गुजरात में शिक्षा में सुधारों की सफल गाथा

हर कोई जानता है कि गुजरात बहुत उन्नतिशील तथा उच्च औद्योगिक प्रांत है। किंतु बहुत कम लोग जानते हैं कि गुजरात पन्द्रह प्रतिशत जनजातीय जनसंख्या रखता है। जनजातीय समाज शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में पिछड़ा हुआ है। गुजरात सरकार ने उनके लिए भी कई कल्याणकारी योजनाएं शुरू की हैं। शिक्षा के क्षेत्र में और साथ ही साथ नारी शिक्षा के क्षेत्र में गुजरात देश के अन्य राज्यों की अपेक्षा अच्छी स्थिति में है। भाग्यवश नई सरकार जो 2001 में सत्ता में आई उसने जल्दी ही इस दशक को मापा और इसमें नारी शिक्षा के संबंध में तथा प्राथमिक स्कूल की शिक्षा की गुणवत्ता के संबंध में कई उल्लेखनीय काम किए। इस विषय पर दो साधन व्यवहार में लाए गए। एक योजना थी जिसे कन्या केलवणी प्रवेशोत्सव और दूसरी गुणोत्सव प्रोग्राम जो विद्यालयों तथा शिक्षकों की गुणवत्ता को परखती है।

करीब 1.8 लाख नई कक्षाएं प्राथमिक विद्यालयों में बनाई गईं। पानी पीने की व्यवस्था तथा कक्षाओं के लिए अलग शौचगृह बनाए गए तथा बिजली और कम्प्यूटर सब विद्यालयों को दिए गए। विद्या लक्ष्मी बोर्ड योजना बनाई गई ताकि लोग अपने बच्चों का विद्यालय में नाम लिखाएं और बच्चे विद्यालय आएं। पिछले 10 वर्षों में 1 लाख से ज्यादा शिक्षक प्राथमिक विद्यालयों में नियुक्त किए गए जिनमें पारदर्शिता थी। इससे पहले कि हम इन नीतियों को समझ सकें, हमें उन नतीजों पर ध्यान देना चाहिए जो हमने देखे तथा जिनको महसूस किया- कन्या केलवणी प्रवेशोत्सव यह कार्यक्रम उन तथ्यों में से सामने आया कि सामाजिक स्थिति ही उस ग्रामीण जनसंख्या के लिए उत्तरदायी है जो अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेजते।

प्रवेशोत्सव एक विशाल वार्षिक जागरण अभियान है जिसमें जून में हर वर्ष दाखिले के समय पूरा सरकारी तंत्र प्रत्येक प्राथमिक विद्यालय और गांव में जाता है। यह कार्यक्रम 2003 में आरंभ हुआ था और आज तक चल रहा है। लोगों को कन्या शिक्षा का महत्व बताना। पहली कक्षा में 100 प्रतिशत दाखिला पूरा करना। स्कूल छोड़कर जाने वाले विद्यार्थियों में कमी करना, खास तौर से कन्याओं को इस बारे में बताना कि स्कूल में रहने का कितना महत्व है। नौकरशाही को शिक्षा की समस्याओं की प्रथम जानकारी देना, जो गांवों और शहरों के क्षेत्रों में पनपती हैं। गांव की शिक्षा की गुणवत्ता, दिन का खाना, शिक्षकों की उदासीनता, शिक्षा की संरचना की प्रथम सूचना को जानना। शिक्षकों को चेतना देना कि जो बड़े अधिकारी हर साल स्कूल में आते हैं, और इस तरह उन्हें यह अवसर प्रदान करते हैं, जो वे दिखा सकते हैं, कोई अच्छा काम जो उन्होंने किया हो। शिक्षा का मूल्यांकन खासतौर से कन्याओं की शिक्षा का मूल्यांकन, जबकि 40 प्रतिशत से ज्यादा पिछले दशक के ग्राफ यह दिखाते हैं कि कन्याओं ने शिक्षा के क्षेत्र में काफी कार्य किया है।

गुणोत्सव कार्यक्रम गुणोत्सव ऐसा कार्यक्रम है जिसमें हर प्राथमिक विद्यालय का वार्षिक मूल्यांकन और साथ ही शिक्षा का भी मूल्यांकन होता है। इसमें जो तरीका अपनाया जाता है वह अद्भुत है। यह स्कूल द्वारा स्वयं गुण ग्राहिता जो विद्यार्थी की परीक्षा के आधार पर जो शिक्षक लेते हैं और जो विभागीय सरकारी कार्यालयों द्वारा भी निर्धारित होती है। गुणोत्सव के उद्देश्य सरकारी प्राथमिक जिलों में शिक्षा की गुणवत्ता पर दृष्टि डालना। शिक्षकों, शैक्षणिक अधिकारियों और समाज को शिक्षा की आवश्यकता के लिए उद्बोधन करता है।

हर वर्ष विद्यार्थियों को सीखने के धरातल को नापना, यदि कोई उन्नति हो रही हो। शिक्षकों का उत्तरदायित्व निर्धारण कर स्कूल जहां वे पढ़ा रहे हैं या व्यक्तिगत रूप से हैं, स्कूल का स्तर निर्धारित करना। उन शिक्षकों को गुणोत्सव के अवसर पर अंक प्राप्त हुए हैं, उन्हें इनाम देना या दंड देना। गुणोत्सव का परिणाम यह कार्यक्रम 2009 में पहली बार किया गया और फिर 2010 और 2011 में इसकी पूर्णाहुति की गई। इन दो सालों में पढ़ाने का स्तर देखने लायक रहा। 2010 में जो स्कूल 10 में से 6 नंबर लाए वे 26.22 से 43.19 प्रतिशत तक बढ़ गए। प्रतिनिधि

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