Prasoon Joshi

झुक कर गगन ने किया है इशारा

मगन है नदी और मगन है किनारा

पवन आज शत शत नमन कर रही है

धरती भी कितने जतन कर रही है

हथेली हथेली दुआ बह रही है

ज़ुबां हर कोई प्रार्थना कह रही है

उसके लिए सृष्टि गाने लगी है

नयी रोशनी मुस्कुराने लगी है

कलश एक उम्मीदों का थामे हुए वो

चला जा रहा है सवेरे उगाने

मुट्ठी में सूरज लिए हौसलों का

नए कल की कल कल चला है बहाने

उसका जन्मदिन है सब का जन्मदिन

चलो जन्म लें कह रहे हैं उजाले

आशा के दीपक जलाने का दिन है

चलो जन्म लें कह रहे हैं उजाले