত থেকে ড্রোনের মাধ্যমে দ্রুত পচনশীল ফল তাজা অবস্থাতেই বাজারে পৌঁছে দেওয়া যাচ্ছে। ক্রেতা ও বিক্রেতা উভয়ই লাভবান হচ্ছেন। এ ধরনের উন্নয়নে প্রত্যেক নাগরিকের সুবিধা হচ্ছে। প্রত্যেকেই যাতে সমৃদ্ধ হন, সেই চিন্তা মাথায় রেখে আমাদের ডবল ইঞ্জিন সরকার কাজ করে চলেছে। এভাবেই আমরা উন্নত ভারত, উন্নত হিমাচল প্রদেশের সংকল্পকে বাস্তবায়িত করব। 

আমি অত্যন্ত আনন্দিত যে, বিজয়া দশমীর এই পবিত্র উৎসবে বিজয়নাদ ও রণসিঙ্গাতে ফু দিয়ে বিজয়ের সম্ভাবনা সুদৃঢ় করার সৌভাগ্যও আমার হয়েছে। আর এই সবকিছু আপনাদের সকলের এত ভালোবাসা ও আশীর্বাদের ফলেই সম্ভব হয়েছে। আমি আরেকবার এইমস্‌ সহ সমস্ত উন্নয়ন প্রকল্পের জন্য আপনাদের সকলকে অনেক অনেক শুভেচ্ছা জানাই। আপনারা সবাই আমার সঙ্গে দু’হাত তুলে উচ্চস্বরে বলুন – ভারতমাতা কি জয়, আরে উচ্চস্বরে বলুন – 

ভারতমাতা কি জয়,

ভারতমাতা কি জয়, 

ভারতমাতা কি জয়।

অনেক অনেক ধন্যবাদ