Swami Vivekananda’s Call to the Nation

Published By : Admin | January 12, 2012 | 09:47 IST


“मैं भविष्यद्रष्टा नहीं हूँ,
न मैं उसके लिए चिंतित हूँ। किंतु

एक दृश्य मेरे सामने बिल्कुल स्पष्ट है, कि हमारी प्राचीन मातृभूमि एक बार फिर जाग  उठी है। वह नवयौवन प्राप्त कर पहले से कहीं अधिक भव्य दीप्ती के साथ अपने जगद्गुरु के सिंहासन पर आरुढ़ है। समस्त संसार को शांतिपूर्ण और मंगलमय वाणी से उसका संदेश सुनाओ” |

देश परतंत्र है, गरीबी - भुखमरी से जूझ रहा है, लोगो में आत्मविश्वास नहीं है, चारो ओर घोर निराशा का वातावरण है....दूर-दूर तक कोई उम्मीद नहीं..इन सब के बीच स्वामी विवेकानंद की यह भारत द्वारा विश्व नेतृत्व की घोषणा एक आश्चर्य से कम नहीं थी | स्वामी जी स्वतंत्रता की बात नहीं कर रहे उससे एक कदम आगे विश्वविजय की गर्जना कर रहे थे | ‘One step ahead’ स्वामी जी की इस दूरद्रष्टि ने पूरे राष्ट्र में नई चेतना भर दी, लोगो  में अपने देश और संस्कृति के प्रति गर्व प्रतिस्थापित हुवा..आत्मविश्वास जगा और तो और  स्वामी जी के ये  उद्गार क्रांतिकारियों के प्रेरणामंत्र बन गये | स्वतंत्रता तो मिली ही साथ ही यह राष्ट्र एक बार फिर उठ खड़ा हुआ था |

भारत को भारत के लिये जगाना कठिन है| त्याग ओर सेवा हमारे रग-रग में बसे है, हमारे DNA  में है | भारतवासियों को स्वार्थ की बात प्रेरणा नहीं दे पाती है| हाँ लेकिन किसी ओर का भला होने वाला है तो वह तत्पर हो जायेगा | विश्वकल्याण की बात हो, विश्व को मानवता के सामने खड़ी चुनौतियों भौतिकवाद, बिखरते परिवार, जीवन में बढ़ते तनाव, आतंकवाद से बचाना हो तो भारत खड़ा हो जायेगा | स्वामी विवेकानन्द कहते है कि भारत का जीवनध्येय (मिशन) है - विश्व का मार्गदर्शन करना।

स्वामी जी विदेश यात्रा से जब वापस भारत लौटे तो रामेश्वरम के नजदीक जहाज से उतरते ही समुद्र तट पर रेत में लोट-पोट होने लगे | गुरु भाइयो ने जब पूछा की अब जब आप चार साल तक पाश्चात्य देशों की चमक-धमक और वैभव देखने के बाद लौटे है तो आपका भारत के बारे में क्या विचार है | स्वामीजी ने कहा, “पहले तो में अपनी मातृभूमि से प्रेम ही करता था अब तो इसका कण–कण मेरे लिये तीर्थ है” | स्वामीजी का यह प्रेम केवल भावनात्मक हो ऐसा नहीं था, उन्होंने भारत की आत्मा को पहचाना था, भारत की नियति को देख पा रहे थे| शिकागों व्याख्यान के बाद जब सारा विश्व स्वामीजी की वाह-वाही कर रहा था, लोग उनके दीवाने हो गये थे, जिधर वो जाते लोग उनका स्वागत करते | ऐसे समय में रात में रोशनी से जगमगाये शिकागों में गगनचुम्बी इमारतों के बीच एक बालकानी में खड़े स्वामीजी अपनी मातृभूमि के बारे में सोचते है, अपने शिष्य को पत्र में पूछते है, “मेरे मन में सदा यही विचार आता है कि भारत ऐसा कब होगा ?”

स्वामीजी भारत को केवल आध्यात्मिकता में ही नहीं वरन सभी क्षेत्रो में विश्व में सर्वोपरि देखना चाहते थे | भारत पूर्णता के साथ विश्व नेतृत्व करेगा यह स्वामी जी का दृढविश्वास था| विज्ञान के क्षेत्र में भारत अनुसंधान करे, आगे आये यह स्वामीजी के प्रबल इच्छा थी| 1893 में स्वामी विवेकानन्द ने जापान से शिकागों जाते समय जहाज पर जमशेदजी टाटा को स्टील प्लांट के साथ देश के युवाओ के लिए “Research Institute of Science” स्थापित करने की प्रेरणा दी, जो बाद में IISc Bangalore के रूप में साकार हुई | पेरिस में विश्व विज्ञान परिषद के समय कई दिनों तक स्वामी जी और जगदीश चंद्र बोस के बीच भारत में विज्ञान के विकास को लेकर चर्चाये हुए | स्वामी जी के प्रेरणा से ही जगदीश चंद्र बोस ने भारतीय विज्ञान को विश्व में एक सम्मानित स्थान दिलाया |

स्वामीजी कहा करते थे, "प्रत्येक राष्ट्र की एक पूर्व निर्धारित नियति होती है, जिसे उसे पाना ही है, एक संदेश होता है जो उसे विश्व को देना है और एक विशिष्ठ जीवनव्रत है जो उसे पूर्ण करना है। "  कन्याकुमारी में स्वामी जी ने भारत की नियति, संदेश व व्रत का साक्षात्कार किया, "आध्यात्म भारत का संदेश,  मानवता को जीवन का विज्ञान सिखाना उसका जीवनव्रत तथा जगद्गुरु का पद भारत की नियति है।"

उन्होंने अपना जीवन भारत को उसका परिचय कराने में खपा दिया| विश्व मंच पर इस सन्देश को प्रतिष्ठा दिला कर उन्होंने भारत के लोगों को उसके सन्देश से अवगत कराया|  यही कारण था कि उनकी हुंकार पर पूरा भारत जग उठा| ख्यातनाम इतिहासकार यदुनाथ सरकार उन्हें भारतीय नवजागरण के पिता के रूप में संबोधित करते है|

किन्तु केवल सन्देश को देकर ही भारत का कार्य पूर्ण नहीं होगा| उन्होंने भारतीयों को स्पष्ट निर्देश दिया था कि मानवता के कल्याण में भारत का जागृत होना अनिवार्य है| उन्होंने अपने एक पत्र में लिखा था, "क्या भारत मर जायेगा? यदि ऐसा हुआ  तो विश्व में से सारी शुभता प्रभुता व मांगल्य नष्ट हो जायेगा| रह जायेगा लालच कि देवता व काम कि देवी का तांडव जिसका पूजन करेंगे छल, कपट, भ्रष्टाचार, पाशविक बल व आतंक| नहीं ! नहीं ! ऐसा कभी संभव नहीं! "

यदि आज विश्व में व्याप्त समस्याओं पर दृष्टी डाले तो हम स्वामी जी के इस वचन की सत्यता को देख सकते है| भारत को अपने नियत स्थान पर ना पहुँचाने के कारण आज समूची मानवता वैश्विक आतंकवाद, पर्यावरण के  असंतुलन तथा आर्थिक महासंकट से गुजर रही है| जैसा कि किसी एक विचारक  ने कहा था, "यदि भारत मर गया तो कौन जियेगा? और यदि भारत जियेगा तो फिर कौन मरेगा?" भारत की स्वतंत्रता के अवसर पर योगी अरविंद ने कहा था विश्व नेतृत्व करने के लिए ही भारत स्वतंत्र हुआ है| उसे यह करना ही होगा|

आज यह अवसर उत्पन्न हुआ है कि भारत अपने जीवनवृत का उद्यापन कर अपनी नियति को साकार करें| हर क्षेत्र में भारत के वीर युवा आज अग्रेसर हो रहे है| ज्ञान विज्ञान, आर्थिक विकास, योग व अध्यात्म सभी क्षेत्रों में भारतीयों ने सारे विश्व में परचम गाड़े है| किन्तु एक राष्ट्र के रूप में जब तक भारत एक समर्थ विश्व-शक्ति के रूप में अपने आप को प्रस्थापित नहीं कर देता तब तक भारत के जीवन दर्शन का उपयोग मानवता के लिए पर्याप्त मात्रा में होना संभव नहीं है|

सामूहिक लक्ष्य कि प्राप्ति में व्यक्तिगत योगदान करना ही चमू (Team) का कार्य है| सबका सामूहिक व्रत एक होते हुए भी सबकी भूमिका  विशिष्ट होती है|(Specific individual role in collective goal ) फुटबोल टीम में पूरी टीम का लक्ष्य भले ही विजय हेतु दूसरी टीम के गोल में गेंद डालने का हो किन्तु प्रत्येक खिलाडी कि भूमिका विशिष्ठ होती है| गोल रक्षक को अपने गोल कि रक्षा करनी है, वह यदि दौड़कर आगे जायेगा तो काम नहीं चलेगा| राष्ट्र के जीवनव्रत को पूर्ण करने का काम भी चमू का काम है| हर भारतीय इस चमू का अंग है| हमारी सबकी भूमिका है| भारत के राष्ट्रीय जीवनध्येय को ध्यान में रख कर हम सबको अपने व्यक्तिगत व सामूहिक व्रत व भूमिका का निर्धारण करना होता है|

मैं अपने गुजरात के अनुभव से दावे के साथ कह सकता हूँ यह सम्भव है, इन्ही सब परिस्थितयों के बीच सम्भव है | गुजरात को स्वामी जी का खुब आशीर्वाद मिला है, परिव्राजक के रूप में १८९० से १८९३ के कालखंड में स्वामीजी ने अधिक्तम समय गुजरात में व्यतीत किया | गुजरात स्वामी जी के संदेश के साथ नित नई ऊंचाईयों को छु रहा है| आइये! स्वामी जी की जयंती के अवसर पर हम सब संकल्प ले कि हर व्यक्ति, संस्था, संगठन, ग्राम पंचायत, शासन, गैर शासकीय संगठन, युवा दल सब भारत को जगद्गुरु बनाने में अपनी भूमिका को तय करे और उसे साकार कराने में अपने पूर्ण प्रयास लगा दे| भारत के वीर युवा आदर्श कि जयंती पर उन्हें यही हमारी भेट समर्पित हो! 

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इटली और भारत: इंडो-मेडिटेरेनियन के लिए एक स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप
May 20, 2026

भारत और इटली के बीच संबंध अब एक निर्णायक दौर में पहुंच चुके हैं। हाल के वर्षों में दोनों देशों के रिश्तों में अभूतपूर्व तेजी आई है और यह सौहार्दपूर्ण मित्रता से आगे बढ़कर स्वतंत्रता, लोकतंत्र और भविष्य को लेकर साझा विजन पर आधारित एक सच्ची स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप में बदल गए हैं।

ऐसे समय में जब अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था गहरे बदलाव के दौर से गुजर रही है, इटली और भारत की साझेदारी उच्च राजनीतिक और संस्थागत स्तर पर नियमित संवाद से आगे बढ़ रही है और अब एक नए तथा व्यापक आयाम हासिल कर रही है, जो हमारी आर्थिक गतिशीलता, सामाजिक रचनात्मकता और हजारों साल पुरानी सभ्यतागत समझ को साथ जोड़ती है। हमारा सहयोग इस साझा समझ को दर्शाता है कि 21वीं सदी में समृद्धि और सुरक्षा इस बात से तय होगी कि देश इनोवेशन, एनर्जी ट्रांजिशन के प्रबंधन और स्ट्रैटेजिक संप्रभुता को मजबूत करने में कितने सक्षम हैं। इसी उद्देश्य से हमने अपने द्विपक्षीय संबंधों को और गहरा तथा डाइवर्स बनाने का संकल्प लिया है, ताकि नए लक्ष्यों को हासिल किया जा सके और एक-दूसरे की पूरक क्षमताओं का बेहतर उपयोग हो सके। हमारा लक्ष्य इटली की डिजाइन क्षमता, मैन्युफैक्चरिंग एक्सीलेंस और वर्ल्ड-क्लास सुपरकंप्यूटर्स, जो उसे एक इंडस्ट्रियल पावरहाउस बनाते हैं, को भारत की तेज आर्थिक ग्रोथ, इंजीनियरिंग टैलेंट, बड़े पैमाने की क्षमता, इनोवेशन और 100 से ज्यादा यूनिकॉर्न तथा 2 लाख स्टार्ट-अप वाले एंटरप्रेन्योरशिप इकोसिस्टम के साथ जोड़कर मजबूत तालमेल बनाना है। यह केवल साधारण इंटीग्रेशन नहीं, बल्कि ऐसा साझा वैल्यू क्रिएशन है जिसमें दोनों देशों की औद्योगिक ताकतें एक-दूसरे को और मजबूत बनाती हैं।

यूरोपियन यूनियन और भारत के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट दोनों दिशाओं में ट्रेड और इनवेस्टमेंट बढ़ाने का रास्ता खोलता है। हमारा लक्ष्य 2029 तक इटली और भारत के बीच 20 बिलियन यूरो के ट्रेड टारगेट को हासिल करना और उससे आगे निकलना है। इसके लिए डिफेंस और एयरोस्पेस, क्लीन टेक्नोलॉजी, मशीनरी, ऑटोमोटिव कंपोनेंट्स, केमिकल्स, फार्मास्युटिकल्स, टेक्सटाइल, एग्री-फूड, टूरिज्म समेत कई सेक्टर्स पर फोकस किया जाएगा।

“मेड इन इटली” हमेशा से पूरी वर्ल्ड में एक्सीलेंस का प्रतीक रहा है और आज इसकी स्वाभाविक साझेदारी “मेक इन इंडिया” पहल के हाई-क्वालिटी लक्ष्यों के साथ बन रही है। इस संदर्भ में भारत के लिए प्रोडक्शन को लेकर इटली की कंपनियों की बढ़ती रुचि और इटली में भारतीय इंडस्ट्री की बढ़ती मौजूदगी, जिनकी संख्या अब दोनों तरफ से 1,000 से ज्यादा हो चुकी है, एक सकारात्मक संकेत है जो हमारी सप्लाई चेन के इंटीग्रेशन को और मजबूत करेगा।

टेक्नोलॉजिकल इनोवेशन हमारी साझेदारी के केंद्र में है। आने वाले दशकों को ऐसी टेक्नोलॉजिकल क्रांति आकार देगी जिसका दायरा बेहद व्यापक होगा। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम कंप्यूटिंग, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, क्रिटिकल मिनरल्स और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे सेक्टर्स में तेज प्रगति शामिल है। भारत का डायनामिक इनोवेशन इकोसिस्टम, हाई स्किल्ड प्रोफेशनल टैलेंट पूल और इटली की एडवांस्ड इंडस्ट्रियल क्षमताएं इन सेक्टर्स में हमारे सहयोग को स्वाभाविक और रणनीतिक बनाती हैं। हमारी यूनिवर्सिटीज और रिसर्च सेंटर्स के बीच बढ़ती साझेदारी भी इसे मजबूत आधार देगी।

भारत का डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर पहले ही बड़ी संख्या में देशों, खासकर ग्लोबल साउथ में, अपनी मजबूत पहचान बना चुका है। खासतौर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब हमारे समाज और ग्लोबल अर्थव्यवस्था पर गहरा असर डाल रही है। इटली और भारत लंबे समय से यह सुनिश्चित करने के लिए साथ काम कर रहे हैं कि AI डेवलपमेंट जिम्मेदारीपूर्ण और मानव-केंद्रित हो। इसी नजरिये से भारत और इटली AI को समावेशी विकास के एक मजबूत माध्यम के रूप में भी देखते हैं, खासकर ग्लोबल साउथ के लिए, जहां डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और सुलभ बहुभाषी टेक्नोलॉजी विभाजन बढ़ाने के बजाय उसे कम कर सकती हैं। टेक्नोलॉजी के केंद्र में इंसान को रखने वाले भारत के MANAV विजन और मानवीय परंपरा पर आधारित मानव-केंद्रित “एल्गोर-एथिक्स” को बढ़ावा देने में इटली की अग्रणी भूमिका के आधार पर हमारी साझेदारी यह सुनिश्चित करना चाहती है कि AI सामाजिक सशक्तिकरण का माध्यम बने। हमारा दृष्टिकोण भारत की डिजिटल क्षमता को इटली की एथिकल और इंडस्ट्रियल विशेषज्ञता के साथ जोड़ता है, ताकि टेक्नोलॉजी मानव गरिमा की सेवा करे। सुरक्षित डिजिटल सहयोग, कैपेसिटी बिल्डिंग और मजबूत साइबर इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी बेस्ट प्रैक्टिसेज को साझा करते हुए हमारा लक्ष्य ऐसा स्वतंत्र, भरोसेमंद और समान अवसर वाला डिजिटल स्पेस तैयार करना है, जिसमें हर देश AI को आकार देने और उससे लाभ उठाने में सक्षम हो। यही दृष्टिकोण इटली की G7 प्रेसीडेंसी और नई दिल्ली में आयोजित AI इम्पैक्ट समिट 2026 के निष्कर्षों के केंद्र में है। AI को इंसानों द्वारा इंसानों के लिए बनाए गए एक माध्यम के रूप में देखने का मतलब यह स्पष्ट करना है कि टेक्नोलॉजी न तो लोगों की जगह ले सकती है, न उनके मौलिक अधिकारों को कमजोर कर सकती है और न ही इसका इस्तेमाल जनमत को प्रभावित करने या लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को बदलने के लिए होना चाहिए। तेजी से जुड़ती दुनिया में स्वतंत्रता और मानव गरिमा की रक्षा को लेकर हमारा दृष्टिकोण इसी चुनौती पर आधारित है।

हमारा सहयोग स्पेस सेक्टर तक भी फैला हुआ है। स्पेस एक्सप्लोरेशन और सैटेलाइट टेक्नोलॉजी में भारत की प्रभावशाली प्रगति, साथ ही एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में इटली की उत्कृष्ट क्षमता, संयुक्त पहलों और अगली पीढ़ी की टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट के लिए बड़े अवसर प्रदान करती है।

सिक्योरिटी और स्टेबिलिटी देशों की समृद्धि सुनिश्चित करने के लिए बेहद जरूरी बनी हुई हैं। इटली और भारत डिफेंस, सिक्योरिटी और स्ट्रैटेजिक टेक्नोलॉजी जैसे सेक्टर्स में अपने सहयोग को और मजबूत करना चाहते हैं। हमारा सहयोग महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ आतंकवाद, अंतरराष्ट्रीय आपराधिक नेटवर्क, ड्रग तस्करी, साइबर क्राइम और मानव तस्करी जैसे खतरों के खिलाफ मजबूती बढ़ाने में मदद करेगा।

एनर्जी हमारी साझेदारी का एक और प्रमुख स्तंभ है। डाइवर्सिफाइड एनर्जी सोर्सेज की ओर बढ़ रहे ग्लोबल ट्रांजिशन के लिए इनोवेशन, इनवेस्टमेंट और सहयोग की जरूरत है। भारत और इटली रिन्यूएबल एनर्जी से लेकर हाइड्रोजन टेक्नोलॉजी तक, और स्मार्ट ग्रिड से लेकर मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर तक कई क्षेत्रों में साथ काम कर रहे हैं। ग्रीन हाइड्रोजन एक्सपोर्ट हब बनने की भारत की पहल जहां अपार संभावनाएं प्रदान करती है, वहीं यह रिन्यूएबल इंफ्रास्ट्रक्चर में इटली की एडवांस्ड टेक्नोलॉजी और यूरोप के लिए एनर्जी गेटवे के रूप में उसकी रणनीतिक भूमिका के साथ पूरी तरह मेल खाती है। इस संदर्भ में भारत की अगुवाई वाली प्रमुख पहलों, इंटरनेशनल सोलर अलायंस (ISA), कोएलिशन फॉर डिजास्टर रेजिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर (CDRI) और ग्लोबल बायोफ्यूल्स अलायंस (GBA) में अन्य देशों के साथ हमारा सहयोग भी महत्वपूर्ण है।

फिजिकल, डिजिटल और मानवीय कनेक्टिविटी वह कड़ी है जो हमें एक साथ जोड़ती है। भारत और इटली दोनों ग्लोबल अर्थव्यवस्था के दो अहम केंद्रों, इंडो-पैसिफिक और मेडिटेरेनियन, के मध्य स्थित हैं। इन क्षेत्रों को अलग-अलग दायरों के रूप में नहीं, बल्कि तेजी से एक-दूसरे से जुड़ते हुए क्षेत्रों के रूप में देखा जाना चाहिए।

दरअसल, हम उस उभरते हुए “इंडो-मेडिटेरेनियन” को देख रहे हैं, जो ट्रेड, टेक्नोलॉजी, एनर्जी, डेटा और विचारों का एक महत्वपूर्ण कॉरिडोर बनता जा रहा है, जो हिंद महासागर को यूरोप से जोड़ता है। इसी आपस में जुड़े हुए क्षेत्र में हमारे संबंध स्वाभाविक रूप से एक विशेष स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप में विकसित हो रहे हैं, जो दो महाद्वीपों को जोड़ते हुए नई ग्लोबल डायनामिक्स को आकार दे रही है।

इसी संदर्भ में इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर हमारे क्षेत्रों को मॉडर्न ट्रांसपोर्ट और इंफ्रास्ट्रक्चर, डिजिटल नेटवर्क, एनर्जी सिस्टम और मजबूत सप्लाई चेन के जरिए जोड़ने की एक दूरदर्शी पहल है। भारत और इटली इस विजन को हकीकत में बदलने के लिए अन्य साझेदार देशों के साथ मिलकर काम करने के लिए भी प्रतिबद्ध हैं।

हम अपनी साझा चुनौतियों का समाधान दोनों देशों के बीच गहरी साझेदारी और दीर्घकालिक सांस्कृतिक संबंधों के आधार पर कर सकते हैं। भारतीय संस्कृति में “धर्म” की अवधारणा उस जिम्मेदारी की भावना को दर्शाती है, जो हमारे कार्यों का आधार बननी चाहिए, जबकि “वसुधैव कुटुम्बकम”, यानी “पूरी दुनिया एक परिवार है”, का सिद्धांत आज के आपस में जुड़े डिजिटल युग में गहराई से प्रतिध्वनित होता है। ऐसे मूल्य इटली की पुनर्जागरण काल से जुड़ी मानवतावादी परंपरा में भी स्वाभाविक रूप से दिखाई देते हैं, जो हर व्यक्ति की गरिमा और समाजों तथा लोगों को जोड़ने में संस्कृति की शक्ति को महत्व देती है।

इसलिए हमारा साझा विजन लोगों को केंद्र में रखकर मजबूत और भविष्योन्मुखी भारत-इटली साझेदारी की नींव रखना है।

(लेखक: भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी)