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PM Narendra Modi lays of foundation stone for development of NH-56 from Varanasi to Babatpur
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PM Narendra Modi dedicates Trauma Centre at Banaras Hindu University to the Nation
PM Modi inaugurates passenger reservation facility at Ramnagar Post Office
I had urged you all to work on cleanliness and everyone worked together to make Varanasi clean: PM
It is essential to give an impetus to tourism in Varanasi: PM
Through Jan Bhagidari, we have to take India ahead: PM Modi
Apart from public & private sectors, ‘personal’ sector is an important engine of economic growth: PM

विशाल संख्‍या में पधारे मेरे बनारस के प्‍यारे भाइयों और बहनों,

ये कार्यक्रम तो बनारस की धरती पर हो रहा है लेकिन ये कार्यक्रम पूरे हिंदुस्तान के लिए हो रहा है। ये बनारस की धरती है, जिसने सदियों से मानव जाति को ज्ञान का प्रकाश दिया और ज्ञान का प्रकाश देने वाली ये नगरी ऊर्जा वाला प्रकाश भी देने का नेतृत्‍व करने जा रही है और इसलिए मैं देशवासियों को बधाई देता हूं, बनारस वासियों को विशेष बधाई देता हूं।

वैसे तो ये समारोह एक है लेकिन इस एक समारोह में सात कार्यक्रम लगे हैं, सात। एक तो आपने अभी-अभी video देखा कि बिजली के क्षेत्र में आमूल-चूल परिवर्तन लाने के लिए पूरे देश में हम क्‍या करने जा रहे हैं। दूसरा, वाराणसी में एक कठिनाई लम्‍बे अर्से से चली है, वाराणसी वासियों की एक मांग अनेक वर्षों से रही है और वो है वाराणसी के रिंग रोड की मांग। आज इस मंच से उस रिंग रोड के कार्यक्रम का भी शिलान्‍यास हो रहा है। काशी तीर्थयात्रियों का धाम है, विश्‍व के टूरिस्‍टों का भी आकर्षण है, लेकिन एयरपोर्ट से काशी पहुंचने तक आने वाले यात्री के मन में से विश्‍वास उठा जाता है के मैं सही जगह पर जा रहा हूं कहीं और जा रहा हूं और उसका मूल कारण काशी से बाबतपुर हवाई अड्डे तक का जो मार्ग है उसकी दुर्दशा। आज यहां से उस काम का भी शिलान्‍यास हो रहा है कि जिसमें उस रास्‍ते को चौड़ा किया जाएगा, आधुनिक बनाया जाएगा, सौंदर्यीकरण किया जाएगा ताकि काशी पहुंचने वाला विश्‍व का या देश का कोई भी यात्री आते ही अनुमान करेगा कि मैं किस भव्‍य और पुरातन नगरी में प्रवेश कर रहा हूं उसका उसको अनुमान हो जाएगा।

आज ये जो देशभर के लिए IPDS योजना का प्रारंभ हुआ उस IPDS योजना को लागू करने के लिए बनारस में दो नए Substation…Chowk Substation का शिलान्‍यास भी आज इस मंच से हो रहा है और योजना को लागू करने का काम आज आरंभ हो रहा है। एक Chowk Substation, दूसरा Kazzakpura Substation, ये दो Substations का भी शिलान्‍यास आज इसी मंच से हो रहा है। बनारस में आरोग्य की सुविधा में एक नया नजराना...कुछ समय से जो Trauma Centre चालू हुआ है, यहां के नागरिकों को उसकी सेवाएं उपलब्‍ध हैं, आज उसका लोकार्पण भी यहां हो रहा है। उसी प्रकार से गंगा घाट पर ही बसा हुआ हमारा रामनगर, धीरे-धीरे उसकी आबादी बढ़ रही है, उस तरफ के नागरिकों के लिए सुविधा की आवश्‍यकता रहती थी कि रेलवे रिजर्वेशन के लिए उनको यहां तक आना पड़ता था अगर उसकी व्‍यवस्‍था वहां हो जाए तो आज रामनगर कस्‍बे में VSAT के माध्‍यम से रेलवे रिजर्वेशन सुविधा का भी आरंभ करने का यहां पर एक समारोह हो रहा है। एक प्रकार से इस एक मंच पर से देश के लिए एक योजना और काशीवासियों के लिए उस योजना के समेत कुल सात योजनाओं का लोकार्पण करते हुए मुझे गर्व हो रहा है।

मैं काशी बहुत बार आता था। पार्टी कार्यकर्ता के नाते संगठन का काम करने के लिए आता था, इस धरती का एक आकर्षण था उसके लिए भी आता था, लेकिन हर बार ऊपर की तरफ नजर करता था तो मैं चौंक जाता था। जहां भी देखो तार ही तार लगे रहते थे। इतने पुरातन शहर की शोभा उन तार के झुंड को देखते ही खराब हो जाती थी। तो जब मैं सांसद चुना गया और एक नागरिक अभिवादन था उसमें मैंने कहा था भाई इसको तो हटाना है। और आज मुझे खुशी है कि 572 करोड़ रुपया पूरे काशी में एक नई ऊर्जा भर देगा। कभी-कभी बिजली बंद हो जाना, तार पुराने हो जाना, Transmission लाइनें खराब हो जाना, बाबा आदम के जमाने की चीजें लटकी पड़ी हुई हैं किसी को ठीक करने के लिए फुरसत नहीं है, गाड़ी चलती रहती है, ये खराब हुआ चलिए ठीक कर लो, उधर खराब हुआ, ठीक कर लो, patchwork का काम चलता रहा है। और ये मुसीबत सिर्फ बनारस की नहीं है। हिंदुस्‍तान के कई शहर हैं और जिसके कारण बिजली का line loss भी बहुत होता है, नागरिकों को परेशानी भी बहुत होती है, और इसलिए बिजली को पहुंचाने वाला जो पूरा Infrastructure है उसको आधुनिक बनाने की आवश्‍यकता है, Smart बनाने की आवश्‍यकता है। और एक प्रकार से बनारस को जो Smart City बनाने की कल्‍पना है उसकी पहली शुरूआत ये बिजली के माध्‍यम से हो रही है। और ये बनारस, आज जो पसंद किया गया है, पूरे देश की योजना को लागू करने के लिए, लोगों को लगता होगा कि प्रधानमंत्री यहां से MP है इसलिए हो रहा है। मैं रहस्‍य बता देता हूं। ये कारण तो बाद में आता है। पहला कारण ये है कि हमारे जो ऊर्जा मंत्री हैं पीयूष गोयल जी, उनके पिताजी बनारस में इंजीनियर हुए, BHU में। वो यहीं पढ़ते थे और यहीं से इंजीनियर बने थे और यहीं से समाज सेवा के लिए भी निकले थे, तो स्‍वाभाविक रीत है पीयूष जी को लगा होगा कि जो आपके पिताजी की शिक्षा-दीक्षा भूमि रही है वहीं से इस कार्यक्रम को आरंभ किया जाए, ताकि पिताजी को भी संतोष होगा और इसलिए आज बनारस से पूरे देश को ये नजराना मिल रहा है। पूरे देश में इस योजना के पीछे 45 हजार करोड़ रुपया लगने वाला है और उसके कारण ऊर्जा के क्षेत्र में जो धांधलियां चल रही हैं, जो परेशानियां चल रही हैं उनसे शहरी क्षेत्र को बहुत बड़ी मुक्‍ति मिलने वाली है। काम बड़ा है, काम कठिन है, लेकिन इसको किए बिना कोई चारा भी नहीं है और इसलिए क्‍योंकि हमारा एक सपना है कि 2022, जब देश आजादी के 75 साल मनाएगा। जब आजादी के 75 साल हम मनाएंगे तब जिन्‍होंने हमें आजादी दी, जो आजादी के लिए फांसी के तख्‍त पर चढ़ गए, जिन्‍होंने आजादी के लिए जवानी जेलों में खपा दी, जिन्‍होंने आजादी के लिए अपने शरीर पर ब्रिटिश सल्‍तनत के कोड़े झेले उनको हम जवाब क्‍या देंगे। यही देंगे कि आपने हमें आजादी दी, हमने मौज की। लेकिन जो सपना आपने देखा था वो तो हमने पूरा नहीं किया, ये बात तो हमें मंजूर नहीं हो सकती। क्‍या किसी हिन्‍दुस्‍तानी को ये बात मंजूर हो सकती है? क्‍या आजादी देने वाले को उनके सपनों के अनुकूल देश बनाके देना चाहिए कि नहीं देना चाहिए। आजादी के 75 साल जब मनाए, तब देशवासियों का योगदान होना चाहिए कि नहीं होना चाहिए? देश में बदलाव होना चाहिए कि नहीं होना चाहिए? एक अच्‍छा हिन्‍दुस्‍तान, देशभक्‍तों के सपनों का हिन्‍दुस्‍तान पूरा करना चाहिए कि नहीं करना चाहिए? उसमें एक महत्‍वपूर्ण काम है 24 घंटे, 365 दिन बिजली। आज बिजली चार घंटे, छ घंटे, आठ घंटे मिलती है। हमारा सपना है गांव हो, जंगलों का इलाका हो, दूर-सुदूर एक झोपड़ी हो, 2022 जब आजादी के 75 साल हो तब गरीब से गरीब के घर में भी 24 घंटे बिजली मिलती हो, ऐसी व्‍यवस्‍था होनी चाहिए और इसके लिए एक महत्‍वपूर्ण काम उसके infrastructure का जिसमें आज 45 हजार करोड़ रुपया और अकेले काशी के लिए 572 करोड़ रुपया लगाकर के ये बदलाव का आज प्रारंभ हो रहा है।

मुझे आप सब के आशीर्वाद चाहिए। बाबा भोलेनाथ के आशीर्वाद चाहिए ताकि, ताकि देश में ये ऊर्जा पहुंचाने का काम, देश को ऊर्जावान बनाने के लिए एक बहुत बड़ी नींव का पत्‍थर बना रहे, उस दिशा में हम आगे बढ़ना चाहते हैं। बनारस बढ़ता चला गया। अगल-बगल के जिलों से जो भी यातायात है, शहर के बीच से गुजरना पड़ता है। शहर के ट्रेफिक के मामले भी बड़े गंभीर है। परेशानियों का तो हिसाब लगाओ तो बढ़ती ही जाती है। उससे मुक्‍ति दिलाने के लिए एक महत्‍वपूर्ण काम था यहां रिंग रोड बनना चाहिए ताकि बाहर से जिसको गुजरना है शहर को disturb किए बिना वो काम चलता रहे। बहुत बड़ा काम है, करीब 600 करोड़ रुपयों का काम है। आज उसका भी शिलान्‍यास हुआ है और इस इलाके में काशी के साथ अगल-बगल के जितने जिले हैं उन जिलों को जोड़ने वाले रास्‍ते भी बनाने हैं ताकि उन सभी गांवों का लाभ हो। करीब-करीब 11 हजार करोड़ रुपया उसके लिए आबंटित करने का निर्णय किया गया है। आने वाले दिनों में अड़ोस-पड़ोस के जितने जिले हैं, काशी के साथ जुड़े हुए और तब जाकर के पूरा इलाका एक आर्थिक विकास का growth centre बन सकता है। एक बहुत बड़ा केन्‍द्र बन सकता है और इसलिए बिजली, पानी, सड़क ये तीन क्षेत्रों में हम इस प्रकार का यहां पर जाल बिछाएं ताकि जो पूर्वी उत्‍तर प्रदेश के विकास के सामने सवालिया निशान होते हैं उससे हम मुक्‍ति दिला सके। उन बातों को बनारस की धरती से भले शुरू होते हो, लेकिन पूरे उत्‍तर प्रदेश में, पूर्वी उत्‍तर प्रदेश में खास इस जाल को फैलाने की दिशा में हमने काम को आरंभ किया है और आने वाले दिनों में देखते ही देखते उसके नतीजे दिखेंगे।

अभी आपने देखा, आप लोग भी घाट पर जाते हैं और LED की रोशनी आने के बाद तो मुझे बताया गया कि बहुत लोग जाते हैं, देखने के लिए जाते हैं। आपने देखा होगा कितना बड़ा बदलाव आया है। हम चाहते हैं हर परिवार में, मेरे काशी के हर परिवार में बिजली का बिल कम होना चाहिए कि नहीं होना चाहिए। आप चाहते हैं कि बिजली का बिल कम हो? आप चाहते हैं आपके पैसे बचे? सचमुच में चाहते हो? तो मेरी एक बात मानोगे, पक्‍का मानोगे? वादा करो, भोले बाबा को याद करके वादा करो। आप अपने घर में जितने बल्‍ब है, ट्यूब लाइट है, LED लगा दीजिए। आप देखिए, आपका बिजली का बिल एकदम से कम हो जाएगा, आपके पैसे बच जाएंगे और रोशनी बढ़ जाएगी। ये double मुनाफा वाले काम है और पूरे भारत में मुझे आंदोलन खड़ा करना है कि पुराने जो बिजली के बल्‍ब है उससे मुक्‍ति लीजिए। ये नई technology है, जो हमारी आंखों के लिए अच्‍छी है, रोशनी के लिए अच्‍छी है और जेब के लिए भी अच्‍छी है। हम काशी में एक आंदोलन चलाए। सब लोग उस बात को आगे बढ़ाए तो काशी के अंदर भी हम इसका लाभ ले सकते हैं और मैंने देखा है street light. काशी की जो Street light है उन Street light को भी LED में convert करना है उसके कारण काशी महानगर पालिका का जो बिजली का बिल है वो भी बहुत कम हो जाएगा और वो जो पैसे बचेंगे वो काशी को अगर स्‍वच्‍छता के लिए लगा दिए गए तो मेरा काशी चमकता रहेगा। शाम को रोशनी से चमकेगा और दिन में सफाई से चमकेगा और दुनिया के लोग आएंगे तो एक नई काशी को देखकर के जाएंगे।

मैं काशीवासियों का आज हृदय से एक बात के लिए अभिनंदन करना चाहता हूं, आभार व्‍यक्‍त करना चाहता हूं। मैं जब चुनाव जीतकर के यहां आया था और गंगा आरती में बैठा था। मां गंगा के आशीर्वाद लेकर के मैं यहां से गया था, बाद में प्रधानमंत्री पद के शपथ लिए थे। पहले मैं आज इस धरती को नमन करने आया था और उस दिन मैंने कहा था, उस दिन मैंने कहा था कि बनारस के नागरिकों ने बनारस की सफाई की जिम्‍मेवारी लेनी चाहिए। बनारस के नागरिकों ने बनारस को साफ-सुथरा रखना चाहिए। ये बात मैंने कही थी। आज देश में इस प्रकार की बात करना सरल नहीं होता है। लेकिन मैंने देखा कि बनारस के लोगों ने मेरी इस बात को सर आंखों पर लिया और बनारस के नागरिकों के अनेक संगठन तैयार हुए, अनेक नौजवान तैयार हुए। महिलाएं, लड़कियां, कॉलेज की लड़कियां, इन लोगों ने बनारस को साफ बनाने का, स्‍वच्‍छ रखने का एक बड़ा अभियान उठाया है और उस अभियान के तहत बनारस को आगे सुंदर बनाने का काम चल रहा है।

मैं देख रहा हूं, मैं देख रहा हूं कि आज बनारस विकास की नई ऊंचाइयों पर जाने का एक केन्‍द्र बिन्‍दु बना है। चाहे road का infrastructure हो, चाहे रेल का infrastructure हो, चाहे बिजली की व्‍यवस्‍था हो, चाहे skill development का काम हो, चाहे हमारे बुनकरों के कल्‍याण का काम हो, इन सभी विषयों पर आज बनारस को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का एक बड़ा अभियान आज हमने प्रारंभ किया है और इसी काम के लिए आज मुझे यहां आने का अवसर मिला।

प्रधानमंत्री जन-धन योजना के द्वारा इस देश के गरीबों को बैंक account के द्वारा आने वाले दिनों में एक आर्थिक व्‍यवस्‍था के मूल केन्‍द्र में लाने में है। एक बड़ा सफल प्रयास हुआ है। मुझे विश्‍वास है कि इसके कारण आने वाले दिनों में परिवर्तन आएगा।

पिछले कुछ दिनों से उत्‍तर प्रदेश में शिक्षा मित्रों को लेकर के एक परिस्‍थिति पैदा हुई है। मैंने उत्‍तर प्रदेश सरकार से पूछा कि मामला क्‍या है, उन्‍होंने मुझे बताया कि अभी तक हमारे पास कोर्ट का ऑर्डर आया नहीं है। कोर्ट ने मौखिक सूचना दी है, लेकिन लिखित ऑर्डर नहीं आया है। आज मैंने शिक्षा मित्रों के कुछ नेताओं को बुलाया था। उनकी समस्‍या समझने का मैंने प्रयास किया और मैंने उनको कहा कि आप जरा मुझे बताइए तो उनकी भी तकलीफ थी कि उनके पास कोर्ट का ऑर्डर नहीं था। कोर्ट क्‍या कहना चाहती थी वो भी जानकारियां नहीं थी। मैंने उनसे कहा है कि कोर्ट का ऑर्डर आते ही मेरे पास भेजिए। भारत सरकार भी इसका अध्‍ययन करेगी और उत्‍तर प्रदेश सरकार को जो हमें सुझाव देने होंगे वो भी हम सुझाव देंगे। लेकिन मैं शिक्षक मित्रों से आज एक अनुरोध करना चाहता हूं। मैंने सुना था कि हमारे उत्‍तर प्रदेश के एक शिक्षा मित्र ने आत्‍महत्‍या की। मैं आज, मैं आपसे अनुरोध करना चाहता हूं। अभी कोर्ट का ऑर्डर नहीं आया है और हम अपने जीवन को संकट में डाले तो समस्‍या का समाधान नहीं होता है। शिक्षक मित्र, आत्‍महत्‍या करके वो तो चला जाएगा, लेकिन बाद में उस परिवार का क्‍या होगा, उन बच्‍चों का क्‍या होगा और इसलिए मेरी मेरे शिक्षक मित्रों से अनुरोध है कि जीवन में कभी लड़ाई हारनी नहीं चाहिए, हौसला खोना नहीं चाहिए। आत्‍महत्‍या का मार्ग हमारा नहीं हो सकता। एक बार कोर्ट का ऑर्डर आने दीजिए। उत्‍तर प्रदेश सरकार क्‍या कहना चाहती है, उसको देखकर के ज़रा सुने। मैं भी समझने का प्रयास करूंगा और उत्‍तर प्रदेश सरकार से मुझे जो भी बात करनी होगी उसको मैं करने की जिम्‍मेवारी लेता हूं और मैं आपकी बात उत्‍तर प्रदेश सरकार को आपके MP के नाते मैं अवश्‍य पहुंचाऊंगा और मुझे विश्‍वास है कि मेरे शिक्षक मित्र जो विद्यार्थियों के जीवन को तैयार करते हैं, जो विद्यार्थियों का हौसला बुलंद करते हैं। जो विद्यार्थियों को जीने की प्रेरणा देते हैं उनके जीवन में आत्‍महत्‍या का मार्ग कभी उचित नहीं हो सकता है। उत्‍तर प्रदेश की सरकार भी इन संवेदनशील मामलों को पूरी तरह गंभीरता से लेती है, ऐसा मुझे विश्‍वास है और इसलिए कोर्ट का ऑर्डर आने दीजिए। उत्‍तर प्रदेश सरकार को समय दीजिए। उत्‍तर प्रदेश सरकार मैं नहीं मानता हूं कि आपके साथ अन्‍याय करना चाहेगी और मैं भी उत्‍तर प्रदेश सरकार से बात करूंगा। समाधानकारी रास्‍ते क्‍या हो सकते हैं, इसका मार्ग खोजा जाएगा। भारत माता की।

भाइयों-बहनों आज काशी में tourism को बढ़ावा देना बहुत आवश्‍यक है। आज प्रात: मैंने tourism को बल मिले उस प्रकार की रिक्‍शाओं का भी लोकार्पण किया है। वो अपने आप में भविष्‍य में tourist सेंटरों के लिए एक मॉडल बनने वाला है। हम यहां के छोटे-छोटे लोगों को भी उस काम में जोड़ना चाहते हैं। आपने जब मैं बनारस आया तो बनारस के कुछ लोगों ने मुझे कहा था कि 7 अगस्‍त को Handloom Day घोषित करना चाहिए। बनारस के बुनकरों की मांग थी। आज मुझे गर्व से कहना है कि आज उसने हमें हैंडलूम दिवस घोषित कर दिया। चेन्‍नई के अंदर उसका बड़ा समारोह किया और मेरे काशी के बुनकर चेन्‍नई आए थे और उनका भी मान-सम्‍मान बढ़ाने का मुझे अवसर मिला था।

काशी की जो शक्‍ति है वो उसकी कलाकारी की विधि है। काशी की जो संस्‍कृति है वो उसकी कला विधि में है। काशी की जो शक्‍ति है वो उसकी संगीत की विरासत में है। काशी को आगे तो बढ़ना है, काशी को आधुनिक भी बनना है। लेकिन साथ-साथ काशी को अपनी इस विरासत को भी अपने साथ बचाए रखना है। इसको भी बचाए रखना है और उसको लेकर के हम काशी को आगे बढ़ाना चाहते हैं। अनेक क्षेत्रों में आपने देखा होगा हमारे केन्‍द्र के ढेर सारे मंत्री बारी-बारी से आए हैं। अनेक नई योजनाओं को उन्‍होंने बल दिया है। उन्‍होंने अनेक नई योजनाओं का एक cumulative effect होने वाला है कि काशी एक नई ऊंचाइयों को प्राप्‍त करेगा।

और मैं काशीवासियों को विश्‍वास दिलाता हूं कि आपने मुझे MP बनाया है और आप ही के लोग हो, जिनके कारण आज मुझे प्रधानमंत्री पद पर बैठने का और देश की सेवा करने का सौभाग्‍य मिला है। देश चहुं और विकास कैसे करे, देश में नौजवानों को रोजगार कैसे मिले और हो सके तो अपने ही इलाके में रोजगार कैसे मिले, उसको लेकर के skill development का एक बहुत बड़ा अभियान जिसके कारण देश के कोटि-कोटि नौजवान, जिसके हाथ में डिग्री का कागज तो होता है, लेकिन हाथों में हुनर नहीं होता है और सिर्फ कागज से गाड़ी चलती नहीं है। उसके हाथ में हुनर होना चाहिए, कौशल्‍य होना चाहिए। दुनिया में हम सबसे युवा है। 65 प्रतिशत जनसंख्‍या 35 साल से कम उम्र की है। 65 प्रतिशत जनसंख्‍या 35 साल से कम उम्र की है उन भुजाओं में अगर कौशल्‍य हो, तो पूरी दुनिया को महारत करने की ताकत हिन्‍दुस्‍तान के नौजवान में आ जाती है और इसी बात को लेकर के skill development के द्वारा पूरे देश में एक विकास की नई ऊंचाई बनाने के लिए हमने प्रयास किया है।

आपने देखा होगा मैंने 15 अगस्‍त को लाल किले पर से एक घोषणा की थी और मैंने कहा था ये जो interview नाम की चीज है। driver चाहिए तो भी interview, peon चाहिए तो भी interview, छोटा clerk चाहिए तो भी interview और उसके कारण लाखों नौजवान रोजगार के लिए किसी न किसी की सिफारिश ढूंढते हैं। कोई न कोई बिचौलिया उनके हाथ लग जाता है और नौकरी मिले या न मिले उसका जेब तो काट ही लेते हैं। और छोटी जगह पर बहुत बड़ी मात्रा में interview होते हैं। बहुत बड़ी मात्रा में लोग भर्ती करने पड़ते हैं। अगर एक-एक व्‍यक्‍ति से 5-5, 10-10 हजार रुपया भी लूटना शुरू करे तो गरीब आदमी के 10 हजार रुपया, वो जीवन भर का कर्जदार बन जाता है और इसलिए मेरी सरकार ने एक मैंने 15 अगस्‍त को सुझाव दिया था कि interview नाम की चीज बंद होनी चाहिए। और आज मैं नौजवानों को कहता हूं कि मेरी सरकार उस दिशा में बहुत तेजी से आगे बढ़ी है। कुछ department ने already काम चालू कर दिया है। अभी दो दिन पहले मुझे रेलवे वालों ने बता दिया कि उनकी एक level के नीचे की जो भर्ती है, बोले बिना interview लिए हम online exam लेकर के पूरा कर लेंगे। हमारे नौजवान को रोजगार के लिए इस प्रकार से परेशानियां भुगतनी पड़े और आने वाले दिनों में इस क्षेत्र में भी जो बुराईयां घुस गई हैं उसकी सफाई होके रहेगी ये मैं नौजवानों को विश्‍वास दिलाना चाहता हूं।

हम सबने मिल करके जन-भागीदारी से देश को आगे कैसे बढ़ाया जा सकता है। आज पूरा दिन मैंने जो बिताया है, एक एक मिनट सिर्फ और सिर्फ विकास की बातों पर ही मैंने लगाया है। जब से मैं यहां Land किया हूं हर विषय जिनसे मिला जिनसे बातें कीं और आज मैं बनारस के सभी जीवन के क्षेत्र के लोगों से मुझे मिलने का सौभाग्‍य मिल गया है। बहुत बातें उनसे की मैंने। पूरे दिन भर उनकी बातें सुनता रहा। उनसे विषयों को समझता रहा और केंद्र बिंदु सिर्फ विकास था। और मेरा ये विश्‍वास है कि हमारी सारी समस्‍याओं का समाधान भी सिर्फ एक ही बात से होने वाला है, उस बात का नाम है विकास। अगर विकास होगा तो रोजगार मिलेंगे, रोजगार मिलेंगे तो गरीबी से लड़ाई लड़ पाएंगे, रोजगार मिलेंगे तो बच्‍चों को शिक्षा दे पाएंगे। रोजगार मिलेंगे विकास की नई ऊंचाईयां होंगी, व्‍यवस्‍थाएं विकसित होंगी और इसलिए सरकार व्‍यवस्‍थाओं को भी विकसित करना चाहती है और नागरिकों को सामर्थ्‍यवान भी बनाना चाहती है। आर्थिक सामर्थ्‍य देना चाहती है, शैक्षणिक सामर्थ्‍य देना चाहती है, आरोग्‍य की दृष्टि से अच्‍छे दिन आएं उसके जीवन में, उसके लिए लगातार प्रयास कर रही है।

आज पूरे विश्‍व ने भारत की जय-जयकार करना शुरू किया है ये पहले नहीं था। पूरी दुनिया भारत के प्रति देखने को तैयार नहीं थी। अभी हमने जून महीने में अंतर्राष्‍ट्रीय योगा दिवस- इसका हमने विश्‍व के समाने प्रस्‍ताव रखा। हर हिंदुस्‍तानी को खुशी होगी और बनारस वालों को ज्‍यादा खुशी होगी क्‍योंकि वो चीजें हैं जो बनारस की धरती से पनपी हैं। अंतर्राष्‍ट्रीय योगा दिवस किया और अंतर्राष्‍ट्रीय योगा दिवस को दुनिया के hundred and ninety three countries, 193 देशों ने उसको समर्थन किया और विश्‍व के सभी देशों ने योगा दिवस को मनाया। ये सिर्फ योगा दिवस को मनाना मतलब हाथ-पैर हिलाने वाला मसला नहीं है भारत के साथ जुड़ने का मसला है। ये योग विश्‍व को भारत के साथ योग करता है जुड़वाता है। ये वो योग है जो हमें जोड़ रहा है, एक ही बात कितना बड़ा बदलाव ला सकती है इसके उदाहरण हैं। आज पूरा विश्‍व भारत के प्रति‍ आशा की नजर से, गर्व की नजर से देख रहा है। और इसी बातों से देश को नई ऊंचाईयों पर ले जाने में एक अवसर पैदा होता है और उस अवसर की पूर्ति के लिए हम दिन-रात कोशिश कर रहे हैं। मां गंगा की सफाई का अभियान पांचों राज्‍यों के मुख्‍यमंत्रियों को साथ ले करके जहां से गंगा गुजरती है, सभी पांचों राज्‍यों के मुख्‍यमंत्रियों को साथ ले करके उस योजनाओं को लागू कर रहा हो और मैंने एक ही आग्रह किया है कि बाकी कुछ आप कर पाओ के न कर पाओ कम से कम गंगा में अब गंदगी नहीं चाहिए, गंदगी जानी नहीं चाहिए, कोई भी शहर अपना गट्टर का पानी गंगा में जाने न दे इतना प्रबंध राज्‍य सरकारों ने करना चाहिए। उसके लिए दंड देना पड़ेगा दें, दंड देने के लिए तैयार है। अभी माता अमृतानंदमयी केरल में है, आश्रम केरल में है लेकिन मां गंगा के लिए 100 करोड़ रुपयों का दान दे दिया। सवा सौ करोड़ देशवासियों के दिल में मां गंगा के प्रति‍ इतना भक्ति है, सब देशवासी गंगा के लिए कुछ न कुछ करने के लिए तैयार हैं लेकिन शुरूआत हमें करनी पड़ेगी। जिम्‍मेवारी हमें लेनी पड़ेगी। राज्‍यों के पास जो दायित्‍व हैं उसको राज्‍यों को पूरा करना पड़ेगा। और भारत सरकार कंधे से कंधा मिला करके राज्‍यों के साथ काम करेगी और मां गंगा की सफाई का काम हमें समय-सीमा में पूरा करना है।

मैं जानता हूं ये काम कठिन है ।1984 से nineteen eighty four से ये विषय चल पड़ा है। हजारों करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं और इसलिए योजना की सफलता के प्रति आशंकाओं का कारण भी है। उसके बावजूद भी हमने अपने प्रयास छोड़ने नहीं चाहिए। हमने इतने बड़े देश ने इस एक काम को करके दिखाना चाहिए। और गंगा शुद्ध हो, गंगा साफ हो, गंगा गंदगी से मुक्‍त हो इस गंगा के बेटे के नाते हम सबका दायित्‍व बन जाता है और उस दायित्‍व को हम सबने निभाना चाहिए।

और मुझे विश्‍वास है भाइयो एक जागरूकता आई है। स्‍वच्‍छता का अभियान देख लीजिए, एक जागरूकता आई है, एक बदलाव आया है। घर में बच्‍चे भी कूड़ा-कचरा फेंकने वालों को टोकते हैं ये पहले कभी नहीं होता था। स्‍वच्‍छता एक दिन में आने वाली ऐसा कोई सोचता नहीं था। पहले भी कोई सोचता नहीं था। लेकिन पहली बार मैं नहीं मानता हिंदुस्‍तान की संसद ने स्‍वच्‍छता के ऊपर कभी debate की हो। लेकिन जबसे मैंने स्‍वच्‍छता अभियान चलाया है आज संसद भी स्‍वच्‍छता के विषय पर चर्चा करती है, विपक्ष में बैठे हुए हमारी आलोचना भी करते हैं, लेकिन कम से कम भारत की संसद को स्‍वच्‍छता के लिए बात करने के लिए फुरसत तो मिली। ये छोटी बात नहीं है और संसद, संसद स्‍वच्‍छता के लिए इतनी जागरूक हो जाए तो बात नीचे पहुंचेगी ये मेरा पूरा विश्‍वास है भाइयो।

हमारे देश में विकास के लिए दो शब्‍द हम हमेशा देखें हैं आर्थिक विकास औद्योगिक विकास। एक शब्‍द प्रयोग चलता है private sector, दूसरा शब्‍द प्रयोग चलता है public sector. यानी government के जो PSUs हैं वो हैं, या तो कॉरपोरेट हाउस हैं बड़े-बड़े उद्योग कार हैं। ये हमने आर्थिक जो विकास की पटरी है वो इन दो पटरी पर आर्थिक गाड़ी चलाने का प्रयास किया है। मैं मानता हूं ये दो पटरी पर जितनी गाड़ी तेज जानी चाहिए जा नहीं सकती है। Public Sector, Private Sector इन्‍हीं दो पिलर पर अगर हम हिंदुस्‍तान को आगे बढ़ाना चाहते हैं तो उतनी ताकत नहीं मिलेगी। और इसलिए मैं तीसरे सेक्‍टर पर बल दे रहा हूं। एक तरफ है Public Sector, Private Sector और मैं एक विचार ले करके चल रहा हूं, Personal Sector, एक individual भी देश की बहुत बड़ी अमानत है। ये Personal Sector कैसे आगे बढ़े? Private Sector, Public Sector की बराबरी में Personal Sector दो कदम आगे कैसे चले उस योजना को ले करके मैं काम कर रहा हूं।

और उस Personal Sector में आता है एक योजना हमने बनाई है मुद्रा बैंक की। हमारे देश में करीब 6-7 करोड़ लोग है जो छोटे और निम्‍न स्‍तर के व्‍यापारी है। छोटा-मोटा उद्योग चलाते हैं। एकाध-दो एकाध लोगों को रोजगार देते हैं। छोटा कारोबार चलाते हैं, लेकिन किसी के पास हाथ फैलाते नहीं, अपने बलबूते पर खड़े रहते हैं। इन लोगों की ताकत इतनी है कि करीब-करीब 15 करोड़ लोगों को रोजगार देते हैं, ये छोटे-छोटे लोग। दूध बेचने वाला भी एकाध बच्‍चे को इनको रोजगार देता है। अगर ये personal sector है। ये personal sector को अगर ताकत दी जाए। जो आज 15 करोड़ को नौकरी देता है वो कल 30 करोड़ को नौकरी दे सकता है, इतनी ताकत उसमें है। और इसलिए बाल काटने वाला हो, धोबी हो, चाय बेचने वाला हो, पकौड़े बेचने वाला हो, रिक्‍शा चलाने वाला हो, सब्‍जी बेचने वाला हो, फ्रूट बेचने वाला हो, छोटे-मोटे दुकान पर readymade कपड़े बेचता हो, प्रसाद बेचता हो छोटे-छोटे लोग। इस personal sector को ताकतवर बनाना है मुझे। उसको आर्थिक मदद करनी है और मुद्रा बैंक से किसी भी प्रकार की गारंटी के बिना 10 हजार से 50 हजार रुपए तक देना उस नागरिक को देना ताकि उसको साहूकार की ब्‍याज की चुंगल से बाहर निकले और वो अपने पैरों पर खड़ा हो जाए, उस दिशा में एक बहुत बड़ा अभियान चलाने वाले हैं। ये personal sector भारत के लिए बहुत बड़ी आर्थिक moment बन सकता है। हमने 50 साल तक private sector, public sector की बात की है, अब वक्‍त है हम personal sector पर बल दे और personal sector के द्वारा एक-एक व्‍यक्‍ति की उद्यमशीलता। उसको पैसे चाहिए पैसे दे, technology चाहिए technology दे, skill development करना है तो skill development दे, उसको नौजवान की जरूरत है, नौजवान दे, उसको उद्योग जगाने के लिए जगह चाहिए तो जगह दे, व्‍यापार करने के लिए अवसर चाहिए तो अवसर दे। पूरा खुला पल्ला दें, आप देखिए हिन्‍दुस्‍तान का ये सामान्‍य व्‍यक्‍ति, हिन्‍दुस्‍तान को नई ऊंचाइयों पर ले जा सकता है।

और इसलिए आज मैं काशी की धरती पर पहली बार ये personal sector के विषय को मैं प्रकट कर रहा हूं और आने वाले दिनों में इस personal sector काशी की धरती से आशीर्वाद लेकर के सवा सौ करोड़ देशवासी, 65 प्रतिशत लोग, 35 से कम आयु के लोग वो personal sector है जिसको एक ताकत देकर के मुझे देश को आगे बढ़ाना है। आप मुझे आशीर्वाद दीजिए, मेरे साथ बोलिए भारत माता की जय, भारत माता की जय, भारत माता की जय, भारत माता की जय। बधुत-बहुत धन्‍यवाद।

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Text of PM’s address at a function to mark the inauguration of Basava Jayanthi 2017, and Golden Jubilee Celebration of Basava Samithi
April 29, 2017
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आप सभी को भगवान बसेश्वर की जयंती पर अनेक अनेक शुभ कामनाएं। बासवा समिति भी अपने 50 वर्ष पूरे कर एक उत्तम कार्य के द्वारा भगवान बसेश्वर के वचनों का प्रसार करने में एक अहम भूमिका निभाई है। मैं हृदय से उनका अभिनन्दन करता हूं।

मैं हमारे पूर्व उपराष्ट्रपति श्रीमान जती साहब को भी इस समय आदर पूर्वक स्मरण करना चाहूंगा। उन्होंने इस पवित्र कार्य को आरंभ किया आगे बढ़ाया। मैं आज विशेष रूप से इसके मुख्य संपादक रहे और आज हमारे बीच नहीं हैं। ऐसे कलबुर्गी जी को भी नमन करता हूं। जिन्होंने इस कार्य के लिये अपने आपको खपा दिया था। आज वो जहां होंगे उनको सबसे ज्यादा संतोष होता होगा। जिस काम को उन्होंने किया था। वो आज पूर्णता पर पहुंच चुका है। हम सब लोग राजनीति से आए दलदल में डूबे हुए लोग हैं। कुर्सी के इर्द-गिर्द हमारी दुनिया चलती है। और अक्सर हमनें देखा है कि जब कोई राजनेता जब कोई रापुरुष उनका स्वर्गवास होता है बिदाई लेता है, तो बड़ी गंभीर चेहरे के साथ उनके परिवारजन जनता जनार्दन के सामने कहते हैं कि मैं अपने पिताजी के अधूरे काम पूरा करूंगा। अब आप भी जानते हैं मैं भी जानता हूं जब राजनेता का बेटा कहता है कि उनके अधूरा काम पूरा करूंगा मतलब क्या करूंगा। राजनीतिक दल के लोग भी जानते हैं कि इसने जब कह दिया कि अधूरा काम पूरा करूंगा, तो इसका मतलब क्या होता है। लेकिन मैं अरविंद जी को बधाई देता हूं की सच्चे अर्थ में ऐस काम कैसे पूरे किये जाते हैं। इस देश के उपराष्ट्रपति पद पर गौर्वपूर्ण जिसने जीवन बिताया, देश जिनको याद करता है। उनका बेटा पिता के अधूरे काम पूरा करने का मतलब होता है। भगवान बसवाराज की बात को जन जन तक पहुंचाना। हिन्दुस्तान के कोने कोने तक पहुंचाना। आने वाली पीढ़ियों के पास पहुंचाना। जति साहब स्वयं तो हमारे सामने बहुत आदर्श की बातें रख कर गए हैं। लेकिन भाई अरविंद भी अपने इस उत्तम कार्य के द्वारा खासकर के राजनीतिक परिवारों के लिये। एक उत्तम आदर्श प्रस्तुत किया है। मैं इसके लिये उनका अभिनन्दन करता हूं।

समिति के 50 वर्ष पूरे होने पर इस काम में दो दो पीढ़ी खप गई होगी। अनेक लोगों ने अपना समय दिया होगा। शक्ति लगाई होगी। 50 साल दरमियान जिन जिन लोगों ने जो जो योगदान दिया है। उन सबका भी मैं आज हृदय से अभिनन्दन करना चाहता हूं। उनको बधाई देना चाहता हूं।

मेरे प्यारे भाइयों बहनों भारत का इतिहास सिर्फ हार का इतिहास नहीं है प्राजय का इतिहास नहीं है। सिर्फ गुलामी का इतिहास नहीं है। सिर्फ जुल्म अत्याचार झेलने वालों का इतिहास नहीं है। सिर्फ गरीबी, भुखमरी और अशिक्षा और सांप और नेवले की लड़ाई का इतिहास नहीं भी नहीं है। समय के साथ अलग अलग कालखंडों में देश में कुछ चुनौतियां आती हैं। कुछ यहीं पैर जमा कर बैठ भी गईं। लेकिन ये समस्याएं ये कमियां ये बुराइयां ये हमारी पहचान नहीं हैं। हमारी पहचान है इन समस्याओं से निपटने का हमारा तरीका हमारा Approach भारत वो देश है, जिसने पूरे विश्व को मनवता का, लोकतंत्र का, Good Governance का, अहिंसा का, सत्याग्रह का संदेश दिया है। अलग अलग समय पर हमारे देश में ऐसी महान आत्माएं अवतरित होती रहीं, जिन्होंने सम्पूर्ण मानवता को, अपने विचारों से अपने जीवन से दिशा दिखाई। जब दुनिया के बड़े बड़े देशों ने पश्चिम के बड़े बड़े जानकारों ने लोकतंत्र को, सबको बराबरी के अधिकार को एक नए नजरिये के तौर पर देखना शुरू किया उससे भी सदियों पहले और कोई भी हिन्दुस्तानी इस बात को गर्व के साथ कह सकता है। उससे भी सदियों पहले भारत ने इन मूल्यों का न सिर्फ आत्मसार किया बल्कि अपनी शासन पद्धति में शामिल भी किया था। 11वीं शताब्दि में भगवान बसेश्वसर ने भी एक लोकतांत्रिक व्यवस्था का सृजन किया। उन्होंने अनुभव मंडप नाम की एक ऐसी व्यवस्था विकसित की जिनमें हर तरह के लोग गरीब हो, दलित हो, पीड़ित हो, शोषित हो, वंचित हो वहां आकर के सबके सामने अपने विचार रख सकते हैं। ये तो लोकतंत्र कि कितनी बड़ी अद्भुत शक्ति थी। एक तरह से यह देश की पहली संसद थी। यहां हर कोई बराबर के थे। कोई ऊंच नहीं भेदभाव नहीं मेरा तेरा कुछ नहीं। भगवान बसवेश्वर का वचन। वो कहते थे, जब विचारों का आदान प्रदान न हो, जब तर्क के साथ बहस न हो, तब अनुभव गोष्टी भी प्रासंगिक नहीं रह जाती और जहां ऐसा होता है, वहां ईश्वर का वास भी नहीं होता है। यानी उन्होंने विचारों के इस मंथन को ईश्वर की तरह शक्तिशाली और ईश्वर की तरह ही आवश्यक बताया था। इससे बड़े ज्ञान की कल्पना कोई कर सकता है। यानी सैकड़ों साल पहले विचार का सामर्थ ज्ञान का सामर्थ ईश्वर की बराबरी का है। ये कल्पना आज शायद दुनिया के लिये अजूबा है। अनुभव मंडप में अपने विचारों के साथ महिलाओं को खुल कर के बोलने की स्वतंत्रता थी। आज जब ये दुनिया हमें woman empowerment के लिये पाठ पढ़ाती है। भारत को नीचा दिखाने के लिये ऐसी ऐसी कल्पना विश्व में प्रचारित की जाती है। लेकिन ये सैंकड़ों साल पुराना इतिहास हमारे सामने मौजूद है कि भगवान बसवेश्वर ने woman empowerment equal partnership कितनी उत्तम व्यवस्था साकार की सिर्फ कहा नहीं व्यवस्था साकार की। समाज के हर वर्ग से आई महिलाएँ अपने विचार व्यक्त करती थीं। कई महिलाएं ऐसी भी होती थीं जिन्हें सामान्य समाज की बुराइयों के तहत तृस्कृत समझा जाता था। जिनसे अपेक्षा नहीं जाती थी। जो उस समय के तथाकथित सभ्य समाज बीच में आए। कुछ बुराइयां थी हमारे यहां। वैसी महिलाओं को भी आकर के अनुभव मंडप में अपनी बात रखने का पूरा पूरा अधिकार था। महिला सशक्तिकरण को लेकर उस दौर में कितना बड़ा प्रयास था, कितना बड़ा आंदोलन था हम अंदाजा लगा सकते हैं। और हमारे देश की विशेषता रही है। हजारों साल पुराना हमारी परम्परा है, तो बुराइयां आई हैं। नहीं आनी चाहिए। आई, लेकिन उन बुराइयों के खिलाफ लड़ाई लड़ने का माददा भी हमारे भीतर ही पैदा हुआ है। जिस समय राजाराम मोहन राय ने विध्वा विवाह की बात रखी होगी। उस समय के समाज ने कितना उनकी आलोचना की होगी। कितनी कठिनाइयां आई होगी। लेकिन वो अड़े रहे। माताओं बहनों के साथ ये घोर अन्याय है। अपराध है समाज का ये जाना चाहिए। कर के दिखाया।

और इसलिये मैं कभी कभी सोचता हूं। तीन तलाक को लेकर के आज इतनी बड़ी बहस चल रही है। मैं भारत की महान परम्परा को देखते हुए। मेरे भीतर एक आशा का संचार हो रहा है। मेरे मन में एक आशा जगती है कि इस देश में समाज के भीतर से ही ताकतवर लोग निकलते हैं। जो कानबाह्य परम्पराओं को तोड़ते हैं। नष्ट करते हैं। आधुनिक व्यवस्थाओं को विकसित करते हैं। मुसलमान समाज में से भी ऐसे प्रबुद्ध लोग पैदा होंगे। आगे आएंगे और मुस्लिम बेटियों को उनके साथ जो गुजर रही है जो बीत रही है। उसके खिलाफ वो खुद लड़ाई लड़ेंगे और कभी न कबी रास्ता निकालेंगे। और हिन्दुस्तान के ही प्रबुद्ध मुसलमान निकलेंगे जो दुनिया के मुसलमानों को रास्ता दिखाने की ताकत रखते हैं। इस धरती की ये ताकत है। और तभी तो उस कालखंड में ऊंच नीच, छूत अछूत चलता होगा। तब भी भगवान बसवेश्वर कहते थे नहीं उस अनुभव मंडप में आकर के उस महिला को भी अपनी बात कहने का हक है। सदियों पहले ये भारत की मिट्टी की ताकत है कि तीन तलाक के संकट से गुजर रहे हमारी माता बहनों को भी बचाने के लिये उसी समाज से लोग आएंगे। और मैं मुसलमान समाज के लोगों से भी आग्रह करूंगा कि इस मसले को राजनीति के दायरे में मत जाने दीजिये। आप आगे आइये इस समस्या का समाधान कीजिए। और वो समाधान का आनन्द कुछ और होगा आने वाले पीढ़ियां तक उससे ताकत लेगी।

साथियों भगवान बसवेश्वर के वचनों से उनकी सिक्षाओं से बने सात सिद्धांत इंद्रधनुष के सात रंगों की तरह आज भी इस जगह को एक छोर से दूसरे छोर तक जोड़े हुए है। आस्था किसी के भी प्रति हो किसी की भी हो हर किसी का सम्मान हो। जाती प्रथा, छू अछूत जैसी बुराइयां न हों सबको बराबरी का अधिकार मिले इसका वे पुरजोर समर्थन करते रहते थे। उन्होंने हर मानव में भगवान को देखा था। उन्होंने कहा था। देह वे एकल, अर्थात ये शरीर एक मंदिर है। जिसमें आत्मा ही भगवान है। समाज में ऊंच नीच का भेद भाव खत्म हो। सब का सम्मान हो। तर्क और वैज्ञानिक आधार पर समाज की सोच विकसित की जाए। और ये हर व्यक्ति का सशक्तिकरण हो। ये सिद्धांत किसी भी लोकतंत्र किसी भी समाज के लिये एक मजबूत Foundation की तरह है मजबूत नीव की तरह है। वो कहते हैं ये मत पूछो कि आदमी किस जात मत का है इब या रब ये कहो कि यूं नमव। ये आदमी हमारा है। हम सभी के बीच में से एक है। इसी नीव पर एक मजबूत राष्ट्र का निर्माण हो रहा है। यही सिद्धांत एक राष्ट्र के लिये नीति निर्देशन का काम करते हैं। हमारे लिये ये बहुत ही गौरव का विषय है की भारत की धरती पर 800 वर्ष पहले इन विचारों को भगवान बसवेश्वर ने जन भावना और जनतंत्र का आधार बनाया था। सभी को साथ लेकर चलने की उनके वचनों ने वही प्रतिध्वनि है जो इस सरकार के सबका साथ सबका विकास का मंत्र है। बिना भेद भाव कोई भेद भाव नहीं बिना भेद भाव इस देस के हर व्यक्ति को अपना घर होना चाहिए। भेदभाव नहीं होना चाहिए। बिना भेद भाव हर किसी को 24 घंटे बिजली मिलनी चाहीए। बिना भेद भाव हर गांव में गांव तक सड़क होना चाहिए। बिना भेद भाव हर किसान को सींचाई को लिये पानी मिलना चाहिए। खाद मिलना चाहिए, फसल का बीमा मिलना चाहिए। यही तो है सबका साथ सबका विकास। सबको सात लेकर और ये देश में बहुत आवश्यक है। सबको सात लेकर के सब के प्रयास से सबके प्रयत्न से सबका विकास किया जा सकता है।



आप सबने भारत सरकार की मुद्रा योजना के बारे में सुना होगा। यह योजना देश के नौजवानों को बिना भेदभाव बिना बैंक गारंटी अपने पैरों पर खड़े होने के लिये अपने रोजगार के लिये कर्ज देने के लिये शुरु की गई है। without guaranty, अब तक, अब तक देश के साढ़े तीन करोड़ो लोगों को इस योजना के तहत तीन लाख करोड़ से ज्यादा कर्ज दिया जा चुका है। आप ये जानकर के हैरान हो जाएंगे कि इस योजना के तहत कर्ज लेने वालों में और आज 800 साल के बाद भगवान बसवेश्वर को खुशी होती होगी कि ये कर्ज लेने वालों में 76% महिलाएं हैं। सच कहूं तो जब ये योजना शुरू की गई थी, तो हम सबको भी ये उम्मीद नहीं थी कि महिलाएं इतनी बड़ी संख्या में आगे आएंगी इससे जुड़ेंगी। और स्वयं entrepreneur बनने की दिशा में काम करेंगी। आज ये योजना महिला सशक्तिकरण में एक बहुत अहम भूमिका निभा रही है। गांव में, गलियों में छोटे छोटे कस्बों में मुद्रा योजना महिला उद्यमियों का एक प्रकार से बड़ा तांता लग रहा है। भाइयों बहनों भगवान बसवेशर का वचन सिर्फ जीवन का ही सत्य नहीं है। ये सुशासन, गवर्नेन्स, राजकर्ताओं के लिये भी ये उतने ही उपयोगी है। वो कहते थे कि ज्ञान के बल से अज्ञान का नाश है। ज्योति के बल से अंधकार का नाश है। सत्य के बल से असत्य का नाश है। पारस के बल से लोहत्व का नाश है। व्यवस्था से असत्य को ही दूर करना है तो सुशासन होता है वही तो गुड गवर्नेन्स है। जब गरीब व्यक्ति को मूल्य वाली सब्सिडी सही हाथों में जाती है, जब गरीब व्यक्ति का राशन उसी के पास पहुंचता है, जब नियुक्तियों में सिफारिशें बंद होती हैं। जब गरीब व्यक्ति को भ्रष्टाचार और काले धन से मुक्ति के प्रयास किये जाते हैं, तो व्यवस्था में सत्यता का ही मार्ग बढ़ता है और वही तो भगवान बसवेश्वर ने बताया है। जो झूठा ह गलत है, उसे हटाना पारदर्शिता लाना Transparency वही तो good governance है।

भगवान बसवेश्वर कहते थे, मनुष्य जीवन निस्वार्थ कर्म योग से ही प्रकाशित होता है। निस्वार्थ कर्मयोग। शिक्षामंत्री जी। वे मानते थे समाज में निस्वार्थ कर्मयोग जितना बढ़ेगा उतना समाज से भ्रष्ट आचरण भी कम होगा। भ्रष्ट आचरण एक ऐसा दीमक है, जो हमारे लोकतंत्र को हमारी सामाजिक व्यवस्था को भीतर से खोखला कर रहा है। ये मनुष्य से बराबरी का अधिकार छीन लेता है। एक व्यक्ति जो मेहनत करके ईमानदारी से कमा रहा है, जब वो देखता है कि भ्रष्टाचार करके कम मेहनत से दूसरे ने अपने लिये जिन्दगी आसान कर ली है। तो एक पल के लिये एक पल ही क्यों न हो लेकिन वो ठिठक कर सोचता जरूर है शायद वो रास्ता तो सही नहीं है। सच्चाई का मार्ग छोड़ने के लिये कभी कभी मजबूर हो जाता है। गैर बराबरी के इस एहसास को मिटाना हम सभी का कर्तव्य है। और इसलिये अब सरकार की नीतियों को निर्णयों को भली भांति देख सकते हैं कि निस्वार्थ कर्मयोग को ही हमारी यहां प्राथमिकता है और निस्वार्थ पाएंगे। हर पल अनुभव करेंगे। आज बसवाचार्यजी के ये वचन उनके विचारों का प्रवाह कर्नाटक की सीमाओं से बाहर लंदन की Thames नदी तक दिखाई दे रहा है।



मेरा सौभाग्य है कि मुझे लंदन में बसवाचार्य जी की प्रतिमा का अनावर्ण करने का अवसर मिला जिस देश के बारे में कहा जाता था कि इसमें कभी सूर्यास्त नहीं होता। वहां की संसद के सामने लोकतंत्र को संकल्पित करने वाली बसवाचार्यजी की प्रतिमा किसी तीर्थस्थल से कम नहीं है। मुझे आज भी याद है। उस समय कितनी बारिश हो रही था और जब बसवाचार्य जी की प्रतिमा लगाई जा रही थी, तो स्वयं मेघराजा भी अमृत बरसा रहे थे। और ठंड भी थी। लेकिन उसके बाद भी इतने मनोयोग से लोग भगवान बसवेश्वर के बारे में सुन रहे थे उनको कौतुक हो रहा था कि सदियों पहले हमारे देश में लोकतंत्र, woman empowerment, equality इसके विषय में कितनी चर्चा थी। मैं समझता हूं उनके लिये बड़ा अजूबा था। साथियों अब ये हमारी शिक्षा व्यवस्था की खामियां मानिये या फिर अपने ही इतिहास को भुला देने की कमजोरी मानिये। लेकिन आज भी हमारे देश में लाखों करोड़ों युवाओं को इस बारे में पता नहीं होगा कि 800 – 900 साल पहले हजार साल पहले हमारे देश में सामाजिक मूल्यों की पुनर्स्थापना के लिये जन जागरती का कैसा दौर चला था। कैसा आंदोलन चला था हिन्दुस्तान के हर कोने में कैसे चला था। समाज में व्याप्त बुराइयों को खत्म करने के लिये उस काल खंड में 800 हजार साल पहले की बात कर रहा हूं। गुलामी के वो दिन थे। हमारे ऋषियों ने संत आत्माओं ने जन आंदोलन की नीव रखी थी । उन्होंने जन आंदोलन को भक्ति से जोड़ा था। भक्ति ईश्वर के प्रति और भक्ति समाज के प्रति दक्षिण से शूरू होकर भक्ति आंदोलन का विस्तार महाराष्ट्र और गुजरात होते हुए उत्तर भारत तक हो गया। इस दौरान अलग अलग भाषाओं में अलग वर्गों के लोगों ने समाज में चेतना जगाने का प्रयास किया। इन्होंने समाज के लिये एक आईने की तरह काम किया। जो अच्छाइयां थी जो बुराइयां थी वो न सिर्फ शीशे की तरह लोगों के सामने रखीं बल्कि बुराइयों से भक्ति का रास्ता भी दिखाया। मुक्ति के मार्ग में भक्ति का मार्ग अपनाया। कितने ही नाम हम सुनते हैं। रामानुजा कार्य, मधवाचार्य, निम्बकाचार्य, संत तुका राम, मीरा बाई, नरसिंह मेहता, कबीरा, कबीर दास, संत रैय दास, गुरुनानक देव, चैतन्य महाप्रभु अनेक अनेक महान व्यक्तियों के समागम से। भक्ति आंदोलन मजबूत हुआ। इन्हीं के प्रभाव से देश एक लंबे कालखंड में अपनी चेतना को स्थिर रखता है। अपनी आत्मा को बचा पाया। सारी विपत्तियां गुलामी के कालखंड के बीच में हम अपने आप को बचा पाए थे, बढ़ पाए थे। एक बात और आप ध्यान देंगे, तो आप पाएंगे कि सभी ने बहुत ही सरल सहज भाषा में समाज तक अपनी बात पहुंचाने का प्रयास किया। भक्ति आंदोलन के दौरान धर्म, दर्शन, साहित्य की ऐसी त्रिवेणी स्थापित हुई जौ आज भी हम सभी को प्रेरणा देती है। उनके दोहे उनके वचन उनकी चौपई उनकी कविताएं, उनके गीत, आज भी हमारे समाज के लिये उतने ही मूल्यवान है। उनका दर्शन उनकी फ्लोशॉफी, किसी भी समय की कसौटी पर पूरी तरह फिट बैठती है। 800 साल पहले बसवेश्वर जी ने जो कहा, आज भी सही लगता है कि नहीं लगता है।

साथियों आज भक्ति आंदोलन के उस भाव को उस दर्शन को पूरे विश्व में प्रचारित किये जाने की आवश्यकता है। मुझे खुशी है कि 23 भाषाओं में भगवान बसवेश्वर के वचनों का कार्य आज पूरा किया गया है। अनुवाद के कार्य में जुटे सभी लोगों का मैं अभिनन्दन करता हूं। आपके प्रयास से भगवान बसवेश्वर के वचन अब घर-घर पहुंचेंगे। आज इस अवसर पर मैं बसवा समिति से भी कुछ आग्रह करूंगा। करुं न, लोकतंत्र में जनता को पूछ कर के करना अच्छा रहता है। एक काम हम कर सकते हैं क्या इन वचनों के आधार पर एक quiz bank बनाई जाए। questions और सारे वचन डिजीटली ऑनलाइन हो और हर वर्ष अलग अलग आयु के लोग इस quiz कॉम्पीटीशन में ऑनलाइन हिस्सा लें। तहसील पर डिस्टिक लेवल पे स्टेट इन्टरस्टेट, इन्टरनेशनल लेवल पर एक कॉम्पीटीशन साल भर चलता रहे। कोशिश करें पचास लाख एक करोड़ लोग आएं। quiz competition में भाग लें। उसके लिये उसको वचनामृत का एक स्टूडेंट की तरह अध्ययन करना पड़ेगा। quiz competition में हिस्सा लेना पड़ेगा। और मैं मानता हूं अरविंद जी, इस काम को आप अवश्य कर सकते हैं। वरना क्या होगा इन चीजों को हम भूल जाएंगे। मैं जिस दिन पार्लियामेंट में मेरी मुलाकात हुई। जैसा उन्होंने कहा कि उन दिनों नोट बंदी को लेकर चर्चा थी। लोग जेब में हाथ लगाकर घूम रहे थे। जो पहले दूसरों के जेब में हाथ डालते थे, उस दिन अपने जेब में हाथ डालकर। और उस समय अरविंदजी ने मुझे बसवाचार्य जी का एक कोटेशन मुझे सुनाया था। इतना परफेक्ट था। अगर वो मुझे 7 तारीख को मिल गया होता तो मेरे आठ तारीख को जो बोला जरूर उसका उल्लेख करता। और फिर कर्नाटक में क्या क्या कुछ बाहर आता आप अंदाजा लगा सकते हैं। और इसलिये मैं चाहूंगा कि इस काम को आगे बढ़ाया जाए। इसे यहां रोका ना जाए। और आज जो नई जनरेशन है जो इनका तो गूगल गुरू है। तो उनके लिये रास्ता सही है उनको, बहुत बड़ी मात्रा में इसको, दूसरा ये भी कर सकते हैं कि इस वचन अमृत और आज के विचार दोनों के सार्थकता के quiz competition हो सकता है। तो लोगों को लगेगा कि विश्व के किसी भी बड़े महापुरुषों के वाक्य के बराबरी से भी ज्यादा शार्पनेश 800-900 पहले हमारी धरती के संतान में थी। हम इस पर सोच सकते हैं। और एक काम मैं यहां सदन में जो लोग हैं वो जो देश दुनिया में जो भी इस कार्यक्रम को देख रहे हैं वो भी। 2022 हमारे देश की आजादी के 75 साल हो रहे हैं। 75 साल जैसे बीत गए क्या वैसे ही उस वर्ष को भी बिता देना है। एक और साल एक और समारोह ऐसा ही करना है क्या। जी नहीं, आज से ही हम तय करेंगे। 2022 तक कहां पहुंचना है। व्यक्ति हो संस्था हो, परिवार हो, अपना गांव हो, नगर हो, शहर हो, हर किसी का संकल्प होना चाहिए। देश की आजादी के लिये जिन्होंने अपनी जान की बाजी लगा दी, जेलों में अपनी जिन्दगी बिता दी देश के लिये अर्पित कर दी। उनके सपने अधूरे हैं उन्हें पूरा करना हम सबका दायित्व बनता है अगर सवा सौ करोड़ देश वासी 2022 को देश को यहां ले जाना है मेरे अपने प्रयत्न से ले जाना है। वरना सलाह देने वाले तो बहुत मिलेंगे। हां सरकार को ये करना चाहिए सरकार को ये नहीं करना चाहिए। जी नहीं सवा सौ करोड़ देशवासी क्या करेगा। और तय करे और तय करके चल पड़े कौन कहता है दुनिया में बसवाचार्य जी का सपने वाला जो देश है , दुनिया है वो बनाने में हम कम रह सकते हैं, वो ताकत लेकर के हम साथ चलें। और इसलिये मैं आपसे आग्रह कर रहा हूं कि आप इस समिति के द्वारा जिन्होंने इन विचारों को लेकर काम बहुत उत्तम किया है आज मुझे उन सभी सरस्वती के पुत्रों से भी मिलने का दर्शन करने का सौभाग्य मिला। जिन्होंने इसको पूर्ण करने में उन्होंने रात दिन खपाई हैं। कनड भाषा सीखी होगी उसमें से किसी ने गुजराती किया होगा, किसी ने सनिया किया होगा, उर्दू किया होगा, उन सबको मुझे आज मिलने का अवसर मिला मैं उन सबका भी हृदय से बहुत बहुत अभिनन्दन करता हूं। इस काम को उन्होंने परिपूर्ण करने के लिये अपना समय दिया, शक्ति दिया, अपना ज्ञान का अर्चन उस काम के लिये किया। मैं फिर एक बार इस पवित्र समारोह में आपके बीच आने का मुझे सौभाग्य मिला। उन महान वचनों को सुनने का अवसर मिला और इस बहाने मुझे इसकी ओर जाने का मौका मिला। मैं भी धन्य हो गया, मुझे मिलने का सौभाग्य मिला मैं फिर आप सबका एक बार धन्यवाद करता हूं बहुत बहुत शुभकामनाएं देता हूं।